Monday, December 19, 2022

ताजमहल का आर्किटेक्ट कौन था?

ताजमहल का वास्तुकार कौन है यह दावे के साथ आज भी नहीं कहा जा सकता। इतना जरूर समझ में आता है कि वास्तुकारों और निर्माण विशेषज्ञों के समूह के साथ शाहजहाँ स्वयं भी सक्रिय रूप से इसमें शामिल थे। उस्ताद अहमद लाहौरी को इसका श्रेय देने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त व्यक्ति माना जाता है, एक प्रधान वास्तुकार के रूप में। यह भी माना जाता है कि तुर्किये के इस्माइल अफांदी या उस्ताद ईसा से भी सलाह ली गई थी। 

वाशिंगटन डीसी में ‘डीसी’ क्या है?

वॉशिंगटन डीसी का अर्थ है वॉशिंगटन डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलम्बिया। अमेरिकी संविधान के अनुसार संघीय राजधानी एक अलग डिस्ट्रिक्ट के रूप में बनाई जा सकती है, जो किसी राज्य का हिस्सा न हो। यह शहर जॉर्ज वॉशिंगटन की स्मृति में बसाया गया है। अमेरिका में एक राज्य भी वॉशिंगटन है। उसका वॉशिंगटन डीसी से कोई सम्बन्ध नहीं है।

नैनो सैटेलाइट क्या होते हैं?

नैनो सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले लघु उपग्रहों को कहते हैं। सामान्यतः 1 किलोग्राम से 500 किलोग्राम तक के सैटेलाइट को नैनो की परिभाषा में रखा जाता है। इन छोटे उपग्रहों की अपनी भूमिका है। मसलन अंतरिक्ष के अनेक बिन्दुओं से जानकारी एकत्र करनी हो तो अनेक उपग्रहों की जरूरत होगी। ऐसे में एक बड़े वज़नी उपग्रह के बजाय अनेक छोटे उपग्रहों की सेवाएं ली जाती हैं। लघु उपग्रह, विशेष रूप से बड़ी संख्या में, कुछ उद्देश्यों के लिए कम, बड़े उपग्रहों की तुलना में अधिक उपयोगी हो सकते हैं-उदाहरण के लिए, वैज्ञानिक डेटा एकत्र करना और रेडियो रिले वगैरह। इन दिनों कम्युनिकेशन कंपनियाँ ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाओं के लिए छोटे उपग्रहों का नेटवर्क बना रही हैं। इनमें स्टारलिंक और वनवैब जैसे नाम हैं। कई बार बड़े उपग्रहों की निगरानी के लिए भी छोटे उपग्रहों की जरूरत होती है। विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को उपग्रह विज्ञान की बुनियादी जानकारी देने के लिए भी इनका इस्तेमाल होता है। हाल के वर्षों में 1 से 50 किलो वज़न के उपग्रहों का चलन बढ़ा है। अब अंतरिक्ष प्रक्षेपण कम्पनियाँ छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण में अलग से विशेषज्ञता प्राप्त करने की कोशिश कर रहीं है।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 13 अगस्त, 2022 को प्रकाशित

Sunday, December 18, 2022

शीशे का आविष्कार कब हुआ?

शीशे से आपका आशय दर्पण से है तो यह समझें कि पहले दर्पण की अवधारणा ने जन्म लिया, जो प्रकृति ने हमें ठहरे हुए पानी के रूप में दी थी। उसमें मनुष्य को अपनी छवि दिखाई दी। अपनी छवि को देखने की मनोकामना का ही प्रभाव था कि पत्थर युग में चिकने पत्थर में भी इंसान को अपना प्रतिबिंब नज़र आने लगा था। इसके बाद यूनान, मिस्र, रोम, चीन और भारत की सभ्यताओं में धातु को चमकदार बनाकर उसका इस्तेमाल दर्पण की तरह करने की परंपरा शुरू हुई। पर प्रकृति ने उससे पहले उन्हें एक दर्पण बनाकर दे दिया था। यह था ऑब्सीडियन। ज्वालामुखी के लावा के जमने के बाद बने कुछ काले चमकदार पत्थर एकदम दर्पण का काम करते थे। बहरहाल धातु युग में इंसान ने ताँबे की प्लेटों को चमकाकर दर्पण बना लिए। प्राचीन सभ्यताओं को शीशा बनाने की कला भी आती थी। ईसा की पाँचवीं सदी में चीन के लोगों ने चाँदी और मरकरी से शीशे के एक ओर कोटिंग करके दर्पण बना लिए थे। हमारे यहाँ स्त्रियों के गहनों में आरसी भी एक गहना है, जो वस्तुतः चेहरा देखने वाला दर्पण है।

रेशम का आविष्कार?

