Saturday, November 26, 2016

स्वप्न क्यों आते हैं?

स्वप्न क्यों आते हैं? क्या ये गहरी नींद के द्योतक हैं या किसी संदेश के वाहक हैं?


अभय सिंह, 874, अवधपुरी कॉलोनी, फेज-1, बेनीगंज, फैजाबाद-224001 (उ.प्र.)



सपनों का मनोविज्ञान काफी जटिल है, पर सामान्य धारणा है कि आपके सपने आपके अवचेतन से ही बनते हैं। जैसे जागते समय आप विचार करते हैं वैसे ही सोते समय आपके विचार आपको दिखाई पड़ते हैं। इनमें काल्पनिक चेहरों की रचना कोई मुश्किल काम नहीं है। दूसरी बात यह है कि आप रोज जितने चेहरे देखते हैं सबको याद नहीं रख पाते। सपनों में ऐसे चेहरे भी आ सकते हैं।



हमें ज्यादातर सपने याद नहीं रहते। जिस वक्त हम सपने देखते हैं उस वक्त की हमारी नींद को मनोचिकित्साविद आरईएम (रैपिड आई मूवमेंट) कहते हैं। उस वक्त मस्तिष्क की न्यूरोकेमिकल स्थिति ऐसी होती है कि हमें बहुत कुछ याद नहीं रहता। इसके अलावा दूसरे कारण भी हो सकते हैं। एक कारण यह बताया जाता है कि मस्तिष्क के उस हिस्से में जिसे सेरेब्रल कॉर्टेक्स कहते हैं एक हॉर्मोन नोरेपाइनफ्राइन की कमी होती है। यह हॉर्मोन याददाश्त के लिए ज़रूरी होता है। 



सपनों पर बात करने के साथ हमें नींद के बारे में भी सोचना चाहिए। हम दिनभर की मेहनत में जो ऊर्जा खर्च करते हैं, वह आराम करने से ठीक हो जाती है। पर सच यह है कि एक रात की नींद में हम करीब 50 केसीएल कैलरी बचाते हैं। एक रोटी के बराबर। वास्तविक जरूरत शरीर की नहीं मस्तिष्क की है। यदि हम लम्बे समय तक न सोएं तो हमारी सोचने-विचारने की शक्ति, वाणी और नजरों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। नींद से हमारा मानसिक विकास भी होता है। रात में सोने की प्रवृत्ति हमारे जैविक विकास का हिस्सा है। 



हम दिन के प्राणी हैं। अनेक जंगली जानवरों की तरह रात में शिकार करके नहीं खाते हैं। हमारी निगाहें दिन की रोशनी में बेहतर काम करती हैं। ऐसा करते हुए कई लाख साल बीत गए हैं। हमारे शरीर में एक घड़ी है जिसे जैविक घड़ी कहते हैं। उसने हमारे रूटीन दिन और रात के हिसाब से बनाए हैं। जब हम निरंतर रात की पालियों में काम करते हैं तो शरीर उसके हिसाब से काम करने लगता है, पर शुरूआती दिनों में दिक्कतें पेश आती हैं।



वैज्ञानिकों का मानना है कि नींद के कई चरण होते हैं। इन्हें कच्ची नींद और पक्की नींद कहा जाता है। पक्की नींद में दिमाग इतना शांत हो चुका होता है कि सपने नहीं देखता। कच्ची नींद में बहुत हलचल होती है। इस दौरान आंखों की पुतलियां भी हिलती रहती हैं। इसे ही रैपिड आई मूवमेंट या आरईएम कहा जाता है। यह अचेतन मन की स्थिति है। वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि जगे होने और आरईएम के बीच भी एक चरण होता है। इसे चेतन और अवचेतन के बीच की स्थिति कहते हैं। इसमें व्यक्ति को पता होता है कि वह सपना देख रहा है और अगर वह कोशिश करे तो अपने सपनों पर नियंत्रण भी कर सकता है।




सबसे पहले शीशा कैसे बना? शीशे का लैंस कैसे बनता है?

रवि दत्त, म. नं.: एचएम-60, फेज-2, मोहाली-160055

काँच glass एक अक्रिस्टलीय ठोस पदार्थ है, जिसे किसी भी आकार में ढाला जा सकता है। यह आमतौर पर पारदर्शी होता है, पर अपारदर्शी भी हो सकता है। दुनिया में सबसे ज्यादा और सबसे पुराना काँच ‘सिलिकेट ग्लास’ होता है, जिसका रासायनिक मूल सिलिकेट यौगिक सिलिका (सिलिकन डाईऑक्साइड या क्वार्ट्ज) होता है जो रेत सामान्य रेत का मूल तत्व है। विज्ञान की दृष्टि से 'कांच' की परिभाषा बहुत व्यापक है। इस लिहाज से उन सभी ठोसों को कांच कहते हैं जो द्रव अवस्था से ठंडे होकर ठोस अवस्था में आने पर क्रिस्टलीय संरचना नहीं प्राप्त करते। सबसे आम सोडा-लाइम काँच है जो सदियों से खिड़कियाँ और गिलास वगैरह बनाने के काम में आ रहा है। इसमें लगभग 75% सिलिका, सोडियम ऑक्साइड और चूना के अलावा कुछ अन्य चीजें मिली होती हैं।

