Sunday, April 26, 2026
Saturday, April 18, 2026
समुद्री परिवहन की विश्व-व्यवस्था
समुद्री परिवहन की अंतरराष्ट्रीय-व्यवस्था अनेक महत्त्वपूर्ण संधियों के मार्फत काम करती है, जो नौवहन, सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण, माल परिवहन, श्रमिक अधिकारों और समुद्री क्षेत्रों के प्रबंधन से जुड़ी हैं। ये संधियाँ मुख्य रूप से इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइज़ेशन (आईएमओ) के तहत विकसित की गई हैं। इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण और व्यापक संधि है यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (यूएनक्लोस)। इसे ‘समुद्री विधान’ कहा जाता है, जो प्रादेशिक जल, और अनन्य आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) तटीय राज्यों के अधिकार, नेवीगेशन की स्वतंत्रता और समुद्री पर्यावरण संरक्षण को परिभाषित करता है। यह संधि 1982 में अपनाई गई और 1994 में लागू हुई। भारत ने इसे 1995 में अनुमोदित किया। इसके अलावा आईएमओ के तहत चार प्रमुख संधियाँ और हैं। सोलास (सेफ्टी ऑफ लाइफ एट सी), मारपोल (पोतों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए), एसटीसीडब्लू (समुद्री कर्मियों के प्रशिक्षण, प्रमाणन और ड्यूटी के मानक), एमएलसी (मैरीटाइम लेबर कन्वेंशन) समुद्री श्रमिकों के अधिकार। उपरोक्त चारों को आईएमओ के चार स्तंभ कहा जाता है। इनके अलावा माल परिवहन, कागजी कार्यवाही तथा पोतों के टकराव को रोकने से जुड़ी संधियाँ भी हैं। इस वर्ष जैव-विविधता संरक्षण के लिए नई संधि भी लागू हुई है।
राजस्थान
पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 18 अप्रेल 2026 को प्रकाशित
Saturday, April 11, 2026
जलडमरूमध्य क्या होता है?
हाल में होर्मुज़ या हरमूज़ जलडमरूमध्य का नाम खबरों में काफी रहा है। जलडमरूमध्य पानी का प्राकृतिक सँकरा रास्ता होता है, जो दो बड़े जल निकायों, जैसे महासागर या समुद्र, को आपस में जोड़ता है। अंग्रेजी में इसे स्ट्रेट कहते हैं। यह पोतों के आवागमन के लिए छोटे, प्राकृतिक जलमार्ग का कार्य करता है। हिंदी में इसे जलडमरूमध्य इसलिए कहते हैं क्योंकि इसका भौगोलिक आकार डमरू जैसा होता है। डमरू के दो सिरे चौड़े और बीच का भाग सँकरा होता है। पूरे सागर क्षेत्र को डमरू मान लें, तो उसका मध्य यह मार्ग है। हिंदी में इसे जलसंधि भी लिखते हैं, अर्थात बड़ी जल राशियों के बीच की संधि। ये मार्ग व्यापारिक परिवहन और समुद्री सुरक्षा के केंद्र भी होते हैं, जैसाकि होर्मुज़ में देखा गया। कुछ ऐसे ही प्रसिद्ध मार्ग हैं मलक्का, जिब्राल्टर, बाब-अल-मंडेब और पाक जलडमरूमध्य। आप पूछ सकते हैं कि स्वेज़ नहर को भी क्या जलडमरूमध्य माना जाएगा, जो यह मिस्र में भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ने वाला 193 किमी लंबा जलमार्ग है? बेशक वह वही काम करता है, जो जलडमरूमध्य करता है, पर यह प्राकृतिक मार्ग नहीं है, मानव-निर्मित है। इसलिए इसे उस श्रेणी में नहीं रखते।
राजस्थान
पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 11 अप्रेल 2026 को प्रकाशित
Saturday, March 21, 2026
मध्य पूर्व या पश्चिम एशिया?
