Thursday, April 9, 2015

कम हो रही है धरती की घूमने की रफ्तार

पृथ्वी अपनी धुरी पर किस गति से घूमती है?
23 घंटे 56 मिनट 4.09 सेकंड में धरती अपनी धुरी पर पूरी तरह घूम जाती है. ऐसा माना जाता है कि धरती की घूमने की रफ्तार धीरे-धीरे कम होती जा रही है. अब से 4.8 अरब साल पहले धरती अपनी धुरी पर लगभग 10 घंटे में एक चक्कर लगा लेती थी. इस प्रकार तब दिन और रात आज के मुकाबले काफी छोटे होते थे. वैज्ञानिकों का आकलन है कि सौ साल में धरती के घूमने की गति में करीब तीस सेकंड का इजाफा हो रहा है. इससे धीरे-धीरे साल के दिनों की संख्या कम होती जाएगी. तकरीबन साठ करोड़ साल पहले 455 दिन का साल होता था. एक नए शोध में यह बात सामने आई है कि पृथ्वी के कोर में हो रही उथल-पुथल दिनों की लंबाई को प्रभावित करती है. यों पृथ्वी का अपनी धुरी पर दूसरी बातों से भी तय होता है. जैसे हवा के विपरीत पर्वत श्रृंखलाओं का होना भी गति धीमी करता है. ब्रिटेन के लिवरपूल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने वर्ष 1962 से 2010 के दिनों की लंबाई और पृथ्वी के कोर के अध्ययन के दौरान दिन की लंबाई में फर्क देखा. सन 2011 में जापान के भूकंप से धरती कुछ इतनी हिली कि यह कुछ तेज घूमने लगी और इसके कारण दिन सामान्य से थोड़ा छोटा हो गया. उस समय अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के भू-भौतिकी विज्ञानी रिचर्ड ग्रास ने गणना करने के बाद बताया कि पृथ्वी की अपनी धुरी पर चक्कर लगाने की गति 1.6 माइक्रोसेकंड बढ़ गई. यों वर्ष 2004 में सुमात्रा के भूकंप से दिन 6.8 माइक्रोसेकंड छोटा हो गया था. यानी भूकम्पों के कारण गति का बढ़ना और घटना दोनों बातें सम्भव हैं. 

स्टार्ट-अप कम्पनी क्या है?
नवोन्मेष, नवाचार से मिलता-जुलता शब्द है स्टार्ट-अप. अंग्रेजी में इसके माने हैं अचानक उदय होना, उगना, आगे बढ़ना वगैरह. इसके कारोबारी माने हैं नये और अनजाने बिजनेस मॉडल की खोज. इस अर्थ में नये किस्म के कारोबार में जुड़ी नयी कम्पनियों को स्टार्ट-अप कम्पनी कहते हैं. भारत में ई-रिटेल से जुड़ी ज्यादातर नयी कम्पनियाँ स्टार्ट-अप हैं. इनके मालिक और प्रबंधक नये हैं. उनका काम करने का तरीका नया है. यह शब्द बीसवीं सदी के अंतिम वर्षों में डॉट-कॉम ‘बूम’ और ‘बबल’ के वक्त ज्यादा लोकप्रिय हुआ. 
इन कम्पनियों के साथ विफलता और सफलता का भारी उतार-चढ़ाव और जोखिम भी जुड़ा है. साथ ही इसके साथ इंटरनेट की नयी तकनीक का इस्तेमाल भी जुड़ा है. सामाजिक दृष्टि से भारत में यह नया चलन है. अमेरिका में बिजनेस प्लान करना, नयी कम्पनी बनाना, उसके मार्फत भारी सफलता पाने का चलन पहले से है. अमेरिका के बिजनेस और इंजीनियरी संस्थानों से निकल कर छात्र कारोबार शुरू करने के बारे में सोचता है. इस चलन के समानांतर एक नई संस्कृति का जन्म हो रहा है, जिसे स्टार्ट-अप कल्चर नाम मिला है. 
भारत में अभी तक नौजवान नौकरी को वरियता देते हैं. अब स्थितियाँ बदल रहीं हैं. अब तक की समझ है कि कारोबार में जोखिम है. कम उम्र में जोखिम उठाया जा सकता है, यही इस संस्कृति का मूल मंत्र है. संपन्नता उन्हीं के पास आती है, जो जोखिम उठाते हैं. यह बात रोजी के क्षेत्र में ही नहीं है. परम्परागत की जगह नए कारोबार के आविष्कार में फायदे की गुंजाइश भी ज्यादा है. परम्परागत तरीके से 10 से 15 फीसदी फायदा मिलता है, जबकि नवोन्मेष से 85 फीसदी या उससे भी ज्यादा फायदा मिलता है. 