इस प्रकार काँच बनता है रेत से। रेत और कुछ अन्य सामग्री को एक भट्टी में 1500 डिग्री सेल्सियस पर पिघलाया जाता है और फिर इस पिघले काँच को उन खाँचों में बूंद-बूंद करके उडेला जाता है जिससे मनचाही चीज़ बनाई जा सके। मान लीजिए, बोतल बनाई जा रही है तो खाँचे में पिघला काँच डालने के बाद बोतल की सतह पर और काम किया जाता है और उसे फिर एक भट्टी से गुज़ारा जाता है।

काँच का आविष्कार मिस्र या मेसोपोटामिया में ईसा से लगभग ढाई हज़ार साल पहले हुआ था। हालांकि उसके पहले ज्वालामुखियों के आसपास प्राकृतिक रूप से बना काँच भी मिलता रहा होगा। शुरु में इसका इस्तेमाल साज-सज्जा के लिए किया गया। ईसा से लगभग डेढ़ हज़ार साल पहले काँच के बरतन बनने लगे थे। ईसवी पहली सदी आते-आते फलस्तीन और सीरिया में एक खोखली छड़ में फूंक मारकर पिघले काँच को मनचाहे रूप में ढालने की कला विकसित हुई और ग्यारहवीं शताब्दी में वेनिस शहर काँच की चीज़ें बनाने का केन्द्र बन गया।

लेंस प्रकाश से जुड़ी एक युक्ति है जो अपवर्तन के सिद्धान्त पर काम करती है। एक पारदर्शक माध्यम, जिससे अपवर्तन के बाद किसी वस्तु का वास्तविक अथवा काल्पनिक प्रतिबिंब बनता है लेंस कहलाता है। मनुष्य ने पारदर्शी शीशे का आविष्कार करके उसके मार्फत देखना शुरू किया होगा तो उसे कई प्रकार के अनुभव हुए होंगे। उन्हीं अनुभवों के आधार पर प्रकाश के सिद्धांत बने। ग्यारहवीं सदी में अरब वैज्ञानिक अल्हाज़न बता चुके थे कि हम इसलिए देख पाते हैं, क्योंकि वस्तु से निकला प्रकाश हमारी आँख तक पहुँचता है न कि आँखों से निकला प्रकाश वस्तु तक पहुँचता है। सन 1021 के आसपास लिखी गई उनकी ‘किताब अल-मनाज़िर’ किसी छवि को बड़ा करके देखने के लिए उत्तल(कॉनवेक्स) लेंस के इस्तेमाल का जिक्र था। यानी लेंस उसके पहले बनने लगे थे। बारहवीं सदी में इस किताब का अरबी से लैटिन में अनुवाद हुआ। इसके बाद इटली में चश्मे बने।

अंग्रेज वैज्ञानिक रॉबर्ट ग्रोसेटेस्ट की रचना ‘ऑन द रेनबो’ में बताया गया है कि किस प्रकाश ऑप्टिक्स की मदद से महीन अक्षरों को दूर से पढ़ा जा सकता है। यह रचना 1220 से 1235 के बीच की है। सन 1262 में रोजर बेकन ने वस्तुओं को बड़ा करके दिखाने वाले लेंस के बारे में लिखा। दूरबीन यानी दूर तक दिखाने वाले यंत्र के आविष्कार का श्रेय हॉलैंड के चश्मा बनाने वालों को जाता है। इटली के वैज्ञानिक गैलीलियो गैलीली ने इसमें बुनियादी सुधार किए। आधुनिक इटली के पीसा नामक शहर में 15 फरवरी 1564 को गैलीलियो गैलीली का जन्म हुआ।

लेंस के आविष्कार के साथ ही सूक्ष्मदर्शी या माइक्रोस्कोप का आविष्कार भी जुड़ा है। यह वह यंत्र है जिसकी सहायता से आँख से न दिखने योग्य सूक्ष्म वस्तुओं को भी देखा जा सकता है। सामान्य सूक्ष्मदर्शी ऑप्टिकल माइक्रोस्कोप होता है, जिसमें रोशनी और लैंस की मदद से किसी चीज़ को बड़ा करके देखा जाता है। माना जाता है सबसे पहले सन 1610 में गैलीलियो ने सरल सूक्ष्मदर्शी बनाया। इस बात के प्रमाण भी हैं कि सन 1620 में नीदरलैंड्स में पढ़ने के लिए आतिशी शीशा बनाने वाले दो व्यक्तियों ने सूक्ष्मदर्शी तैयार किए। इनके नाम हैं हैंस लिपरशे (जिन्होंने पहला टेलिस्कोप भी बनाया) और दूसरे हैं जैकैरियस जैनसन। इन्हें भी टेलिस्कोप का आविष्कारक माना जाता है।
कादम्बिनी, जुलाई 2016 में प्रकाशित

Friday, November 25, 2016

सबसे बड़ा नोट या सिक्का कितने रुपए का हो सकता है?

भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के वर्तमान प्रावधानों के अनुसार, दस हजार रुपये से अधिक मूल्यवर्ग के बैंकनोट नहीं हो सकते हैं. सिक्काकरण (कॉइनेज) अधिनियम, 2011 के अनुसार, 1000 रुपये तक के मूल्यवर्ग के सिक्के जारी किए जा सकते हैं.
"मैं अदा करने का वचन देता हूँ" इस बात का अर्थ क्या है?
भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम,1934 की धारा 26 के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक बैंकनोट का मूल्य अदा करने के लिए जिम्मेदार है. रिज़र्व बैंक द्वारा, मांग पर यह अदायगी बैंक नोट जारीकर्ता होने के नाते है. भारतीय रिज़र्व बैंक पर बैंकनोट के मूल्य की अदायगी का यह दायित्व किसी संविदा के कारण नहीं सांविधिक प्रावधानों के कारण है.
बैंकनोट पर मुद्रित वचन खण्ड "मैं धारक को "क" रुपये अदा करने का वचन देता हूँ" एक वचन है जिसका अर्थ है कि वह बैंकनोट उस निर्दिष्ट राशि के लिए विधि मान्य मुद्रा है. भारतीय रिज़र्व बैंक का दायित्व है कि वह उस बैंकनोट के विनिमय में उसके मूल्य के बराबर राशि के निम्न मूल्यवर्ग के बैंकनोट अथवा भारतीय सिक्काकरण अधिनियम, 2011 के अंतर्गत विधि मान्य अन्य सिक्के दें.
एक रुपया क्या रिजर्व बैंक की जिम्मेदारी नहीं है?
इंडियन कॉइनेज एक्ट 2011 के अनुसार देश की मुद्रा का वितरण रिज़र्व बैंक करता है. पर इन नियमों के तहत एक रुपए के नोट या सिक्के ज़ारी करने का दायित्व भारत सरकार का है. रिज़र्व बैंक के पास 5,10,20,50,100,500 और 1000 रुपए के नोट ज़ारी करने का अधिकार है. भारत सरकार के पास किसी भी मूल्य का सिक्का ज़ारी करने का अधिकार है. रुपया अपने आप में सम-मूल्य ‘सम्पदा’ है या सम्पूर्ण मुद्रा है, जो हमारी करेंसी की मूल इकाई भी है. इसके तहत एक रुपए का नोट भी मुद्रा या कॉइन है. उसपर सिक्के की प्रतिकृति होती है. दूसरी ओर रिज़र्व बैंक कागजी मुद्रा का सम-मूल्य देने का वचन देता है. वे वचन-पत्र (प्रॉमिज़री नोट) हैं, जबकि सिक्का मुद्रा है.
हाल में इंडियन कॉइनेज अधिनियम 2011 के पास होने के बाद एक भ्रम पैदा हुआ कि सरकार एक रुपए का करेंसी नोट नहीं निकाल सकती. सन 1994 के बाद से सरकार ने एक रुपए का नोट छापना बंद कर दिया था. पर हाल में फिर से नए नोट जारी किए गए हैं. नोटों को छापने की अलग व्यवस्था नहीं है. भारतीय प्रतिभूति मुद्रण तथा मुद्रा निर्माण निगम लिमिटेड (एसपीएमसीआईएल) बैंक नोट, सिक्कों, कोर्ट फीस स्टाम्प, सिक्योरिटी पेपर, डाक के लिफाफों वगैरह की छपाई करता है. इसके अधीन सिक्के ढालने वाली टकसालें भी हैं.
करेंसी पेपर किससे बनता है?
करेंसी पेपर कॉटन(Cotton) और कॉटन रैग(Cotton Rag) को मिलाकर बनता है.
बैंक नोटों की मात्रा और मूल्य कौन तय करता है?
रिज़र्व बैंक मांग आवश्यकता के आधार पर, हर साल छपने वाले बैंकनोटों की मात्रा और मूल्य भारत सरकार को बताता है जिसे आपसी परामर्श के बाद अंतिम रुप दिया जाता है. छपने वाले बैंकनोटों की संख्या मोटे तौर पर बैंकनोटों की मांग को पूरा करने की आवश्यकता, सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर, संचलन से गंदे बैंकनोटों को निकाल कर उनकी जगह नए नोट की आवश्यकता और आरक्षित स्टॉक संबंधी अपेक्षाओं आदि पर निर्भर होते हैं.
ढलने वाले सिक्कों की संख्या कौन तय करता है?
रिज़र्व बैंक से प्राप्त मांग पत्रों के आधार पर ढलने वाले सिक्कों की मात्रा भारत सरकार तय करती है.
नोटों और सिक्कों का उत्पादन कहां होता है?
नोटों की छपाई नासिक, देवास, मैसूर और सालबोनी में स्थित चार मुद्रण प्रेसों में होती है. सिक्कों की ढलाई मुंबई, नोएडा, कोलकाता और हैदराबाद में स्थित चार टकसालों में की जाती है.
रिज़र्व बैंक जनता तक करेंसी को कैसे पहुँचाती है?
रिज़र्व बैंक अहमदाबाद, बेंगलुरु, बेलापुर, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर,नई दिल्ली, पटना और तिरुवनंतपुर में स्थित अपने 19 निर्गम कार्यालयों और कोच्चि कार्यालय की एक मुद्रा तिजोरी के साथ ही, मुद्रा तिजोरियों के व्यापक रूप से फैले नेटवर्क के माध्यम से मुद्रा प्रबंधन का कार्य कर रहा है. ये कार्यालय बैंकनोट मुद्रण प्रेसों से नए बैंक नोट प्राप्त करते हैं. भारतीय रिज़र्व बैंक के निर्गम कार्यालय वाणिज्यिक बैंकों की निर्दिष्ट शाखाओं को नये बैंकनोट भेजते हैं.
हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और नई दिल्ली (मिंट से जुड़े कार्यालय) स्थित रिज़र्व बैंक के कार्यालय सर्वप्रथम, टकसालों से सिक्के प्राप्त करते हैं. उसके बाद, ये कार्यालय रिज़र्व बैंक के अन्य कार्यालयों को सिक्के भेजते हैं, जो उन्हें मुद्रा तिजोरियों और छोटे सिक्का डिपो को भेजते हैं. बैंकनोट और रुपया सिक्के मुद्रा तिजोरियों तथा छोटे सिक्के छोटे सिक्का डिपो में रखे जाते हैं. इसके बाद, जनता में वितरण हेतु, बैंकों की शाखाएं उन बैंकनोटों और सिक्कों को मुद्रा तिजोरियों और छोटे सिक्का डिपो से प्राप्त करती हैं .

