Wednesday, August 10, 2022

लाल सागर लाल और काला सागर क्या काला है?


रेड सी(लाल सागर) के पानी का रंग लाल नहीं है। और काले सागर का पानी काला नहीं। दोनों के इन नामों के अलग-अलग कारण हैं। लाल सागर अफ्रीका और एशिया के बीच सागर की संकीर्ण पट्टी का नाम है। इसका यूनानी नाम एरिथ्रा थलासालैटिन नाम मेयर रूब्रुमऔर अरबी नाम टिग्रीन्या है। कहते हैं कि इस इलाके के पथरीले पहाड़ों के कारण इसका नाम लाल सागर है। इन पहाड़ों को हरेई ईडाम कहते हैं। हिब्रू भाषा में ईडाम लाल चेहरे वाले एक व्यक्ति का नाम है। इससे बेहतर स्पष्टीकरण यह है कि इसके पास के रेगिस्तान को प्राचीन मिस्र में दशरेत कहते थे। जिसका अर्थ था लाल ज़मीन। लाल ज़मीन के पास के सागर को शायद इसीलिए लाल कहा गया।

काला सागर इस लाल सागर के उत्तर पश्चिम में है। काला सागर यूरोपकॉकेशस और एशिया माइनर(एशिया का सबसे पश्चिमी छोर) के बीच है। यह चारों ओर ज़मीन से घिरा सागर हैजो भूमध्य सागर से मिलता है। इसके चारों ओर बुल्गारियारोमानियायूक्रेनजॉर्जिया और तुर्की हैं। तुर्की में कारा या काला शब्द उत्तर के लिए प्रयुक्त होता है। तुर्की के उत्तर में काला सागर है। इसका नाम काला होने के दूसरे कारण भी हैं। एक तो ऑक्सीजन की कमी से इसके पानी में सूक्ष्म जीवाणुओं(माइक्रो ऑर्गेनिज्म) की संख्या कम है। इससे यह थोड़ा कालापन लिए है। दूसरे इस इलाके में सर्दियों में जबर्दस्त कोहरा रहता है। इससे सागर का रंग काला लगता है।

नॉलेज कॉर्नर में 26 मार्च 2022 को प्रकाशित

रेनबो डाइट क्या होती है?

रेनबो डाइट का शाब्दिक अर्थ है इन्द्रधनुषी डाइट। यानी इन्द्रधनुष को रंगों का भोजन। व्यावहारिक मतलब है तरह-तरह के रंगों के फलों और सब्जियों का भोजन जो स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन होता है। फलों और सब्जियों के तमाम रंग होते हैं और हर रंग का अपना गुण होता है।

मैकमोहरेखा क्या होती है?

मैकमोहन या मैकमहोन रेखा भारत और तिब्बत के बीच सीमा रेखा है। सन् 1914 में भारत की तत्कालीन ब्रिटिश सरकार और तिब्बत के बीच शिमला समझौते के तहत यह रेखा तय की गई थी। 1914 के बाद कई साल तक इस रेखा को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ, पर 1937 में ओलफ केरो नामक एक अंग्रेज प्रशासनिक अधिकारी ने तत्कालीन अंग्रेज सरकार को इसे आधिकारिक तौर पर लागू करने का अनुरोध किया। 1937 में सर्वे ऑफ इंडिया के एक मानचित्र में मैकमहोन रेखा को आधिकारिक भारतीय सीमारेखा के रूप में पर दिखाया गया था। इस सीमारेखा का नाम सर हैनरी मैकमहोन के नाम पर रखा गया था, जिनकी इस समझौते में महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। वे भारत की तत्कालीन अंग्रेज सरकार के विदेश सचिव थे।

महाभारत में अक्षय पात्र क्या था?

महाभारत मे अक्षय पात्र का जिक्र आता है| पांचों पांडव द्रौपदी के साथ बारह वर्षों के लिए वनवास जाते हैं। जंगल में प्रवास करते हुए सैकडों साधु-संत और धर्मात्मा पुरूष उनके साथ हो जाते हैं। सवाल था, वे छ प्राणी अकेले भोजन कैसे करें, और उन सैकडों हजारों के लिए भोजन कहां से आए?

Tuesday, March 1, 2022

इंडो-चायना कहाँ है?