इन दिनों पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई के क्षेत्र को मीडिया में धड़ल्ले से मध्य पूर्व लिखा या बोला जा रहा है। सवाल है कि यह कहाँ का मध्य और किसका पूर्व है? पश्चिम एशिया, या दक्षिण पश्चिम एशिया, शब्दावली एशिया के सुदूर पश्चिमी भाग को बताती है। यह भौगोलिक स्थिति को बताने वाला शब्द है, जबकि 'मध्य पूर्व' औपनिवेशिक, भू-राजनीतिक शब्द है, जिसका उद्भव 20वीं सदी के प्रारंभ में ब्रिटिश नीति के हिस्से के रूप में हुआ था, जो यूरोप से दूरी के आधार पर इस क्षेत्र को परिभाषित करता था, न कि एशिया के भीतर उसकी सही भौगोलिक स्थिति (पश्चिम) के आधार पर। उनकी नज़र से यूरोप से पूर्वी इलाके का मध्यवर्ती क्षेत्र। इस वाक्यांश का सबसे पहले इस्तेमाल संभवतः 1902 में अमेरिकी नौसैनिक रणनीतिकार अल्फ्रेड थेयर मैहन ने किया था। उन्होंने भारत और फारस की खाड़ी के बीच के स्थान को मध्य पूर्व कहा था। उनका दृष्टिकोण पूरी तरह यूरोप केंद्रित था, जिसे हम आज भी दोहरा रहे हैं। अमेरिका और यूरोप के लिए यह इलाका मिडिल ईस्ट हो सकता है, हमारे लिए नहीं। भारत की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यह पश्चिम एशिया ही है।
राजस्थान
पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 21 मार्च 2026 को प्रकाशित
Saturday, March 14, 2026
गिग वर्कर्स कौन होते हैं?
गिग वर्कर्स वे लोग हैं, जो अल्पकालिक, टास्क-आधारित या फ्रीलांस काम करते हैं। जो ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म्स जैसे ऊबर, ओला, रैपिडो, पोर्टर, स्विगी, ज़ोमैटो, ब्लिंकिट या फ्रीलांसिंग साइट्स (जैसे अपवर्क) के माध्यम से काम पाते हैं। जो लोग फिक्स्ड सैलरी या समय-सीमा के काम करते हैं। ‘गिग’ शब्द का इस्तेमाल 1920 के दशक में जैज़ संगीतकारों ने अपने ‘जॉब’ या काम के लिए किया, लेकिन गिग वर्कर्स के रूप में इसका व्यापक उपयोग हाल के वर्षों में, विशेषकर 2009 में अमेरिका में ऊबर के लॉन्च के बाद बढ़ा। भारत में गिग वर्कर्स तेजी से बढ़ रहे हैं। 2020-21 में इनकी संख्या लगभग 77 लाख थी, जो 2030 तक अनुमानतः 2.3 करोड़ से अधिक हो जाएगी। यह संख्या उस समय की वर्कफोर्स का 6-8 प्रतिशत होगी। गिग वर्क में फिक्स्ड वेतन, बीमा, पेंशन या छुट्टी नहीं होती, इसलिए सुरक्षा कम है। 2025 के अंत में बड़ी संख्या में डिलीवरी वर्कर्स ने बेहतर पेमेंट और सुरक्षा की माँग को लेकर हड़ताल की थी। भारत में सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत इनके हितों की रक्षा की जा रही है। इसके तहत स्वास्थ्य, बीमा और दुर्घटना लाभ सुनिश्चित करने की पहल है।
राजस्थान
पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 14 मार्च 2026 को प्रकाशित
Saturday, February 21, 2026
डूम्सडे क्लॉक क्या है?
यह प्रतीकात्मक घड़ी है, जिसे बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स ने बनाया है और जो वैश्विक-तबाही के क्रमशः नज़दीक आने की चेतावनी देती है। बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स की स्थापना 1945 में शिकागो विश्वविद्यालय के उन वैज्ञानिकों ने की थी, जिन्होंने मैनहटन प्रोजेक्ट में एटमी हथियार बनाए थे। 1947 में इसे मानव निर्मित वैश्विक आपदाओं की आशंकाओं के प्रतीक के रूप में बनाया गया। शुरू में यह परमाणु हथियारों के खतरों पर केंद्रित थी, लेकिन 2007 से इसमें जलवायु परिवर्तन जैसे अन्य खतरे भी शामिल किए गए हैं। वैश्विक जोखिमों के आधार पर तय किया जाता है कि घड़ी की मिनट वाली सुई मिडनाइट यानी पूर्ण विनाश से कितनी दूर है। इसे साइंस एंड सिक्योरिटी बोर्ड द्वारा तय किया जाता है, जो वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का समूह है। वे साल में दो बार दुनिया की घटनाओं पर चर्चा करते हैं। घड़ी को अब तक 27 बार रीसेट किया गया है। 19 बार आगे बढ़ाया गया और 8 बार पीछे किया गया।1991 में यह विनाश से 17 मिनट दूर थी, 2020 में 100 सेकंड, 2023 और 24 में 90 सेकंड, 2025 में 89 और अब 27 जनवरी 2026 को 85 सेकंड दूर।
राजस्थान
पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 21 फरवरी 2026 को प्रकाशित
Saturday, February 14, 2026
क्रिकेट के नियम कौन बनाता है?
