Monday, September 16, 2013

पेटेंट क्या है और यह किस प्रकार दिया जाता है?

पेटेंट क्या है और यह किस प्रकार दिया जाता है? बासमती चावल के पेटेंट का विवाद क्या था कृपया बताएं।
बौद्धिक सम्पदा अधिकार मस्तिष्क की उपज हैं और इनमे सबसे महत्वपूर्ण हैं - पेटेंट। पेटेंटी, पेटेंट का उल्लंघन करने वाले तरीके या उत्पाद के निर्माण को न्यायालय द्वारा रुकवा सकता है। ‘पेटेंट’ शब्द लैटिन से आया है। पुराने जमाने में शासको या सरकारों के द्वारा पदवी‚ हक‚ विशेष अधिकार पत्र के द्वारा दिया जाता है। आजकल पेटेंट शब्द का प्रयोग आविष्कारों के संबंध में होता है। इस तरह का प्रयोग पहली बार 15वीं शताब्दी के आस-पास आया। सर्वप्रथम, पेटेंट कानून जैसा इसे आज समझा जाता हैं, 14 मार्च, 1474 को वियना सिनेट के द्वारा को पारित किया गया। भारत में पहला पेटेंट सम्बन्धित कानून, 1856 में पारित अधिनियम था। तब से अब तक यह कई तरीके के बदलावों से गुजर चुका है। राइस टेक एक अमेरिकन कम्पनी है यह बासमती और टैक्समती के नाम से चावल बेच रही थी। 1994 में राइस टेक ने 20 तरह के बासमती चावल के लिए पेटेंट प्राप्त करने के लिए यूएस पेटेंट एण्ड ट्रेड आर्गेनाइजेशन (यूएसपीटीओ) में एक आवेदन पत्र दाखिल किया। यूएसपीटीओ ने 1997 में सभी पेटेंटों को मंजूर कर दिया। भारत ने अप्रैल 2000 में तीन पेटेंटों की पुन: परीक्षा के लिए एक आवेदन पत्र प्रस्तुत किया। राइसटेक ने इन तीन के साथ एक और पेटेंट को वापस ले लिया। बाद में राइसटेक से 11 अन्य पेटेंटों को भी वापस लेने के लिए भी कहा गया जो कि उसने वापस ले लिया। राइसटेक को पेटेंट का नाम भी बासमती राइस लाइन्स एंड ग्रेन्स से बदल कर बीएएस 867 आरटी 1121 और आरटी 117 करना पड़ा।

ब्लूचिप कंपनी क्या होती है ?
ब्लू चिप शब्द पोकर के खेल से आया है जिसमें कई रंग के बाज़ी लगाने वाले डिस्क होते है, जिन्हें चिप कहते हैं। पोकर के खेल में और कसीनो में नकदी की जगह इस्तेमाल होने वाले टोकनों में सबसे ज्यादा कीमत नीले डिस्क की होती है। मान लें सफेद चिप की कीमत 1 रुपया है, लाल का पाँच रुपया तो नीले की होगी 10 रुपया। यह शब्द शेयर बाजार में इस्तेमाल होता है तब माना जाता है श्रेष्ठ-मजबूत कंपनियों के शेयर। किसी कंपनी का ब्लू चिप होने का अभिप्राय यह है कि उसके शेयर निवेशकों के लिए पसंदीदा शेयर हैं। इस प्रकार की कंपनियों में सौदे भी काफी होते हैं, उतार-चढ़ाव भी काफी होता है और उनमें निवेशकों का आकर्षण भी खूब बना रहता है।ब्लू चिप का मतलब है राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त, सर्वसम्पन्न और स्थिर अर्थव्यवस्था वाली कंपनी। यह एक तरह से मापदंड होता है जिसमें किसी कंपनी को हम ब्लू चिप तभी कहते हैं जब वह ढलती अर्थव्यवस्था में भी सामान्य ढंग से व्यापार कर सके और मुनाफ़ा कमा सके।

शेयरों की कीमत कैसे घटती-बढती है? स्टॉक इंडेक्स या शेयर सूचकांक क्या है?
शेयर का सीधा सा अर्थ होता है हिस्सा। शेयर बाजार की भाषा में बात करें तो शेयर का अर्थ है कंपनियों में हिस्सा। उदाहरण के लिए एक कंपनी ने कुल 10 लाख शेयर जारी किए हैं। आप कंपनी के प्रस्ताव के अनुसार जितने अंश खरीद लेते हैं आपका उस कंपनी में उतने का मालिकाना हक हो गया जिसे आप किसी अन्य खरीददार को जब भी चाहें बेच सकते हैं। इस खरीद फरोख्त में शेयर के भाव बढ़ते और घटते हैं। 10 रु के शेयर की कीमत चार-पाँच सौ तक हो जाती है। इन कंपनियों के शेयरों का मूल्य शेयर बाजार में दर्ज होता है। सभी कंपनियों का मूल्य उनकी लाभदायक क्षमता के अनुसार कम-ज्यादा होता है। भारत में इस पूरे बाजार में नियंत्रण भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) का होता है। इसकी अनुमति के बाद ही कोई कंपनी अपना प्रारंभिक निर्गम इश्यू (आईपीओ) जारी कर सकती है। शेयर बाजार में लिस्टेड होने के लिए कंपनी को बाजार से लिखित समझौता करना पडता है, जिसके तहत कंपनी अपने हर काम की जानकारी बाजार को समय-समय पर देती रहती है, खासकर ऐसी जानकारियां, जिससे निवेशकों के हित प्रभावित होते हों। इन्हीं जानकारियों के आधार पर कंपनी का मूल्यांकन होता है और इस मूल्यांकन के आधार पर मांग घटने-बढ़ने से उसके शेयरों की कीमतों में उतार-चढाव आता है। अगर कोई कंपनी लिस्टिंग समझौते के नियमों का पालन नहीं करती, तो उसे डीलिस्ट करने की कार्रवाई सेबी करता है।

ऑटोग्राफ देने का रिवाज़ कैसे शुरू हुआ?
ऑटोग्राफ शब्द का अर्थ है हस्तलेख। ऑटोस यानी स्व और ग्राफो यानी लिखना। यानी जो आपने स्वयं लिखा है। पुराने वक्त में टाइपिंग या छपाई होती नहीं थी। केवल हाथ से लिखा जाता था, पर जो जो पत्र, दस्तावेज़ या लेख व्यक्ति स्वयं लिखता उसे ऑटोग्राफ कहते। ऐसा भी होता कि दस्तावेज़ कोई और लिखता और उसके नीचे उसे अधिकृत करने वाला अपने हाथ से अपना नाम लिख देता। यह नाम उसकी पहचान था। ऑटोग्राफ इस अर्थ में दस्तखत हो गया। किसी को याद रखने का सबसे अच्छा तरीका उसके हस्तलेख या ऑटोग्राफ हासिल करना भी हो गया। राजाओं, राष्ट्रपतियों, जनरलों, कलाकारों, गायकों वगैरह के दस्तखत अपने पास जमा करके रखने का चलन बीसवीं सदी में बढ़ा है। इस शौक को फिलोग्राफी कहते हैं।






Thursday, September 12, 2013

आपको याहू का पूरा नाम मालूम है?

याहू बड़ा विचित्र नाम है। इसे किसने स्थापित किया?



याहू डॉट कॉम की स्थापना अमरीका के स्टैनफ़र्ड विश्वविद्यालय में इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी कर रहे दो छात्रों, डेविड फ़िलो और जैरी यांग ने 1994 में की थी। यह वेबसाइट जैरी ऐन्ड डेविड्स गाइड टू द वर्ल्ड-वाइड-वैब के नाम से शुरु हुई थी लेकिन फिर उसे एक नया नाम मिला, यट अनदर हाइरार्किकल ऑफ़िशियस ओरैकिल ("Yet Another Hierarchical Officious Oracle")। जिसका संक्षिप्त रूप बनता है याहू। इसमें हायरार्किकल से आशय है कि परत दर परत काम। जैरी और डेविड ने इसकी शुरुआत इंटरनेट पर अपनी व्यक्तिगत रुचियों के लिंकों की एक गाइड के रूप में की थी लेकिन फिर वह बढ़ती चली गई। फिर उन्होंने उसे श्रेणीबद्ध करना शुरु किया। जब वह भी बहुत लम्बी हो गई तो उसकी उप-श्रेणियां बनाईं। कुछ ही समय में उनके विश्वविद्यालय के बाहर भी लोग इस वेबसाइट का प्रयोग करने लगे। अप्रैल 1995 में सैकोया कैपिटल कम्पनी की माली मदद से याहू को एक कम्पनी के रूप में शुरू किया गया। इसका मुख्यालय कैलिफ़ोर्निया में है और यूरोप, एशिया, लैटिन अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका में इसके कार्यालय हैं। comScore, Inc. के अनुसार जुलाई 2013 में याहू की वैबसाइट पर अमेरिका के विजिटरों की संख्या गूगल से ज्यादा थी।

तेरह की संख्या को खराब क्यों माना जाता है?

एक कारण यह है कि साल में बारह महीने, बारह चंद्रमा होते हैं। इसलिए 13 वाँ अनिश्चित और रहस्यमय मान लिया गया। तेरह को मूलतः ईसाई परम्परा में मनहूस माना जाता है। ईसाई इसे इसलिए अशुभ मानते हैं क्योंकि ईसा मसीह ने अपने अनुयायियों के साथ जो अंतिम भोज किया था उसमें जूडस समेत तेरह लोग थे। कहते हैं कि जूडस ने ईसा के साथ विश्वासघात किया जिसके फलस्वरूप ईसा को सूली चढ़ाया गया। चूंकि ईसा मसीह को शुक्रवार के दिन सूली पर चढ़ाया गया था इसलिए शुक्रवार को भी शुभ दिन नहीं माना जाता। शुक्रवार के दिन 13 तारीख़ पड़े तो उसे और भी अशुभ मानते हैं। संयोग से 13 सितम्बर 2013 को शुक्रवार है।  कई होटलों में 13 नम्बर के कमरे नहीं होते। बिल्डिंगों में तेरहवीं मंजिल नहीं होती। 12 के बाद 12-ए या सीधे 14 नम्बर आ जाता है। बहरहाल ऐसे लोग भी हैं, जिनके लिए 13 लकी नम्बर है।

दिल्ली राज्य कब बना और उसके पहले मुख्यमंत्री कौन थे?