Friday, November 18, 2016

सबसे ज्यादा मूल्य के करेंसी नोट कहाँ के हैं?

पेपर करेंसी के इतिहास में लाखोंकरोड़ोंअरबों और खरबों तक के नोट छापने की परम्पराएं हैं. इनमें से काफी नोट केवल दिखावे के रह गए और संग्रहालयों की शोभा बने. ऐसा ही एक करेंसी नोट जिम्बाब्वे के सौ ट्रिलियन जिम्बाब्वे डॉलर का नोट थाजिसका चलन सन 2009 में खत्म हुआ. अमेरिका में चालीस के दशक तक 10,000 डॉलर तक का नोट चलता था. सन 1969 में अमेरिका सरकार ने 100 डॉलर से ऊपर के नोटों का चलन बंद कर दिया. यदि मुद्रास्फीति को ध्यान में रखें तो आज 10,000 डॉलर के नोटों में 64,000 डॉलर (करीब 42 लाख रुपये) मूल्य का माल आ जाता.
वह करेंसी नोट भी अमेरिका का सबसे बड़ा नोट नहीं था. वहाँ सबसे बड़ा नोट था एक लाख डॉलर का गोल्ड सर्टिफिकेटजिसपर राष्ट्रपति वुडरो विल्सन का पोर्ट्रेट छपा होता था. तीस के दशक में ऐसे 42,000 नोट छापे गए थे. यूरोपीय यूनियन का 500 यूरो का नोट इस वक्त काफी बड़ा नोट माना जा सकता है. जापान में 10,000 येन का और इंडोनेशिया में 100,000 रुपिया और वियतनाम का 500,000 डोंग नोट भी है. पर इन मुद्राओं की कीमत ज्यादा नहीं है.
भारत में कागजी मुद्रा अंग्रेजों ने 1861 में शुरू की. 1864 में 10 रु का नोटफिर 1872 में 5 का और 1899 में 10,000 रु का नोट जारी हुआ. सन 1900 में 100 रु, 1905 में 50 रु, 1907 में 500 रु और 1909 में 1000 रु के नोट आए. 1917 में ढाई रु का नोट भी आया. भारत के रिजर्व बैंक ने 1938 से बैंकनोट शुरू किए जो 2,5,10,50,100,1000 और 10,000 मूल्य के थे. 1 रु का नोट भारत सरकार जारी करती थी. स्वतंत्रता के बाद नई डिजाइन के नोट आए और 1959 में रिजर्व बैंक ने 5,000 और 10,000 तक के नोट छापे. सन 1978 में 100 रुपए से ऊपर के नोट बंद कर दिए गए. सन 1987 में 500 रु का नोट फिर से शुरू किया गया और 2000 में 1,000 का.
अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यभार कब संभालते हैं?
अमेरिकी राष्ट्रपति के अगले चार साल का कार्यकाल एक समारोह के साथ शुरू होता है. इसे ‘इनॉग्युरेशन डे’ कहा जाता है. इसका दिन तय है 20 जनवरी, पर यदि 20 जनवरी को रविवार हो तो यह 21 जनवरी को मनाया जाता है. यह दिन संविधान के बीसवें संविधान के अनुसार तय हुआ है. बीसवें संशोधन के पहले इसका दिन 4 मार्च तय था. 4 मार्च 1789 को अमेरिकी संविधान लागू हुआ था. यह दिन उसकी स्मृति में था. इस तारीख पर शपथ लेने वाले अंतिम राष्ट्रपति थे फ्रैंकलिन डी रूज़वेल्ट जिन्होंने 4 मार्च 1933 को शपथ ली. वर्तमान राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2009 में 20 जनवरी को और 2013 में 21 जनवरी को शपथ ली थी. अब डोनाल्ड ट्रम्प शुक्रवार 20 जनवरी 2017 को शपथ लेंगे.
डोनाल्ड ट्रम्प के उपराष्ट्रपति कौन होंगे?
माइक पेंस डोनाल्ड डक के साथ उपराष्ट्रपति पद के प्रत्याशी थे. वे स्वयमेव उपराष्ट्रपति चुन लिए गए. 

