Wednesday, April 6, 2011

बाल फिल्म सोसायटी की स्थापना कब और क्यों की गई?


बाल फिल्म सोसायटी की स्थापना कब और क्यों की गईसरकार ने फिल्मों को पुरस्कार कब से देना शुरू किया?

बच्चों को स्वस्थ मनोरंजन और ज्ञान प्रदान करने के लिए बाल फिल्म सोसायटी बनाई गई थी। इसका काम फिल्में बनाना, वितरित करना और दिखाने की व्यवस्था करना भी था। 11 मई 1955 को इसकी स्थापना हुई थी। इसके पहले अध्यक्ष पं.हृदय नाथ कुंजरू थे। सोसायटी के साथ केदार शर्मा, सत्येन बोस, मोहन कौल, राजेन्द्र शर्मा, मृणाल सेन, श्याम बेनेगल, साई पराँजपे, और तपन सिन्हा जैसे प्रतिष्ठित फिल्मकार जुड़े रहे। सोसायटी वर्कशॉप और फिल्म समारोह भी करती है।  

भारत में फिल्मों के राष्ट्रीय पुरस्कार 1954 में शुरू हुए थे। इनका उद्देश्य सार्थक और रचनात्मक सिनेमा को बढ़ावा देना था। 1973 में फिल्म समारोह निदेशालय की स्थापना होने के बाद से फिल्म पुरस्कार का काम भी निदेशालय के पास चला गया। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का उद्देश्य देश की सभी भाषाओं के कथा और गैर-कथा चित्रों और उनके अभिनेताओं को पुरस्कृत करना है। हर साल दिल्ली में एक समारोह करके राष्ट्रपति के हाथों यह पुरस्कार दिया जाता है।


स्टेम सेल क्या है



स्टेम सेल क्या है? इसका चिकित्सा विज्ञान में क्या इस्तेमाल है?

स्टेम सेल बहुकोशिकीय जीवों के शरीर की कोशिकाएं या सेल हैं। इनकी खासियत होती है माइटोटिक सेल डिवीजन के तहत इनका खुद बढ़ना। शरीर के भीतर अपने अंगों की मरम्मत करने की प्रणाली है। ज़रूरी होने पर उससे शरीर के भीतर ही क्षतिग्रस्त अंग को उगाने की क्षमता भी होती है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने नाभि-रज्जु (अम्ब्लिकल कॉर्ड) और अस्थ-मज्जा (बोन मैरो) से खून की कोशिका लेकर उसका कल्चर करके शरीर में प्रवेस कराकर भीतरी अंगों को विकसित करने में सफलता पाई है। ऐसा सम्भव है कि मनुष्य के शरीर का कोई अंग काम करना बंद कर दे तो शरीर स्वयं उस अंग को या तो सुधार दे या नया अंग विकसित कर दे। साठ के दशक में टोरंटो विश्वविद्यालय के अर्नेस्ट ए मैक्यलॉक और जेम्स ई टिल ने इस सिलसिले में बुनियादी अनुसंधान किया था। इस अनुसंधान से चिकित्सा जगत में क्रांति आ गई है। यह इलाज अभी प्रयोग के स्तर पर है और अनेक देशों में इसकी अनुमति नहीं है।  


Sunday, April 3, 2011

अल्पसंख्यकों से दुर्व्यवहार करने वाले देशों पर अंतरराष्ट्रीय कारवाई सम्भव है?


जिन देशों में अल्पसंख्यकों के साथ दोहरा व्यवहार किया जा  रहा है, जहां उनका जीवन और स्वतंत्रता असुरक्षित है, वहां क्या संयुक्त राष्ट्र या किसी दूसरी अंतराराष्ट्रीय संस्था द्वारा अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की जा सकती है? या फिर केवल वही राष्ट्र उनके हित अहित तय करता है?

