Sunday, February 3, 2013

कॉफमैन ने बनाई थी आकाशवाणी की सिग्नेचर ट्यून


ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) की ओपनिंग ट्यून किसने कंपोज की है ?
आकाशवाणी की ओपनिंग धुन को लेकर कई प्रकार की धारणाएं हैं, पर मेरी जानकारी के अनुसार चेक संगीतकरा वॉल्टर कॉफमैन के एक सोनाटा यानी बंदिश का एक हिस्सा यह धुन है। इसे 1936 या उसके आसपास कभी बनाया गया होगा। वॉल्टर कॉफमैन उस वक्त मुम्बई में ऑल इंडिया रेडियो की पश्चिमी संगीत शाखा से जुड़े थे। इस रचना में तानपूरा, वायोला और वायलिन का इस्तेमाल हुआ है।


धरती पर समंदर कैसे और कब बने
चूंकि बुध, शुक्र, मंगल या चन्द्रमा पर समुद्र नहीं हैं, इसलिए सवाल उठता है कि धरती पर सागर कैसे बने। एक अनुमान है कि धरती भारी उल्कापात के कारण गड़्ढे बने होंगे। पर पानी कहाँ से आया? इन बातों का जवाब देने के पहले हमें सौरमंडल पर ध्यान देना होगा। अब से तकरीबन 3.8 अरब वर्ष पहले जब सौरमंडल को बने तकरीबन एक अरब साल हुए थे, धरती पर सागर बने थे। सौरमंडल शुरू में धूल और गैस के गोले के रूप में शुरू हुआ था। धीरे धीरे अलग-अलग ग्रहों ने शक्ल ली जो ग्रह सूर्य के नज़दीक थे वे ज्यादा ठोस चट्टानों के बने थे। इनमें बुध, शुक्र, धरती और मंगल हैं। इसके बाहर के ग्रह वृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून गैस और बर्फ के गोले हैं। इन्हें जोवियन ग्रह कहते हैं। चार अरब साल पहले बेहद आग के गोले की तरह थी। उसकी सतह पर पानी था ही नहीं। धरती पर पानी दो तरह से आया होगा। एक तो उल्काओं की बारिश के कारण और दूसरे ज्वालामुखियों और पिघली चट्टानों से निकली गैसों के कारण। धरती की सतह जब तक 100 डिग्री के तापमान पर ठंडी नहीं हुई तब तक पानी गैस की शक्ल में ही था। तकरीबन 3.8 अरब साल पहले पानी कंडेस्ड होकर भारी बारिश के रूप में बरसने लगा। सैकड़ों-हजारों या लाखों साल तक बारिश होती रही। निचले इलाकों में पानी भरने लगा। यह पानी भाप बनकर फिर उठता और फिर बरसता। और नमक कहाँ से आया? वैज्ञानिकों का अनुमान है कि पुराने वक्त में धरती पर ज्वालामुखियों की बड़ी संख्या थी। वे वातावरण भाप के अलावा क्लोरीन छोड़ते थे। इससे हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बना। इस अम्ल ने चट्टानों को गलाया, जिनसे सोडियम रिस कर बाहर आया। जब सोडियम और क्लोरीन के एटम मिले तो सोडियम क्लोराइड बना जो नमक है। 

बिना पायलट के एयरक्राफ्ट को क्या कहते हैं ?
इन्हें अनमैन्ड एरियल ह्वीकल (यूएवी) रिमोटली पायलटेड ह्वीकल कहते हैं। इनका इस्तेमाल आमतौर पर टोह लेने के लिए होता है। आजकल आप अफगानिस्तान में इस्तेमाल हो रहे ड्रोन विमानों का नाम सुनते हैं। ये भी इसी प्रकार के विमान हैं, जो बम भी ले जाते हैं। अब पायलट रहित हैलीकॉप्टर भी बन रहे हैं।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI किसे कहते हैं ?
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश माने किसी देश के कारोबार या उद्योग में दूसरे देश की कम्पनियों द्वारा किया पूँजी निवेश। यह काम किसी कम्पनी को खरीदकर या उसकी हिस्सेदारी खरीदकर या कोई नई कम्पनी बनाकर भी किया जा सकता है।

सिक्सथ सेन्स क्या है ?
आमतौर पर मनुष्य की पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ मानी जाती हैं। सुनना, देखना, स्पर्श करना, सूँगना और स्वाद लेना। सिक्स्थ सेंस का आशय है कि भीतरी रूप से या अंतर्मन से अनुभव करना। मसलन सपनों का सच होना। इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

भारत की पहली फिल्म कौन सी है.. और कब रिलीज हुई ?
भारत में पहली फिल्म दादा साहेब टोरने की मूक फिल्म श्री पुंडलीक थी, जो 18 मई 1912 को कॉरोनेशन सिनेमाटोग्राफ में रिलीज़ हुई थी। पर पहली फुल लेंग्थ मूवी 1913 में रिलीज़ हुई राजा हरिश्चन्द्र थी, जिसे दादासाहेब फाल्के ने बनाया था।

ज्योतिष, गणित है या विज्ञान ?
ज्योतिष में जो गणनाएं होती हैं, वे गणित है। पर यदि आप फलित ज्योतिष की बात करें कि वृहस्पति की या शनि की महादशा में ऐसा क्यों हैं, तो इसका आधुनिक विज्ञान से कोई रिश्ता नहीं है। अलबत्ता बहुत से लोग इसे विज्ञान मानते हैं, पर यह उनकी मान्यता है।

