Sunday, July 29, 2018

‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ मुहावरा क्यों बना?

हमारे देश में यह वाक्यांश राजनीति का हिस्सा है और उसी अर्थ में इस्तेमाल होता है। अलबत्ता अमेरिकन इंग्लिश में इसका इस्तेमाल पहले जबर्दस्त मोल-भाव (हार्ड बार्गेनिंग) के अर्थ में होता था। आज हम जिस राजनीतिक अर्थ में इसका इस्तेमाल करने लगे हैं, उसका मतलब है सरकार बनाने के वास्ते समर्थकों की खरीद में होने वाला मोल-भाव, जबकि उन्नीसवीं सदी के अमेरिका में घोड़ों की खरीद में होने वाले मोल-भाव के अर्थ में ही इसका इस्तेमाल होता था। उन दिनों घोड़ों की खरीद-फ़रोख्त में काफी मोल-भाव होता था। चूंकि उस मोल-भाव में चालाकियों, क्षुद्रताओं और झूठ का सहारा लिया जाता था, इसलिए अमेरिकन अंग्रेजी के इस्तेमाल में ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ के शुरुआती अर्थ बड़े तर्क-वितर्क, चतुराई से भरे मोल-भाव या हार्ड बार्गेनिंग के थे। यानी जीवन के किसी भी क्षेत्र में हुआ तर्क-वितर्क ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ था। मसलन ‘आफ्टर ए लॉट ऑफ ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ द एग्रीमेंट फाइनालाइज़्ड।’

जिन दिनों यह मुहावरा बन रहा था, वह अमेरिकी कारोबार में नैतिक मूल्यों की गिरावट का दौर था। उसे ‘गिल्डेड एज’ कहते हैं। प्रशासन की ओर से कारोबारी मूल्यों-मानकों को स्थापित करने की कोशिशें की जा रहीं थीं। सरकार ने अखबारों की फर्जी प्रसार संख्या दिखाने के खिलाफ एक कानून बनाने का प्रस्ताव किया। इस पेशकश के खिलाफ न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक सम्पादकीय लिखा, जिसमें हॉर्स-ट्रेडिंग का जिक्र है। अख़बार ने 22 मार्च 1893 के अंक में लिखा।‘यदि झूठ बोलने पर कानूनन रोक लगा दी जाएगी, तो हॉर्स-ट्रेडिंग का तो कारोबार ही ठप हो जाएगा।’ भारत की तरह अमेरिका में भी वह बदलाव का समय था। सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार काफी था। वोटरों की चुनाव में बहुत ज्यादा दिलचस्पी थी। उन्हें लगता था कि उससे बदलाव आएगा वगैरह। ऐसे दौर में ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ का मतलब था अनैतिक व्यापार।

भारत में इस शब्द का इस्तेमाल साठ के दशक में जब पहली बार दल-बदल की समस्या सामने आई, तब अंग्रेजी के अखबारों ने शुरू किया। हालांकि भारतीय भाषाओं के अखबारों ने ‘आया राम, गया राम’ जैसे सार्थक मुहावरे गढ़े थे, पर ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ में बिक्री का बोध होता था। सामान्य नागरिक के मन में ‘बिकने को उत्सुक जन-प्रतिनिधि’ की जो छवि बनी उसे ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ वाक्यांश बेहतर व्यक्त करता है। यों राजनीति को ‘मछली बाजार’ और ‘भिंडी बाजार’ जैसे शब्द भी मिले हैं। इन सबमें बाजार शब्द पर जोर ‘बिकने-बिकाने’ पर है।

वोट शब्द कहाँ से आया? 


वोट शब्द राय देने, चयन करने किसी व्यक्ति या प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार करने के अर्थ में इस्तेमाल होता है। अंग्रेजी में यह संज्ञा और क्रिया दोनों रूपों में चलता है। अंग्रेजी में यह शब्द लैटिन के वोटम (votum) से बना है। इसका मतलब है इच्छा, कामना, प्रतिज्ञा, प्रार्थना, निष्ठा, वचन, समर्पण वगैरह। हिन्दी में इसका इस्तेमाल मत के अर्थ में लिया जाता है। अंग्रेजी की तरह हिन्दी ने भी मतदाता या निर्वाचक के लिए वोटर शब्द का इस्तेमाल स्वीकार कर लिया है। शब्दों का अध्ययन करने वाले अजित वडनेरकर के अनुसार भाषा विज्ञानी इसे प्रोटो इंडो-यूरोपीय भाषा परिवार का शब्द मानते हैं। अंग्रेजी का वाऊvow इसी श्रृंखला का शब्द है जिसका मतलब होता है प्रार्थना, समर्पण और निष्ठा के साथ अपनी बात कहना।

आसमान ठोस है, तरल या गैस है?