दिल्ली की स्थिति देश में सबसे अलग है। केन्द्र शासित क्षेत्र होते हुए भी इसकी विधानसभा है और इसके शासन प्रमुख मुख्यमंत्री होते हैं। दिल्ली में सबसे पहले विधानसभा 17 मार्च 1952 को बनी थी। उस समय यहाँ के पहले मुख्यमंत्री थे चौधरी ब्रह्म प्रकाश। राज्यों के पुनर्गठन के बाद 1956 में इसे केन्द्र शासित क्षेत्र बना दिया और विधानसभा खत्म हो गई। इसके बाद 1991 में संविधान के 69 वें संशोधन के बाद 1993 में यहाँ विधानसभा की पुनर्स्थापना हुई। दिल्ली को नेशनल कैपिटल टैरिटरी बनाया गया। सन 1991 में भारतीय संसद में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र अधिनियम पास हुआ जिसके अधीन दिल्ली को राज्य का दर्जा मिला। केवल क़ानून और व्यवस्था केंद्र सरकार के हाथों में रही। ये अधिनियम 1993 में लागू हुआ और विधानसभा के चुनाव हुए जिसमें भारतीय जनता पार्टी विजयी रही और पहले मुख्यमंत्री बने मदन लाल खुराना।

लिपस्टिक का इतिहास क्या है? यह कैसे बनाई जाती है? इसमें लगी चीजें पेट में चले जाने से कोई नुक़सान तो नहीं होता?

लिपस्टिक या होठों को रंगने का काम सभ्यता के पहले से हो रहा है। प्राचीन मेसोपोटामिया में स्त्रियाँ कीमती रत्नों को पीसकर उनका लेप होठों पर लगाती थीं। सिंधु घाटी की सभ्यता और प्राचीन मिस्र की सभ्यता में भी होठों को सजाने की वस्तुएं मिलीं हैं। इस्लाम के स्वर्णयुग में अरबी हकीम और जर्राह अबू अल कासिम अल बहराबी ने खुशबूदार बत्तियाँ बनाईं जिनसे होंठ सजाए जाते। यूरोप में ईसाई चर्च होठों को सजाने के विरोधी थे। पर इंग्लैंड में 16 वीं सदी में एलिजाबेथ प्रथम अपने होंठ लाल रंग से रंगतीं थीं। धीरे-धीरे यूरोप ने भी इसे स्वीकार कर लिया।
लिपस्टिक में कई तरह के मोम, तेल, रंग और त्वचा को मुलायम बनाने वाले पदार्थ होते हैं। इन्हें बारीक पीसा जाता है, उसमें कई तरह के मोम और तेल, जिसमें पैट्रोलेटम भी शामिल है मिलाए जाते हैं और फिर उस घोल को गर्म किया जाता है। उसके बाद इसे धातु के खांचों में ढालकर ठंडा किया जाता है। जब लिप्स्टिक जम जाती है तो उसे आधा सेकेंड के लिए आग की लपट दिखाई जाती है जिससे वह चिकनी हो जाए। लिप्स्टिक शरीर के तापमान से पिधल न जाए इसके लिए सैट्ल ऐलकोहल मिलाया जाता है। लेकिन इसमें प्रयोग होने वाले रसायनों से कोई नुक़सान नहीं होता क्योंकि ये बहुत कम मात्रा में होते हैं।

मल्टी मीडिया क्या है?

मल्टी का मतलब है विविध और मीडिया का अर्थ है प्रसार माध्यम। यानी कई तरह के प्रसार माध्यमों को मल्टी मीडिया कहा जाता है। लेकिन मल्टी मीडिया शब्द का प्रयोग कम्प्यूटर के संदर्भ में अधिक होता है। मल्टी मीडिया उसे कहते हैं जिसमें लिखित शब्द, चित्र, ध्वनि, बोली, विडियो और कम्प्यूटर प्रोग्रामों में से दो या दो से ज़्यादा तत्व हों। रेडियो में ध्वनि और बोली का प्रयोग होता है, अख़बारों और पत्रिकाओं में लिखित शब्द और चित्र का और टेलिविज़न में लिखित शब्द, ध्वनि, बोली और चित्र का समावेश होता है। टेलिविज़न एकतरफ़ा माध्यम है, जबकि कम्प्यूटर का प्रयोग करने वाला इटर-एक्टिटी क्रिया प्रतिक्रिया कर सकता है, जब चाहे जैसे चाहे उसका उपयोग कर सकता है।

हरित क्रांति क्या है? इसका इतिहास क्या है? भारत से इसका सम्बन्ध क्या है?

दूसरे विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद जब विजयी अमरीकी सेना जापान पहुंची तो उसके साथ कृषि अनुसंधान सेवा के ऐस सिसिल सैल्मन भी थे। तब सबका ध्यान इस बात लगा कि जापान का पुनर्निर्माण कैसे हो। सैल्मन का ध्यान खेती पर था। उन्हें नोरिन-10 नामकी गेंहू की एक क़िस्म मिली जिसका पौधा कम ऊँचाई का होता था और दाना काफ़ी बड़ा होता था। सैल्मन ने इसे और शोध के लिए अमेरिका भेजा। तेरह साल के प्रयोगों के बाद 1959 में गेन्स नाम की क़िस्म तैयार हुई। अमेरिकी कृषि विज्ञानी नॉरमन बोरलॉग ने गेहूँ कि इस किस्म का मैक्सिको की सबसे अच्छी क़िस्म के साथ संकरण किया और एक नई क़िस्म निकाली।
उधर भारत में अनाज की उपज बढ़ाने की सख़्त ज़रूरत थी। भारत को बोरलॉग और गेहूं की नोरिन क़िस्म का पता चला। भारत में आईआर-8 नाम का बीज लाया गया जिसे इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट ने विकसित किया था। पूसा के एक छोटे से खेत में इसे बोया गया और उसके अभूतपूर्व परिणाम निकले। 1965 में भारत ने गेंहू की नई क़िस्म के 18 हज़ार टन बीज आयात किए। कृषि क्षेत्र में ज़रूरी सुधार लागू किए, कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से किसानों को जानकारी उपलब्ध कराई, सिंचाई के लिए नहरें बनवाईं और कुंए खुदवाए, किसानों को दामों की गारंटी दी और अनाज को सुरक्षित रखने के लिए गोदाम बनवाए। देखते ही देखते भारत अपनी ज़रूरत से ज़्यादा अनाज पैदा करने लगा। नॉरमन बोरलॉग हरित क्रांति के प्रवर्तक माने जाते हैं लेकिन भारत में हरित क्रांति लाने का श्रेय कृषिमंत्री सी सुब्रमण्यम को भी जाता है। हरित क्रांति शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल युनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएड) के पूर्व डायरेक्टर विलियम गॉड ने सन 1968 में किया।

सैटेलाइट फ़ोन क्या होता है और कैसे काम करता है?

सैटलाइट फ़ोन पृथ्वी की कक्षा में स्थित सैटेलाइटों के ज़रिए काम करता है इसलिए आप चाहे हिमालय पर हों, अंटार्कटिका में या दुनिया के किसी भी कोने में वह हर जगह काम करता है। ऐसे कोई 24 उपग्रह हैं जो पृथ्वी के हर क्षेत्र से जुड़े हैं। अभी तकनोलॉजी इतनी विकसित नहीं हो पाई है कि घर के भीतर से आप सैटलाइट फ़ोन पर बात कर सकें। इसके लिए आपको खुले स्थान में आना पड़ता है और एक डिश की सहायता से उपग्रह का सिग्नल लेना पड़ता है। जैसे ही सिग्नल मिल जाए आप दुनिया के किसी कोने से कहीं भी बात कर सकते हैं।

हाइड्रोग्राफ़िक सर्वे क्या है?

हाइड्रोग्राफ़िक सर्वे, समुद्र का वैज्ञानिक मानचित्र होता है। इसमें यह पता लगाया जाता है कि समुद्र की गहराई कितनी है, उसकी क्या आकृति है, उसका तल कैसा है, उसमें किस दिशा से और कितनी गति की धाराएं बहती हैं और उसमें कब और कितना ऊँचा ज्वार आता है। इसका उद्देश्य है नौसंचालन को सुरक्षित बनाना। समुद्र के अलावा झीलों और नदियों का भी हाइड्रोग्राफ़िक सर्वे किया जाता है लेकिन केवल उस स्थिति में जब इनमें जहाज़ चलते हों। भारत में 1 जनवरी 1954 को नेवल हाइड्रोग्राफिक ऑफिस देहरादून में खोला गया। भारत के पास इस समय देश में ही बने आठ सर्वे पोत हैं, चार सर्वे मोटर बोट और दो हैलिकॉप्टर हैं।
 
अमिताभ बच्चन की पहली फ़िल्म कौन सी थी? 

अमिताभ बच्चन ने सबसे पहले जिस फिल्म में काम किया उसमें उनका अभिनय नहीं सिर्फ आवाज थी। वह फिल्म थी मृणाल सेन की भुवन शोम, जिसमें उन्होंने दृश्य वर्णन या नैरेशन का काम किया। यह 1969 की बात है और उसी साल अभिनय के लिहाज से उनकी पहली फ़िल्म आई सात हिंदुस्तानी। इसे ख़्वाजा अहमद अब्बास ने लिखा और उन्होंने ही इसका निर्देशन किया। इसमें अलग अलग धर्मों के सात हिन्दुस्तानी गोआ को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराने का प्रयास करते हैं। अमिताभ बच्चन ने अनवर अली अनवर नाम के एक शायर की भूमिका निभाई थी।

एफएमगोल्ड के कार्यक्रम बारिश सवालों की में शामिल

Wednesday, September 11, 2013

उल्का पिंड के कारण बनी थी महाराष्ट्र की लोनार झील



लोनार झील कहाँ है और इसकी विशेषता क्या है?

महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के लोनार शहर में समुद्र तल से 1,200 मीटर ऊँची सतह पर लगभग 100 मीटर के वृत्त में फैली हुई है। इस झील का व्यास दस लाख वर्ग मीटर है। इस झील का मुहाना गोलाई लिए एकदम गहरा है, जो 100 मीटर की गहराई तक है। 50 मीटर की गहराई गर्द से भरी है। यह 5 से 8 मीटर तक खारे पानी से भरी हुई है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आकाशीय उल्का पिंड की टक्कर से के कारण यह झील बनी है। अनुमान है कि क़रीब दस लाख टन का उल्का पिंड यहाण गिरा था। क़रीब 1.8 किलोमीटर व्यास की इस झील की गहराई लगभग पांच सौ मीटर है। आज भी इस विषय पर शोध जारी है कि लोनार में जो टक्कर हुई, वो उल्का पिंड और पृथ्वी के बीच हुई या फिर कोई ग्रह पृथ्वी से टकराया था। बहरहाल वह शिलाखंड तीन हिस्सों में टूट चुका था और उसने लोनार के अलावा अन्य दो जगहों पर भी झील बना दी। पूरी तरह सूख चुकी अम्बर और गणेश नामक इन झीलों का अब विशेष महत्व नहीं है। स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ वाशिंगटन, भारत और अमेरिका के भूगर्भ सर्वक्षण विभागों को प्रमाण मिले थे कि लोनर का निर्माण पृथ्वी पर उल्का पिंड के टकराने से ही हुआ था।

ऑटोग्राफ देने का रिवाज़ कैसे शुरू हुआ?

ऑटोग्राफ शब्द का अर्थ है हस्तलेख। ऑटोस यानी स्व और ग्राफो यानी लिखना। यानी जो आपने स्वयं लिखा है। पुराने वक्त में टाइपिंग या छपाई होती नहीं थी। केवल हाथ से लिखा जाता था, पर जो जो पत्र, दस्तावेज़ या लेख व्यक्ति स्वयं लिखता उसे ऑटोग्राफ कहते। ऐसा भी होता कि दस्तावेज़ कोई और लिखता और उसके नीचे उसे अधिकृत करने वाला अपने हाथ से अपना नाम लिख देता। यह नाम उसकी पहचान था। ऑटोग्राफ इस अर्थ में दस्तखत हो गया। किसी को याद रखने का सबसे अच्छा तरीका उसके हस्तलेख या ऑटोग्राफ हासिल करना भी हो गया। राजाओं, राष्ट्रपतियों, जनरलों, कलाकारों, गायकों वगैरह के दस्तखत अपने पास जमा करके रखने का चलन बीसवीं सदी में बढ़ा है। इस शौक को फिलोग्राफी कहते हैं।

पेटेंट क्या है और यह किस प्रकार दिया जाता है? बासमती चावल के पेटेंट का विवाद क्या था कृपया बताएं।

बौद्धिक सम्पदा अधिकार मस्तिष्क की उपज हैं और इनमे सबसे महत्वपूर्ण हैं - पेटेंट। पेटेंटी, पेटेंट का उल्लंघन करने वाले तरीके या उत्पाद के निर्माण को न्यायालय द्वारा रुकवा सकता है। ‘पेटेंट’ शब्द लैटिन से आया है। पुराने जमाने में शासको या सरकारों के द्वारा पदवी‚ हक‚ विशेष अधिकार पत्र के द्वारा दिया जाता है। आजकल पेटेंट शब्द का प्रयोग आविष्कारों के संबंध में होता है। इस तरह का प्रयोग पहली बार 15वीं शताब्दी के आस-पास आया। सर्वप्रथम, पेटेंट कानून जैसा इसे आज समझा जाता हैं, 14 मार्च, 1474 को वियाना सिनेट के द्वारा को पारित किया गया। भारत में पहला पेटेंट सम्बन्धित कानून, 1856 में पारित अधिनियम था। तब से अब तक यह कई तरीके के बदलावों से गुजर चुका है। राइस टेक एक अमेरिकन कम्पनी है यह बासमती और टैक्समती के नाम से चावल बेच रही थी। 1994 में राइस टेक ने 20 तरह के बासमती चावल के लिए पेटेंट प्राप्त करने के लिए यूएस पेटेंट एण्ड ट्रेड आर्गेनाइजेशन (यूएसपीटीओ) में एक आवेदन पत्र दाखिल किया। यूएसपीटीओ ने 1997 में सभी पेटेंटों को मंजूर कर दिया। भारत ने अप्रैल 2000 में तीन पेटेंटों की पुन: परीक्षा के लिए एक आवेदन पत्र प्रस्तुत किया। राइसटेक ने इन तीन के साथ एक और पेटेंट को वापस ले लिया। बाद में राइसटेक से 11 अन्य पेटेंटों को भी वापस लेने के लिए भी कहा गया जो कि उसने वापस ले लिया। राइसटेक को पेटेंट का नाम भी बासमती राइस लाइन्स एंड ग्रेन्स से बदल कर बीएएस 867 आरटी 1121 और आरटी 117 करना पड़ा।

शेयरों की कीमत कैसे घटती-बढती है? स्टॉक इंडेक्स या शेयर सूचकांक क्या है?

शेयर का सीधा सा अर्थ होता है हिस्सा। शेयर बाजार की भाषा में बात करें तो शेयर का अर्थ है कंपनियों में हिस्सा। उदाहरण के लिए एक कंपनी ने कुल 10 लाख शेयर जारी किए हैं। आप कंपनी के प्रस्ताव के अनुसार जितने अंश खरीद लेते हैं आपका उस कंपनी में उतने का मालिकाना हक हो गया जिसे आप किसी अन्य खरीददार को जब भी चाहें बेच सकते हैं। इस खरीद फरोख्त में शेयर के भाव बढ़ते और घटते हैं। 10 रु के शेयर की कीमत चार-पाँच सौ तक हो जाती है। इन कंपनियों के शेयरों का मूल्य शेयर बाजार में दर्ज होता है। सभी कंपनियों का मूल्य उनकी लाभदायक क्षमता के अनुसार कम-ज्यादा होता है। भारत में इस पूरे बाजार में नियंत्रण भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) का होता है। इसकी अनुमति के बाद ही कोई कंपनी अपना प्रारंभिक निर्गम इश्यू (आईपीओ) जारी कर सकती है। शेयर बाजार में लिस्टेड होने के लिए कंपनी को बाजार से लिखित समझौता करना पडता है, जिसके तहत कंपनी अपने हर काम की जानकारी बाजार को समय-समय पर देती रहती है, खासकर ऐसी जानकारियां, जिससे निवेशकों के हित प्रभावित होते हों। इन्हीं जानकारियों के आधार पर कंपनी का मूल्यांकन होता है और इस मूल्यांकन के आधार पर मांग घटने-बढ़ने से उसके शेयरों की कीमतों में उतार-चढाव आता है। अगर कोई कंपनी लिस्टिंग समझौते के नियमों का पालन नहीं करती, तो उसे डीलिस्ट करने की कार्रवाई सेबी करता है।

ब्लूचिप कंपनी क्या होती है ?

ब्लू चिप शब्द पोकर के खेल से आया है जिसमें कई रंग के बाज़ी लगाने वाले डिस्क होते है, जिन्हें चिप कहते हैं। पोकर के खेल में और कसीनो में नकदी की जगह इस्तेमाल होने वाले टोकनों में सबसे ज्यादा कीमत नीले डिस्क की होती है। मान लें सफेद चिप की कीमत 1 रुपया है, लाल का पाँच रुपया तो नीले की होगी 10 रुपया। यह शब्द शेयर बाजार में इस्तेमाल होता है तब माना जाता है श्रेष्ठ-मजबूत कंपनियों के शेयर। किसी कंपनी का ब्लू चिप होने का अभिप्राय यह है कि उसके शेयर निवेशकों के लिए पसंदीदा शेयर हैं। इस प्रकार की कंपनियों में सौदे भी काफी होते हैं, उतार-चढ़ाव भी काफी होता है और उनमें निवेशकों का आकर्षण भी खूब बना रहता है।ब्लू चिप का मतलब है राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त, सर्वसम्पन्न और स्थिर अर्थव्यवस्था वाली कंपनी। यह एक तरह से मापदंड होता है जिसमें किसी कंपनी को हम ब्लू चिप तभी कहते हैं जब वह ढलती अर्थव्यवस्था में भी सामान्य ढंग से व्यापार कर सके और मुनाफ़ा कमा सके।

मोबाइल सिम कार्ड आगे से क्रॉसकट क्यों होता है?


