Tuesday, March 8, 2016

क्रिकेट के खेल में एशेज क्या है?

क्रिकेट के खेल में एशेज क्या है? इसे हारा या जीता कैसे जाता है?

चंद्रशेखर कानूनगो, एजी 233, स्कीम नं.: 54, विजयनगर, इंदौर-452010 (म.प्र.)


इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जाने वाली क्रिकेट श्रृंखला को एशेज ट्रॉफी कहते हैं। दोनों देशों के बीच यह 1882 से खेली जा रही है। इसे शुरू कराने में ब्रिटिश मीडिया की भूमिका है। इसकी शुरुआत 1882 में हुई जब ऑस्ट्रेलिया ने ओवल में पहली बार इंग्लैंड टीम को उसी की धरती पर हराया। ऑस्ट्रेलिया से मिली करारी हार पर ब्रिटिश अख़बार तिलमिला गए। गुस्से में उन्होंने इस हार को क्रिकेट की मौत का रूपक दे डाला। एक अखबार ‘द स्पोर्ट्स टाइम्स’ ने बाकायदा शोक संदेश छापा जिसमें लिखा था- “इंग्लिश क्रिकेट का 29 अगस्त 1882 को ओवल में देहांत हो गया और अब इसके अंतिम संस्कार के बाद राख (एशेज) ऑस्ट्रेलिया ले जाई जाएगी। जब 1883 में इंग्लिश टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर रवाना हुई तो इसी लाइन को आगे बढ़ाते हुए इंग्लिश मीडिया ने एशेज वापस लाने की बात रखी ‘क्वेस्ट टु रिगेन एशेज।’ बाद में विकेट की बेल्स को जलाकर जो राख बनी उसको ही राख रखने वाले बर्तन में डाल कर इंग्लैंड के कप्तान इवो ब्लिग को दिया गया। वहीं से परम्परा चली आई और आज भी एशेज की ट्रॉफी उसी राख वाले बर्तन को ही माना जाता है और उसी की एक बड़ी डुप्लीकेट ट्रॉफी बना कर दी जाती है।

पोस्टकार्ड कब से चलन में आए और पहला पोस्टकार्ड किसने-किसको भेजा था?

विजय शर्मा, गायत्री किराना स्टोर्स के बाजू में, श्रीवास्तव कॉलोनी, छिंदवाड़ा-480002 (म.प्र.)


दुनिया में पोस्टकार्ड का चलन इंग्लैंड से शुरू हुआ है। पहला पोस्टकार्ड फुलहैम, लंदन से लेखक थियोडोर हुक को भजा गया था, जो लेखक ने खुद अपने नाम लिखा था। शायद यह उसी समय शुरू हुई डाकसेवा पर व्यंग्य था। इसपर ‘पेनी ब्लैक’ डाक टिकट लगा था, जो दुनिया का पहला डाक टिकट था। पर इसे पहला पोस्टल कार्ड कहना सही नहीं होगा। पोस्टल कार्ड और पोस्ट कार्ड में अंतर समझना चाहिए। पोस्ट कार्ड सामान्य कार्ड है, जिसपर डाक टिकट लगाकर भेजा जाता है, जबकि पोस्टल कार्ड किसी डाक विभाग द्वारा जारी कार्ड होता है, जिसपर डाक की कीमत छपी होती है। पोस्ट कार्ड का इस्तेमाल आज पिक्चर पोस्ट कार्ड तथा व्यावसायिक संदेशों के ले भी होता है। बहरहाल पहला पोस्टल कार्ड 1 अक्तूबर 1869 में ऑस्ट्रिया-हंगरी के डाक विभाग ने जारी किया। इसके बाद दूसरे देशों में इसकी शुरूआत हुई। पोस्टकार्ड आज संग्रह की वस्तु भी हैं। इनके अध्ययन और संग्रह को डेल्टायलॉजी कहा जाता है।

आधुनिक ‘मोबाइल फोन’ में जैलीबीन, लॉलीपॉप, किटकैट आदि नाम किस आधार पर रखे जाते हैं?

जेडी व्यास, डी-750, एमडी व्यास नगर, बीकानेर-334004 (राज.)

ये नाम मोबाइल फोन के नहीं, बल्कि मोबाइल फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम के हैं. आप जानते हैं कि कम्प्यूटर में हार्डवेयर के अलावा एक ऑपरेटिंग सिस्टम होता है। ये नाम एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम के अलग-अलग संस्करणों के हैं। एंड्रॉयड के हर वर्ज़न का नाम मिठाई पर होता है। कम्पनी ने कभी यह स्पष्ट नहीं किया कि मिठाई पर इनके नाम रखने की वजह क्या है। अलबत्ता ये नाम अल्फाबैटिक ऑर्डर में आगे बढ़ रहे हैं। कपकेक, डोनट, एक्लेयर, फ्रॉयो, जिंजरब्रैड, हनीकॉम्ब, आइसक्रीम सैंडविच, जैलीबीन और किटकैट से होते हुए यह नवीनतम लॉलीपॉप तक सिलसिला तक आ पहुंचा है। इससे यह अनुमान है कि अगला नाम एम से होगा।

संसद सत्र की कार्रवाई के अंतराल में कई बार विपक्ष द्वारा स्थगन प्रस्ताव क्यों, किन परिस्थितियों में और किन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए लाया जाता है, संसद की कार्यवाही व सत्ता पक्ष इससे किस प्रकार प्रभावित होता है?

बी. एस. चौहान, पता-बी-51, मानव स्थली अपार्टमेंट, 6, वसुंधरा एनक्लेव, दिल्ली-110095

संसदीय व्यवस्था में सदनों की अपनी नियमावली होती है। इनमें कई तरह के प्रस्तावों का उल्लेख होता है। भारतीय संसद में अवि‍लंबनीय लोक महत्व के मामले अध्‍यक्ष या सभापति की अनुमति ‍से पेश किए जा सकते हैं। इसका आशय होता है कि मामले के महत्व को देखते हुए सामान्य काम रोक कर पहले उल्लिखित विषय पर चर्चा की जाए। स्थगन प्रस्‍ताव का उद्देश्य अचानक हुई किसी घटना, सरकार की किसी चूक अथवा विफलता या फौरी तौर पर गंभीर परिणाम देने वाले मामले पर ध्यान खींचना हो सकता है। कार्य स्थगन के अलावा ध्यानाकर्षण का इस्तेमाल भी इसी प्रकार के उद्देश्य के लिए किया जा सकता है। ध्यानाकर्षण प्रक्रिया भारतीय संसदीय व्यवस्था की देन है। इसमें अनुपूरक प्रश्न पूछना और संक्षिप्त टि‍प्‍पणि‍यां करना शामिल है। इस प्रक्रिया में सरकार को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिलता है। ध्यानाकर्षण मामलों पर सभा में मतदान नहीं किया जाता।

क्या किसी भी मृत व्यक्ति का पोस्टमार्टम कराना आवश्यक है? यह क्यों जरूरी है?

ललित कुमार नागर, बी-120, दक्षिणपुरी, नई दिल्ली-110062

सामान्य रूप से किसी व्यक्ति के निधन पर पोस्टमार्टम की जरूरत नहीं होती। केवल उन मामलों में जहाँ मृत्यु के कारण को लेकर संदेह हो या आपराधिक कारण हो या एक्सीडेंट हो या संदेह का कोई और कारण हो तभी पोस्टमार्टम की जरूरत होती है।

कादम्बिनी के दिसम्बर 2015 के अंक में प्रकाशित

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