आप जिस आसमान को देखते हैं वह बाहरी अंतरिक्ष का एक हिस्सा है। धरती से दिन में यह नीले रंग का नजर आता है। इसकी वजह है हमारा वातावरण जिससे टकराकर सूरज की किरणों का नीला रंग फैल जाता है। पर यह आसमान धरती से देखने पर ही नीला लगता है। किसी अन्य ग्रह से देखने पर ऐसा ही नहीं दिखेगा, बल्कि आमतौर पर काला नजर आएगा।यह ठोस नहीं है, पर इसमें ठोस, तरल और गैसीय पदार्थ प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। यह अनंत है। दुनिया के बड़े से बड़े टेलिस्कोप से भी आप इसका बहुत छोटा हिस्सा देख पाएंगे।
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

वेस्टमिंस्टर प्रणाली

शासन की संसदीय प्रणाली. इसे यह नाम लंदन के पैलेस ऑफ़ वेस्टमिंस्टर के कारण दिया गया है, जो ब्रिटिश संसद का सभास्थल है. सिटी ऑफ़ वेस्टमिंस्टर लंदन का इलाका है, जो टेम्स नदी के किनारे है. यह इमारत एक शाही महल है. पहला शाही महल 11वीं सदी में बनाया गया था. 1512 में आग से नष्ट होने से पहले वेस्टमिंस्टर पैलेस सम्राट का लंदन निवास होता था. इसके बाद से इसे संसद भवन मान लिया गया. 13वीं सदी में यहां संसद की सभाएं होने लगी थीं. इस भवन में 1834 फिर भयानक में आग लगी. सन 1840 में इसका पुनर्निर्माण शुरू हुआ,जो 30 साल तक चला. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान 1941 में लंदन पर हुई बमबारी में भी इस इमारत को नुकसान पहुँचा. इसकी एक पहचान है क्लॉक टॉवर, जिसका विशाल घंटा बिग बेन के नाम से प्रसिद्ध है. सन 1987 से यह इमारत यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों का हिस्सा है. 

बिग बेन 

बिग बेन विशाल घंटे का नाम है और उस क्लॉक टावर का भी, जिसमें यह घंटा लगा है. सन 2012 में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की हीरक जयंती के मौके पर इस घंटाघर का नाम एलिजाबेथ टावर रख दिया गया. इस टावर का डिजाइन ऑगस्टस प्यूजिन ने तैयार किया था. इसका निर्माण 1859 में पूरा हुआ. उस वक्त यह दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे सही समय देने वाली क्लॉक टावर मानी गई. यह टावर 315 फुट ऊँची है और इसमें सबसे ऊपर तक जाने के लिए बनी सीढ़ी के 334 पायदान हैं. इस घड़ी की सूइयों का व्यास 23 फुट का है. 31 मई 2009 को इस घड़ी की 150वीं जयंती मनाई गई थी. 

अविश्वास और विश्वास मत 

संसदीय अविश्वास प्रस्ताव का उद्देश्य सरकार को पराजित करना होता है. यह प्रस्ताव विपक्ष लाता है. इसके विपरीत विश्वास का मत प्रायः सरकार के गठन के बाद पेश किया जाता है. इसे सत्तापक्ष लाता है. ब्रिटिश संसद में सम्राट के और भारतीय संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर वोट भी विश्वास मत की तरह है. उसमें किसी प्रकार का संशोधन सरकार को गिराने जैसा होता है. जब संसद अविश्वास प्रस्ताव पास करे या सरकार विश्वास मत हासिल करने में विफल रहती है, तो उसे इस्तीफा देना चाहिए. इसके अलावा सदन को भंग करने और आम चुनाव कराने का अनुरोध भी सरकार कर सकती है. इस अनुरोध पर फैसला परिस्थितियों पर निर्भर करता है. यदि दूसरा पक्ष सरकार बनाने की स्थिति में हो तो उसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है. यदि सत्तापक्ष बहुमत में है और फिर भी वह संसद को भंग करने का अनुरोध करे तो सम्राट या राष्ट्रपति उसे स्वीकार कर लेते हैं. संसदीयप्रणाली मेंसरकार खुद इस्तीफा देने का फैसला करे या मजबूर होतो सम्राट विरोधी दल से पूछते हैं कि क्या वह सरकार बनाने के लिए तैयार है. भारत में भी यही व्यवस्था है.

Tuesday, July 24, 2018

संयुक्त राष्ट्र शांति-सेना क्या होती है?

