Saturday, March 31, 2018

वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से क्यों शुरू होता है?

ऐसा ब्रिटिश परम्परा के कारण है. ईस्ट इंडिया कम्पनी से ब्रिटिश सरकार को भारत की सत्ता हस्तांतरण होने के बाद 1860 में पहली बार बजट प्रणाली प्रारम्भ की गई. 1867 में 1 अप्रैल से 31 मार्च तक की अवधि का पहला बजट प्रस्तुत किया गया. इंग्लैंड में इसे 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक इसलिए नहीं रखा जाता, क्योंकि साल के अंत में क्रिसमस के त्योहार की वजह से लोग व्यस्त रहते हैं. उस वक्त आर्थिक हिसाब-किताब के लिए समय नहीं होता, क्योंकि सर्दी की छुट्टियाँ होती हैं.
दुनिया के सभी देशों में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से शुरू नहीं होता. अमेरिका का वित्तीय वर्ष पहली अक्तूबर से 30 सितंबर तक होता है, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मिस्र, पाकिस्तान में यह पहली जुलाई को शुरू होकर 30 जून तक रहता है. चीन, ब्राजील, जर्मनी, नीदरलैंड, दक्षिण कोरिया, पुर्तगाल, रूस, स्पेन, स्वीडन, स्विट्ज़रलैंड, ताइवान एवं अन्य 60 देशों में 1 जनवरी  से 31 दिसम्बर तक अर्थात् कैलेंडर वर्ष को वित्त वर्ष भी माना जाता है.
संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, आईएमएफ एवं विश्व के बड़े वित्तीय संस्थान कैलेंडर वर्ष को अपने वित्त वर्ष के रूप में अपनाते हैं. भारत में भी 1 जनवरी से 31 दिसम्बर तक के कैलेंडर वर्ष को वित्त वर्ष में अपनाने के लिए समय-समय पर सुझाव दिए जाते रहे हैं किन्तु अभी तक वित्त वर्ष की तारीखों में बदलाव नहीं आ पाया. हाल में भारत में नए वित्त वर्ष की जरूरत और बदलाव की संभावनाओं पर विचार के लिए भारत सरकार ने पूर्व आर्थिक सलाहकार डॉ. शंकर आचार्य की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय समिति ने भी वित्त वर्ष 1 जनवरी से रखने का सुझाव दिया है. दिसम्बर 2016 में इस समिति ने वित्त मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी.  
समिति ने नीति आयोग का समर्थन करते हुए कहा है कि मॉनसून और फसली मौसम के हिसाब से यह कदम अनुकूल रहेगा. समिति ने शेयर बाजार द्वारा अपनाए जाने वाले संवत कैलेंडर, जुलाई से शुरू होने वाले फसली चक्र के कैलेंडर पर भी गौर किया, लेकिन जनवरी से दिसंबर के कैलेंडर को उपयुक्त माना. हमारे देश की अर्थ-व्यवस्था खेती से भी प्रभावित होती है. मॉनसून की अनियमितता का असर अर्थ-व्यवस्था पर पड़ता है. कुछ अर्थशास्त्रियों ने जुलाई से जून के वित्त वर्ष की सलाह भी दी. भारत सरकार ने 1984 में डॉ. एलके झा की अध्यक्षता में वित्त वर्ष में बदलाव के लिए समिति का गठन किया था. उस समिति ने जनवरी से दिसम्बर को वित्त वर्ष अपनाने का सुझाव दिया था. पर सरकार ने बदलाव करना ठीक नहीं समझा. 
साउंडप्रूफ प्रणाली क्या है?
साउंडप्रूफिंग से तात्पर्य है आवाज़ के दबाव को संतुलित करना. इसके कई अर्थ हो सकते हैं. एक अर्थ है कमरे से आवाज़ बाहर न जाने देना. दूसरा अर्थ है बाहर की आवाज़ अन्दर न आने देना. तीसरा अर्थ है कमरे में अनुगूँज या ईको को रोकना. चौथा अर्थ है कि आवाज़ की सभी आवृत्तियों की अनुमति देना और निरर्थक आवाज़ों को रद्द करना या जज़्ब करना. आमतौर पर दीवारों पर एकाउस्टिक बोर्ड और फोम लगाकर ध्वनि को बेहतर बनाया जाता है. ज़रूरत के अनुसार एकाउस्टिक ट्रांसमिशन, रिसेप्शन, माइक्रोफोन, स्पीकर आदि का इस्तेमाल होता है. अब ऐसे कम्प्यूटर बेस सिस्टम आते हैं, जो ध्वनि का तत्काल विश्लेषण करके निरर्थक ध्वनियों को रद्द कर देते हैं.
तितली की कितनी आँखें होती हैं?
तितली की भी दो आँखें होती हैं, पर उसकी आँखें कम्पाउंड यानी संयुक्त होती हैं. उसके अनेक फोटोरिसेप्टर होते हैं. इस तरह देखें तो उसके हजारों आँखें होती हैं. मोटे तौर पर करीब बारह से बीस हजार आँखें. तितलियाँ देख तो सकती हैं लेकिन उनकी यह क्षमता सीमित होती है. इनकी आँखें बड़ी और गोलाकार होती हैं. इनमें हज़ारों सैंसर होते हैं जो अलग- अलग कोण में लगे रहते हैं. तितलियां ऊपर, नीचे, आगे, पीछे, दाएँ, बाएँ सभी दिशाओं में एक साथ देख सकती हैं. इसका यह नुक़सान भी होता है कि वे किसी चीज़ पर अपनी दृष्टि एकाग्र नहीं कर पातीं और उन्हें धुंधला सा दिखाई देता है. पर वे किसी भी प्रकार की गति को भाँप जाती हैं. इसीलिए जब कोई उन्हें पकड़ने के लिए हाथ बढ़ाता है तो उन्हें फौरन पता चल जाता है और वे उड़ जाती हैं.
भारत में कुल कितने गाँव हैं?
सन 2011 की जनगणना के अनुसार देश में गाँवों की संख्या 6,40,867  है. 2001 की जनगणना में यह संख्या 6,38,588 थी.
http://epaper.prabhatkhabar.com/1605606/Awsar/Awsar#page/6/1

Monday, March 26, 2018

अंतरराष्ट्रीय सोलर एलायंस क्या है?


