Thursday, September 21, 2017

कुछ देशों में ट्रैफिक बाईं ओर और कुछ में दाईं ओर, ऐसा क्यों?

माना जाता है कि मोटर गाड़ियों के आविष्कार के पहले ब्रिटेन में सड़कों पर चलने वाली घोड़ागाड़ियों के कोचवानों को सड़क के बाईं तरफ चलना बेहतर लगता था. इससे उनके हाथ का कोड़ा सड़क के किनारे की झाड़ी से उलझता नहीं था. यह भी कहा जाता है कि बादशाह के अंगरक्षकों की तलवारें दाएं हाथ में होती थीं, इसलिए वे सड़क के किनारे की झाड़ियों से न टकराएं इस वजह से इस व्यवस्था को अपनाया गया. बहरहाल यह ब्रिटिश परंपरा उन देशों में कायम रही, जो अंग्रेजी राज का हिस्सा रहे. भारत सहित करीब 50 ऐसे देश हैं.

दूसरी ओर कहा जाता है कि नेपोलियन की सेना सड़क के दाईं तरफ चलती थी. उसने चूंकि तकरीबन पूरे यूरोप के जीत लिया था, इसलिए उसके हुक्म से ज्यादातर देशों में सड़क के दाईं तरफ ट्रैफिक चलने लगा. यूरोप में स्वीडन ऐसा देश था, जहाँ काफी देर तक ट्रैफिक सड़क के बाईं तरफ चलता था, पर 3 सितंबर 1967 से स्वीडन ने भी दाईं तरफ के ट्रैफिक को मंजूर कर लिया. इसके लिए करीब 600 ट्रैफिक लाइटों और 3,60,000 रोड साइनों को बदला गया.

हिन्दी दिवस मनाने की शुरुआत कब हुई?


भारतीय संविधान के भाग 17 के अनुच्छेद 343(1) में कहा गया है कि संघ की राज भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी. राजभाषा से जुड़े प्रस्ताव को संविधान सभा ने 14 सितम्बर 1949 को स्वीकार किया था. इसी निर्णय को प्रतिपादित करने और हिन्दी को हर क्षेत्र में बढ़ावा देने के इरादे से राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर सन 1954 से संपूर्ण भारत में 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस मनाने की परम्परा शुरू हुई. 10-11नवम्बर 1953 को काका साहब न. वि. गाडगिल की अध्यक्षता में नागपुर में हुए 'अखिल भारतीय राष्ट्रभाषा प्रचार सम्‍मेलन' के पांचवें अधिवेशन में इस आशय का औपचारिक प्रस्ताव पारित हुआ. इस प्रकार 14 सितम्बर 1954 को 'हिन्दी दिवस' मनाने का सिलसिला प्रारम्भ हुआ.

फल और सब्जी में अंतर क्या होता है?

यदि आपसे पूछा जाए कि आम फल है या सब्जी, तो आप आसानी से जवाब दे देंगे कि फल है. और पूछें कि लौकी के बारे में पूछें तो बता देंगे कि सब्जी. पर टमाटर, कद्दू या पके कटहल को लेकर संदेह होता है. वनस्पति विज्ञान के लिहाज से तीनों फल हैं. बल्कि इस सूची में काफी चीजें ऐसी हैं, जिन्हें हम सब्जी मानते हैं, वे फल हैं. 

सामान्यतः खाद्य वनस्पति जिसमें बीज होते हैं फल है और जिसमें बीज नहीं होते सब्जी है. इस परिभाषा से तमाम फलियाँ, मटर और खीरा तक फल हैं. वनस्पति विज्ञान के अनुसार बादाम, अखरोट, मूँगफली यानी नट भी फल हैं. अनाज भी, क्योंकि सब बीज हैं.

सवाल है कि तब सब्जी क्या है? पौधे में फल के अलावा जो कुछ खाद्य है वह सब्जी है. मसलन जड़ जैसे गाजर, मूली, पत्ते जैसे पालक, मेथी तना जैसे अदरक, फूल जैसे फूलगोभी और कंद जैसे आलू. तब फिर हम बहुत से फलों को सब्जी क्यों कहते हैं? यह परंपराओं की वजह से है. हमने स्वाद के आधार पर फल तय किए हैं. कटहल (जैकफ्रूट) की सब्जी भी बनती है और उसे पके फल की तरह भी खाते हैं. केले और पपीते का इस्तेमाल भी सब्जी की तरह होता है.

दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल?

लखनऊ के सिटी मांटेसरी स्कूल को दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल माना जाता है. गिनीज़ बुक ने सन 2013 में इसे रिकॉर्ड के रूप में दर्ज किया है. सन 2010-11 के शैक्षिक सत्र में इस स्कूल में 59,000 छात्र थे और 1050 क्लासरूम. इसके कर्मचारियों की संख्या थी 3800. 
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

Saturday, September 16, 2017

बवंडर या टॉर्नेडो क्या होते हैं?