संयुक्त राष्ट्र शांति-सेना संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की सेनाओं की मदद से एक अस्थायी व्यवस्था के रूप में अलग-अलग परिस्थितियों में गठित की जाती है। इसका उद्देश्य टकराव को दूर करके शांति स्थापित करने में मदद करना होता है। संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक नीले रंग की टोपियाँ लगाते हैं या नीले रंग के हेल्मेट पहनते हैं, जो अब इस सेना की पहचान बन गई है।
संयुक्त राष्ट्र की अपनी कोई सेना नहीं होती। इस सेना के सदस्य अपने देश की सेना के सदस्य ही रहते हैं। शांति-सेना के रूप में कार्य करते समय यह सेना संयुक्त राष्ट्र के प्रभावी नियंत्रण में होती है।शांति-रक्षा का हर कार्य सुरक्षा परिषद द्वारा अनुमोदित होता है।संयुक्त राष्ट्र के गठन के समय इस सेना की परिकल्पना नहीं की गई थी, बल्कि बदलते हालात के साथ इसका विकास होता गया। संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में सुरक्षा परिषद को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए संयुक्त कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र के शांति-ऑपरेशंस का एक अलग विभाग बन गया है, जिसके प्रमुख इस समय ज्यां-पियरे लैक्रो हैं।
संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन सबसे पहले 1948 में अरब-इसरायल युद्ध के समय भेजा गया था। उसके बाद से संयुक्त राष्ट्र के 63 मिशन भेजे जा चुके हैं, जिनमें से 17 आज भी सक्रिय हैं। सन 1988 में संयुक्त राष्ट्र शांति-रक्षा बल को नोबेल शांति पुरस्कार भी दिया गया। संयुक्त राष्ट्र के पूर्ववर्ती संगठन लीग ऑफ नेशंस के सामने शांति स्थापना के ज्यादा अवसर नहीं आए, पर सन 1934-35 में लीग ऑफ नेशंस के नेतृत्व में जर्मनी के सार क्षेत्र में सेना भेजी गई। इसे दुनिया की पहली शांति-स्थापना से जुड़ी संयुक्त सैनिक कार्रवाई माना जा सकता है। पहले विश्व युद्ध के काफी समय बाद सार क्षेत्र में जनमत संग्रह के संचालन के लिए इसकी जरूरत महसूस की गई।

भारत में गाँवों की सही संख्या क्या है?

गूगल पर सर्च करें तो कई तरह की संख्याएं सामने आएंगी। ज्यादातर 6,40,000 को आसपास हैं।हाल में जब भारत सरकार ने घोषणा की कि देश के सभी गाँवों में बिजली पहुँचा दी गई है, तब यह संख्या 5,97, 464 बताई गई। दरअसल यह संख्या राजस्व गाँवों की संख्या है। जन 2011 की जनगणना में राजस्व गाँवों की संख्या 5,97, 464 बताई गईं थी। गाँव की बस्ती, पुरवा जैसी कई परिभाषाएं हैं। यदि कुछ लोग कहीं घर बनाकर रहने लगें, तो आधिकारिक रूप से उसे तबतक गाँव नहीं कहेंगे, जबतक राजस्व खाते में उसका नाम दर्ज न हो जाए। शहरों के विकास के साथ हमारे देश में बहुत से गाँवों और बस्तियों का अस्तित्व खत्म भी होता जा रहा है, इसलिए यह संख्या बदलता रहती है।

‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ व्यवस्था क्या है?
लोकतंत्र में चुनाव सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। प्रतिनिधि के चयन से लेकर फैसले करने तक सारी बातें वोट से तय होती हैं। चुनाव की अनेक पद्धतियाँ दुनिया में प्रचलित हैं।‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ भी चुनाव की एक पद्धति है। जब एक से ज्यादा प्रत्याशी किसी पद के लिए खड़े हों, तब सबसे ज्यादा वोट पाने वाले व्यक्ति को चुना हुआ माना जाता है। भारत में चुनाव की यही पद्धति है।

आसमान ठोस है, तरल या गैस है?
आप जिस आसमान को देखते हैं वह बाहरी अंतरिक्ष का एक हिस्सा है। धरती से दिन में यह नीले रंग का नजर आता है। इसकी वजह है हमारा वातावरण जिससे टकराकर सूरज की किरणों का नीला रंग फैल जाता है। पर यह आसमान धरती से देखने पर ही नीला लगता है। किसी अन्य ग्रह से देखने पर ऐसा ही नहीं दिखेगा, बल्कि आमतौर पर काला नजर आएगा।यह ठोस नहीं है, पर इसमें ठोस, तरल और गैसीय पदार्थ प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। यह अनंत है। दुनिया के बड़े से बड़े टेलिस्कोप से भी आप इसका बहुत छोटा हिस्सा देख पाएंगे।
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

सीरिया में लड़ाई क्यों?

सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल-असद के ख़िलाफ़ पिछले सात साल से विद्रोह चल रहा है, जिसका इसरायल, सउदी अरब, तुर्की, अमेरिका और पश्चिमी देश अपने-अपने तरीके से समर्थन कर रहे हैं। दूसरी तरफ बशर-अल-असद की सरकार को ईरान और रूस का समर्थन प्राप्त है। यह बगावत गृहयुद्ध में तब्दील हो चुकी है। इसमें अब तक 3 लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। बशर अल-असद ने 2000 में अपने पिता हाफेज़ अल असद की जगह ली थी।सन 2011 में कई अरब देशों में सत्ता के ख़िलाफ़ शुरू हुई बगावत से प्रेरित होकर मार्च 2011 में सीरिया के दक्षिणी शहर दाराआ में भी लोकतंत्र के समर्थन में आंदोलन शुरू हुआ था, जिसने गृहयुद्ध का रूप ले लिया है।
सुन्नी बहुल सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल-असद शिया हैं।यह संघर्ष साम्प्रदायिक रूप ले चुका है, जिसमें जेहादी ग्रुपों को पनपने का मौका मिला। इसी दौरान इराक में इस्लामिक स्टेट उभार शुरू हुआ, जिसने उत्तरी और पूर्वी सीरिया के काफी हिस्सों पर क़ब्ज़ा कर लिया। दूसरी तरफ ईरान, लेबनान, इराक़, अफ़गानिस्तान और यमन से हज़ारों की संख्या में शिया लड़ाके सीरिया की सेना की तरफ़ से लड़ने के लिए पहुंचे हैं। सीरिया, इराक और तुर्की की सीमा पर बड़ी संख्या में कुर्दों की आबादी भी है। वे एक स्वतंत्र देश बनाने के लिए अलग लड़ रहे हैं।
इस प्रकार इस इलाके में कई तरह की ताकतें, कई तरह की ताकतों से लड़ रहीं हैं। पश्चिमी देशों का आरोप है कि सीरिया की सेना विद्रोहियों का दमन करने के लिए रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल कर रही है। सीरिया पर पश्चिमी देशों के नवीनतम हमलों की वजह यह बताई जा रही है कि गत 7 अप्रैल को पूर्वी गोता इलाके के डूमा में सीरिया की सेना ने विद्रोहियों और राहत-कर्मियों पर रासायनिक हथियारों से हमला किया, जिसमें 40 लोग मारे गए।

नॉटिकल मील क्या होता है?
नॉटिकल मील का इस्तेमाल आमतौर पर समुद्री और हवाई नेवीगेशन में होता है। लम्बाई के हिसाब से यह करीब 1852 मीटर या 6076 फुट होता है। सागर और आकाश के नेवीगेशन में आमतौर पर अक्षांश-देशांतर का इस्तेमाल होता है।भूमध्य रेखा और उससे उत्तर या दक्षिण में इसकी दूरी में मामूली फर्क भी आता रहता है। 

दुनिया का सबसे महँगा पदार्थ क्या है? 
दुनिया का सबसे महँगा पदार्थ एंटीमैटर है, बशर्ते उसे हम हासिल कर सकें। एंटीमैटर पदार्थ के प्रतिकणों से बना होता है। मसलन पॉज़िट्रॉन, प्रति प्रोट्रॉन, प्रति न्यूट्रॉन वगैरह। आपको हैरानी होगी कि एक ग्राम एंटी मैटर से 100 छोटे-छोटे देशों को खरीदा जा सकता है। इसकी खोज बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में हुई थी। एक अनुमान है कि एक ग्राम एंटीमैटर की कीमत 31 लाख 25 हजार करोड़ रुपये के आसपास होगी। एक मिलीग्राम एंटीमैटर बनाने में तकरीबन 160 करोड़ रुपये लगते हैं। जहाँ यह बनता है, वहाँ सुरक्षा का मजबूत घेरा होता है। नासा में जहाँ इसका निर्माण होता है, बहुत कम लोगों को जाने की इजाजत होती है। एंटीमैटर का इस्तेमाल दूसरे ग्रहों में जाने वाले वाहनों के ईँधन के रूप में हो सकता है। हालांकि पृथ्वी पर एंटीमैटर की आवश्यकता नहीं होती, पर वैज्ञानिकों ने बहुत थोड़ी मात्रा में एंटीमैटर का निर्माण किया है। प्राकृतिक रूप से पृथ्वी पर यह अंतरिक्ष तरंगों के साथ वातावरण में आ जाने से या रेडियोधर्मी पदार्थ के ब्रेकडाउन से अस्तित्व में आता है। 
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Sunday, July 22, 2018

संविधान की अनुसूचियाँ?


अनुसूचियाँ जैसा कि नाम से स्पष्ट है कुछ सूचियाँ हैं, जिनमें प्रशासकीय कार्यों, गतिविधियों और नीतियों का वर्गीकरण हैं. 26 जनवरी 1950 को जब भारतीय संविधान लागू हुआ था, तब उसमें 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ थीं. पहली अनुसूची में अनुच्छेद 1 और 4 के अंतर्गत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नाम है. अनुच्छेद 246 के अंतर्गत सातवीं अनुसूची में केंद्र और राज्यों के बीच विधान बनाने के क्षेत्रों का विवरण है. अनुच्छेद 31ख के अंतर्गत नौवीं अनुसूची 18 जून 1951 को संविधान के पहले संशोधन के साथ जोड़ी गई थी. इसके बाद तीन अनुसूचियाँ और जोड़ी गईं. जनवरी 2018 तक की सूचना के अनुसार संविधान में 448 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियां हैं. पूरा संविधान 25 भागों में विभाजित है. संविधान में अबतक 101 संशोधन हो चुके हैं.

आठवीं अनुसूची खबरों में क्यों?

हाल में खबर थी कि इस साल संसद के मॉनसून सत्र के साथ राज्यसभा के सदस्यों को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में किसी में भी बोलने की अनुमति मिल गई है. इन 22 अनुसूचित भाषाओं में राज्यसभा में 12 भाषाओं के लिए एक ही समय में साथ-साथ अनुवाद की सेवा पहले से ही थी. इनमें असमिया, बांग्ला, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, ओडिया, पंजाबी, तमिल, तेलगु और उर्दू शामिल हैं.