हाल में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान जब अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का पहला सम्मेलन हुआ, तब दुनिया का ध्यान इस नए उदीयमान संगठन की ओर गया, जो ऊर्जा की वैश्विक जरूरतों के लिए एक नया संदेश लेकर आया है. नवम्बर 2015 में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लंदन के वैम्ब्ले स्टेडियम में इस अवधारणा को प्रकट किया था और सौर-ऊर्जा के लिहाज से धनी देशों को सूर्यपुत्र कहा था. इसके बाद इस गठबंधन की शुरुआत 30 नवम्बर 2015 को पेरिस में हुई थी. यह गठबंधन कर्क और मकर रेखा पर स्थित देशों को नई ऊर्जा के विकल्प लेकर आया है. इस इलाके में सौर ऊर्जा इफरात से मिलती है.

इस संगठन का उद्देश्य है, इन देशों के बीच सहयोग बढ़ाना. इसका सचिवालय दिल्ली के करीब गुरुग्राम में बनाया गया है. इसके भवन की आधारशिला 25 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने रखी. सन 2016 के मराकेश जलवायु सम्मेलन में इस संधि का प्रारूप पेश किया गया था. पहले दिन इसपर 15 देशों ने दस्तखत किए. अब चीन और अमेरिका भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं. दोनों ने अभी इससे जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, लेकिन दोनों ही जल्द इससे जुड़ सकते हैं. चीन और अमेरिका के साथ आने से फायदा होगा, क्योंकि दोनों के पास इससे जुड़ी पर्याप्त तकनीक है.

इस समझौते के तहत उष्णकटिबंधीय देशों में सोलर पावर के इस्तेमाल को बढ़ाया दिया जाएगा. फिलहाल 62 देशों ने इसके शुरुआती ढांचे पर रजामंदी जताते हुए दस्तखत किए हैं. भारत ने लक्ष्य रखा है कि वह 2022 तक 175 गीगावॉट नवीकरणीय या अक्षय ऊर्जा का उत्पादन करने लगेगा. इसमें 100 गीगावॉट सोलर और 75 गीगावॉट पवन ऊर्जा होगी. भारत दुनिया में सौर ऊर्जा का वरण करने वाले देशों में बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहा है. इस साल फरवरी में देश की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता 20 गीगावॉट की थी. सन 2014 में यह क्षमता 2.6 गीगावॉट थी. जो 20 गीगावॉट क्षमता हासिल की गई है, वह 2022 तक पाने का हमारा लक्ष्य था.

प्रशंसक के अर्थ में फैन शब्द कैसे बना?

दो साल पहले फिल्म 'फैन' के नायक थे शाहरुख खान. व्यक्तिगत बातचीत में कहीं शाहरुख ने कहा, फैन शब्द मुझे पसंद नहीं. उनका कहना था, फैन शब्द फैनेटिक (उन्मादी) से निकला है. यह कई बार नकारात्मक भी होता है. आप ने अक्सर लोगों को यह कहते सुना होगा कि मैं अमिताभ का फैन हूँ या सचिन तेंदुलकर, रेखा या विराट कोहली का फैन हूँ. कुछ लोग मज़ाक में कहते हैं कि मैं आपका पंखा हूँ, क्योंकि फैन का सर्वाधिक प्रचलित अर्थ पंखा ही है.

फैन का अर्थ उत्साही समर्थक या बहुत बड़ा प्रशंसक भी होता है, पर इसका यह अर्थ हमेशा से नहीं था. इसका जन्म अमेरिका में बेसबॉल के मैदान में हुआ. इसका पहली बार इस्तेमाल किया टेड सुलीवॉन ने, जो सेंट लुईस ब्राउन्ज़ बेसबॉल टीम के मैनेजर थे. सन 1887 में फिलाडेल्फ़िया की एक खेल पत्रिका ‘स्पोर्टिंग लाइफ़’ में इस शब्द के बारे में जानकारी दी गई. इसमें बताया गया कि फैन शब्द ‘फैनेटिक’ का संक्षिप्त रूप है.

टेड सुलीवॉन ने बताया,मैं टीम के मालिक क्रिस से बात कर रहा था. क्रिस के निदेशक मंडल में बेसबॉल के दीवाने भी थे जो मेरे कामों में हमेशा दखल देते रहते और क्रिस को यह बताते रहते कि टीम को कैसे चलना चाहिए. मैंने क्रिस से कहा कि मुझे इतने सारे फैनेटिक्स की सलाह की ज़रूरत नहीं है. इसी बातचीत में संक्षेप में फैन्ज़ शब्द बन गया. मैंने कहा कि क्रिस यहां बहुत सारे फैन्ज़ हैं. बाद में अखबारों में यह शब्द चल निकला. 

पहले यह शब्द अमेरिकी खेल प्रेमियों के लिए ही प्रयोग होता रहा, लेकिन बाद में यह दूसरे खेलों और फिर जीवन के सभी क्षेत्रों में छा गया. इस शब्द से फैनडम शब्द बना. फिर फैन मेल, फैन लेटर और फैन क्लब तक बन गए.

रोबोट शब्द कब बना?

