समुद्री परिवहन की अंतरराष्ट्रीय-व्यवस्था अनेक महत्त्वपूर्ण संधियों के मार्फत काम करती है, जो नौवहन, सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण, माल परिवहन, श्रमिक अधिकारों और समुद्री क्षेत्रों के प्रबंधन से जुड़ी हैं। ये संधियाँ मुख्य रूप से इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइज़ेशन (आईएमओ) के तहत विकसित की गई हैं। इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण और व्यापक संधि है यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (यूएनक्लोस)। इसे ‘समुद्री विधान’ कहा जाता है, जो प्रादेशिक जल, और अनन्य आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) तटीय राज्यों के अधिकार, नेवीगेशन की स्वतंत्रता और समुद्री पर्यावरण संरक्षण को परिभाषित करता है। यह संधि 1982 में अपनाई गई और 1994 में लागू हुई। भारत ने इसे 1995 में अनुमोदित किया। इसके अलावा आईएमओ के तहत चार प्रमुख संधियाँ और हैं। सोलास (सेफ्टी ऑफ लाइफ एट सी), मारपोल (पोतों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए), एसटीसीडब्लू (समुद्री कर्मियों के प्रशिक्षण, प्रमाणन और ड्यूटी के मानक), एमएलसी (मैरीटाइम लेबर कन्वेंशन) समुद्री श्रमिकों के अधिकार। उपरोक्त चारों को आईएमओ के चार स्तंभ कहा जाता है। इनके अलावा माल परिवहन, कागजी कार्यवाही तथा पोतों के टकराव को रोकने से जुड़ी संधियाँ भी हैं। इस वर्ष जैव-विविधता संरक्षण के लिए नई संधि भी लागू हुई है।
राजस्थान
पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 18 अप्रेल 2026 को प्रकाशित