प्याज काटते समय आंखों में आंसू क्यों आते हैं?
प्याज के भीतर मौजूद एलीनेस (alliinases) एंजाइम सल्फेनिक तेजाब छोड़ता है. जब आप प्याज काटते हैं, तब यह तेजाब और इससे निकलने वाली तीखी गैस आँखों में लगती है. इससे आँखों की टियर ग्लैंड्स सक्रिय होती हैं और पानी निकलने लगता है. मूलत: यह एक प्रकार की रक्षा व्यवस्था है. जानवरों से बचाने के लिए प्याज और लहसुन जैसी वनस्पतियों को तीखी गंध प्रकृति ने दी हैं. 
संसद में शून्यकाल क्या होता है?
यह भारतीय संसद की देन है और एक अपरिभाषित अनौपचारिक व्यवस्था है. यह साठ के दशक से शुरू हुआ और अब संसदीय व्यवस्था का हिस्सा बन गया है. आमतौर पर यह प्रश्न प्रहर के बाद शुरू होता है और लंच तक चलता है. इसमें कोई भी ऐसा मसला उठाया जा सकता है जिसकी औपचारिक सूचना पहले से  न हो. देश में हर रोज ऐसे मसले सामने आते रहते हैं. इसका शून्य प्रहर नाम भी मीडिया दिया है. इसका समय निर्धारित नहीं है. कई बार यह होता ही नहीं और कई बार दो या तीन घंटे तक चलता रहा है.
ग्रेट बैरियर रीफ कहां है और क्या है?
ग्रेट बैरियर रीफ के बारे में जाने से पहले रीफ क्या होती है, इसे भी समझ लें. समुद्र में पानी के नीचे कई तरह की चट्टानें होती हैं. सामान्य पथरीली चट्टानों की तुलना में समु्द्री जीवों जैसे मूंगे की चट्टानों से बने रीफ एक प्रकार से सागर में एक जैविक व्यवस्था है. ग्रेट बैरियर रीफ उत्तर पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में क्वींसलैंड के पास को कोरल सागर में हैं. इसमें 2900 अलग-अलग रीफ शामिल हैं, जो 2600 किलोमीटर की लम्बाई में फैली हैं. इसके अंतर्गत करीब 3,44,400 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र आता है. दुनिया में जीवधारियों द्वारा रची गई यह सबसे बड़ी रचना है.

Friday, November 11, 2016

सिमी क्या है?

