Thursday, August 25, 2016

आजादी का दिन 15 अगस्त कैसे तय हुआ?

ब्रिटिश संसद ने भारत को स्वतंत्र करने का फैसला करने के बाद गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन को अधिकृत किया कि वे 30 जून, 1948 तक इस फैसले को कार्यान्वित करें. पर ब्रिटिश राज की शक्ति क्रमशः क्षीण होती जा रही थी. 30 जून तक इंतजार करने के बजाय माउंटबेटन ने तय किया कि यह काम अगस्त 1947 तक पूरा कर लेना चाहिए. उन्हें यह भी लगता था कि देर करने पर खून-खराबा होने का डर है. बहरहाल माउंटबेटन की सिफारिशों के बाद ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमंस ने 4 जुलाई 1947 को भारतीय स्वतंत्रता विधेयक पेश किया, जो एक पखवाड़े के भीतर पास हो गया. इसमें ही स्वतंत्रता की तिथि 15 अगस्त, 1947 तय की गई. फ्रीडम एट मिडनाइट नामक पुस्तक में माउंटबेटन को यह कहते हुए उधृत किया गया है कि यह तारीख मेरे मन में अचानक आई. जब मुझसे कहा गया कि कोई तारीख तय करो, तो मुझे लगा कि अगस्त-सितम्बर तक सारा इंतजाम हो जाएगा. फिर मैंने कहा, 15 अगस्त. वह जापान के समर्पण की दूसरी वर्षगाँठ भी है. 15 अगस्त 1945 को जापान के सम्राट का रिकॉर्डेड संदेश रेडियो पर प्रसारित हुआ था.   
दिसम्बर 1929 में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन जवाहर लाल नेहरू की अध्यक्षता में हुआ, जिसमें प्रस्ताव पास करके घोषणा की गई कि यदि अंग्रेज सरकार 26 जनवरी 1930 तक भारत को उपनिवेश का दर्जा (डोमीनियन स्टेटस) नहीं देगी तो भारत अपने को पूर्ण स्वतंत्र घोषित कर देगा. उस तारीख तक जब अंग्रेज सरकार ने कुछ नहीं किया तब कांग्रेस ने उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की और अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ किया. तब से 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता रहा. 15 अगस्त को आजादी मिलने के बाद 26 जनवरी का महत्व बनाए रखने के लिए उसे गणतंत्र दिवस मनाने का फैसला किया गया.
बैकलॉग शब्द कैसे बना?
यह शब्द बैक और लॉग से मिलकर बना है. बैक का मतलब है पीछे और लॉग कहते हैं लकड़ियों के टुकड़ों को. पुराने जमाने में यूरोप के घरों में कमरों को गर्म करने के लिए बने आतिशदान के पीछे लकड़ियों का ढेर रखा जाता था. उसे बैकलॉग कहते थे. धीरे-धीरे यह शब्द लकड़ियों के ढेर की जगह काम के ढेर के रूप में बदल गया. ढेर सा जमा काम यानी बैकलॉग.
विजिलांट क्या होता है?
‘विजिलांट’ शब्द के माने हैं निगरानी, सजगता और सतर्कता. ऐसी मान्यता है कि सजग नागरिकों और सजग राजनेताओं के रहते लोकतंत्र में कोई ताकत जन-हित की उपेक्षा नहीं कर सकती. सजग नागरिक फिर किसी भी हद तक जाकर हस्तक्षेप कर सकते हैं.
कोरियर की रसीदों में लिखे CIN का मतलब क्या होता है?
चालान आइडैंटिफ़िकेशन नम्बर या कार्ड आइडैंटिफ़िकेशन नम्बर से इसका आशय है. किसी पत्र या फॉर्म को एक निश्चित नम्बर देने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है, ताकि पत्र को पहचाना जा सके. इस शब्द का इस्तेमाल कोरियर के अलावा और जगह भी होता है.
पुराने पेड़ों की उम्र का पता कैसे लगता है?
पेड़ों की आयु का निर्धारण उनके तने या सबसे पुरानी शाखाओं के क्रॉस सेक्शन के अध्ययन से किया जाता है. वृक्षों के तनों में वार्षिक रूप से मोटाई में वृद्धि होती है. ये अलग-अलग रंग की परतों में होती हैं. इन चक्रीय परतों की गणना करके उनकी आयु ज्ञात की जाती है.
तुलसी रामायण और वाल्मीकि रामायण क्या अलग-अलग हैं?

हाँ अलग हैं. रामकथा से जुड़ी सैकड़ों प्राचीन पुस्तकें हैं. सोलहवीं शताब्दी के अंत में गोस्वामी तुलसी दास ने अवधी में रामचरित मानस लिखी की, जिसे तुलसी रामायण कहते हैं. वाल्मीकि रामायण कोई तीन हज़ार साल पहले संस्कृत में लिखी गई थी. इसके रचनाकार वाल्मीकि को आदि कवि भी कहा जाता है. उसके बाद अलग-अलग काल में और विभिन्न भाषाओं में रामायण की रचना हुई. ज्यादातर का स्रोत वाल्मीकि रामायण है. बारहवीं सदी में तमिल में लिखी गई कम्बन की रामावतारम्, तेरहवीं सदी में थाई रामकीयन और कम्बोडियाई रामायण, पंद्रहवीं-सोलहवीं सदी में उड़िया रामायण और कृतिबास की बांग्ला रामायण प्रसिद्ध हैं.
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

2 comments:

  1. आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति ऋषिकेश मुखर्जी और मुकेश - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। सादर ... अभिनन्दन।।

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  2. हमेशा की तरह बहुत ही रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी देती हुई पोस्ट | मुझमें तो बालपन वाला कौतूहल जगा देती हैं आपकी पोस्ट ..बढ़िया लगा पढ़कर | पुत्र को पढवाता हूँ

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