टॉर्नेडो मूलतः वात्याचक्र हैं। यानी घूमती हवा। यह हवा न सिर्फ तेजी से घूमती है बल्कि ऊपर उठती जाती है। इसकी चपेट में जो भी चीजें आती हैं वे भी हवा में ऊपर उठ जाती हैं। इस प्रकार धूल और हवा से बनी काफी ऊँची दीवार या मीनार चलती जाती है और रास्ते में जो चीज़ भी मिलती है उसे तबाह कर देती है। इनके कई रूप हैं। इनके साथ गड़गड़ाहट, आँधी, तूफान और बिजली भी कड़कती है। जब से समुद्र में आते हैं तो पानी की मीनार जैसी बन जाती है। हमारे देश में तो अक्सर आते हैं।

घड़ी में ज्यादा से ज्यादा 12 ही क्यों बजते हैं?

हम जानते हैं कि धरती अपनी धुरी पर 24 घंटे में पूरी तरह घूमती है। इस 23 घंटे को हम एक दिन कहते हैं। दिन को हमने 24 घंटों में बाँटा। इन 24 में से आधे में दिन और आधे में रात होती है। इसलिए 12 घंटे की घड़ी होती है। दिन और रात को अंग्रेजी में एएम और पीएम लिखकर हम पहचानते हैं। यों 24 घंटे वाली घड़ियां भी होती हैं। रेलवे की घड़ी में तो 23 और 24 भी बजते हैं।

तीसरी दुनिया नाम किस तरह पड़ा?

तीसरी दुनिया शीतयुद्ध के समय का शब्द है। शीतयुद्ध यानी मुख्यतः अमेरिका और रूस का प्रतियोगिता काल। फ्रांसीसी डेमोग्राफर, मानव-विज्ञानी और इतिहासकार अल्फ्रेड सॉवी ने 14 अगस्त 1952 को पत्रिका ‘ल ऑब्जर्वेतो’ में प्रकाशित लेख में पहली बार इस शब्द का इस्तेमाल किया था। इसका आशय उन देशों से था जो न तो कम्युनिस्ट रूस के साथ थे और न पश्चिमी पूँजीवादी खेमे के नाटो देशों के साथ थे। इस अर्थ में गुट निरपेक्ष देश तीसरी दुनिया के देश भी थे। इनमें भारत, मिस्र, युगोस्लाविया, इंडोनेशिया, मलेशिया, अफ़ग़ानिस्तान समेत एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के तमाम विकासशील देश थे। यों माओत्से तुंग का भी तीसरी दुनिया का एक विचार था। पर आज तीसरी दुनिया शब्द का इस्तेमाल कम होता जा रहा है।

क्यूआर कोड क्या है?

क्यूआर का मतलब है क्विक रेस्पांस या क्विकली रीड कोड। इसे पढ़ने के लिए क्यूआर कोड रीडर और स्मार्टफोन से पढ़ा जा सकता है। इसके लिए फोन के अलग-अलग ओएस के प्लेटफॉर्मों के लिए विभिन्न एप्लीकेशन स्टोर में कई मुफ्त क्यूआर कोड रीडर मिलते हैं। क्यूआर कोड में ब्लैक एंड ह्वाइट पैटर्न के छोटे-छोटे स्क्वायर यानी वर्ग होते हैं। इन्हें आप कई जगह देखते है, जैसे कि उत्पादों पर, मैगज़ीन किताबों और अखबारों में। इस कोड को टेक्स्ट, ईमेल, वैबसाइट, फोन नंबर और अन्य से सीधे लिंक किया जाता है। जब आप किसी उत्पाद पर छपे क्यूआर कोड को स्कैन करते है, तब आप इंटरनेट की मदद से सीधे उस साइट पर जा सकते है, जहाँ पर उसके बारे में ज्यादा जानकारी होती है। क्यूआर कोड को 1994 में टयोटा समूह में एक जापानी सहायक, डेन्सो वेव ने बनाया था। तब इसका उद्देश्य था किसी वाहन के निर्माण के दौरान उसे ट्रैक करना।

जब भाषाएं नहीं थीं तब इंसान कैसे बात करते थे?

आप इस चीज़ को छोटे बच्चों में देखने की कोशिश करें। वे भाषा को नहीं जानते, पर अपनी बात कह लेते हैं। मनुष्य की मूल प्रवृत्ति संचार की है। भाषा का विकास अपने आप होता गया और हो रहा है। जब भाषाएं नहीं बनीं थीं तब भी आवाजों, इशारों की भाषा थी।
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

संसद के अध्यक्ष को स्पीकर क्यों कहते हैं?

भारत की संसदीय प्रणाली ब्रिटिश प्रणाली के आधार पर विकसित हुई है. स्पीकर शब्द ब्रिटिश संसद से हमने लिया है. युनाइटेड किंगडम की संसद का विकास जब हो रहा था, तब सदस्य अपने बीच में से किसी एक सदस्य को चुनते थे, जिसका काम था उनकी बात को कहना. खासतौर से राजा के साथ संवाद करना. ऐसे सदस्य को कहा जाता था मिस्टर स्पीकर. तब राजा बहुत ताकतवर होते थे और संसद की राय उनके पास मिस्टर स्पीकर के मार्फत जाती थी शब्द बाद में केवल स्पीकर रह गया. . यदि राजा को राय पसंद नहीं आई तो स्पीकर को सज़ा भी भुगतनी पड़ती थी. सन 1394 से 1535 के बीच सज़ा के तौर पर सात स्पीकरों की गर्दनें काटी गईं थी. बहरहाल स्पीकर शब्द का पहला इस्तेमाल सन 1377 (सर टॉमस हंगरफोर्ड) में दर्ज है. इसके पहले इस अर्थ में पार्लर और प्रोलोक्यूटर जैसे शब्द भी प्रचलन में थे.

