Sunday, May 29, 2011

पृथ्वी गोल है तो नीचे की साइड के लोग गिरते क्यों नहीं?


अगर पृथ्वी गोल है तो नीचे की साइड के लोग गिरते क्यों नहीं?
पंकज गुप्ता,

धरती गेंद की तरह गोल तो होती है, साथ ही उसमें गुरुत्व शक्ति होती है। यह गुरुत्व शक्ति सारी चीजों को धरती के केन्द्र की ओर खींचती है। इसलिए सारी चीजें धरती पर रहती हैं। आसमान, हवा, पानी, सागर, झीलें, इंसान और जानवर सब धरती के गुरुत्वाकर्षण के कारण धरती पर रहते हैं। इस बात को आएज़क न्यूटन ने धरती पर गिरते सेब के उदाहरण से समझाया था। पर यह शक्ति क्या होती है, कहाँ से आती है और क्या यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड में है? इसे न्यूटन के करीब दो सौ साल बाद अल्बर्ट आइंस्टीन ने साफ किया कि अंतरिक्ष खाली नहीं है। गुरुत्वाकर्णण शक्ति ब्रह्मांड में मौजूद नक्षत्रों, ग्रहों तथा तमाम तरह के पिंडों में है।    

चेकोस्लोवाकिया के बारे में कुछ बताएं
नोरत मल

चेको-स्लोवाकिया मध्य यूरोप में बीसवीं सदी के शुरू में बना एक स्वतंत्र सम्प्रभु देश था। इसमें मुख्य रूप से चेक और स्लाव राष्ट्रीयताओं या कौमों के लोग रहते थे। 28 अक्टूबर 1918 को इस देश का ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य के टूटने के बाद जन्म हुआ था। इसमें मोराविया, बोहेमिया और साइलेशिया के चेक और औद्योगिक रूप से पिछड़े स्लोवाकिया तथा करपाथिया के गरीब इलाके भी थे। इस देश में चेक और स्लावों के अलावा 22 फीसदी जर्मन और 5 फीसदी हंगेरियन और कुछ पोलिश लोग भी रहते थे। इस लिहाज से यह बहुजातीय देश था। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान यह देश फिर समाप्त हो गया। इसके बड़े हिस्से पर जर्मनी ने कब्ज़ा कर लिया। कुछ हिस्से पर पोलैंड का और कुछ पर हंगरी का कब्ज़ा हो गया। पर चेकोस्लोवाकिया की एक निर्वासित सरकार विदेशों में कायम रही। विश्व युद्ध खत्म होने के बाद यह देश फिर से स्थापित हुआ। इसके बाद हुए चुनाव में यहाँ कम्युनिस्ट पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। हालात ऐसे बने कि 1948 में यहाँ पूरी तरह कम्युनिस्टों की एक-दलीय व्यवस्था लागू हो गई।

साम्यवादी व्यवस्था लागू होने के बावज़ूद चेकोस्लोवाकिया में उदार विचारों का असर भी था। वहाँ के नए नेता दुबचेक की नई नीतियाँ कम्युनिस्ट जगत के नेता सोवियत संघ को पसंद नहीं थीं। इसलिए 1968 में यहाँ वॉरसा पैक्ट की सेना ने प्रवेश किया। कम्युनिज्म से छुटकारा लेने वाले देशों में चेकोस्लोवाकिया शुरूआती देश था। 1989 में यहाँ की कम्युनिस्ट सरकार का पतन हो गया। उधर स्लोवाकिया में भी राष्ट्रीय आंदोलन शुरू हो गया था। अंततः जनवरी 1993 में चेक गणराज्य और स्लोवाकिया अलग-अलग देश बन गए।

रणथम्भौर का किला किसने बनवाया?
श्रवण सिंह,

रणथम्भौर के निर्माण का समय एवं निर्माता के बारे में निश्चित जानकारी नहीं है। सामान्यतः यह माना जाता है कि इस क़िले का निर्माण आठवीं शताब्दी में हुआ था। यह भी माना जाता है कि चौहान सम्राट सपालदक्ष ने 944 में इसका निर्माण कराया। हाँ इतना ज़रूर लगता है कि इसका निर्माण एक सदी से ज्यादा समय तक चलता रहा। ग्यारहवीं-बारहवीं शताब्दी तक इस क़िले की प्रसिद्धि इतनी फैल चुकी थी कि तत्कालीन समय के विभिन्न ऐतिहासिक महत्त्व के ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है। इतिहास में सर्वप्रथम इस क़िले पर चौहानों के आधिपत्य का उल्लेख मिलता है। यह सम्भव है, कि चौहान शासक रंतिदेव ने इसका निर्माण करवाया हो।


राजस्थान पत्रिका में मेरे कॉलम नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Monday, May 23, 2011

क्या चांद पर दिन-रात होते हैं?


