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Saturday, May 20, 2023

स्टार्टअप क्या होता है?

नवोन्मेष, नवाचार से मिलता-जुलता शब्द है स्टार्ट-अप। अंग्रेजी में इसके माने हैं अचानक उदय होना, उगना, आगे बढ़ना वगैरह। इसके कारोबारी माने हैं नये और अनजाने बिजनेस मॉडल की खोज। इस अर्थ में नए किस्म के कारोबार में जुड़ी नयी कम्पनियों को स्टार्ट-अप कम्पनी कहते हैं। भारत में ई-रिटेल से जुड़ी ज्यादातर नई कम्पनियाँ स्टार्ट-अप हैं। इनके मालिक और प्रबंधक नए हैं। उनका काम करने का तरीका नया है। यह शब्द बीसवीं सदी के अंतिम वर्षों में डॉट-कॉम ‘बूम’ और ‘बबल’ के वक्त ज्यादा लोकप्रिय हुआ। इन कम्पनियों के साथ विफलता और सफलता का भारी उतार-चढ़ाव और जोखिम भी जुड़ा है। साथ ही इसके साथ इंटरनेट की नयी तकनीक का इस्तेमाल भी जुड़ा है। भारत में यह नया चलन है। अमेरिका में बिजनेस प्लान करना, नयी कम्पनी बनाना, उसके मार्फत भारी सफलता पाने का चलन पहले से है। अमेरिका के बिजनेस और इंजीनियरी संस्थानों से निकल कर छात्र कारोबार शुरू करने के बारे में सोचता है। भारत में अभी तक नौजवान नौकरी को वरीयता देते हैं। अब स्थितियाँ बदल रहीं हैं। परम्परागत की जगह नए कारोबार के आविष्कार में फायदे की गुंजाइश भी ज्यादा है। 

वेंस्टमिंस्टर प्रणाली

शासन की संसदीय प्रणाली। इसे यह नाम लंदन के पैलेस ऑफ़ वेस्टमिंस्टर के कारण दिया गया है, जो ब्रिटिश संसद का सभास्थल है। सिटी ऑफ़ वेस्टमिंस्टर लंदन का इलाका है, जो टेम्स नदी के किनारे है। यह इमारत एक शाही महल है। पहला शाही महल 11वीं सदी में बनाया गया था। 1512 में आग से नष्ट होने से पहले वेस्टमिंस्टर पैलेस सम्राट का लंदन निवास होता था। इसके बाद से इसे संसद भवन मान लिया गया। 13वीं सदी में यहां संसद की सभाएं होने लगी थीं। इस भवन में 1834 फिर भयानक में आग लगी। सन 1840 में इसका पुनर्निर्माण शुरू हुआ,जो 30 साल तक चला। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान 1941 में लंदन पर हुई बमबारी में भी इस इमारत को नुकसान पहुँचा। इसकी एक पहचान है क्लॉक टॉवर, जिसका विशाल घंटा बिग बेन के नाम से प्रसिद्ध है। सन 1987 से यह इमारत यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों का हिस्सा है।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 20 मई, 2023 को प्रकाशित


Monday, June 8, 2015

सूर्य सबसे पहले किस देश में निकलता है?

इस सवाल का जवाब समझना आसान नहीं है, क्योंकि धरती घूमती रहती है। इसलिए सबसे पहले कौन सा इलाका सूर्य के सामने आता है कहना मुश्किल है। बहरहाल मनुष्य ने धरती को अक्षांश, देशांतर के मार्फत विभाजित किया है। साथ ही पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण दिशाएं भी तय की हैं। धरती के गोले पर उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक जो काल्पनिक देशांतर रेखाएं हैं, उनमें जो देश सुदूर पूर्व में 180 देशांतर पर पड़ेंगे, वहाँ सबसे पहले सूर्योदय मानना चाहिए।
दुनिया को अलग-अलग टाइम ज़ोन में विभाजित किया है। इस टाइम ज़ोन से तय होता है कि सबसे पहले सूर्योदय किस देश में होता है। सामान्यतः हम मानते हैं कि दुनिया में जापान का मिनामी तोरीशीमा धुर पूर्व में है। इसलिए वहाँ सबसे पहले सूर्योदय मान सकते हैं। दूसरा तरीका यह है कि डेटलाइन को आधार मानें। ग्रीनविच मीन टाइम को यदि हम आधार मानते हैं तो जापान के समय में नौ घंटे जोड़ने होंगे। यानी जब ग्रीनविच मीन टाइम शून्य यानी रात के बारह बजे होंगे तब जापान में सुबह के नौ बजे होंगे। वास्तव में जीएमटी से ठीक बारह घंटे का फर्क फिजी, तुवालू, न्यूजीलैंड और किरिबाती के मानक समय में है, जबकि इन सबकी स्थिति में फर्क है। इस लिहाज से दुनिया का सबसे पूर्व में स्थित क्षेत्र किरिबाती का कैरलिन द्वीप है, जहाँ के सूर्योदय को धरती का पहला सूर्योदय मान सकते हैं।