 इंडो-चायना या हिन्द-चीन प्रायद्वीप दक्षिण पूर्व एशिया का एक उप क्षेत्र है। यह इलाक़ा चीन के दक्षिण-पश्चिम और भारत के पूर्व में पड़ता है। इसके अंतर्गत कम्बोडिया, लाओस और वियतनाम को रखा जाता है, पर वृहत् अर्थ में म्यांमार, थाईलैंड, मलय प्रायद्वीप और सिंगापुर को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। यह नाम जहाँ भौगोलिक उपस्थिति को बताता है, वहीं इस इलाके की सांस्कृतिक संरचना को भी दर्शाता है। अतीत में इस नाम का ज्यादातर इस्तेमाल इस इलाके के फ्रांसीसी उपनिवेश इंडो-चाइना (वियतनाम, कम्बोडिया और लाओस) के लिए हुआ। भारत और चीन की संस्कृतियों के प्रभाव के कारण इस इलाके का नाम हिन्द-चीन है। इस नाम का श्रेय डेनिश-फ्रेंच भूगोलवेत्ता कोनराड माल्ट-ब्रन को दिया जाता है, जिन्होंने सन 1804 में इस इलाके को इंडो-चिनॉय कहा। उनके बाद 1808 में स्कॉटिश भाषा विज्ञानी जॉन लेडेन ने इस इलाके को इंडो-चायनीस कहा।  

इस इलाके में बड़ी संख्या में चीन से आए लोग रहते हैं, पर सांस्कृतिक रूप से भारत का यहाँ जबर्दस्त प्रभाव है। प्राचीनतम संपर्क के प्रमाण म्यांमार की पहली सदी की प्‍यू बस्तियों के उत्खनन में देखे जा सकते हैं। प्‍यू वास्तुकला, सिक्कों, हिंदू देवी-देवताओं और बुद्ध की मूर्तियों और पुरालेख में देखे जा सकते हैं। अंगकोरवाट एवं ता प्रोह्म जैसे कंबोडिया के विख्यात मंदिरों के अलावा मध्‍य थाईलैंड का द्वारावती साम्राज्य छठी सदी से लेकर 13 वीं सदी फला-फूला।  

भारत का सबसे पुराना बैंक?

अठारहवीं सदी के अंतिम दशक में देश के पहले दो बैंक खुले थे। इनके नाम थे जनरल बैंक ऑफ इंडिया, जो 1786 में खुला और दूसरा बैंक था बैंक ऑफ हिन्दुस्तान जो 1790 में शुरू हुआ। दोनों बैंक बंद हो गए। देश के सक्रिय बैंकों में सबसे पुराना बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया है, जो जून 1806 में बैंक ऑफ कैलकटा के नाम से शुरू हुआ। इसका नाम बाद में बैंक ऑफ बंगाल हो गया। उस वक्त देश में इसके अलावा दो प्रेसीडेंसी बैंक और खुले जिनके नाम थे बैंक ऑफ बॉम्बे और बैंक ऑफ मद्रास। सन 1921 में तीनों बैंकों को मिलाकर इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया बनाया गया। देश के स्वतंत्र होने पर इसका नाम हुआ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Wednesday, February 2, 2022

विश्व आर्द्रता-दिवस


आज यानी 2 फरवरी को विश्व आर्द्र-भूमि दिवस (World Wetlands Day) है। इसका उद्देश्य ग्लोबल वॉर्मिंग का सामना करने में आर्द्र-भूमि जैसे दलदल तथा मंग्रोव के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना है।

आर्द्र-भूमि प्राकृतिक व कुशल कार्बन सिंक के रूप में कार्य करती है। उदाहरण के लिए भूमि के केवल 3% हिस्से पर दलदली काई फैली है, परन्तु यह विश्व भर के सभी वनों के मुकाबले दुगनी मात्रा में कार्बन को सोखने की क्षमता रखती है।
आर्द्र-भूमि जलवायु सम्बन्धी आपदाओं के विरुद्ध बफर के रूप में कार्य करती हैं, इससे जलवायु परिवर्तन के आकस्मिक प्रभावों से बचा जा सकता है।
विश्व आर्द्र-भूमि दिवस का उद्देश्य आर्द्र-भूमि के संरक्षण की ओर ध्यान केन्द्रित करना है जो मानव गतिविधि से प्रभावित हो सकता है। आर्द्र-भूमि के नष्ट होने की दर लगभग 1% है जो वनों के नष्ट होने की दर से काफी अधिक है। 2 फरवरी, 1971 को ईरान के शहर रामसर में रामसर कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए गए थे, इसका उद्देश्य आर्द्र-भूमि के संरक्षण के लिए कार्य करना है।

