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Monday, October 30, 2023

रोड सिग्नल में लाल ऊपर, रेलवे में नीचे क्यों?

लाल रंग को खतरे के निशान के रूप में सबसे पहले समुद्री जहाजों ने अपनाया। प्रकाश की किरणों में लाल रंग की वेवलेंग्थ ज्यादा होने की वजह से भी यह फैसला किया गया। उन्नीसवीं सदी के शुरू में ब्रिटेन ने रेलवे में सिग्नलिंग की व्यवस्था की। रेलगाड़ियों का एक ही ट्रैक होता था, इसलिए ज़रूरी था कि उनके लिए सिग्नलिंग की व्यवस्था की जाए। लाल रंग को तब तक खतरे के निशान के रूप में स्वीकार किया जा चुका था।

चूंकि हरा रंग लाइन क्लियर के लिए सोचा गया था, इसलिए रेलवे सिग्नल में उसे ऊपर रखा गया। वैसे भी रेलवे के शुरू के सिग्नल कई तरह के सोचे गए थे। इनमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय डाउन और अप सिग्नल हुए। उनके साथ रंगीन शीशे की प्लेट होती थीं, जिनके पीछे रात में लालटेन लगाई जाती थी। उसमें एक ही रंग दिखाई पड़ता था। रेलवे में लाइन क्लियर ज्यादा महत्वपूर्ण होता है और सड़क पर नियंत्रण और सावधानी।

सड़कों पर ट्रैफिक के संचालन के लिए 9 दिसम्बर 1868 को लंदन में ब्रिटिश संसद भवन के सामने रेलवे इंजीनियर जेपी नाइट ने ट्रैफिक लाइट लगाई। यह सिग्नल भी रेलवे जैसा ही था। पर वह व्यवस्था चली नहीं। सड़कों पर व्यवस्थित रूप से ट्रैफिक सिग्नल सन 1912 में अमेरिका सॉल्ट लेक सिटी यूटा में शुरू किए गए। सड़कों के ट्रैफिक सिग्नल तय करते वक्त सोचा गया कि ये संकेतक ज्यादा ऊँचाई पर नहीं होंगे, इसलिए लाल रंग को ऊपर रखना ही बेहतर होगा। वैज्ञानिक अध्ययनों से यह भी पता लगा कि जो रंग सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है, वह लाल नहीं बल्कि लालिमा युक्त पीला रंग या केसरिया रंग है। इस रंग को भी ट्रैफिक सिग्नल में जगह दी गई है।

ओलिंपिक में क्रिकेट?

1896 में एथेंस में हुए पहले ओलिंपिक खेलों में क्रिकेट को भी शामिल किया गया था, पर पर्याप्त संख्या में टीमें न आ पाने के कारण, क्रिकेट प्रतियोगिता रद्द हो गई। सन 1900 में पेरिस में हुए दूसरे ओलिम्पिक में चार टीमें उतरीं, पर बेल्जियम और नीदरलैंड्स ने अपना नाम वापस ले लिया, जिसके बाद सिर्फ फ्रांस और इंग्लैंड की टीमें बचीं। उनके बीच मुकाबला हुआ, जिसमें इंग्लैंड की टीम चैम्पियन हुई। पिछले दिनों कॉमनवैल्थ गेम्स में और हाल में एशियाई खेलों में टी-20 क्रिकेट प्रतियोगिता भी हुई थी। फिलहाल 2024 के पेरिस ओलिंपिक खेलों में क्रिकेट शामिल नहीं है, पर 2028 के लॉस एंजेलस ओलिंपिक में क्रिकेट को शामिल करने का फैसला हो गया है। अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक कमेटी (आईओसी) के अध्यक्ष थॉमस बाख के नेतृत्व में गत 16  अक्तूबर को मुंबई में हुई बैठक में यह फैसला किया गया। 

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 28 अक्तूबर, 2023 को प्रकाशित

Sunday, April 26, 2015

दुनिया में सबसे पहले कपड़े कहाँ पहने गए?