सबसे पहले अल्पसंख्यक शब्द के अर्थ को समझें। दुनिया में जातीय, सामुदायिक, वैचारिक धार्मिक, वर्गीय, भाषायी, लैंगिक, क्षेत्रीय, सांस्कृतिक या किसी दूसरे आधार पर अल्पसंख्यक हो सकते हैं। आधुनिक लोकतंत्र की भावना है कि बहुसंक्यकों की भीड़ में अल्पसंख्यकों के साथ अन्याय न हो। अल्पसंख्यक एक व्यक्ति भी हो सकता है और एक समूह भी। अंतरऱाष्रीय कानून के तहत बच्चों, स्त्रियों और शरणार्थियों के अधिकार भी इसके तहत रखे जाते हैं।

पहले विश्वयुद्ध के दौरान 1914 से 1920 के बीच ऑटोमन साम्राज्य (तुर्की) ने उत्तरी मेसोपोटामिया के असीरियन लोगों का जबर्दस्त संहार किया गया। अनुमान है कि इस संहार में पाँच से साढ़े सात लाख लोग मारे गए। ऑटोमन साम्राज्य ने ऐसे ही आर्मीनियन और पोंटिक ग्रीक नरसंहार किए, जिनमें करीब 30 लाख अल्पसंख्यक ईसाइयों की हत्या हुई। पहले विश्वयुद्ध के बाद उत्तरी राक का सिमेले नरसंहार भी इसी तरह की एक मिसाल है। इसी तरह नाजी जर्मनी में द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान करीब 60 लाख यहूदियों का संहार किया गया।

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में अनेक अतरराष्ट्रीय संधियां हुईं हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं नरसंहार अपराध के विरोध में संधि 1948, जातीय भेदभाव के खिलाफ 1965, नागरिक और राजनैतिक अधिकार 1966, आर्थक, सामाजिक र सांस्कृतिक अधिकार 1966, स्त्रियों से भेदभाव 1979, टॉर्चर तथा क्रूरता 1984, बाल अधिकार 1989, इसके अलावा 1992 का संयुक्त राष्ट्र का अल्पसंख्यक अधिकारों का घोषणापत्र भी इसकी एक कड़ी है। हर साल संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा जारी होने वाली मानव विकास रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख होता है कि किन देशों ने इन संधियों की पुष्टि की है। हालांकि संधियों की पुष्टि करने से कोई देश इन अपराधों से मुक्त नहीं हो जाता, पर यह काम धीरे-धीरे ही सम्भव है। और इसमें सभी देशों की सरकारों और जनता की सहमति की आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय कारवाई के लिए बड़े स्तर पर आम सहमति बनानी होती है। ऐसी सहमति के तहत ही सूडान के राष्ट्रपति उमर हसन अल-बशीर के खिलाफ दारफुर नर संहार के काऱण गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ। इसी तरह संयुक्त राष्ट्र ने हाल में लीबिया में जनता को कुचलने की कारवाई के विरोध में फौजी कारवाई की फैसला किया।    



भारत में कुल कितने जिले हैं?




भारत में कुल कितने जिले हैं? क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा और सबसे छोटा जिला कौन सा है? जिला-निर्माण, निर्धारण की अवधारणा क्या है?

भारत के 28 राज्यों और सात केन्द्र शासित क्षेत्रों में जिलों की संख्या नवीनतम अनुमान के अनुसार  687 है। यह पोस्ट जब 2011 में लिखी गई थी, तब 2011 के जनगणना आँकड़े प्राप्त नहीं हुए थे। तब इस पोस्ट में देश के जिलों की संख्या 638 लिखी गई थी। 2011 की जनगणना में यह संख्या 640 थी। 15 सितम्बर 2016 तक का संशोधित विवरण इस प्रकार हैः- 
राज्य (663)- आंध्र 13, अरुणाचल 20, असम 35, बिहार 38, छत्तीसगढ़ 27, गोवा 02, गुजरात 33, हरियाणा 21, हिमाचल 12, जम्मू-कश्मीर 22, झारखंड 24, कर्नाटक 30, केरल 14, मध्य प्रदेश 51, महाराष्ट्र 36, मणिपुर 09, मेघालय 11, मिजोरम 08, नगालैंड 11, उड़ीसा 30, पंजाब 22, राजस्थान 33, सिक्किम 04, तमिलनाडु 32, त्रिपुरा 08, उत्तर प्रदेश 75, उत्तराखंड 13, पश्चिम बंगाल 20, तेलंगाना 10। केन्द्र शासित क्षेत्र(24)- अंडमान निकोबार 03, चंडीगढ़ 01, दादरा-नगर हवेली 02, दमण-दीव 02, लक्षद्वीप 01, दिल्ली 11, पुदुच्चेरी 04।