रोबोट शब्द चेकोस्लोवाकिया के नाट्य लेखक कारेल चापेक ने 1921 में गढ़ा. उन्होंने एक नाटक लिखा आरयूआर यानी कि रोज़म्स युनीवर्सल रोबोट्स. इस वैज्ञानिक फैंटेसी में मशीनी सेवक हैं, जो मनुष्यों के लिए काम करते हैं. चेक भाषा में रोबोटा का मतलब होता है श्रमिक. इससे बना रोबोट शब्द. पर यहाँ से रोबोट की अवधारणा का जन्म नहीं हुआ. यदि हम मनुष्यों की तरह काम करने वाली मशीन की अवधारणा का इतिहास खोजें तो पाएंगे कि इससे पहले ऑटोमेटा की अवधारणा ने जन्म ले लिया था. ऑटोमेटा सन1700 के आसपास बनाए गए खिलौने थे, जो घड़ीसाज़ी में काम आने वाली मशीनरी के सहारे चलते थे. इतने चलते-फिरते पुतले कह सकते हैं. पिछले चार दशकों में कम्प्यूटर और कृत्रिम मेधा (आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस) के विकास के साथ रोबोट का मतलब काफी बदल गया है. 

पूरी दुनिया में कुल कितनी भाषाएं हैं?

पूरी दुनिया में अनुमान है कि भाषाओं की संख्या तीन से आठ हजार के बीच है. वस्तुतः यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप भाषा को किस तरह से परिभाषित करते हैं. अलबत्ता दुनिया की भाषाओं के एथनोलॉग कैटलॉग के अनुसार दुनिया में इस वक्त 6909 जीवित भाषाएं हैं. इनमें से केवल 6 फीसदी भाषाएं ही ऐसी हैं, जिन्हें बोलने वालों की संख्या दस लाख या ज्यादा है. एथनोलॉग कैटलॉग के बारे में जानकारी यहाँ मिल सकती है https://www.ethnologue.com/statistics/size.

Sunday, March 25, 2018

‘रोबोट’ शब्द कब बना?

रोबोट शब्द चेकोस्लोवाकिया के नाट्य लेखक कारेल चापेक ने गढ़ा। उन्होंने 1921 में एक नाटक लिखा आरयूआर यानी कि रोज़म्स युनीवर्सल रोबोट्स। इस वैज्ञानिक फैंटेसी में मशीनी सेवक हैं, जो मनुष्यों के लिए काम करते हैं। चेक भाषा में रोबोटा का मतलब होता है श्रमिक। इससे बना रोबोट शब्द। पर यहाँ से रोबोट की अवधारणा का जन्म नहीं हुआ। यदि हम मनुष्यों की तरह काम करने वाली मशीन की अवधारणा का इतिहास खोजें तो पाएंगे कि इससे पहले ऑटोमेटा की अवधारणा ने जन्म ले लिया था। ऑटोमेटा सन1700 के आसपास बनाए गए खिलौने थे, जो घड़ीसाज़ी में काम आने वाली मशीनरी के सहारे चलते थे। इतने चलते-फिरते पुतले कह सकते हैं। पिछले चार दशकों में कम्प्यूटर और कृत्रिम मेधा (आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस) के विकास के साथ रोबोट का मतलब काफी बदल गया है। 
वीडियोबॉम्बिंग किसे कहते हैं?
यह शब्द टीवी पत्रकारिता के विकास के साथ एक नई तरह की संस्कृति को व्यक्त करता है। अक्सर टीवी पत्रकार किसी विशिष्ट व्यक्ति से कैमरा पर बात करते हैं तो आसपास लोग जमा हो जाते हैं और कैमरा में अपनी शक्ल दिखाने की कोशिश करते हैं। कोशिश ही नहीं हाथों से इशारे वगैरह भी करते हैं, ताकि उनकी तरफ ध्यान जाए। किसी बड़े खिलाड़ी, नेता, अभिनेता या सेलिब्रिटी के साथ खुद को जोड़ने की कोशिश करना वीडियोबॉम्बिंग है। हाल के वर्षों में खेल के जीवंत प्रसारण के साथ ऐसे दर्शकों की तस्वीरें भी दिखाई जाने लगी है, जो अपने पहनावे, रंगत या हरकतों की वजह से अलग पहचाने जाते हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के साथ कुछ दर्शक दुनियाभर की यात्रा करते हैं और हरेक मैच में नजर आते हैं। अमेरिका के रॉलेन फ्रेडरिक स्टीवर्ट ने सत्तर के दशक में अमेरिकी खेल के मैदानों में इंद्रधनुषी रंगों के एफ्रो-स्टाइल विग पहनकर इसकी शुरुआत की थी, जिसके कारण उन्हें ‘रेनबो मैन’ कहा जाता था।
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स
दुनिया में मनी लाउंडरिंग रोकने के लिए ग्रुप-7 की पहल है जिसे उसके संक्षेप नाम FATF से पहचाना जाता है। सन 1989 में शुरू हुए इस अंतर-शासन संगठन के जिम्मे सन 2001 में आतंकवादी संगठनों को मिल रही वित्तीय मदद पर रोक लगाने का काम भी आ गया। यह संगठन दुनिया के देशों पर नजर रखता है कि वे इस दिशा में क्या कर रहे हैं। इन दिनों यहाँ पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डालने पर विचार किया जा रहा है। इस संगठन का सचिवालय पेरिस में है। इस संगठन में सन 1989 में 16 सदस्य थे, जो सन 2016 तक बढ़कर 37 हो गए। भारत भी इसका सदस्य है।
नीम कड़वा क्यों होता है?
नीम के तीन कड़वे तत्वों को वैज्ञानिकों ने अलग किया है, जिन्हें निम्बिन, निम्बिडिन और निम्बिनिन नाम दिए हैं। सबसे पहले 1942 में भारतीय वैज्ञानिक सलीमुज़्ज़मा सिद्दीकी ने यह काम किया। वे बाद में पाकिस्तान चले गए थे। यह कड़वा तत्व ही एंटी बैक्टीरियल, एंटी वायरल होता है और कई तरह के जहरों को ठीक करने का काम करता है।
ख़ाकी माने क्या?
ख़ाकी शब्द फारसी के ख़ाक से बना है। यानी मिट्टी का। मटमैला रंग, भूरा, मिट्टी से संबंधित, मृण्मय। इसके अलावा बिना सींची हुई भूमि। मुहावरे के रूप में इसका इस्तेमाल होता है खाकी अंडा। यानी ऐसा अंडा, जो भीतर से बिगड़ गया हो और जिसमें से बच्चा न निकले, बयंडा, गंदा अंडा। भारत में अंग्रेज सेना ने घुड़सवार दस्तों की वर्दी के रूप में ख़ाकी रंग को चुना, क्योंकि यह रंग दूर से जमीन के रंग से मिलता था। उन्नीसवीं सदी में यह शब्द अंग्रेजी के शब्दकोशों में भी शामिल हो गया। एक प्रकार के वैष्णव साधुओं को भी ख़ाकी कहते हैं, जो तमाम शरीर में राख लगाया करते हैं। मुसलमान फकीरों का एक संप्रदाय, जो ख़ाकी शाह का अनुयायी है।


