Sunday, July 19, 2015

नोटों पर महात्मा गांधी की फोटो कब से और क्यों?

नोटों पर महात्मा गांधी की फोटो कब से लगाई गई और क्यों?
अमित कुमार नामदेव, amitsmart330@gmail.com


नोटों पर राष्ट्रीय नेताओं के चित्र लगाने की परम्परा दुनिया भर में है। महात्मा गांधी हमारे देश के सबसे सम्मानित महापुरुषों में एक हैं, इसलिए उनका चित्र लगाया जाता है। नोटों की वर्तमान सीरीज़ को महात्मा गांधी या एमजी सीरीज़ कहा जाता है। इन नोटों को जाली नोटों से अलग रखने के लिए इनकी कास तरह की छपाई की गई है। यह 1996 से चल रही है। शुरू में 10 और 500 रुपए के नोट इस सीरीज़ में आए थे। अब 5 से 1000 तक नोट इस सीरीज़ में आ रहे हैं। कुछ समय के लिए इन्हें रोका गया था, पर 2009 में इन्हें फिर से शुरू कर दिया गया। इस विषय पर और अधिक जानकारी पाने के लिए रिजर्व बैंक की इस साइट पर जाएं
https://www.rbi.org.in/currency/FAqs.html


क्या अंतरिक्ष यान में पेंसिल लेकर नहीं जा सकते?

इंटरनेट पर इस आशय की कहानियाँ देखी जा सकती हैं, जिनके अनुसार अंतरिक्ष यान में पेंसिल लेकर नहीं जा सकते। ऐसा नहीं है। समस्या यह थी कि गुरुत्वहीनता की स्थिति में पेन के रिफिल में मौजूद स्याही बाहर नहीं निकल पाती थी। ऐसे में पेंसिल ही लिखने के लिए बेहतर विकल्प था, जिसकी मदद से किसी भी स्थिति में लिखा जा सकता है। एक समय तक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री पेंसिल लेकर जाते थे। पर उसके कुछ खतरे थे। पेंसिल कार्बन से बनती है। अंतरिक्ष में कार्बन के टूटकर बिखरने का खतरा होता है। ऐसा होने पर वह इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में जा सकता है, जिससे पूरी उड़ान खतरे में आ सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए नासा ने सन 1965 में एक कम्पनी से विशेष पेन बनवाए थे। सन 1965 में पॉल सी फिशर नाम के एक वैज्ञानिक ने एक खास तरह के पेन का आविष्कार किया था, जो गुरुत्वहीनता की स्थिति में भी काम कर सकता था। इसे एंटी ग्रेविटी पेन कहा गया। नए विशेष पेन में अंदर से स्याही पर दबाव डालकर उसे बाहर पम्प किया जा सकता था। सन 1967 अपोलो-1 यान में आग लगने के बाद नासा ने इस एंटी ग्रेविटी पेन का परीक्षण किया और उसे अंतरिक्ष यात्रा के लिए स्वीकार कर लिया।

मधुमक्खी के काटने से हमें तीखी जलन का एहसास क्यों होता है?

मधुमक्खी जब डंक मारती है तो एपिटॉक्सिन और फेरोमोंस दो रसायन छोड़ती है। दरअसल मधुमक्खी डंक मारना नहीं चाहती। वह डंक तभी मारती है जब या तो उसपर हमला हो या उसके छत्ते पर। एपिटॉक्सिन से जलन होती है। फेरोमोंस से दूसरी मक्खियों को सावधान किया जाता है। ताकि हमला होने पर उसकी रक्षा के लिए दूसरी मक्खियाँ आ जाएं।

नींद आने पर हमारी आँखें क्यों बंद हो जाती हैं?

हालांकि कुछ लोग आँखें खोलकर भी सो सकते हैं और कुछ लोग नींद में चलते भी हैं, पर सोते वक्त आँखें बंद करने के जो मोटे कारण समझ में आते हैं वे इस प्रकार हैः- सोने का काम दिमाग करते है, पर आवाजें और रोशनी दिमाग को अटकाए रखतीं हैं। दिमाग को सोने का संकेत देने के लिए हमें रोशनी और आवाजों से दूर जाना होता है। आँख बंद करने से विजुअल इनपुट कम हो जाता है। सोते समय कोई बाहरी चीज़ आँख में न चली जाए या आँखें सूख न जाएं, इसलिए भी आँखों को बंद करना होता है।

भारत में कुल कितने गाँव हैं?
सन 2011 की जनगणना के अनुसार हमारे देश में गाँवों की संख्या 6,38,000 है।
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

2 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन 100वीं बुलेटिन रिपोर्ट - हर्षवर्धन श्रीवास्तव में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  2. :) सुंदर जानकारी पर तैयार रहें

    आगे कभी ये भी लिखना पढ़ सकता है
    नोटों से महात्मा गांधी की फोटो कब हटाई गई और क्यों?

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