स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया का संक्षिप्त नाम SIMI या हिन्दी में सिमी है. यह संगठन देश के गैर-कानूनी गतिविधि (निषेध) अधिनियम 1967 के अंतर्गत अवैध घोषित है. यह संगठन इस्लामी देश के रूप में परिवर्तित कर ‘भारत को आजाद’ कराना है. इसके अंतर्गत या तो ताकत के बल पर या स्वेच्छया धर्मांतरण के जरिए यहाँ दारुल-इस्लाम (इस्लाम की भूमि) की स्थापना है. इसका गठन 25 अप्रैल 1977 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में किया गया था. इसके पहले अध्यक्ष थे वेस्टर्न इलिनॉय विवि के पत्रकारिता और जन-सम्पर्क विभाग के प्रोफेसर मुहम्मद अहमदुल्ला सिद्दीकी. इसमें 30 वर्ष तक की उम्र के व्यक्ति सदस्य बन सकते थे.
शुरू में यह संगठन जमात-ए-इस्लामी हिन्द की छात्र शाखा के रूप में बना था. यह गठबंधन सन 1981 तक चला. उस साल फलस्तीनी मुक्ति संगठन के अध्यक्ष यासर अरफात की भारत यात्रा के दौरान सिमी के कार्यकर्ताओं ने उनका विरोध किया और काले झंडे दिखाए. सिमी का कहना था कि अरफात पश्चिमी देशों की कठपुतली हैं, जबकि जमात के नेताओं ने उन्हें फलस्तीनी मुक्ति का नायक बताया. उसके बाद से जमात ने सिमी से पल्ला झाड़ लिया. भारत सरकार ने अमेरिका में हुए 9/11 हमले के बाद सन 2001 में इसे आतंकी संगठन बताते हुए अवैध घोषित कर दिया था. यह रोक 27 सितम्बर 2001 से 27 सितम्बर 2003 तक रही. पर इसके फौरन बाद इसपर रोक लगी जो 27 सितम्बर 2005 तक रही. इसके बाद 8 फरवरी 2006 को इसपर तीसरी बार रोक लगी. पर 5 अगस्त 2008 को दिल्ली हाईकोर्ट ने यह रोक हटा दी. इस निर्णय को अगले ही दिन सुप्रीम कोर्ट ने स्थगित कर दिया. एक विशेष न्यायाधिकरण ने अगस्त 2008 में इसपर लगी रोक हटा ली. इसके बाद एक विशेष न्यायाधिकरण ने इसपर लगी रोक को कानूनन सही घोषित किया.
हैलोवीन क्या होता है?
हैलोवीन अमेरिका में 31 अक्तूबर को मनाया जाने वाला एक अवकाश है. इस दिन लोग विचित्र किस्म की पोशाकें पहनते हैं. डरावनी फिल्में देखते हैं. भूत-प्रेत के खेल-खेलते हैं. खासतौर से कद्दू या सीताफल को काटकर उससे इंसान का चेहरा बनाकर उसके भीतर मोमबत्ती जलाते हैं. मैदान में होली की तरह से आग जलाते हैं. मोटे तौर पर गर्मी की समाप्ति और सर्दी के आगमन के इस पर्व में दुष्टात्माओं से छुटकारा पाने की कामना होती है. लौह युग की यूरोपीय सेल्टिक-संस्कृति में इसकी शुरुआत हुई थी.
पूर्ण ग्रहण के वक्त चन्द्रमा लाल क्यों?
धरती का वातावरण एक तरह से फिल्टर का काम करता है. वातावरण में मौज़ूद धूल कण, भाप और दूसरी गैसें सूरज की किरणों के नीले रंग को फैला देती हैं. लाल और पीले रंग नीचे चले जाते हैं. आपने सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूरज का रंग लाल देखा होगा. चन्द्रग्रहण का कारण है चन्द्रमा पर धरती की छाया पड़ना. उस पर पड़ी छाया हमें वातावरण के कारण लाल जैसी लगती है. यदि धरती के चारों ओर हवा की परत न होती तो चन्द्रमा काले आकाश में मिलकर नज़र आना बंद कर देता.
संसद में स्थगन प्रस्ताव क्या होता है?
भारतीय संसद में अवि‍लंबनीय लोक महत्व के मामले अध्‍यक्ष या सभापति की अनुमति ‍से पेश किए जा सकते हैं. इसका आशय होता है कि मामले के महत्व को देखते हुए सामान्य काम रोक कर पहले उल्लिखित विषय पर चर्चा की जाए. स्थगन प्रस्‍ताव का उद्देश्य अचानक हुई किसी घटना, सरकार की किसी चूक अथवा विफलता या फौरी तौर पर गंभीर परिणाम देने वाले मामले पर ध्यान खींचना हो सकता है. कार्य स्थगन के अलावा ध्यानाकर्षण का इस्तेमाल भी इसी प्रकार के उद्देश्य के लिए किया जा सकता है. ध्यानाकर्षण प्रक्रिया भारतीय संसदीय व्यवस्था की देन है. इसमें अनुपूरक प्रश्न पूछना और संक्षिप्त टि‍प्‍पणि‍यां करना शामिल है. इस प्रक्रिया में सरकार को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिलता है. ध्यानाकर्षण मामलों पर सभा में मतदान नहीं किया जाता.
कंप्यूटर कुकीज क्या होती हैं?
कुकी एक छोटी फाइल होती है जो कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क में सेव होती जाती है. अकसर कम्प्यूटर सेव करने से पहले आपकी वरीयता पूछता भी है. हम कुकीज को स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं. ज्यादातर वैब ब्राउजर स्वत: इन्हें स्वीकार करते हैं. पर आप चाहें तो ब्राउजर की सैटिंग में संशोधन कर सकते हैं. कई बार होता है कि कोई वेबसाइट विशेष नहीं खुलती तो मैसेज आता है कि अपनी कुकीज सैटिंग चेंज करें. यह फाइल वैब ट्रैफिक का विश्लेषण करने तथा किसी विशेष वैबसाइट पर जाने में मदद करती है. कूकी उन वेब एप्‍लीकेशनों को संचालित करने मददगार होती है जो इंटरनेट पर हमारी प्राथमिकताओं, रुचि आदि पर निगाह रखते हैं. इनकी मदद से वैबसाइट संचालक यह जान पाता है कि वैबसाइट पर कौन, कितनी देर रहता है और क्या देखता है.
कुकीज एक छोटा सा टेक्स्ट मैसेज होता है. यदि हम ब्राउजर की मदद से कुकीज को अस्वीकार कर दें तो कुछ साइट खुलने से इंकार कर देती हैं. गूगल भी आप तक पहुँचने में कुकी का प्रयोग करता है. आपने देखा होगा कि आप नेट के मार्फत जब कोई खरीदारी करते हैं तब उसके बाद ज्यादातर वैबसाइट पर उन्हीं वस्तुओं के विज्ञापन नजर आने लगते हैं. गूगल एडसेंस के विज्ञापन आपकी जानकारी और पसंद के हिसाब से ही दिखाए जाते हैं.
दुनिया की सबसे निचली जगह
दक्षिण अफ्रीका एम्पोनेंग सोने की खान को आप सबसे नीची जगह कह सकते हैं जो समुद्र तल से 4000 मीटर नीचे है. चूंकि इसे इंसान ने खोदा है, इसलिए इसे प्राकृतिक रूप से सबसे गहरी जगह नहीं कहा जा सकता. प्राकृतिक रूप से जॉर्जिया की वेरोन्या गुफा सबसे गहरी जगह है, जो 2193 मीटर गहरी है.
ब्ल्यू ह्वेल का दिल
आमतौर पर एक ब्ल्यू ह्वेल 30 मीटर के आसपास यानी तकरीबन 100 फुट तक लम्बी होती है. उसका वजन 170 टन या उससे भी ज्यादा होता है. उसकी जीभ ही तकरीबन 3 टन की होती है. इसका दिल तकरीबन 600 किलो का होता है.

Monday, November 7, 2016

डिसरप्टिव टेक्नोलॉजी किसे कहते हैं?

अंग्रेजी के डिसरप्टिव शब्द के हिन्दी में ज्यादातर अर्थ नकारात्मक हैं। मसलन बाधाकारी, हानिकारक, विध्वंसकारी वगैरह। जैसे सृजन के लिए संहार जरूरी है वैसे ही आधुनिक तकनीक के संदर्भ में इसके माने सकारात्मक है। इनोवेशन वह है जो नयापन लाने के लिए पुराने को खत्म करता है। जैसे सीएफएल ने परम्परागत बल्ब के चलन को खत्म किया और अब एलईडी सीएफएल को खत्म कर रहा है। इस शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल लेखक क्लेटन एम क्रिस्टेनसेन ने 1995 में किया जो इस वक्त हारवर्ड बिजनेस स्कूल में प्राध्यापक हैं. सारे इनोवेशन डिसरप्टिव नहीं होते। मसलन बीसवीं सदी के शुरू में कार का आविष्कार क्रांतिकारी तो था, पर उसने घोड़ागाड़ी के परम्परागत परिवहन को तत्काल खत्म नहीं किया, क्योंकि मोटरगाड़ी महंगी थी। सन 1908 में फोर्ड के सस्ते मॉडल टी के आगमन के बाद ही घोड़ागाड़ी खत्म होने की प्रक्रिया शुरू हुई जो तकरीबन तीस साल तक चली। इसके मुकाबले मोबाइल फोन ने परम्परागत फोन को जल्दी खत्म किया।