Updated on Sep 15.2016

No. of districts in each state or UT
Map keyName of State or Union Territory (Italicized)Number of Districts
1Andhra Pradesh13
2Arunachal Pradesh20
3Assam35
4Bihar38
5Chhattisgarh27
6Goa  2
7Gujarat33
8Haryana21
9Himachal Pradesh12
10Jammu and Kashmir22
11Jharkhand24
12Karnataka30
13Kerala14
14Madhya Pradesh51
15Maharashtra36
16Manipur9
17Meghalaya11
18Mizoram8
19Nagaland11
20Odisha30
21Punjab22
22Rajasthan33
23Sikkim4
24Tamil Nadu32
25Tripura8
26Uttar Pradesh75[5]
27Uttarakhand13
28West Bengal20
29Telangana10
AAndaman and Nicobar3
BChandigarh1
CDadra and Nagar Haveli2
DDaman and Diu2
ELakshadweep1
FNCT Delhi11
GPuducherry4
36Total 687

भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में जिला एक महत्वपूर्ण इकाई है। केन्द्र सरकार के बाद होती है राज्य सरकारों और केन्द्र शासित प्रदेशों के अधीन चलने वाली प्रशासनिक व्यवस्था। इसमें पहला स्तर होता है डिवीजन का जो कई जिलों को मिलकर बनता है। उसके नीचे जिला होता है, जो वस्तुतः प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। हालांकि डिलाधिकारी या डिप्टी कमिश्नर प्रदेश सरकार के अंतर्गत काम करते हैं, पर वे भारतीय प्रशासनिक सेवा के सदस्य होते हैं। जिलाधिकारी का पद अंग्रेजी शासनकाल में सन 1772 में शुरू किया गया था. यह पद राजस्व संग्रह के लिए था, इसीलिए इसे डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर भी कहते हैं, पर अपने प्रारंभिक काल में जिलाधिकारी के पास राजस्व के अलावा नागरिक मामले, न्याय और फौजी ताकत भी थी। सन 1792 में जिला न्यायाधीश का पद बनाया गया।  

क्षेत्रफल के आधार पर देश का सबसे बड़ा जिला मेरे विचार से गुजरात का कच्छ होना चाहिए। इसका क्षेत्रफल 45, 652 वर्ग किलोमीटर है। यों भारत सरकार की वैबसाइट http://leh.nic.in/ में जम्मू कश्मीर के लेह को सबसे बड़ा जिला कहा गया है जिसका क्षेत्रफल 45110 वर्ग किलोमीटर बताया गया है। देश का सबसे छोटा जिला पुदुच्चेरी का माहे है, जिसका क्षेत्रफल 9 वर्ग किलोमीटर है।
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Saturday, April 2, 2011

पूर्व में है, पर नाम पश्चिमी बंगाल क्यों?


पश्चिम बंगाल राज्य भारत के पूर्वी भाग में स्थित है तो यह पश्चिमी बंगाल कैसे है? पूर्वी बंगाल क्यों नहीं?

आज हम जिसे पश्चिम बंगाल कहते हैं वह समूचे बंगाल का एक हिस्सा है। सन 1757 की प्लासी लड़ाई में ईस्ट इंडिया कम्पनी की जीत से अंग्रेजी शासन को बुनियादी आधार मिला। अंग्रेजी शासन ने शुरू में कोलकाता को अपनी राजधानी बनाया। बीसवीं सदी के प्रारम्भ में वायसराय लॉर्ड कर्जन ने प्रशासनिक कारणों से बंगाल को दो हिस्सों में बाँटने का फैसला किया। इसके पीछे जो भी कारण रहा हो, पर यह स्पष्ट था कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र पूर्वी बंगाल बना और हिन्दू बहुल क्षेत्र पश्चिमी बंगाल। 16 अक्टूबर 1905 को बंगाल का विभाजन हुआ। बंग भंग की इस कारवाई ने भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन की चिंगारी जला दी। विभाजन का भारी विरोध हुआ, पर वह टला नहीं। सन 1906 में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने आमार शोनार बांग्ला... गीत लिखा, जो सन 1972 में बांग्लादेश का राष्ट्रगीत बना। बहरहाल 1947 में देश के विभाजन के बाद भी बंगाल विभाजित रहा। पूर्वी बंगाल, पूर्वी पाकिस्तान बना और पश्चिमी बंगाल भारत में रहा। वह नाम अबतक चला आ रहा है।    


राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

किस देश में दो राजधानियां हैं?


किस देश में दो राजधानियां हैं?


एक नहीं अनेक देशों में दो राजधानियाँ हैं। एक से ज्यादा राजधानियाँ होने के अलग-अलग कारण हैं। आमतौर पर राजधानी के रूप में एक ही नाम तय होता है, पर व्यावहारिक अर्थ में उनकी संख्या बढ़ जाती है। नीचे कुछ ऐसे देशों के नाम हैं जहां एक से ज्यादा राजधानियाँ हैं।

बेनिनः पश्चिम अफ्रीका के इस देश की घोषित राजधानी पोर्तोनोवो है, पर सरकार के सारे काम देश के सबसे बड़े शहर कोतोनू से होते हैं। वोलीवियाः- लैटिन अमेरिका के इस देश की संवैधानिक राजधानी सुक्रे है, पर प्रशासन देश के दूसरे सबसे बड़े शहर ला पाज़ से चलता है। राष्ट्रपति भवन और राष्ट्रीय संसद भी वहीं है, इसलिए उसे ही राजधानी माना जाता है। चिलीः-यहां की घोषित राजधानी सांतियागो द चीले है, पर व्यावहारिक राजधानी बालपराइसो है, क्योंकि देश की संसद वहां बैठती है। आयवरी कोस्टः-पश्चिम अफ्रीका के इस देश की आधिकारिक राजधानी जामास्जुक्रू है, पर सारे सरकारी काम पुरानी राजधानी अबीजान में होते हैं और ज्यादातर विदेशी दूतावास भी यहीं हैं। मलेशियाः-राजधानी कुआलालम्पुर है, देश की संसद भी वहीं है, पर देश की सरकार का मुख्यालय सन 1999 में पुत्रजया नाम के शहर में भेज दिया गया। देश की सर्वोच्च अदालत भी वहीं है। नीदरलैंड्सः-हॉलैण्ड या नीदरलैंड्स की राजधानी एम्सटर्डम है, पर देश की सरकार, सर्वोच्च अदालत, संसद और राज दरबार सब द हेग में हैं। दक्षिण अफ्रीकाः-यहां की राजधानी प्रीटोरिया है। पर देश की राष्ट्रीय संसद केपटाउन में है और सुप्रीम कोर्ट ब्लोमफोतें में। इस तरह से यहाँ तीन राजधानियां हैं। श्रीलंकाः-श्री जयवर्धनपुरा देश की नई प्रशासनिक राजधानी है, पर व्यावहारिक अर्थ में कोलम्बो भी राजधानी है। ऐसा ही स्वाजीलैंड, तंजानिया और पश्चिमी सहारा में है। सब जानते हैं कि इस्रायल की राजधानी तेल अवीव है, पर इस्रायल अपनी राजधानी यरूशलम मानता है, पर संयुक्त राष्ट्र नहीं मानता। जर्मनी में सुप्रीम कोर्ट कार्लस्रूहे शहर में है, राजनैतिक राजधानी बर्लिन है और अनेक मंत्रालय बॉन में हैं जो पश्चिम जर्मनी की राजधानी थी। दक्षिण अफ्रीका की तीन राजधानियाँ हैं: प्रिटोरिया, केप टाउन और ब्लोमफ़ोन्टेन। प्रिटोरिया: प्रशासनिक राजधानी, केप टाउन: विधायी राजधानी और ब्लोमफ़ोन्टेन: न्यायिक राजधानी। 



