Friday, October 28, 2011

काँटे-चम्मच से खाने की शुरूआत कब और सबसे पहले कहाँ हुई थी?


काँटे-चम्मच से खाने की शुरूआत कब और सबसे पहले कहाँ हुई थी?
-मीरा
काँटे और चाकू का इस्तेमाल हथियार या शिकार के लिए पहले हुआ होगा। इंसान ने शुरू में खाना अपने हाथ से ही शुरू किया था। यों पुराने यूनान में फॉर्क खाने की मेज पर आ गया था। मांसाहारी समाजों में गोश्त को तश्तरी पर रोके रहने और उसे चाकू से काटने के लिए इनकी मदद ली जाती थी। शुरूआती फॉर्क दो काँटे के होते थे। त्रिशूल के इस्तेमाल को देखते हुए ये तीन काँटे के हो गए। इनके साथ चम्मच भी होती है जो पत्थर युग में ईज़ाद कर ली गई थी। इंसान ने सीपियों को शुरू में चम्मच की तरह इस्तेमाल किया। बाद में लकड़ी से चम्मचें बनाईं। खाने को मुँह तक ले जाने के लिए चीनियों ने चॉपस्टिक का इस्तेमाल किया।

चाँद सिर्फ पन्द्रह दिन ही क्यों नज़र आता है?

ऐसा कहना गलत है कि चाँद सिर्फ 15 दिन नज़र आता है। चाँद महीने में एक दिन अपने पूरे आकार में और एक दिन पूरी तरह बेनज़र होता है। पूर्णिमा के बाद चन्द्रमा का आकार छोटा होता जाता है और अमावस्या के रोज़ वह दिखाई नहीं पड़ता। उसके बाद वह फिर से दिखाई पड़ना शुरू होता है और अगली पूर्णिमा के रोज़ पूरा दिखाई पड़ता है। औसतन चन्द्रमा का महीना 29 दिन, 12 घंटे और 44 मिनट का होता है। पर चन्द्रमा के सभी महीने एक बराबर नहीं होते।

Thursday, October 27, 2011

आतिशबाजी का आविष्कार किस देश में हुआ?


आतिशबाजी का आविष्कार किस देश में हुआ? 

आतिशबाजी का विकास सातवीं सदी के चीन में हुआ। चीन में पायरोटेक्नीक या आतिशबाजी को कला की शक्ल दी गई। दरअसल बारूद के आविष्कार के बाद उसका इस्तेमाल युद्धों में ही होता था। पर चीनी कारीगरों ने उसे मनोरंजक बना दिया। अग्निवाण और रॉकेट चीन में खोजे गए। आतिशबाजी का अपना रसायन शास्त्र है। अलग-अलग रंगों की रोशनी और चमक पैदा करने के लिए जिन पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है उसे आधुनिक विज्ञान ने और रोचक बना दिया है। पायरोटेक्नॉलजी और पायरोसाइंस अपने आप में विषय हैं। भारत में हम दीपावली या खास मौकों पर आतिशबाजी देखते हैं। इनमें चर्खी, अनार, लड़ी, बम, रॉकेट, सीटी, सुर्री, मेहताब और फुलझड़ी जैसी चीजें होती हैं। पश्चिमी देशों में आतिशबाजी का बड़े स्तर पर प्रदर्शन होता है। इसी तरह दुनिया में आतिशबाजी के समारोह होते हैं। सन 2005 से वर्ल्ड पायरो ओलिम्पिक होने लगे हैं, जिनमें दुनिया भर के आतिशबाज अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। ये पायरो ओलिम्पिक मनीला, फिलीपाइंस में होते हैं। इसी तरह मांट्रियल, कनाडा का वार्षिक फायरवर्क्स फेस्टिवल है।

Sunday, October 23, 2011

साबूदाना क्या चीज़ है?


साबुतदाना वैज है या नॉन वैज? 


–राघवेन्द्र 
इसे साबूदाना (सैगो पर्ल्स) कहते  हैं। यह पूरी तरह शाकाहार है। साबूदाना छोटे-छोटे मोती की तरह सफ़ेद और गोल होता है। यह सैगो पाम नामक पेड़ के तने के गूदे से निर्मित स्टार्च है। सैगो, ताड़ की तरह का एक पौधा होता है।  मलय द्वीपसमूह के न्यूगिनी क्षेत्र में यह मुख्य भोजन है और आटे के रूप में भी मिलता है। भारत में साबूदाने का उत्पादन सबसे पहले तमिलनाडु के सेलम में हुआ था। इसमें टैपियोका की जड़ों को कुचल कर उसके तरल  को छानकर उबालते और गाढ़ा करते  हैं। फिर इस लेई जैसे गाढ़े पदार्थ को छन्ने से छानकर उसकी बूँदी की तरह छोटी छोटी गोलियां बनाकर सेंक लेते हैं। साबूदाना में कार्बोहाइड्रेट की प्रमुखता होती है और इसमें कुछ मात्रा में कैल्शियम व विटामिन सी भी होता है। पकने के बाद यह हल्का पारदर्शी, नर्म और स्पंजी हो जाता है। भारत में इससे पापड़, खीर और खिचड़ी बनाते हैं। सूप और अन्य चीज़ों को गाढ़ा करने के लिए भी इसका उपयोग होता है। आरारोट भी इसी तरह का एक उत्पाद है । 