Friday, January 7, 2022

गिटहब और बुल्ली बाई विवाद


बुल्ली बाई विवाद के दौरान बार-बार इंटरनेट प्लेटफॉर्म गिटहब (GitHub) का नाम आता है। पिछले साल सुल्ली डील्स का जिक्र जब हुआ था, तब भी इसका नाम आया था। आज के मिंट में इसके बारे में बताया गया है।

बुल्ली बाई विवाद

बुल्ली बाई एक सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन है, जो ऑनलाइन नीलामी को सिम्युलेट करती है। यानी नीलामी जैसी परिस्थितियाँ बनाती हैं। दूसरे एप्स की तरह यह गूगल या एपल एप स्टोर पर यह उपलब्ध नहीं है। इसे कोड रिपोज़िटरी और सॉफ्टवेयर कोलैबरेशन प्लेटफॉर्म पर, जिसका नाम गिटहब है, होस्ट किया गया है। इसमें 100 से ज्यादा मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है, जो इंटरनेट से हासिल की गई हैं। इसमें इन्हें नीलामी में बोली लगाकर बेचने का नाटक किया गया है। यह नीलामी वस्तुतः फर्जी है। इसमें इस्तेमाल हुए बुल्ली और सुल्ली शब्द अपमानजनक हैं।

गिटहब क्या है?

गिटहब सबसे बड़ा कोड रिपोज़िटरी और सॉफ्टवेयर कोलैबरेशन प्लेटफॉर्म है, जिसका इस्तेमाल डेवलपर, स्टार्टअप, बल्कि कई बार बड़ी टेक्नोलॉजी कम्पनियाँ भी करती हैं, ताकि किसी एप को विकसित करने में कोडिंग से जुड़े लोगों की मदद ली जा सके। माइक्रोसॉफ्ट कॉरपोरेशन, मेटा प्लेटफॉर्म इनकॉरपोरेट (फेसबुक) और गूगल एलएलसी भी अपने कोड गिटहब पर उपलब्ध कराते हैं, ताकि दूसरे लोग चाहें, तो उनका इस्तेमाल कर लें। माइक्रोसॉफ्ट ने 2018 में गिटहब को 7.5 अरब डॉलर की कीमत देकर खरीदा था। इस प्लेटफॉर्म पर गूगल के एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम के सोर्स कोड भी उपलब्ध हैं। फेसबुक के एंड्रॉयड और आईओएस एप्स के सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट्स भी यहाँ उपलब्ध हैं।

कोड रिपोज़िटरी क्या करती हैं?

रिपोज़िटरी शब्द का अर्थ है कोश, भंडार या संग्रह। कोड रिपोज़िटरी से आशय है, वह स्थान जहाँ लोग अपने कोड रख देते हैं, ताकि जो दूसरे लोग किसी सॉफ्टवेयर का विकास कर रहे हैं, वे उसका लाभ उठा सकें। यानी ज्ञान को बाँटने का यह तरीका है। किसी भी स्टार्टअप को या डेवलपर को तत्काल मदद मिल जाती है। मसलन कोई डेवलपर किसी एंड्रॉयड का सोर्स कोड डाउनलोड करके अपना सॉफ्टवेयर बना सकता है। मार्च में गिटहब ने कहा था कि ओपन-सोर्स कोडिंग में नए डेवलपरों के योगदान के मामले में भारत सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिस कोड के माध्यम से बुल्ली बाई फर्जी नीलामी को होस्ट किया गया, उसका इस्तेमाल करके वास्तविक और उपयोगी ऑक्शन एप बन सकता है।

नियामक संस्थाएं क्या ऐसा दुरुपयोग रोक सकती हैं?

ऐसे मामलों को नियामक संस्थाएं रोक तो नहीं सकतीं, पर वे जाँच-प्रक्रिया को तेज कर सकती हैं। चूंकि तमाम टेक-फर्म विदेश में हैं, इसलिए पुलिस को म्यूचुअल लीगल असिस्टेंट ट्रीटी की मदद से विदेशी सरकारों से जानकारी प्राप्त करनी पड़ती है। यही कारण है कि भारत के आगामी डेटा संरक्षण विधेयक में कुछ डेटा देश के भीतर ही रखने की व्यवस्था की गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर फौरन जानकारी प्राप्त की जा सके। इतना होने पर भी भविष्य में बुल्ली बाई जैसे एप को बनने से रोका नहीं जा सकेगा।

इस विवाद में गिटहब की भूमिका क्या है?