दुनिया का सबसे महंगा होटल?
किसी एक होटल का नाम बताना मुश्किल है. पर कुछ महंगे होटलों की तरफ इशारा कर सकते हैं. मसलन जिनीवा के प्रेसिडेंट विल्सन होटल के रॉयल पैंटहाउस सुईट का एक दिन का किराया करीब 65 हजार डॉलर यानी तकरीबन 40 लाख रुपए है. इसी तरह एथेन्स के ग्रैंड रिसॉर्ट लैगोनीसी के रॉयल विला का एक दिन का किराया 50 हजार डॉलर है. यानी कोई 30 लाख रुपए. लास वेगस, अमेरिका के पाम कसीनो रिसॉर्ट हयूज़ हैफ्नर स्काई विला का किराया 40 हजार डॉलर यानी 24 लाख रुपए के बराबर है. तोक्यो के रिट्ज़ कार्टन सुईट का किराया करीब 25 हजार डॉलर यानी करीब 15 लाख रुपए है. दुबई के बुर्ज अल अरब का एक दिन का किराया तकरीबन 19 लाख डॉलर यानी 12 लाख रुपए है. इन विशेष सुईट के साथ बटलर, शैफ, वेटर, गार्ड, संगीतकारों की मंडली, मसाजर और डॉक्टर जैसी सेवाएं, शोफर ड्रिवन रॉल्स रॉयस कारें, निजी जिम, स्विमिंग पूल, जाकूजी जैसी सुविधाएं होतीं हैं.   

लिपस्टिक का चलन कैसे शुरू हुआ?
होंठों को रंगने का चलन सभ्यताओं को जन्म लेने से पहले का है. पुराने मिस्र, चीन और सिंधु घाटी की सभ्यताओं के अवशेषों में होंठों को रंगने वाली चीजें भी मिलीं हैं. इस्लाम के स्वर्ण युग में अरबी हकीम ज़र्राह अबू अल कासिम अल ज़हराबी ने होंठों को सजाने के लिए खुशबूदार बत्तियाँ बनाईं थीं. पर यूरोप में लिपस्टिक लगाना अच्छा नहीं समझा जाता था. बावजूद इसके 16 वीं सदीं में इंग्लैंड की रानी एलिज़ाबेथ अपने होंठ लाल रंग से रंगती थी. वह रंग मधुमक्खियों के छत्ते के मोम और फूलों के रंग से मिलकर बनता था. इस पर कई बार पाबंदियाँ लगीं, पर उन्नीसवीं सदी के अंत में फ्रांसीसी कम्पनी गेर्ले ने लिपस्टिक का उत्पादन शुरू किया तो उसकी माँग बढ़ती ही गई. हॉलीवुड की अभिनेत्रियों मार्लिन मुनरो और एलिज़ाबेथ टेलर ने गाढ़े रंग की लिपस्टिक का चलन शुरू किया.  

प्रभात खबर के अवसर में प्रकाशित

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर ज्ञानवर्धक जानकारी ....

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  2. धन्यवाद सर, स्टार्ट अप कंपनी के बारे में जानकारी देने के लिए.... शायद में भी एक अपनी स्टार्ट अप कंपनी खोलने में कामयाब हो जाऊ...

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