Saturday, October 26, 2013

बुरा ना देखो, ना कहो और ना सुनो वाले तीन बंदरों का प्रचलन कैसे शुरू हुआ? क्या इनके नाम भी हैं?


वर्ष 1617 में जापान के निक्को स्थि‍त तोगोशु की समाधि पर ये तीनों बंदर बने हैं। ऐसा माना जाता है कि यह बंदर जिन सिद्धांतों की ओर इशारा करते हैंवे बुरा न देखोबुरा न सुनोबुरा न बोलो को दर्शाते हैं। मूलतः यह शिक्षा ईसा पूर्व के चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस की थी। वहाँ से यह विचार जापान गया। उस समय जापान में शिंटो संप्रदाय का बोलबाला था। शिंटो संप्रदाय में बंदरों को काफी सम्मान दिया जाता है। शायद इसीलिए इस विचारधारा को बंदरों का प्रतीक दे दिया गया। यह यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल है। ऐसे ही विचार जापान के कोशिन मतावलम्बियों के हैं जो चीनी ताओ विचार से प्रभावित हैं। जापानी में इन बंदरों के नाम हैं मिज़ारूकिकाज़ारू और इवाज़ारू। महात्मा गांधी ने इन तीन बंदरों के मार्फत नैतिकता की शिक्षा दीइसलिए कुछ लोग इन्हें गांधी जी के बंदर भी कहते हैं।


सीनियर सिटिज़न की परिभाषा क्या है
अमेरिका में रिटायरमेंट की उम्र 65 साल है। भारत में सामान्यतः 60 साल के व्यक्ति को सीनियर सिटिज़न मानते हैं। भारतीय बैंक 60 साल से ऊपर के व्यक्ति को ज्यादा ब्याज़ देते हैं। भारतीय रेलवे में महिला वरिष्ठ नागरिकों के लिए रियायत लेने हेतु न्यूनतम आयु 58 वर्ष है और रियायत का तत्व केवल मूल किराए में 50 प्रतिशत है। पुरुष वरिष्ठ नागरिकों के मामले में रियायत लेने हेतु न्यूनतम आयु 60 वर्ष है और रियायत का तत्व केवल मूल किराए में 40 प्रतिशत है।

भारत में कुल कितने गाँव हैं? विश्व में सबसे अधिक गाँव किस देश में हैं?
सन 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 6,38,000 गाँव हैं। चीन में प्रशासनिक दृष्टि से घोषित गाँवों की संख्या 6,80,000 है।

पैराशूट बनाने के पीछे क्या कहानी है?
इंटरनेट पर सर्च इंजन गूगल का इस्तेमाल करने वालों ने परसों यानी 22 अक्तूबर 2013 को पैराशूट जम्प के एनीमेशन का गूगल डूडल देखा होगा। यह डूडल दुनिया के पहले पैराशूट जम्प की 216 वीं जयंती के मौके पर बनाया गया था। 22 अक्तूबर सन 1797 को फ्रांस के आंद्रे याक गार्नेरिन ने दुनिया में पहली बार 3000 फुट की ऊँचाई पर उड़ते बैलून से पैराशूट के सहारे छलांग लगाई थी। आसमान में उड़ान भरने की इच्छा इंसान के मन में हजारों साल से है। यूनानी पौराणिक कथाओं में इकेरस नामक पात्र की कथा है। उसके पिता डेडेलस वास्तुविद तथा एक महान आविष्कारक थे। पिता-पुत्र दोनों को सम्राट मिनॉस कैद कर दिया था। उनके बच निकलने का एक ही रास्ता था और वह था हवाई मार्ग से समुद्र को पार कर जाना। डेडेलस तो थे ही आविष्कारक, उन्होंने पक्षियों के परों को मोम से जोड़कर पंख बनाए। उन्होंने इकेरस से कहा कि न तो नीची उड़ान भरना और न बहुत ऊँची। नीचे उड़े तो समुद्र की नमी से पंख गीले हो जाएंगे और बहुत ऊँचे चले गए तो सूर्य की गर्मी मोम पिघल जाएगा। आसमान में उड़ते-उड़ते इकेरस पिता की चेतावनी को भूल गया ऊँचा चला गया। इकेरस के पंखों का मोम पिघलने लगा और वह समुद्र में जा गिरा। बहरहाल इंसान ने पहले गर्म हवा भर कर बैलून बनाए फिर पैराशूट। दुनिया में पहला व्यावहारिक रूप से सफल पैराशूट बनाने का श्रेय फ्रांसीसी नागरिक लुइ सेबास्तियन लेनोर्मां को जाता है, जिन्होंने वर्ष 1783 में इसका पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शन किया था। हालांकि पंद्रहवीं सदी के दौरान लिओनार्दो दा विंची ने सबसे पहले पैराशूट की कल्पना करते हुए इसका रेखाचित्र भी तैयार किया था। दा विंची की इस डिजाइन से प्रेरणा लेकर फॉस्ट ब्रांसिस ने वर्ष 1617 में एक सख्त फ्रेम वाला पैराशूट पहनकर वेनिस टॉवर से छलांग लगाई थी। उन्होंने अपने इस पैराशूट को होमो वोलंस नाम दिया था। हालांकि आपात काल में पैराशूट के इस्तेमाल का पहला प्रयोग 1785 में फ्रांसीसी नागरिक ज्यां पियरे ब्लांचार्ड ने किया था, जिन्होंने ऊंचाई पर तैर रहे एक हॉट एयर बैलून से एक कुत्ते को पैराशूट बंधी टोकरी के जरिए नीचे गिराया था। ब्लांचार्ड ने ही पहली बार सिल्क के कपड़े से तह करने लायक पैराशूट तैयार किया था। इसे इस्तेमाल करना भी आसान था। १७९७ में फ्रांस के आंद्रे गार्नेरिन ने पहली बार इसी तरह के पैराशूट के जरिए सफल जंप को अंजाम दिया था। गार्नेरिन ने कंपन कम करने के इरादे से इसमें कुछ और सुधार किया और इस तरह पहला छिद्रित पैराशूट अस्तित्व में आया।