केन्द्र द्वारा राज्यों को धन देने का क्या सिद्धांत है?


केन्द्र सरकार द्वारा राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को धन देने के क्या सिद्धांत निर्धारित हैं? राज्यों में इसके खर्च और सही उपयोग के लिए केन्द्र कैसे नियंत्रण कर सकता है?

भारत में संघीय राज्यव्वस्था तीन सतह पर काम करती है। केन्द्र, राज्य और केन्द्र शासित क्षेत्र। 1992 में 73 वें और 74 वें संविधान संशोधन के बाद पंचायती राज भी इस व्यवस्था में शामिल हो गया है। संविधान के अनुच्चेद 268 से 281 तक राज्यों और केन्द्र के बीच राजस्व संग्रहण और वितरण की व्यवस्था परिभाषित की गई है। देश की अर्थव्यवस्था पंचवर्षीय योजनाओं और वार्षिक बजटों के आधार पर चलतीं हैं। दोश का योजना आयोग इस योजना-व्यवस्था का नियामक है। आर्थिक संसाधनों के संग्रहण और वितरण की व्यवस्था जटिल है। इसके साथ तमाम राजनैतिक, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक भावनात्मक मसले भी जुड़ते हैं। इसलिए यह स्थिर नहीं है। इसमें निरंतर बदलाव चल रहे हैं।

चौथी पंचवर्षीय योजना के पहले हमारे यहाँ साधनों के वितरण की पारदर्शी व्यवस्था नहीं थी। 1969 में प्रसिद्ध समाजशास्त्री डीआर गाडगिल ने क फॉर्मूला बनाया जिसके तहत राज्यों को दी जाने वाली 60 प्रतिशत राशि जनसंख्या के आधार पर 10 प्रतिशत प्रतिव्यक्ति आय पर, 10 प्रतिशत टैक्स वसूली के प्रयत्नों पर, 10 प्रतिशत सिंचाई और बिजली परियोजनाओं पर और 10 प्रतिशत विशिष्ट समस्याओं के आधार पर तय की गई। 1980 में इस फॉर्मूले में संशोधन हुआ। इसके अंतर्त 60 प्रतिशत राशि जनसंख्या पर, 25 प्रतिशत प्रति व्यक्ति आय पर, 7.5 प्रतिशत प्रदर्शन पर और 7.5 प्रतिशत विशिष्ट समस्याओं पर तय किया गया।

संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत भारत के राष्ट्रपति वित्त आयोग का गठन करते हैं। इसका उद्देश्य राज्यों और केन्द्र के बीच राजस्व वितरण की व्यवस्था पर विचार करना है। इस समय 13 वां वित्त आयोग काम कर रहा है। इसका प्रभावी कार्यकाल 2010-2015 है। इसके अध्यक्ष विजय केलकर हैं। केन्द्र-राज्य रिश्तों की बागडोर केन्द्र के हाथ में रहती है। संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत आर्थिक आपतकाल घोषित करने का अधिकार केन्द्र के पास है। इस अधिकार का इस्तेमाल आज तक कभी हुआ नहीं है। 
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