Tuesday, March 20, 2018

इच्छा मृत्यु क्या है?


भारत के सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा मृत्यु को लेकर लिविंग विल और पैसिव यूथेनेशिया को कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दे दी है. कॉमन कॉज नाम की ग़ैर सरकारी संस्था की याचिका पर अदालत ने ये फ़ैसला सुनाया.

इच्छा-मृत्यु अर्थात को अंग्रेजी में यूथेनेशिया (Euthanasia) कहते हैं. यह मूलतः ग्रीक शब्द है. जिसका अर्थ है Eu=अच्छी, Thanatos= मृत्यु. इच्छा-मृत्यु या दया मृत्यु पर दुनियाभर में बहस है. इसके साथ क़ानूनी के अलावा मेडिकल और सामाजिक पहलू भी जुड़े हुए हैं. दुनियाभर में इच्छा-मृत्यु की इजाज़त देने की माँग बढ़ी है. मेडिकल साइंस में इच्छा-मृत्यु यानी किसी की मदद से आत्महत्या और सहज मृत्यु या बिना कष्ट के मरने के व्यापक अर्थ हैं. चिकित्सकीय परिभाषाओं में इसके निम्नलिखित प्रचलित रूप हैं:-

स्वेच्छया एक्टिव यूथेनेशिया: मरीज़ की मंज़ूरी के बाद ऐसी दवाइयां देना जिससे मरीज़ की मौत हो जाए. यह नीदरलैंड और बेल्जियम में वैध है.

गैर-स्वेच्छया एक्टिव यूथेनेशिया: मरीज़ मानसिक तौर पर अपनी मृत्यु की मंज़ूरी देने में असमर्थ हो, तब उसे मारने की दवाएं देना. यह पूरी दुनिया में ग़ैरक़ानूनी है.

निष्क्रिय यूथेनेशिया: इलाज बंद करना या जीवन-रक्षक प्रणालियों को हटाना. यह प्रायः पूरी दुनिया में प्रचलित है.

एक्टिव यूथेनेशिया: ऐसी दवाएं देना ताकि मरीज़ को राहत मिले, पर बाद में उसकी मौत हो जाए. यह तरीक़ा भी दुनिया के कुछ देशों में वैध माना जाता है.

सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 का मतलब क्या है?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को उनकी संख्या से याद किया जाता है. प्रस्ताव संख्या 1267 मूलतः अलकायदा-तालिबान प्रस्ताव के रूप में पहचाना जाता है. इसे 15 अक्तूबर 1999 को पास किया गया था. अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के शासन के दौरान अल-कायदा की बढ़ती गतिविधियों के कारण 1998 में सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव 1189, 1193 और 1214 पास किए थे.

प्रस्ताव 1267 के माध्यम से ओसामा बिन लादेन और उनके सहयोगियों को आतंकवादी घोषित करके ऐसे सभी व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ पाबंदियाँ लगाने की घोषणा की गई, जो उन्हें शरण देंगे. इन प्रतिबंधों का दायरा पूरी दुनिया में फैला दिया गया. प्रस्ताव 1267 के तहत सुरक्षा परिषद की एक समिति ने ऐसे व्यक्तियों और संस्थाओं की सूची तैयार की है, जिनका रिश्ता अल-कायदा और तालिबान से रहा है. इस सिलसिले में 19 दिसम्बर 2000 में प्रस्ताव 1333 भी पास किया गया. दोनों का लक्ष्य अफगानिस्तान के तत्कालीन तालिबान प्रशासन पर दबाव डालना था. 30 जुलाई 2001 को प्रस्ताव 1363 के मार्फत एक निगरानी टीम भी बनाई गई.

प्रस्ताव 1267 के तहत पाकिस्तानी उग्रवादी संगठन जैशे-मोहम्मद अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन है. भारत इस संगठन के मुखिया मसूद अज़हर को भी आतंकवादियों की सूची में डालने के प्रयास करता रहा है. इन प्रयासों को अभी तक चीनी अड़ंगे के कारण सफलता नहीं मिली है. पठानकोट हवाई अड्डे पर हमले के बाद भारत ने 1267 की मंजूरी समिति में अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव रखा था.

चमगादड़ पक्षी नहीं है, तो उड़ता कैसे है?