गिटहब ने परेशान करने, भेदभाव करने और हिंसा रोकने के नियम बनाए हैं। उसने एप को होस्ट करने वाले एकाउंट को बंद कर दिया है। उसके होस्टिंग फीचर व्यापक स्तर पर वितरित नहीं होते। गिटहब से डाउनलोड किए गए एप को फिनिश्ड या पूर्ण निर्मित प्रोडक्ट नहीं कहा जा सकता। उनमें बग्स हो सकते हैं। अलबत्ता सोशल मीडिया की तरह गिटहब में फिल्टरिंग एल्गोरिद्म  नहीं होते। 

Friday, December 31, 2021

वीडियो-बॉम्बिंग

यह शब्द टीवी पत्रकारिता के विकास के साथ एक नई तरह की संस्कृति को व्यक्त करता है। किसी वीडियो में अचानक किसी ऐसे व्यक्ति का आ जाना जिसकी उम्मीद नहीं रही हो। अक्सर टीवी पत्रकार किसी विशिष्ट व्यक्ति से कैमरा पर बात करते हैं तो आसपास लोग जमा हो जाते हैं और कैमरा में अपनी शक्ल दिखाने की कोशिश करते हैं। कोशिश ही नहीं हाथों से इशारे वगैरह भी करते हैं, ताकि उनकी तरफ ध्यान जाए। किसी बड़े खिलाड़ी, नेता, अभिनेता या सेलिब्रिटी के साथ खुद को जोड़ने की कोशिश करना वीडियोबॉम्बिंग है। हाल के वर्षों में खेल के जीवंत प्रसारण के साथ ऐसे दर्शकों की तस्वीरें भी दिखाई जाने लगी है, जो अपने पहनावे, रंगत या हरकतों की वजह से अलग पहचाने जाते हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के साथ कुछ दर्शक दुनियाभर की यात्रा करते हैं और हरेक मैच में नजर आते हैं। अमेरिका के रॉलेन फ्रेडरिक स्टीवर्ट ने सत्तर के दशक में अमेरिकी खेल के मैदानों में इंद्रधनुषी रंगों के एफ्रो-स्टाइल विग पहनकर इसकी शुरुआत की थी, जिसके कारण उन्हें रेनबो मैन कहा जाता था। इसे फोटोबॉम्बिंग भी कहा जाता है।

 आईक्यू क्या होती है?

बुद्धिलब्धि या इंटेलिजेंस कोशेंट संक्षेप में आईक्यूकई तरह के परीक्षणों से प्राप्त एक गणना है जिससे बुद्धि का आकलन किया जाता है। आईक्यू या इंटेलिजेंस कोशेंट शब्द का पहली बार इस्तेमाल जर्मन मनोवैज्ञानिक विलियम स्टर्न ने 1912 में अल्फ्रेड बाईनेट और थियोडोर सिमोन द्वारा बौद्धिक परीक्षण के लिए प्रस्तावित पद्धति के लिए किया था। इस शब्द का इस्तेमाल अब भी होता है, पर अब वेचस्लेर एडल्ट इंटेलिजेंस स्केल जैसी पद्धतियों का उपयोग आधुनिक बौद्धिक परीक्षण में किया जाता है। इसमें केन्द्रीय मान (औसत आईक्यू’)100 होता है और मानक विचलन 15 होता है। हालांकि विभिन्न परीक्षणों में मानक विचलन अलग-अलग हो सकते हैं। मनोविज्ञानी कहते हैं कि 95 से 105 के बीच का आईक्यू स्कोर सामान्य है।

नीम कड़वा क्यों होता है?

नीम के तीन कड़वे तत्वों को वैज्ञानिकों ने अलग किया है, जिन्हें निम्बिन, निम्बिडिन और निम्बिनिन नाम दिए हैं। सबसे पहले 1942 में भारतीय वैज्ञानिक सलीमुज़्ज़मा सिद्दीकी ने यह काम किया। वे बाद में पाकिस्तान चले गए थे। यह कड़वा तत्व ही एंटी बैक्टीरियल, एंटी वायरल होता है और कई तरह के ज़हरों को ठीक करने का काम करता है। 

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Tuesday, December 21, 2021

बॉक्सिंग डे


बॉक्सिंग डे पश्चिमी देशों में क्रिसमस दिवस के अगले कार्यकारी दिन (वीक डे) को मनाया जाता है। बॉक्सिंग डे 26 दिसंबर को होता है, पर इन देशों में यदि क्रिसमस सप्ताहांत में हो, तो बॉक्सिंग डे की छुट्टी क्रिसमस के एक या दो दिन बाद (वीक डे पर) भी हो सकती है। हालांकि शुरू में यह दिन छुट्टी के रूप में मनाया जाता था, ताकि लोग गरीबों को उपहार दे सकें, पर अब यह शॉपिंग की छुट्टी के रूप में मनाया जाने लगा है। इसका यह नाम संभवतः उस बॉक्स के कारण है, जो गरीबों को दान देने के लिए रखा जाता था। या क्रिसमस के बाद गरीबों को उपहार देने वाले बॉक्स के कारण। इसकी शुरुआत युनाइटेड किंगडम से हुई थी, पर अब यह ब्रिटिश साम्राज्य से अतीत में जुड़े रहे तमाम देशों में मनाया जाने लगा है। बॉक्सिंग डे ईसाई संत स्टीफेंस के दिन के रूप में भी मनाया जाता है। यूरोप के कई देशों, जैसे बल्गारिया, कैटालोनिया, चेझ़िया (चेक रिपब्लिक), जर्मनी, हंगरी, नीदरलैंड्स, पोलैंड, रोमानिया, स्लोवाकिया और स्कैंडिनेविया में इसे दूसरे क्रिसमस दिवस के रूप में भी मनाते हैं।

 

Monday, November 1, 2021

कॉप 26 क्या है?


कांफ्रेंस ऑफ द पार्टीज़ या कॉप दुनिया के 200 देशों वाले यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क ऑन क्लाइमेट चेंज कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के तहत निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था है। इस बार इसकी 26वीं बैठक होने जा रही है, इसलिए इसे कॉप 26 कहा जा रहा है। यह बैठक 31 अक्तूबर से 12 नवंबर तक स्कॉलैंड के ग्लासगो शहर में हो रही है। उम्मीद है कि इस सम्मेलन में कॉप 21 के बाद पहली बार मानव-जाति जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए अपने लक्ष्यों को ऊपर करेगी। सन 2015 के पेरिस समझौते के अनुसार सभी पक्ष हरेक पाँच साल में इस विषय पर विमर्श करेंगे। इसे बोलचाल की भाषा में रैचेट मिकैनिज्म कहा जाता है। मूल योजना के तहत कॉप 26 का आयोजन नवंबर 2020 में होना चाहिए था, पर महामारी के कारण इस कार्यक्रम को एक साल के लिए टाल दिया गया।

इस समय दुनिया 2050 तक कार्बन उत्सर्जन का नेट-शून्य लक्ष्य हासिल करना चाहती है। यानी जितना कार्बन उत्सर्जित हो उतना वातावरण में पेड़ों या तकनीक के द्वारा अवशोषित कर लिया जाए। इसके अलावा वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस की अधिकतम वृद्धि तक सीमित रखना। ये लक्ष्य कैसे हासिल होंगे, इसे लेकर दुविधा है। बहरहाल जिन बातों पर सहमति है, वे हैं:-

·      सदस्यों और प्राकृतिक आवासीय क्षेत्रों के संरक्षण के लिए सदस्य देशों को एकजुट करना।

·      विकसित देशों को वादे के अनुसार 2020 तक सालाना कम से कम 100 अरब डॉलर जलवायु वित्त उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित करना

·      अंतरराष्ट्रीय वित्त संस्थाओं को वैश्विक स्तर पर नेट-शून्य उत्सर्जन सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय संसाधन मुहैया कराने के लिए तैयार करना।

सम्मेलन से क्या उम्मीदें?

·      जलवायु परिवर्तन रोकने के लक्ष्यों और सदस्य देशों की नीतियों में मौजूद अंतर दूर करने के प्रयास हो सकते हैं।

·      भारत की ओर से किसी बड़ी घोषणा की आशा।

·      कार्बन क्रेडिट की खरीद-फरोख्त के लिए कार्बन मार्केट मशीनरी बनाना।

·      सर्वाधिक जोखिम वाले देशों की क्षतिपूर्ति को वित्तीय आवंटन सुनिश्चित करना।

पेरिस समझौता

·      12 दिसंबर 2015 को 196 देशों ने बाध्यकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो 4 नवंबर 2016 से लागू हुआ है।

·      इसके तहत ग्लोबल वॉर्मिंग में वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस और आदर्श स्थिति में 1.5 डिग्री तक सीमित करना।

·      समझौते में शामिल देशों को कार्बन उत्सर्जन कटौती के लिए पांच और दस साल के राष्ट्रीय कार्यक्रम बनाने होंगे और नियमित रूप से इसकी समीक्षा करने होगी। आर्थिक रूप से कमजोर देशों को ये लक्ष्य हासिल करने के लिए विकसित देश आर्थिक भार वहन करेंगे।


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