अनुच्छेद 344(1) और 351 के तहत आठवीं अनुसूची में संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त 22 प्रादेशिक भाषाओं का उल्लेख किया गया है. सन 1950 में इस अनुसूची में 14 भाषाएं (असमिया, बांग्ला, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, मराठी, मलयालम, ओडिया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु और उर्दू) थीं. सन 1967 के 21वें संविधान संशोधन द्वारा सिंधी को इसमें जोड़ा गया. इसके बाद कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली को 1992 में इस अनुसूची में स्थान मिला. फिर सन 2004 में बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली को इसमें शामिल किया गया. अब भी देश के अलग-अलग इलाकों में 38 और भाषाओं को इस अनुसूची में शामिल करने की माँगें हैं.

ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट?

ग्रीनफील्ड शब्द औद्योगिक अर्थ में प्रयुक्त होता है. हाल में देश के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने विश्व स्तरीय शिक्षा संस्थानों की रेस में छह भारतीय विश्वविद्यालयों को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा देने की घोषणा की. इनमें जियो इंस्टीट्यूट को ग्रीनफील्ड श्रेणी में रखा गया है. ग्रीनफील्ड पूरी तरह से नयी परियोजना को कहते हैं. यानी ऐसी जमीन पर कारखाना लगाना जो अभी नयी या हरी है. जिसमें पहले के किसी निर्माण को ढहाना या विस्तार करना शामिल नहीं हो. आजकल सॉफ्टवेयर सहित विभिन्न उद्योगों में इस शब्द का इस्तेमाल किया जाता है. एक शब्द और चलता है ब्राउनफील्ड परियोजना, जिसका मतलब है किसी मौजूदा प्लांट का विस्तार करके क्षमता बढ़ाना. ब्राउनफील्ड बिलकुल नयी परियोजना नहीं होती.


Monday, July 16, 2018

मॉनसून सत्र

इससे आशय भारतीय संसद के मॉनसून सत्र से है. आमतौर पर हर साल हमारी संसद के तीन सत्र होते हैं. बजट (फरवरी-मई), मॉनसून (जुलाई-अगस्त) और शीतकालीन (नवंबर-दिसंबर). इस साल मॉनसून सत्र 18 जुलाई से 10 अगस्त तक चलेगा. इसबार मॉनसून सत्र के दौरान ही राज्यसभा के नए उप-सभापति का चुनाव होना है. पिछले उप-सभापति पीजे कुरियन का कार्यकाल 1 जुलाई को समाप्त हो गया.

संसद के दोनों सदनों की बैठक राष्ट्रपति आमंत्रित करते हैं. हरेक अधिवेशन की अंतिम तिथि के बाद छह मास के भीतर आगामी अधिवेशन के लिए सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करना होता है. सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करने की शक्ति राष्ट्रपति में निहित है, पर व्यवहार में इस आशय के प्रस्‍ताव की पहल सरकार द्वारा की जाती है. इन तीन के अलावा संसद के विशेष सत्र भी बुलाए जा सकते हैं.

संसद भवन
भारत का संसद भवन नई दिल्ली में स्थित है. सन 1911 में घोषणा की गई कि भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली ले जाई जाएगी.मशहूर ब्रिटिश आर्किटेक्ट सर एडविन लैंडसीयर लुट्यन्स ने दिल्ली की ज्यादातर नई इमारतों की रूपरेखा तैयार की थी. इसके लिए उन्होंने सर हरबर्ट बेकर की मदद ली. संसद भवन की इमारत 1927 में तैयार हुई. इसे बनने में छह वर्ष लगे थे. इसकी आधारशिला 12 फ़रवरी, 1921 को ड्यूक ऑफ कनॉट ने रखी थी.18 जनवरी 1927 को तत्कालीन वायसरॉय और गवर्नर जनरल लॉर्ड इरविन ने इसका उद्घाटन किया.

यह गोलाकार इमारत 560 फुट (170 मीटर) व्यास यानी कि लगभग 6 एकड़ क्षेत्र पर बनी है. इसके निर्माण पर 83 लाख रुपये की लागत आई. भवन का केन्द्रीय तथा प्रमुख भाग उसका विशाल वृत्ताकार केन्द्रीय कक्ष है. इसके तीन ओर लोक सभा, राज्य सभा और पूर्ववर्ती ग्रंथालय कक्ष (जिसे पहले प्रिंसेस चैम्बर कहा जाता था) हैं. इन तीनों कक्षों के चारों ओर चार मंजिला वृत्ताकार भवन है, जिसमें मंत्रियों, संसदीय समितियों, राजनीतिक दलों, लोक सभा तथा राज्य सभा सचिवालयोंऔर संसदीय कार्य मंत्रालय के दफ्तर हैं.