बादल फटने का मतलब क्या होता है ?
बादल फटने का मतलब एक छोटे से इलाके में कुछ मिनटों के भीतर भारी बरसात होना हैमैदानी क्षेत्रों की अपेक्षा पहाड़ी क्षेत्रों में बादल ज्यादा फटते हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्रति घंटा 100 मिलीमीटर (3.94 इंच) के बराबर या उससे ज्यादा बारिश होना बादल फटना है। इस दौरान जो बादल बनता है वह जमीन से 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक जा सकता है। बादल फटने के दौरान कुछ मिनटों में 20 मिलीमीटर से ज्यादा बरसात हो सकती है। जब वातावरण में बहुत ज्यादा नमी हो और बादलों को आगे बढ़ने की जगह न मिले तब ऐसा होता है। भारी मात्रा के साथ क्यूम्यूलोनिम्बस या कपासी वर्षी बादल जब ऊपर उठते हैं और उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता नहीं मिलता तो उनमें मौजूद पानी नीचे गिर जाता है। यह एक तरीके से पानी भरे बैलून का फटना है। इसकी दूसरी वजहें भी होती हैं। जैसे कि सर्द और गर्म हवाओं का टकराना। 26 जुलाई 2005 को मुम्बई में इसी तरह से बादल फटा था।

भारत में पहला मोबाइल कॉल कब और किनके बीच किया गया था ?
यदि परीक्षण कॉलों को न गिनें तो औपचारिक रूप से पहली कॉल बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने कोलकाता से 31 जुलाई 1995 में केन्द्र के तत्कालीन दूरसंचार मंत्री सुखराम को कॉल किया था। उस दिन से मोजी टेल्स्ट्रॉ मोबाइल नेट सर्विस कोलकाता में शुरू हुई थी।

 MRP (मैक्सिमम रिटेल प्राइस) का मानक क्या है?
किसी भी वस्तु के मूल्य का मानक वस्तु के निर्धारण में लगी सामग्री, श्रम, टैक्स तथा पूँजी लगाने वाले का मुनाफा मिलाकर देखा जाता है। भारत में उपभोक्ता सामग्री (उत्पादन और अधिकतम मूल्य का अनिवार्य मुद्रण) अधिनियम 2006 के अनुसार देश में बिकने वाली उपभोक्ता सामग्री का अधिकतम मूल्य पैकेट पर लिखना अनिवार्य है।

क्या गीतकार शैलेन्द्र ने फिल्मों में भी अभिनय किया है.. फिल्मों के नाम बताएं?
सन 1954 में बनी राजकपूर की फिल्म बूट पॉलिश में शैलेन्द्र ने अभिनय भी किया था। इस फिल्म के गीत उन्होंने लिखे थे, जिनमें से नन्हें-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है... अमर हो गया। 



Wednesday, January 30, 2013

34 साल की है पहली टेस्ट ट्यूब बेबी



पहला टेस्ट ट्यूब बेबी कितने साल का है? आजकल क्या कर रहा है?

