Friday, September 28, 2018

मानव विकास सूचकांक

मानव विकास सूचकांक या ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स मानव विकास के तीन बुनियादी आयामों (दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन, ज्ञान तक पहुँच तथा जीवन के एक सभ्य स्तर) द्वारा प्रगति का आकलन करने का एक वैश्विक मानक है, जिसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) हर साल जारी करता है. इसमें कई तरह की सूचनाओं के आधार पर हरेक देश को अंक दिए जाते हैं. मसलन शिक्षा, स्वास्थ्य, स्त्रियों की स्थिति, आर्थिक स्थिति, जीवन स्तर, संचार के साधन वगैरह. इसके आधार पर अलग-अलग देशों का तुलनात्मक अध्ययन सम्भव होता है. यह सूचकांक अलग-अलग शहरों या अलग-अलग प्रदेशों के तुलनात्मक अध्ययन के लिए भी तैयार किया जा सकता है. इस साल यह रिपोर्ट 14 सितम्बर, 2018 को जारी हुई. सन 1990 से यह रपट जारी हो रही है. इसे बनाने की पहल पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूबुल हक ने की थी. इसमें भारत के अमर्त्य सेन के अलावा पॉल स्ट्रीटेन, फ्रांसिस स्टीवर्ट, गुस्ताव रेनिस और कीथ ग्रिफिथ जैसे अर्थशास्त्री भी जुड़े रहे हैं.

भारत का स्थान

हाल ही में नवीनतम मानव विकास रिपोर्ट में, वर्ष 2017 पर आधारित है, भारत को कुल 189 देशों में 130वाँ स्थान प्राप्त हुआ है. पिछले वर्ष भारत को इस सूचकांक में 131वाँ स्थान प्राप्त हुआ था. सूची में सबसे ऊपर पाँच देश क्रमश:- नॉर्वे (0.953), स्विट्ज़रलैंड (0.944), ऑस्ट्रेलिया(0.939), आयरलैंड(0.938) और ज़र्मनी(0.936) हैं. सबसे निचले स्थान पर अफ्रीकी देश नाइज़र (0.354) है. भारत की एचडीआई गणना 0.640 है, जो दक्षिण एशिया के औसत सूचकांक 0.638 से बेहतर है. अलबत्ता भारत के पड़ोसी देशों में श्रीलंका (0.770) 76वें स्थान पर, चीन (0.752) 86वें स्थान पर और मालदीव (0.717) 101वें स्थान पर हैं. बांग्लादेश (0.608) 136 और पाकिस्तान (0.562)150वें स्थान पर है. भूटान (0.612) 134वें और नेपाल (0.574) 149वें स्थान पर है.

भारत में असमानता

रिपोर्ट में असमानता को भारत के लिए प्रमुख चुनौती माना गया है. देश की असमानता के अंकों को कम करें तो भारत का एचडीआई 0.468 होगा. इस मामले में भी पाकिस्तान और बांग्लादेश का एचडीआई भारत से कम है, पर इन दोनों देशों में असमानता भारत से कम है. वर्ष 1990 से 2017 की अवधि में भारत में जीवन प्रत्याशा लगभग 11 साल बढ़ी है. स्कूली शिक्षा के मामले में भी स्थिति सुधरी है, जबकि 1990 और 2017 के बीच भारत की सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) प्रति व्यक्ति 266.6 प्रतिशत बढ़ी है. लैंगिक असमानता के सूचकांक (जीआईआई) में भारत (0.524)160 देशों की सूची में 127वें स्थान पर है, पाकिस्तान का स्थान 133 और बांग्लादेश का स्थान 134वाँ है. भारत में संसद की 11.6 प्रतिशत सीटें महिला सदस्यों को पास हैं, 36 फीसदी वयस्क महिलाएं कम से कम सेकंडरी स्तर की शिक्षा प्राप्त कर चुकी हैं. 63.5 प्रतिशत पुरुष इस स्तर तक शिक्षा प्राप्त हैं. भारत में प्रति 1,00,000 स्त्रियों में से 174 की प्रसव-जनित कारणों से मृत्यु हो जाती है.