रेशम प्राकृतिक प्रोटीन से बना रेशा है। यह प्रोटीन रेशों में मुख्यतः फिब्रोइन (fibroin) होता है। ये रेशे कुछ कीड़ों के लार्वा द्वारा बनाए जाते हैं। सबसे उत्तम रेशम शहतूत के पत्तों पर पलने वाले कीड़ों के लार्वा द्वारा बनाया जाता है। रेशम का आविष्कार चीन में ईसा से 3500 साल पहले हो गया था। इसका श्रेय चीन की महारानी ली-ज़ू को दिया जाता है। प्राचीन मिस्र की ममियों में और प्राचीन भारत में भी रेशम मिलता है। रेशम कला या सेरीकल्चर को चीनी महारानी ने छिपाने की कोशिश की, पर पहले कोरिया और फिर यह कला भारत पहुँची।

रेशम एक प्रकार का महीन चमकीला और दृढ़ तंतु या रेशा जिससे कपड़े बुने जाते हैं । यह तंतु कोश में रहनेवाले एक प्रकार के कीड़े तैयार करते हैं। रेशम के कीड़े कई तरह के होते हैं। अंडा फूटने पर ये बड़े पिल्लू के आकार में होते हैं और रेंगते हैं। इस अवस्था में ये पत्तियाँ बहुत खाते हैं। शहतूत की पत्ती इनका सबसे अच्छा भोजन है। ये पिल्लू बढ़कर एक प्रकार का कोश बनाकर उसके भीतर हो जाते हैं। उस समय इन्हें 'कोया' कहते हैं। कोश के भीतर ही यह कीड़ा वह तंतु निकालता है, जिसे रेशम कहते हैं। कोश के भीतर रहने की अवधि जब पूरी हो जाती है, तब कीड़ा रेशम को काटता हुआ निकलकर उड़ जाता है। इससे कीड़े पालने वाले निकलने के पहले ही कोयों को गरम पानी में डालकर कीड़ों को मार डालते हैं और तब ऊपर का रेशम निकालते हैं।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 30 जुलाई, 2022 को प्रकाशित

Saturday, December 17, 2022

सबसे ज्यादा ऑक्सीजन पैदा करने वाला पेड़ कौन सा है?

 

पेड़ या पौधे ऑक्सीजन तैयार नहीं करते बल्कि वे फोटो सिंथेसिस या प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को पूरा करते हैं। पौधे कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करते हैं और उसके दो बुनियादी तत्वों को अलग करके ऑक्सीजन को वातावरण में फैलाते हैं। एक मायने में वातावरण को इंसान के रहने लायक बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। 

प्रकाश संश्लेषण वह क्रिया है जिसमें पौधे अपने हरे रंग वाले अंगों जैसे पत्ती, द्वारा सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में वायु से कार्बन डाइऑक्साइड तथा भूमि से जल लेकर जटिल कार्बनिक खाद्य पदार्थों जैसे कार्बोहाइड्रेट का निर्माण करते हैं तथा आक्सीजन गैस (O2) बाहर निकालते हैं। इस प्रक्रिया में आक्सीजन एवं ऊर्जा से भरपूर कार्बोहाइड्रेट (सक्रोज, ग्लूकोज, स्टार्च आदि) का निर्माण होता है तथा आक्सीजन गैस बाहर निकलती है। प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया सबसे महत्वपूर्ण जैव रासायनिक क्रियाओं में से एक है। सीधे या परोक्ष रूप से दुनिया के सभी सजीव इस पर आश्रित हैं।

कौन सा पेड़ सबसे ज्यादा ऑक्सीजन पैदा करता है, इसे लेकर अधिकार के साथ कहना मुश्किल हैपर तुलसीपीपलनीम और बरगद के पेड़ काफी ऑक्सीजन तैयार करते हैं और हमारे परम्परागत समाज में इनकी पूजा होती है। यों पेड़ों के मुकाबले काई ज्यादा ऑक्सीजन तैयार करती है।

बर्फ बनाना कब शुरू हुआ?

