Sunday, August 12, 2018

संयुक्त राष्ट्र का बजट कितना है?

हाल में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा था कि हमारे पास धन की कमी होती जा रही है। उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे अपने हिस्से का धन यथासम्भव जल्द से जल्द दें। उन्होंने इन देशों को भेजे अपने पत्र में लिखा है कि संयुक्त राष्ट के कोर बजट में इस साल 13.9 करोड़ डॉलर की कमी पड़ रही है। ऐसा संकट पहले कभी नहीं आया। दिसम्बर 2017 में संरा महासभा की बजट समिति ने 2018-19 के लिए 5.4 अरब डॉलर का बजट तैयार किया था। 2016-17 के बजट की तुलना में यह धनराशि यों भी 28.5 करोड़ डॉलर कम थी। संरा बजट दो साल के लिए होता है। कोर बजट में संरा शांति प्रयासों के लिए धनराशि शामिल नहीं होती। नवीनतम सूचना के अनुसार इस साल 193 सदस्य देशों में से 112 ने ही अपना अंशदान किया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिका देता है, जो संरा के कुल बजट का करीब 22 फीसदी होता है। अमेरिकी अंश सबसे बाद में आता है, क्योंकि उसका वित्त वर्ष 1 अक्तूबर से शुरू होता है।, पर इस साल अमेरिका सहित संरा सुरक्षा परिषद के पाँचों स्थायी सदस्यों का अंशदान आ चुका है। संरा में अमेरिका की राजदूत निकी हेली ने इस साल जनवरी में कहा था कि संयुक्त राष्ट्र को सुधार करना चाहिए और अपने खर्चों में कमी भी करनी चाहिए। निरर्थक खर्चों के लिए हम अमेरिकी नागरिकों के धन को बर्बाद नहीं करेंगे।

शांति-स्थापना बजट

संरा कोर बजट के मुकाबले शांति-स्थापना बजट ज्यादा बड़ा है। यह सालाना आधार पर होता है। 1 जुलाई 2018 से 30 जून 2019 के वर्ष के लिए 6.7 अरब डॉलर का बजट है। यह धनराशि संयुक्त राष्ट्र के 14 में से 12 शांति-स्थापना मिशनों के लिए है। शेष दो मिशन हैं संयुक्त राष्ट्र युद्धविराम अनुश्रवण संगठन (UNTSO) और भारत-पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सैन्य-पर्यवेक्षक समूह (UNMOGIP)। इन दोनों के लिए धनराशि संरा के मुख्य बजट से आती है। संरा शांति-स्थापना बजट दुनिया में हर साल होने वाले सैनिक व्यय (सन 2013 में जो 1,747 अरब डॉलर था) की तुलना में आधे से एक फीसदी के बीच है।

संरा सदस्य देशों की संख्या

संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की संख्या इस समय 193 है। इन सभी देशों को संरा महासभा में बराबरी का दर्जा मला हुआ है। किसी भी नए उस देश को सदस्यता दी जा सकती है, जो सम्प्रभुता सम्पन्न हो। इस सदस्यता के लिए संरा महासभा के अलावा सुरक्षा परिषद की अनुमति की जरूरत भी होती है। सदस्य देशों के अलावा संरा महासभा में पर्यवेक्षक के रूप में देशों को आमंत्रित किया जा सकता है। इस समय होली सी (वैटिकन) और फलस्तीन दो संरा पर्यवेक्षक हैं। पर्यवेक्षक महासभा की बैठकों में भाग लेने के अलावा अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं, पर मतदान में भाग नहीं ले सकते।

ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट किन्हें कहते हैं?
ग्रीनफील्ड शब्द औद्योगिक अर्थ में प्रयुक्त होता है। हाल में देश के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने विश्व स्तरीय शिक्षा संस्थानों की रेस में छह भारतीय विश्वविद्यालयों को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा देने की घोषणा की। इनमें जियो इंस्टीट्यूट को ग्रीनफील्ड श्रेणी में रखा गया है। ग्रीनफील्ड पूरी तरह से नयी परियोजना को कहते हैं। यानी ऐसी जमीन पर कारखाना लगाना जो अभी नई या हरी है। जिसमें पहले के किसी निर्माण को ढहाना या विस्तार करना शामिल नहीं हो। आजकल सॉफ्टवेयर सहित विभिन्न उद्योगों में इस शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। एक शब्द और चलता है ब्राउनफील्ड परियोजना, जिसका मतलब है किसी मौजूदा प्लांट का विस्तार करके क्षमता बढ़ाना। ब्राउनफील्ड बिलकुल नई परियोजना नहीं होती।
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Friday, August 10, 2018

संयुक्त राष्ट्र का जन्म


संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय अंतरसरकारी संगठन के निर्माण का विश्व का दूसरा प्रयास था. यह विचार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उभरा तथा 5 राष्ट्रमंडल सदस्यों तथा 8 यूरोपीय निर्वासित सरकारों ने 12 जून, 1941 को लंदन में हस्ताक्षरित अंतर-मैत्री घोषणा में पहली बार यह बात कही. इसके बाद अटलांटिक चार्टर पर 14 अगस्त, 1941 को दस्तखत हुए. फिर 1 जनवरी, 1942 को वाशिंगटन में अटलांटिक चार्टर का समर्थन करने वाले 26 देशों ने संयुक्त राष्ट्र की घोषणा पर हस्ताक्षर किए. यहां पहली बार संयुक्त राष्ट्र नाम का इस्तेमाल हुआ. फिर इंग्लैंड, चीन, सोवियत संघ तथा अमेरिका ने 30 अक्टूबर, 1943 को मॉस्को घोषणा पर हस्ताक्षर किए. सन 1944 में अगस्त से अक्टूबर तक सोवियत संघ, अमेरिका, चीन तथा ब्रिटेन के प्रतिनिधियों ने वाशिंगटन के डम्बर्टन ओक्स एस्टेट में कई बैठकें कीं. फिर 7 अक्टूबर, 1944 को संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्तावित ढांचे को प्रकाशित किया गया. इन प्रस्तावों पर याल्टा सम्मेलन (फरवरी 1945) में विचार-विमर्श किया गया. इसके बाद 25 अप्रैल, 1945 को सैन फ्रांसिस्को सम्मेलन में 50 देशों के प्रतिनिधि शमिल हुए, जहाँ नए संगठन का संविधान तैयार किया गया. 26 जून, 1945 को सभी 50 देशों ने चार्टर पर हस्ताक्षर किए. पोलैंड सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले सका था किंतु थोड़े समय बाद चार्टर पर हस्ताक्षर करके वह भी संस्थापक सदस्यों की सूची में शामिल हो गया. इसके बाद 24 अक्टूबर, 1945 से चार्टर प्रभावी हो गया. 24 अक्टूबर को हर साल संयुक्त राष्ट्र दिवस मनाया जाता है.

संरा मुख्यालय

संरा मुख्यालय न्यूयॉर्क में है. 14 दिसंबर, 1946 को संयुक्त राष्ट्र ने अपना मुख्यालय अमेरिका में रखने के पक्ष में मतदान किया. न्यूयॉर्क में ईस्ट नदी के किनारे सात हैक्टेयर भूमि खरीदने के लिए अमेरिका के जॉन डी रॉकफेलर जूनियर ने 85 लाख डॉलर की रकम दान में दी. नगर प्रशासन ने भी उस क्षेत्र में कुछ अतिरिक्त जमीन उपलब्ध कराई. संगठन की इमारत 1952 में बनकर तैयार हुई. न्यूयार्क के लांग आईलैंड में लेक सक्सेस पर अस्थायी मुख्यालय बनाया गया था. 10 जनवरी, 1946 को लंदन में महासभा का पहला सत्र आयोजित हुआ था.

सालाना अधिवेशन

संरा महासभा के नियमित, विशेष और आपात अधिवेशनों की व्यवस्था है. नियमित अधिवेशन हर साल सितंबर के तीसरे मंगलवार को शुरू होते हैं. इसके अगले हफ्ते के मंगलवार से नियिमित बहस नौ कार्य दिवसों में लगातार चलती है. इस साल संरा महासभा का 73वां वार्षिक अधिवेशन होगा, जो मंगलवार 18 सितंबर से शुरू होगा. सालाना नियमित बहस मंगलवार 25 सितंबर को शुरू होगी. 72वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इक्वेडोर की विदेश मंत्री मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा गार्सेस को 73वीं महासभा की अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित किया है. मारिया फर्नांडा संरा महासभा की चौथी महिला अध्यक्ष बनेंगी.

Sunday, August 5, 2018

संरा का बजट संकट


हाल में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा था कि हमारे पास धन की कमी होती जा रही है. उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे अपने हिस्से का धन यथासम्भव जल्द से जल्द दें. उन्होंने इन देशों को भेजे अपने पत्र में लिखा है कि संयुक्त राष्ट के कोर बजट में इस साल 13.9 करोड़ डॉलर की कमी पड़ रही है. ऐसा संकट पहले कभी नहीं आया. दिसम्बर 2017 में संरा महासभा की बजट समिति ने 2018-19 के लिए 5.4 अरब डॉलर का बजट तैयार किया था. 2016-17 के बजट की तुलना में यह धनराशि यों भी 28.5 करोड़ डॉलर कम थी. संरा बजट दो साल के लिए होता है. कोर बजट में संरा शांति प्रयासों के लिए धनराशि शामिल नहीं होती. नवीनतम सूचना के अनुसार इस साल 193 सदस्य देशों में से 112 ने ही अपना अंशदान किया है. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिका देता है, जो संरा के कुल बजट का करीब 22 फीसदी होता है. अमेरिकी अंश सबसे बाद में आता है, क्योंकि उसका वित्त वर्ष 1 अक्तूबर से शुरू होता है., पर इस साल अमेरिका सहित संरा सुरक्षा परिषद के पाँचों स्थायी सदस्यों का अंशदान आ चुका है. संरा में अमेरिका की राजदूत निकी हेली ने इस साल जनवरी में कहा था कि संयुक्त राष्ट्र को सुधार करना चाहिए और अपने खर्चों में कमी भी करनी चाहिए. निरर्थक खर्चों के लिए हम अमेरिकी नागरिकों के धन को बर्बाद नहीं करेंगे.

शांति-स्थापना बजट
संरा कोर बजट के मुकाबले शांति-स्थापना बजट ज्यादा बड़ा है. यह सालाना आधार पर होता है. 1 जुलाई 2018 से 30 जून 2019 के वर्ष के लिए 6.7 अरब डॉलर का बजट है. यह धनराशि संयुक्त राष्ट्र के 14 में से 12 शांति-स्थापना मिशनों के लिए है. शेष दो मिशन हैं संयुक्त राष्ट्र युद्धविराम अनुश्रवण संगठन (UNTSO) और भारत-पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सैन्य-पर्यवेक्षक समूह (UNMOGIP). इन दोनों के लिए धनराशि संरा के मुख्य बजट से आती है. संरा शांति-स्थापना बजट दुनिया में हर साल होने वाले सैनिक व्यय (सन 2013 में जो 1,747 अरब डॉलर था) की तुलना में आधे से एक फीसदी के बीच है.