तूफान कितने प्रकार के होते हैं? क्या दिल्ली में कभी तूफान आया?
हिन्दी में तूफान शब्द चक्रवात और बवंडर यानी साइक्लोन और टॉर्नेडो दोनों के लिए इस्तेमाल होता है। अक्सर आंधी के लिए भी। मौसम विज्ञान में, चक्रवात उसे कहा जाता है जिसमें पानी ऊपर उठ जाता है और एक ही दिशा में चक्कर लगाता रहता है। इसमें आमतौर पर हवा सर्पिल आकार में, पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध में दक्षिणावर्त और दक्षिणी गोलार्द्ध में वामावर्त रूप से घूमती है। तूफान धरती के घूमने और मौसम के बदलाव का परिणाम है। तूफान या बवंडर हवा के भारी दबाव और बादलों के कई सतहों के संपर्क से बनते है। सूरज की गर्मी से जब गर्म हवा ऊपर उठती है और ठंडे बादलों में जाती है तो तेजी से ऊपर उठने के साथ-साथ घूमने लग जाती है। और फिर पानी, धूल और मिट्टी की धार जैसी लकीर आसमान से बनती है। यही नहीं तूफान के दरम्यान बवंडर के अंदर बिजली भी बनती है, जिसकी वजह से ये अपने आसपास इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फील्ड बना देती है। जिसकी वजह से धरातल पर मौजूद चीजें मसलन पानी का तालाब, झील या नदी का पानी भी ऊपर खिंचने लगता है और आस पास भयंकर बारिश भी होने लगती है। 
दिल्ली में 17-18 मार्च 1978 को चक्रवात आया था जिसमें 28 लोगों की मृत्यु हुई और 700 के आसपास लोग घायल हुए थे।

क्या कोई ग्रह ऐसा भी है जिस पर जीवन की सम्भावना है?
नासा की नए उपग्रहों की खोज करने वाले टेलिस्कोप केप्लर ने पृथ्वी के समान सात नए उपग्रहों को खोज निकाला है. सातों उपग्रह एक ही तारे का चक्कर लगाने वाले उपग्रह हैं. इनमें से दो उपग्रहों की कक्षा अत्यधिक गर्म और अत्यधिक शीत क्षेत्र के मध्य में है. विशेषज्ञों का कहना है कि इन दो उपग्रहों पर जीवन की सम्भावना हो सकती है। नासा के कैलिफोर्निया स्थित एमेस अनुसंधान केंद्र के केप्लर अभियान के मुख्य खोजकर्ता विलियम बोरुकी ने कहा कि हमने किसी अन्य सौरमंडल के जीवन की सम्भावना वाले क्षेत्र में दो उपग्रहों को खोज की है. अब तक खोजे गए उपग्रहों में इन दोनों उपग्रहों पर जीवन की सर्वाधिक सम्भावना है. दोनों उपग्रहों को केप्लर-62ई और केप्लर-62 एफ नाम दिया गया है, जबकि इसके तारे का नाम केप्लर-62 रखा गया है. उन्होंने कहा कि दोनों ग्रहों का आकार लगभग पृथ्वी के बराबर है.

विश्व की सबसे बड़ी दूरबीन कौन सी है? इससे क्या देखा जाता है?
फिलहाल स्पेन के कैनरी द्वीप में स्थापित ग्रैन टेलेस्कोपियो कैनेरियास को दुनिया का सबसे बड़ा टेलिस्कोप इस आधार पर कह सकते हैं कि उसके एपर्चर यानी लेंस का व्यास 10.4 मीटर यानी 410 इंच है।  पर दुनिया की सबसे बड़ी दूरबीन अमेरिका के हवाई द्वीप में तैयार की जा रही है। इसे कहते हैं प्रोजेक्ट  थर्टी मीटर टेलीस्कोप (टीएमटी)। इस परियोजना के तहत पाँच देश कनाडा, चीन, भारत, जापान और अमेरिका इसे बनाएंगे। इस परियोजना की लागत करीब 1.4 अरब डॉलर है और इसमें भारत लगभग 14 करोड़ डॉलर यानी 10 प्रतिशत योगदान करेगा। इस दूरबीन के काम शुरू करने के बाद वैज्ञानिक ब्रह्मांड की उत्पत्ति सहित अन्य रहस्यों से पर्दा हटा सकेगा। इसके इस्तेमाल से वैज्ञानिक कॉस्मिक डार्क एज के अंत से लेकर पहले तारे की उत्पत्ति, पुन:-आयनीकरण और आकाशगंगा की उत्पत्ति के युग के बारे में जानकारी हासिल कर सकेंगे। जैसा कि इस दूरबीन के नाम से ही पता चलता है, इसमें 30 मीटर व्यास के लेंस का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसकी क्षमता इस समय मौजूद सबसे बड़ी दूरबीन के मुकाबले नौ गुना होगी। इस दूरबीन का निर्माण अगले साल शुरू होगा और उम्मीद है कि 2022 तक यह काम करने लगेगी।

