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Wednesday, February 10, 2016

थ्री-डी प्रिंटर : इंजीनियरी कल्पना से परे

आप एक मेज की कल्पना करें. उसके पाए लकड़ी को काटकर बनाए जाते हैं. फिर ऊपर का तख्ता अलग से काटा जाता है. इसी तरह उसके अलग-अलग हिस्से काटकर बनाए जाते हैं. फिर उन्हें जोड़ा जाता है. इसी मेज को छोटे से आकार में लकड़ी के बजाय मोम से बनाना हो तो आप एक सांचा बनाएंगे, फिर उसमें गर्म करके मोम भरेंगे. फिर ठंडा होने के बाद सांचे को हटा देंगे तो मोम की मेज बनी मिलेगी. सवाल है कि क्या लकड़ी की मेज इसी तरह नहीं बनाई जा सकती? इसके कई जवाब हैं. यदि लकड़ी को मोम की तरह पिघलाया जा सकता तो बन सकती थी. या फिर लकड़ी के बड़े टुकड़े को काट-तराश कर मेज निकाली जा सकती है. जैसे मूर्तिकार पत्थर से तराश कर मूर्ति बनाते हैं.
विज्ञान इसके आगे सोचना शुरू करता है. क्या मेज को पेड़ की तरह उगाया जा सकता है? पेड़ उगता है तो उसका आकार उसी तरह से बनता जाता है जैसा प्रकृति ने तय किया. उसके जैसे ज्यादातर पेड़, पौधे, फूल इसी तरह जन्म लेते हैं. वैज्ञानिकों ने अपने ज्ञान का इस्तेमाल करके इन पेड़-पौधों के साथ प्रयोग करके उनके रंग-रूप और शक्लो-सूरत में भी बदलाव कर लिया. पर यह उगाना था. किसी चीज को उगाने के लिए जिस सामग्री की जरूरत होती है उसे परिभाषित किया जाए तो वह आपकी इच्छानुसार उग सकती है.

Wednesday, July 22, 2015

अभी कितनी दूर है अंतरिक्ष का जीव?

नासा की मुख्य वैज्ञानिक एलेन स्टोफन ने इस साल अप्रैल में एक सम्मेलन में कहामुझे लगता है कि एक दशक के भीतर हमारे पास पृथ्वी से दूर अन्य ग्रहों पर भी जीवन के बारे में ठोस प्रमाण होंगे.  हम जानते हैं कि कहां और कैसे खोज करनी है. उनकी बात का मतलब यह नहीं कि अगले दस साल में हम विचित्र शक्लों वाले जीवधारियों से बातें कर रहे होंगे. उन्होंने कहा थाहम एलियन के बारे में नहींछोटे-छोटे जीवाणुओं ज़िक्र कर रहे हैं.

आपने फिल्म ईटी देखी होगी. नहीं तो टीवी सीरियल देखे होंगे जिनमें सुदूर अंतरिक्ष में रहने वाले जीवों की कल्पना की गई है. परग्रही प्राणियों से मुलाकात की कल्पना हमारे समाजलेखकोंफिल्मकारों और पत्रकारों को रोमांचित करते रही है. अखबारों मेंटीवी में उड़न-तश्तरियों की खबरें अक्सर दिखाई पड़ती हैं. हॉलीवुड से बॉलीवुड तक फिल्में बनी हैं. परग्रही जीवन के संदर्भ में वैज्ञानिक अब नए प्रश्न पूछ रहे हैं. परग्रही जीवन कैसा होता होगाकितने समय में उसका पता चलेगा और हम इसे कैसे पहचानेंगेहाल के निष्कर्ष हैं कि यह जीवन हमारे काफी करीब है. वह धरती के आसपास के ग्रहों या उनके उपग्रहों में हो सकता है.

ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग ने सोमवार को 10 करोड़ डॉलर की जिस परियोजना का सूत्रपात किया है वह मनुष्य जाति के इतिहास के सबसे रोमांचक अध्याय पर से पर्दा उठा  सकती है. यह परियोजना रूसी मूल के अमेरिकी उद्यमी और सिलिकॉन वैली तकनीकी निवेशक यूरी मिलनर ने की है. मिलनर सैद्धांतिक भौतिक-विज्ञानी भी हैं. इस परियोजना में कारोबार कम एडवेंचर ज्यादा है. कोई वैज्ञानिक विश्वास के साथ नहीं कह सकता कि अंतरिक्ष में जीवन है. किसी के पास प्रमाण नहीं है. पर कार्ल सागां जैसे अमेरिकी वैज्ञानिक मानते रहे हैं कि अंतरिक्ष की विशालता और इनसान की जानकारी की सीमाओं को देखते हुए यह भी नहीं कहा जा सकता कि जीवन नहीं है.
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