जीवन का क्या उद्देश्य है? -
सुरेन्द्र
मनुष्य जीवन का उद्देश्य है जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाना। अभी तक प्राप्त जानकारी के अनुसार सिर्फ इनसान की खासियत है कि वह न सिर्फ परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदलता है, बल्कि परिस्थितियों को अपने अनुसार ढाल लेता है। उसकी यह सामर्थ्य तमाम समस्याओं का समाधान देती है, वहीं अपने आप में समस्या भी है। हम इस रंगमंच में कठपुतली की तरह किसी दूसरे की डोरी पर नाचते रह सकते हैं। और चाहें तो अपने प्रयत्न से कुछ नया भी कर सकते हैं। कुछ लोग समूचे समाज की बेहतरी सोचते हैं और कुछ सिर्फ अपनी। अपने उद्देश्यों को परिभाषित करके अपनी भूमिका निभाकर चले जाना भी जीवन एक उद्देश्य है।

Friday, October 21, 2011

बॉलीवुड की फिल्में आमतौर पर शुक्रवार को ही रिलीज़ क्यों होती हैं?

बॉलीवुड की फिल्में आमतौर पर शुक्रवार को ही रिलीज़ क्यों होती हैं? 
सौरभ सुतार, जोधपुर, sourabh.rckstar@gmail.com


शुक्रवार को फिल्में रिलीज़ करने की परम्परा हॉलीवुड से आई है। अमेरिका में हफ्ते में काम करने का आखिरी दिन शुक्रवार होता है। उसी दिन साप्ताहिक वेतन मिलता है। दो दिन के वीकेंड का लुत्फ लेने का एक तरीका फिल्में देखना भी हैं। शनिवार और इतवार को अच्छी कमाई हो जाती है। यों भारत में हर जगह शुक्रवार को ही फिल्में रिलीज़ नहीं होतीं। मेरी जानकारी में लखनऊ में नई फिल्म गुरुवार को लगती है।

जुगनू के चमकने का क्या राज है?

जुगनू के चमकने का क्या राज है?


जुगनू एक प्रकार का उड़ने वाला कीड़ा है, जिसके पेट में रासायनिक क्रिया से रोशनी पैदा होती है। इसे बायोल्युमिनेसेंस कहते हैं। यह कोल्ड लाइट कही जाती है इसमें इंफ्रा रेड और अल्ट्रा वॉयलेट देनों फ्रीक्वेंसी नहीं होतीं। 

भारत के राष्ट्रपति को महामहिम क्यों कहा जाता है?
दिवाकर, गुड़गाँव

यह सम्मानसूचक शब्द है। राष्ट्रपति राज्यपालों, न्यायाधीशों तथा इसी प्रकार के दूसरे संवैधानिक पदों के साथ इसे लगाते हैं। अंग्रेजी में ऑनरेबल शब्द का इस्तेमाल इसके समानांतर होता है। अक्सर दूसरे देशों के राजदूतों के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है।

Saturday, October 1, 2011

रामैया वस्तावैया का क्या अर्थ है?


रामैया वस्तावैया का क्या अर्थ है?
सुनीता



इस गीत का वीडियो देखें


रामैया वस्तावैया का मतलब है राम या रामैया, क्या तुम आ रहे हो? तेलगू के इन शब्दों का इस्तेमाल शैलेन्द्र और शंकर-जयकिशन ने किया और श्री 420 के मार्फत एक यादगार गीत बना दिया। कहते हैं कि कभी शैलेन्द्र ने अपनी हैदराबाद यात्रा के दौरान ये पंक्तियाँ सुनी थीं। उन्हें ये भा गईं और मौका लगने पर इन्हें इस गीत में पिरो दिया।

एक साल में कितने नवरात्र होते हैं?
नीलम दुबे

साल में चार नवरात्र होते हैं। इनमें दो मुख्य नवरात्र- चैत्र शुक्ल और अश्विनी शुक्ल में आते हैं और दो गुप्त नवरात्र आषाढ़ शुक्ल और माघ शुक्ल में होते हैं। इनका क्रम इस तरह होता है- पहला मुख्य नवरात्र चैत्र शुक्ल में, फिर गुप्त नवरात्र। दूसरा मुख्य नवरात्र अश्विन शुक्ल में फिर गुप्त नवरात्र। इन्हें वासंतिक और शारदीय नवरात्रि भी कहते हैं।यह शक्ति की उपासना का पर्व है। नवरात्र प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ मनाया जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें, तो चारों नवरात्रों का संबंध ऋतु परिवर्तन से है।