संसदीय विशेषाधिकार

संसद के दोनों सदनों, उनके सदस्यों और समितियों को कुछ विशेषाधिकार प्राप्‍त है.इन्हें इसलिए दिया गया है ताकि वे स्वतंत्र रूप से काम कर सकें. सबसे महत्‍वपूर्ण विशेषाधिकार है सदन और समितियों में स्वतंत्रता के साथ विचार रखने की छूट.सदस्य द्वारा कही गई किसी बात के संबंध में उसके विरूद्ध किसी न्यायालय में कार्रवाई कार्यवाही नहीं की जा सकती.कोईसदस्य उस समय गिरफ्तार नहीं किया जा सकता जबकि उस सदन या समिति की बैठक चल रही हो, जिसका वह सदस्य है. अधिवेशन से 40 दिन पहले और उसकी समाप्ति से 40 दिन बाद भी उसे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता.

संसद परिसर में केवल अध्‍यक्ष/सभापति के आदेशों का पालन होता है. विशेषाधिकार भंग करने या सदन की अवमानना करने वाले को भर्त्सना, ताड़ना या निर्धारित अवधि के लिए कारावास की सज़ा दी जा सकती है. सदस्यों के मामले में सदन अन्य दो प्रकार के दंड दे सकता है. सदन की सदस्यता से निलंबन या बर्खास्तगी. दांडिक क्षेत्र सदनों तक और उनके सामने किए गए अपराधों तक ही सीमित न होकर सदन की सभी अवमाननाओं पर लागू होता है.

Sunday, July 15, 2018

हॉकी चैम्पियंस ट्रॉफी


पिछले रविवार (1 जुलाई 2018) को पुरुषों की हॉकी चैम्पियंस ट्रॉफी प्रतियोगिता का फाइनल मैच खेला गया. इस साल के बाद यह प्रतियोगिता समाप्त की जा रही है. सन 2019 से इसके स्थान पर अंतरराष्ट्रीय हॉकी संघ की हॉकी प्रो-लीग प्रतियोगिता शुरू होगी. चैम्पियंस ट्रॉफी की शुरुआत सन 1978 में हुई थी. इस प्रतियोगिता में शामिल सभी टीमें एक राउंड रॉबिन लीग में एक-दूसरे से खेलती थीं. सबसे ज्यादा अंक अर्जित करने वाली दो टीमों के बीच फाइनल मैच होता था. सन 1987 में पुरुषों की इस प्रतियोगिता के तर्ज पर महिलाओं की द्विवार्षिक प्रतियोगिता भी शुरु हुई. पुरुषों की प्रतियोगिता शुरू में सालाना होती थी, पर 2014 से वह भी द्विवार्षिक हो गई थी.

पुरुष प्रतियोगिता में सबसे पहले साल पाँच टीमों ने भाग लिया. दूसरे साल इन टीमों की संख्या सात हो गई. इसके बाद 2010 तक इसमें छह टीमें भाग लेती थीं. सन 2011 से 2018 तक इसमें छह टीमों ने हिस्सा लिया.

दिन और रात बराबर

इसे हिंदी में विषुव और अंग्रेज़ी में इक्विनॉक्स (Equinox)कहते हैं. यानी ऐसा समय-बिंदु, जिसमें दिन और रात लगभग बराबर होते हैं. किसी इलाके में दिन और रात की लंबाई पर असर डालने वाली कई बातें होतीं हैं. धरती अपनी धुरी पर २३½° झुककर सूर्य के चक्कर लगाती है, इस प्रकार वर्ष में एक बार पृथ्वी इस स्थिति में होती है, जब वह सूर्य की ओर झुकी रहती है, व एक बार सूर्य से दूसरी ओर झुकी रहती है. इसी प्रकार वर्ष में दो बार ऐसी स्थिति भी आती है, जब पृथ्वी का झुकाव न सूर्य की ओर ही होता है, और न ही सूर्य से दूसरी ओर, बल्कि बीच में होता है. इसे इक्विनॉक्स कहा जाता है. इन दोनों तिथियों पर दिन और रात की बराबर लंबाई लगभग बराबर होती है. ऐसा भूमध्य रेखा पर होगा. आजकल ऐसा 20/21 मार्च और 22/23 सितम्बर को होता है. पर यह भी अलग-अलग अक्षांश यानी लैटीट्यूड पर अलग-अलग दिन होता है.

समुद्री पानी खारा क्यों?

जब धरती नई-नई बनी थी, तब इसके वातावरण में कई प्रकार की गैसें थीं, जो ज्वालामुखियों की आग और धुएं से निकली थीं. ये गैसें धीरे-धीरे समुद्र के पानी में घुलीं. दूसरे जमीन पर बारिश का पानी जब नदियों के रास्ते समुद्र तक आता है, जो मिट्टी के साथ कई तरह के लवणों को भी ले आता है. यह भी पानी में घुलता है. समुद्र के पानी में नमक लगातार बढ़ रहा है, पर यह मात्रा इतनी कम है कि उसे मापना सम्भव नहीं.