संरा सदस्य देशों की संख्या
संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की संख्या इस समय 193 है. इन सभी देशों को संरा महासभा में बराबरी का दर्जा मला हुआ है. किसी भी नए उस देश को सदस्यता दी जा सकती है, जो सम्प्रभुता सम्पन्न हो. इस सदस्यता के लिए संरा महासभा के अलावा सुरक्षा परिषद की अनुमति की जरूरत भी होती है. सदस्य देशों के अलावा संरा महासभा में पर्यवेक्षक के रूप में देशों को आमंत्रित किया जा सकता है. इस समय होली सी (वैटिकन) और फलस्तीन दो संरा पर्यवेक्षक हैं. पर्यवेक्षक महासभा की बैठकों में भाग लेने के अलावा अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं, पर मतदान में भाग नहीं ले सकते.


Sunday, July 29, 2018

‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ मुहावरा क्यों बना?

हमारे देश में यह वाक्यांश राजनीति का हिस्सा है और उसी अर्थ में इस्तेमाल होता है। अलबत्ता अमेरिकन इंग्लिश में इसका इस्तेमाल पहले जबर्दस्त मोल-भाव (हार्ड बार्गेनिंग) के अर्थ में होता था। आज हम जिस राजनीतिक अर्थ में इसका इस्तेमाल करने लगे हैं, उसका मतलब है सरकार बनाने के वास्ते समर्थकों की खरीद में होने वाला मोल-भाव, जबकि उन्नीसवीं सदी के अमेरिका में घोड़ों की खरीद में होने वाले मोल-भाव के अर्थ में ही इसका इस्तेमाल होता था। उन दिनों घोड़ों की खरीद-फ़रोख्त में काफी मोल-भाव होता था। चूंकि उस मोल-भाव में चालाकियों, क्षुद्रताओं और झूठ का सहारा लिया जाता था, इसलिए अमेरिकन अंग्रेजी के इस्तेमाल में ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ के शुरुआती अर्थ बड़े तर्क-वितर्क, चतुराई से भरे मोल-भाव या हार्ड बार्गेनिंग के थे। यानी जीवन के किसी भी क्षेत्र में हुआ तर्क-वितर्क ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ था। मसलन ‘आफ्टर ए लॉट ऑफ ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ द एग्रीमेंट फाइनालाइज़्ड।’

जिन दिनों यह मुहावरा बन रहा था, वह अमेरिकी कारोबार में नैतिक मूल्यों की गिरावट का दौर था। उसे ‘गिल्डेड एज’ कहते हैं। प्रशासन की ओर से कारोबारी मूल्यों-मानकों को स्थापित करने की कोशिशें की जा रहीं थीं। सरकार ने अखबारों की फर्जी प्रसार संख्या दिखाने के खिलाफ एक कानून बनाने का प्रस्ताव किया। इस पेशकश के खिलाफ न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक सम्पादकीय लिखा, जिसमें हॉर्स-ट्रेडिंग का जिक्र है। अख़बार ने 22 मार्च 1893 के अंक में लिखा।‘यदि झूठ बोलने पर कानूनन रोक लगा दी जाएगी, तो हॉर्स-ट्रेडिंग का तो कारोबार ही ठप हो जाएगा।’ भारत की तरह अमेरिका में भी वह बदलाव का समय था। सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार काफी था। वोटरों की चुनाव में बहुत ज्यादा दिलचस्पी थी। उन्हें लगता था कि उससे बदलाव आएगा वगैरह। ऐसे दौर में ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ का मतलब था अनैतिक व्यापार।

भारत में इस शब्द का इस्तेमाल साठ के दशक में जब पहली बार दल-बदल की समस्या सामने आई, तब अंग्रेजी के अखबारों ने शुरू किया। हालांकि भारतीय भाषाओं के अखबारों ने ‘आया राम, गया राम’ जैसे सार्थक मुहावरे गढ़े थे, पर ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ में बिक्री का बोध होता था। सामान्य नागरिक के मन में ‘बिकने को उत्सुक जन-प्रतिनिधि’ की जो छवि बनी उसे ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ वाक्यांश बेहतर व्यक्त करता है। यों राजनीति को ‘मछली बाजार’ और ‘भिंडी बाजार’ जैसे शब्द भी मिले हैं। इन सबमें बाजार शब्द पर जोर ‘बिकने-बिकाने’ पर है।

वोट शब्द कहाँ से आया? 


वोट शब्द राय देने, चयन करने किसी व्यक्ति या प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार करने के अर्थ में इस्तेमाल होता है। अंग्रेजी में यह संज्ञा और क्रिया दोनों रूपों में चलता है। अंग्रेजी में यह शब्द लैटिन के वोटम (votum) से बना है। इसका मतलब है इच्छा, कामना, प्रतिज्ञा, प्रार्थना, निष्ठा, वचन, समर्पण वगैरह। हिन्दी में इसका इस्तेमाल मत के अर्थ में लिया जाता है। अंग्रेजी की तरह हिन्दी ने भी मतदाता या निर्वाचक के लिए वोटर शब्द का इस्तेमाल स्वीकार कर लिया है। शब्दों का अध्ययन करने वाले अजित वडनेरकर के अनुसार भाषा विज्ञानी इसे प्रोटो इंडो-यूरोपीय भाषा परिवार का शब्द मानते हैं। अंग्रेजी का वाऊvow इसी श्रृंखला का शब्द है जिसका मतलब होता है प्रार्थना, समर्पण और निष्ठा के साथ अपनी बात कहना।

आसमान ठोस है, तरल या गैस है?

आप जिस आसमान को देखते हैं वह बाहरी अंतरिक्ष का एक हिस्सा है। धरती से दिन में यह नीले रंग का नजर आता है। इसकी वजह है हमारा वातावरण जिससे टकराकर सूरज की किरणों का नीला रंग फैल जाता है। पर यह आसमान धरती से देखने पर ही नीला लगता है। किसी अन्य ग्रह से देखने पर ऐसा ही नहीं दिखेगा, बल्कि आमतौर पर काला नजर आएगा।यह ठोस नहीं है, पर इसमें ठोस, तरल और गैसीय पदार्थ प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। यह अनंत है। दुनिया के बड़े से बड़े टेलिस्कोप से भी आप इसका बहुत छोटा हिस्सा देख पाएंगे।
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

वेस्टमिंस्टर प्रणाली

शासन की संसदीय प्रणाली. इसे यह नाम लंदन के पैलेस ऑफ़ वेस्टमिंस्टर के कारण दिया गया है, जो ब्रिटिश संसद का सभास्थल है. सिटी ऑफ़ वेस्टमिंस्टर लंदन का इलाका है, जो टेम्स नदी के किनारे है. यह इमारत एक शाही महल है. पहला शाही महल 11वीं सदी में बनाया गया था. 1512 में आग से नष्ट होने से पहले वेस्टमिंस्टर पैलेस सम्राट का लंदन निवास होता था. इसके बाद से इसे संसद भवन मान लिया गया. 13वीं सदी में यहां संसद की सभाएं होने लगी थीं. इस भवन में 1834 फिर भयानक में आग लगी. सन 1840 में इसका पुनर्निर्माण शुरू हुआ,जो 30 साल तक चला. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान 1941 में लंदन पर हुई बमबारी में भी इस इमारत को नुकसान पहुँचा. इसकी एक पहचान है क्लॉक टॉवर, जिसका विशाल घंटा बिग बेन के नाम से प्रसिद्ध है. सन 1987 से यह इमारत यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों का हिस्सा है. 

बिग बेन 

बिग बेन विशाल घंटे का नाम है और उस क्लॉक टावर का भी, जिसमें यह घंटा लगा है. सन 2012 में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की हीरक जयंती के मौके पर इस घंटाघर का नाम एलिजाबेथ टावर रख दिया गया. इस टावर का डिजाइन ऑगस्टस प्यूजिन ने तैयार किया था. इसका निर्माण 1859 में पूरा हुआ. उस वक्त यह दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे सही समय देने वाली क्लॉक टावर मानी गई. यह टावर 315 फुट ऊँची है और इसमें सबसे ऊपर तक जाने के लिए बनी सीढ़ी के 334 पायदान हैं. इस घड़ी की सूइयों का व्यास 23 फुट का है. 31 मई 2009 को इस घड़ी की 150वीं जयंती मनाई गई थी. 

अविश्वास और विश्वास मत 

संसदीय अविश्वास प्रस्ताव का उद्देश्य सरकार को पराजित करना होता है. यह प्रस्ताव विपक्ष लाता है. इसके विपरीत विश्वास का मत प्रायः सरकार के गठन के बाद पेश किया जाता है. इसे सत्तापक्ष लाता है. ब्रिटिश संसद में सम्राट के और भारतीय संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर वोट भी विश्वास मत की तरह है. उसमें किसी प्रकार का संशोधन सरकार को गिराने जैसा होता है. जब संसद अविश्वास प्रस्ताव पास करे या सरकार विश्वास मत हासिल करने में विफल रहती है, तो उसे इस्तीफा देना चाहिए. इसके अलावा सदन को भंग करने और आम चुनाव कराने का अनुरोध भी सरकार कर सकती है. इस अनुरोध पर फैसला परिस्थितियों पर निर्भर करता है. यदि दूसरा पक्ष सरकार बनाने की स्थिति में हो तो उसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है. यदि सत्तापक्ष बहुमत में है और फिर भी वह संसद को भंग करने का अनुरोध करे तो सम्राट या राष्ट्रपति उसे स्वीकार कर लेते हैं. संसदीयप्रणाली मेंसरकार खुद इस्तीफा देने का फैसला करे या मजबूर होतो सम्राट विरोधी दल से पूछते हैं कि क्या वह सरकार बनाने के लिए तैयार है. भारत में भी यही व्यवस्था है.

Tuesday, July 24, 2018

संयुक्त राष्ट्र शांति-सेना क्या होती है?

संयुक्त राष्ट्र शांति-सेना संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की सेनाओं की मदद से एक अस्थायी व्यवस्था के रूप में अलग-अलग परिस्थितियों में गठित की जाती है। इसका उद्देश्य टकराव को दूर करके शांति स्थापित करने में मदद करना होता है। संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक नीले रंग की टोपियाँ लगाते हैं या नीले रंग के हेल्मेट पहनते हैं, जो अब इस सेना की पहचान बन गई है।
संयुक्त राष्ट्र की अपनी कोई सेना नहीं होती। इस सेना के सदस्य अपने देश की सेना के सदस्य ही रहते हैं। शांति-सेना के रूप में कार्य करते समय यह सेना संयुक्त राष्ट्र के प्रभावी नियंत्रण में होती है।शांति-रक्षा का हर कार्य सुरक्षा परिषद द्वारा अनुमोदित होता है।संयुक्त राष्ट्र के गठन के समय इस सेना की परिकल्पना नहीं की गई थी, बल्कि बदलते हालात के साथ इसका विकास होता गया। संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में सुरक्षा परिषद को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए संयुक्त कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र के शांति-ऑपरेशंस का एक अलग विभाग बन गया है, जिसके प्रमुख इस समय ज्यां-पियरे लैक्रो हैं।
संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन सबसे पहले 1948 में अरब-इसरायल युद्ध के समय भेजा गया था। उसके बाद से संयुक्त राष्ट्र के 63 मिशन भेजे जा चुके हैं, जिनमें से 17 आज भी सक्रिय हैं। सन 1988 में संयुक्त राष्ट्र शांति-रक्षा बल को नोबेल शांति पुरस्कार भी दिया गया। संयुक्त राष्ट्र के पूर्ववर्ती संगठन लीग ऑफ नेशंस के सामने शांति स्थापना के ज्यादा अवसर नहीं आए, पर सन 1934-35 में लीग ऑफ नेशंस के नेतृत्व में जर्मनी के सार क्षेत्र में सेना भेजी गई। इसे दुनिया की पहली शांति-स्थापना से जुड़ी संयुक्त सैनिक कार्रवाई माना जा सकता है। पहले विश्व युद्ध के काफी समय बाद सार क्षेत्र में जनमत संग्रह के संचालन के लिए इसकी जरूरत महसूस की गई।

भारत में गाँवों की सही संख्या क्या है?