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार दशानन नाम से कौन जाना जाता है?
लंकाधिपति रावण को दशानन कहते हैं। वाल्मीकि द्वारा लिखित रामायण महाकाव्य में रावण का सबसे 'प्रामाणिक' इतिहास मिलता है। रावण एक कुशल राजनीतिज्ञ, सेनापति और वास्तुकला का मर्मज्ञ होने के साथ-साथ ब्रह्म ज्ञानी तथा बहु-विद्याओं का जानकार था। उसे मायावी इसलिए कहा जाता था कि वह इंद्रजाल, तंत्र, सम्मोहन और तरह-तरह के जादू जानता था। उसके पास एक ऐसा विमान था, जो अन्य किसी के पास नहीं था। इस सभी के कारण सभी उससे भयभीत रहते थे। कुछ विद्वान मानते हैं कि रावण के दस सिर नहीं थे किंतु वह दस सिर होने का भ्रम पैदा कर देता था इसी कारण लोग उसे दशानन कहते थे। कुछ विद्वानों अनुसार रावण छह दर्शन और चारों वेद का ज्ञाता था इसीलिए उसे दसकंठी भी कहा जाता था। दसकंठी कहे जाने के कारण प्रचलन में उसके दस सिर मान लिए गए। जैन शास्त्रों में उल्लेख है कि रावण के गले में बड़ी-बड़ी गोलाकार नौ मणियां होती थीं। उक्त नौ मणियों में उसका सिर दिखाई देता था जिसके कारण उसके दस सिर होने का भ्रम होता था।

सबसे ज्यादा गाने किस हिन्दी फिल्म में थे?
सन 1932 में बनी फिल्म मदन थिएटर द्वारा निर्मित फिल्म इंदरसभा में 71 गाने थे। यह फिल्म आगा हसन अमानत के उर्दू नाटक इंदर सभा पर आधारित थी। इस नाटक को पहली बार सन 1853 में खेला गया था। यह पूरा नाटक काव्य में है।

फर्स्ट लेडी ऑफ इंडियन सिनेमा कौन थीं?
देविका रानी चौधरी को फर्स्ट लेडी ऑफ इंडियन सिनेमा कहा जाता है। वे गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की रिश्ते में पौत्री थीं। इनके पिता सेना के सर्जन जनरल कर्नल एमएन चौधरी थे। फिल्म अभिनेता और निर्माता हिमांशु राय उनपर इतने मुग्घ हुए कि अपनी जर्मन पत्नी को छोड़कर इनसे विवाह किया। हिमांशु राय ने इन्हें फिल्मों में लाने के लिए 1933 में फिल्म कर्मा बनाई। बाद में इन दोनों ने मिलकर बॉम्बे टॉकीज़ नाम से मशहूर फिल्म कम्पनी बनाई। देविका रानी को सन 1958 में पद्मश्री प्रदान किया गया और सन 1970 में पहला दादा साहब फाल्के पुरस्कार उन्हें दिया गया।

कुइज़ीन Cuisine का क्या मतलब होता है?
कुइज़ीन फ्रांसीसी शब्द है, जिसका अर्थ है खाना बनाने की कला। इसके लिए लैटिन शब्द है कोकरे। पर कुइज़ीन शब्द का इस्तेमाल किसी स्थान विशेष या किसी और तरह से विशेष भोजन के लिए किया जाता है। जैसे जापानी व्यंजन, बंगाली, दक्षिण भारतीय, गुजराती वगैरह। स्थानीय सामग्री का इस्तेमाल भी इसमें महत्वपूर्ण है।

दुनिया की सबसे महंगी करेंसी कौन सी है? रुपए का कौन सा स्थान है?
सबसे महंगी करेंसी कुवैत की दीनार है जिसका वर्तमान रेट 3.5 डॉलर के आसपास है। सबसे कम मूल्य की करेंसी ईरान की रियाल है। वर्तमान रेट के अनुसार 24, 815 रियाल का एक डॉलर है। भारत का रुपया बीच में कहीं आता है।



Friday, October 11, 2013

भारत से किन किन लोगों को नोबेल पुरस्कार मिले हैं?

रोनाल्ड रॉस
भारत से किन किन लोगों को नोबेल पुरस्कार मिले हैं?
नोबेल सम्मान पाने वाले भारतीयों के नाम इस प्रकार हैः-
1902 रोनाल्ड रॉस            चिकित्सा                भारत में जन्मे विदेशी
1907 रुडयार्ड किपलिंग      साहित्य                  भारत में जन्मे विदेशी
1913 रवीन्द्रनाथ ठाकुर      साहित्य                  भारतीय नागरिक
1930 सीवी रामन             भौतिक विज्ञान        भारतीय नागरिक
1968 डॉ हरगोविन्द खुराना चिकित्सा               भारत में जन्मे अमेरिकी नागरिक
1979 मदर टेरेसा              शांति पुरस्कार         विदेश में जन्मीं, भारत में निवास
1983 सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर  भौतिक विज्ञान        भारत में जन्मे अमेरिकी नागरिक
1998 अमर्त्य सेन               अर्थशास्त्र                भारतीय नागरिक
2001 वीएस नाइपॉल         साहित्य                भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक
2009 वेंकटरामन रामकृष्णन  रसायन शास्त्र       भारत में जन्मे अमेरिकी नागरिक

EVM यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन किसने बनाई और देश में इसका पहली बार कब इस्तेमाल किया गया ?
भारत में सन 1999 के लोकसभा चुनाव में आंशिक रूप से और 2004 के चुनाव में पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल किया गया था। उस चुनाव में 10 लाख से ज्यादा वोटिंग मशीनों का इस्तेमाल किया गया। वोटिंग मशीनें बनाने की कोशिशें उन्नीसवीं सदी से चल रहीं थीं। अमेरिका में वोटिंग मशीन का पेटेंट भी कराया गया था। वह वोटिंग मशीन इलेक्ट्रॉनिक मशीन नहीं थी। पंचिंग मशीन थी। भारत में चुनाव आयोग ने वोटिंग मशीन का निर्माण भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, बेंगलुरु और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, हैदराबाद की मदद से किया था। यों सन 1980 में पहली वोटिंग मशीन बनाई गई थी। पहली बार इसका इस्तेमाल सन 1981 में केरल के उत्तरी पारावुर विधानसभा क्षेत्र के 50 पोलिंग स्टेशनों पर किया गया था।

