Friday, December 25, 2015

दिल्ली का इंडिया गेट क्यों और कब बनाया गया था?

नई दिल्ली के राजपथ पर स्थित 43 मीटर ऊँचा द्वार है वह भारत का राष्ट्रीय स्मारक है. यह सर एडविन लुटियन द्वारा डिजाइन किया गया था. इसकी बुनियाद ड्यूक ऑफ कनॉट ने 1921 में रखी थी और 1931 में तत्कालीन वायसरॉय लॉर्ड इरविन ने इसका उद्घाटन किया. मूल रूप से इस स्मारक का निर्माण उन 70,000 ब्रिटिश भारतीय सेना के सैनिकों की स्मृति में हुआ था जो प्रथम विश्वयुद्ध और अफ़ग़ान युद्धों में शहीद हुए थे. उनके नाम इस स्मारक में खुदे हुए हैं. यह स्मारक लाल और पीले बलुआ पत्थरों से बना हुआ है .

शुरु में इंडिया गेट के सामने अब खाली चंदवे के नीचे जॉर्ज पंचम की एक मूर्ति थी, लेकिन बाद में अन्य ब्रिटिश दौर की मूर्तियों के साथ इसे कॉरोनेशन पार्क में हटा दिया गया. भारत की स्वतंत्रता के बाद, इंडिया गेट पर भारतीय सेना के अज्ञात सैनिक का स्मारक मकबरे भी बनाया गया. इसे अमर जवान ज्योति के रूप में जाना जाता है. सन 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के शहीद सैनिकों की स्मृति में यहाँ एक राइफ़ल के ऊपर सैनिक की टोपी सजाई गई है जिसके चार कोनों पर सदैव अमर जवान ज्योति जलती रहती है. इसकी दीवारों पर हजारों शहीद सैनिकों के नाम खुदे हैं.

भारत में चंदन के पेड़ कहाँ पाए जाते हैं?


भारतीय चंदन का संसार में सर्वोच्च स्थान है. इसका आर्थिक महत्व भी है. यह पेड़ मुख्यत: कर्नाटक के जंगलों में मिलता है तथा देश के अन्य भागों में भी कहीं-कहीं पाया जाता है. भारत के 600 से लेकर 900 मीटर तक कुछ ऊँचे स्थल और मलयद्वीप इसके मूल स्थान हैं. वृक्ष की आयुवृद्धि के साथ ही साथ उसके तनों और जड़ों की लकड़ी में सुगंधित तेल का अंश भी बढ़ने लगता है. इसकी पूर्ण परिपक्वता में 60 से लेकर 80 वर्ष तक का समय लगता है. इसके लिए ढलवाँ जमीन, जल सोखने वाली उपजाऊ चिकनी मिट्टी तथा 500 से लेकर 625 मिमी. तक वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है.

भारत में हीरे की खानें कहाँ है?

भारत में आंध्र प्रदेश के गोलकुंडा और तमिलनाडु के कोल्लूर तथा मध्य प्रदेश के पन्ना और बुंदर में हीरा खानें हैं. भारत के हीरे एक ज़माने में विश्व प्रसिद्ध थे. गोलकुंडा से 185 कैरेट का दरिया-ए नूर हीरा ईरान गया था. भारत के सबसे बड़े हीरे की बात करें तो नाम आता है ग्रेट मुगल का. गोलकुंडा की खान से 1650 में जब यह हीरा निकला तो इसका वजन 787 कैरेट था. कोहिनूर से करीब छह गुना भारी.

कहा जाता है कि कोहिनूर भी ग्रेट मुगल का ही एक अंश है. 1665 में फ्रांस के जवाहरात के व्यापारी ने इसे अपने समय का सबसे बड़ा रोजकट हीरा बताया था. यह हीरा आज कहां है किसी को पता नहीं. लंबे समय से गुमनाम भारतीय हीरों की सूची में आगरा डायमंड और अहमदाबाद डायमंड भी शामिल हैं. अहमदाबाद डायमंड को बाबर ने 1526 में पानीपत की लड़ाई के बाद ग्वालियर के राजा विक्रमजीत को हराकर हासिल किया था. तब 71 कैरेट के इस हीरे को दुनिया के 14 बेशकीमती हीरों में शुमार किया जाता था.