चमगादड़ एकमात्र ऐसा स्तनधारी है जो उड़ सकता है तथा रात में भी उड़ सकता है. इसके अग्रबाहु पंख मे परिवर्तित हो गए हैं जो देखने में झिल्ली (पेटाजियम) के समान लगते हैं. त्वचा की यह झिल्ली गरदन से लेकर हाथ की अंगुलियों तथा शरीर के पार्श्व भाग से होती हुई पूँछ तक चली जाती है एवं पंख का निर्माण करती है. पिछली टाँगें पतली, छोटी और नख-युक्त होती हैं. इसके शरीर पर बाल कम ही होते हैं. चमगादड़ के पंखो का आकार 2.9 सेंटीमीटर से लेकर 1500 सेंटीमीटर तक तथा इनका वज़न 2 ग्राम से 1200 ग्राम तक होता है. चमगादड़ उलटे लटकते हैं क्यों कि उल्टे लटके रहने से वे बड़ी आसानी से उड़ान भर सकते हैं. पक्षियों की तरह वे ज़मीन से उड़ान नहीं भर पाते, क्योंकि उनके पंख भरपूर उठान नहीं देते और उनके पिछले पैर इतने छोटे और अविकसित होते हैं कि वे दौड़ कर गति नहीं पकड़ पाते. 
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

Sunday, March 11, 2018

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति कैसे होती है?

संविधान के अनुच्छेद 124 में  सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति का प्रावधान है। इसमें मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के बारे में किसी विशेष प्रावधान का जिक्र नहीं है। अलबत्ता सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को नियुक्त करने की परंपरा बन गई है। निवृत्तमान मुख्य न्यायाधीश अपने बाद के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश के नाम की संस्तुति राष्ट्रपति से करते हैं। वरिष्ठता सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति की तिथि से तय होती है।

सामान्यतः वरिष्ठतम न्यायाधीश को मुख्य न्यायाधीश बनाने की परंपरा है, पर बताया जाता है कि 6 नवंबर 1951 को मुख्य न्यायाधीश हरिलाल कानिया के निधन के समय प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जस्टिस पतंजली शास्त्री की वरिष्ठता का उल्लंघन करना चाहते थे, पर उस वक्त सुप्रीम कोर्ट के सभी छह जजों ने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो हम सब त्यागपत्र दे देंगे। तब जस्टिस शास्त्री को ही मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। तबसे वरिष्ठता की परंपरा बन गई।

वरिष्ठता की परंपरा का दो बार उल्लंघन हुआ है। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में दोनों मौके आए। पहली बार 25 अप्रैल 1973 में जस्टिस एएन रॉय को तीन न्यायाधीशों की वरिष्ठता की अनदेखी करके मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। दूसरी बार इमर्जेंसी के दौरान 29 जनवरी 1977 को जस्टिस एचआर खन्ना की वरिष्ठता की अनदेखी करके जस्टिस एमएच बेग को मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। इस समय देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा है, जिन्होंने जस्टिस जेएस खेहर की जगह ली है। जस्टिस मिश्रा देश के 45वें मुख्य न्यायाधीश हैं। 
स्वतंत्र भारत के मुख्य न्यायाधीश
1.हरिलाल जैकिसनदास कानिया, 2.एम पतंजली शास्त्री, 3.मेहर चंद महाजन, 4.बिजन कुमार मुखर्जी, 5.सुधीरंजन दास, 6.भुवनेश्वर प्रसाद सिन्हा, 7.प्रह्लाद बालाचार्य गजेंद्रगडकर, 8.अमल कुमार सरकार, 9.कोका सुब्बाराव. 10.कैलाश नाथ वांचू, 11.मोहम्मद हिदायतुल्ला, 12.जयंतीलाल छोटालाल शाह, 13.सर्व मित्र सीकरी, 14.अजित नाथ राय, 15.मिर्जा हमीदुल्ला बेग, 16.यशवंत विष्णु चंद्रचूड़, 17.प्रफुल्लचंद्र नटवरलाल भगवती, 18.रघुनंदन स्वरूप पाठक, 19.एंगलगुप्पे सीतारमैया वेंकटरमैया, 20.सब्यसाची मुखर्जी, 21.रंगनाथ मिश्रा, 22.कमल नारायण सिंह, 23.मधुकर हीरालाल कानिया, 24.ललित मोहन शर्मा, 25.मानेपल्ली नारायण राव वेंकटचलैया, 26.अजीज मुशब्बर अहमदी, 27.जगदीश शरण शर्मा, 28.मदन मोहन पंछी, 29.आदर्श सेन आनंद, 30.सैम पिरोजभरूचा, 31.भूपिंदर नाथ किरपाल, 32.गोपाल बल्लभ पटनायक, 33.वीएन खरे, 34.एस राजेंद्र बाबू, 35. रमेश चंद्र लाहोटी, 36.योगेश कुमार सभरवाल, 37.केजी बालाकृष्णन, 38.एसएच कपाडिया, 39.अल्तमस कबीर, 40.पी सदाशिवम, 41.राजेंद्र मल लोढ़ा, 42.एचएल दत्तू, 43.टीएस ठाकुर, 44.जगदीश सिंह खेहर, 45.दीपक मिश्रा (वर्तमान)।

द्रोणाचार्य पुरस्कार कब शुरू हुए?
खेल के मैदान में प्रशिक्षकों का यह सबसे बड़ा भारतीय पुरस्कार है। यह हर साल दिया जाता है। पहले द्रोणाचार्य पुरस्कार सन 1985 में भालचंद्र भास्कर भागवत (कुश्ती), ओम प्रकाश भारद्वाज (बॉक्सिंग) और ओएम नाम्बियार (एथलेटिक्स) को दिए गए।
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Saturday, March 10, 2018

FATF क्या है?