नवरात्र में षष्ठी का क्या महत्व है ?
षष्ठी से बंगाल में दुर्गा पूजा की शुरुआत होगी। उत्सव तब शुरू होता है, जब षष्ठी तिथि को बेटी (मां दुर्गा) मायके आती है। बेटी आएगी तो व्यस्तताएं भी बढ़ेंगी ही। नवरात्रि पूजन में छठे दिन कात्यायनी की पूजा होती है। माना जाता है कि महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था।

क्या डांडिया खेलने की भी ट्रेनिंग होती है.. क्या अहमियत है इसकी..?
यह एक प्रकार का सामूहिक नृत्य है। पहले यह गुजरात तक सीमित था, पर हाल के वर्षों में इसका प्रचलन देशभर में हो गया है। कहा जाता है कि यह दुर्गा की पूजा से जुड़ा नृत्य है और इसमें लकड़ी की डंडियां तलवार की प्रतीक हैं। यह दुर्गा और महिषासुर के युद्ध को व्यक्त करता है। दूसरी ओर यह मान्यता भी है कि इसकी प्रेरणा भगवान कृष्ण की रासलीला से मिली है। मूलतः राधा-कृष्ण का नृत्य है। इसमें कदमों का संचालन और हाथ में डांडिया को अपने दोनों ओर के साथियों के साथ टकराने का अभ्यास करना होता है। यह सामान्य से प्रशिक्षण से सम्भव है। अब चूंकि यह काम फैंसी हो गया है इसलिए इसकी विशेष ट्रेनिंग भी होने लगी है।

तेलंगाना इलाके को तेलंगाना क्यों कहते हैं ?
भारत के आन्ध्र प्रदेश राज्य का एक क्षेत्र है, जिसे एक नया राज्य बनाने का फैसला हुआ है। इस इलाके में मान्यता है कि इस इलाके में लिंग के रूप में शिव तीन पर्वतों पर प्रकट हुए। ये हैं कालेश्वरम, मल्लिकार्जुन और द्राक्षाराम। ये पर्वत इस इलाके की सीमा बनाते हैं और इसीलिए इसे त्रिलिंग देश कहा जाता है जो तेलंगाना हो गया है। तेलुगू शब्द की उत्पत्ति भी इसी त्रिलिंग से है। यह पराधीन भारत के हैदराबाद नामक राजवाडे के तेलुगूभाषी क्षेत्रों से मिलकर बना है। 'तेलंगाना' शब्द का अर्थ है- 'तेलुगूभाषियों की भूमि' । तेलुगु शब्द का मूलरूप संस्कृत में "त्रिलिंग" है। इसका तात्पर्य आंध्र प्रदेश के श्रीशैल के मल्लिकार्जुन लिंग, कालेश्वर और द्राक्षाराम के शिवलिंग से है। इन तीनों सीमाओं से घिरा देश त्रिलिंगदेश और यहाँ की भाषा त्रिलिंग (तेलुगु) कहलाई।

तेनालीराम कौन थे?
तेनाली रामकृष्ण, तेनाली रामलिंगम या तेनाली राम तमिल, तेलुगु और कन्नड़ लोककथाओं का एक पात्र है। सोलहवीं सदी में दक्षिण भारत के विजयनगर राज्य में राजा कृष्णदेव राय हुआ करते थे। तेनालीराम उनके दरबार के कवि थे और वे अपनी समझ-बूझ और हास-परिहास के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी खासियत थी कि गम्भीर से गम्भीर विषय को भी वह हंसते-हंसते हल कर देते थे। विजयनगर के राजा के पास नौकरी पाने के लिए उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा। कई बार उन्हें और उनके परिवार को भूखा भी रहना पड़ा, पर उन्होंने हार नहीं मानी और कृष्णदेव राय के पास नौकरी पा ही ली। तेनालीराम की गिनती राजा कृष्णदेव राय के आठ दिग्गजों में होती थी।

क्या ज्योतिषशास्त्र को विज्ञान का दर्जा हासिल है?
अंतरिक्ष की संरचना और ग्रह-नक्षत्रों की गति का अध्ययन विज्ञान है। फलित ज्योतिष यानी ग्रह-नक्षत्रों के संचरण का हमारे जीवन पर प्रभाव का अध्ययन करने वाले शास्त्र का अध्ययन विज्ञान की परिभाषा में नहीं आता। भले ही गणना के लिए इस्तेमाल में आने वाला गणित विज्ञान हो।

रमैया वस्तावैया का क्या मतलब होता है?
रामैया वस्तावैया का मतलब है राम या रामैया, क्या तुम आ रहे हो? तेलगू के इन शब्दों का इस्तेमाल शैलेन्द्र और शंकर-जयकिशन ने किया और श्री 420 के मार्फत एक यादगार गीत बना दिया। कहते हैं कि कभी शैलेन्द्र ने अपनी हैदराबाद यात्रा के दौरान ये पंक्तियाँ सुनी थीं। उन्हें ये भा गईं और मौका लगने पर इन्हें इस गीत में पिरो दिया।

कार इंडस्ट्री में सबसे आगे कौन सा देश है? सबसे ज्यादा कारें किस देश में चलती हैं?