मोबाइल सिम कार्ड आगे से क्रॉसकट क्यों होता है?
यह सिर्फ एलाइनमेंट को ठीक रखने के लिए है। बाएं और दाएं कट के अलावा एक कट कर्णवत या डायगोनल होने से सिम और मोबाइल फोन की पिनें एक दूसरे से ठीक तरह से मिल जाती हैं। फोन के सॉकेट में भी वैसा ही कट होता है।

लोकतंत्र व गणतंत्र में क्या अंतर है ?
रोहित शर्मा, जयपुर
लोकतंत्र एक व्यवस्था का नाम है, जिसकी एक संवैधानिक व्यवस्था भी हो। जब शासन पद्धति पर यह लागू हो तो शासन व्यवस्था लोकतांत्रिक होती है। इसमें हिस्सा लेने वाले या तो आमराय से फैसले करते हैं और यदि ऐसा न हो तो मत-विभाजन से करते हैं। ये निर्णय सामान्य बहुमत से और कई बार ज़रूरी होने पर विशेष बहुमत से भी होते हैं। मसलन कुछ परिस्थितियों में दो तिहाई मत से भी निर्णय किए जाते हैं। गणतंत्र का अर्थ वह शासन पद्धति जहाँ राज्यप्रमुख का निर्वाचन सीधे जनता करे या जनता के प्रतिनिधि करें। यानी राष्ट्रप्रमुख वंशानुगत या तानाशाही तरीके से सत्ता पर कब्जा करके न आया हो। कुछ ऐसे देश भी हैं, जहाँ शासन पद्धति लोकतांत्रिक होती है, पर राष्ट्राध्यक्ष लोकतांत्रिक तरीके से नहीं चुना जाता। जैसे युनाइटेड किंगडम, जहाँ राष्ट्राध्यक्ष सम्राट होता है, जिसके परिवार के सदस्य ही राष्ट्राध्यक्ष बनते हैं। भारत में लोकतांत्रिक सरकार है और राष्ट्रपति का चुनाव होता है इसलिए यह गणतंत्रात्मक व्यवस्था है।

नक्सलवाद व आतंकवाद में क्या अंतर है ?
रोहित शर्मा, जयपुर 
rohit_dude58@yahoo.com
नक्सलवाद मोटे तौर पर भारत की मार्क्सवादी-लेनिनवादी पार्टी की विचारधारा के लिए प्रयुक्त होने वाला शब्द है। यह पार्टी नब्बे के दशक में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से टूटकर बनी थी। नक्सल शब्द की उत्पत्ति पश्चिम बंगाल के छोटे से गाँव नक्सलबाड़ी से हुई है जहाँ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता चारू मजूमदार और कानू सान्याल ने 1967 मे सत्ता के खिलाफ़ एक सशस्त्र आंदोलन की शुरुआत की। मजूमदार चीन के कम्युनिस्ट नेता माओ जे दुंग के समर्थक थे। इन्हें "नक्सलवादी" कहा गया। यह आंदोलन बाद में कई छोटे-छोटे संगठनों में बँट गया।

आज कई नक्सली संगठन वैधानिक रूप से स्वीकृत राजनीतिक पार्टी बन गए हैं और संसदीय चुनावों में भाग भी लेते है। लेकिन बहुत से संगठन अब भी सशस्त्र आंदोलन चला रहे हैं। इनमें माओवादी संगठन हैं जिनका पुराने नक्सलवाद से सीधा सम्बन्ध नहीं है, पर अपनी हिंसक गतिविधियों के कारण वे नक्सलवादी माने जाते हैं। आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ, उड़ीसा, झारखंड, और बिहार इनके प्रभाव में हैं। आतंकवाद भी एक राजनीतिक विचारधारा है, जिसमें हिंसा और भय का सहारा लेकर व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़ते हैं। आतंकवाद के अनेक रूप हैं और दुनिया भर में कई तरह के संगठनों की रणनीति आतंक फैलाने की है। नक्सलवादी आंदोलन में हिंसा और भय का तत्व भी उसे आतंकवाद की ओर ले जाता है। पर कुछ पुराने नक्लवादी संगठन हिंसा की रणनीति त्याग कर संसदीय लोकतंत्र में शामिल हो गए हैं।

TRP क्या है और किस प्रकार काम करती है?
आशुतोष सोनी,ग्राम- कनवास, जिला- कोटा (राजस्थान)
ashutoshsoni7@gmail.com
टारगेट रेटिंग पॉइंट(टीआरपी) का उद्देश्य टेलीविज़न के दर्शकों की संख्या का अनुमान लगाना है। इसका सबसे प्रचलित तरीका है फ्रीक्वेंसी मॉनीटरिंग। कुछ सैम्पल घरों में पीपुल मीटर लगाए जाते हैं, जो टीवी पर देखे जा रहे कार्यक्रमों की फ्रीक्वेंसी दर्ज करते हैं। इसे डिकोड करके पता लगाया जाता है कि किस चैनल को कितना देखा गया। अब फ्रीक्वेंसी की जगह तस्वीर को रिकॉर्ड करने की तकनीक भी स्तेमाल में लाई जा रही है। भारत में इंडिया टेलीविज़न ऑडियंस मैज़रमेंट या इनटैम इस काम को करने वाली एजेंसी है। इसका उद्देश्य विज्ञापनदाताओं को यह बताना है कि किस चैनल की और किस कार्यक्रम की ज्यादा लोकप्रियता है।

मध्यमान सागर स्तर (मीन सी लेवल) क्या है?
त्रिलोक नायक, triloknayak07@gmail.com

आप जानते ही हैं कि सागर का स्तर समान नहीं रहता। ज्वार-भाटा के साथ बढ़ता या घटता है। मध्यमान सागर स्तर का मतलब है सागर की सतह का औसत स्तर। यानी ज्वार के उच्चतम स्तर और भाटा के निम्नतम स्तर के बीच की स्थिति।

एक क्यूसेक में कितने लीटर होते हैं?
हरीश, सीकर

क्यूसेक बहते पानी या तरल का पैमाना है और लिटर स्थिर तरल का। क्यूसेक माने होता है क्यूबिक फीट पर सेकंड। यानी एक फुट चौड़े, एक फुट लम्बे और एक फुट गहरे स्थान से क सेकंड में जितना पानी निकल सके। सामान्यतः एक क्यूसेक में 28.317 लिटर पानी होता है।

भारत में मेट्रो का इतिहास क्या है? इसके बारे में जानकारी दें।sukhram5694@gmail.com
भारत में सबसे पहले मेट्रो गाड़ी कोलकाता में शुरू हुई। कोलकाता मेट्रो भूमिगत रेल प्रणाली है, जिसे सोवियत संघ की मदद से शुरू किया गया था। यह भारतीय रेलवे के अंतर्गत आती है और इसे मंडलीय रेलवे का स्तर प्रदान किया गया है। 1984 में शुरू हुई यह भारत की प्रथम भूमिगत एवं मेट्रो प्रणाली थी। इसके बाद दिल्ली मेट्रो 2002 में आरंभ हुई थी। दिल्ली मेट्रो रेल दिल्ली मेट्रो रेल निगम कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) द्वारा संचालित है। 24 दिसंबर 2002 को शाहदरा- तीस हजारी लाइन से इसकी शुरूआत हुई। प्रारंभिक योजना यह छह मार्गों पर चलाई गई, जो दिल्ली के ज्यादातर हिस्से को जोड़ते थे। इस प्रारंभिक चरण को 2006 में पूरा किय़ा गया। बाद में इसका विस्तार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सटे शहरों गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुड़गाँव और नोएडा तक किया गया। इस परिवहन व्यवस्था की सफलता से प्रभावित होकर भारत के दूसरे राज्यों में भी इस पर काम चल रहा है जैसे जयपुर, मुम्बई, बेंगलुरू, हैदराबाद, चेन्नई, कोच्चि वगैरह। बेंगलुरू मेट्रो शुरू भी हो गई है।

क्रिकेट खिलाड़ियों की ड्रेस पर शर्ट पीछे लिखे नम्बर का क्या मतलब है?
अंकित मौर्य, ललित बडेरा ru9lalit@gmail.com
फुटबॉल और हॉकी जैसे खेलों में परम्परा से खिलाड़ियों की जर्सी पर लिखे नम्बरों से उनकी पोज़ीशन का पता लगता था। जैसे कि गोली का नम्बर 1 होता था, फुलबैक का 2 और हाफ बैक का 3 वगैरह। पर धीरे-धीरे मैच के दौरान इतने बदलाव होने लगे और खिलाड़ियों की पोज़ीशन तेजी से बदलने लगीं कि वह व्यवस्था चल नहीं पाई। अलबत्ता नम्बर होने से खिलाड़ी को पहचानना आसान होता है, इसलिए प्रतियोगिताओं में जर्सी नम्बर दिए जाते हैं। क्रिकेट में जर्सी नम्बर नहीं होते थे। हाँ क्रिकेट में टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ियों को नम्बर देने की परम्परा है। जैसे कि 15 मार्च 1887 को इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए पहले टेस्ट मैच के खिलाड़ी टॉमस आर्मिटेज इंग्लैंड के नम्बर एक टेस्ट खिलाड़ी हैं। यह नम्बर उन्हें अकारादिक्रम में ए से नाम होने के कारण मिला। इसी तरह 20 अगस्त 2009 को इंग्लैंड की टीम में शामिल हुए जोनाथन ट्रॉट इंग्लैंड के 645 नम्बर के टेस्ट खिलाड़ी थे। प्रायः यह संख्या टेस्ट खिलाड़ी की टोपी या कमीज पर बने टीम के चिह्न के नीचे लिखी जाती थी। यह बहुत छोटे अक्षरों में होती थी और दूर से पढ़ी भी नहीं जाती थी। पीठ के पीछे लिखी संख्याएं 1995-96 में ऑस्ट्रेलिया में पहली बार शुरू हुई वर्ल्ड सीरीज़ एकदिनी क्रिकेट के दौरान इस्तेमाल में लाईं गईं। खेल को रोचक बनाने का क तरीका यह भी था। इसमें खिलाड़ियों को नम्बर दिए जाते थे और कई बार खिलाड़ी अपनी पसन्द का नम्बर खुद चुनते। खिलाड़ियों के नाम भी पीठ पर लिखे जाने लगे। विश्व कप क्रिकेट में खिलाड़ियों के नम्बरों का पहला इस्तेमाल 1999 के विश्व कप से शुरू हुआ। इसमें कप्तान 1 नम्बर की जर्सी पहनते और शेष खिलाड़ियों को 2 से 15 तक के नम्बर मिलते। पर इसमें भी कोई नियमितता नहीं थी। मसलन दक्षिण अफ्रीका के कप्तान हैंसी क्रोन्ये 5 नम्बर की जर्सी पहनते और ओपनर गैरी कर्स्टन 1 नम्बर की। अब यह फैशन में भी है। कुछ जर्सी नम्बर मशहूर हैं जैसे सचिन तेन्दुलकर का 10, महेन्द्र सिंह धोनी का 7 या क्रिस गेल का 333।




































खान मजदूरों को लिए बना था जींस का पहनावा




जीन्स (jeans) जो फैशन के तौर पर पहने जाते हैं, इनकी शुरुआत कब, कहाँ,और किस उद्देश्य से हुई? 