बर्फ प्राकृतिक रूप से हमें मिलती है। उसके आविष्कार की बात सोची नहीं जा सकती, पर खाने-पीने की चीज़ों को सुरक्षित रखने के लिए और गर्म इलाकों में कमरे को ठंडा रखने के लिए बर्फ की ज़रूरत हुई। शुरू के दिनों में सर्दियों की बर्फ को जमीन के नीचे दबाकर या मोटे कपड़े में लपेट कर उसे देर तक सुरक्षित रखने का काम हुआ। फिर आइस हाउस बनाने का चलन शुरू हुआ। ज़मीन के नीचे तहखाने जैसे बनाकर उनमें बर्फ की सिल्लियाँ रखी जाती थीं, जो या तो सर्दियों में सुरक्षित कर ली जाती थीं या दूर से लाई जाती थीं। चीन में आइसक्रीम बनाने की कला का जन्म भी हो गया था। सन 1295 में जब मार्को पोलो चीन से वापस इटली आया तो उसने आइस क्रीम का जिक्र किया। आइस हाउस के बाद आइस बॉक्स बने। फिर कृत्रिम बर्फ बनाने की बात सोची गई। इसके बाद रेफ्रिजरेटर की अवधारणा ने जन्म लिया। सन 1841 में अमेरिकी वैज्ञानिक जॉन गोरी ने बर्फ बनाने वाली मशीन बना ली। आइस क्यूब ट्रे बीसवीं सदी की देन है। इस ट्रे ने आइस क्यूब को जन्म दिया।

सीनियर सिटिजन की परिभाषा क्या है?  

अमेरिका में रिटायरमेंट की उम्र 65 साल है। भारत में सामान्यतः 60 साल के व्यक्ति को सीनियर सिटिजन मानते हैं। भारतीय बैंक 60 साल से ऊपर के व्यक्ति को ज्यादा ब्याज देते हैं।

डीजे का फुलफॉर्म 

डीजे का मतलब होता है डिस्क जॉकी। वह व्यक्ति जो श्रोताओं के लिए संगीत तय करता है या पेश करता है। डिस्क प्ले करता है।

अमेरिका और युनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका में अंतर?

अमेरिका एक महाद्वीप का नाम है जो दो बड़े उप महाद्वीपों में बँटा है. एक है उत्तरी अमेरिका और दूसरा दक्षिणी अमेरिका। अमेरिकी महाद्वीप में अनेक देश हैं। उनमें एक है युनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका। यह उत्तरी अमेरिका में है। अक्सर हम यूएसए और अमेरिका को एक मान लेते हैं।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 16 जुलाई 2022 को प्रकाशित

महामहिम और महामना शब्दों में क्या अंतर है?

शब्दकोश के अनुसार महामना (सं.) [वि.] बहुत उच्च और उदार मन वाला; उदारचित्त; बड़े दिलवाला। [सं-पु.] यह एक सम्मान सूचक संबोधन है। और महामहिम (सं.) [वि.] 1. जिसकी महिमा बहुत अधिक हो; बहुत बड़ी महिमा वाला; महामहिमायुक्त 2. अति महत्व शाली [सं-पु.]। यह भी सम्मान सूचक संबोधन है। अलबत्ता आधुनिक अर्थ में हम राजद्वारीय सम्मान से जुड़े व्यक्तियों को महामहिम कहने लगे हैं। मसलन राष्ट्रपति और राज्यपालों को। अब तो जन प्रतिनिधियों के लिए भी इस शब्द का इस्तेमाल होने लगा है।