यह फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स का अंग्रेज़ी में संक्षिप्त नाम है. इसका उद्देश्य है दुनिया में वित्तीय अपराधों को रोकने के लिए सदस्य देशों को दिशा देना और दुनिया में एंटी-मनी लाउंडरिंग नियमन-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नीतियों और प्रक्रियाओं को दुरुस्त बनाना. इसमें वैश्विक निगरानी शामिल है. चूंकि मनी लाउंडरिंग तथा अन्य अपराधों से जुड़े लोग, आतंकी गतिविधियों के लिए पैसे का इंतजाम भी करते हैं, इसलिए यह आतंकी गतिविधियों के इस पक्ष पर भी ध्यान देता है. इन गतिविधियों से जुड़े लोगे अपनी हरकतों में बदलाव लाते रहते हैं, इसलिए यह संगठन अपनी सिफारिशों में बदलाव लाता रहता है.

यह संगठन सन 1989 में जी-7 देशों के पेरिस शिखर सम्मेलन की देन है. 11 सितम्बर 2011 के आतंकवादी हमले के बाद से इसने सन 2001 में आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने के खिलाफ भी सिफारिशें देना शुरू किया और अब यह जन-संहार के हथियारों के प्रसार के विरुद्ध भी नीति-निर्देश दे रहा है. इसकी सिफारिशों में व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और भ्रष्टाचार को रोकने से जुड़ी सिफारिशें भी शामिल हैं. इसके गठन के वक्त 16 देश इसके सदस्य थे, जिनकी संख्या इस वक्त 37 है. इनमें भारत भी शामिल है.  

भारत सन 2006 में इसका पर्यवेक्षक बना और सन 2010 में पूर्ण सदस्य बन गया. भारत इसका 34वाँ सदस्य देश बना. इसके सदस्यों में युरोपियन कमीशन और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) भी शामिल हैं. इसका सदस्य बनने के लिए देश को रणनीति-दृष्टि से महत्वपूर्ण होना चाहिए. यानी उसके पास बड़ी आबादी, बड़ी जीडीपी, विकसित बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर वगैरह होने चाहिए. FATF में विश्व के अनेक महत्वपूर्ण संगठन पर्यवेक्षक के रूप में शामिल होते हैं. इनमें इंटरपोल, अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) तथा विश्व बैंक शामिल हैं. सन 1990 में FATF ने पहली बार अपनी सिफारिशें जारी की थीं. इसके बाद 2001, 2003 और 2012 में इनमें संशोधन किए गए. संगठन की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है इसकी महासभा, जिसकी साल में तीन बैठकें होतीं हैं.  

इसकी वॉच लिस्ट का मतलब?

अपनी स्थापना के बाद FATF ने अपनी पहली रिपोर्ट में मनी लाउंडरिंग को रोकने के लिए 40 सिफारिशें की थीं. सन 2003 में इन सिफारिशों में संशोधन किया गया. इन 40 सिफारिशों के अलावा आतंकवादियों को मिल रहे धन पर रोक लगाने वाली 9 विशेष सिफारिशें इनमें जोड़ी गईं. सन 2000 में FATF ने नॉन कोऑपरेटिव कंट्रीज़ ऑर टेरिटरीज़(NCCT)’ नाम से 15 देशों की एक सूची भी जारी की. इसके बाद 2001 में इसमें आठ और देशों के नाम शामिल हो गए. इसे आमतौर पर FATF की काली सूची कहा जाता है. यह सूची संशोधित होती रहती है.

FATF के सामान्य दिशा-निर्देशों के मुकाबले इसकी काली सूची से अराजक देश घबराते हैं. ऐसा पाकिस्तान के मामले में देखने से भी लगता है. सन 2008 में मुम्बई हमले के बाद पाकिस्तान को निगरानी सूची में डाला गया था, जिसके बाद पाकिस्तान ने अपने यहाँ सक्रिय कुछ संगठनों पर नकेल डाली थी. सन 2015 में वह इस सूची से बाहर आ गया, पर लश्करे तैयबा को मिल रही लगातार ढील के कारण वह फिर से इस संगठन की निगरानी सूची में आ गया है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत इस सूची के तहत किसी प्रकार की औपचारिक बंदिशें ऐसे देशों पर नहीं लगतीं, पर व्यवहारिक रूप से ऐसे देशों पर वित्तीय दबाव इतना पड़ता है कि वे चूं बोलने लगते हैं. इस सूची में ऐसे देश भी होते हैं, जो टैक्स चोरों को पनाह देते हैं. पिछली 23 फरवरी को जारी नवीनतम ग्रे लिस्ट में नौ देशों के नाम हैं. जून, 2018 से पाकिस्तान का नाम भी इस सूची में डाल दिया जाएगा.

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस कब से मनाया जा रहा है?

महिला दिवस पहली बार सन 1909 में मनाया गया, हालांकि तब तारीख 8 मार्च नहीं थी, बल्कि 28 फरवरी थी. अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी ने पहली बार नेशनल महिला दिवस मनाया था. इसके एक साल पहले 1908 में न्यूयॉर्क की एक कपड़ा मिल में काम करने वाली करीब 15 हजार महिलाओं ने काम के घंटे कम करने, बेहतर तनख्वाह और वोट का अधिकार देने के लिए प्रदर्शन किया था. पहले महिला दिवस को मनाए जाने के एक साल बाद अगस्त 1910  में डेनमार्क के कोपेनहेगन में महिलाओं की कॉन्फ्रेंस में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर महिला दिवस मनाने का फैसला किया गया और 1911 में पहली बार 19 मार्च को अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया. सन 1913 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की तारीख 8 मार्च कर दी गई. तब से हर 8 मार्च को विश्व भर में महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 1975 का साल महिला वर्ष घोषित किया था और 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को आधिकारिक स्वीकृति प्रदान की थी.

