Friday, April 15, 2016

वकील लोग काला कोट व डॉक्टर सफेद कोट क्यों पहनते हैं?

अदालतों की वेशभूषा हमारे यहाँ अंग्रेजी राज की निशानी है। यूरोप में न्यायाधीश और वकील लबादे पहनते हैं। ये लबादे पुराने राज दरबारों और गिरजाघरों के पादरी भी पहनते हैं। दरबारों में इनके रंग लाल, काले और सफेद भी होते हैं। विश्वविद्यालयों के दीक्षा समारोहों में भी से लबादे पहने जाते हैं। ये लबादे उत्तम कर्म यानी नोबेल प्रोफेशन से जुड़े हैं। न्यायाधीश लबादों के अलावा सिर पर खास प्रकार की टोपी भी पहनते थे। बहरहाल इन परिधानों में दुनिया भर में बदलाव हो रहे हैं। हमारे यहाँ भी ऐसी माँग उठती है कि वकीलों के परिधान में बदलाव किया जाए। हमारे वकील सफेद कपड़ों पर काले कोट और सफेद रंग की नेकटाई लगाते हैं, जिसमें दो पट्टियाँ सामने की ओर होती हैं। इसे अब वकील अब अपने चिह्न की तरह इस्तेमाल में लाते हैं। इस काले और सफेद के पीछे कुछ कारण बताए जाते हैं। सबसे बड़ा कारण हैं इस व्यवसाय की अंतर्विरोधी प्रवृत्ति का। न्याय से जुड़े लोगों को दो विपरीत धारणाओं के बीच में से न्यायपूर्ण निर्णय को निकालना होता है। सफेद और काले रंग विपरीत धारणाओं के प्रतीक है। एक बात यह भी कही जाती है कि काला रंग सुरक्षा का रंग है। वकील अपने मुवक्किल की रक्षा का प्रयास करता है।

डॉक्टरों के सफेद कोट की शुरुआत बीसवीं सदी में ही हुई है। यह रंग स्वच्छता का प्रतीक है। इसके अलावा यह रंग ईमानदारी, पवित्रता और ईश्वरत्व का प्रतिनिधि भी है। दुनिया की तमाम सभ्यताओं में सफेद रंग को पवित्र माना जाता है। 

हिचकी क्यों आती है?

हिचकी का कारण होता है अचानक डायफ्राम में ऐंठन आना। फेफड़ों में अचानक हवा भरने से कंठच्छद(एपिग्लॉटिस) बंद हो जाता है। इससे हिच या हिक् की आवाज आती है। इसीलिए इसे अंग्रेजी में हिक-अप कहते हैं। हिचकी जब आती है तब कई बार आती है। हिचकी एक शारीरिक दोष के कारण भी आती है। उसे सिंग्युलटस कहते हैं। हिचकी आने की कई वजहें हैं। जल्दी-जल्दी खाना, बहुत गर्म या तीखा खाना, हँसना, खाँसना भी हिचकी का कारण बनता है। शराब पीने और धूम्रपान से भी आती है। इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस भी हिचकियाँ पैदा करता है। श्वसन पर रिसर्च करने वाले एक ग्रुप का कहना है कि मानव शरीर के विकास का एक लक्षण हिचकी है। पानी के अंदर रहने वाला मेढक पानी और हवा को उसी तरह घुटकता है जैसे हम हिचकी लेते हैं। अक्‍सर समय से पहले जन्मे शिशु जन्म लेते ही कुछ समय तक हिचकियाँ लेते हैं। हिचकियाँ काफी छोटे समय तक रहतीं हैं। पानी पीने से शरीर की सामान्य क्रिया जल्द वापस आ जाती है।

जुगनू कैसे चमकते हैं?

जुगनू एक प्रकार का उड़ने वाला कीड़ा है, जिसके पेट में रासायनिक क्रिया से रोशनी पैदा होती है। इसे बायोल्युमिनेसेंस कहते हैं। यह कोल्ड लाइट कही जाती है इसमें इंफ्रा रेड और अल्ट्रा वॉयलेट दोनों फ्रीक्वेंसी नहीं होतीं।

मच्छर भनभनाते क्यों हैं?

मच्छरों के शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उनके पंख होते हैं। इन पंखों को वे तेजी से फड़फड़ाते हैं। इस फड़फड़ाने से जो आवाज होती है, वही इनका भनभनाना है। हमारी साँस के साथ बाहर निकलने वाली कार्बन डाईऑक्साइड इन्हें आकर्षित करती है। जब ये हमारे चेहरे के करीब आते हैं तब हमें इनकी भनभनाहट सुनाई पड़ती है।
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित







समुद्र का पानी नमकीन क्यों होता है?

