Sunday, January 14, 2018

कीड़े-मकोड़े पानी पर बिना डूबे कैसे चलते रहते हैं?

आमतौर पर कीड़ों का वजन इतना कम होता है कि वे पानी के पृष्ठ तनाव या सरफेस टेंशन को तोड़ नहीं पाते. पानी और दूसरे द्रवों का एक गुण है जिसे सरफेस टेंशन कहते हैं. इसी गुण के कारण किसी द्रव की सतह किसी दूसरी सतह की ओर आकर्षित होती है. पानी का पृष्ठ तनाव दूसरे द्रवों के मुकाबले बहुत ज्यादा होता है. इस वजह से बहुत से कीड़े मकोड़े आसानी से इसके ऊपर टिक सकते हैं. इन कीड़ों का वजन पानी के पृष्ठ तनाव को भेद नहीं पाता. सरफेस टेंशन एक काम और करता है. पेन की रिफिल या कोई महीन नली लीजिए और उसे पानी में डुबोएं. आप देखेंगे कि पानी नली में काफी ऊपर तक चढ़ आता है. पेड़ पौधे ज़मीन से पानी इसी तरीके से हासिल करते है. उनकी जड़ों से बहुत पतली पतली नलियां निकलकर तने से होती हुई पत्तियों तक पहुंच जाती हैं. सन 1995 में प्रतिमाओं के दूध पीने की खबर फैली थी. वस्तुतः पृष्ठ तनाव के कारण चम्मच का दूध पत्थर की प्रतिमा में ऊपर चढ़ जाता था. इसे लोगों ने प्रतिमाओं का दूध पीना घोषित कर दिया.
रबी, खरीफ और जायद में फर्क क्या है?
भारत में ऋतुओं पर आधारित तीन प्रकार की फसलें होती हैं।
रबीः-शीत ऋतु की फसलों को रबी कहा जाता है| इन फसलों को अक्टूबर से दिसंबर के बीच मे लगाया जाता है| फरवरी से अप्रैल के बीच मे इनकी कटाई होती है| रबी में मुख्यतः गेहूं, मटर,चना वगैरह उगाए जाते हैं।

खरीफः-वर्षा ऋतु की फसल होती है खरीफ। इसे मई से जुलाई के बीच मे लगाया जाता है और इनकी कटाई सितम्बर और अक्टूबर के बीच मे की जाती है | इसमें धान, मक्का, जूट, सोयाबीन, बाजरा, कपास, मूँगफली, शकरकन्दग, उर्द, मूँग, लोबिया, ज्वार, तिल, ग्वा,र, जूट, सनई, अरहर, ढैंचा, गन्नाम, सोयाबीन, भिंण्डीर वगैरह को उगाया जाता है।

जायदः- इसे पूरे साल कृत्रिम सिंचाई के माध्यम से उगाया जाता है | ये दो प्रकार की होती है- जायद रबी और जायद खरीफ | जायद खरीफ की फसल को अगस्त से सितम्बर के बीच मे बोते हैं और इसकी कटाई दिसंबर और जनवरी के बीच मे होती है| जायद खरीफ फसल के मुख्य उदहारण है- धान,ज्वार,कपास इत्यादि| जायद रबी की फसल को फरवरी से मार्च के बीच मे बोया जाता है और इसकी कटाई अप्रैल और मई के बीच मे होती है| जायद रबी फसल के मुख्य उदहारण है- खरबूज,तरबूज,सब्जियाँ इत्यादि|
अब पॉली हाउस की मदद से अलग-अलग मौसम में भी खेती हो रही है।

लक्ष्मीतरु क्या है?


लक्ष्मी तरु या सिमारूबा ग्लाउका ( Simarouba Glauca DC) मूलत: उत्तरी अमेरिका का पेड़ है. इसके बीजों से खाद्य तेल बनता है तथा अन्य भाग भी बहुत उपयोगी हैं. इसके बीज से 60 प्रतिशत तक तेल निकाला जा सकता है, जो बायो डीजल का काम करेगा. उससे वाहनों को भी चलाया जा सकेगा. इसे "स्वर्ग का पेड़" (पैराडाइज ट्री) कहा जाता है. नीम और तुलसी की तरह इस पेड़ के औषधीय गुण भी हैं. चिकनगुनिया जैसे बुखार, गैस्ट्रायटिस और अल्सर वगैरह में यह लाभकारी है. देश के कुछ कृषि विश्वविद्यालयों में इस पर शोध चल रहा है.
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Thursday, January 11, 2018

NRC विवाद क्या है?