हितेन्द्र कुमार शर्मा झाब, सांचोर
जीन्स का पहनावा मूल रूप से मेहनतकशों और कारखाने में काम करने वाले श्रमिकों और नाविकों से ताल्लुक रखता है। औद्योगीकरण के बाद यूरोप में कामगारों और नाविकों के लिए ऐसे परिधानों की ज़रूरत महसूस की गई जो मजबूत हों और देर से फटें। 16 वीं सदी में यूरोप ने भारतीय मोटा सूती कपडा़ मँगाना शुरू किया, जिसे डुंगारी कहा जाता था। बाद मे इसे नील के रंग में रंग कर मुंबई के डोंगारी किले के पास बेचा गया था। नाविकों ने इसे अपने अनुकूल पाया और इससे बनी पतलूनें वे पहनने लगे। कंधे से लेकर पाजामे तक का यह परिधान डंगरी कहलाता है। लगभग ऐसा ही परिधान कार्गो सूट होता है, जिसे नाविक और वायुसेवाओं के कर्मचारी पहनते हैं।

डंगरी के कपड़े और जीन्स में फर्क यह होता है कि जहाँ डंगरी में धागा रंगीन होता है वहीं जीन्स वस्त्र को तैयार करने के बाद रंगा जाता है। आमतौर पर जीन्स नीले, काले और ग्रे के शेड़्स में होते हैं। इन्हें जिस नील से रंगा जाता था वह भारत या अमेरिका से आता था। पर जीन्स का जन्म यूरोप में हुआ। सन 1600 की शुरुआत मे इटली के कस्बे ट्यूरिन के निकट चीयरी में जीन्स वस्त्र का उत्पादन किया गया। इसे जेनोवा के हार्बर के माध्यम से बेचा गया था, जेनोवा एक स्वतंत्र गणराज्य की राजधानी थी जिसकी नौसेना काफी शक्तिशाली थी। इस कपडे़ से सबसे पहले जेनोवा की नौसेना के नाविको की पैंट बनाई गईं। नाविको को ऐसी पैंट की ज़रूरत थी जिन्हें सूखा या गीला भी पहना जा सके तथा जिनके पौचों को पोत के डेक की सफाई के समय उपर को मोडा़ जा सके। इन जीन्सों को सागर के पानी से एक बडे़ जाल में बाँध कर धोया जाता था। समुद्र के पानी उनका रंग उडा़कर उन्हें सफेद कर देता था। इस तरह कई लोगों के अनुसार जीन्स नाम जेनोवा पर पडा़ है। जीन्स बनाने के लिए कच्चा माल फ्रांस के निम्स शहर से आता था जिसे फ्रांसीसी मे दे निम कहते थे इसीलिए इसके कपडे़ का नाम डेनिम पड़ गया।

उन्नीसवीं सदी में अमेरिका में सोने की खोज का काम चला। उस दौर को गोल्ड रश कहते हैं। सोने की खानों में काम करने वाले मजदूरों के लिए भी मजबूत कपड़ों के परिधान की ज़रूरत थी। सन 1853 में लेओब स्ट्रॉस नाम के एक व्यक्ति ने थोक में वस्त्र सप्लाई का कारोबार शुरू किया। लेओब ने बाद में अपना नाम लेओब से बदल कर लेवाई स्ट्रॉस कर दिया। लेवाई स्ट्रॉस को जैकब डेविस नाम के व्यक्ति ने जीन्स नामक पतलून की पॉकेटों को जोड़ने के लिए मेटल के रिवेट इस्तेमाल करने की राय दी। डेविस इसे पेटेंट कराना चाहता था, पर इसके लिए उसके पास पैसा नहीं था। 1873 में लेवाई स्ट्रॉस ने कॉपर के रिवेट वाले ‘वेस्ट ओवरऑल’ बनाने शुरू किए। तब तक अमेरिका में जीन्स का यही नाम था। 1886 में लेवाई स्ट्रॉस ने इस पतलून पर चमड़े के लेबल लगाने शुरू कर दिए। इन लेबलों पर दो घोड़े विपरीत दिशाओं में जाते हुए एक पतलून को खींचते हुए दिखाई पड़ते थे। इसका मतलब था कि पतलून इतनी मजबूत है कि दो घोड़े भी उसे फाड़ नहीं सकते। बीसवीं सदी में हॉलीवुड की काउब्वॉय फिल्मों ने जीन्स को काफी लोकप्रिय बनाया। पर यह फैशन में बीसवीं सदी के आठवें दशक में ही आई।

यूरोज़ोन संकट क्या है?देवेन्दर सिंह, bhativikassingh@gmail.com, सूरतगढ़

यूरोपीय संघ अपने किस्म का सबसे बड़ा राजनीतिक-आर्थिक संगठन है। 27 देशों के इस संगठन की एक संसद है। और एक मुद्रा भी, जिसे 17 देशों ने स्वीकार किया है। इस मुद्रा का नाम है यूरो। यूरो को स्वीकार करने वाले देशों के नाम हैं ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, सायप्रस, एस्तोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, आयरलैंड, इटली, लक्ज़ेम्बर्ग, माल्टा, नीदरलैंड्स, पुर्तगाल, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन। दूसरे विवश्वयुद्ध के बाद इन देशों के राजनेताओं ने सपना देखा था कि उनकी मुद्रा यूरो होगी। सन 1992 में मास्ट्रिख्ट संधि के बाद यूरोपीय संघ के भीतर यूरो नाम की मुद्रा पर सहमति हो गई। इसे लागू होते-होते करीब दस साल और लगे। इसमें सारे देश शामिल भी नहीं हैं। यूनाइटेड किंगडम का पाउंड स्टर्लिंग स्वतंत्र मुद्रा बना रहा। मुद्रा की भूमिका केवल विनिमय तक सीमित नहीं है। यह अर्थव्यवस्था को जोड़ती है। अलग-अलग देशों के बजट घाटे, मुद्रास्फीति और ब्याज की दरें इसे प्रभावित करती हैं। समूचे यूरोप की अर्थव्यवस्था एक जैसी नहीं है। दुनिया की अर्थव्यवस्था इन दिनों दो प्रकार के आर्थिक संकटों से घिरी है। एक है आर्थिक मंदी और दूसरा यूरोज़ोन का संकट। दोनों एक-दूसरे से जुड़े हैं। यूरोज़ोन के ज्यादातर देश इन दिनों कर्ज में डूबे हुए हैं। मसलन ग्रीस सरकार पर आय के मुकाबले 113 फीसदी कर्ज हो गया। यूरोपीय बैंक और यूरोपीय संघ के दबाव के कारण प्रायः सभी देश किफायतशारी यानी ऑस्टैरिटी में लगे हैं। पिछले साल यूरोज़ोन के वित्त मंत्रियों ने मिलकर 500 अरब यूरो का एक स्थायी बेलआउट कोष बनाया है। ग्रीस, आयरलैंड, पुर्तगाल, स्पेन और इटली जैसे देश भुगतान के संकट से घिरे हैं। फ्रांस भी आर्थिक मंदी का शिकार है। जर्मनी की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, पर वह भी धीरे-धीरे शून्य विकास की ओर बढ़ रहा है। दिक्कत यह है कि यूरोप के अलग-अलग इलाके अलग-अलग किस्म की परेशानियों के शिकार हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 10 अक्तूबर को तोक्यो में वैश्विक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट जारी की। इसमें कहा गया है कि वैश्विक वित्तीय बाज़ार में सबसे मुख्य जोखिम यूरो ज़ोन में रहा है। हाल के महीनों में यूरोप के नीति-निर्धारकों द्वारा कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने से कुछ हद तक बाजार में स्थिरता आई है। लेकिन वित्तीय बाज़ार की स्थिरता कायम रखने के लिए और अधिक कदम उठाने की ज़रूरत है। ब्रिक्स दल में शामिल पाँच देशों ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिणी अफ़्रीका ने घोषणा की है कि वे अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के खजाने को भरने के लिए 75 अरब डॉलर देने को तैयार हैं। इस वर्ष जून में मैक्सिको में हुए जी-20 के शिखर-सम्मेलन में यह घोषणा की गई। यूरोपीय संकट का समाधान करने के लिए चीन सबसे ज़्यादा मदद देने को तैयार है। उसने 43 अरब डॉलर देने की इच्छा दिखाई। रूस, भारत और ब्राज़ील ने इसके लिए दस-दस अरब डॉलर देने पर सहमति व्यक्त की। दक्षिणी अफ़्रीका भी 2 अरब डॉलर देने के लिए तैयार है।

भारतीय रुपए की तुलना हमेशा अमेरिकी डॉलर से क्यों की जाती है?
त्रिलोक नायक, triloknayak07@gmail.com


आप चाहें तो इसकी तुलना किसी दूसरी करेंसी से भी कर सकते है, पर चूंकि दुनिया में सबसे मजबूत करेंसी इस वक्त डॉलर है, इसलिए आमतौर पर तुलना डॉलर से की जाती है। दुनिया की मजबूत मुद्राओं को हार्ड करेंसी कहते हैं। डॉलर के अलावा विश्व में यूरो, पौंड स्टर्लिंग, जापानी येन और स्विस फ्रैंक को हार्ड करेंसी की श्रेणी में रख सकते हैं। इन करेंसियों के मार्फत दुनिया के तमाम देश एक-दूसरे से व्यापार करते हैं। इस वक्त दुनिया के ज्यादातर देशों के पास मुद्रा कोष के नाम पर सबसे बड़ा भंडार डॉलर का है। हमारे देश में भी जब विदेशी मुद्रा कोष की बात होती है तो डॉलर का नाम ही लिया जाता है।

मोबाइल जेमर कैसे काम करता है?

