हाल में होर्मुज़ या हरमूज़ जलडमरूमध्य का नाम खबरों में काफी रहा है। जलडमरूमध्य पानी का प्राकृतिक सँकरा रास्ता होता है, जो दो बड़े जल निकायों, जैसे महासागर या समुद्र, को आपस में जोड़ता है। अंग्रेजी में इसे स्ट्रेट कहते हैं। यह पोतों के आवागमन के लिए छोटे, प्राकृतिक जलमार्ग का कार्य करता है। हिंदी में इसे जलडमरूमध्य इसलिए कहते हैं क्योंकि इसका भौगोलिक आकार डमरू जैसा होता है। डमरू के दो सिरे चौड़े और बीच का भाग सँकरा होता है। पूरे सागर क्षेत्र को डमरू मान लें, तो उसका मध्य यह मार्ग है। हिंदी में इसे जलसंधि भी लिखते हैं, अर्थात बड़ी जल राशियों के बीच की संधि। ये मार्ग व्यापारिक परिवहन और समुद्री सुरक्षा के केंद्र भी होते हैं, जैसाकि होर्मुज़ में देखा गया। कुछ ऐसे ही प्रसिद्ध मार्ग हैं मलक्का, जिब्राल्टर, बाब-अल-मंडेब और पाक जलडमरूमध्य। आप पूछ सकते हैं कि स्वेज़ नहर को भी क्या जलडमरूमध्य माना जाएगा, जो यह मिस्र में भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ने वाला 193 किमी लंबा जलमार्ग है? बेशक वह वही काम करता है, जो जलडमरूमध्य करता है, पर यह प्राकृतिक मार्ग नहीं है, मानव-निर्मित है। इसलिए इसे उस श्रेणी में नहीं रखते।
राजस्थान
पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 11 अप्रेल 2026 को प्रकाशित

यार, आपने जलडमरूमध्य को इतने आसान तरीके से समझाया कि मुझे तुरंत समझ आ गया। डमरू वाला उदाहरण मुझे खास तौर पर बहुत पसंद आया, क्योंकि वह सीधे दिमाग में बैठ जाता है। आपने होर्मुज़ जैसे उदाहरण देकर इसे और भी clear कर दिया।
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