Sunday, January 29, 2023

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश क्या होता है?

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से आशय है किसी देश के कारोबार या उद्योग में किसी दूसरे की कम्पनियों द्वारा किया गया पूँजी निवेश। यह काम किसी कम्पनी को खरीद कर या नई कम्पनी खड़ी करके या किसी कम्पनी की हिस्सेदारी खरीद कर किया जाता है। विदेशी पूँजी निवेश के दो रूपों का जिक्र हम अक्सर सुनते हैं। एक है प्रत्यक्ष विदेशी पूँजी निवेश(एफडीआई)और दूसरा है विदेशी संस्थागत पूँजी निवेश(एफआईआई)। एफआईआई प्राय: अस्थायी निवेश है,जो शेयर बाज़ार में होता है। इसमें निवेशक काफी कम अवधि में फायदा या नुकसान देखते हुए अपनी रकम निकाल कर ले जाता है। एफडीआई में निवेश लम्बी अवधि के लिए होता है।

खतरे का संकेत लाल ही क्यों?

वैज्ञानिक अध्ययनों से पता लगा है कि लाल रंग मनुष्य का ध्यान खींचता है। खतरे का निशान ध्यान खींचने के लिए होता है इसलिए इसके लिए लाल रंग उपयुक्त पाया गया। इसीलिए ट्रैफिक सिग्नल और रेलगाड़ियों के सिग्नल में लाल रंग रोकने के लिए इस्तेमाल होता है। अक्सर अखबारों की सुर्खियाँ लाल रंग में होती हैं। सुर्ख शब्द का अर्थ ही लाल है। कारों की टेल लाइट, लेबलों और होर्डिंगों में लाल रंग वहीं इस्तेमाल होता है जहाँ ध्यान खींचना हो।

दूध में कौन से पोषक तत्व होते हैं?

दूध में 85 प्रतिशत पानी और शेष भाग में वसा और खनिज होते हैं। इसमें प्रोटीन,कैल्शियम और राइबोफ्लेविन (विटैमिन बी-2)होता है। इनके अलावा इसमें विटैमिन ए,डी,के और ई सहित फॉस्फोरस,मैग्नीशियम,आयडीन,कई तरह के एंजाइम भी होते हैं। गाय और भैंस के दूध में किसका दूध श्रेष्ठ होता है इसे लेकर कोई आम राय नहीं है। आयुर्वेद में गाय के दूध को बेहतर माना गया है। यह भी कहा जाता है कि गाय के दूध में एटू बीटा प्रोटीन होता है,जो मधुमेह और मस्तिष्क के विकास में सहायक होता है। यह भी कहा जाता है कि यह प्रोटीन देसी गाय में ही मिलता है जर्सी और हॉलस्टीन नस्ल की गायों में नहीं। पर कुछ वैज्ञानिक यह भी कहते हैं कि गाय के दूध में प्रति ग्राम 3.14 मिलीग्राम कोलेस्ट्रॉल होता है, जबकि भैंस के दूध में यह प्रति ग्राम 0.65 मिली ग्राम होता है। इस लिहाज से छोटे बच्चों को इसे पचाने में दिक्कत हो सकती है। और यह भी कि भैंस के दूध में कैल्शियम,लोह और फॉस्फोरस ज्यादा होता है। मोटे तौर पर दूध शरीर के लिए स्वास्थ्यवर्धक है। इस बहस में पड़ना उचित नहीं कि गाय या भैंस में किसका दूध बेहतर है।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 28 जनवरी, 2023 को प्रकाशित

Saturday, January 14, 2023

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को क्यों मनाते हैं?

हमारे यहाँ गणतंत्र दिवस का मतलब है संविधान लागू होने का दिन। संविधान सभा ने 29 नवम्बर 1949 को संविधान को अंतिम रूप दे दिया था। इसे उसी रोज, 1 दिसम्बर या 1 जनवरी को भी लागू किया जा सकता था। पर इसके लिए पहले से 26 जनवरी की तारीख मुकर्रर की गई। वह इसलिए कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दिसम्बर 1929 में हुए लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव पास किया गया और 26 जनवरी, 1930 को कांग्रेस ने भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की और अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ किया। उस दिन से 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी ‘पूर्ण स्वराज्य दिवस’ के रूप में मनाया जाता रहा। पर स्वतंत्रता मिली 15 अगस्त को। अब ‘पूर्ण स्वराज्य दिवस’ यानी 26 जनवरी का महत्व बनाए रखने के लिए संविधान को 26 जनवरी 1950 से लागू करने का फैसला किया गया। गणतंत्र माने जिस देश का राष्ट्राध्यक्ष चुना जाता है। युनाइटेड किंगडम लोकतंत्र हैगणतंत्र नहीं। वहाँ राजा राष्ट्राध्यक्ष हैं, हमारे यहाँ राष्ट्रपति, जो चुनकर आते हैं।

समुद्र कैसे बने?

धरती जब नई-नई थी तब वह बेहद गर्म थी। अब से तकरीबन साढ़े चार अरब साल पहले धरती भीतर से तो गर्म थी ही उसकी सतह भी इतनी गर्म थी कि उस पर तरल जल बन नहीं पाता था। उस समय के वायुमंडल को हम आदि वायुमंडल (प्रोटो एटमॉस्फीयर) कहते हैं। उसमें भी भयानक गर्मी थी। पर पानी सृष्टि का हिस्सा है और सृष्टि के विकास के हर दौर में किसी न किसी रूप में मौज़ूद रहा है। उस गर्म दौर में भी खनिजों के ऑक्साइड और वायुमंडल में धरती से निकली हाइड्रोजन के संयोग से गैस के रूप में पानी पैदा हो गया था। पर वह तरल बन नहीं सकता था, और भाप के रूप में था। वायुमंडल के धीरे-धीरे ठंडा होने पर इस भाप ने बादलों की शक्ल ली। इसके बाद लम्बे समय तक धरती पर मूसलधार बारिश होती रही। यह पानी भाप बनकर उठता और संघनित (कंडेंस्ड) होकर फिर बरसता। इसी दौरान धरती की सतह भी अपना रूपाकार धारण कर रही थी। ज्वालामुखी फूट रहे थे और धरती की पर्पटी या क्रस्ट तैयार हो रही थी। धीरे-धीरे स्वाभाविक रूप से पानी ने अपनी जगह बनानी शुरू की। धरती पर जीवन की शुरूआत के साथ पानी का भी रिश्ता है। जहाँ तक महासागरों की बात है पृथ्वी की सतह का लगभग 72 फीसदी हिस्सा महासागरों के रूप में है। दो बड़े महासागर प्रशांत और अटलांटिक धरती को लम्बवत महाद्वीपों के रूप में बाँटते हैं। हिन्द महासागर दक्षिण एशिया को अंटार्कटिक से अलग करता है और ऑस्ट्रेलिया तथा अफ्रीका के बीच के क्षेत्र में फैला है। एक नज़र में देखें तो पृथ्वी विशाल महासागर हैजिसके बीच टापू जैसे महाद्वीप हैं। इन महाद्वीपों का जन्म भी धरती की संरचना में लगातार बदलाव के कारण हुआ है, जिसकी अलग कहानी है।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 14 जनवरी, 2023 को प्रकाशित


Saturday, December 31, 2022

इलेक्शन पाँच साल बाद ही क्यों होते हैं?

सभी चुनाव पाँच साल में नहीं होते। हमारे संविधान के अनुच्छेद 63(2) के अनुसार लोकसभा का कार्यकाल पाँच वर्ष है। इसलिए चुनाव पाँच साल में होते हैं। विधानसभाओं के साथ भी ऐसा ही है। लोकसभा पाँच साल के पहले भी भंग की जा सकती है और आपातकाल में उसका कार्यकाल बढ़ाया भी जा सकता है। राज्यसभा में एक सदस्य का कार्यकाल छह साल होता है, पर चुनाव हर दो साल में होते हैं।

निगेटिव ब्लड ग्रुप किसे कहते हैं? यह इतना रेयर क्यों होता है?

खून के ग्रुप सिस्टम में सबसे कॉमन एबीओ सिस्टम है। रेड ब्लड सेल्स पर प्रोटीन की कोटिंग के आधार पर चार ग्रुप बनते हैं ए बी एबी और ओ। इसके बाद ए1, ए2 ए1बी या ओ2बी सब ग्रुप बनते हैं। इसके अलावा एक प्रोटीन इन ग्रुपों को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे आरएच फैक्टर कहते हैं। यदि यह खून में होता है तो खून के टाइप को पॉज़िटिव और नहीं होता तो निगेटिव कहते हैं। इनमें ओ निगेटिव का सभी रक्त समूहों से मेल हो सकता है। इसलिए इसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है।

बवंडर या टॉर्नेडो क्या होते हैं?

टॉर्नेडो मूलतः वात्याचक्र हैं। यानी घूमती हवा। यह हवा न सिर्फ तेजी से घूमती है बल्कि ऊपर उठती जाती है। इसकी चपेट में जो भी चीजें आती हैं वे भी हवा में ऊपर उठ जाती हैं। इस प्रकार धूल और हवा से बनी काफी ऊँची दीवार या मीनार चलती जाती है और रास्ते में जो चीज़ भी मिलती है उसे तबाह कर देती है। इनके कई रूप हैं। इनके साथ गड़गड़ाहट, आँधी, तूफान और बिजली भी कड़कती है। जब से समुद्र में आते हैं तो पानी की मीनार जैसी बन जाती है। हमारे देश में तो अकसर आते हैं।

भारत का पहला उपग्रह प्रक्षेपक कौन सा है?

सैटेलाइट लांच वेहिकल-3 (एसएलवी-3) भारत का पहला प्रायोगिक उपग्रह प्रक्षेपण यान था। इसका पहला सफल प्रक्षेपण 18 जुलाई 1980 में श्रीहरिकोटा से आरएस-1 (रोहिणी उपग्रह) को कक्षा में स्थापित करने के साथ हुआ। इसकी कामयाबी ने भारत को दुनिया का ऐसा छठा देश बना दिया, जिसके पास अपना उपग्रह प्रक्षेपण यान था। यह परियोजना भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा 1970 के दशक में शुरू हुई थी। थी। हालांकि जुलाई 1980 से पहले 10 अगस्त 1979 को भी एसएलवी-3 की पहली प्रायोगिक उड़ान हुई, परन्तु वह विफल रही।

 राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 31 दिसंबर, 2022 को प्रकाशित

Wednesday, December 28, 2022

‘मोनालिसा’ की रचना किसने की?

मोनालिसा इटली के कलाकार लिओनार्दो दा विंची की बनाई विश्व-प्रसिद्ध पेंटिंग है। इसमें एक विचारमग्न स्त्री का चित्रण है जिसके चेहरे पर स्मित मुस्कान है। दुनिया की सबसे प्रसिद्ध पेंटिंगों में इसकी गिनती की जाती है। माना जाता है कि लियोनार्दो दा विंची ने यह तस्वीर 1503 से 1514 के बीच कभी बनाई थी। इस तस्वीर को फ्लोरेंस के एक व्यापारी 'फ्रांसिस्को देल जियोकॉन्डो' की पत्नी 'लीज़ा गेरार्दिनी' को देखकर बनाया था। इस समय यह पेंटिंग फ्रांस के लूव्र संग्रहालय में रखी हुई है। संग्रहालय के इस क्षेत्र में 16वीं शताब्दी की इतालवी चित्रकला की कृतियाँ रखी गई हैं। यह पेंटिंग 21 इंच लंबी और 30 इंच चौड़ी है। इसे सुरक्षित बनाए रखने के लिए इसे एक ख़ास किस्म के शीशे के पीछे रखा गया है, जो न चमकता है और न टूटता है।

संविधान सभा की पहली बैठक?

भारतीय संविधान सभा की पहली बैठक डॉ राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में 9 दिसम्बर1946 को नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन हॉल में हुईजिसे अब संसद भवन के केंद्रीय कक्ष के नाम से जाना जाता है। हालांकि संविधान सभा ने 26 नवम्बर 1949 को संविधान के प्रारूप को अंतिम रूप से स्वीकार कर लिया थापर यह तय किया गया कि इसे 26 जनवरी से लागू किया जाए क्योंकि 26 जनवरी 1930 के लाहौर कांग्रेस-अधिवेशन में पार्टी ने पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पास किया था और अध्यक्ष पं जवाहर लाल नेहरू ने अपने भाषण में इसकी माँग की थी। संविधान के नागरिकताचुनाव और संसद जैसी व्यवस्थाएं तत्काल लागू हो गईं थीं। राष्ट्रीय संविधान सभा ने राष्ट्रीय ध्वज 22 जुलाई 1947 को ही स्वीकार कर लिया था। वही ध्वज 15 अगस्त 1947 से औपचारिक रूप से राष्ट्रीय ध्वज के रूप में फहराया गया।

तीसरी दुनिया के देश नाम क्यों पड़ा?

तीसरी दुनिया शीतयुद्ध के समय का शब्द है। शीतयुद्ध यानी मुख्यतः अमेरिका और रूस का प्रतियोगिता काल। फ्रांसीसी डेमोग्राफर, मानव-विज्ञानी और इतिहासकार अल्फ्रेड सॉवी ने 14 अगस्त 1952 को पत्रिका ‘ल ऑब्जर्वेतो’ में प्रकाशित लेख में पहली बार इस शब्द का इस्तेमाल किया था। इसका आशय उन देशों से था जो न तो कम्युनिस्ट रूस के साथ थे और न पश्चिमी पूँजीवादी खेमे के नाटो देशों के साथ थे। इस अर्थ में गुट निरपेक्ष देश तीसरी दुनिया के देश भी थे। इनमें भारत, मिस्र, युगोस्लाविया, इंडोनेशिया, मलेशिया, अफगानिस्तान समेत एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के तमाम विकासशील देश थे। यों माओत्से तुंग का भी तीसरी दुनिया का एक विचार था। पर आज तीसरी दुनिया शब्द का इस्तेमाल कम होता जा रहा है।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 17 दिसंबर, 2022 को प्रकाशित

Tuesday, December 27, 2022

फूलों में रंग और खुशबू कहाँ से आती है?

रासायनिक यौगिकों का एक गुण गंध भी है। फूलों में ही नहीं आप जीवन के प्रायः तमाम तत्वों में गंध पाते हैं। आपको भोजन, शराब, फलों, मसालों, सब्जियों वगैरह में गंध मिलती है। सभी फूलों में खुशबू नहीं होती। कुछ फूल गंधहीन होते हैं और कुछ दुर्गंध भी देते हैं। गुलाब की खुशबू जेरनायल एसीटेट नामक रासायनिक यौगिक के कारण होती है। चमेली की खुशबू नेरोलायडॉल के कारण होती है। पुराने ज़माने में फूलों से ही इत्र बनता था। फूलों की मुख्य भूमिका वानस्पतिक-प्रजनन में है। एक फूल से पराग कण दूसरे में जाते हैं। इसमें हवा के अलावा मधुमक्खियों, तितलियों तथा इसी प्रकार के दूसरे प्राणियों की होती है। उन्हें आकर्षित करने में भी इनके रंग और सुगंध की भूमिका होती है।

क्या फूलों का विकास हुआ है?

यह जानकारी पाना रोचक है कि फूल कब से धरती में उग रहे हैं। हाल में अमेरिका के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा पौधा खोज निकाला है जिसे दुनिया का 'पहला फूलों वाला पौधा' कहा जा सकता है। वनस्पति शास्त्रियों को मिला ये पौधा 'मॉन्टेशिया विदाली' प्रजाति का है। माना जा रहा है कि इस प्रजाति के पौधे 25 से 14 करोड़ वर्ष पहले स्पेन की झील में उगते थे। विज्ञानियों ने 'मॉन्टेशिया विदाली' के 1,000 से भी अधिक जीवाश्मों का अध्ययन किया। यह पौधा पानी के नीचे रहता था। इसपर कोई पंखुड़ी नहीं थी और यह तालाब में उगने वाले खरपतवार की तरह दिखता है। इसपर एक बीज वाला फल लगा दिखाई देता है। इस पौधे से हमें ये समझने में मदद मिलेगी कि फूल और पौधे किस तरह विकसित हुए और दुनिया भर में छा गए।

सुपरमैन क्या है?

सुपरमैन एक काल्पनिक चरित्र है, जिसकी कथाएं कॉमिक्स के रूप में छापी जाती है। इसे एक अमेरिकी प्रतीक माना जाता है। सन 1932 में इसकी रचना जैरी सीगल और जो शुस्टर दो किशोरों ने की थी जब वे क्लीवलैंड, ओहायो में रहते थे और स्कूल में पढ़ते थे। उन्होंने इस चरित्र के अधिकार डिटेक्टिव कॉमिक्स को बेच दिए थे। इसका पहला प्रकाशन सन 1938 में एक्शन कॉमिक्स #1 में हुआ था। इसके बाद यह चरित्र टेलिविजन और रेडियो आदि पर भी अवतरित हुआ। यह अब तक के रचे गए सबसे लोकप्रिय चरित्रों मे से एक है। सुपरमैन नीले रंग का परिधान पहनता है। उसके सीने पर लाल रंग की ढाल बनी होती है, जिसपर लिखा होता है एस। उसकी मूल कथा यह है कि उसका जन्म क्रिप्टॉन ग्रह पर हुआ था जहाँ उसका नाम था कैल-एल। यह क्रिप्टॉन ग्रह नष्ट हो रहा था कि उसके वैज्ञानिक पिता ने इस शिशु को रॉकेट पर रखकर धरती की ओर भेज दिया। यह बच्चा कैनसस के किसान और उसकी पत्नी को मिला। उन्होंने इसे पाला और इसका नाम रखा क्लार्क कैंट। इस बच्चे को उन्होंने गहरी नैतिक शिक्षा दी। इस बच्चे में शुरूआत से ही विलक्षण शक्तियाँ थीं, जिनका इस्तेमाल उसने अच्छे कार्यों में किया। सुपरमैन अमेरिका के एक काल्पनिक नगर मेट्रोपोलिस में रहता है। क्लार्क कैंट के रूप में वह मेट्रोपोलिस के अखबार डेली प्लेनेट में काम करता है।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 3 दिसंबर, 2022 को प्रकाशित

Monday, December 26, 2022

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का संचालक कौन है?

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का संचालन इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) करती है, जिसकी स्थापना सन 1909 में इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के प्रतिनिधियों ने मिलकर की थी। उस समय इसका नाम था इम्पीरियल क्रिकेट कांफ्रेंस। सन 1965 में इसका नाम इंटरनेशनल क्रिकेट कांफ्रेंस और 1989 में इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल हो गया। क्रिकेट के लगभग दो सौ साल से ज्यादा लम्बे इतिहास में इस खेल का स्वरूप लगातार बदलता गया। किसी ज़माने में टेस्ट मैच के दिन तय नहीं थे। सारे देशों को टेस्ट मैच खेलने लायक समझा भी नहीं जाता था। हालांकि भारत में सन 1792 में पहला क्रिकेट क्लब बन गया था, पर उसे टेस्ट क्रिकेट का दर्ज सन 1932 में मिला जब उसने इंग्लैंड के साथ लॉर्ड्स में अपना पहला टेस्ट मैच खेला। टेस्ट क्रिकेट का दर्जा पाने वाली भारतीय टीम दुनिया में छठी टीम थी। उसके पहले इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज और न्यूज़ीलैंड की टीमों को यह दर्जा प्राप्त था। आज दुनिया में 12 टीमों को टेस्ट खेलने का दर्जा प्राप्त है, जिनते नाम इस प्रकार हैं: 1.ऑस्ट्रेलिया, 2.इंग्लैंड, 3.दक्षिण अफ्रीका, 4.वेस्ट इंडीज, 5.न्यूज़ीलैंड, 6,भारत, 7.पाकिस्तान, 8.श्रीलंका, 9.बांग्लादेश, 10,जिम्बाब्वे, 11.आयरलैंड, अफगानिस्तान। 

क्रिकेट के नियम कौन बनाता है?

हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का संचालन आईसीसी करती है, पर क्रिकेट के नियमों का कॉपीराइट मैरिलेबोर्न क्रिकेट क्लब (एमसीसी) के पास है। एमसीसी एक निजी क्लब है, पर हाल तक इंग्लैंड से बाहर जाने वाली टीम एमसीसी के नाम से जाती थी। सन 1996-97 के न्यूज़ीलैंड दौरे में इंग्लैंड की टीम ने आखिरी बार एमसीसी का कलर पहना था। बहरहाल क्रिकेट की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में नियम एमसीसी के नाम हैं। सन 1788 में एमसीसी ने क्रिकेट का पहला कोड बनाया था। इसके बाद 1835, 1884, 1947, 1980, 1992 और 2000 में कोड में संशोधन किया गया। इन नियमों का सातवाँ और अंतिम संस्करण 2017 में जारी किया गया था। इसमें भी नवीनतम परिवर्तन 1 अप्रेल 2019 को किया गया।

दुनिया का सबसे पुराना शहर?

दुनिया के कई शहर और देश सबसे पुराना होने का दावा करते हैं। इनमें सीरिया का दमिश्क, लेबनॉन का बाइब्लोस, अफगानिस्तान का बल्ख और फलस्तीन के जेरिको का नाम भी है। पर मैं अपने वाराणसी का नाम लेना चाहूँगा, जो सम्भवतः दुनिया के उन सबसे पुराने शहरों में एक है जो आज भी आबाद हैं। जनश्रुति है कि इसे भगवान शिव ने बसाया, पर इसमें दो राय नहीं कि यह शहर तीन से चार हजार साल पुराना है। मार्क ट्वेन ने इस शहर के बारे में लिखा है, ‘ बनारस, इतिहास से पुराना, परम्पराओं से पुराना, किंवदंतियों से पुराना है और इन सबको मिलाकर भी उनसे दुगना पुराना है।’

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 19 नवंबर, 2022 को प्रकाशित

Sunday, December 25, 2022

हैलोवीन क्या होता है?

 

हैलोवीन अमेरिका और यूरोप में 31 अक्तूबर को मनाया जाने वाला एक अवकाश है। अब भारत समेत दुनिया के बहुत से देशों में इसे मनाने लगे हैं। इस दिन लोग विचित्र किस्म की पोशाकें पहनते हैं। डरावनी फिल्में देखते हैं। भूत-प्रेत के खेल-खेलते हैं। खासतौर से कद्दू या सीताफल को काटकर उससे इंसान का चेहरा बनाकर उसके भीतर मोमबत्ती जलाते हैं। मैदान में होली की तरह से आग जलाते हैं। बच्चे घर-घर जाकर उपहार प्राप्त करते हैं। मोटे तौर पर गर्मी की समाप्ति और सर्दी के आगमन के इस पर्व में दुष्टात्माओं से छुटकारा पाने की कामना होती है। लौह युग की यूरोपीय सेल्टिक-संस्कृति में इसकी शुरुआत हुई थी।

जुगनू क्यों चमकते हैं?

जुगनू एक प्रकार का उड़ने वाला कीड़ा है, जिसके पेट में रासायनिक क्रिया से रोशनी पैदा होती है। इसे बायोल्युमिनेसेंस कहते हैं। इसके शरीर में ल्यूसिफेरिन नामक जटिल कार्बनिक यौगिक तथा ल्यूसिफेरेज नामक एन्जाइम पाया जाता है। इस एन्जाइम, और ऑक्सीजन तथा मैग्नीशियम आयन की उपस्थिति में ल्यूसिफेरिन पदार्थ से प्रकाश पैदा होता है। जीवधारियों के शरीर से प्रकाश  उत्पन्न होना बायोल्युमिनेसेंस कहलाता है। यह कोल्ड लाइट कही जाती है इसमें इंफ्रा रेड और अल्ट्रा वॉयलेट देनों फ्रीक्वेंसी नहीं होतीं।

एक ओवर में छह गेंदें ही क्यों?

सच यह है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सन 1979-80 के बाद से ही सारी दुनिया में छह गेंदों के मानक ओवर का चलन शुरू हुआ है। उसके पहले अलग-अलग समय और अलग-अलग देशों में चार, पाँच और आठ गेंदों के ओवर भी होते रहे हैं। क्रिकेट के ज्ञात इतिहास में इंग्लैंड में सन 1889 तक चार गेंदों का एक ओवर होता था। उसके बाद 1899 तक पाँच गेंद का ओवर हो गया। इसके बाद सन 1900 में एक पहल के बाद छह गेंदों के ओवर की शुरूआत हुई। शुरूआती वर्षों में ऑस्ट्रेलिया में भी चार गेंद का ओवर होता था। इसके बाद जब इंग्लैंड में छह गेंद का ओवर हुआ तो वहाँ भी छह गेंद का ओवर हो गया। पर 1922-23 के सीज़न से ऑस्ट्रेलिया ने आठ गेंदों का एक ओवर करने का फैसला किया।

ऑस्ट्रेलिया की देखा-देखी इंग्लैंड ने भी सन 1939 में अपने घरेलू क्रिकेट में दो साल के लिए आठ गेंदों के ओवर का प्रयोग किया। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जब इंग्लैंड में नियमित रूप से क्रिकेट का सीज़न जब शुरू हुआ तब छह गेंदों के ओवर की वापसी हो गई। दक्षिण अफ्रीका में 1938-39 और फिर 1957-58 में आठ गेंद का ओवर चला। इसी तरह पाकिस्तान में 1974-75 और 1977-78 में आठ गेंद का ओवर रहा। गेंदों की संख्या घटाने और बढ़ाने के कारणों का विवरण दस्तावेजों में नहीं मिलता। इतना अनुमान है कि चार गेंदों का ओवर काफी छोटा लगा। उसे कुछ और बड़ा करने के प्रयास में यह संख्या आठ तक पहुँच गई।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 5 नवंबर, 2022 को प्रकाशित


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