अंपायर तथा रैफरी में क्या अंतर है?
यह केवल खेल की शब्दावली का मामला है। इसका कोई सीधा कारण नहीं है। कुछ खेलों में जज भी होते हैं। खेल के विकास के साथ जो शब्द इस्तेमाल में आया वह चलता चला गया। मूलतः निर्णायक यह दो स्पर्धियों के बीच तटस्थ भाव से निर्णय तक पहुँचने में मददगार व्यक्ति रैफरी या अंपायर होते हैं। एक धारणा है कि हॉकी और फुटबॉल जैसे कॉण्टैक्ट गेम्स में रैफरी और क्रिकेट या बेसबॉल जैसे नॉन कॉण्टैक्ट गेम्स में, जिनमें खिलाड़ी एक-दूसरे से सीधे नहीं भिड़ते अंपायर होते हैं। पर यह बात भी पूरी तरह किसी एक खेल पर लागू नहीं होती। लॉन टेनिस में कुर्सी पर बैठने वाले अंपायर और लाइन पर खड़े रैफरी होते हैं। अमेरिकन फुटबॉल, जो हमारे देश में खेली जाने वाली फुटबॉल से अलग होती है रैफरी के साथ-साथ अंपायर भी होते हैं। इसी तरह क्रिकेट में जब अम्पायरों के अलावा एक और निर्णायक की जरूरत हुई तो उसे मैच रेफरी कहा गया। यह अंतर काम के आधार पर है और हरेक खेल के साथ बदलता रहता है।

पूर्वोत्तर के सात राज्यों के समूह को ‘सेवन सिस्टर्स स्टेट्स’ नाम क्यों दिया गया है?
इन राज्यों की भौगोलिक स्थिति इन्हें एक प्रकार की एकता प्रदान करती है। ऐसा नहीं कि इनके बीच जातीय और धार्मिक एकरूपता है। अनेकता के बावजूद उत्तर पूर्व के इन राज्यों में सांस्कृतिक, आर्थिक और भौगोलिक एकता है। इसलिए इन्हें पूर्वोत्तर की सात-बहनें या 'सेवन-सिस्टर्स' कहा जाता है। इन सातों राज्यों का कुल क्षेत्रफल 2,55, 511 वर्ग किलोमीटर है, जो देश के कुल भूभाग का तकरीबन सात फीसदी है। सन 1947 में देश की स्वतंत्रता के समय इस इलाके में तीन राज्य ही थे। सबसे बड़ा राज्य असम था। इसके बाद मणिपुर और त्रिपुरा दो रजवाड़े थे। राज्यों के पुनर्गठन के कारण असम में से तीन और राज्यों का गठन हुआ। यह गठन भाषाई और जातीय आधार पर था। सन 1963 में नगालैंड बना, सन 1972 में मेघालय पूर्ण राज्य और उसी साल मिजोरम केन्द्र शासित क्षेत्र बना। साथ ही मणिपुर और त्रिपुरा पूर्ण राज्य बने, जो पहले केन्द्र शासित क्षेत्र थे। सन 1987 में अरुणाचल के साथ मिजोरम को भी पूर्ण राज्य का दर्जा मिल गया। इस प्रकार ये सात राज्य हैं। ये राज्य सांस्कृतिक रूप से परस्पर जुड़े हुए हैं। इस कारण पत्रकारीय व्यवहार में इन्हें सात बहनें कहा जाने लगा।

टाइम के साथ ओ’ क्लॉक क्यों?
ओ माने ऑफ़. यदि 9 बजे हैं तो अंग्रेज़ी में कहेंगे 9 ऑफ़ द क्लॉक या संक्षेप में 9 ओ’ क्लॉक।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Friday, November 4, 2016

डिप्लोमैटिक इम्यूनिटी क्या होती है?