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Sunday, March 4, 2018

एकसाथ आम-चुनाव का मतलब


गत 29 जनवरी को बजट सत्र के अभिभाषण में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्य विधानसभाओं के और लोकसभा के चुनाव एकसाथ कराने की वकालत करते हुए कहा कि इस विषय पर चर्चा और संवाद बढ़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश के किसी न किसी हिस्से में लगातार हो रहे चुनाव से अर्थव्यवस्था और विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. इससे मानव संसाधन पर बोझ तो बढ़ता ही है, आचार संहिता लागू होने से देश की विकास प्रक्रिया भी बाधित होती है. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद में कहा कि विधानसभाओं और लोकसभा के चुनावों के साथ स्थानीय निकाय-चुनावों को भी शामिल किया जा सकता है. इसके साथ ही इस विषय पर देश में बहस चल पड़ी है. इस अवधारणा के विरोधियों का कहना है कि देश की भौगोलिक और राजनीतिक विविधता को देखते हुए ऐसा करना उचित नहीं होगा. पिछले कुछ समय में संसद की स्थायी समिति और नीति आयोग ने दो अलग-अलग रिपोर्टों में साथ-साथ चुनाव कराने का समर्थन किया है.

देश के पहले आम चुनाव 1951-52 में हुए थे. उस वक्त सभी विधानसभाओं और लोकसभा के चुनाव साथ-साथ ही हुए. इसके बाद 1957, 1962 और 1967 तक साथ-साथ चुनाव हुए. सन 1967 में कई राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारें बनीं. कुछ राज्यों में समय से पहले ये सरकारें गिरीं और वहाँ चुनाव हुए, जिससे एकसाथ चुनावों का चक्र टूट गया. इसके बाद सन 1970 में पहली बार केन्द्र सरकार ने समय से पहले चुनाव कराने का फैसला किया और 1971 में केवल लोकसभा के चुनाव हुए.

पकौड़ा कहाँ से आया?

पकौड़ा, पकौड़ी, फक्कुरा, भजिया, भाजी और पोनाको दक्षिण एशिया में प्रचलित नमकीन व्यंजन है, जो खासतौर से भारत, नेपाल, पाकिस्तान और बांग्लादेश में गली-गली बनता मिलेगा. दुनिया में जबसे डीप फ्राई व्यंजनों का चलन शुरू हुआ है पकौड़ा किसी न किसी रूप में हमेशा हाजिर रहा है. यह शब्द सम्भवतः पक्व+वट से मिलकर बना है. वट, वटक और वड़ा इसके दूसरे रूप हैं. आंध्र प्रदेश में पकौडा हौ तो उत्तर भारत के कुछ इलाकों में पकौरा भी चलता है.

दक्षिण भारत का बोंडा और मुम्बई में पाव के साथ मिलने वाला वड़ा इस पकौड़े का ही एक रूप है. बांग्लादेश के कुछ इलाकों में फक्कुरा. र और ड़ के उच्चारण की भिन्नता के कारण भी ऐसा है. कर्नाटक में भाजी है, तो अफ्रीका के सोमालिया में बजिए. दक्षिण अफ्रीका के कुछ इलाकों में ढाल्टी नाम से पकौड़ों जैसा व्यंजन बनता है, जो मुस्लिम इलाकों में रोज़ों के दौरान इफतार में खाया जाता है. दक्षिण एशिया में यह आमतौर पर बेसन या चने की दाल को पीसकर तैयार पेस्ट में सब्जियाँ मिलाकर बनाया जाता है.

मूँग की दाल से बनता है, तो मुँगौड़ा और उरद की दाल से वड़ा. देश के अलग-अलग इलाकों में अलग-लग ढंग से बनने वाली कढ़ी में भी इसे जगह मिली है. पुर्तगाली डिश टेम्पूरा, जापान में जाकर काफी लोकप्रिय हुआ है. इसी तरह दुनियाभर में मिलने वाले तरह-तरह के फ्रिटर्स भी पकौड़े ही हैं. इसमें अंडे और सीफूड को भी जगह मिल गई. भारत में सामान्यतः यह बेसन से बनता है, पर आटे, सूजी और मैदा की मिलावट के साथ इसके नाम भी बदलते जाते हैं. राजस्थान का मिर्ची वड़ा, दिल्ली का ब्रेड पकौड़ा, अंडा पकौड़ा, प्याज पकौड़ा, पनीर पकौड़ा से लेकर चिकन पकौड़ा और फिश पकौड़ा तक इसके तमाम रूप हैं.

ख़ाकी माने क्या?

ख़ाकी शब्द फारसी के ख़ाक से बना है. यानी मिट्टी का. मटमैला रंग, भूरा, मिट्टी से संबंधित, मृण्मय. इसके अलावा बिना सींची हुई भूमि। मुहावरे के रूप में इसका इस्तेमाल होता है खाकी अंडा. यानी ऐसा अंडा, जो भीतर से बिगड़ गया हो और जिसमें से बच्चा न निकले, बयंडा, गंदा अंडा. भारत में अंग्रेज सेना ने घुड़सवार दस्तों की वर्दी के रूप में ख़ाकी रंग को चुना, क्योंकि यह रंग दूर से जमीन के रंग से मिलता था. उन्नीसवीं सदी में यह शब्द अंग्रेजी के शब्दकोशों में भी शामिल हो गया. एक प्रकार के वैष्णव साधुओं को भी ख़ाकी कहते हैं, जो तमाम शरीर में राख लगाया करते हैं. मुसलमान फकीरों का एक संप्रदाय, जो ख़ाकी शाह का अनुयायी है.