हाल में मेरीलेबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने खेल के 73 नियमों में बदलाव किए हैं, जिससे खेल से जुड़ी बहुत सी बातें बदल गई हैं। हालाँकि इंटरनेशनल क्रिकेट कौंसिल (आईसीसी) क्रिकेट का वैश्विक शासी निकाय है, पर खेल के नियम एमसीसी के होते हैं। उनका कॉपीराइट एमसीसी के पास है, जिन्हें आईसीसी लागू करवाता है। आईसीसी प्लेइंग कंडीशंस तय करता है, जैसे डीआरएस, पावर प्ले, ओवर की समय-सीमा वगैरह। 1788 में एमसीसी ने क्रिकेट का पहला कोड बनाया था। इसके बाद 1835, 1884, 1947, 1980, 1992 और 2000 में कोड में संशोधन किया गया। इन नियमों का सातवाँ और अंतिम संस्करण 2017 में जारी किया गया था। नवीनतम परिवर्तन 2022 में हुए थे। एमसीसी निजी क्लब है, पहले यह इंग्लैंड की टीम का प्रतिनिधि क्लब था। इंग्लैंड से बाहर जाने वाली टीम एमसीसी के नाम से जाती थी। 1996-97 के न्यूज़ीलैंड दौरे में इंग्लैंड की टीम आखिरी बार एमसीसी नाम से गई। आईसीसी की स्थापना 1909 में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ़्रीका के प्रतिनिधियों ने इंपीरियल क्रिकेट कॉन्फ्रेंस नाम से की। 1965 में, इसे इंटरनेशनल क्रिकेट कॉन्फ्रेंस कर दिया गया। वर्तमान नाम 1987 में अपनाया गया। इसका मुख्यालय दुबई में है।
राजस्थान
पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित
Saturday, February 7, 2026
पदार्थ, जो ठोस है और द्रव भी
वैज्ञानिकों ने हाल में पदार्थ की ऐसी नई अवस्था खोजी है, जिसमें ठोस और द्रव दोनों की विशेषताएँ हैं। इसे ‘हाइब्रिड’ अवस्था कहा जा रहा है, जहाँ कुछ परमाणु स्थिर रहते हैं (जैसे ठोस में) जबकि अन्य गतिशील रहते हैं (जैसे द्रव में)। यह खोज यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम (यूके) और यूनिवर्सिटी ऑफ उल्म (जर्मनी) के शोधकर्ताओं ने की है, जो पिघले हुए धातु के नैनो-कणों पर आधारित है। यह अवस्था सामान्य ठोस-द्रव के बीच की है। इसकी मदद से इलेक्ट्रॉनिक्स और निर्माण उद्योग में नई चीजें बन सकती हैं। कुछ ऐसा ही पदार्थ ‘सुपरआयनिक आइस’ भी है, जिसमें ऑक्सीजन ठोस और हाइड्रोजन द्रव रूप में होती है। यह अवस्था सामान्य बर्फ से अलग है। इसे ‘काला और गर्म बर्फ’ भी कहते हैं, क्योंकि इसका रंग काला होता है और बहुत उच्च तापमान पर स्थिर रहता है। यह अवस्था पृथ्वी पर प्राकृतिक रूप से नहीं मिलती। इसके लिए करीब 20-60 जीपीए (गीगा पास्कल) दबाव की ज़रूरत होगी, जो पृथ्वी के वायुमंडलीय दबाव से लाखों गुना अधिक है। एक जीपीए लगभग 10,000 वायुमंडलीय दबाव के बराबर होता है। माना जा रहा है कि ब्रह्मांड में पानी इस अवस्था में मिलेगा।
राजस्थान
पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 7 फरवरी 2026 को प्रकाशित
Saturday, January 31, 2026
आईएमएफ और विश्व बैंक में क्या फर्क है