इस शब्द से पुरानी सामंती गंध आती है और शायद इसीलिए पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को अपने पदनाम से पहले 'महामहिम' जोड़ना पसंद नहीं करते थे। उनके कार्यक्रमों से जुड़े बैनर,पोस्टर या निमंत्रण पत्रों में 'महामहिम' नहीं लिखा गया। यहाँ तक, कि उनके स्वागत-सम्मान वाले भाषणों में भी 'महामहिम' संबोधन से परहेज किया गया। अंग्रेजी में भी उनके नाम से पहले 'हिज़ एक्सेलेंसी' नहीं जोड़ा गया। कुछ राज्यपालों ने भी इस दिशा में पहल की है।

महामना शब्द के साथ सरकारी पद नहीं जुड़ा है। इसका इस्तेमाल भी ज्यादा नहीं होता. यह प्रायः गुणीजन, उदार समाजसेवियों के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है और इसका सबसे बेहतरीन इस्तेमाल महामना मदन मोहन मालवीय के लिए होते देखा गया है।

यूरोस्टार क्या है?

यूरोस्टार ट्रेन सेवा है जो युनाइटेड किंगडम को फ्रांस, बेल्जियम और नीदरलैंड्स से जोड़ती है। ज्यादातर यूरोस्टार ट्रेन ब्रिटेन और यूरोप के बीच के सागर इंग्लिश चैनल के नीचे बनी एक सुरंग से होकर जाती है। यह ट्रेन अधिकतम 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है और इसे लंदन से पेरिस पहुंचने में 2 घंटे 35 मिनट लगते हैं और ब्रसेल्स पहुंचने में 2 घंटे 20 मिनट। लंदन से एम्स्टर्डम पहुँचने में इसे 3 घंटे, 52 मिनट लगते हैं। 

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 18 जून 2022 को प्रकाशित


बारह राशियां क्या होती हैं?

अंतरिक्ष का अध्ययन करने के लिए ज्योतिषी एक काल्पनिक गोला मानकर चलते हैं, जो पृथ्वी केंद्रित है। इसे खगोल कहते हैं। पृथ्वी की भूमध्य रेखा और दोनों ध्रुवों के समांतर इस खगोल की भी मध्य रेखा और ध्रुव मानते हैं। इस खगोल में सूर्य का एक विचरण पथ है, जिसे सूरज का क्रांतिवृत्त या एक्लिप्टिक कहते हैं। पूरे साल में सूर्य इससे होकर गुजरता है। हालांकि अंतरिक्ष में हर वस्तु गतिमान है, पर यह गति इस प्रकार है कि हमें तमाम नक्षत्र स्थिर लगते हैं। इन्हें हमने अलग-अलग तारामंडलों के नाम दिए हैं।

सूर्य के इस यात्रा-पथ को एक काल्पनिक लकीर बनाकर देखें तो पता लगेगा कि पृथ्वी और सभी ग्रहों के चारों ओर नक्षत्रों की एक पेटी जैसी बन जाती है। इस पेटी को बारह बराबर भागों में बाँटने पर बारह राशियाँ बनतीं हैं, जो बारह तारा समूहों को भी व्यक्त करतीं हैं। इनके नाम हैं मेष, बृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ और मीन। सूर्य की परिक्रमा करते हुए धरती और सारे ग्रह इन तारा समूहों से गुजरते हैं। सालभर में सूर्य इन बारह राशियों का दौरा करके फिर अपनी यात्रा शुरू करता है। हालांकि अंतरिक्ष विज्ञानी इसके आधार पर निष्कर्ष नहीं निकालते, पर भारतीय और पश्चिमी देशों का फलित ज्योतिष इस दौरान होने वाली अंतरिक्षीय परिघटनाओं के निष्कर्ष निकालता है। 

गोली चलाने पर झटका क्यों लगता है?

न्यूटन का गति का तीसरा नियम है कि प्रत्येक क्रिया की सदैव बराबर एवं विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है। जब बंदूक की गोली आगे बढ़ती है तब वह पीछे की ओर भी धक्का देती है। गोली तभी आगे बढ़ती है जब बंदूक का बोल्ट उसके पीछे से प्रहार करता है। इससे जो शक्ति जन्म लेती है वह आगे की और ही नहीं जाती पीछे भी जाती है। तोप से गोला दगने पर भी यही होता है। आप किसी हथौड़े से किसी चीज पर वार करें तो हथौड़े में भी पीछे की ओर झटका लगता है।

थर्ड पार्टी इंश्योरेंस क्या होता है?