समुद्र से भाप उठती है जिससे बादल बनते हैं और बारिश होती है और इसी से नदियों और झरनों में पानी आता है। नदियों और झरनों के पानी में प्रकृति के अन्य पदार्थों से आए लवण घुलते हैं। लेकिन क्योंकि उनकी मात्रा कम होती है इसलिए नदी झरनों का पानी हमें मीठा ही लगता है। लेकिन जब यह पानी समुद्र में पहुंचता है तो वहां लवण जमा होते जाते हैं। इनमें ख़ास दो लवण हैं सोडियम और क्लोराइड जो नमक बनाते हैं। जब ये समुद्र में पहुंच जाते हैं तो करोड़ों साल तक वहीं जमा रहते हैं। इसीलिए समुद्र का पानी हमें खारा लगता है।

दुनिया के अलग-अलग समुद्रों के पानी में अलग-अलग मात्रा में खारा होता है। सामान्यतः 1000 ग्राम या एक लिटर समुद्री पानी में 35 ग्राम (सात चम्मच) नमक होता है। इसे पार्ट्स पर थाउजैंड (पीपीटी) कहते हैं। सामान्यतः समुद्रों का पानी 34 से 36 पीपीटी नमकीन होता है, पर यूरोप के पास के भूमध्य सागर का पानी 38 पीपीटी है।

ऑस्कर पुरस्कार में किस व्यक्ति की प्रतिमा दी जाती है?
यह प्रतिमा किसी खास व्यक्ति की नहीं होती। सन 1927 में एकेडमी ऑफ़ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एंड साइंसेस की बैठक में जब ट्रॉफ़ी के डिज़ाइन पर चर्चा हुई तो लॉस एंजेलस के कई कलाकारों से अपने-अपने डिज़ाइन सामने रखने को कहा गया। इनमें सबसे ज्यादा पसन्द की गई मूर्तिकार जॉर्ज स्टैनली की प्रतिमा। इसमें फ़िल्म की रील पर खड़े एक आदमी को हाथ में एक तलवार पकड़े दिखाया गया है।

1929 से अब तक दो हज़ार से ज़्यादा ऑस्कर ट्रॉफ़ियां दी जा चुकी हैं। इनका निर्माण शिकागो की आर एस ओएंस एंड कम्पनी के सुपुर्द है। उन्हें पचास प्रतिमाएं बनाने में तीन से चार सप्ताह का समय लगता है। शुरु में यह प्रतिमा तांबे की बनती थी क्योंकि विश्व युद्ध के दौरान धातु की कमी थी, लेकिन अब यह सोने का पानी चढ़े ब्रिटैनियम से बनती है। ऑस्कर ट्रॉफ़ी तेरह इंच लम्बी होती है और इसका वज़न होता है आठ पौंड।

ऑस्कर पुरस्कार अमेरिका की एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एंड साइंसेस की ओर से दिए जाते हैं। ये पुरस्कार मूलतः हॉलीवुड की और अंग्रेजी फिल्मों के लिए बने हैं। इसमें एक पुरस्कार अमेरिका से बाहर बनी और गैर-अंग्रेजी फिल्म की सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए भी है। विदेशी भाषा की यह श्रेणी 1956 के पहले नहीं होती थी। अलबत्ता 1947 से 1955 तक अमेरिका में रिलीज हुई एक विदेशी भाषा की फिल्म को मानद पुरस्कार दिया जाता था। वह पुरस्कार प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं था। 1956 से यह प्रतियोगिता का हिस्सा हो गया यानी उसके लिए कुछ फिल्मों का नामांकन होने लगा, जिनमें से एक को पुरस्कार दिया जाने लगा।

भारत की आज़ादी के समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कौन थे?

भारत की आज़ादी के समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री थे लेबर पार्टी के क्लैमैन्ट ऐटली जो 1945 से 1951 तक इस पद पर रहे। उनके कार्यकाल में भारत को ही नहीं बल्कि म्यांमार और श्रीलंका को भी आज़ादी मिली जिन्हें तब बर्मा और सीलोन के नाम से जाना जाता था।

ह्वाइट कॉलर जॉब क्या है?

ह्वाइट कॉलर शब्द एक अमेरिकी लेखक अपटॉन सिंक्लेयर ने 1930 के दशक में गढ़ा. औद्योगीकरण के साथ शारीरिक श्रम करने वाले फैक्ट्री मजदूरों की यूनीफॉर्म डेनिम के मोटे कपड़े की ड्रेस हो गई। शारीरिक श्रम न करने वाले कर्मचारी सफेद कमीज़ पहनते। इसी तरह खदानों में काम करने वाले ब्लैक कॉलर कहलाते। सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े कार्मिकों के लिए अब ग्रे कॉलर शब्द चलने लगा है।

सिंगापुर का धर्म क्या है?
सिंगापुर धर्मनिरपेक्ष देश है। यहां कोई 42।5 प्रतिशत लोग बौद्ध हैं, 8।5 प्रतिशत ताओवादी, 14 प्रतिशत मुसलमान, 15 प्रतिशत ईसाई, 4 प्रतिशत हिन्दू और 15 प्रतिशत अन्य हैं। सिंगापुर की 1819 में ब्रिटेन की एक व्यापारिक उपनिवेश के रूप में स्थापना हुई थी। 1963 में यह मलेशिया संघ में शामिल हुआ और दो साल बाद ही स्वतन्त्र हो गया।


राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 27 मार्च को प्रकाशित

Monday, April 11, 2016

पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर ही क्यों घूमती है?