हल्की गुलाबी रंग की आभा वाले 32.2 कैरेट के आगरा डायमंड को हीरों की ग्रेडिंग करने वाले दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ अमेरिका ने वीएस-2 ग्रेड दिया है. द रीजेंट की कहानी भी कुछ ऐसी ही हैं. 1702 के आसपास यह हीरा गोलकुंडा की खान से निकला. तब इसका वजन 410 कैरेट था. मद्रास के तत्कालीन गवर्नर विलियम पिट के हाथों से होता हुआ द रीजेंट फ्रांसीसी क्रांति के बाद नेपोलियन के पास पहुंचा. नेपोलियन को यह हीरा इतना पसंद आया कि उसने इसे अपनी तलवार की मूठ में जड़वा दिया. अब 140 कैरेट का हो चुका यह हीरा पेरिस के लूव्र म्यूजियम में रखा गया है.

गुमनाम भारतीय हीरों की लिस्ट में अगला नाम है ब्रोलिटी ऑफ इंडिया. 90.8 कैरेट के ब्रोलिटी को कोहिनूर से भी पुराना बताया जाता है. 12वीं शताब्दी में फ्रांस की महारानी में इसे खरीदा. कई सालों तक गुमनाम रहने के बाद यह हीरा 1950 में सामने आया. जब न्यूयॉर्क के जूलर हेनरी विन्सटन ने इसे भारत के किसी राजा से खरीदा. आज यह हीरा यूरोप में कहीं है.

शादियों या पार्टियों के कार्ड में नीचे लिखा रहता है RSVP. इसका मतलब क्या है?

रेस्पांदे सी वु प्ले (Respondez Sil Vous Plait). इस फ्रेंच वाक्यांश में विनम्रता से पूछा गया है कृपया बताएं आ रहे हैं या नहीं.

विश्व की सबसे लम्बी कविता कौन सी है?

माना जाता है कि महाभारत दुनिया की सबसे लम्बी कविता है. इसमें एक लाख से ज्यादा श्लोक हैं और लगभग बीस लाख शब्द हैं. प्रसिद्ध ग्रीक महाकाव्य इलियाड और ओडिसी को एक साथ मिला लें तब भी महाभारत उनसे दस गुना बड़ा ग्रंथ साबित होगा.

फैट जीन क्या है?

ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने ‘एफटीओ’ नामक विशेष कोशिका खोज निकाली है, जिसकी वजह से खासकर भारतीय मूल के लोगों में मोटापा, हृदयघात और मधुमेह जैसी बीमारियां देखने को मिलती हैं. इस खास जीन से यह भी जानकारी मिलेगी कि एक प्रकार की जीवनशैली के बावजूद कुछ लोगों का शरीर दुरुस्त रहता है, लेकिन कुछ मोटे हो जाते हैं. “जिनके शरीर में यह खास किस्म का जीन पाया जाता है, उन्हें अगर एक प्रकार का आहार दिया जाए, तो वह उन लोगों के मुकाबले अपना वजन बढ़ा हुआ महसूस करते है, जिनके शरीर में यह जीन नहीं होता है.”

मोटापे का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिकों का कहना है कि शरीर में चर्बी बढ़ने के लिए जीन जिम्मेदार है. वैज्ञानिकों का यह भी दावा है कि इस जीन को खोज लिया गया है, जो कोशिकाओं में चर्बी जमा होने के लिए जिम्मेदार हैं. खोज से अनेक बीमारियों के उपचार और छुटकारा पाने की संभावना जताई गई है. फिट-1 व फिट-2 (फैट इंड्यूसिंग ट्रांसक्रिप्ट 1-2) नामक जीन की पहचान की है. इन दोनों जीनों में 50 प्रतिशत तक समानता है. इस विषय पर ताजा जानकारी यहाँ मिल सकती है http://www.usatoday.com/story/news/health/2015/08/19/obesity-gene/32026927/

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