नदियों और झरनों के पानी में भी प्रकृति के अन्य पदार्थों से आए लवण घुलते हैं. उनकी मात्रा कम होती है इसलिए वह पानी हमें मीठा लगता है. समुद्र में ख़ास दो लवण हैं सोडियम और क्लोराइड. दुनिया के अलग-अलग समुद्रों के पानी में अलग-अलग मात्रा में खारा होता है. सामान्यतः 1000 ग्राम या एक लिटर समुद्री पानी में 35 ग्राम (सात चम्मच) नमक होता है. इसे पार्ट्स पर थाउजैंड (पीपीटी) कहते हैं. सामान्यतः समुद्रों का पानी 34 से 36 पीपीटी नमकीन होता है, पर यूरोप के पास के भूमध्य सागर का पानी 38 पीपीटी है.


Sunday, July 8, 2018

मैक्सिकन वेव


फुटबॉल के मैच के दौरान अक्सर आपने देखा होगा कि स्टेडियम में बैठे दर्शकों को बीच एक लहर उठती है, जो एक किनारे से शुरू होकर दूसरे किनारे तक जाती है. दर्शकों की खुशी व्यक्त करने के इस शैली को मैक्सिकन वेव कहते हैं. इस लहर में दर्शक अपनी कुर्सी से खड़े हो जाते हैं और दोनों हाथ ऊपर उठाते हैं. जैसे ही बराबर वाला दर्शक उठता है उसके बराबर वाला और फिर उसके बराबर वाला उठता है. यह सब इतनी तेजी से होता है कि पूरे स्टेडियम में लहर जैसी उठती है. किसी दर्शक की इच्छा उठने की ना हो, तब भी वह उठता है. एक-दो दर्शकों नहीं उठने से लहर टूटती नहीं. इसे मैक्सिकन वेव इसलिए कहते हैं, क्योंकि सन 1986 की मैक्सिको में हुई फीफा विश्व कप प्रतियोगिता में पहली बार टीवी पर ऐसी लहरें बनती देखी गईं.

टीवी पर दुनिया ने ऐसी लहरें मैक्सिको में हुए विश्व कप में पहली बार देखी जरूर थीं, पर इस बात को लेकर विवाद है कि इनका जन्म मैक्सिको में हुआ या नहीं. मैक्सिको ने इन लहरों को बनाना अमेरिका से सीखा था. 15 अक्तूबर 1981 को अमेरिका के ओकलैंड ए और न्यूयॉर्क यांकीस के बीच बेसबॉल के एक मैच में प्रोफेशनल चीयर लीडर क्रेज़ी जॉर्ज हेंडरसन ने ऐसी लहरें बनाईं थीं. ऐसी लहरें अमेरिकी स्टेडियमों में बनती रहीं हैं, जिन्हें केवल वेव कहा जाता था. फीफा विश्व कप ने इन्हें मैक्सिकन वेव का नाम दिया. 

जम्मू-कश्मीर विधानसभा

जम्मू-कश्मीर विधानसभा की स्थापना सन 1934 में राजा हरिसिंह की देशी रियासत में हुई थी. तब उसका नाम था प्रजा सभा. शुरूआत में इसके 100 सदस्य होते थे. सन 1988 में राज्य के संविधान में किए गए 20वें संशोधन के बाद यह संख्या बढ़ाकर 111 कर दी गई. इनमें से 24 सीटें ऐसी हैं, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पड़ती हैं. इस इलाके पर पाकिस्तान ने 1947 में कब्जा कर लिया था. कश्मीर विधानसभा के चुनावों में ये 24 सीटें हमेशा खाली रहती हैं. इस प्रकार यहाँ 87 सीटों पर चुनाव होते हैं. इन 87 में से 46 सीटें कश्मीर की घाटी में हैं, 37 सीटें जम्मू में और 4 लद्दाख क्षेत्र में. राज्यपाल को यदि लगे कि विधानसभा में महिलाओं की नुमाइंदगी नहीं है, तो वे दो महिला सदस्यों को मनोनीत कर सकते हैं. यहाँ देश की अन्य विधानसभाओं का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल छह साल का होता है. यहाँ पिछले चुनाव दिसम्बर 2014 में हुए थे.

अमरनाथ यात्रा कब शुरू हुई?

अमरनाथ की गुफा कश्मीर में 12,756 फुट की ऊँचाई पर स्थित है. इसके चारों और बर्फ से ढके पहाड़ हैं. गुफा भी बर्फ से ढकी रहती है. गर्मियों में कुछ समय के लिए बर्फ पिघलती है. तभी यह दर्शन के लिए यह खुलती है. गुफा के भीतर छत से पानी टपकने के कारण लगभग 10 फुट ऊँचा शिवलिंग बनता है. श्रावणी पूर्णिमा को यह अपने पूरे आकार में होता है. अमावस्या तक धीरे-धीरे छोटा होता जाता है. कल्हण रचित राजतरंगिणी में इसे अमरेश्वर या अमरनाथ कहा गया है. भृगु ऋषि ने भी इसका वर्णन किया है. अबुल फ़जल ने आईन-ए-अकबरी में इसका उल्लेख किया है. इसका विवरण फ्रांसीसी चिकित्सक फ्रांस्वा बर्नियर ने दिया है, जिसने 1663 में बादशाह औरंगज़ेब के साथ कश्मीर की यात्रा की थी. कहा जाता है कि सोलहवीं सदी में गुफा की खोज मुसलमान गडरिए बूटा मलिक ने की थी. आज भी चढ़ावे का एक हिस्सा मलिक परिवार के वंशजों को जाता है. 
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Saturday, July 7, 2018