धरती न केवल पश्चिम से पूर्व की दिशा में घूमती है साथ ही यदि हम उत्तरी ध्रुव के ऊपर से देखें तो वह सूर्य की परिक्रमा वामावर्त यानी एंटीक्लॉकवाइज़ करती है. उसे यह दिशा सौरमंडल की रचना के समय से ही मिल गई थी. शुरू में गैसीय बादलों की दशा और दिशा के कारण ऐसा हुआ होगा. हमारे सौर मंडल में शुक्र और यूरेनस पश्चगतिक हैं उन्हें छोड़कर सभी ग्रह इसी दिशा में घूम रहे हैं. यानी सूर्य के अपनी धुरी पर घूमने की दिशा में वे घूमने हैं. वस्तुतः जिसे आप पूर्व या पश्चिम कहते हैं वह हमारी परिभाषाएं हैं. हम उत्तरी ध्रुव के ऊपर से देखें तो पूर्व पश्चिम हैं, पर यदि हम दक्षिणी ध्रुव से देखें तो वह भी उलट जाएगा. महत्वपूर्ण है धरती की गति. इसमें भी बदलाव आ रहा है. लाखों साल पहले धरती का दिन आज के मुकाबले काफी छोटा था. धरती पश्चिम से पूर्व की दिशा में घूमती है इसलिए जब अंतरिक्ष में भेजने के लिए रॉकेट को पूर्व की ओर भेजते हैं तब उसके वेग में धरती के घूमने का वेग भी शामिल हो जाता है. इससे ऊर्जा की बचत होती है और वह आसानी से पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति को पार कर लेता है.

घड़ी के विज्ञापन में समय हमेशा 10-10 ही क्यों रहता है? कुछ घड़ियों में 4 बजे को IV के स्थान पर IIII क्यों दिखाया जाता है?

इसके दो मुख्य कारण हैं. एक ज्यामितीय रचना के लिहाज से यह एक संतुलित या सिमिट्रिकल स्थिति होती है. स्माइली फेस या विक्ट्री का वी. दूसरे घड़ी बनाने वाली कम्पनी का लोगो ठीक से दिखाई पड़ता है. कुछ घड़ियों में आप टाइम 8-20 भी देख सकते हैं. इसी तरह दो बजने में दस मिनट भी दिखाए जाते हैं. उसके साथ भी वही बात है. कुछ लोग कहते हैं कि हिरोशिमा पर एटम बम इसी वक्त गिरा था और सारी घड़ियाँ इसी वक्त बंद हो गईं, पर विज्ञापनों में घड़ियाँ इस स्थिति में उसके पहले से दिखाई जाती हैं.


आपका दूसरा सवाल है कि कुछ घड़ियों में रोमन अंक IV के बजाय IIII क्यों लिखा जाता है. इसके जवाब में कई अवधारणाएं हैं. दरअसल रोमन अंकों में चार को IIII लिखने की परम्परा भी सैकड़ों साल पुरानी है. इस सिलसिले में एक छोटी सी कहानी है. कहा जाता है कि एक घड़ीसाज़ ने फ्रांस के राजा लुई चौदहवें के लिए एक घड़ी तैयार की. इसमें उसने रोमन अंकों का इस्तेमाल किया, जिसमें IV लिखा गया. राजा ने कहा, इसे IIII होना चाहिए था. जब उन्हें बताया गया कि IV सही है तो उन्होंने कहा, जब हमने कह दिया है तो कह दिया. पर शायद यह कहानी ही है. दरअसल ऊपर हमने एकरूपता का ज़िक्र किया है, जिसके कारण 10-10 का समय दिखाया जाता है. दरअसल आठ बजे के लिए रोमन अंक VIII बनता है, जो चार बजे के ठीक सामने पड़ता है. पूरी घड़ी में VIII सबसे बड़ा अंक बनता है. संतुलन या सिमिट्री के लिए किसी के दिमाग में यह बात आई कि इसे IIII कर देने से वजन लगभग बराबर हो जाएगा.

जीटी रोड (ग्रैंड ट्रक रोड) का यह नाम क्यों है? क्या यह नाम किसी व्यक्ति या घटना पर आधारित है?

एशिया के सबसे पुराने एवं सबसे लम्बे मार्गों में से एक है ग्रैंड ट्रंक रोड. कई शताब्दियों तक इस मार्ग ने भारतीय उपमहाद्वीप के पूर्वी एवं पश्चिमी भागों को जोड़ा. हाल में शोध से पता लगा है कि यह सड़क तीसरी सदी ईपू में मौर्य सम्राटों के समय में भारत और मध्य एशिया के कई भागों के बीच थल व्यापार के लिए तक्षशिला (वर्तमान पाकिस्तान) से होते हुए यूनान के उत्तर पश्चिमी नगरों तक चली गई थी. मैगस्थनीज़ के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य की सेना इस राजमार्ग की देखभाल करती थी. मैगस्थनीज़ लगभग 15 वर्ष तक मौर्य दरबार में रहा था. यह मार्ग सदियों तक प्रयोग होता रहा.