डिप्लोमैटिक इम्यूनिटी एक प्रकार का कानूनी संरक्षण है, जो राजनयिकों को दूसरे देश में काम करते वक्त मिलता है. जब उनपर कोई आपराधिक आरोप लगता है तो उनपर स्थानीय अदालतों में कार्रवाई से छूट मिलती है. अलबत्ता उन्हें देश से बाहर किया जा सकता है. इसका आशय है उन्हें देश से सुरक्षित वापस अपने देश में भेजा जा सकता है. यह संरक्षण राजनयिक रिश्तों को लेकर सन 1961 में हुई वियना संधि में कोडीफाई किया गया. ऐसा इसलिए ताकि जिन देशों की आपसी शत्रुता है उनके राजनयिक गलत आरोपों में फँसाए न जा सकें और भयमुक्त होकर काम कर सकें.
बिम्स्टेक क्या है?
बिम्स्टेक (BIMSTEC)  दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्वी देशों का सहयोग संगठन है. इसमें बांग्लादेश, भारत, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल शामिल हैं। इसका का पूरा नाम है,द बे ऑफ बंगाल इनीशिएटिव फॉर मल्टी सेक्टोरल टेक्नीकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन.इसी से इसका संक्षिप्त नाम बना BIMSTEC. एक तरीके से यह दक्षिण एशिया देशों में पाकिस्तान के साथ भारतीय सहयोग न हो पाने के विकल्प के रूप में उभरा संगठन है. इस समूह में दो देश दक्षिण पूर्वी एशिया के हैं, म्यांमार और थाईलैंड. इसका गठन जून, 1997 में बैंकॉक में किया गया था. तब इसके सदस्य चार देश थे. दिसंबर, 1997 में म्यांमार भी इस समूह से जुड़ गया. फरवरी, 2004 में भूटान और नेपाल भी इसमें शामिल हो गए. 31 जुलाई, 2004 को बैंकॉक में आयोजित इसके पहले सम्‍मेलन में इसका नाम बिम्स्टेक रखने का निर्णय किया गया.
ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्राध्यक्ष कौन है?
ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रपति का पद नहीं है. वहाँ ब्रिटेन की महारानी राष्ट्राध्यक्ष हैं.  उनका प्रतिनिधित्व करने के लिए वहां गवर्नर जनरल की नियुक्ति होती है. यहां आम चुनाव के जरिए संसद चुनी जाती है और प्रधानमंत्री सरकार के मुखिया होते हैं. सन1999 में देश में इस बात को लेकर जनमत संग्रह हुआ था कि क्या ब्रिटिश महारानी के स्थान पर राष्ट्रपति का चुनाव किया जाए. यह जनमत संग्रह सफल नहीं हुआ.
पृथ्वी गोल क्यों है?
इसकी वजह गुरुत्व शक्ति है. धरती की संहिता इतनी ज्यादा है कि वह अपने आसपास की सारी चीजों को अपने केन्द्र की ओर खींचती है. यह केन्द्र चौकोर नहीं गोलाकार ही हो सकता है. इसलिए उसकी बाहरी सतह से जुड़ी चीजें गोलाकार हैं. इतना होने के बावजूद पृथ्वी पूरी तरह गोलाकार नहीं है. उसमें पहाड़ ऊँचे हैं और सागर गहरे. दोनों ध्रुवों पर पृथ्वी कुछ दबी हुई और भूमध्य रेखा के आसपास कुछ उभरी हुई है.
बीज क्यों अंकुरित होता है?
अंकुरण वह प्रक्रिया है जिसमें कोई पौधा अपने बीज या बीजाणु से विकसित होता है. इसके बाद वह आगे बढ़ता है. वस्तुतः जिस तरह अन्य जीव भ्रूण से अपने पूर्ण रूप में विकसित होते हैं उसी तरह वनस्पतियों का विकास भी होता है. सभी बीजों में एक कवर के भीतर भ्रूण और कुछ भोजन सामग्री होती है. कुछ वनस्पतियाँ ऐसे बीज भी तैयार करतीं हैं, जिनमें भ्रूण नहीं होते. उनमें अंकुरण भी नहीं होता. बीजों का अंकुरण कई बार आंतरिक और बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर करता है. बाहरी कारणों में तापमान, नमी, ऑक्सीजन और अंधेरा भी हो सकता है. इससे इनकी कोशिकीय रचना चलने लगती है।
नोबेल पुरस्कार कितनी कैटेगरी में दिए जाते हैं?
नोबेल पुरस्कार की स्थापना स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल की याद में 1901 में की गई थी. उनका जन्म 1833 ई. में स्वीडन के शहर स्टॉकहोम में हुआ था. उन्होंने 1866 में डाइनामाइट की खोज की. स्वीडिश लोगों को 1896 में उनकी मृत्यु के बाद ही पुरस्कारों के बारे में पता चला, जब उन्होंने उनकी वसीयत पढ़ी, जिसमें उन्होंने अपने धन से मिलने वाली सारी वार्षिक आय पुरस्कारों की मदद करने में दान कर दी थी. शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वालों को हर साल यह पुरस्कार दिया जाता है. पहले नोबेल पुरस्कार पाँच विषयों में कार्य करने के लिए दिए जाते थे. अर्थशास्त्र के लिए पुरस्कार स्वेरिजेश रिक्स बैंक, स्वीडिश बैंक द्वारा अपनी 300वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में 1967 में आरम्भ किया गया और इसे 1969 में पहली बार प्रदान किया गया. इसे अर्थशास्त्र में नोबेल स्मृति पुरस्कार भी कहा जाता है.
दुनिया में सबसे ज्यादा आकाशीय बिजली कहां गिरती है?
अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था नासा के अनुसार मध्य अफ्रीका के कांगो गणराज्य में सबसे ज्यादा बिजली गिरती है. इस इलाके में लगभग पूरे साल मेघ छाए रहते हैं. अटलांटिक महासागर से लगातार आर्द्र हवाएं आती रहतीं हैं, जो पहाड़ों से टकराती हैं, जिसके कारण आकाशीय बिजली गिरती है. इसके विपरीत उत्तरी ध्रुव के आर्कटिक और दक्षिणी ध्रुव के अंटार्कटिक सागर क्षेत्र से जुड़े क्षेत्रों में बिजली नहीं गिरती. ये इलाके बेहद ठंडे हैं, जिनमें बिजली कड़काने वाले तूफान तैयार होते ही नहीं. 
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित