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Saturday, February 14, 2026

क्रिकेट के नियम कौन बनाता है?

हाल में मेरीलेबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने खेल के 73 नियमों  में बदलाव किए हैं, जिससे खेल से जुड़ी बहुत सी बातें बदल गई हैं। हालाँकि इंटरनेशनल क्रिकेट कौंसिल (आईसीसी) क्रिकेट का वैश्विक शासी निकाय है, पर खेल के नियम एमसीसी के होते हैं। उनका कॉपीराइट एमसीसी के पास है, जिन्हें आईसीसी लागू करवाता है। आईसीसी प्लेइंग कंडीशंस तय करता है, जैसे डीआरएस, पावर प्ले, ओवर की समय-सीमा वगैरह। 1788 में एमसीसी ने क्रिकेट का पहला कोड बनाया था। इसके बाद 1835, 1884, 1947, 1980, 1992 और 2000 में कोड में संशोधन किया गया। इन नियमों का सातवाँ और अंतिम संस्करण 2017 में जारी किया गया था। नवीनतम परिवर्तन 2022 में हुए थे। एमसीसी निजी क्लब है, पहले यह इंग्लैंड की टीम का प्रतिनिधि क्लब था। इंग्लैंड से बाहर जाने वाली टीम एमसीसी के नाम से जाती थी। 1996-97 के न्यूज़ीलैंड दौरे में इंग्लैंड की टीम आखिरी बार एमसीसी नाम से गई। आईसीसी की स्थापना 1909 में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ़्रीका के प्रतिनिधियों ने इंपीरियल क्रिकेट कॉन्फ्रेंस नाम से की। 1965 में, इसे इंटरनेशनल क्रिकेट कॉन्फ्रेंस कर दिया गया। वर्तमान नाम 1987 में अपनाया गया। इसका मुख्यालय दुबई में है।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित

Sunday, December 25, 2022

हैलोवीन क्या होता है?

 

हैलोवीन अमेरिका और यूरोप में 31 अक्तूबर को मनाया जाने वाला एक अवकाश है। अब भारत समेत दुनिया के बहुत से देशों में इसे मनाने लगे हैं। इस दिन लोग विचित्र किस्म की पोशाकें पहनते हैं। डरावनी फिल्में देखते हैं। भूत-प्रेत के खेल-खेलते हैं। खासतौर से कद्दू या सीताफल को काटकर उससे इंसान का चेहरा बनाकर उसके भीतर मोमबत्ती जलाते हैं। मैदान में होली की तरह से आग जलाते हैं। बच्चे घर-घर जाकर उपहार प्राप्त करते हैं। मोटे तौर पर गर्मी की समाप्ति और सर्दी के आगमन के इस पर्व में दुष्टात्माओं से छुटकारा पाने की कामना होती है। लौह युग की यूरोपीय सेल्टिक-संस्कृति में इसकी शुरुआत हुई थी।

जुगनू क्यों चमकते हैं?

जुगनू एक प्रकार का उड़ने वाला कीड़ा है, जिसके पेट में रासायनिक क्रिया से रोशनी पैदा होती है। इसे बायोल्युमिनेसेंस कहते हैं। इसके शरीर में ल्यूसिफेरिन नामक जटिल कार्बनिक यौगिक तथा ल्यूसिफेरेज नामक एन्जाइम पाया जाता है। इस एन्जाइम, और ऑक्सीजन तथा मैग्नीशियम आयन की उपस्थिति में ल्यूसिफेरिन पदार्थ से प्रकाश पैदा होता है। जीवधारियों के शरीर से प्रकाश  उत्पन्न होना बायोल्युमिनेसेंस कहलाता है। यह कोल्ड लाइट कही जाती है इसमें इंफ्रा रेड और अल्ट्रा वॉयलेट देनों फ्रीक्वेंसी नहीं होतीं।

एक ओवर में छह गेंदें ही क्यों?

सच यह है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सन 1979-80 के बाद से ही सारी दुनिया में छह गेंदों के मानक ओवर का चलन शुरू हुआ है। उसके पहले अलग-अलग समय और अलग-अलग देशों में चार, पाँच और आठ गेंदों के ओवर भी होते रहे हैं। क्रिकेट के ज्ञात इतिहास में इंग्लैंड में सन 1889 तक चार गेंदों का एक ओवर होता था। उसके बाद 1899 तक पाँच गेंद का ओवर हो गया। इसके बाद सन 1900 में एक पहल के बाद छह गेंदों के ओवर की शुरूआत हुई। शुरूआती वर्षों में ऑस्ट्रेलिया में भी चार गेंद का ओवर होता था। इसके बाद जब इंग्लैंड में छह गेंद का ओवर हुआ तो वहाँ भी छह गेंद का ओवर हो गया। पर 1922-23 के सीज़न से ऑस्ट्रेलिया ने आठ गेंदों का एक ओवर करने का फैसला किया।

ऑस्ट्रेलिया की देखा-देखी इंग्लैंड ने भी सन 1939 में अपने घरेलू क्रिकेट में दो साल के लिए आठ गेंदों के ओवर का प्रयोग किया। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जब इंग्लैंड में नियमित रूप से क्रिकेट का सीज़न जब शुरू हुआ तब छह गेंदों के ओवर की वापसी हो गई। दक्षिण अफ्रीका में 1938-39 और फिर 1957-58 में आठ गेंद का ओवर चला। इसी तरह पाकिस्तान में 1974-75 और 1977-78 में आठ गेंद का ओवर रहा। गेंदों की संख्या घटाने और बढ़ाने के कारणों का विवरण दस्तावेजों में नहीं मिलता। इतना अनुमान है कि चार गेंदों का ओवर काफी छोटा लगा। उसे कुछ और बड़ा करने के प्रयास में यह संख्या आठ तक पहुँच गई।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 5 नवंबर, 2022 को प्रकाशित


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