NRC यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस, देश के नागरिकों के नाम दर्ज करने की एक व्यवस्था है. इन दिनों इसे असम में अपडेट किया जा रहा है. इसमें उन लोगों के नामों की पुष्टि की जा रही है, जो 24 मार्च 1971 की मध्यरात्रि को या उसके पहले यहाँ रहते थे. इसके पहले सन 1951 में जनगणना के बाद यह सूची बनी थी. असम में यह काम सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुसार हो रहा है, जिसने 17 दिसम्बर 2014 के अपने एक आदेश में कहा था कि 31 दिसम्बर 2017 तक यह सूची जारी कर दी जाए. असम में लम्बे अरसे से बांग्लादेश से आए लोगों की पहचान करने और उन्हें वापस करने की माँग को लेकर आंदोलन चल रहा है. एनआरसी के प्रकाशन पर विरोध करने वालों का कहना है कि यह काम मुसलमानों को बाहर निकालने के लिए किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट में इससे संबंधित विभिन्न याचिकाओं की सुनवाई चल रही है.
अखिल असम अल्पसंख्यक छात्र संघ (आम्सू) ने एनआरसी को अपडेट करने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन छेड़ रखा है. आम्सू के विरोध की मुख्य वजह यह है कि गुवाहाटी हाईकोर्ट ने लगभग 26 लाख लोगों के पहचान के दस्तावेजों को अवैध करार दिया है. इन दस्तावेजों का सत्यापन पंचायत अधिकारियों व राज्य सरकार के सर्किल अफसरों ने किया था. एनआरसी के सामने 3.29 करोड़ प्रार्थना पत्र आए हैं. रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (आरजीआई) ने 31 दिसम्बर 2017 को पहला मसौदा जारी किया है, जिसमें 1.9 करोड़ लोगों को कानूनी रूप से भारत का नागरिक माना गया है. बाकी के नामों पर विभिन्न स्तरों पर जांच की जा रही है.
चींटियाँ एक कतार में क्यों चलती हैं?
प्रकृति ने सभी जीव-जंतुओं को दिशा ज्ञान और आपस में सम्पर्क की सामर्थ्य दी है. मधुमक्खियाँ अपने छत्ते की के आस-पास एक तरह की महक फैलाती हैं ताकि उनकी साथी मधुमक्खियाँ रास्ते से न भटकें. चींटियाँ दिशा ज्ञान के लिए फ़ैरोमोंस (Pheromones) रसायन की मदद लेती हैं. वे सामाजिक प्राणी हैं और मिलकर काम करती हैं. उन्हें अपने भोजन के लिए अपने बिल से दूर बाहर जाना होता है. उनके पास कोई नक्शा नहीं होता. वे अपने शरीर से एक प्रकार का सेंट जमीन पर छोड़ती जाती हैं. शेष चीटियाँ अपनी नेता के पीछे चलती जाती हैं. चींटियों की ग्रंथियों से इस रसायन का स्राव होता है. यह स्राव दूसरी चींटियों को रास्ता बताने का काम करता है. इस रसायन की महक ज्यादा देर टिकती नहीं है इसलिए पीछे आने वाली चींटियाँ उसे ताज़ा बनाए रखने के लिए उसपर फेरोमोंस लगाती हुई एक के पीछे एक चलती रहती हैं.
चींटियों के दो स्पर्शश्रंगिकाएं या एंटीना होते हैं जिनसे वे सूंघने या टोह लेने का काम करती हैं. रानी चींटी भोजन की तलाश में निकलती है तो फ़ैरोमोंस छोड़ती जाती है. दूसरी चींटियाँ अपने एंटीना से उसे सूंघती हुई रानी चींटी के पीछे-पीछे चलती हैं. जब रानी चींटी फ़ैरोमोन बनाना बंद कर देती है तो चीटियाँ, नई चींटी को रानी चुन लेती हैं. फ़ैरोमोंस का इस्तेमाल दूसरी जगह भी होता है. कोई चींटी कुचल जाए तो चेतावनी के फ़ैरोमोन का रिसाव करती है जिससे बाकी चींटियाँ सतर्क हो जाती हैं.
बॉलीवुड की फिल्में शुक्रवार को रिलीज़ क्यों होती हैं?
शुक्रवार को फिल्में रिलीज़ करने की परम्परा हॉलीवुड से आई है. अमेरिका में हफ्ते में काम करने का आखिरी दिन शुक्रवार होता है. उसी दिन साप्ताहिक वेतन मिलता है. दो दिन के वीकेंड का लुत्फ लेने का एक तरीका फिल्में देखना भी हैं. शनिवार और इतवार को सिनेमा उद्योग की अच्छी कमाई हो जाती है. यों भारत में हर जगह शुक्रवार को ही फिल्में रिलीज़ नहीं होतीं. लखनऊ में नई फिल्म गुरुवार को लगती है.
कोलम्बस दिवस कब मनाया जाता है?
क्रिस्टोफर कोलम्बस ने अमेरिका की खोज 12 अक्टूबर 1492 को की थी. उसकी इस खोज को याद रखने के लिए हर साल इस दिन को कोलम्बस दिवस के रूप में मनाया जाता है. उस दिन अमेरिका में ही नहीं, कई देशों में राष्ट्रीय अवकाश होता है. क्रिस्टोफर कोलम्बस की याद में स्पेन के बार्सिलोना में एक स्मारक भी है. कोलम्बस दिवस मनाने का आरंभ अमेरिका के कोलेरैडो में 1907 में हुआ. 1937 से इस दिन को अमेरिका में छुट्टी का दिन घोषित किया गया.