ऑक्सीजन की खोज किसने की?
ऑक्सीजन का किसी ने आविष्कार नहीं किया है, बल्कि यह वातावरण में उपस्थित महत्वपूर्ण गैस है. अलबत्ता इसे रासायनिक तरीके से प्राप्त करने का काम सबसे पहले 1772 में स्वीडन के वैज्ञानिक Carl Wilhelm Scheele नामक वैज्ञानिक ने किया था. इसे हिंदी में प्राणवायु भी कहते हैं. वायु में क़रीब 21% मात्रा ऑक्सीजन की होती है. हवा के अलावा ऑक्सीजन पृथ्वी के अनेक दूसरे पदार्थों में भी रहती है. जैसे पानी में. कई प्रकार के ऑक्साइडों जैसे पारा, चाँदी आदि अथवा डाई ऑक्साइडों लैड, मैंगनीज में. फ्रांसीसी वैज्ञानिक अंतों लैवोइजियर (Antoine Laurent Lavoisier ) ने सन 1777 में इसे ऑक्सीजन नाम दिया.

अंतरिक्ष में जाने वाले रॉकेट के कई स्टेज क्यों होते हैं?
यह सिद्धांत बीसवां सदी के शुरू में रूसी अध्यापक कोंस्तांतिन सिल्कोवस्की ने बनाया था कि अंतरिक्ष यात्रा के लिए कई चरण वाले रॉकेट की जरूरत होगी. इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति को पार करने के लिए एक से ज्यादा रॉकेटों की जरूरत होगी. सामान्यतः आज तीन चरणों वाले रॉकेटों से यह काम लिया जाता है. सबसे नीचे वाला रॉकेट सबसे पहले शुरू होता है. दूसरा चरण जब शुरू होता है तबतक रॉकेट की स्पीड काफी ज्यादा हो चुकी होती है. कई चरणों का फायदा यह भी है कि जैसे ही एक चरण का काम पूरा होता है, वह हिस्सा अलग हो जाता है. इससे रॉकेट का वज़न कम हो जाता है. एक ही रॉकेट हो तो यात्रा के दौरान उसका वज़न कम कर पाना संभव नहीं होगा.

सिक्के गोल क्यों होते हैं, चौकोर क्यों नहीं?
यह बात पूरी तरह सच नहीं है. पचास के दशक तक भारत में दो आने और दो पैसे का सिक्का चौकोर ही होता था. चौकोर सिक्कों के और भी उदाहरण हैं, पर सच है कि ज्यादातर सिक्के गोल होते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि उन्हें बैग में या पोटली में रखना आसान है. उनके किनारे घिसते या टकराते नहीं हैं. दुनिया में अलग-अलग आकृतियों के सिक्के बनाने की कोशिशें हुईं हैं, पर व्यावहारिक रूप से गोल सिक्के ही सफल हुए हैं.

शहरों में दूसरे पक्षियों के मुकाबले कबूतर ज्यादा क्यों होते हैं?
कबूतर सामान्यतः चट्टानों के बीच की दरारों में रहते हैं. शहरों में मकानों की छतों, मुंडेरों और बाल्कनियों के बीच ऐसी जगहें आसानी से मिलती हैं, जहाँ वे रह सकते हैं. इसके अलावा कबूतर मनुष्य को नुकसान नहीं पहुँचाते, उनका गोश्त स्वादिष्ट नहीं होता. यानी उनके गोश्त को बहुत कम लोग खाते हैं और सबसे बड़ी बात उन्हें चील जैसे जिन बड़े पक्षियों से खतरा होता है, उनके लिए शहरों के भीतर घुसकर उनका शिकार करना मुश्किल होता है.  

प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

Thursday, September 14, 2017

पक्षी सोते समय नीचे क्यों नहीं गिरते?

आपका सवाल यह भी हो सकता है कि पक्षी अपने घोंसले में क्यों नहीं सोते। दरअसल वे घोसला सोने के लिए नहीं अंडों को सुरक्षित रखने के लिए बनाते हैं। अंडे सेने के वक्त कोई माता या पिता पक्षी घोंसले में रहता है। अन्यथा सोते वे किसी पेड़ की डाल पर या किसी अन्य सुरक्षित जगह पर हैं। पक्षी जब पेड़ की डाल पर बैठता हैं तो उनके पंजों की खास बनावट उन्हें डाल से "बांध" देती है। जैसे ही पक्षी डाल पर या तार पर बैठता है उसके शरीर के बोझ की वजह से पंजे के स्नायु डाल या तार के ऊपर मजबूती से जुड़ जाते हैं और फिर जब उसे उड़ना होता है तो उसे ठीक उसी तरह से प्रयास करना पड़ता है जिस तरह से हमें लटकने के लिए प्रयास करना पड़ता है। पक्षी डाल पर बैठ कर आराम से सो सकता है क्योंकि उसके पंजों की बनावट उसे गिरने नहीं देती। परंतु यह गुण हर पक्षी को नहीं मिला। शुतुरमुर्ग कभी डाल पर नहीं सो सकता और ना ही बतख। उनके पंजों की सरंचना अलग है और वे जमीन पर ही सो सकते हैं।