Sunday, September 16, 2018

‘घुटने टेको’ आंदोलन


भारत में घुटने टेकने का मतलब झुक जाना माना जाता है, पर अमेरिका में इसे विरोध प्रदर्शन का एक माध्यम बनाया गया है. वहाँ जातीय या नस्ली अन्याय के खिलाफ संघर्ष इन दिनों टेक द नी या घुटने टेको आंदोलन की शक्ल में सामने आ रहा है. बराक ओबामा जब अमेरिका के राष्ट्रपति बने तब कहा जा रहा था कि अमेरिका में नए युग की शुरुआत हो गई है. ओबामा के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौर में अश्वेतों की शिकायतें बढ़ी हैं. उनके चुनाव में अश्वेतों ने उनके खिलाफ वोट दिया था. धीरे-धीरे यह चर्चा ठंडे बस्ते में दब भी गई थी लेकिन हाल में अमेरिकी फुटबॉलर कॉलिन कैपरनिक को प्रतीक बनाकर यह चर्चा फिर से शुरू हुई है. सोशल मीडिया के कारण यह आंदोलन बड़ी तेजी से फैल रहा है. अभी तक हाथ में मोमबत्तियाँ लेकर विरोध विरोध जताया जाता था. अब राष्ट्रीय गीत के दौरान एक घुटना जमीन पर टिकाकर विरोध जताने का नया तरीका सामने आया है. माना जाता है कि देश से बढ़कर कुछ नहीं, पर राष्ट्रगीत के दौरान ऐसा करने का मतलब है व्यक्ति हर उस चीज का विरोध कर रहा है जिसके कारण उसे अपने ही देश से नाराजगी है.
खेल-मैदान में विरोध
सन 2016 में एक मैच के दौरान जब अमेरिका का राष्ट्रगीत चल रहा था तो कॉलिन कैपरनिक ने एक घुटना जमीन पर टिका दिया. विरोध के इस तरीके पर सारी दुनिया ने गौर किया. मैच के बाद कॉलिन ने स्पष्ट किया कि यह अपने देश का विरोध नहीं है, बल्कि जातीय अन्याय का विरोध है. उन्होंने कहा, विरोध के थोड़े समय बाद ही कॉलिन को टीम से बाहर कर दिया गया था. नेशनल फुटबॉल लीग (एनएफएल) के मैचों में इस प्रकार के विरोध प्रदर्शन शुरू ही हुए थे कि राष्ट्रपति ट्रंप ने टीमों के मालिकों का आह्वान किया कि वे ऐसे खिलाड़ियों को बाहर कर दें. इस बयान ने आग में घी का काम किया. 24 सितम्बर 2007 को 200 खिलाड़ियों ने एक घुटना जमीन पर टिकाकर प्रदर्शन किया. घुटने टेकने की परम्परा कुछ पुरानी है. सन 1960 में साउथ कैरलीना में एक मैच के पहले हॉफ के दौरान अलबर्ट किंग डिक्सन जूनियर नामक खिलाड़ी घुटने टेके थे. तब उन्होंने इसे अपने दिवंगत कोच को श्रद्धांजलि कहा था. अलबत्ता 1965 में मार्टिन लूथर किंग ने जेल जाने से पहले विरोध का यह तरीका अपनाया था.
नाइके की पहल
हाल में खेल से जुड़ी चीजें, खासतौर से स्पोर्ट्स शूज़ बनाने वाली अमेरिकी कम्पनी नाइके ने कॉलिन कैपरनिक को एक लम्बे विज्ञापन अभियान के लिए अनुबंधित किया है. कॉलिन 2011 से इस कम्पनी के साथ जुड़े हैं, पर इस नए अनुबंध के राजनीतिक निहितार्थ हैं. कम्पनी के इस अभियान को समर्थन मिला है, इसे देश-विरोधी गतिविधि माना जा रहा है. नाइके के उत्पादों को जलाया जा रहा है. कॉलिन ब्लैक लाइव्स मैटर (बीएलएम) नामक अंतरराष्ट्रीय आंदोलन के समर्थक भी हैं, जो अमेरिकी-अफ्रीकी समुदाय के सवालों को उठाता है. सन 2013 से सोशल मीडिया पर हैशटैग ब्लैक लाइव्स मैटर नाम से अभियान भी चल रहा है.