प्राचीन काल में इसे उत्तरापथ कहा जाता था. पर यह मार्ग पूरी तरह विकसित नहीं था. यह सड़क गंगा के किनारे बसे नगरों को, पंजाब से जोड़ते हुए, ख़ैबर दर्रा पार करती हुई अफ़ग़ानिस्तान के केंद्र तक जाती थी. मौर्यकाल में बौद्ध धर्म का प्रसार इसी उत्तरापथ के माध्यम से गंधार तक हुआ. सोलहवीं शताब्दी में दिल्ली के सुल्तान शेरशाह सूरी ने इसे पक्का करवाया, दूरी मापने के लिए जगह-जगह पत्थर लगवाए, छायादार पेड़ लगवाए, राहगीरों के लिए सरायें बनवाईं और चुंगी की व्यवस्था की. सोलहवीं सदी में दिल्ली के सुल्तान शेरशाह सूरी ने इसे पक्का करवाया. इस सड़क पर घुड़सवार डाक ले जाने का काम भी करते थे. उस समय इसे 'सड़क-ए-आज़म' और बादशाही सड़क भी कहते थे.

बंगाल से पेशावर तक की यह सड़क 500 कोस या 2500 किलोमीटर लम्बी थी. शेरशाह ने दूरी नापने के लिए इसपर जगह-जगह पत्थर लगवाए, छायादार वृक्ष लगवाए, राहगीरों के लिए सरायें बनवाईं और चुंगी की व्यवस्था की. सन 1833 से 1860 के बीच अंग्रेज सरकार ने इसका विस्तार किया और सुधारा. अंग्रेजों ने ही इसे नया नाम ग्रैंड ट्रंक रोड दिया.

चुनाव के दौरान लगाई जाने वाली स्याही की संरचना क्या है? इसका क्या अन्यत्र भी इस्तेमाल किया जा सकता है?
भारत में शुरूआती चुनावों में इस स्याही का इस्तेमाल नहीं होता था, पर बाद में फर्जी मतदान की शिकायतें आने पर सन 1962 से इस स्याही का इस्तेमाल होने लगा. चुनाव आयोग ने भारतीय कानून मंत्रालय, राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला, राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम के साथ मिलकर इस स्याही को तैयार किया था. इसका फॉर्मूला गोपनीय है और इसका पेटेंट राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला के पास है. मोटे तौर पर सिल्वर नाइट्रेट से तैयार होने वाली यह स्याही त्वचा पर एक बार लग जाए तो काफी दिन तक इसका निशान रहता है. इतना ही नहीं, यह त्वचा पर पराबैंगनी (अल्ट्रा वॉयलेट) रोशनी पडऩे पर चमकती भी है जिससे इसे छिपाना संभव नहीं. कर्नाटक सरकार के सरकारी प्रतिष्ठान मैसूर पेंट्स एवं वार्निश लिमिटेड द्वारा बनाई जाने वाली इस स्याही के ग्राहकों में दुनिया के 28 देश शामिल हैं. इस स्याही को खासतौर से चुनाव के लिए ही बनाया गया है. इसलिए इसे लोकतांत्रिक स्याही भी कहते हैं. इसका कोई दूसरा इस्तेमाल नहीं है.

प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

Friday, April 8, 2016

वेस्टइंडीज किसी एक देश का नाम नहीं है

टी-20 विश्व कप प्रतियोगिता में जीत के बाद कई लोगों के मन में यह सवाल आया है कि क्या वेस्टइंडीज कोई देश है? देश नहीं है तो उसकी टीम किस आधार पर है? उसका झंडा क्यों है वगैरह? उत्तरी अटलांटिक महासागर के कैरीबियन बेसिन से जुड़े इलाके के अनेक द्वीपों को वेस्टइंडीज कहते हैं। यूरोप के लोगों ने इस इलाके को दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया (यानी भारत से) अलग करने के लिए यह नाम दिया था।

इस इलाके के अलग-अलग द्वीप सत्रहवीं से उन्नीसवीं सदी तक ब्रिटिश, डेनिश, नीदरलैंड्स और स्पेनिश उपनिवेश रहे। सन 1916 में डेनमार्क ने अपने अधीन क्षेत्र डाई करोड़ डॉलर सोने की कीमत लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका को बेच दिया। इसे यूएस वर्जिन आइलैंड्स के नाम से जाना जाता है। सन 1958 से 1962 के बीच युनाइटेड किंगडम ने एक स्वतंत्र देश के रूप में वेस्टइंडीज संघ भी बनाया, पर 1963 में यह संघ भंग हो गया और नौ स्वतंत्र देश और चार ब्रिटिश ओवरसीज टेरीटरी बन गईं। इस इलाके में सबसे ज्यादा पश्चिम अफ्रीकी मूल के लोग रहते हैं। इनके अलावा भारतीय और चीनी मूल के लोग भी हैं। वेस्टइंडीज संघ में 24 मुख्य द्वीप और 220-230 के आस-पास छोटे अपतटीय द्वीप और टापू वगैरह थे।