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक दोनों ही ब्रेटन वुड्स सम्मेलन (1944) में स्थापित संस्थाएं हैं। इनके उद्देश्य और कार्य अलग-अलग हैं। आईएमएफ वैश्विक मौद्रिक स्थिरता पर केंद्रित है, जबकि विश्व बैंक विकासशील देशों में गरीबी उन्मूलन और सतत विकास पर फोकस करता है। मुद्राकोष का काम है वैश्विक मौद्रिक सहयोग को बढ़ावा देना, वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना, अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुविधाजनक बनाना वगैरह। इसके लिए वह मैक्रोइकॉनोमिक और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करता है। जब सदस्य देश संकट में आते हैं, तब उन्हें अल्पावधि ऋण प्रदान करता है। ऐसा करते हुए वह नीतिगत सलाह देता है और अपनी शर्तें भी लगाता है। विश्व बैंक का काम है गरीबी उन्मूलन, सतत विकास को बढ़ावा देना, और समृद्धि को बढ़ाना। दोनों आपस में समन्वय रखते हैं। राजनीतिक दृष्टि से दोनों पर अमेरिका और यूरोप का वर्चस्व है। विश्वबैंक का अध्यक्ष पारंपरिक रूप से अमेरिकी नागरिक होता है, जिसे अमेरिका नामित करता है। अमेरिका ही बैंक का सबसे बड़ा शेयरधारक है। आईएमएफ का प्रबंध निदेशक हमेशा यूरोपीय होता है, पर यह अलिखित परंपरा है, न कि औपचारिक नियम। बदलते आर्थिक परिदृश्य के कारण भविष्य में इसमें बदलाव संभव है।
राजस्थान
पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 31 जनवरी, 2026 को प्रकाशित
Saturday, January 24, 2026
ग्रोकीपीडिया क्या है?
एलन मस्क की कंपनी एक्सएआई ने एआई-पावर्ड ऑनलाइन एनसाइक्लोपीडिया तैयार किया है, जिसका नाम ग्रोकीपीडिया है। इससे तथ्यों की खोज में एआई की संभावनाओं का पता भी लगेगा। विकीपीडिया का संकलन मनुष्य करते हैं, जबकि इसमें एआई यह काम करता है। 27 अक्टूबर 2025 को इसका वर्ज़न 0.1 लॉन्च किया गया था, जो अब 0.2 है। एक्सएआई के ग्रोक एआई मॉडल के अनुसार यह जानकारी को तेजी से और ‘ट्रुथफुल’ (सत्य) अपडेट करता है। शुरुआत में इसके कई आलेख विकिपीडिया से, क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेंस के तहत, सीधे लिए गए हैं। कुछ में बदलाव भी किए गए हैं। लॉन्च के समय इसमें 8.85 लाख लेख थे, जो अब साठ लाख से ऊपर हैं। एलन मस्क का कहना है कि विकिपीडिया में ‘लेफ्ट-विंग बायस’ (वामपंथी पक्षधरता) है, पर ग्रोकीपीडिया ज्यादा निष्पक्ष और तथ्य-आधारित होगा। यह वैबसाइट grokipedia.com पर उपलब्ध है, जहाँ सर्च बार से टॉपिक सर्च कर सकते हैं। यह सर्च केवल अंग्रेजी में उपलब्ध है। शुरुआती रिपोर्ट्स कहा गया कि इसके कुछ लेखों में तथ्यात्मक गलतियां हैं, स्रोत कम हैं, या राइट-विंग दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया गया है। अभी तक किसी और संस्था ने ऐसा पूर्ण एआई-जेनरेटेड विश्वकोश लॉन्च नहीं किया है।
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 24 जनवरी 2026 को प्रकाशित
Sunday, January 18, 2026
बजट सत्र दो हिस्सों में क्यों?
संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। इसका पहला चरण 13 फरवरी को समाप्त होगा, और 9 मार्च को फिर से शुरू होकर 2 अप्रैल तक जारी रहेगा। क्या आपने कभी सोचा कि बजट सत्र के दो हिस्से क्यों होते हैं? सामान्यतः हर साल संसद के तीन सत्र होते हैं। बजट (जनवरी-अप्रैल), मॉनसून (जुलाई-अगस्त) और शीतकालीन (नवंबर-दिसंबर)। इन तीन के अलावा संसद के विशेष सत्र भी बुलाए जा सकते हैं। बजट अधिवेशन को दोनों हिस्सों के बीच तीन से चार सप्ताह का अवकाश होता है। इस दौरान स्थायी समितियाँ विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान माँगों पर विचार करती हैं। बजट सत्र के पहले दिन दोनों सदनों के समक्ष राष्ट्रपति का अभिभाषण होता है, जिसमें उन नीतियों एवं कार्यक्रमों का विवरण होता है जिन्हें सरकार लागू करना चाहती है। इसके साथ ही पहले वर्ष की गतिविधियों और उपलब्धियों का विवरण होता है। हरेक अधिवेशन की अंतिम तिथि के बाद छह मास के भीतर आगामी अधिवेशन के लिए सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करना होता है। सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करने की शक्ति राष्ट्रपति में निहित है, पर व्यवहार में इसकी पहल सरकार करती है।
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित
Saturday, January 10, 2026
डार्क एनर्जी और डार्क मैटर
डार्क एनर्जी और डार्क मैटर ब्रह्मांड के दो रहस्यमय घटक हैं, जो अदृश्य हैं फिर भी ब्रह्मांड के व्यवहार पर गहरा असर डालते हैं। डार्क मैटर का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव होता है। यह निहारिकाओं और निहारिका समूहों को एक साथ बाँधे रखता है, जिससे वे बिखरते नहीं हैं। 1998 में वैज्ञानिकों ने सुदूर निहारिकाओं में टाइप एलए सुपरनोवा का अध्ययन किया, तो पता लगा कि ब्रह्मांड का विस्तार बजाय धीमा होने के तेज़ हो रहा है, जबकि गुरुत्वाकर्षण के कारण विस्तार धीमा होना चाहिए, तब उन्होंने एक प्रतिकारक बल की परिकल्पना की, जिसे डार्क एनर्जी नाम दिया गया। यही रहस्यमय ऊर्जा, ब्रह्मांड के विस्तार की गति को लगातार बढ़ा रही है। कई भौतिकविद मानते हैं कि ब्रह्मांड का संपूर्ण दृश्य भाग इसमें मौजूद सभी पदार्थों का केवल 5 प्रतिशत है, और शेष 95 प्रतिशत डार्क मैटर और डार्क एनर्जी से बना है। विभिन्न अप्रत्यक्ष अवलोकनों और गणनाओं के माध्यम से यह स्पष्ट होने लगा, तो इन मायावी कणों की खोज के लिए प्रयोग किए जाने लगे। वैज्ञानिकों को अभी इस सिलसिले में डेटा का इंतज़ार है। अमेरिका के साउथ डकोटा में लक्स-ज़ेपलिन दुनिया का सबसे संवेदनशील डार्क मैटर डिटेक्टर है।
Saturday, January 3, 2026
हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य
यूनाइटेड किंगडम में हाउस ऑफ कॉमन्स के सदस्य चुनकर आते हैं, वहीं हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य चुने नहीं जाते, मुख्यतः नियुक्त किए जाते हैं। इनके दो मुख्य वर्ग हैं। लॉर्ड्स स्पिरिचुअल (अध्यात्मिक सदस्य) और लॉर्ड्स टेम्पोरल (सांसारिक सदस्य)। 26 लॉर्ड्स स्पिरिचुअल, चर्च ऑफ इंग्लैंड के वरिष्ठ बिशप। पहले दो कैंटरबरी और यॉर्क के आर्कबिशप। इसके बाद 24 बिशप, जो वरिष्ठता के आधार पर पदेन सदस्य बनते हैं। बिशप बनते ही सदस्यता मिल जाती है, और रिटायरमेंट पर समाप्त हो जाती है। लॉर्ड्स टेम्पोरल, मुख्य सदस्य हैं, जिनकी संख्या लगभग 800 है (दिसंबर 2025 तक कुल सदस्यता करीब 800-822)। इनमें शामिल हैं लाइफ पीअर्स, जो आजीवन सदस्य होते हैं, लेकिन उनकी उपाधि वंशानुगत नहीं होती। इनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर राजा करते हैं। राजनीतिक सदस्य, मुख्य पार्टियाँ (कंजर्वेटिव, लेबर आदि) अपने उम्मीदवार सुझाती हैं। गैर-राजनीतिक सदस्यों के नाम एक स्वतंत्र संस्था हाउस ऑफ लॉर्ड्स अपॉइंटमेंट्स कमीशन सुझाती है। जनता भी नाम सुझा सकती है। ये विशेषज्ञता के आधार पर आते हैं। हेरेडिटरी पीअर्स (वंशानुगत सदस्य): पहले सैकड़ों थे, लेकिन 1999 के हाउस ऑफ लॉर्ड्स एक्ट के बाद केवल 92 बचे हैं। शाही उपाधियाँ, अब नई वंशानुगत उपाधियाँ नहीं दी जातीं।
राजस्थान
पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 3 जनवरी, 2026 को प्रकाशित
Subscribe to:
Posts (Atom)