सामान्यतः यह मोटर वाहनों के इंश्योरेंस से जुड़ा है। यह वाहन के स्वामी या वाहन का बीमा नहीं है, बल्कि यदि वाहन के कारण किसी तीसरे व्यक्ति को चोट लग जाए या उनकी मृत्यु हो जाए या किसी और तरीके का नुकसान हो जाए उसकी क्षतिपूर्ति का बीमा है।

कुइज़ीन का क्या मतलब होता है?

कुइज़ीन फ्रांसीसी शब्द है, जिसका अर्थ है खाना बनाने की कला। इसके लिए लैटिन शब्द है कोकरे। कुइज़ीन शब्द का इस्तेमाल किसी स्थान विशेष या किसी  विशेष भोजन के लिए किया जाता है। जैसे जापानी व्यंजन, बंगाली, दक्षिण भारतीय, गुजराती वगैरह।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 2 जुलाई 2022 को प्रकाशित


 

 

Wednesday, August 10, 2022

लाल सागर लाल और काला सागर क्या काला है?


रेड सी(लाल सागर) के पानी का रंग लाल नहीं है। और काले सागर का पानी काला नहीं। दोनों के इन नामों के अलग-अलग कारण हैं। लाल सागर अफ्रीका और एशिया के बीच सागर की संकीर्ण पट्टी का नाम है। इसका यूनानी नाम एरिथ्रा थलासालैटिन नाम मेयर रूब्रुमऔर अरबी नाम टिग्रीन्या है। कहते हैं कि इस इलाके के पथरीले पहाड़ों के कारण इसका नाम लाल सागर है। इन पहाड़ों को हरेई ईडाम कहते हैं। हिब्रू भाषा में ईडाम लाल चेहरे वाले एक व्यक्ति का नाम है। इससे बेहतर स्पष्टीकरण यह है कि इसके पास के रेगिस्तान को प्राचीन मिस्र में दशरेत कहते थे। जिसका अर्थ था लाल ज़मीन। लाल ज़मीन के पास के सागर को शायद इसीलिए लाल कहा गया।

काला सागर इस लाल सागर के उत्तर पश्चिम में है। काला सागर यूरोपकॉकेशस और एशिया माइनर(एशिया का सबसे पश्चिमी छोर) के बीच है। यह चारों ओर ज़मीन से घिरा सागर हैजो भूमध्य सागर से मिलता है। इसके चारों ओर बुल्गारियारोमानियायूक्रेनजॉर्जिया और तुर्की हैं। तुर्की में कारा या काला शब्द उत्तर के लिए प्रयुक्त होता है। तुर्की के उत्तर में काला सागर है। इसका नाम काला होने के दूसरे कारण भी हैं। एक तो ऑक्सीजन की कमी से इसके पानी में सूक्ष्म जीवाणुओं(माइक्रो ऑर्गेनिज्म) की संख्या कम है। इससे यह थोड़ा कालापन लिए है। दूसरे इस इलाके में सर्दियों में जबर्दस्त कोहरा रहता है। इससे सागर का रंग काला लगता है।

नॉलेज कॉर्नर में 26 मार्च 2022 को प्रकाशित

रेनबो डाइट क्या होती है?

रेनबो डाइट का शाब्दिक अर्थ है इन्द्रधनुषी डाइट। यानी इन्द्रधनुष को रंगों का भोजन। व्यावहारिक मतलब है तरह-तरह के रंगों के फलों और सब्जियों का भोजन जो स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन होता है। फलों और सब्जियों के तमाम रंग होते हैं और हर रंग का अपना गुण होता है।

मैकमोहरेखा क्या होती है?

मैकमोहन या मैकमहोन रेखा भारत और तिब्बत के बीच सीमा रेखा है। सन् 1914 में भारत की तत्कालीन ब्रिटिश सरकार और तिब्बत के बीच शिमला समझौते के तहत यह रेखा तय की गई थी। 1914 के बाद कई साल तक इस रेखा को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ, पर 1937 में ओलफ केरो नामक एक अंग्रेज प्रशासनिक अधिकारी ने तत्कालीन अंग्रेज सरकार को इसे आधिकारिक तौर पर लागू करने का अनुरोध किया। 1937 में सर्वे ऑफ इंडिया के एक मानचित्र में मैकमहोन रेखा को आधिकारिक भारतीय सीमारेखा के रूप में पर दिखाया गया था। इस सीमारेखा का नाम सर हैनरी मैकमहोन के नाम पर रखा गया था, जिनकी इस समझौते में महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। वे भारत की तत्कालीन अंग्रेज सरकार के विदेश सचिव थे।

महाभारत में अक्षय पात्र क्या था?