मोटरगाड़ियों के उत्पादन के विचार से अब दुनिया का नम्बर एक देश चीन है। पहले अमेरिका नम्बर एक देश होता था, फिर जापान आगे निकल गया। अब चीन सबसे आगे है जहाँ सन 2011 में एक करोड़ 81 लाख मोटरगाड़ियाँ बनाई गईं। जबकि उस साल अमेरिका में मात्र 86 लाख और जापान में 83 लाख। इसके बाद जर्मनी और दक्षिण कोरिया का नम्बर है जहाँ क्रमशः 63 लाख और 46 लाख गाड़ियाँ बनीं। इसके बाद भारत का नम्बर है जहाँ 39 लाख गाड़ियाँ बनीं। सड़क पर चलने वाली कारों की संख्या सबसे ज्यादा अमेरिका में ही होगी जहाँ प्रति हजार आबादी पर लगभग 800 कारें हैं। जापान में प्रति हजार की आबादी पर लगभग 600, चीन में 85 और भारत में 18 कारें हैं। 

Saturday, October 5, 2013

रेलवे की छोटी और बड़ी लाइन में क्या अंतर होता है?

रेलवे की छोटी और बड़ी लाइन में क्या अंतर होता है?
भारतीय रेलवे में तीन तरह की प‍टरियां बिछी हुई हैं, ये हैं- बड़ी लाइन (Broad guage) 1.67 मीटर 5 फुट 6 इंच। छोटी लाइन (Metre guage) 1.00 मीटर 3 फुट सवा तीन इंच, संकरी लाइन (Narrow guage)76.2 सेमी दो फुट 6 इंच। 61 सेमी दो फुट। इनमें से बड़ी लाइन की पटरियों का संजाल भारत के अधिकांश हिस्सों में फैला हुआ है। अधिकतर गा‍ड़ियां इसी पटरी पर चलती हैं। छोटी लाइन की पटरियां अब धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं। शिमला, ऊटी, कांगड़ा, माथेरान में नैरो गेज गाड़ियाँ चलतीं हैं।
रैमन मैग्सेसे मैग्सायसाय कौन थे?
रेमन मैग्सायसाय पुरस्कार की स्थापना 1957 में हुई। इसका नामकरण फिलीपींस के राष्ट्रपति रेमन मैग्सायसाय के नाम पर हुआ, जिनकी 1957 में एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष मैग्सेसे जयंती पर 31 अगस्त को लोक सेवा, सामुदायिक सेवा, पत्रकारिता, साहिग्त्य तथा सृजनात्मक कला और अंतर्राष्ट्रीय सूझबूझ के लिए प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार ग़ैर एशियायी संगठनों, संस्थानों को भी एशिया के हित में कार्य करने के लिए दिया जा सकता है। भारत के विनोबा भावे, मदर टेरेसा, सत्जित राय, वर्गीज कुरियन, एमएस सुब्बुलक्ष्मी, एमएस स्वामीनाथन, चंडी प्रसाद भट्ट, बाबा आम्टे, अरुण शौरी, टीएन शेषन, महाश्वेता देवी, किरन बेदी, जेएम लिंग्दोह जैसे अनेक महत्वपूर्ण व्यक्तियों को मिल चुका है।
क्रिस्टल माला या क्रिस्टल का क्या महत्व है?
क्रिस्टल को हिन्दी में स्फटिक कहते हैं। स्फटिक एक रंगहीन, पारदर्शी, निर्मल और शीत प्रभाव वाला उपरत्न है। इसको कई नामों से जाना जाता है, जैसे- 'सफ़ेद बिल्लौर', अंग्रेज़ी में 'रॉक क्रिस्टल', संस्कृत में 'सितोपल', शिवप्रिय, कांचमणि और फिटक आदि। क्रिस्टल हमें कई रूप में मिलते हैं। जैसे नमक, चीनी और फिटकरी। पर हम जिस क्रिस्टल की बात कर रहे हैं वह काँच जैसा प्रतीत होता है, परंतु यह काँच की अपेक्षा अधिक दीर्घजीवी होता है। स्फटिक को नग के बजाय माला के रूप में पहना जाता है। स्फटिक माला को भगवती लक्ष्मी का रूप माना जाता है। स्फटिक की रासायनिक संरचना सिलिकॉन डाइऑक्साइड है। तमाम क्रिस्टलों में यह सबसे अधिक साफ और ताकतवर है। इसकी प्रतिमाएं भी बनती हैं। गणेश की मूर्ति का महत्व अधिक माना जाता है। इसे ऊर्जा का स्रोत माना जाता है और प्रकाश से भरपूर क्रिस्टल का प्रयोग सदियों से प्राण ऊर्जा को विकसित करने तथा नकारात्मक भावनाओं, वातावरण एवं रोगों से बचने के लिए विविघ तरीकों से करते रहे हैं। स्फटिक चिकित्सा ( Crystal Healing ) एक अलग चिकित्सा पद्धति के रूप में फैलती जा रही है। यह कुदरती पदार्थ दो प्राकृतिक तत्वों ऑक्सीजन व सिलिकॉन के मिश्रण से बना है। जब यह दोनों तत्व गर्मी और भारी दबाव के साथ भूगर्भ में एक साथ जुडते हैं तो कुदरती स्फटिक का निर्माण होता है। प्राकृतिक स्फटिक के निर्माण में कई सौ वर्ष लग जाते हैं।
मनी प्लांट क्या सच में घर में पैसे लाने वाला पौधा होता है?
मनी प्लान्ट का वानस्पतिक नाम : एपिप्रेम्नम ओरियम (Epipremnum aureum), दक्षिणपूर्व एशिया (मलेशिया, इण्डोनेशिया) और ऑस्ट्रेलिया में काफी मिलने वाला लता रूप में फैलने वाला पौधा है। इसकी पत्तियाँ सदा हरी रहतीं हैं। ये तने पर एकान्तर क्रम में लगी होती हैं और हृदय जैसी आकृति वाली होती हैं। इसके पत्ते सिक्कों जैसे लगते हैं इसलिए इसका नाम मनीप्लांट हो गया। यह सुन्दर लगता है, भाग्यशाली माना जाता है जैसे बोंसाई और बाँस के पौधों को माना जाता है।
राम ने सीता के स्वयंवर में जो धनुष उठाया था उसकी क्या विशेषता थी?
