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Sunday, April 20, 2025

‘गिरमिटिया’ प्रथा क्या थी?

सत्रहवीं सदी में अंग्रेज़ों ने भारत से मजदूरों को विदेश ले जाकर उनसे काम कराना शुरू किया। इन मज़दूरों को ‘गिरमिटिया’ कहा गया। गिरमिट शब्द अंग्रेजी के `एग्रीमेंट' शब्द का बिगड़ा हुआ रूप है। जिस कागज पर अँगूठे का निशान लगवाकर मज़दूर भेजे जाते थे, उसे मज़दूर और मालिक `गिरमिट' कहते थे। हर साल 10 से 15 हज़ार मज़दूर गिरमिटिया बनकर फिजी, ब्रिटिश गुयाना, डच गुयाना, ट्रिनीडाड, टोबेगो, दक्षिण अफ्रीका आदि जाते थे। यह प्रथा 1834 में शुरू हुई थी और 1917 में इसे खत्म कर दिया गया। इस प्रथा के विरुद्ध महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका से अभियान प्रारंभ किया। भारत में गोपाल कृष्ण गोखले ने इंपीरियल लेजिस्लेटिव कौंसिल में मार्च 1912 में गिरमिटिया प्रथा समाप्त करने का प्रस्ताव रखा। कौंसिल के 22 सदस्यों ने तय किया कि जब तक यह अमानवीय प्रथा खत्म नहीं की जाती तब तक वे हर साल यह प्रस्ताव पेश करते रहेंगे। दिसंबर 1916 में कांग्रेस अधिवेशन में महात्मा गांधी ने भारत सुरक्षा और गिरमिट प्रथा अधिनियम प्रस्ताव रखा। बढ़ते आक्रोश को देखते हुए सरकार ने 12 मार्च, 1917 इस प्रथा को खत्म करने का आदेश गजट में प्रकाशित कर दिया। 

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 19 अप्रेल, 2025 को प्रकाशित





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