सबसे बड़ा द्वीप जमैका था जो उत्तर पश्चिम में है, दूसरे बड़े द्वीप त्रिनिडाड और बारबेडस हैं। प्रमुख शहरों में किंग्स्टन, पोर्ट ऑफ़ स्पेन, ब्रिजटाउन, स्पेनिश टाउन, मोंटेगो बे, मांडेविल, कैसेट्रीस, रोसिउ, सेंट जॉर्ज, किंग्सटाउन, सेंट जॉन्स और बस्सेटेरे शामिल हैं। वेस्टइंडीज़ संघ भंग होने के बाद स्वतंत्र हुए देश इस प्रकार थे: बारबेडस-1966, ग्रेनेडा-1974, डोमिनिका-1978, सेंट लूसिया-1979, सेंट विनसेंट और ग्रेनेडाइंस-1979, एंटीगुआ और बारबुडा-1981, सेंट किट्स और नेविस-1983।

15 देशों के खिलाड़ी
वेस्टइंडीज ने दुनिया को श्रेष्ठ क्रिकेट खिलाड़ी दिए हैं। इनमें वॉरेल, वॉल्कॉट और वीक्स के अलावा सोबर्स, कन्हाई, कालीचरन, गिब्स और रिचर्ड्स जैसे नाम हैं। पर इस इलाके ने उसेन बोल्ट, शैली एन, फ्रेजर प्राइसी और मार्लिन ओट्टी जैसे विश्व चैम्पियन धावक भी दिए है। पर वे अपने देशों के नाम से उतरते हैं। केवल क्रिकेट टीम ही वेस्टइंडीज नाम से मैदान में उतरती है। क्रिकेट टीम 15 देशों के क्रिकेट संघ की टीम है। इनमें मुख्य देश हैं एंटीगुआ और बारबुडा, बारबेडस, डोमिनिका, ग्रेनेडा, गुयाना, जमैका, सेंट लूसिया, सेंट विनसेंट और ग्रेनेडाइंस, ट्रिनिडाड और टुबैगो। इनके अलावा सेंट किट्स और नेविस के कुछ हिस्से। साथ ही ब्रिटिश, डच और अमेरिका के अधीनस्थ कुछ इलाकों का भी इस टीम में प्रतिनिधित्व है।

इन इलाकों की अलग-अलग टीमें भी हैं जो वेस्टइंडीज की प्रतियोगिताओं में भाग लेती हैं। वेस्टइंडीज की टीम का इतिहास 1890 के दशक से शुरू होता है, जब इंग्लैंड से आई एक टीम के खिलाफ स्थानीय टीम बनाई गई। वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड इस खेल की अंतरराष्ट्रीय संस्था इम्पीरियल क्रिकेट कांफ्रेंस में 1926 में शामिल हुआ। उसे 1928 में टेस्ट स्टेटस हासिल हुआ। इस तरह वह इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण के बाद टेस्ट क्रिकेट खेलने वाली चौथी टीम बनी। इसके दो साल बाद न्यूजीलैंड को 1930 में और चार साल बाद भारत को 1932 में टेस्ट क्रिकेट खेलने का स्टेटस हासिल हुआ। 

क्रिकेट टीम का विशेष ध्वज और गान

ज्यादातर देश क्रिकेट टीम के लिए राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल करते हैं। चूंकि वेस्टइंडीज एक नहीं अनेक देशों की टीम है इसलिए वह अपना अलग ध्वज इस्तेमाल करती है, जिसमें एक द्वीप में क्रिकेट स्टम्प और ताड़ का एक पेड़ बना है। चूंकि यह अनेक देशों की टीम है इसलिए किसी एक देश के राष्ट्रगान के बजाय इसके लिए एक विशेष गीत लिखा गया है, जिसकी शुरूआती पंक्तियाँ हैं ‘
रैली राउंड द वेस्टइंडीज।’ इसे डेविड रडर ने लिखा है।

राजस्थान पत्रिका के मी नेक्स्ट में प्रकाशित

Wednesday, April 6, 2016

इंटरनेट पर वायरल होने से क्या अभिप्राय है?

वायरल शब्द मौसमी बुखार या कम्प्यूटर वायरस का आभास कराता है। अंग्रेजी में ‘गो वायरल’ वाक्यांश का इस्तेमाल सन 2000 के बाद शुरू हुआ है। ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी में वायरल शब्द 1989 में शामिल हुआ था। वायर फीवर का आशय था एक व्यक्ति से दूसरे को प्रभावित कर तेजी से फैलने वाला बुखार। इसके इसी आशय को इंटरनेट संस्कृति ने पकड़ा। यानी किसी चीज का बड़ी तेजी से फैलना। इक्कीसवीं सदी के शुरुआती वर्षों में इंटरनेट ने सामाजिक सम्पर्क को अभूतपूर्व तेजी दी। किसी भी चित्र, वीडियो, कविता या पत्र को मेल या टेक्स्ट मैसेज की मदद से हजारों, लाखों लोगों तक सेकंडों में पहुँचाया जा सकता है। टेक्नोलॉजी ने सोशल मीडिया को जन्म दिया। फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डिन, यू-ट्यूब और इंस्टाग्राम ने नेटीजंस की एक पीढ़ी तैयार कर दी है। ये लोग मोबाइल या कैमरे से कोई वीडियो/ फोटो खींच कर सोशल साइट पर अपलोड कर देते हैं। यह रोचक होता है तो देखते ही देखते लाखों लोग इसे शेयर कर देते हैं। इसे वायरल होना कहते हैं।

विश्व का पहला शब्दकोश dictionary किस भाषा में कब और कहां तैयार किया गया?

दुनिया की सबसे पुरानी द्विभाषी शब्द सूचियों के उदाहरण प्राचीन मेसोपोटामिया के अक्कादी साम्राज्य में मिलते हैं। आधुनिक सीरिया के एब्ला क्षेत्र में मिट्टी की पट्टिकाएं मिली हैं, जिनमें सुमेरी और अक्कादी भाषाओं में शब्द लिखे गए हैं। ये पट्टियाँ 2300 वर्ष ईपू की बताई जाती हैं। यों शब्दकोशों के शुरुआती अस्तित्व से अनेक देशों और जातियों के नाम जुड़े हैं। शब्दकोश का मतलब शब्द संग्रह, द्विभाषी कोश और पर्यायवाची कोश होता है। इन सबके विकास का अपना अलग इतिहास है। भारत में सबसे पुराना शब्द संग्रह प्रजापति कश्यप का 'निघंटु' है। उसका रचना काल 700 या 800 साल ईपू है। उसके पूर्व भी 'निघंटु' की परंपरा थी। निघंटु पर महर्षि यास्क की व्याख्या निरुक्त दुनिया के प्राचीनतम शब्दार्थ कोशों (डिक्शनरी) एवं विश्वकोशों (एनसाइक्लोपीडिया) में शामिल है। इस शृंखला की सशक्त कड़ी है छठी या सातवीं सदी में लिखा अमर सिंह कृत नामलिंगानुशासन या त्रिकांड जिसे हम अमरकोश के नाम से जानते हैं। चीन में भी ईसवी सन के हजार साल के पहले से ही कोश बनने लगे थे। उस श्रुति-परंपरा का प्रमाण बहुत बाद में उस पहले चीनी कोश में मिलता है, जिसकी रचना 'शुओ वेन' ने पहली दूसरी सदी ई० के आसपास की थी। कहा जाता है कि हेलेनिस्टिक युग के यूनानियों ने यूरोप में सर्वप्रथम कोश रचना आरंभ की। यूनानियों का महत्व समाप्त कम होने और रोमन साम्राज्य के वैभव काल में तथा मध्यकाल में भी बहुत से लैटिन कोश बने।

दुनिया की सबसे अधिक बिकने वाली पुस्तक कौन सी है? यह इतनी लोकप्रिय क्यों है?

इस बात को दावे के साथ नहीं कहा जा सकता कि दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तक कौन सी है। इसका कारण यह है कि इसका हिसाब रख पाना मुश्किल है। मोटे तौर पर माना जाता है कि बाइबिल, कुरान शरीफ, महाभारत, श्रीमत् भगवत गीता और रामायण से लेकर माओ जे दुंग की सूक्तियाँ जैसी किताबें दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबों में है। जब से छपाई का आविष्कार हुआ है किताबों के प्रकाशन ने तेजी पकड़ी है, पर तब से अब तक इसका हिसाब किताब नहीं रखा गया है। दुनिया में हर साल सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबों की सूची बनाई जाती है, पर किताबों के वर्ग अलग-अलग होते हैं। कुछ उपन्यास होते हैं, कुछ कहानियाँ। जैसे चार्ल्स डिकेंस की द टेल ऑफ टू सिटीज़ पहली बार 1859 में प्रकाशित हुई थी। तब से अब तक उसकी 20 करोड़ से ज्यादा प्रतियाँ बिक चुकी हैं। इसी तरह हैंस क्रिश्चियन एंडरसन की द फेयरी टेल्स दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबों में शामिल है। गिनीज़ व‌र्ल्ड रिकॉर्ड्स प्रतिवर्ष प्रकाशित होने वाली सन्दर्भ पुस्तक है जिसमें विश्व कीर्तिमानों का संकलन है। यह पुस्तक अमेरिका के 'सार्वजनिक पुस्तकालयों से सर्वाधिक चोरी जाने वाली पुस्तक' भी है।  

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Tuesday, April 5, 2016

फेसबुक हैक कर लेने का क्या अर्थ है?

फेसबुक इंटरनेट पर एक निःशुल्क सामाजिक नेटवर्किंग सेवा है, जिसके माध्यम से 13 वर्ष से ऊपर की उम्र के इसके सदस्य अपने मित्रों, परिवार और परिचितों से संपर्क रखते हैं। इसे फेसबुक इनकॉरपोरेटेड नामक कंपनी संचालित करती है। इसके प्रयोक्ता कई तरह के नेटवर्कों में शामिल हो सकते हैं और आपस में विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। फेसबुक अकाउंट हैक करने का मतलब है किसी तरीके से आपके पासवर्ड को हासिल करके अकाउंट का दुरुपयोग करना। मसलन आपके नाम से गलत संदेश दिए जा सकते हैं। इससे भी ज्यादा आपके बैंकिंग पासवर्ड वगैरह का पता लगाया जा सकता है। साथ ही आपके अकाउंट की मदद से आपके मित्रों के अकाउंट भी हैक किए जा सकते हैं।

‘लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ तथा ‘गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ की मान्यता क्या है? ये दोनों ‘रिकॉर्ड्स बुक्स’ कैसे और कहां से प्राप्त कर सकते हैं?