पहले यह समझ लें कि फोन जैमर की ज़रूरत क्यों होती है। इसकी ज़रूरत या तो सुरक्षा कारणों से होती है या अस्पताल जैसी जगह पर जहाँ शांति की ज़रूरत हो। आपने देखा होगा पिछले दिनों चुनाव के दिन भी मोबाइल सेवाएं ब्लॉक की गईं। कई बार पुलों और रक्षा संस्थानों के आसपास फोन जैम हो जाते हैं। उस इलाके से बाहर आने पर फोन फिर से काम करने लगते हैं। युद्ध के समय सीमा पर रेडियो जैमिंग की जाती है ताकि शत्रु के रेडियो संदेश न जा सकें। फोन जैमिंग एक प्रकार से रेडियो जैमिंग है। इसमें जैमिंग डिवाइस उसी फ्रीक्वेंसी पर रेडियो तरंगे प्रवाहित करते हैं, जिसपर आमतौर से फोन डिवाइस काम कर रही हैं। इससे फोन सेवाओं में व्यवधान पैदा हो जाता है और कुछ देर के लिए टावर से सम्पर्क टूट जाता है। इस इलाके से बाहर आने पर सेवा फिर से शुरू हो जाती है।

की-बोर्ड पर अक्षर क्रमवार क्यों नहीं?
मनोज शर्मा, सीकर


की-बोर्ड में अक्षरों को बेतरतीब लगाने का सबसे बड़ा कारण यह है कि वर्णमाला के सारे अक्षरों का समान इस्तेमाल नहीं होता। चूंकि टाइप करने के लिए दोनों हाथों की उंगलियों का इस्तेमाल होता है, इसलिए ऐसी कोशिश की जाती है कि उंगलियों को कम मेहनत करनी पड़े। अंग्रेजी में सबसे ज्यादा क्वर्टी (QWERTY) की-बोर्ड चलता है। यह क्वर्टी की-बोर्ड में अंकों की पंक्ति के नीचे बनी अक्षरों की पहली पंक्ति के पहली छह की हैं। इस की-बोर्ड को सबसे पहले 1874 में अमेरिकी सम्पादक क्रिस्टोफर शोल्स ने पेटेंट कराया जो टाइपराइटर के विकास के काम से भी जुड़े थे। टाइप रायटर कम्पनी रेमिंग्टन ने इस पेटेंट को उसी साल खरीद लिया। तब से अब तक इसमें एकाध बदलाव हुए हैं। यह की-बोर्ड अब दुनिया भर का मानक बन गया है। इसके अलावा भी की-बोर्ड हैं, पर वे विशेष काम के लिए ही इस्तेमाल में आते हैं। कम्प्यूटर के 101/102 की वाले बोर्ड को सन 1982 में मार्क टिडेंस ने तैया किया। इसमें भी बदलाव हो रहे हैं क्योंकि कम्प्यूटर का इस्तेमाल बदलता जा रहा है। हिन्दी में रेमिंग्टन, फोनेटिक, लिंग्विस्ट, लाइनोटाइप, देवनागरी, इनस्क्रिप्ट नाम से कई की-बोर्ड प्रचलित हैं। इनमें किसी एक के मानक न होने से हिन्दी टाइप करने वालों के सामने दिक्कतें आती हैं।

हावड़ा ब्रिज क्या है? इसके बारे में विस्तार से जानकारी दीजिए।
नवीन कुमार फलवारिया, सुजानगढ़, राजस्थान


सत्तर साल से भी पहले निर्मित हावड़ा ब्रिज इंजीनियरिंग का चमत्कार है। यह विश्व के व्यस्ततम कैंटीलीवर ब्रिजों में से एक है। कोलकाता और हावड़ा को जोड़ने वाले इस पुल जैसे अनोखे पुल संसार भर में केवल गिने-चुने ही हैं। उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में कोलकाता और हावड़ा के बीच बहने वाली हुगली नदी पर एक तैरते हुए पुल के निर्माण की परिकल्पना की गई। तैरते हुआ पुल बनाने का कारण यह था कि नदी में रोजाना काफी जहाज आते-जाते थे। खम्भों वाला पुल बनाते तो जहाजों का आना-जाना रुक जाता। अंग्रेज सरकार ने सन् 1871 में हावड़ा ब्रिज एक्ट पास किया, पर योजना बनने में बहुत वक्त लगा। पुल का निर्माण सन् 1937 में ही शुरू हो पाया। सन् 1942 में यह बनकर पूरा हुआ। इसे बनाने में 26,500 टन स्टील की खपत हुई। इसके पहले हुगली नदी पर तैरता पुल था। पर नदी में पानी बढ़ जाने पर इस पुल पर जाम लग जाता था। इस ब्रिज को बनाने का काम जिस ब्रिटिश कंपनी को सौंपा गया उससे यह ज़रूर कहा गया था ‍कि वह भारत में बने स्टील का इस्तेमाल करेगा। टिस्क्रॉम नाम से प्रसिद्ध इस स्टील को टाटा स्टील ने तैयार किया। इसके इस्पात के ढाँचे का फैब्रिकेशन ब्रेथवेट, बर्न एंड जेसप कंस्ट्रक्शन कम्पनी ने कोलकाता स्थित चार कारखानों में किया। 1528 फुट लंबे और 62 फुट चौड़े इस पुल में लोगों के आने-जाने के लिए 7 फुट चौड़ा फ़ुटपाथ छोड़ा गया था। सन् 1943 में इसे आम जनता के उपयोग के लिए खोल दिया गया। हावड़ा और कोलकाता को जोड़ने वाला हावड़ा ब्रिज जब बनकर तैयार हुआ था तो इसका नाम था न्यू हावड़ा ब्रिज। 14 जून 1965 को गुरु रवींद्रनाथ टैगोर के नाम पर इसका नाम रवींद्र सेतु कर दिया गया पर प्रचलित नाम फिर भी हावड़ा ब्रिज ही रहा। इसपर पूरा खर्च उस वक्त की कीमत पर ढाई करोड़ रुपया (24 लाख 63,887 पौंड)आया। इस पुल से होकर पहली बार एक ट्रामगाड़ी चली थी।

नीम कड़वा क्यों होता है?

नीम के तीन कड़वे तत्वों को वैज्ञानिकों ने अलग निकाला है, जिन्हें निम्बिन, निम्बिडिन और निम्बिनिन नाम दिए हैं। सबसे पहले 1942 में भारतीय वैज्ञानिक सलीमुज़्ज़मा सिद्दीकी ने यह काम किया। वे बाद में पाकिस्तान चले गए थे। नाम का यह कड़वा तत्व एंटी बैक्टीरिया, एंटी वायरल होता है और कई तरह के ज़हरों को ठीक करने का काम करता है। नीम का सम्पूर्ण भाग कड़वा होता है, किन्तु कोई भी भाग अनुपयोगी नहीं होता। इसकी जड़, छाल, पत्ते, फूल, फल, गोंद, मद, सींक, टहनी एवं लकड़ी और इसकी छाया तथा इससे छनकर आने वाली हवा, सभी में कृषि, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए लाभकर हैं। उपयोगिता के मामले में यह एक प्रकार से भारतीय ग्रामीण औषधालय है। भारत के अलावा बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार तथा पश्चिमी अफ्रीकी देशों का यह घरेलू वृक्ष है। नीम की पत्तियों में 12.40 से 18.27 प्रतिशत तक क्रूड प्रोटीन, 11.40 से 23.08 प्रतिशत तक क्रूड फाइबर, 48 से 51 प्रतिशत तक कार्बोहाइड्रेट्स, 46.32 से 66.66 प्रतिशत तक नाइट्रोजन मुक्त अर्क, 2.27 से 6.24 प्रतिशत तक अन्य अर्क, 0.89 से 3.96 प्रतिशत तक कैल्शियम, 0.10 से 0.30 प्रतिशत तक फास्फोरस और 2.3 से 6.9 प्रतिशत तक वसा पाया जाता है। इसमें लोहा तथा विटामिन `ए' की मात्रा भी पर्याप्त होती है। नीम छाल में फास्फोरस, शर्करा, कांसी तथा गंधक काफी मात्रा में पाया जाता है। नीम फल का गूदा मीठा, हल्का खुमारी लिए होता है। इसके बीज के तेल में स्टिऑरिक एसिड, ओलेक एसिड तथा लारिक एसिड पाए जाते हैं। इस तेल का अंग्रेजी नाम मार्गोसा है।

टेलीविज़न की टीआरपी से टीवी एक्टरों और प्रोड्यूसरों को कैसे फायदा होता है?
प्रीति कुमावत, सीकर


टीआरपी का मतलब है कार्यक्रमों की लोकप्रियता। यदि कार्यक्रम लोकप्रिय होगा तभी तो उसे पेश किया जाएगा। एक लोकप्रिय कार्यक्रम के प्रोड्यूसर और कलाकारों को उस लोकप्रियता के सहारे दूसरे कार्यक्रम बनाने को मिलेंगे। यह तो एक प्रकार का कारोबार है।





Thursday, August 8, 2013

अंग्रेजी राज के साथ आया अंग्रेजी कैलेंडर


हमारे देश में इंग्लिश कैलेंडर कब से चलन में आया ? 

सन 1757 में प्लासी की लड़ाई के बाद भारत में ईस्ट इंडिया कम्पनी का शासन स्थापित होने की शुरूआत हो गई और तभी अंग्रेजी कैलेंडर का चलन शुरू हो गया। उसके पहले तक भारत में या तो विक्रमी पंचांग चलता था या इस्लामी काल पद्धति।

एफएम गोल्ड के एक ही नम्बर पर आप अलग-अलग कीवर्ड क्यों माँगते हैं? –बजाज स्नोस मार्क, शिवाजी पार्क

दरअसल आपके एसएमएस एक कम्प्यूटर प्रग्राम के ज़रिए एकत्र किए जाते हैं। यदि एक नम्बर पर आने वाल सारे एसएमएस को एकबार में पढ़ने की कोशिश की जाए तो उनकी बड़ी तादाद होने की वजह से मुश्किल होगा। हमारा कार्यक्रम है बारिश सवालों की इसका कीवर्ड है बीएसके। जब आप बीएसके लिखकर अपना संदेश भेजते हैं तब कम्प्यूटर अपने आप आपके सवाल को बारिश सवालों की सूची में डाल देता है। और वह सवाल हमारे पास आ जाता है।

कंप्यूटर की मेमोरी ज्यादा होती है या दिमाग की ?