Saturday, January 6, 2018

कॉन्सुलर एक्सेस का मतलब

कॉन्सुलर एक्सेस का मतलब है किसी दूसरे देश में अपने नागरिकों के साथ जरूरत पड़ने पर सम्पर्क. दो देशों के बीच सामान्यतः दूतावासों के मार्फत सम्पर्क होता है. इन दूतावासों के अधीन कॉन्सल होते हैं, जो दोनों देशों के कारोबारी रिश्तों को बेहतर बनाने के अलावा अपने देश के नागरिकों के हितों की रक्षा का काम भी करते हैं. राजनयिक सम्पर्कों के नियमन के लिए सन 1963 में वियेना में एक अंतरराष्ट्रीय संधि हुई थी, जिसमें उन परिस्थितियों का विवरण दिया गया है, जब दूसरे देश में रह रहे अपने किसी नागरिक को कॉन्सल की मदद की जरूरत पड़े तो उसका निर्वहन किस प्रकार होगा. इस संधि में 79 अनुच्छेद हैं, जिसके अनुच्छेद 5 में कॉन्सल के 13 कार्यक्रमों की सूची दी गई है.
इस संधि अनुच्छेद 23 के तहत मेजवान देश को यह अधिकार दिया गया है कि वह किसी कॉन्सुलर स्टाफ को गैर-जरूरी घोषित करके  वापस जाने को कह सके. अनुच्छेद 31 के तहत मेजवान देश की जिम्मेदारी है कि वह कॉन्सुलेट में प्रवेश न करे और उसकी रक्षा करे. अनुच्छेद 36 के तहत किसी विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी होने पर उसके दूतावास या कॉन्सुलेट को इत्तला दी जानी चाहिए, जिसमें गिरफ्तारी के कारणों को बताया गया हो. हाल में यह विषय पाकिस्तान में भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को दी गई सजा के संदर्भ में उठा है. भारत का कहना है कि हमारे उच्चायोग को न तो गिरफ्तारी की जानकारी दी गई और न कुलभूषण जाधव से सम्पर्क करने दिया गया.
भारतीय विज्ञान कांग्रेस
भारतीय विज्ञान कांग्रेस या भारतीय विज्ञान कांग्रेस संघ (Indian Science Congress Association ) भारतीय वैज्ञानिकों की शिखर शीर्ष संस्था है. इसकी स्थापना सन 1914 में कोलकाता में हुई थी. इसका मुख्यालय भी कोलकाता में है. हर साल जनवरी के पहले हफ्ते में इसका सम्मेलन होता है और प्रधानमंत्री इसका उद्घाटन करते हैं. अममून इसके आयोजन का समय और स्थान एक साल पहले तय कर लिया जाता है. एक माने में देश में नए साल का यह पहला महत्वपूर्ण आयोजन होता है. इस साल इसका 105 वाँ सम्मेलन 3 से 7 जनवरी तक उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद में होना था, जिसे स्थगित कर दिया गया है. विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने कैंपस में सुरक्षा कारणों से इसकी मेज़बानी करने में असमर्थता जाहिर की है.
