विज्ञान के अनुसार, मनुष्य सीधे तौर पर आज के बंदरों की संतान नहीं है। इसके बजाय, दूसरे शब्दों में कहें कि इंसान और आज के बंदर (जैसे चिम्पांजी) दोनों एक ही विलुप्त हो चुके प्राचीन 'वानर (Ape)' प्रजाति के वंशज हैं। लाखों वर्ष के क्रमिक विकास (Evolution) के बाद दोनों अलग-अलग दिशाओं में विकसित हुए हैं। मानव उत्पत्ति और विकास के बारे में वैज्ञानिक दृष्टिकोण इस प्रकार है:
उद्विकास सिद्धांत (Evolution Theory) साझा पूर्वज (Common Ancestor): लगभग 60-80 लाख वर्ष पहले एक ऐसा जीव धरती पर मौजूद था, जो इंसानों और आज के चिम्पांजी दोनों का साझा पूर्वज था। समय के साथ उस प्रजाति के जीव अलग-अलग वातावरण में रहने लगे और खुद को ढालने (Evolve) लगे। इसी प्रक्रिया में एक शाखा आधुनिक मानव (Homo sapiens) के रूप में विकसित हुई।
डीएनए (DNA) प्रमाण: आनुवंशिक शोध बताते हैं कि आधुनिक मानव का डीएनए चिम्पैंजी के डीएनए से लगभग 98.8% तक मेल खाता है, जो दर्शाता है कि हमारे पूर्वज एक ही थे। अधिक जानकारी के लिए आप स्मिथसोनियन नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के मानव उत्पत्ति कार्यक्रम के आनुवंशिकी प्रमाण देख सकते हैं।
सवाल है कि मनुष्य और चिंपैंजी के बीच फर्क कैसे पैदा हुआ? मनुष्य सभी प्राणियों से भिन्न और विवेकशील कैसे बना? वैज्ञानिक मानते हैं कि करोड़ों साल पहले इनके साझा पूर्वज हुआ करते थे। वातावरण में बदलाव, प्राकृतिक चयन और आनुवंशिक उत्परिवर्तन (Genetic Mutation) के कारण दोनों की प्रजातियों के रास्ते अलग हो गए। इन दोनों प्रजातियों में यह बड़ा अंतर मुख्य रूप से इन कारकों से पैदा हुआ:
मस्तिष्क का विकास और क्षमता: इंसानों का मस्तिष्क चिंपैंजी से लगभग तीन गुना बड़ा हो गया, विशेषकर 'सेरेब्रम' (Cerebrum) का हिस्सा। इससे इंसानों में अमूर्त सोच (Abstract Thinking), जटिल भाषा और योजना बनाने की क्षमता विकसित हुई।
सीधे खड़े होकर चलना (Bipedalism): लाखों साल पहले जलवायु परिवर्तन के कारण जब जंगल कम होने लगे, तब मानव पूर्वजों ने जमीन पर सीधे खड़े होकर चलना शुरू किया। इससे उनके हाथ औजार बनाने और उपयोग करने के लिए स्वतंत्र हो गए।





