डार्क एनर्जी और डार्क मैटर ब्रह्मांड के दो रहस्यमय घटक हैं, जो अदृश्य हैं फिर भी ब्रह्मांड के व्यवहार पर गहरा असर डालते हैं। डार्क मैटर का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव होता है। यह निहारिकाओं और निहारिका समूहों को एक साथ बाँधे रखता है, जिससे वे बिखरते नहीं हैं। 1998 में वैज्ञानिकों ने सुदूर निहारिकाओं में टाइप एलए सुपरनोवा का अध्ययन किया, तो पता लगा कि ब्रह्मांड का विस्तार बजाय धीमा होने के तेज़ हो रहा है, जबकि गुरुत्वाकर्षण के कारण विस्तार धीमा होना चाहिए, तब उन्होंने एक प्रतिकारक बल की परिकल्पना की, जिसे डार्क एनर्जी नाम दिया गया। यही रहस्यमय ऊर्जा, ब्रह्मांड के विस्तार की गति को लगातार बढ़ा रही है। कई भौतिकविद मानते हैं कि ब्रह्मांड का संपूर्ण दृश्य भाग इसमें मौजूद सभी पदार्थों का केवल 5 प्रतिशत है, और शेष 95 प्रतिशत डार्क मैटर और डार्क एनर्जी से बना है। विभिन्न अप्रत्यक्ष अवलोकनों और गणनाओं के माध्यम से यह स्पष्ट होने लगा, तो इन मायावी कणों की खोज के लिए प्रयोग किए जाने लगे। वैज्ञानिकों को अभी इस सिलसिले में डेटा का इंतज़ार है। अमेरिका के साउथ डकोटा में लक्स-ज़ेपलिन दुनिया का सबसे संवेदनशील डार्क मैटर डिटेक्टर है।

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