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Friday, June 19, 2015

कम्प्यूटर की ईज़ाद किसने की और कब?

कम्पयूटर वस्तुतः ऐसी मशीन है, जिसे प्रोग्राम किया जा सके और जो दी गई गणितीय तथा तार्किक क्रियाओं को क्रम से अपने आप करने में समर्थ हो. मशीन से हिसाब किताब कई सदियों पहले से होता रहा है, पर हम आज बिजली से चलने वाले जिस कम्प्यूटर से परिचित हैं, वह बीसवीं सदी की देन है. तब से अब तक यह साइज़ में  छोटा काम में काफी तेज़ होता चला गया है. पहले इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कम्प्यूटर ब्रिटेन और अमेरिका में 1940 और 1945 के बीच विकसित किए. वे एक बड़े कमरे के आकार के थे,जो की कई सौ आधुनिक पर्सनल कम्प्यूटरों के बराबर बिजली खाते थे और काम आज के मामूली कम्प्यूटर से भी कम करते थे. संगणक (पीसी) के बराबर शक्ति की खपत करते थे. आपका सवाल है इसे किसने और कब ईज़ाद किया. इसका जवाब देने के पहले यह समझना ज़रूरी है कि आपका आशय किस कम्प्यूटर से है. अलबत्ता सन 1837 में गणित के एक ब्रिटिश प्रोफेसर चार्ल्स बैबेज ने एक एनैलिटिकल एंजिन का आइडिया दिया, जो स्टीम एंजिन से चलता और जो पंचकार्ड का इस्तेमाल करके मिकेनिकल करघों का काम प्रोग्राम करता. पैसे की कमी से और कुछ दूसरे कारणों से यह मशीन नहीं बनी, जबकि सिद्धांततः वह बन सकती थी. सन 1939 में अमेरिका की आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी में जॉन वी एटेनासॉफ और क्लिफर्ड बैरी ने मिलकर एटेनासॉफ-बैरी कम्प्यूटर (एबीसी), जिसे पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कम्प्यूटर कह सकते हैं. फिर भी सन 1943 में अमेरिका में बने इलेक्ट्रॉनिक न्यूमैरिकल इंटीग्रेटर एंड कम्प्यूटर यानी एनियैक को पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कम्प्यूटर कह सकते हैं. तबसे विकास होता जा रहा है.
बॉलीवुड शब्द कब अस्तित्व में आया? इसे किसने शुरू किया?
बॉलीवुड में बॉ अक्षर बॉम्बे से लिया गया है, जो एक ज़माने में मुम्बई का नाम होता था. और हॉलीवुड से हॉ हटाकर बॉलीवुड बना लिया गया. यह शब्द सत्तर के दशक से इस्तेमाल हो रहा है, पर इसे लोकप्रियता नब्बे के दशक में मिली जब हमारे देश ने बाहर देखना शुरू किया. तब तक हम हिन्दी सिनेमा का प्रयोग ही करते थे. पिछले साल सलमान खान ने ट्वीट किया था कि मुझे बॉलीवुड शब्द पसंद नहीं. अमिताभ बच्चन भी इसके कायल नहीं. पर यह चल रहा है. यह भी सच है कि कोलकाता के बांग्ला सिनेमा को 1932 के आसपास टॉलीवुड कहना शुरू कर दिया गया था. उसकी वजह थी टॉलीगंज जहाँ ज्यादातर स्टूडियो थे.
नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन कब बना था?
नई दिल्ली को राजधानी बनाने का फैसला 1911 में होने के बाद नए निर्माण कार्य शुरू हुए. नए वायसरॉय भवन का काम सन1912 में शुरू हुआ और वह 1929 में बनकर तैयार हुआ. यही वायसरॉय भवन 1947 के बाद राष्ट्रपति भवन कहलाया.
कहते हैं कि मुम्बई शहर दहेज में आया था. क्या यह सच है?-
मुम्बई या बॉम्बे का माहिम वाला इलाका तकरीबन एक हजार साल पहले बस गया था. 1348 में मुस्लिम सेनाओं ने इस द्वीप को जीत लिया और यह गुजरात राज्य का हिस्सा बन गया. इसके बाद पुर्तगालियों ने सन 1507 में इस इलाके को जीतने की कोशिश की, पर वह सफल नहीं हुई. लेकिन 1534 में गुजरात के शासक सुल्तान बहादुरशाह ने यह द्वीप पुर्तग़ालियों को एक समझौते के तहत सौंप दिया. 1661 में इंग्लैंड के किंग चार्ल्स द्वितीय व पुर्तगाल के राजा की बहन कैथरीन ऑफ़ ब्रैगेंज़ा के विवाह के बाद यह एक तरह से पुर्तगालियों ने यह तोहफे के तौर पर अंग्रेजों को सौंप दिया. राजा ने इसे 1668 में ईस्ट इंडिया कम्पनी को सौंप दिया.
आइसक्रीम सबसे पहले किसने बनाई, और सबसे ज्यादा आइसक्रीम की खपत कहां होती है?
ईसा से 400 साल पहले फारस में गुलाबजल में फालूदा और फलों को मिलाकर जमाने का चलन था. फालूदा शब्द फारस से ही आया है. तकरीबन उसी जमाने में चीन में दूध और चावल के मिश्रण को जमाकर ठंडी मिठाई का चलन था. ज्यादातर प्राचीन सभ्यताओं ने बर्फ जमाना और उसके व्यंजन बनाना सीख लिया था. आइसक्रीम की सबसे ज्यादा खपत अमेरिका में है जहाँ औसतन एक व्यक्ति साल भर में 23 लिटर आइसक्रीम खाता है. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड हैं जहाँ 18 से 20 लिटर आइसक्रीम खाई जाती है. 
रेनबो डाइट क्या होती है?
रेनबो डाइट का शाब्दिक अर्थ है इन्द्रधनुषी डाइट. यानी इन्द्रधनुष के रंगों का भोजन. व्यावहारिक मतलब है तरह-तरह के रंगों के फलों और सब्जियों का भोजन जो स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन होता है. फलों और सब्जियों के तमाम रंग होते हैं और हर रंग का अपना गुण होता है.
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

Sunday, April 26, 2015

दुनिया में सबसे पहले कपड़े कहाँ पहने गए?

एफ़एममोबाइल और वायरलेस तथा अन्य तरंगों का इंसानों और पशु पक्षियों पर क्या प्रभाव पड़ता है
आपने जो बातें पूछी हैं उनके अलावा कॉर्डलेस हैडफोन, वाइ-फाई, माइक्रोवेव अवन और ऑप्टिक फाइबर तक से स्वास्थ्य के लिए पैदा होने वाले खतरों को लेकर चिंता व्यक्त की जाती है। मोबाइल टावरों से रेडिएशन हो सकता है, पर उनके लिए सीमा निर्धारित है। वस्तुतः ज्यादा धूप, गर्मी, सर्दी, पानी से भी स्वास्थ्य के लिए खतरा होता है, पर सीमा के भीतर रहें तो नहीं होता।

पानी में भँवर कैसे बनते हैं? और चक्रवात किसे कहते हैं? 
भँवर आमतौर पर एक-दूसरे से विपरीत दिशाओं से आ रही लहरों के टकराने से बनते हैं। इसके कई रूप हैं। जब आप किसी पानी के बर्तन में ऊपर से पानी गिराएं तो दबाव के कारण पानी नीचे जाता है और इसके चारों ओर गोल घेरा बन जाता है यह भी एक प्रकार का भँवर है। आप किसी पानी की भरी बोतल की तली में छेद कर दें और उसे देखें तो पता लगेगा कि पानी के बीचोबीच घूमते चक्रवात जैसा एक खड़ा स्तम्भ बन जाता है और सबसे ऊपर पानी की सतह पर भँवर जैसा बन जाता है। सागर के ऊपर या धरती की सतह पर जब हवाएं टकराकर गोल- गोल घूमने लगती हैं तब उसे हम चक्रवात कहते हैं।

ट्रैफिक सिग्नल की शुरुआत सबसे पहले कहां हुई?
ट्रैफिक सिग्नल की शुरूआत रेलवे से हुई है। रेलगाड़ियों को एक ही ट्रैक पर चलाने के लिए बहुत ज़रूरी था कि उनके लिए सिग्नलिंग की व्यवस्था की जाए। 10 दिसम्बर 1868 को लंदन में ब्रिटिश संसद भवन के सामने रेलवे इंजीनियर जेपी नाइट ने ट्रैफिक लाइट लगाई। पर यह व्यवस्था चली नहीं। सड़कों पर व्यवस्थित रूप से ट्रैफिक सिग्नल सन 1912 में अमेरिका के सॉल्ट लेक सिटी यूटा में शुरू किए गए। सड़कों पर बढ़ते यातायात के साथ यह व्यवस्था दूसरे शहरों में भी शुरू होती गई।

दुनिया में सबसे पहले कपड़े कहाँ पहने गए?
पुरातत्ववेत्ताओं और मानव-विज्ञानियों के अनुसार सबसे पहले परिधान के रूप में पत्तियोंघास-फूस,जानवरों की खाल और चमड़े का इस्तेमाल हुआ था। दिक्कत यह है कि इस प्रकार की पुरातत्व सामग्री मिलती नहीं है। पत्थरहड्डियाँ और धातुओं के अवशेष मिल जाते हैंजिनसे निष्कर्ष निकाले जा सकते हैंपर परिधान बचे नहीं हैं। पुरातत्ववेत्ताओं को रूस की गुफाओं में हड्डियों और हाथी दांत से बनी सिलाई करने वाली सूइयाँ मिली हैंजो तकरीबन 30,000 साल ईपू की हैं। मानव विज्ञानियों ने कपड़ों में मिलने वाली जुओं का जेनेटिक विश्लेषण भी किया हैजिसके अनुसार इंसान ने करीब एक लाख सात हजार साल पहले बदन ढकना शुरू किया होगा। इसकी ज़रूरत इसलिए हुई होगी क्योंकि अफ्रीका के गर्म इलाकों से उत्तर की ओर गए इंसान को सर्द इलाकों में बदन ढकने की ज़रूरत हुई होगी। कुछ वैज्ञानिक परिधानों का इतिहास पाँच लाख साल पीछे तक ले जाते हैं। बहरहाल अभी इस विषय पर अनुसंधान चल ही रहा है।

राष्ट्रपति भवन और संसद भवन का निर्माण कब हुआ?
सन 1911 में घोषणा की गई कि भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली ले जाई जाएगी। मशहूर ब्रिटिश आर्किटेक्ट सर एडविन लैंडसीयर लुट्यन्स ने दिल्ली की ज्यादातर नई इमारतों की रूपरेखा तैयार की। इसके लिए उन्होंने सर हरबर्ट बेकर की मदद ली। जिसे आज हम राष्ट्रपति भवन कहते हैं उसे तब वाइसरॉयस हाउस कहा जाता था। इसके नक्शे 1912 में बन गए थेपर यह बिल्डिंग 1931में पूरी हो पाई। संसद भवन की इमारत 1927 में तैयार हुई।
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित
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