Friday, June 26, 2015

हिंदी को खड़ी बोली क्यों कहा जाता है?


हिन्दी को खड़ी बोली नहीं कहा जाता, बल्कि कहा यह जाता है कि आज की जो मानक हिन्दी है वह खड़ी बोली से निकली है. खड़ी बोली पश्चिम रूहेलखंड, गंगा के उत्तरी दोआब तथा अंबाला के आसपास के इलाकों की उपभाषा है जो ग्रामीण जनता के द्वारा मातृभाषा के रूप में बोली जाती है. इसे कौरवी भी कहते हैं. कौरवों की बोली. इस इलाके में रामपुर, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, सहारनपुर, देहरादून का मैदानी भाग, अंबाला तथा कलसिया और भूतपूर्व पटियाला रियासत के पूर्वी भाग आते हैं. मुसलमानी प्रभाव के निकटतम होने के कारण इस बोली में अरबी फारसी के शब्दों का व्यवहार हिंदी प्रदेश की अन्य उपभाषाओं की अपेक्षा अधिक है. इससे ही उर्दू निकली. हिन्दी में ब्रज, अवधी, भोजपुरी, राजस्थानी, मागधी वगैरह बोलियाँ हैं. खड़ी बोली अनेक नामों से पुकारी गई है, जैसे हिंदुई, हिंदवी, दक्खिनी, दखनी या दकनी, रेखता, हिंदोस्तानी, हिंदुस्तानी आदि. डॉ. ग्रियर्सन ने इसे वर्नाक्युलर हिंदुस्तानी तथा डॉ. सुनीति कुमार चटर्जी ने इसे जनपदीय हिंदुस्तानी का नाम दिया है. डॉ. चटर्जी खड़ी बोली के साहित्यिक रूप को साधु हिंदी या नागरी हिंदी कहते थे और डॉ. ग्रियर्सन ने इसे हाई हिंदी का नाम दिया. अनेक विद्वान खड़ी का अर्थ सुस्थित, प्रचलित, सुसंस्कृत, परिष्कृत या परिपक्व ग्रहण करते हैं. खड़ी बोली को खरी बोली भी कहा गया है. 

किस देश के डाक टिकट पर देश का नाम नहीं होता?
यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड आयरलैंड के डाक टिकटों पर देश का नाम नहीं होता. इसकी वजह यह है कि इन देशों में ही डाक टिकटों की शुरूआत हुई थी और इन्होंने तब अपने देशों के नाम टिकट पर नहीं डाले थे. यह परम्परा अब भी चली आ रही है. अलबत्ता इन टिकटों पर देश के राजतंत्र की छवि ज़रूर होती है.

पश्चिम बंगाल राज्य भारत के पूर्वी भाग में स्थित है तो यह पश्चिमी बंगाल कैसे है? पूर्वी बंगाल क्यों नहीं?
आज हम जिसे पश्चिम बंगाल कहते हैं वह समूचे बंगाल का एक हिस्सा है. सन 1757 की प्लासी लड़ाई में ईस्ट इंडिया कम्पनी की जीत से अंग्रेजी शासन को बुनियादी आधार मिला. अंग्रेजी शासन ने शुरू में कोलकाता को अपनी राजधानी बनाया. बीसवीं सदी के प्रारम्भ में वायसराय लॉर्ड कर्जन ने प्रशासनिक कारणों से बंगाल को दो हिस्सों में बाँटने का फैसला किया. इसके पीछे जो भी कारण रहा हो, पर यह स्पष्ट था कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र पूर्वी बंगाल बना और हिन्दू बहुल क्षेत्र पश्चिमी बंगाल. 16 अक्टूबर 1905 को बंगाल का विभाजन हुआ. बंग भंग की इस कारवाई ने भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन की चिंगारी जला दी. विभाजन का भारी विरोध हुआ, पर वह टला नहीं. सन 1906 में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने आमार शोनार बांग्ला... गीत लिखा, जो सन 1972 में बांग्लादेश का राष्ट्रगीत बना. बहरहाल 1947 में देश के विभाजन के बाद भी बंगाल विभाजित रहा. पूर्वी बंगाल, पूर्वी पाकिस्तान बना और पश्चिमी बंगाल भारत में रहा. वह नाम अबतक चला आ रहा है.

ईद का चाँद माने क्या?
ईद उल-फ़ित्र इस्लामी कैलेंडर के शव्वाल यानी दसवें महीने के पहले दिन मनाई जाती है. रमज़ान का चांद डूबने और ईद का चांद नज़र आने पर उसके अगले दिन चांद की पहली तारीख़ को मनाई जाती है. इस्लामी साल में दो ईदों में से यह एक है(दूसरी ईद उल जुहा या बकरीद कहलाती है). ईद का चाँद काफी हल्का दिखाई पड़ता है और एक लम्बे इंतज़ार के बाद आता है, इसलिए ईद का चाँद हो जाना मुश्किल में दिखाई पड़ना के अर्थ में मुहावरा भी हो गया है.

मुस्लिम धर्म से जुड़े त्योहारों की तिथियां किस प्रकार निर्धारित की जाती हैं?
मुस्लिम पर्वों की काल-गणना इस्लामिक कैलेंडर के आधार पर होती है. इसे हिज़री या इस्लामी पंचांग कहते हैं. यह चंद्र काल गणना पर आधारित पंचांग है. पूरी दुनिया के मुसलमान अपने धार्मिक पर्वों को मनाने का सही समय जानने के लिए इसकी मदद लेते हैं. इस पंचांग में साल में बारह महीने होते हैं. इन बारह महीनों में 354 या 355 दिन होते हैं. यह सौर पंचांग से 11 दिन छोटा होता है इसलिए इस्लामी धार्मिक तिथियाँ आमतौर पर सौर पंचांग के मुकाबले हर साल 11 दिन पीछे हो जाती हैं. इसे हिज़रा या हिज़री भी कहते हैं, क्योंकि इसका पहला वर्ष वह वर्ष है जिसमें हज़रत मुहम्मद की मक्का शहर से मदीना की ओर हिज़्रत (प्रवास) हुई थी. इस पंचांग के अनुसार महीनों के नाम हैं 1.मुहर्रम, 2.सफ़र, 3.रबीउल अव्वल, 4.रबीउल आख़िर, 5.जमादी-उल-अव्वल, 6.जमादी-उल-आख़िर, 7.रजब, 8.शाबान, 9.रमज़ान, 10.शव्वाल, 11.ज़िलक़ाद, 12.ज़िलहिज्ज।
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

1 comment:

  1. बहुत बढ़िया ज्ञानवर्धक जानकारी प्रस्तुति हेतु आभार

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