फीफा विश्व कप


रूस में 14 जून से 21वें फुटबॉल विश्वकप की शुरुआत हो चुकी है. वैश्विक फुटबॉल पर यूरोप का कब्ज़ा है. यूरोप के अलावा लैटिन अमेरिका की टीमें ही इस कप को जीत पाईं हैं. ब्राज़ील ने पाँच बार विश्व कप जीता है. यह एकमात्र टीम है, जो सभी विश्वकप प्रतियोगिताओं में खेली है. सन 2014 में चैम्पियन जर्मनी की टीम थी, जो चार बार इस प्रतियोगिता को जीत चुकी है.

फीफा वर्ल्ड कप 2018 में पहली बार चिप लगी गेंद 'टेलस्टार-18' से खेला जा रहा है. टेलस्टार-18 को एडिडास ने डिजाइन किया है. एडिडास ने लगातार 13वीं बार वर्ल्ड कप की गेंद को डिजाइन किया है. टेलस्टार-18 में चिप लगाई गई है, जिसके जरिए गेंद को स्मार्ट फोन से कनेक्ट कर पैर से लगे शॉट और हैडर सहित अन्य जानकारियां मिलेंगी. सन 1994 में अमेरिका हुए विश्वकप के बाद पहली बार गेंद सिर्फ काले और सफेद रंग में हो रहा है. गेंद में केवल छह पैनल वॉल हैं. पुराने टेलस्टार में 32 पैनल वॉल थे. छह पैनल होने से हवा में उसकी स्थिरता बढ़ेगी. काले और सफेद रंग के कारण बॉल टीवी पर साफ नजर आएगी.

वीडियो रेफरी

इसबार के विश्व कप में क्रिकेट के थर्ड अम्पायर की तरह पहली बार वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वार) तकनीक का सहारा लिया जा रहा है. फुटबॉल के नियमों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संघ बोर्ड (आईएफएबी) ने 2 मार्च 2018 में इसे मंजूरी दे दी थी. इसके बाद फीफा परिषद ने उसे अंतिम रूप से स्वीकार किया. वार की चार तरह से सहायता ली जाएगी. एक, यह पता करने के लिए कि गोल हुआ या नहीं. दूसरे, पेनल्टी देनी चाहिए या नहीं. इसके अलावा ‘वार’ लाल कार्ड को लेकर भी फैसला करेगा. साथ ही किसी खिलाड़ी को गलती से कार्ड मिला है, तो उसमें सुधार करेगा.

‘वार’ का इस्तेमाल प्रायोगिक तौर पर 2016 से 20 महासंघ कर रहे हैं. इनमें जर्मन बुंडेस्लीगा और इटली की सेरी ए प्रोफेशनल लीग शामिल हैं. करीब एक हजार मैचों में इसे आजमाया जा चुका है. इस विश्वकप से इसे स्वीकृति दिलाने में मदद मिलेगी. इस प्रौद्योगिकी को वैश्विक समर्थन पूरी तरह नहीं मिला है. यहां तक कि यूरोपीय फुटबॉल संस्था यूएफा अभी इसे लेकर आश्वस्त नहीं है.

टेस्ट क्रिकेट

क्रिकेट का सबसे लम्बा मैच टेस्ट मैच होता है. इस खेल का सबसे बड़ा मानक पाँच दिन का टेस्ट मैच है. एक जमाने में यह मैच पाँच दिन से भी ज्यादा लम्बा होता था. इंटरनेशनल क्रिकेट कौंसिल दुनिया के केवल 12 देशों को टेस्ट क्रिकेट खेलने की मान्यता दी है. दो देशों के बीच दुनिया का पहला टेस्ट मैच 15-19 मार्च 1877 को इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेला गया था, जिसमें ऑस्ट्रेलिया की टीम 45 रन से जीती थी. टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए मान्यता प्राप्त 12 टीमों के नाम इस प्रकार हैं, 1.इंग्लैंड, 2.ऑस्ट्रेलिया, 3.दक्षिण अफ्रीका, 4.वेस्टइंडीज, 5.न्यूजीलैंड, 6.भारत, 7.पाकिस्तान, 8.श्रीलंका, 9.जिम्बाब्वे, 10.बांग्लादेश, 11.आयरलैंड और 12.अफगानिस्तान. अंतिम दो टीमों ने अपना पहला टेस्ट मैच इस साल ही खेला है. सबसे नई टीम है अफगानिस्तान जिसने 14 जून को बेंगलुरु में अपना पहला टेस्ट मैच भारत के खिलाफ खेला. इसमें भारत ने अफगानिस्तान को एक पारी और 262 रन से हरा दिया. 
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