Saturday, September 15, 2018

आतंकवाद क्या है?

आतंकवाद एक हिंसात्मक गतिविधि है, जिसके पीछे आर्थिक, धार्मिक, राजनीतिक उद्देश्य हो सकते हैं. भय फैलाकर राजनीतिक लक्ष्यों को हासिल करना. दुनिया में इसके कई उदाहरण हैं, पर आज वैश्विक-आतंकवाद पर हमारा ज्यादा ध्यान है. ‘आतंकवादी’ और ‘आतंकवाद’ शब्दों का सबसे पहले इस्तेमाल 18वीं सदी में फ्रांसीसी राज्य क्रांति के दौरान हुआ. हाल के वर्षों में हम जिस अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का नाम सुन रहे हैं, वह 1983 में बेरुत बमबारी के बाद से प्रचलन में आया है. 11 सितम्बर 2001 को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले और फिर 2002 में बाली बमबारी के कारण यह सुर्खियों में रहा. भारत में अस्सी के दशक में खालिस्तानी हिंसा के कारण आतंकवाद सुर्खियों में था. सन 2001 में भारतीय संसद पर हुआ हमला और फिर 26 नवम्बर 2008 को मुम्बई पर हुआ हमला बहुत बड़ी घटनाएं थीं. आतंकवाद की कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं है. इस हिंसा के समर्थक इसे युद्ध की शैली मानते हैं और इससे पीड़ित अनैतिक. संयुक्त राष्ट्र ने इसकी सर्वमान्य परिभाषा बनाने का प्रयास किया है, पर मतभेदों के कारण इसमें सफलता नहीं मिली है.

नक्सलवाद

नक्सलवाद मोटे तौर पर भारत की मार्क्सवादी-लेनिनवादी पार्टी की विचारधारा के लिए प्रयुक्त होने वाला शब्द है. यह पार्टी नब्बे के दशक में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से टूटकर बनी थी. नक्सल शब्द की उत्पत्ति पश्चिम बंगाल के छोटे से गाँव नक्सलबाड़ी से हुई है जहाँ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता चारु मजूमदार और कानू सान्याल ने 1967 में सत्ता के खिलाफ़ एक सशस्त्र आंदोलन की शुरुआत की.वे चीन के कम्युनिस्ट नेता माओ त्जेदुंग के समर्थक थे. आज कई नक्सली संगठन वैधानिक रूप से स्वीकृत राजनीतिक पार्टी बन गए हैं और संसदीय चुनावों में भाग भी लेते है. बहुत से माओवादी संगठन हिंसक गतिविधियों में लिप्त हैं. इनका पुराने नक्सलवाद से सीधा सम्बन्ध नहीं है, पर अपनी हिंसक गतिविधियों के कारण वे नक्सलवादी माने जाते हैं. आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ, उड़ीसा, झारखंड, महाराष्ट्र और बिहार इनके प्रभाव में हैं.

आतंक विरोधी कानून
देश में अस्सी के दशक में आतंकी गतिविधियाँ बढ़ने के बाद टैररिस्ट एंड डिसरप्टिव एक्टिविटीज़ एक्ट (टाडा)-1987 बनाया गया.इसके दुरुपयोग की शिकायतें मिलने के बाद 1995 में इसे लैप्स होने दिया गया.इस कानून में पुलिस के सामने कबूल की गई बातों को प्रमाण मान लिया जाता था.सन 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान के अपहरण और 2001 में संसद भवन पर हुए हमले के बाद प्रिवेंशन ऑफ टैररिज्म एक्ट (पोटा)-2002 बना.इसके दुरुपयोग की शिकायतों के बाद 2004 में इसे रद्द कर दिया गया. इन दोनों कानूनों के पहले देश में अनलॉफुल एक्टिविटीज़ (प्रिवेंशन) एक्ट (यूएपीए)-1967 का कानून भी था. सन 2008 में मुम्बई हमले के बाद इस कानून में संशोधन करके इसका इस्तेमाल होने लगा. सन 2012 में इसमें और संशोधन किया गया.इसमें आतंकवाद की परिभाषा में बड़े बदलाव किए गए.देश की अर्थव्यवस्था को धक्का पहुँचाने, जाली नोटों का प्रसार करने जैसी बातें भी इसमें शामिल की गईं.इसमें आरोप पत्र दाखिल करने की अवधि तीन महीने से बढ़ाकर छह महीने कर दी गई.