डेटा शब्द का मतलब

अंग्रेजी के DATA का मतलब होता है ऐसे तथ्य या आँकड़े, जिनके सहारे निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं. आमतौर पर हम इस शब्द का इस्तेमाल एकवचन के रूप में करते हैं, पर यह लैटिन का बहुवचन शब्द है, जिसका एकवचन Datum होता है. लैटिन व्याकरण को मानने वाले बुज़ुर्ग लोग इसका प्रयोग सिर्फ बहुवचन में करते हैं. नए प्रयोग में यह शब्द एकवचन के तौर पर भी इस्तेमाल होता है. सही है These data are new, जबकि अब बड़ी संख्या में लोग कहते हैं This data is new. सन 1954 में कम्प्यूटर के इस्तेमाल के साथ एक नया शब्द बना डेटा प्रोसेसिंग. 

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Thursday, March 1, 2018

श्वेत-पत्र क्या होता है?

श्वेत पत्र का मतलब होता है ऐसा दस्तावेज जिसमें सम्बद्ध विषय से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी जाती है। इस शब्द की शुरुआत ब्रिटेन से हुई है। सन 1922 में ‘चर्चिल ह्वाइट पेपर’ सम्भवतः पहला श्वेत पत्र था। यह दस्तावेज इस बात की सफाई देने के लिए था कि ब्रिटिश सरकार यहूदियों के लिए फलस्तीन में एक नया देश इसरायल बनाने के लिए 1917 की बालफोर घोषणा को किस तरह अमली जामा पहनाने जा रही है। कनाडा तथा दूसरे अन्य देशों में भी ऐसी परम्परा है। यह जारी करना परिस्थितियों पर निर्भर करता है। सन 1947 में जब कश्मीर पर पाकिस्तानी हमला हुआ था उसके बाद 1948 में भारत सरकार ने एक दस्तावेज जारी करके अपनी तरफ से पूरी स्थिति को स्पष्ट किया था। मई 2012 में भारत सरकार ने काले धन पर और हाल के वर्षों में रेलवे को लेकर श्वेत पत्र जारी किया है। इनके अलावा भी अनेक विषयों पर श्वेत पत्र जारी हुए हैं।

भारतीय विज्ञान कांग्रेस

भारतीय विज्ञान कांग्रेस या ‘भारतीय विज्ञान कांग्रेस संघ’ (Indian Science Congress Association ) भारतीय वैज्ञानिकों की शिखर शीर्ष संस्था है। इसकी स्थापना सन 1914 में कोलकाता में हुई थी। इसका मुख्यालय भी कोलकाता में है। हर साल जनवरी के पहले हफ्ते में इसका सम्मेलन होता है और प्रधानमंत्री इसका उद्घाटन करते हैं। अममून इसके आयोजन का समय और स्थान एक साल पहले तय कर लिया जाता है। एक माने में देश में नए साल का यह पहला महत्वपूर्ण आयोजन होता है। इस साल इसका 105 वाँ सम्मेलन 3 से 7 जनवरी तक उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद में होना था, जिसे स्थगित कर दिया गया। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने कैंपस में सुरक्षा कारणों से इसकी मेज़बानी करने में असमर्थता जाहिर की थी। अब यह सम्मेलन 16-21 मार्च, 2018 को मणिपुर केन्द्रीय विश्वविद्यालय, इम्फाल में होगा।

पिछले साल तिरुपति में 104वीं भारतीय साइंस कांग्रेस हुई थी। सन 2014 इसका शताब्दी-सम्मेलन कोलकाता में हुआ था। उस सम्मेलन में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रीय विज्ञान, तकनीक और नवोन्मेष की नई नीति की घोषणा भी की थी। भारत ने सन 2010 से 2020 के दशक को ‘नवोन्मेष दशक’ (Decade of Innovations) घोषित किया है।

वायु-प्रदूषण का मानक क्या है?

इसे एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) हैं। यह हवा में मौजूद प्रदूषणकारी तत्वों की मात्रा को बताता है। इसे कुछ देशों में एयर पॉल्यूशन इंडेक्स (API) और सिंगापुर में पॉल्यूटेंट स्टैंडर्ड इंडेक्स (PSI)। अलग-अलग देश अपने यहाँ वायु की शुद्धता के अलग-अलग मानक और अलग-अलग नाम रखते हैं। भारत में केंद्रीय पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड और राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों ने मिलकर देश के 240 शहरों के आँकड़ों के आधार पर ‘नेशनल एयर मॉनिटरिंग प्रोग्राम(NAMP)’ बनाया है। देशभर में इस काम के लिए 342 से ज्यादा मॉनिटरिंग स्टेशन हैं। चिकित्सकों, एयर क्वालिटी विशेषज्ञों, एडवोकेसी समूहों के प्रतिनिधियों तथा प्रदूषण बोर्डों के प्रतिनिधियों के एक विशेषज्ञ समूह ने आईआईटी कानपुर को अध्ययन का काम सौंपा। आईआईटी और विशेषज्ञ समूह ने 2014 में AQI कार्यक्रम बनाया।

पुराने मानकों में तीन पैरामीटर थे, जबकि नई अनुश्रवण प्रणाली में आठ पैरामीटर हैं। दिल्ली, मुम्बई, पुणे और अहमदाबाद में निरंतर तत्काल डेटा प्रदान करने वाली प्रणालियाँ लगाई गई हैं। वायु प्रदूषण से जुड़ी छह श्रेणियाँ बनाई गई हैं। ये हैं अच्छा (0-50), संतोषजनक (51-100), हल्का प्रदूषण (101-200), खराब (201-300), बहुत खराब (301-400) और बेहद खराब Severe (401 से 500)। AQI में आठ प्रदूषक तत्वों को शामिल किया गया है। ये हैं पीएम10, पीएम2।5, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, कार्बन डाई मोनोक्साइड, ओज़ोन, अमोनिया और लैड।


राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित