Saturday, January 31, 2026

आईएमएफ और विश्व बैंक में क्या फर्क है

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक दोनों ही ब्रेटन वुड्स सम्मेलन (1944) में स्थापित संस्थाएं हैं। इनके उद्देश्य और कार्य अलग-अलग हैं। आईएमएफ वैश्विक मौद्रिक स्थिरता पर केंद्रित है, जबकि विश्व बैंक विकासशील देशों में गरीबी उन्मूलन और सतत विकास पर फोकस करता है। मुद्राकोष का काम है वैश्विक मौद्रिक सहयोग को बढ़ावा देना, वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना, अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुविधाजनक बनाना वगैरह। इसके लिए वह मैक्रोइकॉनोमिक और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करता है। जब सदस्य देश संकट में आते हैं, तब उन्हें अल्पावधि ऋण प्रदान करता है। ऐसा करते हुए वह नीतिगत सलाह देता है और अपनी शर्तें भी लगाता है। विश्व बैंक का काम है गरीबी उन्मूलन, सतत विकास को बढ़ावा देना, और समृद्धि को बढ़ाना। दोनों आपस में समन्वय रखते हैं। राजनीतिक दृष्टि से दोनों पर अमेरिका और यूरोप का वर्चस्व है। विश्वबैंक का अध्यक्ष पारंपरिक रूप से अमेरिकी नागरिक होता है, जिसे अमेरिका नामित करता है। अमेरिका ही बैंक का सबसे बड़ा शेयरधारक है। आईएमएफ का प्रबंध निदेशक हमेशा यूरोपीय होता है, पर यह अलिखित परंपरा है, न कि औपचारिक नियम। बदलते आर्थिक परिदृश्य के कारण भविष्य में इसमें बदलाव संभव है।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 31 जनवरी, 2026 को प्रकाशित

Saturday, January 24, 2026

ग्रोकीपीडिया क्या है?

एलन मस्क की कंपनी एक्सएआई ने एआई-पावर्ड ऑनलाइन एनसाइक्लोपीडिया तैयार किया है, जिसका नाम ग्रोकीपीडिया है। इससे तथ्यों की खोज में एआई की संभावनाओं का पता भी लगेगा। विकीपीडिया का संकलन मनुष्य करते हैं, जबकि इसमें एआई यह काम करता है। 27 अक्टूबर 2025 को इसका वर्ज़न 0.1 लॉन्च किया गया था, जो अब 0.2 है। एक्सएआई के ग्रोक एआई मॉडल के अनुसार यह जानकारी को तेजी से और ट्रुथफुल (सत्य) अपडेट करता है। शुरुआत में इसके कई आलेख विकिपीडिया से, क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेंस के तहत, सीधे लिए गए हैं। कुछ में बदलाव भी किए गए हैं। लॉन्च के समय इसमें 8.85 लाख लेख थे, जो अब साठ लाख से ऊपर हैं। एलन मस्क का कहना है कि विकिपीडिया में लेफ्ट-विंग बायस (वामपंथी पक्षधरता) है, पर ग्रोकीपीडिया ज्यादा निष्पक्ष और तथ्य-आधारित होगा। यह वैबसाइट grokipedia.com पर उपलब्ध है, जहाँ सर्च बार से टॉपिक सर्च कर सकते हैं। यह सर्च केवल अंग्रेजी में उपलब्ध है। शुरुआती रिपोर्ट्स कहा गया कि इसके कुछ लेखों में तथ्यात्मक गलतियां हैं, स्रोत कम हैं, या राइट-विंग दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया गया है। अभी तक किसी और संस्था ने ऐसा पूर्ण एआई-जेनरेटेड विश्वकोश लॉन्च नहीं किया है।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 24 जनवरी 2026 को प्रकाशित

Sunday, January 18, 2026

बजट सत्र दो हिस्सों में क्यों?

संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। इसका पहला चरण 13 फरवरी को समाप्त होगा, और 9 मार्च को फिर से शुरू होकर 2 अप्रैल तक जारी रहेगा। क्या आपने कभी सोचा कि बजट सत्र के दो हिस्से क्यों होते हैं? सामान्यतः हर साल संसद के तीन सत्र होते हैं। बजट (जनवरी-अप्रैल), मॉनसून (जुलाई-अगस्त) और शीतकालीन (नवंबर-दिसंबर)। इन तीन के अलावा संसद के विशेष सत्र भी बुलाए जा सकते हैं। बजट अधिवेशन को दोनों हिस्सों के बीच तीन से चार सप्ताह का अवकाश होता है। इस दौरान स्थायी समितियाँ विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान माँगों पर विचार करती हैं। बजट सत्र के पहले दिन दोनों सदनों के समक्ष राष्ट्रपति का अभिभाषण होता है, जिसमें उन नीतियों एवं कार्यक्रमों का विवरण होता है जिन्हें सरकार लागू करना चाहती है। इसके साथ ही पहले वर्ष की गतिविधियों और उपलब्धियों का विवरण होता है। हरेक अधिवेशन की अंतिम तिथि के बाद छह मास के भीतर आगामी अधिवेशन के लिए सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करना होता है। सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करने की शक्ति राष्ट्रपति में निहित है, पर व्यवहार में इसकी पहल सरकार करती है।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

 

Saturday, January 10, 2026

डार्क एनर्जी और डार्क मैटर

 

डार्क एनर्जी और डार्क मैटर ब्रह्मांड के दो रहस्यमय घटक हैं, जो अदृश्य हैं फिर भी ब्रह्मांड के व्यवहार पर गहरा असर डालते हैं। डार्क मैटर का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव होता है। यह निहारिकाओं और निहारिका समूहों को एक साथ बाँधे रखता है, जिससे वे बिखरते नहीं हैं। 1998 में वैज्ञानिकों ने सुदूर निहारिकाओं में टाइप एलए सुपरनोवा का अध्ययन किया, तो पता लगा कि ब्रह्मांड का विस्तार बजाय धीमा होने के तेज़ हो रहा है, जबकि गुरुत्वाकर्षण के कारण विस्तार धीमा होना चाहिए, तब उन्होंने एक प्रतिकारक बल की परिकल्पना की, जिसे डार्क एनर्जी नाम दिया गया। यही रहस्यमय ऊर्जा, ब्रह्मांड के विस्तार की गति को लगातार बढ़ा रही है। कई भौतिकविद मानते हैं कि ब्रह्मांड का संपूर्ण दृश्य भाग इसमें मौजूद सभी पदार्थों का केवल 5 प्रतिशत है, और शेष 95 प्रतिशत डार्क मैटर और डार्क एनर्जी से बना है। विभिन्न अप्रत्यक्ष अवलोकनों और गणनाओं के माध्यम से यह स्पष्ट होने लगा, तो इन मायावी कणों की खोज के लिए प्रयोग किए जाने लगे। वैज्ञानिकों को अभी इस सिलसिले में डेटा का इंतज़ार है। अमेरिका के साउथ डकोटा में लक्स-ज़ेपलिन दुनिया का सबसे संवेदनशील डार्क मैटर डिटेक्टर है।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Saturday, January 3, 2026

हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य

यूनाइटेड किंगडम में हाउस ऑफ कॉमन्स के सदस्य चुनकर आते हैं, वहीं हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य चुने नहीं जाते, मुख्यतः नियुक्त किए जाते हैं। इनके दो मुख्य वर्ग हैं। लॉर्ड्स स्पिरिचुअल (अध्यात्मिक सदस्य) और लॉर्ड्स टेम्पोरल (सांसारिक सदस्य)। 26 लॉर्ड्स स्पिरिचुअल, चर्च ऑफ इंग्लैंड के वरिष्ठ बिशप। पहले दो कैंटरबरी और यॉर्क के आर्कबिशप। इसके बाद 24 बिशप, जो वरिष्ठता के आधार पर पदेन सदस्य बनते हैं। बिशप बनते ही सदस्यता मिल जाती है, और रिटायरमेंट पर समाप्त हो जाती है। लॉर्ड्स टेम्पोरल, मुख्य सदस्य हैं, जिनकी संख्या लगभग 800 है (दिसंबर 2025 तक कुल सदस्यता करीब 800-822)। इनमें शामिल हैं लाइफ पीअर्स, जो आजीवन सदस्य होते हैं, लेकिन उनकी उपाधि वंशानुगत नहीं होती। इनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर राजा करते हैं। राजनीतिक सदस्य, मुख्य पार्टियाँ (कंजर्वेटिव, लेबर आदि) अपने उम्मीदवार सुझाती हैं। गैर-राजनीतिक सदस्यों के नाम एक स्वतंत्र संस्था हाउस ऑफ लॉर्ड्स अपॉइंटमेंट्स कमीशन सुझाती है। जनता भी नाम सुझा सकती है। ये विशेषज्ञता के आधार पर आते हैं। हेरेडिटरी पीअर्स (वंशानुगत सदस्य): पहले सैकड़ों थे, लेकिन 1999 के हाउस ऑफ लॉर्ड्स एक्ट के बाद केवल 92 बचे हैं। शाही उपाधियाँ, अब नई वंशानुगत उपाधियाँ नहीं दी जातीं।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 3 जनवरी, 2026 को प्रकाशित

 

 

Wednesday, December 31, 2025

वीडियो रेफरल यानी थर्ड अंपायर

खेलों में पहले रेफरी या अंपायर नहीं होते थे। सबसे पहले फुटबॉल में रेफरी बने। पहले टीमों के कप्तान मिलकर तय कर लेते थे कि गोल हुआ या नहीं। अब सभी खेलों में वीडियो रेफरल का चलन बढ़ रहा है और अंपायर के फैसलों को चुनौती देने की व्यवस्था भी है। फुटबॉल में इसे 2018 में मान्यता मिली, पर क्रिकेट और हॉकी में इसने पहले जगह बना ली थी। साठ के दशक में टीवी प्रसारण में इंस्टेंट रिप्ले होते थे। इसी रिप्ले के सहारे क्रिकेट में थर्ड अंपायर की शुरुआत नवंबर 1992 में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच डरबन टेस्ट मैच में हुई। मैच के दूसरे दिन थर्ड अंपायर के फैसले से सचिन तेंदुलकर रन आउट हुए थे। फिर डीआरएस (डिसीज़न रिव्यू सिस्टम) की ईज़ाद हुई और 2008 में भारत-श्रीलंका टेस्ट मैच में इसका परीक्षण हुआ। 23-26 जुलाई के बीच खेले गए टेस्ट मैच में वीरेंद्र सहवाग इस सिस्टम के तहत आउट पहले खिलाड़ी थे। नवंबर 2009 में ड्यूनेडिन में न्यूज़ीलैंड-पाकिस्तान टेस्ट में आधिकारिक रूप से इसे लागू किया गया। जनवरी 2011 में इंग्लैंड की टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर गई, तब पहली बार एकदिनी मैचों में और 2017 में टी-20 में इसकी अनुमति मिली। इसमें तकनीकी सुधार होते गए और हो रहे हैं।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 20 दिसंबर 2025 को प्रकाशित

Tuesday, December 30, 2025

सीएनएपी कॉलर आईडी

 

भारत में जल्द ही ऐसी व्यवस्था शुरू होने वाली है, जिससे आपके फोन पर आने वाली कॉलर का केवल नंबर ही नहीं उसका नाम भी आएगा, जिसपर सिम रजिस्टर हुआ है। यह वर्तमान कॉलिंग पहचान से आगे का कदम है, जिसमें केवल कॉल करने वाले का नंबर प्रदर्शित होता है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने इस कॉलर आईडी प्रणाली को लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका नाम है कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (सीएनएपी)। इस सुविधा का इन दिनों परीक्षण किया जा रहा है और आशा है कि 31 मार्च, 2026 तक देशभर में इसका रोल आउट हो जाएगा। कोई भी मोबाइल फोन धारक इस सुविधा का लाभ ले सकेगा और चाहे तो इसे हटा भी सकेगा। इसके लॉन्च होते ही यह दुनिया का सबसे बड़ा वैरीफाइड कॉलर आईडी सिस्टम होगा। इससे स्पैम और फर्जी कॉल रोकने में आसानी होगी। इसके बाद ट्रू कॉलर जैसे थर्ड पार्टी ऐप की जरूरत नहीं होगी। ट्रूकॉलर जैसी थर्ड पार्टी सेवाएँ क्राउड-सोर्स जानकारी पर निर्भर करती हैं और कई बार गलत भी होती हैं। सीएनएपी कॉलर के केवाईसी रिकॉर्ड के आधार पर उसका नाम कॉल रिसीव करने वाले को दिखाएगा।

 

 

 

 

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