गूगल पर सर्च करें तो कई तरह की संख्याएं सामने आएंगी। ज्यादातर 6,40,000 को आसपास हैं।हाल में जब भारत सरकार ने घोषणा की कि देश के सभी गाँवों में बिजली पहुँचा दी गई है, तब यह संख्या 5,97, 464 बताई गई। दरअसल यह संख्या राजस्व गाँवों की संख्या है। जन 2011 की जनगणना में राजस्व गाँवों की संख्या 5,97, 464 बताई गईं थी। गाँव की बस्ती, पुरवा जैसी कई परिभाषाएं हैं। यदि कुछ लोग कहीं घर बनाकर रहने लगें, तो आधिकारिक रूप से उसे तबतक गाँव नहीं कहेंगे, जबतक राजस्व खाते में उसका नाम दर्ज न हो जाए। शहरों के विकास के साथ हमारे देश में बहुत से गाँवों और बस्तियों का अस्तित्व खत्म भी होता जा रहा है, इसलिए यह संख्या बदलता रहती है।

‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ व्यवस्था क्या है?
लोकतंत्र में चुनाव सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। प्रतिनिधि के चयन से लेकर फैसले करने तक सारी बातें वोट से तय होती हैं। चुनाव की अनेक पद्धतियाँ दुनिया में प्रचलित हैं।‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ भी चुनाव की एक पद्धति है। जब एक से ज्यादा प्रत्याशी किसी पद के लिए खड़े हों, तब सबसे ज्यादा वोट पाने वाले व्यक्ति को चुना हुआ माना जाता है। भारत में चुनाव की यही पद्धति है।

आसमान ठोस है, तरल या गैस है?
आप जिस आसमान को देखते हैं वह बाहरी अंतरिक्ष का एक हिस्सा है। धरती से दिन में यह नीले रंग का नजर आता है। इसकी वजह है हमारा वातावरण जिससे टकराकर सूरज की किरणों का नीला रंग फैल जाता है। पर यह आसमान धरती से देखने पर ही नीला लगता है। किसी अन्य ग्रह से देखने पर ऐसा ही नहीं दिखेगा, बल्कि आमतौर पर काला नजर आएगा।यह ठोस नहीं है, पर इसमें ठोस, तरल और गैसीय पदार्थ प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। यह अनंत है। दुनिया के बड़े से बड़े टेलिस्कोप से भी आप इसका बहुत छोटा हिस्सा देख पाएंगे।
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

सीरिया में लड़ाई क्यों?

सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल-असद के ख़िलाफ़ पिछले सात साल से विद्रोह चल रहा है, जिसका इसरायल, सउदी अरब, तुर्की, अमेरिका और पश्चिमी देश अपने-अपने तरीके से समर्थन कर रहे हैं। दूसरी तरफ बशर-अल-असद की सरकार को ईरान और रूस का समर्थन प्राप्त है। यह बगावत गृहयुद्ध में तब्दील हो चुकी है। इसमें अब तक 3 लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। बशर अल-असद ने 2000 में अपने पिता हाफेज़ अल असद की जगह ली थी।सन 2011 में कई अरब देशों में सत्ता के ख़िलाफ़ शुरू हुई बगावत से प्रेरित होकर मार्च 2011 में सीरिया के दक्षिणी शहर दाराआ में भी लोकतंत्र के समर्थन में आंदोलन शुरू हुआ था, जिसने गृहयुद्ध का रूप ले लिया है।
सुन्नी बहुल सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल-असद शिया हैं।यह संघर्ष साम्प्रदायिक रूप ले चुका है, जिसमें जेहादी ग्रुपों को पनपने का मौका मिला। इसी दौरान इराक में इस्लामिक स्टेट उभार शुरू हुआ, जिसने उत्तरी और पूर्वी सीरिया के काफी हिस्सों पर क़ब्ज़ा कर लिया। दूसरी तरफ ईरान, लेबनान, इराक़, अफ़गानिस्तान और यमन से हज़ारों की संख्या में शिया लड़ाके सीरिया की सेना की तरफ़ से लड़ने के लिए पहुंचे हैं। सीरिया, इराक और तुर्की की सीमा पर बड़ी संख्या में कुर्दों की आबादी भी है। वे एक स्वतंत्र देश बनाने के लिए अलग लड़ रहे हैं।
इस प्रकार इस इलाके में कई तरह की ताकतें, कई तरह की ताकतों से लड़ रहीं हैं। पश्चिमी देशों का आरोप है कि सीरिया की सेना विद्रोहियों का दमन करने के लिए रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल कर रही है। सीरिया पर पश्चिमी देशों के नवीनतम हमलों की वजह यह बताई जा रही है कि गत 7 अप्रैल को पूर्वी गोता इलाके के डूमा में सीरिया की सेना ने विद्रोहियों और राहत-कर्मियों पर रासायनिक हथियारों से हमला किया, जिसमें 40 लोग मारे गए।

नॉटिकल मील क्या होता है?
नॉटिकल मील का इस्तेमाल आमतौर पर समुद्री और हवाई नेवीगेशन में होता है। लम्बाई के हिसाब से यह करीब 1852 मीटर या 6076 फुट होता है। सागर और आकाश के नेवीगेशन में आमतौर पर अक्षांश-देशांतर का इस्तेमाल होता है।भूमध्य रेखा और उससे उत्तर या दक्षिण में इसकी दूरी में मामूली फर्क भी आता रहता है। 

दुनिया का सबसे महँगा पदार्थ क्या है? 
दुनिया का सबसे महँगा पदार्थ एंटीमैटर है, बशर्ते उसे हम हासिल कर सकें। एंटीमैटर पदार्थ के प्रतिकणों से बना होता है। मसलन पॉज़िट्रॉन, प्रति प्रोट्रॉन, प्रति न्यूट्रॉन वगैरह। आपको हैरानी होगी कि एक ग्राम एंटी मैटर से 100 छोटे-छोटे देशों को खरीदा जा सकता है। इसकी खोज बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में हुई थी। एक अनुमान है कि एक ग्राम एंटीमैटर की कीमत 31 लाख 25 हजार करोड़ रुपये के आसपास होगी। एक मिलीग्राम एंटीमैटर बनाने में तकरीबन 160 करोड़ रुपये लगते हैं। जहाँ यह बनता है, वहाँ सुरक्षा का मजबूत घेरा होता है। नासा में जहाँ इसका निर्माण होता है, बहुत कम लोगों को जाने की इजाजत होती है। एंटीमैटर का इस्तेमाल दूसरे ग्रहों में जाने वाले वाहनों के ईँधन के रूप में हो सकता है। हालांकि पृथ्वी पर एंटीमैटर की आवश्यकता नहीं होती, पर वैज्ञानिकों ने बहुत थोड़ी मात्रा में एंटीमैटर का निर्माण किया है। प्राकृतिक रूप से पृथ्वी पर यह अंतरिक्ष तरंगों के साथ वातावरण में आ जाने से या रेडियोधर्मी पदार्थ के ब्रेकडाउन से अस्तित्व में आता है। 
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Sunday, July 22, 2018

संविधान की अनुसूचियाँ?


अनुसूचियाँ जैसा कि नाम से स्पष्ट है कुछ सूचियाँ हैं, जिनमें प्रशासकीय कार्यों, गतिविधियों और नीतियों का वर्गीकरण हैं. 26 जनवरी 1950 को जब भारतीय संविधान लागू हुआ था, तब उसमें 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ थीं. पहली अनुसूची में अनुच्छेद 1 और 4 के अंतर्गत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नाम है. अनुच्छेद 246 के अंतर्गत सातवीं अनुसूची में केंद्र और राज्यों के बीच विधान बनाने के क्षेत्रों का विवरण है. अनुच्छेद 31ख के अंतर्गत नौवीं अनुसूची 18 जून 1951 को संविधान के पहले संशोधन के साथ जोड़ी गई थी. इसके बाद तीन अनुसूचियाँ और जोड़ी गईं. जनवरी 2018 तक की सूचना के अनुसार संविधान में 448 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियां हैं. पूरा संविधान 25 भागों में विभाजित है. संविधान में अबतक 101 संशोधन हो चुके हैं.

आठवीं अनुसूची खबरों में क्यों?

हाल में खबर थी कि इस साल संसद के मॉनसून सत्र के साथ राज्यसभा के सदस्यों को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में किसी में भी बोलने की अनुमति मिल गई है. इन 22 अनुसूचित भाषाओं में राज्यसभा में 12 भाषाओं के लिए एक ही समय में साथ-साथ अनुवाद की सेवा पहले से ही थी. इनमें असमिया, बांग्ला, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, ओडिया, पंजाबी, तमिल, तेलगु और उर्दू शामिल हैं.

अनुच्छेद 344(1) और 351 के तहत आठवीं अनुसूची में संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त 22 प्रादेशिक भाषाओं का उल्लेख किया गया है. सन 1950 में इस अनुसूची में 14 भाषाएं (असमिया, बांग्ला, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, मराठी, मलयालम, ओडिया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु और उर्दू) थीं. सन 1967 के 21वें संविधान संशोधन द्वारा सिंधी को इसमें जोड़ा गया. इसके बाद कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली को 1992 में इस अनुसूची में स्थान मिला. फिर सन 2004 में बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली को इसमें शामिल किया गया. अब भी देश के अलग-अलग इलाकों में 38 और भाषाओं को इस अनुसूची में शामिल करने की माँगें हैं.

ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट?

ग्रीनफील्ड शब्द औद्योगिक अर्थ में प्रयुक्त होता है. हाल में देश के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने विश्व स्तरीय शिक्षा संस्थानों की रेस में छह भारतीय विश्वविद्यालयों को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा देने की घोषणा की. इनमें जियो इंस्टीट्यूट को ग्रीनफील्ड श्रेणी में रखा गया है. ग्रीनफील्ड पूरी तरह से नयी परियोजना को कहते हैं. यानी ऐसी जमीन पर कारखाना लगाना जो अभी नयी या हरी है. जिसमें पहले के किसी निर्माण को ढहाना या विस्तार करना शामिल नहीं हो. आजकल सॉफ्टवेयर सहित विभिन्न उद्योगों में इस शब्द का इस्तेमाल किया जाता है. एक शब्द और चलता है ब्राउनफील्ड परियोजना, जिसका मतलब है किसी मौजूदा प्लांट का विस्तार करके क्षमता बढ़ाना. ब्राउनफील्ड बिलकुल नयी परियोजना नहीं होती.


Monday, July 16, 2018

मॉनसून सत्र

इससे आशय भारतीय संसद के मॉनसून सत्र से है. आमतौर पर हर साल हमारी संसद के तीन सत्र होते हैं. बजट (फरवरी-मई), मॉनसून (जुलाई-अगस्त) और शीतकालीन (नवंबर-दिसंबर). इस साल मॉनसून सत्र 18 जुलाई से 10 अगस्त तक चलेगा. इसबार मॉनसून सत्र के दौरान ही राज्यसभा के नए उप-सभापति का चुनाव होना है. पिछले उप-सभापति पीजे कुरियन का कार्यकाल 1 जुलाई को समाप्त हो गया.

संसद के दोनों सदनों की बैठक राष्ट्रपति आमंत्रित करते हैं. हरेक अधिवेशन की अंतिम तिथि के बाद छह मास के भीतर आगामी अधिवेशन के लिए सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करना होता है. सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करने की शक्ति राष्ट्रपति में निहित है, पर व्यवहार में इस आशय के प्रस्‍ताव की पहल सरकार द्वारा की जाती है. इन तीन के अलावा संसद के विशेष सत्र भी बुलाए जा सकते हैं.

संसद भवन
भारत का संसद भवन नई दिल्ली में स्थित है. सन 1911 में घोषणा की गई कि भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली ले जाई जाएगी.मशहूर ब्रिटिश आर्किटेक्ट सर एडविन लैंडसीयर लुट्यन्स ने दिल्ली की ज्यादातर नई इमारतों की रूपरेखा तैयार की थी. इसके लिए उन्होंने सर हरबर्ट बेकर की मदद ली. संसद भवन की इमारत 1927 में तैयार हुई. इसे बनने में छह वर्ष लगे थे. इसकी आधारशिला 12 फ़रवरी, 1921 को ड्यूक ऑफ कनॉट ने रखी थी.18 जनवरी 1927 को तत्कालीन वायसरॉय और गवर्नर जनरल लॉर्ड इरविन ने इसका उद्घाटन किया.

यह गोलाकार इमारत 560 फुट (170 मीटर) व्यास यानी कि लगभग 6 एकड़ क्षेत्र पर बनी है. इसके निर्माण पर 83 लाख रुपये की लागत आई. भवन का केन्द्रीय तथा प्रमुख भाग उसका विशाल वृत्ताकार केन्द्रीय कक्ष है. इसके तीन ओर लोक सभा, राज्य सभा और पूर्ववर्ती ग्रंथालय कक्ष (जिसे पहले प्रिंसेस चैम्बर कहा जाता था) हैं. इन तीनों कक्षों के चारों ओर चार मंजिला वृत्ताकार भवन है, जिसमें मंत्रियों, संसदीय समितियों, राजनीतिक दलों, लोक सभा तथा राज्य सभा सचिवालयोंऔर संसदीय कार्य मंत्रालय के दफ्तर हैं.

संसदीय विशेषाधिकार

संसद के दोनों सदनों, उनके सदस्यों और समितियों को कुछ विशेषाधिकार प्राप्‍त है.इन्हें इसलिए दिया गया है ताकि वे स्वतंत्र रूप से काम कर सकें. सबसे महत्‍वपूर्ण विशेषाधिकार है सदन और समितियों में स्वतंत्रता के साथ विचार रखने की छूट.सदस्य द्वारा कही गई किसी बात के संबंध में उसके विरूद्ध किसी न्यायालय में कार्रवाई कार्यवाही नहीं की जा सकती.कोईसदस्य उस समय गिरफ्तार नहीं किया जा सकता जबकि उस सदन या समिति की बैठक चल रही हो, जिसका वह सदस्य है. अधिवेशन से 40 दिन पहले और उसकी समाप्ति से 40 दिन बाद भी उसे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता.

संसद परिसर में केवल अध्‍यक्ष/सभापति के आदेशों का पालन होता है. विशेषाधिकार भंग करने या सदन की अवमानना करने वाले को भर्त्सना, ताड़ना या निर्धारित अवधि के लिए कारावास की सज़ा दी जा सकती है. सदस्यों के मामले में सदन अन्य दो प्रकार के दंड दे सकता है. सदन की सदस्यता से निलंबन या बर्खास्तगी. दांडिक क्षेत्र सदनों तक और उनके सामने किए गए अपराधों तक ही सीमित न होकर सदन की सभी अवमाननाओं पर लागू होता है.

Sunday, July 15, 2018

हॉकी चैम्पियंस ट्रॉफी


पिछले रविवार (1 जुलाई 2018) को पुरुषों की हॉकी चैम्पियंस ट्रॉफी प्रतियोगिता का फाइनल मैच खेला गया. इस साल के बाद यह प्रतियोगिता समाप्त की जा रही है. सन 2019 से इसके स्थान पर अंतरराष्ट्रीय हॉकी संघ की हॉकी प्रो-लीग प्रतियोगिता शुरू होगी. चैम्पियंस ट्रॉफी की शुरुआत सन 1978 में हुई थी. इस प्रतियोगिता में शामिल सभी टीमें एक राउंड रॉबिन लीग में एक-दूसरे से खेलती थीं. सबसे ज्यादा अंक अर्जित करने वाली दो टीमों के बीच फाइनल मैच होता था. सन 1987 में पुरुषों की इस प्रतियोगिता के तर्ज पर महिलाओं की द्विवार्षिक प्रतियोगिता भी शुरु हुई. पुरुषों की प्रतियोगिता शुरू में सालाना होती थी, पर 2014 से वह भी द्विवार्षिक हो गई थी.

पुरुष प्रतियोगिता में सबसे पहले साल पाँच टीमों ने भाग लिया. दूसरे साल इन टीमों की संख्या सात हो गई. इसके बाद 2010 तक इसमें छह टीमें भाग लेती थीं. सन 2011 से 2018 तक इसमें छह टीमों ने हिस्सा लिया.

दिन और रात बराबर

इसे हिंदी में विषुव और अंग्रेज़ी में इक्विनॉक्स (Equinox)कहते हैं. यानी ऐसा समय-बिंदु, जिसमें दिन और रात लगभग बराबर होते हैं. किसी इलाके में दिन और रात की लंबाई पर असर डालने वाली कई बातें होतीं हैं. धरती अपनी धुरी पर २३½° झुककर सूर्य के चक्कर लगाती है, इस प्रकार वर्ष में एक बार पृथ्वी इस स्थिति में होती है, जब वह सूर्य की ओर झुकी रहती है, व एक बार सूर्य से दूसरी ओर झुकी रहती है. इसी प्रकार वर्ष में दो बार ऐसी स्थिति भी आती है, जब पृथ्वी का झुकाव न सूर्य की ओर ही होता है, और न ही सूर्य से दूसरी ओर, बल्कि बीच में होता है. इसे इक्विनॉक्स कहा जाता है. इन दोनों तिथियों पर दिन और रात की बराबर लंबाई लगभग बराबर होती है. ऐसा भूमध्य रेखा पर होगा. आजकल ऐसा 20/21 मार्च और 22/23 सितम्बर को होता है. पर यह भी अलग-अलग अक्षांश यानी लैटीट्यूड पर अलग-अलग दिन होता है.

समुद्री पानी खारा क्यों?

जब धरती नई-नई बनी थी, तब इसके वातावरण में कई प्रकार की गैसें थीं, जो ज्वालामुखियों की आग और धुएं से निकली थीं. ये गैसें धीरे-धीरे समुद्र के पानी में घुलीं. दूसरे जमीन पर बारिश का पानी जब नदियों के रास्ते समुद्र तक आता है, जो मिट्टी के साथ कई तरह के लवणों को भी ले आता है. यह भी पानी में घुलता है. समुद्र के पानी में नमक लगातार बढ़ रहा है, पर यह मात्रा इतनी कम है कि उसे मापना सम्भव नहीं.

नदियों और झरनों के पानी में भी प्रकृति के अन्य पदार्थों से आए लवण घुलते हैं. उनकी मात्रा कम होती है इसलिए वह पानी हमें मीठा लगता है. समुद्र में ख़ास दो लवण हैं सोडियम और क्लोराइड. दुनिया के अलग-अलग समुद्रों के पानी में अलग-अलग मात्रा में खारा होता है. सामान्यतः 1000 ग्राम या एक लिटर समुद्री पानी में 35 ग्राम (सात चम्मच) नमक होता है. इसे पार्ट्स पर थाउजैंड (पीपीटी) कहते हैं. सामान्यतः समुद्रों का पानी 34 से 36 पीपीटी नमकीन होता है, पर यूरोप के पास के भूमध्य सागर का पानी 38 पीपीटी है.


Sunday, July 8, 2018

मैक्सिकन वेव


फुटबॉल के मैच के दौरान अक्सर आपने देखा होगा कि स्टेडियम में बैठे दर्शकों को बीच एक लहर उठती है, जो एक किनारे से शुरू होकर दूसरे किनारे तक जाती है. दर्शकों की खुशी व्यक्त करने के इस शैली को मैक्सिकन वेव कहते हैं. इस लहर में दर्शक अपनी कुर्सी से खड़े हो जाते हैं और दोनों हाथ ऊपर उठाते हैं. जैसे ही बराबर वाला दर्शक उठता है उसके बराबर वाला और फिर उसके बराबर वाला उठता है. यह सब इतनी तेजी से होता है कि पूरे स्टेडियम में लहर जैसी उठती है. किसी दर्शक की इच्छा उठने की ना हो, तब भी वह उठता है. एक-दो दर्शकों नहीं उठने से लहर टूटती नहीं. इसे मैक्सिकन वेव इसलिए कहते हैं, क्योंकि सन 1986 की मैक्सिको में हुई फीफा विश्व कप प्रतियोगिता में पहली बार टीवी पर ऐसी लहरें बनती देखी गईं.

टीवी पर दुनिया ने ऐसी लहरें मैक्सिको में हुए विश्व कप में पहली बार देखी जरूर थीं, पर इस बात को लेकर विवाद है कि इनका जन्म मैक्सिको में हुआ या नहीं. मैक्सिको ने इन लहरों को बनाना अमेरिका से सीखा था. 15 अक्तूबर 1981 को अमेरिका के ओकलैंड ए और न्यूयॉर्क यांकीस के बीच बेसबॉल के एक मैच में प्रोफेशनल चीयर लीडर क्रेज़ी जॉर्ज हेंडरसन ने ऐसी लहरें बनाईं थीं. ऐसी लहरें अमेरिकी स्टेडियमों में बनती रहीं हैं, जिन्हें केवल वेव कहा जाता था. फीफा विश्व कप ने इन्हें मैक्सिकन वेव का नाम दिया. 

जम्मू-कश्मीर विधानसभा

जम्मू-कश्मीर विधानसभा की स्थापना सन 1934 में राजा हरिसिंह की देशी रियासत में हुई थी. तब उसका नाम था प्रजा सभा. शुरूआत में इसके 100 सदस्य होते थे. सन 1988 में राज्य के संविधान में किए गए 20वें संशोधन के बाद यह संख्या बढ़ाकर 111 कर दी गई. इनमें से 24 सीटें ऐसी हैं, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पड़ती हैं. इस इलाके पर पाकिस्तान ने 1947 में कब्जा कर लिया था. कश्मीर विधानसभा के चुनावों में ये 24 सीटें हमेशा खाली रहती हैं. इस प्रकार यहाँ 87 सीटों पर चुनाव होते हैं. इन 87 में से 46 सीटें कश्मीर की घाटी में हैं, 37 सीटें जम्मू में और 4 लद्दाख क्षेत्र में. राज्यपाल को यदि लगे कि विधानसभा में महिलाओं की नुमाइंदगी नहीं है, तो वे दो महिला सदस्यों को मनोनीत कर सकते हैं. यहाँ देश की अन्य विधानसभाओं का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल छह साल का होता है. यहाँ पिछले चुनाव दिसम्बर 2014 में हुए थे.

अमरनाथ यात्रा कब शुरू हुई?

अमरनाथ की गुफा कश्मीर में 12,756 फुट की ऊँचाई पर स्थित है. इसके चारों और बर्फ से ढके पहाड़ हैं. गुफा भी बर्फ से ढकी रहती है. गर्मियों में कुछ समय के लिए बर्फ पिघलती है. तभी यह दर्शन के लिए यह खुलती है. गुफा के भीतर छत से पानी टपकने के कारण लगभग 10 फुट ऊँचा शिवलिंग बनता है. श्रावणी पूर्णिमा को यह अपने पूरे आकार में होता है. अमावस्या तक धीरे-धीरे छोटा होता जाता है. कल्हण रचित राजतरंगिणी में इसे अमरेश्वर या अमरनाथ कहा गया है. भृगु ऋषि ने भी इसका वर्णन किया है. अबुल फ़जल ने आईन-ए-अकबरी में इसका उल्लेख किया है. इसका विवरण फ्रांसीसी चिकित्सक फ्रांस्वा बर्नियर ने दिया है, जिसने 1663 में बादशाह औरंगज़ेब के साथ कश्मीर की यात्रा की थी. कहा जाता है कि सोलहवीं सदी में गुफा की खोज मुसलमान गडरिए बूटा मलिक ने की थी. आज भी चढ़ावे का एक हिस्सा मलिक परिवार के वंशजों को जाता है. 
http://epaper.prabhatkhabar.com/1713569/Awsar/Awsar#page/6/1

Saturday, July 7, 2018

फीफा विश्व कप


रूस में 14 जून से 21वें फुटबॉल विश्वकप की शुरुआत हो चुकी है. वैश्विक फुटबॉल पर यूरोप का कब्ज़ा है. यूरोप के अलावा लैटिन अमेरिका की टीमें ही इस कप को जीत पाईं हैं. ब्राज़ील ने पाँच बार विश्व कप जीता है. यह एकमात्र टीम है, जो सभी विश्वकप प्रतियोगिताओं में खेली है. सन 2014 में चैम्पियन जर्मनी की टीम थी, जो चार बार इस प्रतियोगिता को जीत चुकी है.

फीफा वर्ल्ड कप 2018 में पहली बार चिप लगी गेंद 'टेलस्टार-18' से खेला जा रहा है. टेलस्टार-18 को एडिडास ने डिजाइन किया है. एडिडास ने लगातार 13वीं बार वर्ल्ड कप की गेंद को डिजाइन किया है. टेलस्टार-18 में चिप लगाई गई है, जिसके जरिए गेंद को स्मार्ट फोन से कनेक्ट कर पैर से लगे शॉट और हैडर सहित अन्य जानकारियां मिलेंगी. सन 1994 में अमेरिका हुए विश्वकप के बाद पहली बार गेंद सिर्फ काले और सफेद रंग में हो रहा है. गेंद में केवल छह पैनल वॉल हैं. पुराने टेलस्टार में 32 पैनल वॉल थे. छह पैनल होने से हवा में उसकी स्थिरता बढ़ेगी. काले और सफेद रंग के कारण बॉल टीवी पर साफ नजर आएगी.

वीडियो रेफरी

इसबार के विश्व कप में क्रिकेट के थर्ड अम्पायर की तरह पहली बार वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वार) तकनीक का सहारा लिया जा रहा है. फुटबॉल के नियमों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संघ बोर्ड (आईएफएबी) ने 2 मार्च 2018 में इसे मंजूरी दे दी थी. इसके बाद फीफा परिषद ने उसे अंतिम रूप से स्वीकार किया. वार की चार तरह से सहायता ली जाएगी. एक, यह पता करने के लिए कि गोल हुआ या नहीं. दूसरे, पेनल्टी देनी चाहिए या नहीं. इसके अलावा ‘वार’ लाल कार्ड को लेकर भी फैसला करेगा. साथ ही किसी खिलाड़ी को गलती से कार्ड मिला है, तो उसमें सुधार करेगा.

‘वार’ का इस्तेमाल प्रायोगिक तौर पर 2016 से 20 महासंघ कर रहे हैं. इनमें जर्मन बुंडेस्लीगा और इटली की सेरी ए प्रोफेशनल लीग शामिल हैं. करीब एक हजार मैचों में इसे आजमाया जा चुका है. इस विश्वकप से इसे स्वीकृति दिलाने में मदद मिलेगी. इस प्रौद्योगिकी को वैश्विक समर्थन पूरी तरह नहीं मिला है. यहां तक कि यूरोपीय फुटबॉल संस्था यूएफा अभी इसे लेकर आश्वस्त नहीं है.

टेस्ट क्रिकेट

क्रिकेट का सबसे लम्बा मैच टेस्ट मैच होता है. इस खेल का सबसे बड़ा मानक पाँच दिन का टेस्ट मैच है. एक जमाने में यह मैच पाँच दिन से भी ज्यादा लम्बा होता था. इंटरनेशनल क्रिकेट कौंसिल दुनिया के केवल 12 देशों को टेस्ट क्रिकेट खेलने की मान्यता दी है. दो देशों के बीच दुनिया का पहला टेस्ट मैच 15-19 मार्च 1877 को इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेला गया था, जिसमें ऑस्ट्रेलिया की टीम 45 रन से जीती थी. टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए मान्यता प्राप्त 12 टीमों के नाम इस प्रकार हैं, 1.इंग्लैंड, 2.ऑस्ट्रेलिया, 3.दक्षिण अफ्रीका, 4.वेस्टइंडीज, 5.न्यूजीलैंड, 6.भारत, 7.पाकिस्तान, 8.श्रीलंका, 9.जिम्बाब्वे, 10.बांग्लादेश, 11.आयरलैंड और 12.अफगानिस्तान. अंतिम दो टीमों ने अपना पहला टेस्ट मैच इस साल ही खेला है. सबसे नई टीम है अफगानिस्तान जिसने 14 जून को बेंगलुरु में अपना पहला टेस्ट मैच भारत के खिलाफ खेला. इसमें भारत ने अफगानिस्तान को एक पारी और 262 रन से हरा दिया. 
http://epaper.prabhatkhabar.com/1704527/Awsar/Awsar#dual/6/1s

Sunday, June 17, 2018

रिम्पैक युद्धाभ्यास क्या है?


रिम ऑफ द पैसिफिक एक्सरसाइज़ (RIMPAC) को संक्षेप में रिम्पैक कहते हैं. दो साल में एकबार होने वाला यह युद्धाभ्यास अमेरिका के पश्चिमी तट पर प्रशांत महासागर में होनोलुलु, हवाई के पास जून-जुलाई में होता है. इसका संचालन अमेरिकी नौसेना का प्रशांत बेड़ा करता है, जिसका मुख्यालय पर्ल हार्बर में है. इसका साथ देते हैं मैरीन कोर, कोस्ट गार्ड और हवाई नेशनल गार्ड फोर्स. हवाई के गवर्नर इसके प्रभारी होते हैं.

हालांकि यह युद्धाभ्यास अमेरिकी नौसेना का है, पर वह दूसरे देशों की नौसेनाओं को भी इसमें शामिल होने का निमंत्रण देते हैं. इसमें प्रशांत महासागर से जुड़े इलाके के देशों के अलावा दूर के देशों को भी बुलाया जाता है. पहला रिम्पैक अभ्यास सन 1971 में हुआ था, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, युनाइटेड किंगडम, और अमेरिका की नौसेनाओं ने भाग लिया. ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका ने तबसे अबतक हरेक अभ्यास में हिस्सा लिया है.

इसमें शामिल होने वाले अन्य नियमित भागीदार देश हैं, चिली, कोलम्बिया, फ्रांस, इंडोनेशिया, जापान, मलेशिया, नीदरलैंड्स, पेरू, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड. न्यूजीलैंड की नौसेना 1985 तक नियमित रूप से इसमें शामिल होती रही. एक विवाद के कारण कुछ साल तक वह अलग रही, फिर 2012 के बाद से उसकी वापसी हो गई. पिछले कई वर्षों से भारतीय नौसेना भी इसमें शामिल होती है. इस साल 27 जून से यह अभ्यास होगा. इसमें भारत सहित 26 देश शामिल होंगे. इस बार इसमें चीन को नहीं बुलाया गया है.

अगले एशियाई खेल कहाँ होंगे?

अगले एशियाई खेल इंडोनेशिया के दो शहरों में होंगे. ये शहर हैं देश की राजधानी जकार्ता और दक्षिणी सुमात्रा प्रांत की राजधानी पलेमबैंग. इनका आयोजन इस साल 18 अगस्त से 2 सितम्बर तक होगा. इसके उद्घाटन और समापन समारोह जकार्ता में होंगे. यह पहला मौका है, जब एशियाई खेल दो शहरों में आयोजित किए जा रहे हैं. दूसरी खास बात यह है कि इन खेलों का आयोजन मूल रूप से वियतनाम के हनोई शहर में होना था, पर आर्थिक दिक्कतों के कारण वियतनाम ने इनके आयोजन में असमर्थता व्यक्त की, जिसके कारण इंडोनेशिया को ये खेल मिल गए.

17 अप्रैल 2014 को वियतनाम के प्रधानमंत्री एनगुएन तान दुंग ने इन खेलों के आयोजन में असमर्थता व्यक्त की. इंडोनेशिया को 18वें एशियाई खेल मिल जाने के बाद यह सोचा गया कि इनका आयोजन 2019 में किया जाए, पर चूंकि 2019 में इंडोनेशिया में चुनाव हैं, इसलिए इन्हें 2018 में ही कराने का फैसला किया गया. 2022 में 19वें एशियाई खेल चीन के हैंगजाऊ और 2026 के बीसवें खेल जापान के नगोया शहर में होंगे. 

हरी मिर्च से मुँह क्यों जलता है?

मुँह तो लाल मिर्च से भी जलता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके तीखेपन के पीछे कैपसाईपिनोइडपदार्थ है जो मिर्च को फफूंद से बचाता है. इंडियाना यूनिवर्सिटी के डेविड हाक के नेतृत्व में शोध करने वाले दल ने बोलीविया जाकर मिर्च के पौधे में कैपसाइसिन या ‘कैपसाईपिनोइड’ तत्व की जांच की. उन्होंने पाया कि उत्तरी क्षेत्र में मात्र 15 से 20 प्रतिशत मिर्च में ही यह तीखा पदार्थ मौजूद था. वहीं दूसरी ओर दक्षिणी हिस्से में स्थिति अलग थी. इस इलाके में करीब 100 प्रतिशत मिर्च के पौधों में इस तीखे पदार्थ के होने से मिर्च बहुत तीखी थी. यह तीखापन अलग-अलग मिर्चों में अलग-अलग होता है.  मिर्च में अमीनो एसिड, एस्कॉर्बिक एसिड, फॉलिक एसिड, साइट्रिक एसिड, ग्लीसरिक एसिड, मैलिक एसिड जैसे कई तत्व होते है जो हमारे स्वास्थ्य के साथ–साथ शरीर की त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद होते हैं.
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

दलित-प्रतिरोध का रंग नीला क्यों?

सामान्यतः दलित विचार से जुड़े संगठन नीले रंग को प्रतीक रूप से अपनाते हैं, हालांकि सत्तर के दशक में शुरू हुए दलित पैंथर के ध्वज में नीले रंग के साथ लाल रंग भी था, जो दुनिया के वामपंथियों का प्रिय रंग है। डॉ भीमराव आम्बेडकर की प्रतिमाओं में नीले रंग का इस्तेमाल होता है। हाल में उत्तर प्रदेश के बदायूं में बाबा साहब डॉ भीमराव आम्बेडकर की एक प्रतिमा को कुछ शरारती लोगों ने भगवा रंग दिया था, जिसे लेकर विवाद हुआ। उस घटना के बाद काफी लोगों ने जानना चाहा कि भीमराव आम्बेडकर के साथ नीला रंग क्यों जुड़ा है? इस सिलसिले में आम्बेडकर महासभा के अध्यक्ष लालजी निर्मल ने कहा, ‘नीला रंग बाबा साहब को प्रिय था।’ रिटायर्ड आईपीएस ऑफिसर और दलित विचारक एसआर दारापुरी ने प्रेस ट्रस्ट को बताया कि सन 1942 में बाबा साहब ने शेड्यूल्‍ड कास्‍ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की स्‍थापना की थी। उसके झंडे का रंग नीला था और उसके बीच में अशोक चक्र था। इसके बाद 1956 में जब पुरानी पार्टी को खत्म कर रिपब्लिकन पार्टी का गठन किया गया तो इसमें भी इसी नीले रंग के झंडे का इस्तेमाल किया।
दारापुरी के अनुसार, नीला रंग आसमान का रंग है। ऐसा रंग जो भेदभाव से रहित दुनिया का प्रतिनिधित्व करता है। बाबा साहब की भी यही दृष्टि थी। बसपा ने भी इसी रंग को अपनाया। यह दलित अस्मिता का प्रतीक बन गया। बाबा साहब की प्रतिमा हमेशा नीले रंग के कोट में दिखती है। उनके एक हाथ में संविधान की किताब और दूसरे हाथ की एक उंगली उठी रहती है, जो आगे बढ़ने की सूचक है। डॉ आम्बेडकर ने पश्चिमी लोकतांत्रिक मूल्यों और यहाँ तक कि सूट-बूट को दलितों की चेतना को जगाने का माध्यम बनाया। उन्हें नीले रंग का सूट बहुत पसंद था। वे अमूमन इसी रंग के थ्री पीस सूट पहनते थे। दलित चिंतक मानते हैं कि आम्बेडकर का नीला सूट दलितों के प्रतिरोध और अस्मिता का प्रतीक बन गया है। बौद्ध धर्म में भी नीला रंग महत्वपूर्ण है। अशोक चक्र का रंग नीला है। बौद्ध धम्म चक्र भी नीला है।

राजनीतिक-विचारधाराओं की पहचान रंगों से?

वैश्विक संदर्भों में नीला रंग सामान्यतः सेंटर राइट या कंजर्वेटिव पार्टियों का रंग माना जाता है। संयुक्त राष्ट्र का ध्वज हल्का नीला या आसमानी है, जो शांति और सद्भाव का प्रतीक है। इसी तरह दुनियाभर में साम्यवाद और व्यापक अर्थ में समाजवाद का प्रतिनिधि रंग लाल है। लाल रंग अमेरिका की रिपब्लिकन पार्टी का प्रतिनिधि रंग भी है, जिसे अनुदारवादी दल माना जाता है। इसके विपरीत डेमोक्रेटिक पार्टी का रंग नीला है। आप गौर करेंगे कि अमेरिकी चुनाव परिणामों के ग्राफिक में अलग-अलग राज्यों में पार्टियों की जीत को लाल और नीले रंग से दिखाया जाता है। भारत में भगवा रंग हिन्दूवादी राजनीति का प्रतिनिधि है, पर पश्चिम में उससे मिलता-जुलता नारंगी रंग क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक दलों का प्रतिनिधित्व करता है। दुनियाभर में हरा रंग इस्लाम के साथ या इस्लामिक राजनीतिक संगठनों के साथ जोड़ा जाता है। इटली में फासी पार्टी का रंग काला था। हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया के इस्लामी स्टेट का झंडा भी काला है। अब्बासी खिलाफत का ध्वज भी काला था। भारत में पेरियार ई रामास्वामी के नेतृत्व में शुरुआती तमिल नास्तिक आंदोलन भी काले झंडे के साथ हुआ था और आज भी ज्यादातर द्रविड़ पार्टियों के झंडे में लाल और काले रंग का इस्तेमाल होता है। कांग्रेस पार्टी ने स्वतंत्रता के पहले से ही तिरंगे को अपनाया था, जो आज भी उसका रंग है।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Sunday, June 3, 2018

बोआओ फोरम क्या है?

बोआओ फोरम एशिया (बीएफए) व्यापारिक सहयोग और विमर्श का फोरम है, जिसे दावोस के वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के तर्ज पर गठित किया गया है। इसका मुख्यालय चीन के हैनान प्रांत के बोआओ में है। सन 2001 से यहाँ एशिया की सरकारों और उद्योगों के प्रतिनिधियों का सम्मेलन हो रहा है। यह फोरम क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के इरादे से गठित किया गया है। इसमें एशिया के देशों को आर्थिक-विकास की राह पर चलते हुए अपनी अर्थ-व्यवस्थाओं को एक-दूसरे के करीब लाने का मौका मिलता है। इसे शुरू करने का विचार मूलतः फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल वी रैमोस, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री बॉब हॉक और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री मोरीहीरो होसोकावा ने बनाया था।

इसका उद्घाटन 27 फरवरी 2001 को हुआ था। इसके लिए चीन ने खासतौर से पहल की। इसकी शुरूआत 26 देशों की भागीदारी के साथ हुई थी। इस वक्त इसके 29 सदस्य देश हैं, जिनमें भारत भी शामिल हैं। इससे जुड़े संगठन की पहली बैठक 12-13 अप्रैल 2002 को हुई। हाल में 8 से 11 अप्रैल 2018 को फोरम का सालाना सम्मेलन हुआ। इसमें चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अपनी भावी आर्थिक नीतियों की ओर इशारा किया। हालांकि भारत की ओर से इस सम्मेलन में कोई बड़ी राजनीतिक हस्ती उपस्थित नहीं थी। केवल उद्योग-व्यापार संगठन फिक्की के प्रतिनिधि इसमें उपस्थित थे।

बोआओ फोरम में आर्थिक एकीकरण के अलावा सामाजिक और पर्यावरणीय-प्रश्नों पर भी विचार किया जाता है। यह फोरम एक तरह से चीन और वैश्विक-व्यापार के बीच की कड़ी बना। सन 2001 में चीन विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) का सदस्य भी बना था।

जनहित याचिका क्या है?


जनहित याचिका भारतीय न्याय-व्यवस्था की अवधारणा है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक हित के लिए न्यायिक-सहायता लेना है। इसे संसदीय नियमों से नहीं बनाया गया है, बल्कि भारतीय अदालतों ने जनता को ताकतवर बनाने के उद्देश्य से तैयार किया है। जस्टिस पीएन भगवती और जस्टिस वीआर कृष्ण अय्यर शुरूआती जज थे, जिन्होंने जनहित याचिकाओं को विचारार्थ स्वीकार किया। धीरे-धीरे इसकी व्यवस्था बनती गई। जनहित याचिकाओं के दुरुपयोग के मामले भी सामने आए हैं और अदालतों ने इनपर कड़ाई से कार्रवाई भी की है।

सत्तर और अस्सी के दशक भारत में न्यायिक सक्रियता का दौर था। इस दौर में हमारी अदालतों ने सार्वजनिक हित में कई बड़े फैसले किए। दिसम्बर 1979 में कपिला हिंगोरानी ने बिहार की जेलों में कैद विचाराधीन कैदियों की दशा को लेकर एक याचिका दायर की। इस याचिका के कारण जस्टिस वीआर कृष्ण अय्यर की अदालत ने बिहार की जेलों से 40,000 ऐसे कैदियों को रिहा करने का आदेश दिया, जिनके मामले विचाराधीन थे। सन 1981 में एसपी गुप्ता बनाम भारतीय संघ के केस में सात जजों की बेंच में जस्टिस भगवती भी एक जज थे। उन्होंने अपने फैसले में दूसरी बातों के अलावा यह भी लिखा कि अदालत सार्वजनिक हित में मामले को उठाने के लिए अदालत औपचारिक याचिका का इंतजार नहीं करेगी, बल्कि कोई व्यक्ति एक चिट्ठी भी लिख देगा तो उसे सार्वजनिक हित में याचिका मान लेगी। इस व्यवस्था में भारी न्यायिक शुल्क को जमा किए बगैर सुनवाई हो सकती है।

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हींग क्या होती है?


हींग एशिया में पाए जाने वाले सौंफ की प्रजाति के फेरूला फोइटिस नामक पौधे का चिकना रस है. ये पौधे-ईरान, अफगानिस्तान, तुर्की, बलूचिस्तान, अफगानिस्तान के पहाड़ी इलाकों में अधिक होते हैं. भारत में हींग की खेती बहुत कम मात्रा में होती है. इस पौधे की टहनियाँ 6 से 10 फ़ुट तक ऊँची हो जाती हैं. इस पर हरापन लिए पीले रंग के फूल निकलते हैं. इसकी जड़ों को काटा जाता है जहाँ से एक दूधिया रस निकलता है. फिर इसे इकट्ठा कर लेते हैं. सूखने पर यह भूरे रंग के गोंद जैसा हो जाता है, यही हींग है. ईरान में लगभग हर तरह के भोजन में इसका प्रयोग किया जाता है. भारत में हींग का काफी इस्तेमाल होता है. इसे संस्कृत में 'हिंगु' कहा जाता है. इसमें ओषधीय गुण भी अनेक हैं. हाजमे के लिए हींग बहुत अच्छी है. यह खाँसी भी दूर करती है.

पीत-पत्रकारिता’ क्या होती है?

पीत पत्रकारिता (Yellow journalism) उस पत्रकारिता को कहते हैं जिसमें सही समाचारों की उपेक्षा करके सनसनी फैलाने वाले या ध्यान-खींचने वाले शीर्षकों का बहुतायत में प्रयोग किया जाता है. इसे समाचारपत्रों की बिक्री बढ़ाने का घटिया तरीका माना जाता है. मूलतः अब इससे आशय अनैतिक और भ्रष्ट पत्रकारिता है. जिन दिनों यह शब्द चला था तब इसका मतलब लोकप्रिय पत्रकारिता था. इसका इस्तेमाल अमेरिका में 1890 के आसपास शुरू हुआ था. उन दिनों जोज़फ पुलिट्जर के अख़बार ‘न्यूयॉर्क वर्ल्ड’ और विलियम रैंडॉल्फ हर्स्ट के ‘न्यूयॉर्क जर्नल’ के बीच जबर्दस्त प्रतियोगिता चली थी. इस पत्रकारिता को यलो कहने के बीच प्रमुख रूप से पीले रंग का इस्तेमाल है, जो दोनों अखबारों के कार्टूनों का प्रभाव बढ़ाता था. दोनों अखबारों का हीरो पीले रंग का कुत्ता था. यलो जर्नलिज्म शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल उन्हीं दिनों न्यूयॉर्क प्रेस के सम्पादक एरविन वार्डमैन ने किया.

रिमोट-आविष्कार किसने किया?

सन 1898 में निकोला टेस्ला ने अमेरिका में पहला रिमोट पेटेंट कराया जो पानी पर चल रही नाव को दूर से संचालित कर सकता था. रिमोट कंट्रोल से सामान्य तात्पर्य टीवी या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को इंफ्रारेड मैग्नेटिक स्पेक्ट्रम से संचालित करना है. सुदूर अंतरिक्ष में घूम रहे यानों को भी दूर से ही नियंत्रित किया जाता है. तमाम देशों में बगैर ड्राइवर की मेट्रो ट्रेन दूर से संचालित हो रहीं हैं. हम जिन रिमोट कंट्रोल गैजेट्स की बात कर रहे हैं वे कुछ दूरी यानी पाँच मीटर के आसपास तक काम करते हैं. ये रिमोट प्रायः इंफ्रारेड का उपयोग करते हैं. सत्तर के दशक से पहले के रिमोट अल्ट्रासोनिक तरंगों का इस्तेमाल करते थे. रेडियो तकनीक का आविष्कार होने के बाद रेडियो तरंगों के मार्फत संदेश भेजने की शुरुआत भी हो गई थी. शुरूआती रिमोट कंट्रोल रेडियो तरंगों के मार्फत चलते थे. अब इनमें ब्लू टूथ कनेक्टिविटी, मोशन सेंसर और वॉइस कंट्रोल भी शामिल होने लगे हैं. 




Friday, May 25, 2018

इंजेक्शन कब शुरू हुए?


शरीर में चोट लगने पर दवाई सीधे लगाने की परम्परा काफी पुरानी है. शरीर में अफीम रगड़कर या किसी कटे हुए हिस्से में अफीम लगाकर शरीर को राहत मिल सकती है ऐसा विचार भी पन्द्रहवीं सोलहवीं सदी में था. अफीम से कई रोगों का इलाज किया जाने लगा, पर डॉक्टरों को लगता था कि इसे खिलाने से लत पड़ सकती है. इसलिए शरीर में प्रवेश का कोई दूसरा तरीका खोजा जाए. स्थानीय एनिस्थासिया के रूप में भी मॉर्फीन वगैरह का इस्तेमाल होने लगा था. ऐसी भीतर से खोखली सूई सोलहवीं-सत्रहवीं सदी से इस्तेमाल होने लगी थी. पर सबसे पहले सन 1851 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक चार्ल्स गैब्रियल प्रावाज़ ने हाइपोडर्मिक नीडल और सीरिंज का आविष्कार किया. इसमें महीन सुई और सिरिंज होती थी. तबसे इसमें तमाम तरह के सुधार हो चुके हैं. 

आसमान ठोस है, तरल या गैस है?

आप जिस आसमान को देखते हैं वह बाहरी अंतरिक्ष का एक हिस्सा है. धरती से दिन में यह नीले रंग का नजर आता है. इसकी वजह है हमारा वातावरण जिससे टकराकर सूरज की किरणों का नीला रंग फैल जाता है. पर यह आसमान धरती से देखने पर ही नीला लगता है. किसी अन्य ग्रह से देखने पर ऐसा ही नहीं दिखेगा, बल्कि आमतौर पर काला नजर आएगा. यह ठोस नहीं है, पर इसमें ठोस, तरल और गैसीय पदार्थ प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं. यह अनंत है. दुनिया के बड़े से बड़े टेलिस्कोप से भी आप इसका बहुत छोटा हिस्सा देख पाएंगे.

हार्ड वॉटर को सॉफ्ट कैसे बनाते हैं?

सबसे आसान तरीका पानी को उबाल कर डिस्टिलेशन का है. पर वह रोजमर्रा के लिहाज से महंगा होगा. आमतौर पर हम रिवर्स ऑस्मॉसिस के जरिए पानी को पीने लायक बनाते हैं, जिसे छोटे नाम आरओ से ज्यादा पहचाना जाता है. इसमें एक मैम्ब्रेन या झिल्ली के मार्फत पानी के हार्ड तत्व को अलग किया जाता है. दुनिया की सबसे बड़ी डिसैलिनेशन प्रोजेक्ट संयुक्त अरब अमीरात में लगा रस अल-खैर संयंत्र है, जो खारे पानी से हर रोज 10,25,000 घन मीटर मीठा पानी तैयार करती है. अलबत्ता कुवैत ऐसा देश है, जो अपने नागरिकों को शत-प्रतिशत मीठा पानी सप्लाई करता है. 














Tuesday, May 22, 2018

मैराथन दौड़


मैराथन दुनिया में सबसे लम्बी दूरी की दौड़ है। आधिकारिक रूप से इसकी लम्बाई 42.195 किलोमीटर (26 मील 385 गज) होती है। यह सड़क पर होने वाली दौड़ है, जिसका छोटा सा हिस्सा ही स्टेडियम के भीतर होता है। सन 1896 में जब आधुनिक ओलिम्पिक खेल शुरू हुए तब मैराथन दौड़ भी उसका हिस्सा थी। पर उस वक्त इसकी लम्बाई का मानकीकरण नहीं हुआ था। इसकी लम्बाई का निर्धारण सन 1921 में हुआ।

दुनिया में आज 800 से ज्यादा ऐसी मैराथन प्रतियोगिताएं होती हैं, जो किसी न किसी रूप में खेल संघों से सम्बद्ध होती हैं। इन्हें स्वास्थ्य तथा अन्य सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों से भी जोड़ा जाता है। इनमें सैकड़ों और कई बार हजारों शौकिया धावक भी हिस्सा लेते हैं। तमाम लोग इस दौड़ के छोटे से हिस्से को ही पूरा करते हैं। कई जगह हाफ मैराथन भी होती हैं।

मैराथन दौड़ यूनान की एक दंतकथा से प्रेरित है। इसकी कहानी फ़ेडिप्पिडिस नामक यूनानी धावक से जुड़ी है। फ़ेडिप्पिडिस एक हरकारा था, जिसे मैराथन से एथेंस यह घोषित करने के लिए भेजा गया था कि मैराथन के युद्ध में (जिसमें वह खुद भी लड़ रहा था) फारसियों की पराजय हो गई है। यह ई.पू. 490 के अगस्त या सितंबर की घटना है। कहा जाता है कि फ़ेडिप्पिडिस पूरे रास्ते पर बिना रुके दौड़ा और फिर सभा में प्रवेश करके बोला नेनिकेकामेन (हम जीत गए)। और फिर वह गिर पड़ा और मर गया।

मैराथन से एथेंस की दौड़ का पहला वृत्तांत प्लूटार्क की एथेंस कीर्ति में मिलता है, जो पहली सदी में लिखी गई थी और हेराक्लाइडस पॉण्टिकस की लुप्त कृति को संदर्भित करते हुए धावक का नाम एर्चियस या यूक्लस का थेर्सिपस बताया गया था। एक और लेखक समोसाता के लूशियन (दूसरी सदी) ने भी इस कथा को लिखा है, पर धावक का नाम फ़ेलिप्पिडिस बताया है, फ़ेडिप्पिडिस नहीं। बहरहाल यह किंवदंती है। इसका ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। यूनानी-फ़ारसी युद्धों के प्रमुख स्रोत, यूनानी इतिहासकार हैरोडोटस ने फ़ेडिप्पिडिस को एक हरकारे के रूप में वर्णित किया है, जो मदद का संदेश लेकर एथेंस से स्पार्टा और वापस गया। एक तरफ से यह दूरी 240 किलोमीटर (150 मील) से भी ज़्यादा है।

डब्लूटीओ में कितने सदस्य हैं?
विश्व व्यापार संगठन में 164 सदस्य और 23 पर्यवेक्षक देश हैं। 14 जुलाई 2016 को लाइबेरिया इसका 163वाँ और 29 जुलाई 2016 को अफगानिस्तान इसका 164वाँ सदस्य बना।

कहाँ और कब बनी पहली कार?

हालांकि शुरू में भाप से चलने वाली गाड़ियाँ बनी थीं, पर इंटरनल कॉम्बुशन इंजन से चलने वाली पहली कार सन 1870 में ऑस्ट्रिया के वियना शहर में सिग्फ्राइड मार्कस ने तैयार की। वह गैसोलीन से चलती थी। इसे फर्स्ट मार्कस कार कहते हैं। मार्कस ने ही 1888 में सेकंड मार्कस कार तैयार की जिसमें कई तरह के सुधार किए गए थे। इस बीच जर्मनी के मैनहाइम में कार्ल बेंज ने सन 1885 में तैयार की।


Sunday, May 20, 2018

वोट शब्द कहाँ से आया?




वोट शब्द राय देने, चयन करने किसी व्यक्ति या प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार करने के अर्थ में इस्तेमाल होता है. अंग्रेजी में यह संज्ञा और क्रिया दोनों रूपों में चलता है. अंग्रेजी में यह शब्द लैटिन के वोटम (votum) से बना है. इसका मतलब है इच्छा, कामना, प्रतिज्ञा, प्रार्थना, निष्ठा, वचन, समर्पण वगैरह. हिन्दी में इसका इस्तेमाल मत के अर्थ में लिया जाता है. अंग्रेजी की तरह हिन्दी ने भी मतदाता या निर्वाचक के लिए वोटर शब्द का इस्तेमाल स्वीकार कर लिया है. शब्दों का अध्ययन करने वाले अजित वडनेरकर के अनुसार भाषा विज्ञानी इसे प्रोटो इंडो-यूरोपीय भाषा परिवार का शब्द मानते हैं. अंग्रेजी का वाऊ vow इसी श्रृंखला का शब्द है जिसका मतलब होता है प्रार्थना, समर्पण और निष्ठा के साथ अपनी बात कहना.

‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ व्यवस्था क्या है?

लोकतंत्र में चुनाव सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. प्रतिनिधि के चयन से लेकर फैसले करने तक सारी बातें वोट से तय होती हैं. चुनाव की अनेक पद्धतियाँ दुनिया में प्रचलित हैं. ‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ भी चुनाव की एक पद्धति है. जब एक से ज्यादा प्रत्याशी किसी पद के लिए खड़े हों, तब सबसे ज्यादा वोट पाने वाले व्यक्ति को चुना हुआ माना जाता है. भारत में चुनाव की यही पद्धति है.

चीनी सबसे पहले कहाँ बनी?

मीठे फल और गन्ने के रस का इस्तेमाल इंसान न जाने कब से करता रहा है. पर रस से क्रिस्टल के रूप में चीनी बनाने का काम सबसे पहले भारत में हुआ. इतिहासकारों का मत है कि ईसवी सन 350 के आसपास गुप्तवंश के दौर में चीनी बनती थी. संभव है इससे पहले भी बनती रही हो. संस्कृत के शर्करा से अरब में शक्कर और उससे अंग्रेजी का शुगर शब्द बना. लैटिन में सकारम (succharum) भी भारत से गया. ईसा से साढ़े तीन सदी पहले भारत आई सिकंदर की सेना भारत में बगैर मधुमक्खी के मधु को खाकर हैरान थी. शायद वह गुड़ का कोई रूप था.

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Saturday, May 12, 2018

संयुक्त राष्ट्र शांति-सेना क्या होती है?


संयुक्त राष्ट्र शांति-सेना संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की सेनाओं की मदद से एक अस्थायी व्यवस्था के रूप में अलग-अलग परिस्थितियों में गठित की जाती है. इसका उद्देश्य टकराव को दूर करके शांति स्थापित करने में मदद करना होता है. संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक नीले रंग की टोपियाँ लगाते हैं या नीले रंग के हेल्मेट पहनते हैं, जो अब इस सेना की पहचान बन गई है.

संयुक्त राष्ट्र की अपनी कोई सेना नहीं होती. इस सेना के सदस्य अपने देश की सेना के सदस्य ही रहते हैं. शांति-सेना के रूप में कार्य करते समय यह सेना संयुक्त राष्ट्र के प्रभावी नियंत्रण में होती है. शांति-रक्षा का हर कार्य सुरक्षा परिषद द्वारा अनुमोदित होता है. संयुक्त राष्ट्र के गठन के समय इस सेना की परिकल्पना नहीं की गई थी, बल्कि बदलते हालात के साथ इसका विकास होता गया. संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में सुरक्षा परिषद को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए संयुक्त कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है. संयुक्त राष्ट्र के शांति-ऑपरेशंस का एक अलग विभाग बन गया है, जिसके प्रमुख इस समय ज्यां-पियरे लैक्रो हैं.

संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन सबसे पहले 1948 में अरब-इसरायल युद्ध के समय भेजा गया था. उसके बाद से संयुक्त राष्ट्र के 63 मिशन भेजे जा चुके हैं, जिनमें से 17 आज भी सक्रिय हैं. सन 1988 में संयुक्त राष्ट्र शांति-रक्षा बल को नोबेल शांति पुरस्कार भी दिया गया. संयुक्त राष्ट्र के पूर्ववर्ती संगठन लीग ऑफ नेशंस के सामने शांति स्थापना के ज्यादा अवसर नहीं आए, पर सन 1934-35 में लीग ऑफ नेशंस के नेतृत्व में जर्मनी के सार क्षेत्र में सेना भेजी गई. इसे दुनिया की पहली शांति-स्थापना से जुड़ी संयुक्त सैनिक कार्रवाई माना जा सकता है. पहले विश्व युद्ध के काफी समय बाद सार क्षेत्र में जनमत संग्रह के संचालन के लिए इसकी जरूरत महसूस की गई. 

भारत में गाँवों की सही संख्या क्या है?

गूगल पर सर्च करें तो कई तरह की संख्याएं सामने आएंगी. ज्यादातर 6,40,000 को आसपास हैं. हाल में जब भारत सरकार ने घोषणा की कि देश के सभी गाँवों में बिजली पहुँचा दी गई है, तब यह संख्या 5,97, 464 बताई गई. दरअसल यह संख्या राजस्व गाँवों की संख्या है. जन 2011 की जनगणना में राजस्व गाँवों की संख्या 5,97, 464 बताई गईं थी. गाँव की बस्ती, पुरवा जैसी कई परिभाषाएं हैं. यदि कुछ लोग कहीं घर बनाकर रहने लगें, तो आधिकारिक रूप से उसे तबतक गाँव नहीं कहेंगे, जबतक राजस्व खाते में उसका नाम दर्ज न हो जाए. शहरों के विकास के साथ हमारे देश में बहुत से गाँवों और बस्तियों का अस्तित्व खत्म भी होता जा रहा है, इसलिए यह संख्या बदलता रहती है.

सोशल मीडिया में डीपी किसे कहते हैं?

डीपी माने डिस्प्ले पिक्चर. आपकी वह तस्वीर जो आपकी पहचान है. कुछ लोग अपनी तस्वीर लगाते हैं और कुछ लोग प्रतीक रूप में किसी दृश्य या वस्तु की तस्वीर भी लगाते हैं. समय पड़ने पर उसमें बदलाव भी करते हैं जैसे हाल में कुछ लोग ने जम्मू-कश्मीर में एक बालिका के साथ हुए बलात्कार के प्रति रोष जाहिर करने के लिए अपनी डीपी काली कर दी थी.

कम्प्यूटिंग या डिजिटल मीडिया के उदय के साथ जब कई तरह के फोरम जन्म लेने लगे तब यूजर की पहचान का सवाल भी उठा. इसके लिए शुरूआती शब्द बना अवतार. अवतार भारतीय पौराणिक शब्द है, जिसे इंटरनेट पर इस रूप में जगह मिली. कई जगह इसे पायकन (पर्सनल आयकन) भी कहा गया. अवतार शब्द का सबसे पहला इस्तेमाल सन 1979 में कम्प्यूटर गेम प्लेटो में देखने को मिला, पर ऑन-स्क्रीन परिचय के लिए 1985 में कम्प्यूटर गेम अल्टिमा-4

केसर क्या होता है?

केसर कृषि-उत्पाद है यानी कि उसकी खेती होती है. भारत की केसर दुनिया में सबसे अच्छी मानी जाती. भारत में जम्मू-कश्मीर में केसर की खेती होती है. कश्मीर के अवंतीपुर के पंपोर और जम्मू संभाग के किश्तवाड़ इलाके में केसर की खेती की जाती है. केसर बोने के लिए खास जमीन की आवश्यकता होती है. ऐसी जमीन जहां बर्फ पड़ती हो और जमीन में नमी मौजूद रहती हो. जिस जमीन पर केसर बोयी जाती है वहां कोई और खेती नहीं की जा सकती. कारण, केसर का बीज हमेशा जमीन के अंदर ही रहता है. इस बीज को निकाल कर उमसे दवाइयाँ और खाद मिलाकर फिर से बोया जाता है. यह बुआई जुलाई-अगस्त में की जाती है. केसर के फूल अक्टूबर-नवंबर में खिलने लगते हैं. जमीन में जितनी ज्यादा नमी होगी, केसर की पैदावार भी उतनी ही ज्यादा होगी. केसर का फूल नीले रंग का होता है. नीले फूल के भीतर पराग की पांच पंखुड़ियां होती हैं. इनमें तीन केसरिया रंग की और बीच की दो पंखुड़ियां पीले रंग की. केसरिया रंग की पंखुड़ियाँ ही असली केसर कही जाती हैं.




Sunday, May 6, 2018

दुनिया में कुल कितनी भाषाएं हैं?

अनुमान है कि पूरी दुनिया में भाषाओं की संख्या तीन से आठ हजार के बीच है। वस्तुतः यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप भाषा को किस तरह से परिभाषित करते हैं। अलबत्ता दुनिया की भाषाओं के एथनोलॉग कैटलॉग के अनुसार दुनिया में इस वक्त 6909 जीवित भाषाएं हैं। इनमें से केवल 6 फीसदी भाषाएं ही ऐसी हैं, जिन्हें बोलने वालों की संख्या दस लाख या ज्यादा है। एथनोलॉग कैटलॉग के बारे में जानकारी यहाँ मिल सकती है।

विश्व पत्रकारिता और हिन्दी पत्रकारिता दिवस

अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता स्वतंत्रता दिवस (वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे) हर साल 3 मई को मनाया जाता है। वर्ष 1991 में युनेस्को और संयुक्त राष्ट्र के 'जन सूचना विभाग' ने मिलकर इसे मनाने का निर्णय किया था। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भी इसकी घोषणा की। युनेस्को महा-सम्मेलन के 26वें सत्र में 1993 में इससे संबंधित प्रस्ताव को स्वीकार किया गया था। इसे मनाने का उद्देश्य प्रेस की स्वतंत्रता के जुड़े विभिन्न पक्षों को लेकर वैश्विक-जागरूकता बढ़ाना है।

हिन्दी पत्रकारिता दिवस भी मई में मनाया जाता है। इसकी तारीख है 30 मई। 30 मई, 1826 में पंडित युगल किशोर शुक्ल ने हिन्दी के पहले समाचार पत्र 'उदन्त मार्तण्ड' का प्रकाशन व सम्पादन आरम्भ कोलकाता से किया था। इस प्रकार भारत में हिन्दी पत्रकारिता की आधारशिला उन्होंने रखी। उस समय अंग्रेज़ी, फारसी और बांग्ला में तो अनेक पत्र निकल रहे थे किन्तु हिन्दी में एक भी पत्र प्रकाशित नहीं होता था। प्रारंभिक रूप में इसकी केवल 500 प्रतियां ही मुद्रित हुई थीं। इसका प्रकाशन लम्बे समय तक न चल सका, क्योंकि इसके प्रकाशन का खर्च निकाल पाना मुश्किल हो गया था। अंतत: 4 दिसम्बर 1826 को इसका प्रकाशन स्थगित हो गया।

उंगलियों के निशान क्यों महत्वपूर्ण होते हैं?
प्रकृति ने सभी जीवधारियों को अलग-अलग सांचों से ढालकर निकाला है। दो व्यक्तियों के हाथों और पैरों की अंगुलियों के निशान या उभार समान नहीं होते। इन्हें एपिडर्मल रिज कहते हैं। हमारी त्वचा जब दूसरी वस्तुओं के साथ सम्पर्क में आती है तब ये उभार उसे महसूस करने में मददगार होते हैं। साथ ही ग्रिप बनाने में मददगार भी होते हैं। किसी भी वस्तु के साथ सम्पर्क होने पर ये निशान उसपर छूट जाते हैं। इसकी वजह है पसीना, जो हमारी त्वचा को नर्म बनाकर रखता है। तमाम दस्तावेजों में जहाँ व्यक्ति दस्तखत नहीं कर पाता उसकी उंगलियों के निशान लिए जाते हैं। आधार पहचान-पत्र में इसीलिए उंगलियों के निशान लिए जाते हैं। फोरेंसिक विज्ञान के विस्तृत होते दायरे में अब दूध का दूध और पानी का पानी अलग करना आसान हो गया है। इसके तहत संदेह की लेशमात्र भी गुंजाइश नहीं रहती। विज्ञान के अनुसार भले ही ये निशान फौरी तौर पर लगभग एक जैसे दिखाई पड़ें, पर उनमें समानता नहीं होती। इस अंतर का पता सूक्ष्म विश्लेषण से ही हो सकता है।