शिवधनुष शंकर जी का प्रिय धनुष था जिसका नाम पिनाक था। इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाना इसलिए खास था क्योंकि यह धनुष स्वयं शिव का था और बहुत अधिक वजनी था। धनुष के वजन के संबंध में तुलसीदास ने लिखा है कि स्वयंवर में उपस्थित हजारों राजा एक साथ मिलकर भी उस धनुष को हिला तक नहीं पाए थे। वहीं श्रीराम ने शिव धनुष को खेल ही खेल में प्रत्यंचा चढ़ाने के लिए उठाकर तोड़कर दिया और सीता ने श्रीराम को वरमाला पहना दी। स्वयंवर में इतनी कठिन शर्त क्यों रखी गई, इसके पीछे कई कथाएं प्रचलित हैं: शास्त्रों के अनुसार विश्वकर्मा ने दो दिव्य धनुष बनाए थे एक विष्णु के लिए और एक शिव के लिए। शिव ने इस धनुष से एक दैत्य का संहार किया और इसे परशुराम को भेंट में दिया था। परशुराम ने इस धनुष को जनक के पूर्वज देवराज के यहां रखवा दिया था। जब राजा जनक के यहां सीता आई और सीता बचपन में सीता धनुष को उठाकर खेलती थी। यह देखकर जनक समझ गए कि सीता कोई साधारण कन्या नहीं है अत: इसका विवाह भी किसी असाधारण वर से किया जाना उचित है। रामायण के अनुसार राजा जनक को खेतों में हल जोतते समय एक पेटी से अटका। इन्हें उस पेटी में पाया था। हल को संस्कृत मे 'सीत' कहने के कारण इनका नाम सीता पडा। इसी वजह से जनक ने सीता के स्वयंवर के समय इस धनुष को रखा
भारत सोने की चिड़िया कब था? अब क्यों नहीं है?
ईसा से 300 से कुछ ज्यादा साल पहले भारत में चंद्रगुप्त मौर्य का शासन था। उनके शासन से लेकर उनके पौत्र सम्राट अशोक तक के समय को भारत का श्रेष्ठ समय कह सकते हैं। अपने समय में दुनिया के महानतम सम्राट हुए हैं। अशोक ने स्वतंत्रता, समता, न्याय पर आधारित सामाजिक व्यवस्था का निर्माण किया। उनके राज्य में ही भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। नोबल पुरस्कार विजेता डॉ. अमर्त्य सेन के अनुसार अशोक के समय में दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत की भागीदारी 35% थी। भारत की समृद्धि कमोबेश जारी रही और पंद्रहवीं शताब्दी मे विश्व की पूरी अर्थव्यवस्था का पाँचवॉ हिस्सा भारत मे था। देश में मौजूद 18 हजार टन सोने का भंडार इस बात का सबूत है कि भारत आज भी सोने की चिड़िया है।
नवरात्रि के नौ दिन किन-किन रंगों का महत्व है?
नवरात्रि का अर्थ नौ रातें होता है। इन नौ रातों में तीन देवी पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ रुपों की पूजा होती है जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं। देवी दुर्गा के नौ स्वरुप हैं-1. शैलपुत्री 2.ब्रह्मचारिणी 3. चंद्रघंटा 4. कुष्मांडा 5.स्कंदमाता 6.कात्यायनी 7. कालरात्रि 8. महागौरी 9. सिद्धिदात्री। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण दुर्गा को शैलपुत्री कहा जाता है। ब्रह्मचारिणी अर्थात जब उन्होंने तपश्चर्या द्वारा शिव को पाया था। चंद्रघंटा अर्थात जिनके मस्तक पर चंद्र के आकार का तिलक है। ब्रह्मांड को उत्पन्न करने की शक्ति प्राप्त करने के बाद उन्हें कुष्मांडा कहा जाने लगा। उनके पुत्र कार्तिकेय का नाम स्कंद भी है, इसीलिए वे स्कंद की माता कहलाती हैं। यज्ञ की अग्नि में भस्म होने के बाद महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्होंने उनके यहां पुत्री रूप में जन्म लिया था, इसीलिए वे कात्यायनी कहलाती हैं। वे काल अर्थात हर तरह के संकट का नाश करने वाली हैं, इसीलिए कालरात्रि कहलाती हैं। उनका वर्ण पूर्णत: गौर अर्थात गौरा (श्वेत) है, इसीलिए वे महागौरी कहलाती हैं। जो भक्त उनके प्रति समर्पित रहता है, उसे वे हर प्रकार की सिद्धि दे देती हैं, इसीलिए उन्हें सिद्धिदात्री कहा जाता है। नवरात्रि का पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है। एक चैत्र माह में, तो दूसरा आश्विन माह में जिसे शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। आश्विन महीने की नवरात्र में रामलीला, रामायण, भागवत पाठ, अखंड कीर्तन जैसे सामूहिक धार्मिक अनुष्ठान होते है। दुर्गा की पूजा में लाल रंग के फूलों का बहुत महत्व है। गुलहड़ के फूल उन्हें प्रिय माने जाते हैं। इसके अलावा बेला, कनेर, केवड़ा, चमेली, पलाश, तगर, अशोक, केसर, कदंब के पुष्पों से भी पूजा की जा सकती है
उम्रकैद और ताउम्र कैद की सज़ा में क्या फर्क है?
भारत के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार दोनों एक हैं। एक समय तक हमारे यहाँ माना जाता था कि उम्रकैद के माने हैं 14 साल। पर पिछले साल नवम्बर में अदालत ने स्पष्ट किया कि उम्रकैद माने हैं व्यक्ति का मृत्यु पर्यंत जेल में रहना। अलबत्ता सरकार व्यक्ति के अच्छे आचरण और अपराध को देखते हुए उसे पहले भी रिहा कर सकती है, पर यह रिहाई भी 14 साल से पहले नहीं होगी।
जी-20 क्या है..? भारत का इसमें अब तक क्या रोल रहा है?