वहाँ भी दिन और रात होते हैं। पर वहाँ का एक दिन 24 घंटे का नहीं होता। चाँद अपनी धुरी पर घूमने में जो समय लगाता है वह धरती के 27.3 दिन के बराबर होता है। हमारा चांद-माह है उसका एक दिन। ठीक इतना ही वक्त वह धरती के चारों ओर घूमने में लगाता है। इसकी वजह से हम चाँद का एक ही हिस्सा देख पाते हैं। चाँद का तकरीबन 59 फीसद हिस्सा हमारी नज़रों से गुजरता है। उसका 41 फीसद हिस्सा धरती से कभी दिखाई नहीं पड़ता। 

चाँद पर वायुमंडल नहीं है इसलिए वहाँ रोशनी फैलती नहीं। जिस हिस्से पर सूरज की किरणें सीधी पड़तीं हैं वहीं दिखाई पड़ता है। बाकी हिस्से में धुप्प अंधेरा होता है। वायुमंडल न होने की वजह से वहाँ का आसमान भी काला होता है। हवा न होने से वहाँ जिस चीज पर धूप होती है उसका टेम्परेचर 102 डिग्री तक हो सकता है और उससे दो इंच दूर अंधेरी चीज़ का टेम्परेचर माइनस 150 डिग्री हो सकता है।


एफएम गोल्ड के कार्यक्रम बारिश सवालों की में शामिल

Sunday, May 22, 2011

सर्कस कहाँ शुरू हुआ

दुनिया की तकरीबन सभी पुरानी सभ्यताओं में शारीरिक व्यायाम और पशुओं के साथ खेलने का चलन रहा है। खासतौर से पुराने यूनान और रोम में खेलों के बड़े स्टेडियमों का चलन था। पर हम जिस आधुनिक सर्कस का ज़िक्र कर रहे हैं उसे शुरू करने का श्रेय लंदन के फिलिप एश्ले को दिया जाना चाहिए। उन्हें घुड़सवारी में महारत हासिल थी। उन्होंने 9 जनवरी 1768 को लंदन के एक रिंग में घुड़सवारी के करतब दिखाए। पर उन्होंने इसे सर्कस नाम नहीं दिया। उसे एश्लेज़ एम्फीथिएटर ऑफ इक्वेस्ट्रियन आर्ट्स कहा जाता था। सर्कस नाम दिया इस कारोबार में उनके प्रतिद्वंदी जॉन ह्यूजेस ने जिन्होंने पास में ही रॉयल सर्कस शुरू किया। एश्ले ने घुड़सवारी के करतबों के बीच के समय में दर्शकों को बाँधे रखने के लिए जोकरों, टाइटरोप पर चलने वालों, बाजीगरों और कुत्तों के खेलों की शुरूआत भी की।


एफएम गोल्ड के कार्यक्रम बारिश सवालों की में प्रसारित

इंग्लैंड और युनाइटेड किंगडम क्या एक हैं?


इंग्लैंड और युनाइटेड किंगडम क्या एक हैं?
श्याम कुमावतजयपुर
kumawatshyam1@gmail.com


युनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड नॉर्दर्न आयरलैंड को युनाइटेड किंगडम, यूके और ब्रिटेन भी कहते हैं। यह एक स्वतंत्र सम्प्रभु देश है, जिसमें ऐतिहासिक कालक्रम में चार देश शामिल हो गए। इनके नाम हैं इंग्लैंड, नॉर्दर्न आयरलैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स। यूके में संसदीय राजतंत्र है, जिसकी एक संसद है। इसकी राजधानी तंदन है। इस देश का यह नाम सन 1927 से प्रचलन में है। इसके पहले 1801 में युनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड आयरलैंड बना था। पर 1922 तक आयरलैंड का काफी हिस्सा इससे अलग हो चुका था। इसके पहले सन 1707 में किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन बना था जिसमें किंगडम ऑफ इंग्लैंड तथा किंगडम ऑफ स्कॉटलैंड का विलय हुआ था। आपने देखा होगा कि कॉमनवैल्थ गेम्स में यूके के चारों देशों की टीमों ने हिस्सा लिया था। मोटे तौर पर यह एक सम्प्रभु देश है। हाल के वर्षों तक उत्तरी आयरलैंड की स्वायत्तता को लेकर हिंसक आंदोलन भी चलता रहा। उत्तरी आयरलैंड के नेशनलिस्ट्स, जो रोमन कैथलिक थे इसे आयरलैंड का हिस्सा बनाना चाहते थे और यूनियनिस्ट्स जो प्रोटेस्टेंट्स थे इसे यूके के साथ रखना चाहते थे। फिलहाल 1998 के गुडफ्रायडे समझौते के बाद उत्तरी आयरलैंड में सशस्त्र संग्राम खत्म हो गया।  


