संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। इसका पहला चरण 13 फरवरी को समाप्त होगा, और 9 मार्च को फिर से शुरू होकर 2 अप्रैल तक जारी रहेगा। क्या आपने कभी सोचा कि बजट सत्र के दो हिस्से क्यों होते हैं? सामान्यतः हर साल संसद के तीन सत्र होते हैं। बजट (जनवरी-अप्रैल), मॉनसून (जुलाई-अगस्त) और शीतकालीन (नवंबर-दिसंबर)। इन तीन के अलावा संसद के विशेष सत्र भी बुलाए जा सकते हैं। बजट अधिवेशन को दोनों हिस्सों के बीच तीन से चार सप्ताह का अवकाश होता है। इस दौरान स्थायी समितियाँ विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान माँगों पर विचार करती हैं। बजट सत्र के पहले दिन दोनों सदनों के समक्ष राष्ट्रपति का अभिभाषण होता है, जिसमें उन नीतियों एवं कार्यक्रमों का विवरण होता है जिन्हें सरकार लागू करना चाहती है। इसके साथ ही पहले वर्ष की गतिविधियों और उपलब्धियों का विवरण होता है। हरेक अधिवेशन की अंतिम तिथि के बाद छह मास के भीतर आगामी अधिवेशन के लिए सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करना होता है। सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करने की शक्ति राष्ट्रपति में निहित है, पर व्यवहार में इसकी पहल सरकार करती है।
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

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