स्टार्ट-अप कम्पनी क्या है?
यह नई संस्कृति का शब्द है। नयापन, अभिनव, नवोन्मेष और नवाचार से मिलता-जुलता शब्द है स्टार्ट-अप। अंग्रेजी में इसके माने हैं नवोदय या अचानक उदय होना, उगना, आगे बढ़ना वगैरह। इसके कारोबारी माने हैं नए और अनजाने बिजनेस मॉडल की खोज। यानी नए किस्म के कारोबार में जुड़ी नई कम्पनियों को स्टार्ट-अप कम्पनी कहते हैं। भारत में ई-रिटेल और इंटरनेट से जुड़ी ज्यादातर नई कम्पनियाँ स्टार्ट-अप हैं। इनकी तकनीक नई है और मालिक और प्रबंधक भी नए किस्म के हैं। उनका काम करने का तरीका नया है। यह शब्द बीसवीं सदी के अंतिम वर्षों में डॉट-कॉम ‘बूम’ और ‘बबल’ के वक्त ज्यादा लोकप्रिय हुआ।

सामाजिक दृष्टि से भारत में यह नया चलन है। अमेरिका में बिजनेस प्लान करना, नयी कम्पनी बनाना, उसके मार्फत भारी सफलता पाने का चलन पहले से है। अमेरिका के बिजनेस और इंजीनियरी संस्थानों से निकल कर छात्र कारोबार शुरू करने के बारे में सोचता है। इस चलन के समानांतर एक नई संस्कृति का जन्म हो रहा है, जिसे स्टार्ट-अप कल्चर नाम मिला है।

भारत में अभी तक नौजवान नौकरी को वरीयता देते हैं। अब स्थितियाँ बदल रहीं हैं। अब तक की समझ है कि कारोबार में जोखिम है। कम उम्र में जोखिम उठाया जा सकता है, यही इस संस्कृति का मूल मंत्र है। माना जा रहा है कि संपन्नता उन्हीं के पास आती है, जो जोखिम उठाते हैं। परम्परागत व्यवसाय की जगह नए कारोबार के आविष्कार में फायदे की गुंजाइश भी ज्यादा है। परम्परागत तरीके से 10 से 15 फीसदी फायदा मिलता है, जबकि नवोन्मेष से 85 फीसदी या उससे भी ज्यादा फायदा मिलता है।

भारत में सबसे पहले ई-मेल कब?

15 अगस्त 1995 को भारत के विदेश संचार निगम ने देश में इंटरनेट सेवा की शुरूआत की। तभी से मेल सेवा भी शुरू हुई।
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Thursday, April 9, 2015

कम हो रही है धरती की घूमने की रफ्तार

पृथ्वी अपनी धुरी पर किस गति से घूमती है?
23 घंटे 56 मिनट 4.09 सेकंड में धरती अपनी धुरी पर पूरी तरह घूम जाती है. ऐसा माना जाता है कि धरती की घूमने की रफ्तार धीरे-धीरे कम होती जा रही है. अब से 4.8 अरब साल पहले धरती अपनी धुरी पर लगभग 10 घंटे में एक चक्कर लगा लेती थी. इस प्रकार तब दिन और रात आज के मुकाबले काफी छोटे होते थे. वैज्ञानिकों का आकलन है कि सौ साल में धरती के घूमने की गति में करीब तीस सेकंड का इजाफा हो रहा है. इससे धीरे-धीरे साल के दिनों की संख्या कम होती जाएगी. तकरीबन साठ करोड़ साल पहले 455 दिन का साल होता था. एक नए शोध में यह बात सामने आई है कि पृथ्वी के कोर में हो रही उथल-पुथल दिनों की लंबाई को प्रभावित करती है. यों पृथ्वी का अपनी धुरी पर दूसरी बातों से भी तय होता है. जैसे हवा के विपरीत पर्वत श्रृंखलाओं का होना भी गति धीमी करता है. ब्रिटेन के लिवरपूल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने वर्ष 1962 से 2010 के दिनों की लंबाई और पृथ्वी के कोर के अध्ययन के दौरान दिन की लंबाई में फर्क देखा. सन 2011 में जापान के भूकंप से धरती कुछ इतनी हिली कि यह कुछ तेज घूमने लगी और इसके कारण दिन सामान्य से थोड़ा छोटा हो गया. उस समय अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के भू-भौतिकी विज्ञानी रिचर्ड ग्रास ने गणना करने के बाद बताया कि पृथ्वी की अपनी धुरी पर चक्कर लगाने की गति 1.6 माइक्रोसेकंड बढ़ गई. यों वर्ष 2004 में सुमात्रा के भूकंप से दिन 6.8 माइक्रोसेकंड छोटा हो गया था. यानी भूकम्पों के कारण गति का बढ़ना और घटना दोनों बातें सम्भव हैं. 
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