कर रहा है नहीं कर रही है। पुरुष पहले आया या स्त्री इसका पता नहीं, पर टेस्ट ट्यूब बेबी के रूप में सबसे पहले लड़की का जन्म हुआ था। 25 जुलाई 1978 को ग्रेट ब्रिटेन में लेज़्ली ब्राउन ने दुनिया के पहले टेस्ट ट्यूब बेबी को जन्म दिया था। इस बेबी का नाम है लुइज़ जॉय ब्राउन। इनके पिता का नाम है जॉन ब्राउन। इनके माता-पिता के विवाह के नौ साल बाद तक संतान नहीं होने पर उन्होंने डॉक्टरों से सम्पर्क किया। डॉक्टर रॉबर्ट जी एडवर्ड्स कई साल से ऐसी तकनीक विकसित करने के प्रयास में थे, जिसे इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन कहा जाता है। डॉक्टर एडवर्ड्स को बाद में चिकित्सा विज्ञान का नोबेल पुरस्कार भी दिया गया। टेस्ट ट्यूब बेबी लुइज़ आज 34 वर्ष की हैं और वे एक बच्चे की माँ हैं। उनके बेटे का नाम केमरन है, जिसकी उम्र पाँच साल है। लुइज़ का विवाह सन 2004 में वेस्ली मलिंडर से हुआ था। और 20 दिसम्बर 2006 को केमरन का जन्म सामान्य तरीके से हुआ।
ऑटोग्राफ देने का रिवाज़ कैसे शुरू हुआ?
ऑटोग्राफ शब्द का अर्थ है हस्तलेख। ऑटोस यानी स्व और ग्राफो यानी लिखना। यानी जो आपने स्वयं लिखा है। पुराने वक्त में टाइपिंग या छपाई होती नहीं थी। केवल हाथ से लिखा जाता था, पर जो जो पत्र, दस्तावेज़ या लेख व्यक्ति स्वयं लिखता उसे ऑटोग्राफ कहते। ऐसा भी होता कि दस्तावेज़ कोई और लिखता और उसके नीचे उसे अधिकृत करने वाला अपने हाथ से अपना नाम लिख देता। यह नाम उसकी पहचान था। ऑटोग्राफ इस अर्थ में दस्तखत हो गया। किसी को याद रखने का सबसे अच्छा तरीका उसके हस्तलेख या ऑटोग्राफ हासिल करना भी हो गया। राजाओं, राष्ट्रपतियों, जनरलों, कलाकारों, गायकों वगैरह के दस्तखत अपने पास जमा करके रखने का चलन बीसवीं सदी में बढ़ा है। इस शौक को फिलोग्राफी कहते हैं।
पारसमणि क्या है?
पारसमणि एक काल्पनिक पत्थर है, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसके स्पर्श से कोई भी चीज़ सोने की हो जाती है। ऐसा कहा जाता है कि प्राचीन भारतीय रसायानाचार्य नागार्जुन ने पारे को सोने में बदलने की तरकीब विकसित की थी। यह भी कहा जाता है कि उन्होंने ही पारसमणि बनाई थी। पारसमणि पत्थर है या रासायनिक रचना इसे लेकर भी अलग-अलग राय है। अलबत्ता झारखंड के गिरिडीह इलाके के पारसनाथ जंगल में आज भी लोग पारसमणि की खोज करते रहते हैं।
रविवार की छुट्टी किस देश में नहीं होती?
ऱविवार की छुट्टी ईसाई परम्परा है। बाइबिल के अनुसार ईश्वर ने पृथ्वी की रचना सात दिन में की। और सातवें दिन आराम किया। सातवाँ दिन आराम का और ईश्वर की प्रार्थना का दिन है। हर देश में रविवार को छुट्टी नहीं होती। हमारे पड़ोस में नेपाल है, जहाँ शनिवार को साप्ताहिक छुट्टी होती है। बांग्लादेश है जहाँ शुक्रवार को छुट्टी होती है।
रेडियो जॉकी की आवाज़ हम तक कैसे पहुँचती है?
इस बात का जवाब देने के लिए हम अपने स्टूडियो पर नज़र डालते हैं। आशिमा जी ने जब यह सवाल पूछा तब उन्होंने माइक्रोफोन का इस्तेमाल किया और जब मैंने जवाब दिया तब दूसरे माइक्रोफोन का इस्तेमाल किया। माइक्रोफोन ने हमारी आवाज को इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदला। यह सिग्नल इतना ताकतवर नहीं होता कि सवाल पूछने वाले को मेरी आवाज़ सुनाई पड़ जाए, इसलिए इसलिए इसे ट्रांसमीटर में भेजा जाता है। ट्रांसमीटर इस सिग्नल को कुछ और ताकतवर सिग्नल्स के साथ मिला देता है। यह स्ट्रांग सिग्नल्स कैरियर वेव्स होती हैं। रेडियो वेव इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का एक रूप है। सन 1864 में ब्रिटिश वैज्ञानिक जेम्स क्लार्क मैक्सवैल ने इसे सिद्धांत रूप में साबित किया था और 1880 में जर्मन वैज्ञानिक हेनरिश हर्ट्ज़ ने इसे पुष्ट किया। हर्ट्ज़ ने पहली बार रेडियो तरंगों के प्रसारण और ग्रहण करने के काम को करके दिखाया। 1896 में इटली के गुग्लिएल्मो मार्कोनी ने रेडियो तरंगों का इस्तेमाल करते हुए टेलीग्राफ प्रणाली को पेटेंट कराया। बहरहाल रेडियो तरंगों के माध्यम से हमारी आवाज़ श्रोताओं तक जा रही है। जब ये तरंगें आपके रेडियो के एंटीना तक पहुंचती हैं तब एंटीना उन्हें कैच कर रेडियो के एम्प्लीफायर तक पहुंचाता है और एम्प्लीफायर इसे और ताकत देकर स्पीकर तक पहुंचाता है। आपके कान इन्हें सुनकर आपके दिमाग तक पहुँचाते हैं।
गांधीजी को राष्ट्रपिता की उपाधि कैसे मिली?
गांधी जी को यह उपाधि किसी ने दी नही, बल्कि यह जन-भावना का प्रतीक सम्बोधन है। अलबत्ता सन 1944 में रंगून से एक रेडियो प्रसारण में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने उनके नाम के पहले राष्ट्रपिता शब्द लगाया। इसी तरह 30 जनवरी 1948 को गांधी जी की हत्या के बाद राष्ट्र के नाम सम्बोधन में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें राष्ट्रपिता कहकर सम्बोधित किया। इसी तरह उनके महात्मा सम्बोधन के बारे में भी प्रमाण के साथ नहीं कहा जा सकता कि किसने पहली बार उन्हें महात्मा कहा। सन 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत आने के पहले उन्हें महात्मा कहा जाता था या नहीं। आमतौर पर माना जाता है कि उन्हें गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने महात्मा कहा। पर यह नाम उन्होंने दिया या उससे पहले से उन्हें महात्मा कहा जाता रहा था, इसपर मतभेद है। ऐसा प्रमाण ज़रूर है कि 21 जनवरी 1915 को गुजरात के जेतपुर में नगरसेठ और स्वतंत्रता सेनानी नौतमलाल भगवानजी मेहता (कामदार) ने उन्हें महात्मा कहा था। उस समय तक गांधी जी की गुरुदेव से भेंट नहीं हुई थी। गुरुदेव से उनकी मुलाकात अप्रेल 1915 में हुई। इसी प्रकार का सम्बोधन बापू भी है।
कुम्भ मेला का इतिहास क्या है?
कुम्भ मेला हिन्दू धर्म का एक महत्त्वपूर्ण पर्व है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु कुम्भ पर्व स्थल-हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक में स्नान करते हैं। इनमें से प्रत्येक स्थान पर प्रति बारहवें वर्ष में इस पर्व का आयोजन होता है। मेला प्रत्येक तीन वर्षो के बाद नासिक, इलाहाबाद, उज्जैन और हरिद्वार में बारी-बारी से मनाया जाता है। इलाहाबाद में संगम के तट पर होने वाला आयोजन सबसे भव्य और पवित्र माना जाता है। इसका आयोजन प्राचीन काल से हो रहा है, लेकिन मेले का प्रथम लिखित प्रमाण महान बौद्ध तीर्थयात्री ह्वेनसांग के लेख से मिलता है जिसमें आठवीं शताब्दी में सम्राट हर्षवर्धन के शासन में होने वाले कुम्भ का प्रसंगवश वर्णन किया गया है। इस मेले में करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होते है। ऐसी मान्यता है कि संगम के पवित्र जल में स्नान करने से आत्मा शुद्ध हो जाती है। धार्मिक मान्यता है कि राक्षसों और देवताओं में जब अमृत के लिए लड़ाई हो रही थी तब भगवान विष्णु ने एक 'मोहिनी' का रूप लिया और राक्षसों से अमृत को हासिल कर लिया। भगवान विष्णु ने गरुड़ को अमृत पात्र दे दिया। राक्षसों और गरुड़ के संघर्ष में अमृत की कुछ बूंदें इलाहाबाद, नासिक, हरिद्वार और उज्जैन में गिर गई। तब से प्रत्येक 12 साल में इन सभी स्थानों में 'कुम्भ मेला' आयोजित किया जाता है। हरिद्वार और प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच छह वर्ष के अंतराल में अर्द्धकुंभ होता है।