ताजमहल का चीफ आर्किटेक्ट कौन था?
ताजमहल का वास्तुकार कौन है यह दावे के साथ आज भी नहीं कहा जा सकता। इतना जरूर समझ में आता है कि वास्तुकारों और निर्माण विशेषज्ञों के समूह के साथ शाहजहाँ स्वयं भी सक्रिय रूप से इसमें शामिल थे। उस्ताद अहमद लाहौरी को इसका श्रेय देने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त व्यक्ति माना जाता है, एक प्रधान वास्तुकार के रूप में। यह भी माना जाता है कि तुर्की के इस्माइल अफांदी से भी सलाह ली गई थी।

पहली मिस इंडिया कौन थी?
माना जाता है कि पहली मिस इंडिया एस्थर अब्राहम थीं, जो 1947 में चुनी गईं। उन्होंने प्रमिला नाम से फिल्मों में भी काम किया। अलबत्ता पहली बार मिस युनीवर्स में भारत की ओर से भाग लेने 1952 में गईं इन्द्राणी रहमान। मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में पहली बार 1959 में हिस्सा लेने गईं फ्लोर एज़ीकेल। 1966 में पहली बार किसी भारतीय स्त्री को विश्व प्रतियोगिता जीतने का मौका मिला जब रीता फारिया मिस वर्ल्ड बनीं। इसके बाद 1994 में ऐश्वर्या राय, 97 में डायना हेडेन, 99 में युक्ता मुखी और 2000 में प्रियंका चोपड़ा मिस वर्ल्ड बनीं। इसी तरह 1994 में सुष्मिता सेन और 2000 में लारा दत्ता मिस युनीवर्स बनीं। सन 2010 में निकोल फारिया मिस अर्थ बनीं। मिस एशिया पैसिफिक में भी भारतीय सुन्दरियों को पुरस्कार मिले हैं। सन 1970 में ज़ीनत अमान, 1973 में तारा अन्ना फोनेस्का और 2000 में दिया मिर्ज़ा मिस एशिया पैसिफिक बनीं। यह सूची काफी लम्बी है।

निगेटिव ब्लड ग्रुप किसे कहते हैं? यह इतना रेयर क्यों होता है?
खून के ग्रुप सिस्टम में सबसे कॉमन एबीओ सिस्टम है। रेड ब्लड सेल्स पर प्रोटीन की कोटिंग के आधार पर चार ग्रुप बनते हैं ए बी एबी और ओ। इसके बाद ए1, ए2 ए1बी या ओ2बी सब ग्रुप बनते हैं। इसके अलावा एक प्रोटीन इन ग्रुपों को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे आरएच फैक्टर कहते हैं। यदि यह खून में होता है तो खून के टाइप को पॉज़िटिव और नहीं होता तो निगेटिव कहते हैं। इनमें ओ निगेटिव का सभी रक्त समूहों से मेल हो सकता है। इसलिए इसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है।

क्या हमारे देश के कोई राष्ट्रपति पाकिस्तान गए हैं?

अभी तक हमारे देश के कोई राष्ट्रपति पाकिस्तान नहीं गए हैं। अलबत्ता 13 अप्रेल 1955 में पाकिस्तान के तत्कालीन हाई कमिश्नर ने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के पास जाकर उनसे 14 अगस्त को पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर पाकिस्तान आने का निमंत्रण दिया था। पर यह यात्रा हो नहीं पाई।
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 28 मई 2017 को प्रकाशित

Monday, September 11, 2017

भारत का पहला रेडियो स्टेशन कहाँ बना?

भारत में रेडियो प्रसारण की शुरूआत 1920 के दशक में हुई। पहला कार्यक्रम 1923 में मुंबई के रेडियो क्‍लब द्वारा प्रसारित किया गया। इसके बाद 1927 में मुंबई और कोलकाता में निजी स्‍वामित्‍व वाले दो ट्रांसमीटरों से प्रसारण सेवा की स्‍थापना हुई। सन 1930 में सरकार ने इन ट्रांसमीटरों को अपने नियंत्रण में ले लिया और भारतीय प्रसारण सेवा के नाम से उन्‍हें परिचालित करना आरंभ कर दिया। 1936 में इसका नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो कर दिया और 1957 में आकाशवाणी के नाम से पुकारा जाने लगा।

टॉर्नेडो क्या होते हैं?
टॉर्नेडो मूलतः वात्याचक्र हैं। यानी घूमती हवा। यह हवा न सिर्फ तेजी से घूमती है बल्कि ऊपर उठती जाती है। इसकी चपेट में जो भी चीजें आती हैं वे भी हवा में ऊपर उठ जाती हैं। इस प्रकार धूल और हवा से बनी काफी ऊँची दीवार या मीनार चलती जाती है और रास्ते में जो चीज़ भी मिलती है उसे तबाह कर देती है। इनके कई रूप हैं। इनके साथ गड़गड़ाहट, आँधी, तूफान और बिजली भी कड़कती है।