जी-20 या ग्रुप ऑफ ट्वेंटी 20 अगस्त 2003 में बना था। यह उस साल कानकुन मैक्सिको में हुए विश्व व्यापार संगठन के पाँचवें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के पहले बना था। उसके पहले भारत, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील ने मिलकर एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें कहा गया था कि विकसित देश संरक्षणवादी तरीके अपना रहे हैं। 20 अगस्त 2003 को कानकुन में बीस देशों ने एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे जो जी-20 का आधार बना। इस समय इस ग्रुप में 23 देश शामिल हैं। इनमें अमेरिका, कनाडा, भारत, चीन, जापान, ब्राजील, अर्जेंटीना, रूस, तुर्की, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका, फ्रांस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, इटली और यूरोपियन यूनियन सहित बीस भागीदार थे। भारत की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। 

Saturday, September 28, 2013

मेट्रो की बत्तियाँ गुल क्यों हो जाती हैं?

मेट्रो में सफर करते समय मैंने एक बात पर गौर किया है कि करौलबाग पहुंचते ही मेट्रो कोच की बत्तियाँ गुल हो जाती हैं ,ऐसा क्यों ? –दिलीप

आपके सवाल का सही जवाब तो मेट्रो के अधिकारी ही दे सकते हैं, पर यदि यह बत्ती गुल होना किसी एक खास जगह होता है तो इसका कारण पावर न्यूट्रल जोन है। रेलवे की लाइनों के ऊपर चलने वाले बिजली के तारों को एक से ज्यादा स्रोतों से बिजली मिलती है। ऐसे में एक सब स्टेशन से दूसरे सब स्टेशन की लाइन शुरू होती है, तब थोडी सी दूरी तक ऊपर करेंट नहीं होता। इसे पावर न्यूट्रल जोन कहते हैं। यहाँ गाड़ी रुकती नहीं है, क्योंकि अपनी गति से बढ़ती जाती है। चूंकि पावर सोर्स खत्म हो जाता है तब बत्ती गुल हो जाती है और केवल बैटरी पर आधारित लाइट जली रह जाती है। ऐसा रेलवे लाइनों में भी होता है। दिल्ली मेट्रो की अलग-अलग लाइनों में यह कहीं न कहीं होता होगा।

स्थगन प्रस्ताव क्या होता है? संसद क्यों, और एक दिन में कितनी बार स्थगित हो सकती है? –राखी

हमारी संसद के दोनों सदनों के नियमों में सार्वजनिक महत्‍व के मामले बिना देरी किए उठाने की कई व्‍यवस्‍थाएं हैं, इनमें कार्य स्थगन प्रस्ताव भी है। इसके द्वारा लोक सभा के नियमित काम-काज को रोककर तत्‍काल महत्‍वूपर्ण मामले पर चर्चा कराई जासकती है। इसके अलावा कई और तरीके हैं जैसे कि ध्‍यानाकर्षण, आपातकालीन चर्चाएं, विशेष उल्‍लेख, प्रस्‍ताव (मोशन), संकल्‍प, अविश्‍वास प्रस्‍ताव, निंदा प्रस्‍ताव वगैरह। आपने यह भी पूछा है कि दिन में कितनी बार सदन स्थगित हो सकता है। यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

पुनर्विचार याचिका क्या है? – मधु
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 137 और 145 के तहत अपीलीय अदालतों यानी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के बारे में कोई पक्ष पुनर्विचार याचिका दायर कर सकता है। यह याचिका अदालत के निर्णय के बाद तीस दिन के भीतर दाखिल की जानी चाहिए। पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद भी वह पक्ष उपचार याचिका या क्यूरेटिव पेटीशन दाखिल कर सकते है।

संसद की कार्यवाही में किसी भाषण के समय कुछ चीजें रिकॉर्ड से बाहर क्यों कर दी जाती है? –ज़ोया
यह संसद का अधिकार है कि वह कुछ खास शब्दों, अभिव्यक्तियों, विचारों या घटनाओं को आधिकारिक दस्तावेजों में नहीं रखना चाहती तो उसे रिकार्ड से बाहर कर दे। इस अधिकार का इस्तेमाल सामान्यतः पीठासीन अधिकारी के माध्यम से होता है।

नेशनल म्यूज़ियम दिल्ली में हम क्या कुछ देख सकते हैं ? –अभिषेक
दिल्ली का नेशनल म्यूजियम देश के सबसे बड़े संग्रहालयों में से एक है। इसकी स्थापना 1949 में हुई थी। इसमें प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक युग तक के लगभग 5000 साल के कालखंड की दो लाख कलाकृतियाँ तथा अन्य वस्तुएं रखी गईं है। यानी मोहेन-जोदाड़ो की वस्तुओं से लेकर गांधार कला की कृतियाँ और हाल के वर्षों तक की चीजें रखी हैं। इसका संचालन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत होता है।
रानी पद्मिनी कौन थी ,वे इतिहास में क्यों और किस घटना के लिए याद की जाती है?- केवल

रानी पद्मिनी, चित्तौड़ की रानी थी। सिंहल द्वीप के राजा गंधर्व सेन और रानी चंपावती की बेटी पद्मिनी चित्तौड़ के राजा रतनसिंह के साथ ब्याही गई थी। रानी पद्मिनी बहुत खूबसूरत थी और उनकी खूबसूरती पर एक दिन दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की बुरी नजर पड़ गई। अलाउद्दीन किसी भी कीमत पर रानी पद्मिनी को हासिल करना चाहता था, इसलिए उसने चित्तौड़ पर हमला कर दिया। रानी पद्मिनी ने आग में कूदकर जान दे दी, लेकिन अपनी आन-बान पर आँच नहीं आने दी। जनश्रुति है कि सन 1303 में चित्तौड़ के लूटने वाले अलाउद्दीन खिलजी की कामना रानी पद्मिनी को पाने की थी। श्रुति यह है कि उसने दर्पण में रानी की प्रतिबिंब देखा था और उसके सम्मोहित करने वाले सौंदर्य को देखकर अभिभूत हो गया था। लेकिन रानी ने लज्जा को बचाने के लिए जौहर करना बेहतर समझा। इनकी कथा कवि मलिक मुहम्मद जायसी ने अवधी भाषा में पद्मावत ग्रंथ रूप में लिखी है।

जेट लैग क्या होता है ? –वैभव

जेट लैग एक मनो-शारीरिक दशा है, जो शरीर के सर्केडियन रिद्म में बदलाव आने के कारण पैदा होती है। इसे सर्केडियन रिद्म स्लीप डिसॉर्डर भी कहते हैं। इसका कारण लम्बी दूरी की हवाई यात्रा खासतौर से पूर्व से पश्चिम या पश्चिम से पूर्व एक टाइम ज़ोन से दूसरे टाइम ज़ोन की यात्रा होती है। अक्सर शुरुआत में नाइट शिफ्ट पर काम करने आए लोगों के साथ भी ऐसा होता है। आपका सामान्य जीवन एक खास समय के साथ जुड़ा होता है। जब उसमें मूलभूत बदलाव होता है तो शरीर कुछ समय के लिए सामंजस्य नहीं बैठा पाता। अक्सर दो-एक दिन में स्थिति सामान्य हो जाती है। इसमें सिर दर्द, चक्कर आना, उनींदा रहना, थकान जैसी स्थितियाँ पैदा हो जाती है।
आरक्षण क्या है ? क्या ये ज़रूरी है ? –महेंद्र कुमार
आरक्षण का मतलब है किसी जगह, पद में किसी के लिए जगह सुरक्षित करना। आपका आशय सेवाओं और शिक्षा में आरक्षण से है। इसकी जरूरत तब पड़ती है जब किसी कारण से पीछे रह गए वर्ग विशेष को ताकत देना। भारत में अजा-जजा तथा शिक्षा और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था है। इसी प्रकार महिलाओं के लिए जन-प्रतिनिधि सदनों में आरक्षण की बात भी है, पर वह हो नहीं पाया है। मेरी समझ से पिछड़े तबकों के लिए आरक्षण व्यवस्था होनी चाहिए।

 
UGC नेट की परीक्षा जनसंचार और पत्रकारिता विषय में देना चाहता हूँ। किन किताबों को और कैसे तैयारी करूँ? –मयूर
सबसे पहला सुझाव यही है कि आप अपना सामान्य अध्ययन अच्छा रखें। पत्रकारिता के सिद्धांत और व्यवहार, इतिहास, नैतिकता और कानून तथा जनसंचार से जुड़े तमाम सवाल केवल पाठ्य पुस्तकें पढ़ कर ही समझ में नहीं आते। फिर भी कुछ किताबों का सुझाव इस तरह है।1.Mass Communication Theory : Dennis Mcquail, Vistar Publications, New delhi. 2.Journalism : Concept, Approaches and Global Impact : Jaya Chakravarty, Sarup and sons, New Delhi, 3.भारत में समाचार पत्र क्रांतिः रॉबिन जेफ्री, भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली, जनसंचार सिद्धांत और अनुप्रयोगः विष्णु राजगढ़िया, राधाकृष्ण प्रकाशन

चेक बाउंस होने पर फाइन क्यों लगता है? क्या ये फाइन हर बार एक सा रहता है? –हरमिंदर
आपका आशय बैंक के फाइन से है। यह शुल्क तो बैंक इसलिए लेता है, क्योंकि वह उसे क्लियरिंग तक भेजता है और उसपर धनराशि नहीं मिलता। यह राशि अलग-अलग बैंक अलग-अलग लेते हैं। यों बार-बार यह गलती होने पर बैंक आपकी चेकबुक सुविधा वापस ले सकते हैं और खाता बंद भी कर सकते हैं। चेक बाउंस होने के अनेक कारण हो सकते हैं। मसलन खाते में पैसा नहीं है, तारीख गलत लिख दी गई है, खातेदार के हस्ताक्षर नहीं मिलते वगैरह। अलबत्ता जिसने यह चेक दिया है उसकी जिम्मेदारी है कि भुगतान करे। यदि वह चेक में बताई गई राशि का भुगतान नहीं करता तो उसके खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्मेंट एक्ट की धारा 138 के तहत मुकदमा दायर किया जा सकता है जिसपर उसे सजा या जुर्माना कुछ भी हो सकता है।