Thursday, December 27, 2012

आज ग़ालिब जयंती है


मिर्ज़ा असद-उल्लाह बेग ख़ां उर्फ ग़ालिबका जन्म 27 दिसम्बर 1776 को आगरा मे एक सैनिक पृष्ठभूमि वाले परिवार में हुआ था। वे उर्दू और फ़ारसी के महान शायर थे। उन्हें उर्दू के सार्वकालिक महान शायरों में गिना जाता है। ग़ालिब (और असद) नाम से लिखने वाले मिर्ज़ा मुग़ल काल के आख़िरी शासक बहादुर शाह ज़फ़र के दरबारी कवि भी रहे थे। 1850 मे शहंशाह बहादुर शाह ज़फर द्वितीय ने मिर्ज़ा गालिब को "दबीर-उल-मुल्क" और "नज़्म-उद-दौला" के खिताब से नवाज़ा। बाद मे उन्हे "मिर्ज़ा नोशा" का खिताब भी मिला। आगरा, दिल्ली और कलकत्ता में अपनी ज़िन्दगी गुजारने वाले ग़ालिब को मुख्यतः उनकी ग़ज़लों को लिए याद किया जाता है। उन्होने अपने बारे में स्वयं लिखा था, हैं और भी दुनिया में सुखन्वर बहुत अच्छे/ कहते हैं कि ग़ालिब का है अन्दाज़-ए बयां और

बहरहाल ग़ालिब की कुछ पंक्तियाँ नीचे पढ़ें

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बस कि दुश्वार है हर काम का आसां होना/आदमी को मयस्सर नहीं इंसा होना
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इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना/ दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना
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कोई उम्मीद बर नहीं आती/कोई सूरत नज़र नहीं आती

मौत का एक दिन मु'अय्यन है/नींद क्यों रात भर नहीं आती

आगे आती थी हाल-ए-दिल पे हँसी/अब किसी बात पर नहीं आती

जानता हूँ सवाब-ए-ता'अत-ओ-ज़हद/पर तबीयत इधर नहीं आती

है कुछ ऐसी ही बात जो चुप हूँ/वर्ना क्या बात कर नहीं आती

क्यों न चीख़ूँ कि याद करते हैं/मेरी आवाज़ गर नहीं आती

दाग़-ए-दिल नज़र नहीं आता/बू-ए-चारागर नहीं आती

हम वहाँ हैं जहाँ से हम को भी/कुछ हमारी ख़बर नहीं आती

मरते हैं आरज़ू में मरने की/मौत आती है पर नहीं आती

काबा किस मुँह से जाओगे 'ग़ालिब'/शर्म तुमको मगर नहीं आती
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न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ न होता तो ख़ुदा होता,
डुबोया मुझको होने ने न मैं होता तो क्या होता !
हुआ जब गम से यूँ बेहिश तो गम क्या सर के कटने का,
ना होता गर जुदा तन से तो जहानु पर धरा होता!
हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है,
वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता !
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ये न थी हमारी क़िस्मत के विसाल[1]-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इन्तज़ार होता

तेरे वादे पर जिये हम तो ये जान झूठ जाना
कि ख़ुशी से मर न जाते अगर ऐतबार होता

तेरी नाज़ुकी[2] से जाना कि बंधा था अ़हद[3] बोदा[4]
कभी तू न तोड़ सकता अगर उस्तुवार[5] होता

कोई मेरे दिल से पूछे तेरे तीर-ए-नीमकश[6] को
ये ख़लिश[7] कहाँ से होती जो जिगर के पार होता

ये कहां की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह[8]
कोई चारासाज़[9] होता, कोई ग़मगुसार[10] होता

रग-ए-संग[11] से टपकता वो लहू कि फिर न थमता
जिसे ग़म समझ रहे हो ये अगर शरार[12] होता

ग़म अगर्चे जां-गुसिल[13] है, पर[14] कहां बचे कि दिल है
ग़म-ए-इश्क़ गर न होता, ग़म-ए-रोज़गार होता

कहूँ किससे मैं कि क्या है, शब-ए-ग़म बुरी बला है
मुझे क्या बुरा था मरना? अगर एक बार होता

हुए मर के हम जो रुस्वा, हुए क्यों न ग़र्क़[15]-ए-दरिया
न कभी जनाज़ा उठता, न कहीं मज़ार होता

उसे कौन देख सकता, कि यग़ाना[16] है वो यकता[17]
जो दुई[18] की बू भी होती तो कहीं दो चार होता

ये मसाइल-ए-तसव्वुफ़[19], ये तेरा बयान "ग़ालिब"!
तुझे हम वली[20] समझते, जो न बादाख़्वार[21] होता

शब्दार्थ:1 मिलन, 2 कोमलता, 3 प्रतिज्ञा, 4 खोखला, 5 दृढ़,अटल, 6 आधा खिंचा हुआ तीर, 7 पीड़ा,चुभन, 8 उपदेशक, 9 सहायक, 10 सहानुभूतिकर्ता, 11 पत्थर की नस, 12 अंगारा, 13 प्राणघातक, 14 आखिर, 15 डूब जाना, 16 बेमिसाल, 17 अद्वितीय, 18 दोगलापन, 19 सूफीवाद की समस्याएं, 20 पीर, औलिया, 21 शराबी
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रहिये अब ऐसी जगह चलकर जहाँ कोई न हो
हमसुख़न कोई न हो और हमज़बाँ कोई न हो

बेदर-ओ-दीवार सा इक घर बनाया चाहिए
कोई हमसाया न हो और पासबाँ कोई न हो

पड़िये गर बीमार तो कोई न हो तीमारदार
और अगर मर जाईये तो नौहाख़्वाँ कोई न हो

Friday, December 7, 2012

क्या नॉर्वे में आधी रात तक सूरज चमकता है?


कहते हैं कि नार्वे में आधी रात तक सूरज चमकता है। क्या यह बात सही है?


नॉर्वे उत्तरी ध्रुव के काफी करीब है। इस इलाके में गर्मियों में रात के बारह बजे के बाद तक सूरज चमकता है। रातें कुछ घंटे की होती हैं, उस दौरान भी सूरज क्षितिज के करीब होता है इसलिए रातें अंधियारी नहीं होतीं। इसलिए इसे अर्धरात्रि के सूर्य वाला देश कहते हैं।



नीम में क्या चीज़ होती है जिससे वह कड़वा होता है?

नीम के तीन कड़वे तत्वों को वैज्ञानिकों ने अलग निकाला है, जिन्हें निम्बिन, निम्बिडिन और निम्बिनिन नाम दिए हैं। सबसे पहले 1942 में भारतीय वैज्ञानिक सलीमुज़्ज़मा सिद्दीकी ने यह काम किया। वे बाद में पाकिस्तान चले गए थे। नाम का यह कड़वा तत्व एंटी बैक्टीरिया, एंटी वायरल होता है और कई तरह के ज़हरों को ठीक करने का काम करता है।

दिल्ली में सबसे ज्यादा गहराई वाला मेट्रो स्टेशन कौन सा है? मनोहर लाल गांधी, ग़ाज़ियाबाद
दिल्ली में सबसे ज्यादा गहराई वाला मेट्रो स्टेशन चावड़ी बाज़ार है, जो 30 मीटर यानी तकरीबन 98 फुट की गहराई पर है। इसके आसपास जामा मस्जिद और लाल किला जैसी ऐतिहासिक इमारतें हैं, उन्हें मेट्रो चलने से किसी प्रकार का नुकसान न हो इसलिए इतनी गहराई रखी गई है।

किसी फिल्म के ऑस्कर में जाने का मतलब क्या है? स्काई, नई दिल्ली
ऑस्कर पुरस्कार अमेरिका की अकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंस की ओर से दिए जाते हैं। इसमें एक पुरस्कार अमेरिका से बाहर बनी और गैर-अंग्रेजी फिल्म की सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए भी है। विदेशी भाषा की यह श्रेणी 1956 के पहले नहीं होती थी। अलबत्ता 1947 से 1955 तक अमेरिका में रिलीज़ हुई एक विदेशी भाषा की फिल्म को मानद पुरस्कार दिया जाता था। वह पुरस्कार प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं था। 1956 से यह प्रतियोगिता का हिस्सा हो गया यानी उसके लिए कुछ फिल्मों का नामांकन होने लगा, जनमें से एक को पुरस्कार दिया जाने लगा। भारत ने 1957 से इस पुरस्कार के लिए फिल्में भेजना शुरू किया। 1957 में भेजी गई पहली फिल्म थी मदर इंडिया जिसे चार अन्य फिल्मों के साथ प्रतियोगिता के फाइनल में रखा गया। केवल एक वोट से मदर इंडिया पिछड़ गई। 1984 से अब तक भारत हर साल फिल्म भेजता है। केवल सन 2003 में विवाद के कारण कोई फिल्म नहीं भेजी गई। अब तक केवल मदर इंडिया, लगान और सलाम बॉम्बे तीन भारतीय फिल्में पुरस्कार के फाइनल चक्र के लिए नामांकित हुईं हैं, पर पुरस्कार किसी को नहीं मिला है। भारतीय फिल्म का चयन फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की एक ज्यूरी करती है। पिछले साल भारत के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की ज्यूरी ने सुझाव दिया कि जिस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय फिल्म का पुरस्कार दिया जाए उसे ही ऑस्कर पुरस्कार के लिए भेजना चाहिए।

हमारे देश का प्रतीक चिह्न कहाँ से लिया गया? यह क्यों और कहाँ इस्तेमाल होता है?
हमारे देश का प्रतीक चिह्न चार शेरों वाली प्रतिमा हो जो अशोक स्तम्भ के शिखर पर लगी थी। इसे ईसवी सन शुरू होने के 250 साल पहले सम्राट अशोक ने बनवाया था। यह स्तम्भ सारनाथ में आज भी खड़ा है और प्रतिमा सारनाथ के संग्रहालय में रखी है। इन चारों शेरों के नीचे एक घेरे में एक हाथी, एक घोड़ा और एक नन्दी है। इसके बीच में धर्मचक्र है। इसके नीचे लिखा है सत्यमेव जयते, जो मुंडक उपनिषद से लिया गया है। इसे हमारे तमाम शासकीय कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है। उसमें स्थित धर्मचक्र हमारे तिरंगे झंडे के बीच में लगाया गया है। हर देश का कोई न कोई प्रतीक चिह्न होता है। हमारा प्रतीक चिह्न हमारे गौरवपूर्ण अतीत की कहानी कहता है।

धरती से कितने ऊपर अंतरिक्ष शुरू होता है? अनिल शर्मा, दिल्ली
हालांकि ऐसी कोई सीमा नहीं है जहाँ से अंतरिक्ष की शुरुआत मानी जाए, पर सामान्यतः समुद्र की सतह से 100 किमी की ऊँचाई के बाद हम अंतरिक्ष की शुरूआत मानने लगे हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1967 में पारित वाह्य अंतरिक्ष संधि में भी यही सीमा मानी गई है। इसे कामान रेखा कहा जाता है।

WHO का फुल फॉर्म क्या है- प्रदीप वाधवा, गीतेश वाधवा, झज्जर
World health organization


वो दो दिन कौन से होते हैं, जब दिन और रात बराबर होते हैं? –तबस्सुम हाशमी, जामियानगर
विषुव अंग्रेज़ी में इसे इक्विनॉक्स कहते हैं। यानी ऐसा समय-बिंदु, जिसमें दिन और रात बराबर। किसी इलाके में दिन और रात की लंबाई पर असर डालने वाली कई बातें होतीं हैं। धरती अपनी धुरी पर २३½° झुककर सूर्य के चक्कर लगाती है, इस प्रकार वर्ष में एक बार पृथ्वी इस स्थिति में होती है, जब वह सूर्य की ओर झुकी रहती है, व एक बार सूर्य से दूसरी ओर झुकी रहती है। इसी प्रकार वर्ष में दो बार ऐसी स्थिति भी आती है, जब पृथ्वी का झुकाव न सूर्य की ओर ही होता है, और न ही सूर्य से दूसरी ओर, बल्कि बीच में होता है। इसे इक्विनॉक्स कहा जाता है। इन दोनों तिथियों पर दिन और रात की बराबर लंबाई लगभग बराबर होती है। ऐसा भूमध्य रेखा पर होगा। आजकल ऐसा 20/21 मार्च और 22/23 सितम्बर को होता है। पर यह भी अलग-अलग अक्षांश यानी लैटीट्यूड पर अलग-अलग दिन होता है।


नोबेल प्राइज़ की शुरूआत किसने की और यह किन श्रेणियों में दिया जाता है?-अख्तर, निजामुद्दीन वेस्ट
नोबेल पुरस्कार की स्थापना स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड बर्नाड (बर्नहार्ड) नोबेल की याद में 1901 में की गई थी। उनका जन्म 1833 ई. में स्वीडन के शहर स्टॉकहोम में हुआ था। उन्होंने 1866 में डाइनामाइट की खोज की। स्वीडिश लोगों को 1896 में उनकी मृत्यु के बाद ही पुरस्कारों के बारे में पता चला, जब उन्होंने उनकी वसीयत पढ़ी, जिसमें उन्होंने अपने धन से मिलने वाली सारी वार्षिक आय पुरस्कारों की मदद करने में दान कर दी थी। शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वालों को हर साल यह पुरस्कार दिया जाता है। पहले नोबेल पुरस्कार पाँच विषयों में कार्य करने के लिए दिए जाते थे। अर्थशास्त्र के लिए पुरस्कार स्वेरिजेश रिक्स बैंक, स्वीडिश बैंक द्वारा अपनी 300वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में 1967 में आरम्भ किया गया और इसे 1969 में पहली बार प्रदान किया गया। इसे अर्थशास्त्र में नोबेल स्मृति पुरस्कार भी कहा जाता है।






Thursday, December 6, 2012

ऑपरेशन के रूम को ऑपरेशन थिएटर क्यों कहते हैं?


आपरेशन के रूम को आपरेशन थिएटर क्यों कहते हैं, जबकि वहां न कोई नाटक होता है और ना ही कोई ऑडियंस? 

ऑपरेशन रूम अमेरिकी इस्तेमाल है और ऑपरेशन थिएटर ब्रिटिश। इन्हें ऑपरेशन रूम या कक्ष कहना ही बेहतर है, पर इन्हें थिएटर कहने के पीछे बाकायदा प्रदर्शन की व्यवस्था है जो थिएटर का महत्वपूर्ण पक्ष है। मेडिकल कॉलेजों में छात्रों के सर्जरी से परिचित कराने के लिए ऐसी व्यवस्थाएं की गईं थीं, जिनमें एक गोल थिएटर जैसे मंच के चारों ओर गोल घेरे में बैठने के स्थान बनाए गए। पर मूलतः सन 1884 में जर्मन सर्जन गुस्ताब न्यूबर ने ऑपरेशन के लिए साफ-सुथरी कीटाणु मुक्त व्यवस्था की कल्पना की थी, जिसमें गाउन, कैप, शू कवर तक ऐसे पहनने होते थे, जो डिसइनफैक्टेड होते थे। 


डेंगू शब्द कहाँ से आया? 
हालांकि डेंगू शब्द का इस्तेमाल काफी होने लगा है, पर इस शब्द का सही उच्चारण डेंगी है। यह स्पष्ट नहीं है कि शब्द कहां से आया। कुछ लोगों का मानना है कि यह शब्द स्वाहीली के वाक्यांश का-डिंगा पेपो से आया है। यह वाक्यांश बुरी आत्माओं से होने वाली बीमारी के बारे में बताता है। माना जाता है कि स्वाहीली शब्द डिंगा स्पेनी के शब्द डेंगी से बना है। इस शब्द का अर्थ है "सावधान"। वह शब्द एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताने के लिए उपयोग किया गया हो सकता है जो डेंगू बुखार के हड्डी के दर्द से पीड़ित हो; वह दर्द उस व्यक्ति को सावधानी के साथ चलने पर मजबूर करता होगा। यह भी संभव है कि स्पेनी शब्द स्वाहीली भाषा से आया हो। कुछ का मानना है कि "डेंगू" नाम वेस्ट इंडीज़ से आया है। वेस्ट इंडीज़ में, डेंगू से पीड़ित लोग कमर दर्द के कारण  डैंडी की तरह अकड़े हुए चलते थे। इसी कारण से बीमारी को भी "डैंडी फीवर" कहा जाता था। इसे कमरतोड़ बुखार भी कहते हैं।

मेजर ध्यानचंद ने कितने गोल किए थे अपने पूरे खेल जीवन में ? क्या किसी और हॉकी खिलाडी ने उनके बराबर या उनसे ज्यादा गोल किए हैं?

ध्यानचंद ने तीन ओलिम्पिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया तथा तीनों बार देश को स्वर्ण पदक दिलाया। वे जिस ज़माने में खेलते थे उन दिनों हॉकी के रिकॉर्ड रखने की परम्परा नहीं थी। आज भी नहीं है मैने अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ की साइट पर सबसे ज़्यादा गोल स्कोर के आँकड़ों को देखना चाहा तो नहीं मिले। बहरहाल जो जानकारियाँ हैं वह बताता हूँ। तब एक ओलिम्पिक प्रतियोगिता होती थी, वह भी चार साल में। आज कई तरह की प्रतियोगिताएं होती हैं। भारत ने 1932 में 37 मैच में 338 गोल किए, जिसमें 133 गोल ध्यानचंद ने किए थे। दूसरे विश्व युद्ध से पहले ध्यानचंद ने 1928 (एम्सटर्डम), 1932 (लॉस एंजिल्स) और 1936 (बर्लिन) में लगातार तीन ओलिंपिक में भारत को हॉकी में गोल्ड मेडल दिलाए। बहरहाल इन दिनों माना जाता है कि पाकिस्तान के सुहेल अब्बास ने 9 अगस्त 2012 तक अंतरराष्ट्रीय मैचों में 348 गोल किए हैं। इसे विश्व रिकॉर्ड माना जाता है।
यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड यरलैंड के डाक टिकटों पर देश का नाम नहीं होता। इसकी वजह यह है कि इन देशों में ही डाक टिकटों की शुरूआत हुई थी और इन्होंने तब अपने देशों के नाम डिकट पर नहीं डाले थे। हाँ इन टिकटों पर देश राजतंत्र की छवि ज़रूर होती है।

हिंदी को खड़ी बोली क्यों कहा जाता है?

हिन्दी को खड़ी बोली नहीं कहा जाता, बल्कि कहा यह जाता है कि आज की जो मानक हिन्दी है वह खड़ी बोली से निकली है। खड़ी बोली पश्चिम रुहेलखंड, गंगा के उत्तरी दोआब तथा अंबाला जिले की उपभाषा है जो ग्रामीण जनता के द्वारा मातृभाषा के रूप में बोली जाती है। इसे कौरवी भी कहते हैं। कौरवों की बोली। इस प्रदेश में रामपुर, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, सहारनपुर, देहरादून का मैदानी भाग, अंबाला तथा कलसिया और भूतपूर्व पटियाला रियासत के पूर्वी भाग आते हैं। मुसलमानी प्रभाव के निकटतम होने के कारण इस बोली में अरबी फारसी के शब्दों का व्यवहार हिंदी प्रदेश की अन्य उपभाषाओं की अपेक्षा अधिक है। इससे ही उर्दू निकली। हिन्दी में ब्रज, अवधी, भोजपुरी, राजस्थानी, मागधी वगैरह बोलियाँ हैं। खड़ी बोली अनेक नामों से पुकारी गई है, जैसे हिंदुई, हिंदवी, दक्खिनी, दखनी या दकनी, रेखता, हिंदोस्तानी, हिंदुस्तानी आदि। डा. ग्रियर्सन ने इसे वर्नाक्युलर हिंदुस्तानी तथा डा. सुनीति कुमार चटर्जी ने इसे जनपदीय हिंदुस्तानी का नाम दिया है। डा. चटर्जी खड़ी बोली के साहित्यिक रूप को साधु हिंदी या नागरी हिंदी कहते थे और डा. ग्रियर्सन ने इसे हाई हिंदी का नाम दिया। अनेक विद्वान खड़ी का अर्थ सुस्थित, प्रचलित, सुसंस्कृत, परिष्कृत या परिपक्व ग्रहण करते हैं। खड़ी बोली को खरी बोली भी कहा गया है।

क्या किसी मंदिर में भारत माता की पूजा की जाती है? 
देश में कई जगह भारता माता मंदिर बनाए गए हैं। वाराणसी में राजघाट पर स्थित अपने ढंग का अनोखा भारतमाता मंदिर है। इस मंदिर की आराध्य भारत माता हैं। यहां पर पूजा, कर्मकाण्ड या दूसरे मंदिरों जैसे घंटा घड़ियाल नहीं बजते हैं और न ही पंडितों पुरोहितों की खींचतान होती है। यह मंदिर हिन्दू, मुस्लिम, सिख एवं ईसाई जैसे जाति या साम्प्रदायिक और उन्मादी धार्मिक भावना से कोसों दूर सर्वधर्म समभाव का संदेश देता है। मंदिर का उद्घाटन 25 अक्टूबर 1931 को महात्मा गांधी ने किया था। मंदिर के 81 वर्ष पूरे हो गए हैं। मंदिर के उद्घाटन के अवसर पर महात्मा गांधी ने कहा था कि इस मंदिर में किसी देवता या देवी की मूर्ति नहीं है, यहां संगमरमर पर उभरा हुआ भारत का एक मानचित्र भर है। मध्य प्रदेश के इंदौर में एक ऐसा मंदिर है, जहां भारत माता की पूजा होती है। इस मंदिर में कोई आरती नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति गीतों की गूंज सुनाई देती है। सद्गुरु धार्मिक एवं परमार्थिक ट्रस्ट ने आम जन में राष्ट्रीय भावना जागृत करने के मकसद से सुखलिया इलाके में भारत माता मंदिर का निर्माण कराया है। मंदिर में बॉर्डर वाली गहरे रंग की साड़ी पहने हाथ में तिरंगा थामे भारत माता की प्रतिमा के पीछे भारत का नक्शा बना हुआ है। इस मंदिर में कोई पुजारी नहीं। हिसार की एम.सी. कॉलोनी में भी एक भारत माता मंदिर बनाया गया है।

क्या पेंगुइन सामूहिक आत्महत्या करते हैं? क्यों?
हाँ ऐसी खबरें मिली हैं कि अंटार्कटिक में पेंग्विन बड़ी संख्या में किसी बर्फीली चोटी पर खड़े होकर बड़ी संख्या में सागर में कूदकर जान दे रही हैं। यों जानवर उस तरह आत्महत्या नहीं करते जिस तरह इंसान करते हैं। केवल वे अपनी मौत के वक्त खुद को इस स्थिति में ले आते हैं कि जान चली जाए। मसलन खरगोश खुले में आ जाते हैं ताकि कोई चील उन्हें उठा ले जाए। असम के पेंग्विन की मौतों के पीछे ग्लोबल वार्मिंग है या कोई और बात है अभी कहना मुश्किल है।

ऑडिटोरियम में ग्रीन रूम को ग्रीन रूम क्यों कहते हैं?

कहा जाता है कि सन 1599 में लंदन के ब्लैकफ्रायर्स थिएटर में मंच के ठीक पीछे उन कलाकारों के बैठने की व्यवस्था की गई, जिन्हें बाद में मंच पर जाना था। इस कमरे में हरे रंग की पुताई की गई थी। धीरे-धीरे सका नाम ग्रीन रूम हो गया। एक बात यह भी कही जाती है कि मंच की रोशनी से कलाकारों की आँखें चौंधिया जाती थीं। उन्हें कुछ आराम देने के लिए ऐसे कमरे को हरे रंग से पोतते थे।

टेलीफोन उठाते ही हम ज़्यादातर हेलो क्यों कहते हैं? 
हेलो या हलो मूलतः अपनी तरफ ध्यान खींचने वाला शब्द है। यह पुरानी जर्मन भाषा के हाला या होला से बना है। पर यह शब्द लोकप्रिय हुआ टेलीफोन के कारण। 10 मार्च 1876 को अलेक्जेंडर ग्राहम बैल के टेलीफोन आविष्कार को पेटेंट मिला। वे शुरू में टेलीफोन पर बात शुरू करने के लिए अहोय शब्द का इस्तेमाल करते थे। यह शब्द समुद्री नाविक एक-दूसरे का ध्यान खींचने के लिए इस्तेमाल करते हैं। सन 1877 में टॉमस एडीसन ने हेलो शब्द का इस्तेमाल करने की सलाह दी जो अंततः सभी ने मान ली।

रेलवे में कितने दिन पहले यात्रा बुकिंग करवाई जा सकती है? और टिकट रद्द करवाने यानी कैंसिलेशन चार्जेज क्या हैं? 
भारतीय रेलवे में 90 दिन पहले आरक्षण कराया जा सकता है। जिस टिकट पर बर्थ या सीट आरक्षित नहीं है और उसे वापस करना है तो गाड़ी जाने के तीन घंटे बाद तक उसमें से 10 रुपया काटकर शेष राशि टिकट धारक को दी जा सकती है।

(a) If a ticket is presented for cancellation more than 24 hours before the scheduled departure of the train cancellation charge shall be deducted at the flat rate of Rs. 70/- for A.C First Class/Executive Class, Rs. 60/- for A.C. 2 Tier sleeper class/ A.C. 3 Tier sleeper class/ First class/A.C Chair Car, Rs. 40/- for Sleeper class and Rs. 20/- for Second class.

(b) If the ticket is presented for cancellation within 24 hours and up to four hours before the scheduled departure of the train, cancellation charges shall be 25% of the fare subject to the min. flat rate mentioned in clause (a).

(c) If the ticket is presented for cancellation within four hours before the scheduled departure of the train and up to :

Three hours, when the ticket is for a destination station up to 200 KM.,

Six hours, when the ticket is for a destination station of more than 200 KM but up to 500 KM., and

Twelve hours , when the ticket is for a destination station of more than 500 KM.,

after the actual departure of the train, cancellation charges shall be 50 % of the fare subject to the min. flat rate mentioned in clause (a).

यश चोपड़ा के माता पिता क्या करते थे? फिल्म वक़्त के गाने ऐ मेरी जोहरा जबीं में हीरोइन कौन हैं? यानी गाना किस पर फिल्माया गया है?
यश चोपड़ा का जन्म 1932 में लाहौर में हुआ था। उनके पिता पीडब्ल्यूडी में एकाउंटेंट थे। जिस गीत के बारे में आप पूछ रहे हैं वह बलराज साहनी और अचला सचदेव पर फिल्माया गया था।

एफएमगोल्ड के कार्यक्रम बारिश सवालों की में शामिल

किस देश के डाक टिकट पर देश का नाम नहीं होता? 
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