पहले तो इन दोनों रिकॉर्ड्स की पृष्ठभूमि को समझ लें। गिनीज़ बुक मूलतः बहुत व्यापक पुस्तक है और अनोखे रिकॉर्डों के लिए खुद में मानक बन गई है। लिम्का बुक की परिधि में केवल भारत है। यह भारत का प्रकाशन है जो गिनीज़ बुक से प्रभावित है। इसकी विषय वस्तु भी भारत है। गिनीज़ व‌र्ल्ड रिकॉर्ड्स (अंग्रेजी: Guinness World Records) को सन 2000 तक 'गिनीज़ बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' के नाम से जाना जाता था। यह पुस्तक 'सर्वाधिक बिकने वाली कॉपीराइट पुस्तक' के रूप में स्वयं एक रिकार्ड धारी है। लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स सबसे पहले सन 1990 में प्रकाशित हुई थी। इसे शीतल पेय बनाने वाले पार्ले समूह ने शुरू किया था, जिसके पास लिम्का ब्रांड भी था। बाद में यह ब्रांड कोका कोला को बेच दिया गया, जो अब इस किताब का प्रकाशन करता है। दोनों की मान्यता उनकी साख है। लिम्का बुक के तीन भाषाओं में 25 संस्करण निकल चुके हैं और गिनीज़ बुक के 20 भाषाओं में 50. अजब-गजब रिकॉर्ड बनाने वाले इन किताबों में अपना नाम दर्ज कराना चाहते हैं ताकि उन्हें मान्यता मिले। गिनीज़ बुक अब केवल किताब ही नहीं है, बल्कि टीवी प्रोग्राम, इंटरनेट हर जगह छाई है।

जम्हाई (उबासी) क्यों आती है?

जम्हाई लेने के अनेक कारण बताए जाते हैं। यह थकान, ऊब, नींद और तनाव से जुड़ी क्रिया है। मोटे तौर पर दिमाग को ठंडा रखने की कोशिश। सोने के ठीक पहले और उठने के फौरन बाद जम्हाई सबसे ज्यादा आती है। इसमें व्यक्ति पहले गहरी साँस लेता है, फिर साँस छोड़ता है। इस दौरान पूरे शरीर में खिंचाव आता है। यह शरीर को सामान्य दशा में लाने वाली क्रिया है। इसकी मदद से शरीर में जमा अनावश्यक कार्बन डाई ऑक्साइड बाहर निकलती है और ऑक्सीजन दिमाग फेफड़ों और खून में मिलती है जो अंततः दिमाग तक जाती है, जिससे व्यक्ति चैतन्य और चौकन्ना हो जाता है। जब व्यक्ति थका हुआ या बोरियत महसूस करता है तो उसकी साँस लेने की गति धीमी हो जाती है। खून में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाने के लिए उबासी आती है। इससे फेफड़ों और इनके टिश्यू का व्यायाम भी हो जाता है। मनुष्य ही नहीं चिम्पांजी और कुत्ते और दूसरे जानवर भी जम्हाई लेते हैं।

सार्क देशों के अंतर्गत किन-किन देशों की गणना की जाती है उनका भारत से क्या संबंध है?

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) में आठ सदस्य देश हैं। इसकी स्थापना 8 दिसम्बर 1985 को भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान ने मिलकर की थी। अप्रैल 2007 में इसके 14 वें शिखर सम्मेलन में अफगानिस्तान इसका आठवाँ सदस्य बन गया। इसके पर्यवेक्षक हैं ऑस्ट्रेलिया, चीन, यूरोपीय संघ, ईरान, जापान, मॉरिशस, म्यांमार, दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका।

Sunday, April 3, 2016

सूरज सुबह और शाम को ही सिंदूरी क्यों दिखाई देता है? दोपहर में क्यों नहीं?

इस सवाल का जवाब जानने के लिए पहले यह समझना होगा कि आसमान का रंग नीला या आसमानी क्यों होता है. धरती के चारों ओर वायुमंडल यानी हवा है. इसमें कई तरह की गैसों के मॉलीक्यूल और पानी की बूँदें या भाप है. गैसों में सबसे ज्यादा करीब 78 फीसद नाइट्रोजन है और करीब 21 फीसद ऑक्सीजन. इसके अलावा ऑरगन गैस और पानी है. इसमें धूल, राख और समुद्री पानी से उठा नमक वगैरह है. हमें अपने आसमान का रंग इन्हीं चीजों की वजह से आसमानी लगता है.

दरअसल हम जिसे रंग कहते हैं वह रोशनी है. रोशनी वेव्स या तरंगों में चलती है. हवा में मौजूद चीजें इन वेव्स को रोकती हैं. जो लम्बी वेव्स हैं उनमें रुकावट कम आती है. वे धूल के कणों से बड़ी होती हैं. यानी रोशनी की लाल, पीली और नारंगी तरंगें नजर नहीं आती. पर छोटी तरंगों को गैस या धूल के कण रोकते हैं. और यह रोशनी टकराकर चारों ओर फैलती है. रोशनी के वर्णक्रम या स्पेक्ट्रम में नीला रंग छोटी तरंगों में चलता है. यही नीला रंग जब फैलता है तो वह आसमान का रंग लगता है.

दिन में सूरज ऊपर होता है. वायुमंडल का निचला हिस्सा ज्यादा सघन है. आप दूर क्षितिज में देखें तो वह पीलापन लिए होता है. कई बार लाल भी होता है. सुबह और शाम के समय सूर्य नीचे यानी क्षितिज में होता है तब रोशनी अपेक्षाकृत वातावरण की निचली सतह से होकर हम तक पहुँचती है. माध्यम ज्यादा सघन होने के कारण वर्णक्रम की लाल तरंगें भी बिखरती हैं. इसलिए आसमान अरुणिमा लिए नज़र आता है.

कई बार आँधी आने पर आसमान पीला भी होता है. आसमान का रंग तो काला होता है. रात में जब सूरज की रोशनी नहीं होती वह हमें काला नजर आता है. हमें अपना सूरज भी पीले रंग का लगता है. जब आप स्पेस में जाएं जहाँ हवा नहीं है वहाँ आसमान काला और सफेद सूरज नजर आता है.

बंदूक चलाने पर पीछे की तरफ झटका क्यों लगता है?

न्यूटन का गति का तीसरा नियम है कि प्रत्येक क्रिया की सदैव बराबर एवं विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है. जब बंदूक की गोली आगे बढ़ती है तब वह पीछे की ओर भी धक्का देती है. गोली तभी आगे बढ़ती है जब बंदूक का बोल्ट उसके पीछे से प्रहार करता है. इससे जो शक्ति जन्म लेती है वह आगे की और ही नहीं जाती पीछे भी जाती है. तोप से गोला दगने पर भी यही होता है. आप किसी हथौड़े से किसी चीज पर वार करें तो हथौड़े में भी पीछे की और झटका लगता है.

रेव पार्टी शब्द आजकल खासा प्रचलन में है. यह शब्द किस अर्थ में आता है?

अंग्रेजी शब्द रेव का मतलब है मौज मस्ती. टु रेव इसकी क्रिया है यानी मस्ती मनाना. पश्चिमी देशों में भी यह शब्द बीसवीं सदी में ही लोकप्रिय हुआ. ब्रिटिश स्लैंग में रेव माने ‘वाइल्ड पार्टी.’ इसमें डिस्क जॉकी, इलेक्ट्रॉनिक म्यूज़िक का प्राधान्य होता है. अमेरिका में अस्सी के दशक में एसिड हाउस म्यूज़िक का चलन था. रेव पार्टी का शाब्दिक अर्थ हुआ 'मौज मस्ती की पार्टी'. इसमें ड्रग्स, तेज़ पश्चिमी संगीत, नाचना, शोर-गुल और सेक्स का कॉकटेल होता है. भारत में ये मुम्बई, दिल्ली से शुरू हुईं. अब छोटे शहरों तक पहुँच गई हैं, लेकिन नशे के घालमेल ने रेव पार्टी का उसूल बदल दिया है. पहले यह खुले में होती थीं अब छिपकर होने लगी हैं.

महामहिम और महामना शब्द से क्या तात्पर्य है?

शब्दकोश के अनुसार महामना (सं.) [वि.] बहुत उच्च और उदार मन वाला; उदारचित्त; बड़े दिलवाला. [सं-पु.] एक सम्मान सूचक संबोधन. और महामहिम (सं.) [वि.] 1. जिसकी महिमा बहुत अधिक हो; बहुत बड़ी महिमा वाला; महामहिमायुक्त 2. अति महत्व शाली. [सं-पु.] एक सम्मान सूचक संबोधन. आधुनिक अर्थ में हम राजद्वारीय सम्मान से जुड़े व्यक्तियों को महामहिम कहने लगे हैं. मसलन राष्ट्रपति और राज्यपालों को. अब तो जन प्रतिनिधियों के लिए भी इस शब्द का इस्तेमाल होने लगा है.

इस शब्द से पुरानी सामंती गंध आती है और शायद इसीलिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को अपने पदनाम से पहले 'महामहिम ' जोड़ना पसंद नहीं है, इसलिए पिछले कुछ समय से उनके कार्यक्रमों से जुड़े बैनर,पोस्टर या निमंत्रण पत्रों में 'महामहिम' नहीं लिखा गया. यहाँ तक, कि उनके स्वागत-सम्मान वाले भाषणों में भी 'महामहिम' संबोधन से परहेज किया गया. अंग्रेजी में भी उनके नाम से पहले 'हिज़ एक्सेलेंसी' नहीं जोड़ा गया. कुछ राज्यपालों ने भी इस दिशा में पहल की है.

महामना शब्द के साथ सरकारी पद नहीं जुड़ा है. इसका इस्तेमाल भी ज्यादा नहीं होता. यह प्रायः गुणीजन, उदार समाजसेवियों के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है और इसका सबसे बेहतरीन इस्तेमाल महामना मदन मोहन मालवीय के लिए होते देखा गया है.

प्रभात खबर अवसर में 31 मार्च 2016 के अंक में प्रकाशित
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