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Saturday, March 21, 2026

मध्य पूर्व या पश्चिम एशिया?

 

इन दिनों पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई के क्षेत्र को मीडिया में धड़ल्ले से मध्य पूर्व लिखा या बोला जा रहा है। सवाल है कि यह कहाँ का मध्य और किसका पूर्व है? पश्चिम एशिया, या दक्षिण पश्चिम एशिया, शब्दावली एशिया के सुदूर पश्चिमी भाग को बताती है। यह भौगोलिक स्थिति को बताने वाला शब्द है, जबकि 'मध्य पूर्व' औपनिवेशिक, भू-राजनीतिक शब्द है, जिसका उद्भव 20वीं सदी के प्रारंभ में ब्रिटिश नीति के हिस्से के रूप में हुआ था, जो यूरोप से दूरी के आधार पर इस क्षेत्र को परिभाषित करता था, न कि एशिया के भीतर उसकी सही भौगोलिक स्थिति (पश्चिम) के आधार पर। उनकी नज़र से यूरोप से पूर्वी इलाके का मध्यवर्ती क्षेत्र। इस वाक्यांश का सबसे पहले इस्तेमाल संभवतः 1902 में अमेरिकी नौसैनिक रणनीतिकार अल्फ्रेड थेयर मैहन ने किया था। उन्होंने भारत और फारस की खाड़ी के बीच के स्थान को मध्य पूर्व कहा था। उनका दृष्टिकोण पूरी तरह यूरोप केंद्रित था, जिसे हम आज भी दोहरा रहे हैं। अमेरिका और यूरोप के लिए यह इलाका मिडिल ईस्ट हो सकता है, हमारे लिए नहीं। भारत की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यह पश्चिम एशिया ही है।  

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 21 मार्च 2026 को प्रकाशित

Saturday, March 14, 2026

गिग वर्कर्स कौन होते हैं?

गिग वर्कर्स वे लोग हैं, जो अल्पकालिक, टास्क-आधारित या फ्रीलांस काम करते हैं। जो ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म्स जैसे ऊबर, ओला, रैपिडो, पोर्टर, स्विगी, ज़ोमैटो, ब्लिंकिट या फ्रीलांसिंग साइट्स (जैसे अपवर्क) के माध्यम से काम पाते हैं। जो लोग फिक्स्ड सैलरी या समय-सीमा के काम करते हैं। गिगशब्द का इस्तेमाल 1920 के दशक में जैज़ संगीतकारों ने अपने जॉब या काम के लिए किया, लेकिन गिग वर्कर्स के रूप में इसका व्यापक उपयोग हाल के वर्षों में, विशेषकर 2009 में अमेरिका में ऊबर के लॉन्च के बाद बढ़ा। भारत में गिग वर्कर्स तेजी से बढ़ रहे हैं। 2020-21 में इनकी संख्या लगभग 77 लाख थी, जो 2030 तक अनुमानतः 2.3 करोड़ से अधिक हो जाएगी। यह संख्या उस समय की वर्कफोर्स का 6-8 प्रतिशत होगी। गिग वर्क में फिक्स्ड वेतन, बीमा, पेंशन या छुट्टी नहीं होती, इसलिए सुरक्षा कम है। 2025 के अंत में बड़ी संख्या में डिलीवरी वर्कर्स ने बेहतर पेमेंट और सुरक्षा की माँग को लेकर हड़ताल की थी। भारत में सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत इनके हितों की रक्षा की जा रही है। इसके तहत स्वास्थ्य, बीमा और दुर्घटना लाभ सुनिश्चित करने की पहल है।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 14 मार्च 2026 को प्रकाशित