कुदरत ने हमें जो दिमाग दिया है, उसके रहस्य पूरी तरह हमें नहीं मालूम, पर जितना हम जानते हैं उसके हिसाब से कम्प्यूटर की मैमरी मनुष्य के दिमाग की नकल पर होती है। एक स्वस्थ दिमाग में 200 अरब नर्व सेल होते हैं, जो एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। अक्सर हम अपनी मेमरी का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं, पर यदि करना चाहें तो अकेले एक व्यक्ति के दिमाग में इतनी मेमरी होती है कि दुनियाभर के सारे कम्प्यूटरों की मेमरी से ज्यादा बैठेगी।


यलो स्टोन ज्वालामुखी क्या है? और इसकी वर्तमान स्थिति क्या है?-कन्हैया नागर

अमेरिका के वायोमिंग राज्य में यलो स्टोन नेशनल पार्क है। इस सुन्दर इलाके में तकरीबन साढ़े छह लाख साल पहले ज्वालामुखी का विस्फोट हुआ था। अब इसके मुख पर सुन्दर बाग-बगीचे, झीलें झरने और फव्वारे हैं। यह छोटा-मोटा पार्क नहीं है, बलिक् लगभग नौ हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला वन क्षेत्र है और दुनिया का पहला नेशनल पार्क है। इसके बीच से होकर यलोस्टोन नदी गुजरती है। इस इलाके में करीबन ग्यारह हजार साल से मनुष्य रह रहा है। यहाँ गरम जल के प्राकृतिक फौवारे भी हैं, जिनकी भाप से बादलों के खम्भे जैसे बन जाते हैं। वहां 200 सक्रिय गीज़र बताए जाते हैं। हजारों किस्म के पशु-पक्षी इस इलाके में रहते हैं।

ब्लड में डीएनए होता है। अगर किसीको ब्लड चढ़ाया जाए तो डीएनए का क्या होता है?

इस दिशा में वैज्ञानिक अध्ययन चल ही रहे हैं। अलबत्ता अभी तक का ज्ञान यह है कि खून चढ़ाने के बाद कुछ दिन तक वे डीएनए बने रहते है, पर उनका प्रभाव इतना नहीं होता कि वे व्यक्ति की जेनेटिक संरचना पर असर डाल सकें। आमतौर पर खून चढ़ाने की ज़रूरत लाल रक्त कणों के लिए होती है। उनका कोई न्यूक्लियस नहीं होता इसलिए उनमें डीएनए भी नहीं होता। सफेद रक्त कणों यानी ल्यूकोसाइट्स में डीएनए होता है। जाँचकर्ताओं ने पता लगाया है कि खून चढ़ाने के बाद दाता के डीएनए बने रहते हैं। यदि पुरुष का रक्त स्त्री को चढ़ाया जाए तो पुरुष डीएनए भी उसमें रहते हैं। इनकी उपस्थिति एक हफ्ते से लेकर साल-डेढ़ साल तक देखी गई है। पर जब दोनों डीएनए के प्रभाव की बात करें तो जिस व्यक्ति के शरीर में खून चढ़ाया गया है उसके डीएनए ही प्रभावी रहते हैं।

दिल्ली में सबसे ज्यादा सर्दी कब पड़ी थी ?

इस महीने 2 जनवरी को दिल्ली में पिछले 44 साल में सबसे ठंडा दिन था, जब अधिकतम तापमान गिरकर 9.7 डिग्री और न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री हो गया था। पर पिछली एक सदी में दिल्ली में सबसे कम तापमान 10 जनवरी 1935 को दर्ज किया गया था, जो माइनस 0.6 था।

क्या कोई भुगतान के रूप में छोटे करंसी नोट या सिक्के लेने से मना कर सकता है? असली करंसी नोट होते हुए भी नकली होने के शक में क्या कोई वह करंसी नोट लेने से मना कर सकता है?--सत प्रकाश संथोलिया

किसी चीज़ का भुगतान रुपयों में ही हो सकता है। छोटे करेंसी नोटों और सिक्कों को लेने से मना करने के पीछे कारण सुभीते का हो सकता है। कोई यह नहीं कह सकता कि यह मान्य करेंसी नहीं है। यह आपसी लेन-देन का मामला है। कानूनन इसे मना नहीं किया जा सकता। केवल व्यावहारिक दिक्कत के आधार पर मान किया जा सकता है। ऐसे मं बीच का रास्ता निकाला जाता है।

दुनिया में ऐसे कितने देश हैं जहां डेमोक्रेसी नहीं है ?

घना, म्यांमार और वैटिकन सिटी किसी न किसी रूप में लोकतंत्र की परिधि से बाहर के देश हैं। इसके अलावा सउदी अरब, जॉर्डन मोरक्को, भूटान, ब्रूनेई, कुवैत, यूएई, मोरक्को, बहरीन, ओमैन, कतर,स्वाज़ीलैंड वगैरह में राजतंत्र है। इन देशों में लोकतांत्रिक संस्थाएं भी काम करती हैं। नेपाल में कुछ साल पहले तक राजतंत्र था, पर अब वहाँ लोकतंत्र है। दुनिया के 200 के आसपास देश हैं, जिनमें से तीस से चालीस के बीच ऐसे देश हैं, जो लोकतंत्र के दायरे से बाहर हैं या उनमें आंशिक लोकतंत्र है। जिन देशों में लोकतंत्र है भी उनमें भी पूरी तरह लोकतंत्र है या नहीं यह बहस का विषय है।

सिकंदर की मौत कैसे हुई थी ?


सामान्य धारणा है कि सिकन्दर की मृत्यु ईसा पूर्व 323 में 10 से 11 जून के इराक में बेबीलोन के एक महल में हुई थी। सिकंदर यूनान में मकदूनियाँ(मेसेडोनिया) का बादशाह था। उसने अपने कार्यकाल में इरान, सीरिया ,मिस्र मेसोपोटामिया, फिनीशिया, जुडिया, बैक्ट्रिया और भारत में पंजाब तक के इलाके पर जीत हासिल की थी। 329 ई. पू. में अपने पिता की मृत्यु के उपरान्त वह सम्राट बना। वह भारतीय अभियान पर 327 ई. पू. में निकला। 326 ई. पू. में सिन्धु पार कर वह तक्षशिला पहुँचा। व्यास नदी तक वह जीतता गया, पर वहाँ से आगे उसके सैनिक मगध के नन्द शासक की विशाल सेना का सामना करने को तैयार न थे। वापसी में उसे अनेक राज्यों का भीषण प्रतिरोध सहना पड़ा। उनकी मौत का कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया। कहते हैं कि शराब पीने से उसका लिवर खराब हो गया था। एक लेखक ने लिखा है कि उसे मलेरिया जैसी कोई बीमारी हो गई थी। ऐसा भी कहा जाता है कि उसे ज़हर दिया गया। उसे कहाँ दफनाया गया, इसका ज़िक्र भी नहीं मिलता।

क्या दादा साहेब फाल्के पुरस्कार केवल जिंदा कलाकारों को ही मिलता है.. क्यों ?

आमतौर पर यह पुरस्कार कलाकार के कृतित्व पर दिया जाता है और कोशिश होती है कि उसके जीवनकाल में ही मिल जाए। पर सन 1972 में पृथ्वीराज कपूर को मरणोपरांत यह पुरस्कार भी दिया जा चुका है।

अंतरिक्ष में स्पेस स्टेशन कैसे बनाए गए? इनकी उपयोगिता क्या है?- मेघा पैराडाइज़, मुज़फ्परनगर

स्पेस स्टेशन एक प्रकार के उपग्रह हैं जो अंतरिक्ष में अनुसंधान के लिए बनाए गए हैं। सबसे पहला स्पेस स्टेशन सैल्यूत-1 था जिसे 1971 में सोवियत संघ ने छोड़ा था। यह स्टेशन पहले धरती पर बनाया गया, फिर छोड़ा गया। इसके बाद सैल्यूत-2, 3, 5, 6 और 7 भेजे गए। इसके बाद 1986 में मीर स्टेशन भेजा गया , जिसने सन 2001 तक काम किया। मीर की खासियत यह थी कि इसका एक हिस्सा सबसे पहले भेजा गया, फिर धीरे-धीरे अंतरिक्ष में इसके छोटे-छोटे दूसरे हिस्से सैटेलाइटों में रखकर भेजे गए और उन्हें जोड़कर इसे बड़ा बनाते गए। स्पेस स्टेशन का एक उद्देश्य यह है कि कई अंतरिक्ष यात्री लम्बे समय तक अंतरिक्ष में रहकर प्रयोग कर सकें। इन दिनों इंटरनेशनल् स्पेस स्टेशन बाहरी अन्तरिक्ष में काम कर रहा है। इसे बनाने में अमेरिका की नासा के साथ रूस की रशियन फेडरल स्पेस एजेंसी (आरकेए), जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जेएएक्सए), कनाडा की कनेडियन स्पेस एजेंसी (सीएसए) और यूरोपीय देशों की संयुक्त यूरोपीयन स्पेस एजेंसी (ईएसए) काम कर रही हैं। हाल में सुनीता विलियम्स ने इसी स्टेशन पर काम किया। अभी इस स्टेशन का विस्तार हो ही रहा है। सामान्यतः यह स्टेशन धरती से 354 किलोमीटर दूर रहता है, इसमें वातावरण के बदलाव के कारण मामूली फर्क पड़ सकता है।

हिम मानव किसे कहते हैं.. और क्या ये वाकई में होते हैं..?