एफ़एममोबाइल और वायरलेस तथा अन्य तरंगों का इंसानों और पशु पक्षियों पर क्या प्रभाव पड़ता है
आपने जो बातें पूछी हैं उनके अलावा कॉर्डलेस हैडफोन, वाइ-फाई, माइक्रोवेव अवन और ऑप्टिक फाइबर तक से स्वास्थ्य के लिए पैदा होने वाले खतरों को लेकर चिंता व्यक्त की जाती है। मोबाइल टावरों से रेडिएशन हो सकता है, पर उनके लिए सीमा निर्धारित है। वस्तुतः ज्यादा धूप, गर्मी, सर्दी, पानी से भी स्वास्थ्य के लिए खतरा होता है, पर सीमा के भीतर रहें तो नहीं होता।

पानी में भँवर कैसे बनते हैं? और चक्रवात किसे कहते हैं? 
भँवर आमतौर पर एक-दूसरे से विपरीत दिशाओं से आ रही लहरों के टकराने से बनते हैं। इसके कई रूप हैं। जब आप किसी पानी के बर्तन में ऊपर से पानी गिराएं तो दबाव के कारण पानी नीचे जाता है और इसके चारों ओर गोल घेरा बन जाता है यह भी एक प्रकार का भँवर है। आप किसी पानी की भरी बोतल की तली में छेद कर दें और उसे देखें तो पता लगेगा कि पानी के बीचोबीच घूमते चक्रवात जैसा एक खड़ा स्तम्भ बन जाता है और सबसे ऊपर पानी की सतह पर भँवर जैसा बन जाता है। सागर के ऊपर या धरती की सतह पर जब हवाएं टकराकर गोल- गोल घूमने लगती हैं तब उसे हम चक्रवात कहते हैं।

ट्रैफिक सिग्नल की शुरुआत सबसे पहले कहां हुई?
ट्रैफिक सिग्नल की शुरूआत रेलवे से हुई है। रेलगाड़ियों को एक ही ट्रैक पर चलाने के लिए बहुत ज़रूरी था कि उनके लिए सिग्नलिंग की व्यवस्था की जाए। 10 दिसम्बर 1868 को लंदन में ब्रिटिश संसद भवन के सामने रेलवे इंजीनियर जेपी नाइट ने ट्रैफिक लाइट लगाई। पर यह व्यवस्था चली नहीं। सड़कों पर व्यवस्थित रूप से ट्रैफिक सिग्नल सन 1912 में अमेरिका के सॉल्ट लेक सिटी यूटा में शुरू किए गए। सड़कों पर बढ़ते यातायात के साथ यह व्यवस्था दूसरे शहरों में भी शुरू होती गई।

दुनिया में सबसे पहले कपड़े कहाँ पहने गए?
पुरातत्ववेत्ताओं और मानव-विज्ञानियों के अनुसार सबसे पहले परिधान के रूप में पत्तियोंघास-फूस,जानवरों की खाल और चमड़े का इस्तेमाल हुआ था। दिक्कत यह है कि इस प्रकार की पुरातत्व सामग्री मिलती नहीं है। पत्थरहड्डियाँ और धातुओं के अवशेष मिल जाते हैंजिनसे निष्कर्ष निकाले जा सकते हैंपर परिधान बचे नहीं हैं। पुरातत्ववेत्ताओं को रूस की गुफाओं में हड्डियों और हाथी दांत से बनी सिलाई करने वाली सूइयाँ मिली हैंजो तकरीबन 30,000 साल ईपू की हैं। मानव विज्ञानियों ने कपड़ों में मिलने वाली जुओं का जेनेटिक विश्लेषण भी किया हैजिसके अनुसार इंसान ने करीब एक लाख सात हजार साल पहले बदन ढकना शुरू किया होगा। इसकी ज़रूरत इसलिए हुई होगी क्योंकि अफ्रीका के गर्म इलाकों से उत्तर की ओर गए इंसान को सर्द इलाकों में बदन ढकने की ज़रूरत हुई होगी। कुछ वैज्ञानिक परिधानों का इतिहास पाँच लाख साल पीछे तक ले जाते हैं। बहरहाल अभी इस विषय पर अनुसंधान चल ही रहा है।

राष्ट्रपति भवन और संसद भवन का निर्माण कब हुआ?
सन 1911 में घोषणा की गई कि भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली ले जाई जाएगी। मशहूर ब्रिटिश आर्किटेक्ट सर एडविन लैंडसीयर लुट्यन्स ने दिल्ली की ज्यादातर नई इमारतों की रूपरेखा तैयार की। इसके लिए उन्होंने सर हरबर्ट बेकर की मदद ली। जिसे आज हम राष्ट्रपति भवन कहते हैं उसे तब वाइसरॉयस हाउस कहा जाता था। इसके नक्शे 1912 में बन गए थेपर यह बिल्डिंग 1931में पूरी हो पाई। संसद भवन की इमारत 1927 में तैयार हुई।
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित
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