पिछले साल तिरुपति में 104वीं भारतीय साइंस कांग्रेस हुई थी. सन 2014 इसका शताब्दी-सम्मेलन कोलकाता में हुआ था. उस सम्मेलन में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रीय विज्ञान, तकनीक और नवोन्मेष की नई नीति की घोषणा भी की थी. भारत ने सन 2010 से 2020 के दशक को नवोन्मेष दशक (Decade of Innovations) घोषित किया है.
वायु-प्रदूषण का मानक क्या है?
इसे एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) कहते हैं. यह हवा में मौजूद प्रदूषणकारी तत्वों की मात्रा को बताता है. इसे कुछ देशों में एयर पॉल्यूशन इंडेक्स (API)  और सिंगापुर में पॉल्यूटेंट स्टैंडर्ड इंडेक्स (PSI). अलग-अलग देश अपने यहाँ वायु की शुद्धता के अलग-अलग मानक और अलग-अलग नाम रखते हैं. भारत में केंद्रीय पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड और राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों ने मिलकर देश के 240 शहरों के आँकड़ों के आधार पर नेशनल एयर मॉनिटरिंग प्रोग्राम(NAMP) बनाया है. देशभर में इस काम के लिए 342 से ज्यादा मॉनिटरिंग स्टेशन हैं. चिकित्सकों, एयर क्वालिटी विशेषज्ञों, एडवोकेसी समूहों के प्रतिनिधियों तथा प्रदूषण बोर्डों के प्रतिनिधियों के एक विशेषज्ञ समूह ने आईआईटी कानपुर को अध्ययन का काम सौंपा. आईआईटी और विशेषज्ञ समूह ने 2014 में AQI कार्यक्रम बनाया.
पुराने मानकों में तीन पैरामीटर थे, जबकि नई अनुश्रवण प्रणाली में आठ पैरामीटर हैं. दिल्ली, मुम्बई, पुणे और अहमदाबाद में निरंतर तत्काल डेटा प्रदान करने वाली प्रणालियाँ लगाई गई हैं. वायु प्रदूषण से जुड़ी छह श्रेणियाँ बनाई गई हैं. ये हैं अच्छा (0-50), संतोषजनक (51-100), हल्का प्रदूषण (101-200), खराब (201-300), बहुत खराब (301-400) और बेहद खराब Severe (401 से 500). AQI  में आठ प्रदूषक तत्वों को शामिल किया गया है. ये हैं पीएम10, पीएम2.5, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, कार्बन डाई मोनोक्साइड, ओज़ोन, अमोनिया और लैड.  


Tuesday, January 2, 2018

उज्जैन किस नदी के किनारे है और यह शहर मशहूर क्यों है?

उज्जैन मध्य प्रदेश राज्य का एक प्रमुख शहर है जो क्षिप्रा नदी के किनारे बसा है। यह सम्राट विक्रमादित्य का शहर है। इसके अलावा यह महाकवि कालिदास की नगरी है। कालिदास सम्राट विक्रमादित्य के दरबार के नवरत्नों में से एक थे। इनको उज्जयिनी अत्यंत प्रिय थी। कालिदास ने अपने काव्य मेघदूत में इस शहर का सुंदर वर्णन किया है। सम्राट विक्रमादित्य ही महाकवि कालिदास के वास्तविक आश्रयदाता के रूप में प्रख्यात है।
यहाँ हर 12 वर्ष पर सिंहस्थ कुंभ मेला लगता है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक महाकाल इस नगरी में स्थित है। इसके दूसरे प्रसिद्ध नाम हैं, अवन्तिका, उज्जयनी, कनकश्रन्गा आदि है। उज्जैन मंदिरों की नगरी है। पुराणों और महाभारत में उल्लेख आता है कि वृष्णि-वीर कृष्ण व बलराम यहाँ गुरु सांदीपनी के आश्रम में विद्याप्राप्त करने हेतु आये थे। कृष्ण की एक पत्नी मित्रवृन्दा उज्जैन की ही राजकुमारी थी।
दुनिया का पहला बल्ब कब बना?
हम जानते हैं कि पहला बल्ब टॉमस अल्वा एडीसन ने बनाया था. उन्होंने इस बल्ब में मोटे सूती धागे का फिलामेंट बनाया था, तो जलने के बाद कार्बन में बदल गया था. यह बल्ब 19 अक्तूबर, 1879 में जलना शुरू हुआ था. यह लगातार रोशनी देता रहा और कुल मिलाकर 48 घंटे और 40 मिनट तक इसने रोशनी दी और 21 अक्तूबर, 1879 को इसका फिलामेंट टूट गया और यह बुझ गया. बाद वाली तारीख इसके आविष्कार की तारीख मानी जाती है.
कांग्रेस पार्टी कब बनी?
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना, 72 प्रतिनिधियों की उपस्थिति के साथ 28दिसंबर 1885 को बॉम्बे के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय में हुई थी. इसके प्रथम महासचिव(जनरल सेक्रेटरी) एओ ह्यूम थे और कोलकता के वोमेश चंद्र बैनर्जी प्रथम पार्टी अध्यक्ष थे. अपने शुरुआती दिनों में कांग्रेस का दृष्टिकोण एक कुलीन वर्गीय संस्था का था. स्वराज का लक्ष्य सबसे पहले बाल गंगाधर तिलक ने अपनाया था. 1907  में काँग्रेस में दो दल बन गए. गरम दल और नरम दल. गरम दल का नेतृत्व बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय एवं बिपिन चंद्र पाल(जिन्हें लाल-बाल-पाल भी कहा जाता है) कर रहे थे. नरम दल का नेतृत्व गोपाल कृष्ण गोखले, फिरोज़शाह मेहता एवं दादा भाई नौरोजी. गरम दल पूर्ण स्वराज की मांग कर रहा था परन्तु नरम दल ब्रिटिश राज में स्वशासन चाहता था.
प्रथम विश्व युद्ध के छिड़ने के बाद सन 1916 की लखनऊ बैठक में दोनों दल फिर एक हो गए और होम रूल आंदोलन की शुरुआत हुई जिसके तहत ब्रिटिश राज में भारत के लिए अधिराज्य अवस्था(डॉमिनियन स्टेटस) की मांग की जा रही थी. 1916 में गांधी जी के भारत आगमन के साथ कांग्रेस में बहुत बड़ा बदलाव आया. चम्पारन एवं खेड़ा में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को जन समर्थन से अपनी पहली सफलताएँ मिली. 1919 में जालियाँवाला बाग हत्याकांड के पश्चात गांधी जी काफी सक्रिय हुए और उनके मार्गदर्शन में कॉंग्रेस जनांदोलन के रास्ते पर चली.

Monday, January 1, 2018

चतुष्कोणीय सुरक्षा संवाद क्या है?

अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच सुरक्षा से जुड़े मसलों पर अनौपचारिक संवाद को क्वॉडका नाम दिया गया है,  जो क्वॉड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग का संक्षिप्त रूप है. इसे हाल के वर्षों में महत्व मिला है. हालांकि इसका घोषित उद्देश्य चीन की शक्ति के विस्तार को रोकना नहीं है, पर माना जाता है कि चीन की आर्थिक और सामरिक शक्ति के विस्तार को देखते हुए इसे चलाया जा रहा है. इस सिलसिले में अनौपचारिक चर्चा 2004 में ही शुरू हो गई थी. उस साल हिन्द महासागर में सुनामी आई थी. इन चारों देशों ने सहायता कार्य में सहयोग किया था. इसके सामरिक पहलुओं पर संवाद की शुरुआत सन 2007 में जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पहल पर हुई थी. इस पहल ने संगठनात्मक रूप नहीं लिया, क्योंकि चीन ने शुरू से ही इसका विरोध किया. भारत इसमें सकुचाते हुए शामिल हुआ है. मनमोहन सिंह सरकार की लुक ईस्टऔर नरेन्द्र मोदी की एक्ट ईस्टनीतियों का क्रमिक विकास हुआ है और अब भी यह शैशवावस्था में है.  
सुरक्षा के संदर्भ में एशिया-प्रशांत की जगह अब हिन्द-प्रशांत या इंडो-पैसिफिक शब्द का इस्तेमाल होने लगा है. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस इलाके में जापानी सेना ने काफी दूर तक बढ़त ले ली थी. पिछले दो-तीन दशक से भारत इस इलाके में बड़ी ताकत के रूप में उभर रहा है. नेटो की तरह क्वॉड का औपचारिक संगठन नहीं है, पर जैसे नेटो का उद्देश्य पहले जर्मनी को और बाद में रूस को रोकना और अमेरिका की भूमिका को स्थापित करना था उसी तरह इसका उद्देश्य चीन को रोकना है. गत 11-12 नवम्बर को फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान शिखर सम्मेलन के हाशिए पर इन चारों देशों के अधिकारियों ने प्रस्तावित गठजोड़ के सवालों पर विचार किया. चारों देश वैचारिक सहमति की प्रक्रिया में हैं. अब मंत्रि-स्तरीय बैठकें होंगी और फिर शिखर बैठकें.
मालाबार युद्धाभ्यास क्या है?
मालाबार युद्धाभ्यास भारत, अमेरिका और जापान की नौसेनाओं के बीच होने वाला स्थायी वर्षिक सैनिक युद्धाभ्यास है. मूलतः यह युद्धाभ्यास 1992 में भारत और अमेरिका की नौसेनाओं के बीच शुरू हुआ था. सन 1998 में जब भारत ने परमाणु बमों का परीक्षण किया, तो अमेरिका ने खुद को इस युद्धाभ्यास से अलग कर लिया. उस समय तक दोनों देशों के बीच तीन युद्धाभ्यास हो चुके थे. अमेरिका पर 11 सितम्बर 2000 के हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के अभयान में भारत भी शामिल हुआ और 2002 के बाद यह अभ्यास फिर से शुरू हो गया. सन 2007 के युद्धाभ्यास में भारत और अमेरिका के अलावा जापान, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर की नौसेनाएं भी इसमें शामिल हुईं. पहली बार यह युद्धाभ्यास हिंद महासागर के बाहर जापान के ओकीनावा द्वीप के पास हुआ. सन 2015 से जापान भी इस युद्धाभ्यास का स्थायी सदस्य बन गया. अब इसमें ऑस्ट्रेलिया को भी शामिल करने का प्रयास है.
वासेनार अरेंजमेंट क्या है?
भारत हाल में वासेनार समूह के 42वें सदस्य के रूप में शामिल हुआ है. पारम्परिक शस्त्रों और दोहरे इस्तेमाल की तकनीक के निर्यात पर नियंत्रण की वासेनार व्यवस्था 42 देशों के निर्यात नियंत्रण का समूह है. इसकी स्थापना 12 जुलाई 1996 को नीदरलैंड्स के वासेनार नामक स्थान पर हुई थी. इसका सचिवालय वियेना, ऑस्ट्रिया में है. सन 2001 से ही भारत अंतरराष्ट्रीय निर्यात नियंत्रण से जुड़े चार समझौतों में शामिल होने की माँग करता रहा है. सन 2008 के न्यूक्लियर डील के बाद अमेरिका ने भारत को इन चारों महत्वपूर्ण ग्रुपों का सदस्य बनवाने का वादा किया था. ये हैं, न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप, मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजीम, वासेनार अरेंजमेंट और चौथा ऑस्ट्रेलिया ग्रुप. भारत अब इनमें से दो ग्रुपों का सदस्य है.
राष्ट्रीय गणित दिवस क्यों मनाते हैं?

भारत में हर साल 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है. यह महान गणितज्ञ श्रीनिवास अयंगर रामानुजन का जन्मदिन है. देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 22 दिसंबर 2012 को चेन्नई में रामानुजन की 125वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में 2012 को राष्ट्रीय गणित और रामानुजन के जन्मदिन 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस घोषित किया था. रामानुजन का जन्म 22 दिसम्बर 1887 को हुआ था.