भारत, नेपाल और तिब्बत के दुर्गम तथा निर्जन हिमालयी क्षेत्रों में सैकड़ों वर्षों से रहस्यमयी हिममानव के अस्तित्व को लेकर अनेक किस्से - कहानियां प्रचलित हैं। ‘येति’ नाम से प्रसिद्ध इस कथित हिममानव को अब तक सैकड़ों लोगों द्वारा देखने का दावा किया जाता रहा है। येति को देखने का दावा करने वालों का कहना है कि शरीर पर काले भूरे घने बालों वाला ये रहस्यमय प्राणी सात से नौ फीट लंबा दिखता है जो किसी दावन की तरह दिखता है, जबकि इसका वजन तक़रीबन दो सौ किलो हो सकता है और इसकी ख़ासियत है कि ये इंसान की तरह दो पैरो पर चलता है। हिम मानव होते हैं या नहीं, हम नहीं कह सकते। कुछ लोगों की मान्यता है कि हिमालय में कोई ऐसा प्राणी रहता है, जिसके शरीर में बाल होते हैं और जिसके पैर काफी बड़े होते हैं। पर ऐसा प्राणी कभी मिला नहीं।

दुनिया की सबसे पुरानी कॉमिक बुक कौन सी है ?

कॉमिक्स से आपका आशय चित्रकथाओं से है तो हजारों साल से, बल्कि सभ्यताओं के जन्म के पहले से मनुष्य कहानियों को केन्द्र में रखकर चित्र बना रहा है। पुराने गुफा चित्रों में ऐसी कहानियाँ हैं. सभ्यता के जन्म के बाद मिस्र, चीन, मेसोपोटामिया और भारत में कथाचित्र मिलते हैं। अजंता-एलोरा की गुफाओं में बने चित्र कहानियाँ कहते हैं। पर यदि आप आधुनिक कथा चित्रो की बात कह रहे हैं तो उन्नीसवीं सदी में कार्टून कला के विकसित होने के बाद कॉमिक्स की शुरूआत भी हुई। सन 1841 में शुरू हुई ब्रिटिश पत्रिका पंच ने पहली बार आधुनिक किस्म के कार्टून छापने शुरू किए। शुरू में एक तस्वीर होती थी, फिर यह स्ट्रिप बनी। उन्हीं दिनों स्विस कलाकार रोडोल्फे टॉफर ने चित्रकथाएं बनाना शुरू कर दिया था। सन 1865 में जर्मन लेखक, कलाकार विल्हेम बुश ने ‘मेक्स एंड मॉरिट्ज़’ नाम के दो कॉमिक चरित्रों को तैयार किया। पर 1895 में रिचर्ड आउटकॉल्ट ने यलो किड नाम से कॉमिक स्ट्रिप शुरू की जिन्हें पहले कॉमिक्स कह सकते हैं, क्योंकि उनमें चित्र में बैलून बनाकर पात्रों के संवाद लिखे गए थे। इसके बाद वॉल्ट डिस्ने के मशहूर पात्र मिकी माउस और डोनाल्ड डक आए, सुपरमैन, फैंटन, मैनड्रेक, फ्लैश गार्डन आए।

हाथ की रेखाएं कैसे बनती और बिगड़ती हैं ?

हाथ की रेखाएं व्यक्ति के शारीरिक विकास का हिस्सा हैं। चूंकि हाथ से किसी चीज़ को पकड़ना होता है इसलिए उसकी ग्रिप के अनुसार हथेली में जहाँ-जहाँ मोड़ होते हैं, वहाँ रेखाएं बन जाती हैं। स्वास्थ्य और उम्र में बदलाव के साथ ये बदलती भी रहती हैं। पर भारत तथा पूर्वी देशों में इनके आधार पर व्यक्ति के भविष्य की पता लगाने का दावा भी किया जाता है।

दुनिया का सबसे पुराना ग्रंथ (EPIC) कौन सा है और कब लिखा गया ?


सबसे पुराना ग्रंथ कहना काफी मुश्किल है, क्योंकि मुद्रण कला का जन्म काफी बाद में हुआ है। फिर भी महाभारत, रामायण और मेसोपोटामिया की गिल्गमेश कथा दुनिया के सबसे पुराने ग्रंथों में शामिल किए जा सकते हैं। तमिल अन्नामार कथाई भी लगभग इतनी ही पुरानी है। पुराने चीन, मिस्र और फारस की अनेक कथाएं दुनिया की प्रचीनतम कथाओं में गिनी जा सकती हैं।

लोकतंत्र व गणतंत्र में क्या अंतर है ?

लोकतंत्र एक व्यवस्था का नाम है, जिसकी एक संवैधानिक व्यवस्था भी हो। जब शासन पद्धति पर यह लागू हो तो शासन व्यवस्था लोकतांत्रिक होती है। इसमें हिस्सा लेने वाले या तो आमराय से फैसले करते हैं और यदि ऐसा न हो तो मत-विभाजन से करते हैं। ये निर्णय सामान्य बहुमत से और कई बार ज़रूरी होने पर विशेष बहुमत से भी होते हैं। मसलन कुछ परिस्थितियों में दो तिहाई मत से भी निर्णय किए जाते हैं। गणतंत्र का अर्थ वह शासन पद्धति जहाँ राज्यप्रमुख का निर्वाचन सीधे जनता करे या जनता के प्रतिनिधि करें। यानी राष्ट्रप्रमुख वंशानुगत या तानाशाही तरीके से सत्ता पर कब्जा करके न आया हो। कुछ ऐसे देश भी हैं, जहाँ शासन पद्धति लोकतांत्रिक होती है, पर राष्ट्राध्यक्ष लोकतांत्रिक तरीके से नहीं चुना जाता। जैसे युनाइटेड किंगडम, जहाँ राष्ट्राध्यक्ष सम्राट होता है, जिसके परिवार के सदस्य ही राष्ट्राध्यक्ष बनते हैं। भारत में लोकतांत्रिक सरकार है और राष्ट्रपति का चुनाव होता है इसलिए यह गणतंत्रात्मक व्यवस्था है।
7.02.2013



Saturday, August 3, 2013

ब्लैक बॉक्स क्या होता है? यह किस काम आता है ?

ब्लैक बॉक्स क्या होता है? यह किस काम आता है ?
हवाई जहाज की उड़ान के दौरान उसके बारे में तमाम जानकारियाँ एक जगह दर्ज होती जाती हैं। विमान की गति, ऊँचाई, इंजन तथा अन्य यंत्रों की ध्वनि, यात्रियों और पायलटों की बातचित आदि, दर्ज होती रहती है। इन सूचनाओं के विश्लेषण द्वारा विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की स्थिति में दुर्घटना के कारणों की पहचान की जाती है।इसे फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर या फ़्लाइट रिकॉर्डर कहते हैं। इसके अलावा क़ॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर भी होता है। इसे कहते हैं ब्लैक बॉक्स। 1953-1954 में हवाई हादसों की श्रंखला के बाद हवाई जहाज में एक ऐसा उपकरण लगाने की जरूरत महसूस की गई थी जो कि दुर्घटना के समय या उससे तुरंत पहले वायुयान में होने वाले हलचलों और आँकड़ों को संग्रहीत कर रख सके तथा जो दुर्घटनाओं में सुरक्षित रहे। इसका रंग काला नहीं लाल या नारंगी होता है। इसीलिए शुरू में इसे ‘रेड एग’ कहा जाता था। इसके शुरुआती प्रारूपों में उसकी भीतरी दीवार को काला रखा जाता था, क्योंकि उसमें फोटो फिल्म आधारित जानकारी भी दर्ज होती थी। वहीं से इसका नाम ब्लैक बॉक्स पड़ा। इसे इस तरह बनाया जाता है कि तेज आग, भीषण विस्फोट और कई टन मलबे के दबाव के बावजूद नष्ट नहीं होता

भारतीय रुपए की तुलना हमेशा अमेरिकी डॉलर से क्यों की जाती है?
त्रिलोक नायक, triloknayak07@gmail.com
 आप चाहें तो इसकी तुलना किसी दूसरी करेंसी से भी कर सकते है, पर चूंकि दुनिया में सबसे मजबूत करेंसी इस वक्त डॉलर है, इसलिए आमतौर पर तुलना डॉलर से की जाती है। दुनिया की मजबूत मुद्राओं को हार्ड करेंसी कहते हैं। डॉलर के अलावा विश्व में यूरो, पौंड स्टर्लिंग, जापानी येन और स्विस फ्रैंक को हार्ड करेंसी की श्रेणी में रख सकते हैं। इन करेंसियों के मार्फत दुनिया के तमाम देश एक-दूसरे से व्यापार करते हैं। इस वक्त दुनिया के ज्यादातर देशों के पास मुद्रा कोष के नाम पर सबसे बड़ा भंडार डॉलर का है। हमारे देश में भी जब विदेशी मुद्रा कोष की बात होती है तो डॉलर का नाम ही लिया जाता है।

मोबाइल जेमर कैसे काम करता है?
 पहले यह समझ लें कि फोन जैमर की ज़रूरत क्यों होती है। इसकी ज़रूरत या तो सुरक्षा कारणों से होती है या अस्पताल जैसी जगह पर जहाँ शांति की ज़रूरत हो। आपने देखा होगा पिछले दिनों चुनाव के दिन भी मोबाइल सेवाएं ब्लॉक की गईं। कई बार पुलों और रक्षा संस्थानों के आसपास फोन जैम हो जाते हैं। उस इलाके से बाहर आने पर फोन फिर से काम करने लगते हैं। युद्ध के समय सीमा पर रेडियो जैमिंग की जाती है ताकि शत्रु के रेडियो संदेश न जा सकें। फोन जैमिंग एक प्रकार से रेडियो जैमिंग है। इसमें जैमिंग डिवाइस उसी फ्रीक्वेंसी पर रेडियो तरंगे प्रवाहित करते हैं, जिसपर आमतौर से फोन डिवाइस काम कर रही हैं। इससे फोन सेवाओं में व्यवधान पैदा हो जाता है और कुछ देर के लिए टावर से सम्पर्क टूट जाता है। इस इलाके से बाहर आने पर सेवा फिर से शुरू हो जाती है। 
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