महाभारत मे अक्षय पात्र का जिक्र आता है| पांचों पांडव द्रौपदी के साथ बारह वर्षों के लिए वनवास जाते हैं। जंगल में प्रवास करते हुए सैकडों साधु-संत और धर्मात्मा पुरूष उनके साथ हो जाते हैं। सवाल था, वे छ प्राणी अकेले भोजन कैसे करें, और उन सैकडों हजारों के लिए भोजन कहां से आए?

Tuesday, March 1, 2022

इंडो-चायना कहाँ है?

 इंडो-चायना या हिन्द-चीन प्रायद्वीप दक्षिण पूर्व एशिया का एक उप क्षेत्र है। यह इलाक़ा चीन के दक्षिण-पश्चिम और भारत के पूर्व में पड़ता है। इसके अंतर्गत कम्बोडिया, लाओस और वियतनाम को रखा जाता है, पर वृहत् अर्थ में म्यांमार, थाईलैंड, मलय प्रायद्वीप और सिंगापुर को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। यह नाम जहाँ भौगोलिक उपस्थिति को बताता है, वहीं इस इलाके की सांस्कृतिक संरचना को भी दर्शाता है। अतीत में इस नाम का ज्यादातर इस्तेमाल इस इलाके के फ्रांसीसी उपनिवेश इंडो-चाइना (वियतनाम, कम्बोडिया और लाओस) के लिए हुआ। भारत और चीन की संस्कृतियों के प्रभाव के कारण इस इलाके का नाम हिन्द-चीन है। इस नाम का श्रेय डेनिश-फ्रेंच भूगोलवेत्ता कोनराड माल्ट-ब्रन को दिया जाता है, जिन्होंने सन 1804 में इस इलाके को इंडो-चिनॉय कहा। उनके बाद 1808 में स्कॉटिश भाषा विज्ञानी जॉन लेडेन ने इस इलाके को इंडो-चायनीस कहा।  

इस इलाके में बड़ी संख्या में चीन से आए लोग रहते हैं, पर सांस्कृतिक रूप से भारत का यहाँ जबर्दस्त प्रभाव है। प्राचीनतम संपर्क के प्रमाण म्यांमार की पहली सदी की प्‍यू बस्तियों के उत्खनन में देखे जा सकते हैं। प्‍यू वास्तुकला, सिक्कों, हिंदू देवी-देवताओं और बुद्ध की मूर्तियों और पुरालेख में देखे जा सकते हैं। अंगकोरवाट एवं ता प्रोह्म जैसे कंबोडिया के विख्यात मंदिरों के अलावा मध्‍य थाईलैंड का द्वारावती साम्राज्य छठी सदी से लेकर 13 वीं सदी फला-फूला।  

भारत का सबसे पुराना बैंक?

अठारहवीं सदी के अंतिम दशक में देश के पहले दो बैंक खुले थे। इनके नाम थे जनरल बैंक ऑफ इंडिया, जो 1786 में खुला और दूसरा बैंक था बैंक ऑफ हिन्दुस्तान जो 1790 में शुरू हुआ। दोनों बैंक बंद हो गए। देश के सक्रिय बैंकों में सबसे पुराना बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया है, जो जून 1806 में बैंक ऑफ कैलकटा के नाम से शुरू हुआ। इसका नाम बाद में बैंक ऑफ बंगाल हो गया। उस वक्त देश में इसके अलावा दो प्रेसीडेंसी बैंक और खुले जिनके नाम थे बैंक ऑफ बॉम्बे और बैंक ऑफ मद्रास। सन 1921 में तीनों बैंकों को मिलाकर इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया बनाया गया। देश के स्वतंत्र होने पर इसका नाम हुआ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...