नया खेल ई-स्पोर्ट्स


इंडोनेशिया में हो रहे एशिया खेलों में पहली बार ई-स्पोर्ट्स को डिमांस्ट्रेशन स्पोर्ट्स के रूप में शामिल किया गया है. माना जा रहा है कि सन 2022 में हैंगझाओ, चीन में होने वाले 19वें एशिया खेलों में ई-स्पोर्ट्स प्रतियोगिता के रूप में शामिल होंगे. ई-स्पोर्ट्स का मतलब है इलेक्ट्रॉनिक स्पोर्ट्स. यानी वीडियो गेमिंग, प्रोफेशनल वीडियो गेमिंग. ये नए किस्म के खेल हैं, जिनमें व्यक्ति की प्रत्युत्पन्न मति और शूटिंग जैसी प्रतिभाओं की परीक्षा होती है. दुनिया में अब इन खेलों की प्रतियोगिताएं होने लगी हैं. सबसे ज्यादा प्रचलित खेल है रियल टाइम स्ट्रेटेजी (आरटीएस), फर्स्ट पर्सन शूटर (एफपीएस) और फाइटिंग एंड मल्टीप्लेयर ऑनलाइन बैटल एरेना (एमओबीए). इनकी लीग ऑफ लीजेंड्स वर्ल्ड चैम्पियनशिप, इवॉल्यूशन चैम्पियनशिप सीरीज और इंटेल एक्सट्रीम मास्टर्स जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं होती हैं.

एशियाई खेल
एशियाई खेलों को एशियाड के नाम से भी जाना जाता है. ये खेल हर चार साल में होते हैं. इन खेलों का नियामन एशियाई ओलम्पिक परिषद द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय ओलम्पिक परिषद के पर्यवेक्षण में किया जाता है. इनकी शुरुआत 1951 में हुई थी और पहले एशियाई खेलों का आयोजन दिल्ली, भारत में किया गया था. भारत ने 1982 में फिर इन खेलों की मेजबानी की थी. इस साल अठारहवें एशियाई खेल अगले एशियाई खेल इंडोनेशिया के दो शहरों में हो रहे हैं. इन खेलों में भारत के 572 खिलाड़ियों की टीम भाग ले रही है. इनका शुभारम्भ 18 अगस्त को हुआ है और समापन 2 सितम्बर को होगा. इसका उद्घाटन समारोह जकार्ता में हुआ है और समापन समारोह भी वहीं होगा. यह पहला मौका है, जब एशियाई खेल दो शहरों में आयोजित किए जा रहे हैं. इससे पहले सत्रहवें एशियाई खेल सन 2014 में दक्षिण कोरिया के इंचेयान शहर में हुए थे.

सबसे अमीर देश

हाल में खबर थी कि दुनिया के सबसे अमीर इलाके के रूप में प्रसिद्ध कतर को चीन का द्वीप मकाऊ जल्द पीछे छोड़ने वाला है. दुनिया के इस कसीनो हब के निवासियों की औसत आय सन 2020 में 1,43,116 डॉलर (यानी करीब 75 लाख रुपये) हो जाएगी. यह अनुमान अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष का है. उस वक्त कतर के निवासियों की सालाना औसत आय 1,39,151 डॉलर होगी. अमीरी के लहाज से यूरोप के तीन देश लक्जमबर्ग, आयरलैंड और नॉर्वे दुनिया के दस सबसे अमीर देशों में होंगे. अमेरिका का स्थान 12वाँ होगा. फॉर्च्यून डॉट कॉम के अनुसार अमीरी के लिहाज से दुनिया के पहले पाँच देश इस प्रकार हैं:- 1.कतर (1,24,930 डॉलर), 2.लक्जमबर्ग (1,09,190), 3.सिंगापुर (90,530), 4.ब्रूनेई (76,740), 5.आयरलैंड (72,630).