क्या सलीम-अनारकली की कहानी सच्ची है?
सलीम-अनारकली की कहानी इतिहास सम्मत नहीं है। अलबत्ता वह इतनी लोकप्रिय है कि लोग उसे ऐतिहासिक मानते हैं। मान्यता है कि अनारकली पंजाब में लाहौर के आसपास की रहने वाली थी। लाहौर में अनारकली की एक मज़ार भी है। लाहौर का अनारकली बाजार शहर का सबसे पुराना बाजार है।

हमारे राष्ट्रीय चिह्न का मतलब क्या है?
सारनाथ में अशोक ने जो स्तम्भ बनवाया था उसके शीर्ष भाग को सिंहचतुर्मुख कहते हैं। इस मूर्ति में चार शेर पीठ-से-पीठ सटाए खड़े हैं। यह सिंहचतुर्मुख स्तम्भ शीर्ष ही भारत के राष्ट्रीय चिह्न के रूप में स्वीकार किया गया है। इसके आधार के मध्य भाग में बने चार सिंह शक्ति, साहस, शौर्य और विश्वास के प्रतीक हैं। आधार पर बने सिंह, हाथी, घोड़ा और वृषभ चार दिशाओं के रक्षक हैं। आधार के बीचों बीच बना धर्मचक्र गतिशीलता का प्रतीक है। उसे भारत के राष्ट्रीय ध्वज में बीच की सफेद पट्टी में रखा गया है।

आकाशीय बिजली से क्या बिजली बन सकती है?

1980 के दशक से कोशिश हो रही है कि आकाशीय बिजली की उसी तरह हार्वेस्टिंग की जाए जैसे बरसात के पानी की हो रही है। चूंकि यह बिजली किसी छोटी सी जगह गिरती है और बहुत कम समय के लिए होती है इसलिए वे तरीके खोजे जा रहे हैं जिनमें इसका इस्तेमाल हो सके। मसलन पानी को गर्म करने या उसमें से हाइड्रोजन गैस को अलग करने में इसकी भूमिका हो सकती है। अमेरिका की एक कम्पनी ऑल्टरनेट इनर्जी होल्डिंग्स इनकॉरपोरेट ने कृत्रिम तड़ित के सहारे 60 वॉट का बल्ब बीस मिनट तक जलाने में कामयाबी हासिल की। पर यह सब प्रयोग के स्तर पर ही है।

दुनिया में कितनी भाषाएं/बोलियाँ हैं?
एथनोलॉग कैटलॉग के अनुसार दुनिया में 7099 जीवंत भाषाओं की जानकारी उनके पास है। इनके बारे में जानकारी यहाँ मिल सकती है https://www।ethnologue।com/

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

दुनिया में सबसे ज्यादा गर्मी कहां पड़ती है और सबसे ठंडा देश कौन है?

उत्तरी इथोपिया का डल्लोल शहर दुनिया का सबसे गर्म आबाद स्थान माना जाता है। यहाँ 1960 से 1966 के बीच औसत दैनिक तापमान 34.4 डिग्री सैल्शियस दर्ज किया गया। इस दौरान औसत अधिकतम तापमान 41 डिग्री और किसी-कसी दिन 55 डिग्री से ऊपर चला जाता है। अमेरिका की डैथवैली में 1913 में तापमान 56.7 डिग्री दर्ज किया गया।

डेनमार्क के अधीन ग्रीनलैंड प्रायः हर समय बर्फ की चादर से ढका रहता है इसलिए सबसे ठंडा इलाका कह सकते हैं। अलबत्ता कनाडा और रूस दूसरे और तीसरे नम्बर के देश कहे जा सकते हैं जहाँ -5 और -6 डिग्री औसत तापमान होता है। दुनिया की सबसे ठंडी जगह यों तो अंटार्कटिक में रिज ए मानी जाती है। वहाँ का न्यूनतम तापमान -90 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला जाता होगा। यह अनुमान है, क्योंकि इस 15000 मीटर ऊँची पहाड़ी पर मनुष्य के पैर आजतक नहीं पड़े हैं।

अंटार्कटिक में ही रूस के स्टेशन वोस्तोक में -89.2 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया है। रूस के साखा गणराज्य के गाँव ओमायाकोन को दुनिया का सबसे ठंडा आबाद क्षेत्र माना जाता है। आर्कटिक के पास के इस इलाके में जनवरी में तापमान -50 से -65 डिग्री के बीच रहता है। यों 6 फरवरी 1933 को यहाँ का तापमान -69.2 दर्ज किया गया था, जो दुनिया के किसी भी बसे हुए क्षेत्र का न्यूनतम दर्ज तापमान है।

ज्यादातर पंखों में तीन ब्लेड ही क्यों होते हैं ?
चार ब्लेड वाले पंखे भी होते हैं, पर एक दूसरे से 120 अंश की दूरी पर ब्लेड लगाने से हवा का कटान अच्छा होता है और किफायती भी। आप चार या पाँच ब्लेड लगाएंगे तो कीमत बढ़ेगी और बिजली का खर्च भी।

दुनिया की पहली मस्जिद कौन सी है?

दुनिया की पहली मस्जिद मुहम्मद साहब ने बनवाई थी, जो मदीना, मुनव्वराह में मस्जिदे क़ुबा कहलाती है।

रावण के पिता का नाम क्या था?

विश्रवा। विश्रवा महान ऋषि पुलस्त्य के पुत्र थे। उनकी माता का नाम हविर्भुवा था। विश्रवा अपने पिता के समान वेदों के विद्वान थे।

भगवत गीता क्या है?

महाभारत के छठे खंड का हिस्सा है भगवत गीता। सम्भवतः इस ग्रंथ की रचना महाभारत से अलग की गई थी, पर कालांतर में यह उसका अंग बन गई। इसकी रचना शायद ईसा की पहली या दूसरी सदी में हुई। इस पर कई टीकाएं और व्याख्यात्मक पुस्तकें लिखी गईं, जो गीता जितनी महत्वपूर्ण हो गईं। पहली टीका आदि शंकराचार्य ने लिखी थी। उनके अलावा भास्कर, रामानुज, मध्व, नीलकंठ, श्रीधर, और मधुसूदन की प्राचीन टीकाएं उपलब्ध हैं। इसे गीतोपनिषद भी कहा जाता है। गीता के कुछ महत्वपूर्ण भाष्य इस प्रकार हैं गीताभाष्य - आदि शंकराचार्य, ज्ञानेश्वरी- संत ज्ञानेश्वर ने संस्कृत से गीता का मराठी में अनुवाद किया, श्रीमद् भगवद् गीता यथारूप-प्रभुपाद, गीतारहस्य – बाल गंगाधर तिलक, अनासक्ति योग-महात्मा गांधी, गीताई - विनोबा भावे।
राजस्थान पत्रिका  के नॉलेज कॉर्नर में 14 मई 2017 को प्रकाशित

Sunday, September 10, 2017

 फिफ्थ कॉलम क्या है?

घर के भीतर छिपा दुश्मन। फिफ्थ कॉलम उस गुप्त विद्रोही संगठन को कहते हैं जो किसी देश या संगठन के भीतर रहकर उसका विरोध करे। ये शब्द स्पेन के गृहयुद्ध के दौरान जनरल ऐमीलियो मोला ने सन 1936 में एक पत्रकार से कहे थे। उन्होंने कहा कि राजधानी मैड्रिड को रिपब्लिकन बलों के हाथ से छुड़ाने के लिए सेना के चार दस्ते प्रवेश करेंगे जबकि जनरल फ़्रैंको के समर्थकों का एक दस्ता राजधानी के अंदर मौजूद है जो हमला होते ही उसमें शामिल हो जाएगा। तबसे यह शब्द खासा प्रचलित हो गया। अर्नेस्ट हेमिंग्वे के एकमात्र नाटक का शीर्षक ‘फिफ्थ कॉलम’ है, जिसे उन्होंने 1938 में प्रकाशित अपनी किताब में शामिल किया।

एमआई-6 का मतलब क्या है?

ब्रिटेन की गुप्तचर सेवा सीक्रेट इंटेलिजेंस सर्विस (एसआईएस) को कभी-कभी एम आई-6 के नाम से जाना जाता है। इसका मतलब हुआ मिलिट्री इंटेलिजेंस सेक्शन-6। इसकी शुरुआत गुप्तचर सेवा ब्यूरो के विदेश विभाग के रूप में 1909 में हुई थी और इसका काम था विदेशों से ख़ुफ़िया जानकारी जमा करना। आंतरिक जासूसी का काम एमआई-5 का था। 85 साल तक ब्रिटिश सरकार ने इसके बारे में सार्वजनिक रूप से घोषणा नहीं की। यह खुफिया संगठन पूरी तरह गोपनीय था। सन 1994 में देश में इंटेलिजेंस सर्विस एक्ट बनने के बाद इसे औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया।

हाइड्रोजन बम क्या होता है?
हाल में उत्तरी कोरिया ने हाइड्रोजन बम के पहले सफल परीक्षण का दावा किया है। हाइड्रोजन बम में चेन रिएक्शन फ्यूजन होता है। यह न्यूक्लियर बम के मुकाबले कई गुना ज्यादा विनाशकारी होता है। न्यूक्लियर या एटम बम में नाभिकीय विखंडन से प्राप्त भयावह ताप का इस्तेमाल होता है। इसे फिशन बम भी कहते हैं। ऐसे हथियारों में संवर्धित यूरेनियम या प्लूटोनियम का इस्तेमाल होता है। यह हथियार जिस इलाके में गिराया जाता है वहाँ नाभिकीय विस्फोटों की श्रृंखला (चेन रिएक्शन) पैदा होती जाती है।

हाइड्रोजन बम में परमाणुओं के संलयन करने से विस्फोट होता है। इस संलयन के लिए बड़े ऊंचे ताप लगभग 500,00,000 डिग्री सेल्सियस की आवश्यकता पड़ती है। परमाणु बम द्वारा ही इतना ऊंचा ताप प्राप्त किया जा सकता है। ये हथियार हाइड्रोजन के आइसोटोप ट्रीटियम और ड्यूटीरियम के बीच संलयन या फ्यूज़न पैदा करते हैं। अमेरिकी वैज्ञानिक एडवर्ड टैलर और स्तानिस्लाव यूलैम ने सन 1951 में इसका विकास किया था। इसे ट्रिगर करने के लिए फिशन का इस्तेमाल होता है और फिर नाभिकीय फ्यूज़न से भयानक ऊर्जा पैदा होती है। दुनिया में केवल अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और भारत ही फ्यूज़न बम का विस्फोट करने में सफल हुए हैं।

दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन कौन सा है?

न्यूयॉर्क शहर का ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन इस आधार पर माना जा सकता है कि इसमें सबसे ज्यादा 44 प्लेटफॉर्म हैं। इनके साथ 67 ट्रैक जुड़े हैं। ये प्लेटफॉर्म दो मंजिलों पर बने हैं।

Friday, September 8, 2017

मंत्रिमंडल को कैबिनेट क्यों कहते हैं?

कैबिनेट एक अनौपचारिक व्यवस्था है, जिसने औपचारिक रूप धारण कर लिया है. संविधान में मंत्रिपरिषद या कौंसिल ऑफ मिनिस्टर्स की व्यवस्था है. कैबिनेट शब्द हमने ब्रिटिश संसदीय प्रणाली से लिया है, जिसमें कुछ वरिष्ठ मंत्री इसके सदस्य होते हैं, जो प्रधानमंत्री के साथ मिलकर नीतिगत निर्णय करते हैं. पुराने जमाने में ये सदस्य जिस कक्ष में बैठकर मंत्रणा करते थे, उसे केबिन कहा जाता था. उससे ही कैबिनेट शब्द बना.

दुनिया का चक्कर लगाने वाला पहला व्यक्ति कौन था?

पुर्तगाली नाविक फर्दिनांद मैगलन को पहली बार दुनिया का चक्कर लगाने का श्रेय दिया जाता है. हालांकि उसके साथ कुछ और लोग भी थे, पर टीम लीडर के रूप में उसका नाम ही लिया जाता है. यों उसने यह चक्कर भी पूरा नहीं किया और रास्ते में उसकी हत्या कर दी गई. पर उसने मुख्य यात्रा-पथ पूरा कर लिया था. मैगलन और उनकी टीम 20 सितंबर 1519 को स्पेन के राजा के आदेश से 'मसाला द्वीप' (मलेशिया का मलुकु द्वीप) का पश्चिम से होकर रास्ता खोजने के लिए निकली थी. इस टीम में 250 नाविक थे. ये लोग यूरोप से अमेरिका होकर प्रशांत महासागर पार करके पूर्वी एशिया में आए थे.

पैसिफिक महासागर नाम मैगलन ने ही रखा था. गंतव्य तक पहुँचने के पहले इस दल का संघर्ष फिलीपाइंस में स्थानीय लोगों से हुआ, जिसमें 27 अप्रैल 1521 को मैगलन मारा गया. उसकी मौत के बावजूद यह टीम यात्रा पूरी करके मसाला द्वीप तक पहुँची. 6 सितंबर 1522 को इस टीम के बचे-खुचे 17 सदस्य स्पेन पहुँचे. इन्होंने दुनिया का पहला चक्कर लगाया, हालांकि उनका इरादा ऐसा रिकॉर्ड बनाने का नहीं था.

1-10 संख्याओं को अरेबिक न्यूमरल (अरबी अंक) क्यों कहते हैं?

इन्हें गलती से अरबी अंक कहा गया और यह परंपरा चली आ रही है. वस्तुतः इन्हें भारतीय अंक कहा जा सकता है, क्योंकि इन अंकों का निर्धारण प्राचीन भारत में हुआ था. चूंकि नौवीं सदी तक ज्यादातर भारतीय ज्ञान दुनिया को अरब देशों के मार्फत ता, इसलिए यह मान लिया गया कि ये संख्याएं अरबी हैं. ईसवी सन 830 के आसपास फारसी गणितज्ञ अल-ख्वारिज्मी ने इस अंक पद्धति का इस्तेमाल किया. उन्हें यह जानकारी अरब देशों से मिली थी, इसलिए उन्होंने इन्हें अरबी अंक लिखा.

अरब लोग इन अंकों को हिंदसा यानी भारतीय कहते थे. धीरे-धीरे इस पद्धति ने रोमन पद्धति की जगह ली. रोमन अंक पद्धति होती है VI, VII, IX, X, L,C वगैरह. ऐसे में संख्याएं लिखने के लिए बहुत ज्यादा जगह चाहिए और उन्हें पढ़ना भी बहुत कठिन होता है. प्राचीन भारतीय गणितज्ञों ने करीब 2000 साल पहले दाशमिक पद्धति का आविष्कार कर दिया था.

सागर कितना गहरा होता है?

समुद्रों की गहराई अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग होती है. सारी दुनिया के सागरों की औसत गहराई 12,100 फुट है. इसकी तुलना सबसे ऊँचे पर्वत शिखर एवरेस्ट से करें जिसकी ऊँचाई 29,029 फुट है. दुनिया में सबसे गहरा सागर पश्चिमी प्रशांत महासागर के मैरियाना ट्रेंच में है, जिसे चैलेंजर डीप कहा जाता है. इसकी गहराई को सबसे पहले 1875 में ब्रिटिश पोत एचएमएस चैलेंजर के नाविकों ने नापा था. यह गहराई 35,755 से लेकर 35,814 फुट (10,898 से लेकर 10,916 मीटर) के बीच है. यानी एवरेस्ट पूरा डूब जाए और फिर भी करीब पौने छह हजार फुट ज्यादा हों. 

खिलाड़ी आइसबाथ क्यों लेते हैं?

आइसबाथ यानी बर्फस्नान. बर्फ या बर्फ जैसा ठंडा पानी शरीर में सूजन और दर्द को कम करता है. खिलाड़ी चूंकि लगातार श्रम करते हैं, इससे उनकी माँस-पेशियों में थकान, चोट और सूजन भी आ जाती है. आइसबाथ इसे ठीक करने में सहायक है और अब यह खिलाड़ियों के बीच काफी लोकप्रिय होता जा रहा है. 
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

Monday, September 4, 2017

न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली

संविधान के अनुच्छेद 124 की व्यवस्था और तीन जजों के केस (1982,1993,1998) के आधार पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्टों में जजों की नियुक्ति की व्यवस्था को कॉलेजियम प्रणाली कहते हैं. राष्ट्रपति द्वारा यह नियुक्ति जजों के एक कॉलेजियम की संस्तुति के आधार पर होती है. इस कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश और चार वरिष्ठतम जज होते हैं. हाईकोर्ट के जजों के तबादले वगैरह के मामलों में संबद्ध हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से भी सलाह ली जाती है. सन 1993 में इस प्रणाली के लागू होने के पहले तक राष्ट्रपति केंद्रीय कैबिनेट की सलाह पर जजों की नियुक्तियाँ करते थे. 1993 से लागू इस सिस्टम के जरिए ही जजों के ट्रांसफर, पोस्टिंग और प्रमोशन का फैसला होता है.

इस सिस्टम को नया रूप देने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग(NJAC) बनाया था. यह सरकार द्वारा प्रस्तावित एक संवैधानिक संस्था थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया. NJAC में 6 सदस्य रखने का प्रस्ताव था, जिसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के साथ सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठ जज, कानून मंत्री और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ीं दो जानी-मानी हस्तियों को बतौर सदस्य शामिल करने की बात थी.

शिक्षक दिवस 5 सितंबर को मनाना कब से शुरू हुआ?
सन 1962 में डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन राष्ट्रपति बने. उस साल उनके कुछ छात्र और मित्र 5 सितम्बर को उनके जन्मदिन का समारोह मनाने के बाबत गए. इस पर डॉ राधाकृष्णन ने कहा, मेरा जन्मदिन यदि शिक्षक दिवस के रूप में मनाओ तो बेहतर होगा. मैं शिक्षकों के योगदान की ओर समाज का ध्यान खींचना चाहता हूँ. और तब से 5 सितम्बर शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जा रहा है. इस भारतीय परंपरा के अलावा संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन युनेस्को ने सन 1994 में निर्णय किया कि हर साल 5 अक्टूबर को विश्व अध्यापक दिवस मनाया जाएगा. तबसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्व अध्यापक दिवस मनाया जा रहा है.

क्रीमीलेयर क्या होती है?
क्रीमीलेयर का शाब्दिक अर्थ है मलाई की परत, पर व्यावहारिक रूप से इसका इस्तेमाल भारत में ओबीसी आरक्षण के संदर्भ में किया जाता है. इसका मतलब है आरक्षण का लाभ ले रहे वर्ग में अपेक्षाकृत समृद्ध और शिक्षित व्यक्ति. इस शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल तमिलनाडु में ओबीसी आरक्षण के संदर्भ में बनाए गए सत्तनाथन आयोग ने 1970 में किया था. सन 1993 में सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी बनाम भारतीय संघ केस में ओबीसी आरक्षण से जुड़ी कई बुनियादी बातों को शामिल किया. इनमें यह बात भी थी कि ‘क्रीमीलेयर’ में आ चुके लोगों को आरक्षण का लाभ न दिया जाए. सन 1973 में एक लाख रुपये या ज्यादा की सालाना आमदनी को क्रीमी लेयर के अंतर्गत माना गया. सन 2004 में इसे 2.5 लाख, 2008 में 4.5 लाख, 2013 में 6 लाख कर दिया गया. अक्तूबर 2015 में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने इसे 15 लाख रुपये करने की संस्तुति की. 23 अगस्त 2017 को केंद्र सरकार ने इसे 8 लाख करने की घोषणा की है. क्रीमीलेयर केवल ओबीसी आरक्षण पर लागू होती है. अजा-जजा आरक्षण पर नहीं.

क्या सौरमंडल में ऐसे ग्रह भी हैं, जो ठोस नहीं हैं?
ऐसे ग्रहों को Jovian Planets या गैस दानव भी कहा जाता है. इनमें मिट्टी-पत्थर के बजाय ज़्यादातर गैस ही गैस होती है. इनका आकार बहुत बड़ा होता है. हमारे सौर मण्डल में चार ग्रह इस श्रेणी में हैं-बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेप्च्यून. इनमें पाई जाने वाली गैस ज़्यादातर हाइड्रोजन और हीलियम होती है, कुछ और गैसें भी मिलती हैं, जैसे कि अमोनिया.
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित