Thursday, August 17, 2017

सूरजमुखी का फूल हमेशा सूरज की तरफ क्यों होता है?

इस प्रवृत्ति को प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) और हीलियोट्रॉपिज्म (Heliotropism) कहते हैं. सूरजमुखी के पौधे में ऑक्सिन (Auxin ) नाम का एक हॉरमोन होता है. यह हॉर्मोन सूरज की किरणों के प्रति संवेदनशील होता है. पौधे में यह तने के छाया वाले हिस्से में जमा होता है. फूल से छाया बनती है. छाया में ही यह बढ़ता है. इसलिए इसका तना सहज रूप से छाया की ओर घूमता है, जिसके कारण फूल का मुख सूरज की ओर हो जाता है.

इसका परागण से भी संबंध है. ‘यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया’ में काम करने वाले छह अमेरिकी वैज्ञानिकों के एक दल ने पाया है कि तने में एक दिशा में होने वाली चयनात्मक वृद्धि के कारण सूरजमुखी सूर्य की दिशा में देखता है.  सुबह के समय फूल का चेहरा पूर्व की ओर होता है और फिर जिस दिशा में सूर्य बढ़ता जाता है, यह भी उसी दिशा में घूमता जाता है. रात के समय यह विपरीत दिशा में वापस आ जाता है ताकि सुबह एकबार फिर से इसका चेहरा सूर्य की दिशा में हो सके. सिर्फ नए फूल ही इस लय का पालन करते हैं. जब ये बड़े हो जाते हैं और इनके बीज स्थापित हो जाते हैं तो ये फूल हमेशा अपना मुंह पूर्व की दिशा में रखता है. इससे फूल और परागण करने वाले जीवों के बीच होने वाली प्रक्रिया में लाभ मिलता है.  
दुनिया के पहले एटम बम का कोड नाम क्या था?

पहला एटम बम यानी जिस बम का पहला परीक्षण किया गया. उसका नाम था ट्रिनिटी. इसका विस्फोट 16 जुलाई 1945 को अमेरिका की सेना ने सुबह 5.29 बजे किया. 6 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा शहर पर जो पहला बम गिराया गया था उसका नाम था लिटिल बॉय. हिरोशिमा पर बमबारी के तीन दिन बाद 9 अगस्त को जापान के दूसरे शहर नगासाकी पर जो बम गिराया गया उसका नाम था फैट मैन. इस बमबारी के बाद जापान ने 15 अगस्त 1945 को समर्पण की घोषणा कर दी.
शक संवत क्या है?

राष्ट्रीय शाके अथवा शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है. इसका प्रारम्भ यह 78 वर्ष ईसा पूर्व माना जाता है. यह संवत भारतीय गणतंत्र का सरकारी तौर पर स्वीकृत अपना राष्ट्रीय संवत है. ईसवी सन 1957 (चैत्र 1, 1879 शक) को भारत सरकार ने इसे देश के राष्ट्रीय पंचांग के रूप में मान्यता प्रदान की थी. इसमें सौर गणना होती है. यानी महीना 30 दिन का होता है. इसे शालिवाहन संवत भी कहा जाता है. इसमें महीनों के नाम विक्रमी संवत जैसे ही हैं. इसके प्रथम माह (चैत्र) में 30 दिन हैं, जो अंग्रेजी लीप ईयर में 31 दिन हो जाते हैं. वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण एवं भाद्रपद में 31-31 दिन एवं शेष 6 मास में यानी आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ तथा फाल्गुन में 30-30 दिन होते हैं.
संसद का ‘शून्यकाल’ क्या होता है?
शून्यकाल भारतीय संसदीय व्यवस्था की देन है. आमतौर पर सदन में प्रश्न प्रहर खत्म होने के बाद शुरू होता है. इसमें कोई भी मामला उठाया जा सकता है. साठ के दशक से शुरू हुई यह व्यवस्था अब हमारी संसदीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग बन गई है.
JPG और PNG इमेज में क्या फर्क है?

बुनियादी फर्क उसके फॉर्मेट का है, जिसके कारण PNG इमेज को जब कॉम्प्रेस करते हैं तो डेटा लॉस नहीं होता. यानी चित्र में कुछ फर्क आ जाता है, भले ही उसे आप आसानी से देख न पाएं. इसके विपरीत JPG में कुछ फर्क आ जाता है, पर जटिल चित्रों को भी कॉम्प्रेस करने में JPG ज्यादा कुशल है.  
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

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