बैक्टीरिया प्लांट है या प्राणी?
नीरू बंगाली,

पहले बैक्टीरिया को पौधा माना जाता था परंतु अब उनका वर्गीकरण प्रोकैरियोट्स के रुप में होता है। पारंपरिक रूप से बैक्टीरिया शब्द का प्रयोग सभी सजीवों के लिए होता था, परंतु यह वैज्ञानिक वर्गीकरण 1990 में हुई एक खोज के बाद बदल गया जिसमें पता चला कि प्रोकैरियोटिक सजीव वास्तव में दो भिन्न समूह के जीवों से बने है जिनका क्रम विकास एक ही पूर्वज से हुआ। इन दो प्रकार के जीवों को बैक्टीरिया एवं आर्किया कहा जाता है

बैक्टीरिया एककोशिकीय जीव है। इसका आकार कुछ मिलीमीटर तक ही होता है। इनकी आकृति गोल या मुक्त-चक्राकार से लेकर छड़ आदि के आकार की हो सकती है। ये प्रोकैरियोटिक, कोशिका भित्तियुक्त, एककोशकीय सरल जीव हैं जो प्रायः सर्वत्र पाए जाते है। ये पृथ्वी पर मिट्टी में, अम्लीय गर्म जल-धाराओं में, नाभिकीय पदार्थों में, पानी में,भू-पपड़ी में, यहां तक की कार्बनिक पदार्थों में तथा पौधों एवं जन्तुओं के शरीर के भीतर भी पाये जाते हैं। साधारणतः एक ग्राम मिट्टी में 4 करोड़ जीवाणु कोष तथा एक मिलीलीटर जल में 10 लाख जीवाणु पाएं जाते हैं। ये संसार के बायोमास का एक बहुत बड़ा भाग है। ये कई तत्वों के चक्र में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, जैसे कि वायुमंडलीय नाइट्रोजन के स्थिरीकरण में। बहुत सारे वंश के बैक्टीरिया का श्रेणी विभाजन भी नहीं हुआ है तथापि लगभग आधे जातियों को किसी न किसी प्रयोगशाला में उगाया जा चुका है। इनका अध्ययन बैक्टिरियोलोजी के अन्तर्गत किया जाता है जो कि सूक्ष्मजैविकी की ही एक शाखा है।
मानव शरीर में जितनी मानव कोशिकाएं है, उससे  लगभग 10 गुणा अधिक जीवाणु कोष है। इनमें से अधिकांश जीवाणु त्वचा तथा आहारनाल में पाएं जाते हैं। हानिकारक बैक्टीरिया इम्यून तंत्र के रक्षक प्रभाव के कारण शरीर को नुकसान नही पहुंचा पाते है। कुछ बैक्टीरिया लाभदायक भी होते हैं।


मनुष्य को हिचकियाँ क्यों आती है और पानी पीने पर बंद क्यों हो जाती है ?
मनीष सैनी

हिचकी का कारण होता है अचानक डायफ्राम में ऐंठन आना। फेफड़ों में अचानक हवा भरने से  कंठच्छद(एपिग्लॉटिस) बंद हो जाता है। इससे हिच या हिक् की आवाज आती है। इसीलिए इसें अंग्रेजी में हिक-अप कहते हैं। हिचकी जब आती है तब कई बार आती है। हिचकी एक शारीरिक दोष के कारण भी आती है। उसे सिंग्युलटस कहते हैं। हिचकी आने की कई वजहें हैं। जल्दी-जल्दी खाना, बहुत गर्म या तीखा खाना, हँसना, खाँसना भी हिचकी का कारण बनता है। शराब पीने और धूम्रपान से भी आती है। इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस भी हिचकियाँ पैदा करता है। श्वसन पर रिसर्च करने वाले एक ग्रुप का कहना है कि मानव शरीर के विकास का एक लक्षण हिचकी है। पानी के अंदर रहने वाला मेढक पानी और हवा को उसी तरह घुटकता है जैसे हम हिचकी लेते हैं। अक्सर समय से पहले जन्मे शिशु जन्म लेते ही कुछ समय तक हिचकियाँ लेते हैं। हिचकियाँ काफी छोटे समय तक रहतीं हैं। पानी पीने शरीर की सामान्य क्रिया जल्द वापस आ जाती है।

गैस जलने से पहले भुप्प या धुप्प जैसी आवाज क्यों करती है?
ओम कुणाल निगम,

आमतौर पर हम गैस जलाते वक्त दो काम करते हैं। एक हाथ से गैस का स्विच खोलते हैं और दूसरे हाथ से लाइटर से चिंगारी पैदा करते हैं। दोनों क्रियाओं के बीच समय का अंतर होता है। पहले लाइटर जलने पर आग नहीं लगती। आमतौर पर पहले गैस निकलती है, फिर चिंगारी बनती है। बर्नर में पहले से गैस जमा होने पर वह हत्के से धमाके के साथ जलती है। 


राजस्थान पत्रिका के कॉलम नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित