Wednesday, August 24, 2016

भारत में घरेलू बिजली 230 वोल्ट और अमेरिका में 110, ऐसा क्यों?

जिस तरह किसी पाइप के मार्फत पानी एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाया जाता है उसी तरह बिजली के सर्किट में इलेक्ट्रॉन और दूसरे चार्ज कैरियर्स को आगे बढ़ाने का काम किया जाता है। पानी पर जितना ज्यादा प्रेशर होगा उतनी ज्यादा मात्रा में पानी दूसरे बिन्दु पर पहुँचेगा। आसानी से समझने के लिए वोल्टेज को प्रेशर मानें। ज्यादा वोल्टेज से ज्यादा बिजली का प्रवाह होगा। यह सामान्य सी बात है। इसी वजह से एक शहर से दूसरे शहर तक बिजली भेजने के लिए हाई वोल्टेज का इस्तेमाल होता है। हाई वोल्टेज को सम्हालने के लिए केबल की क्षमता भी उसी के अनुरूप होती है।

अमेरिका में घरों में सप्लाई 120 वोल्ट में होती है और यूरोप तथा भारत सहित अनेक देशों में 230 वोल्ट में। इसके अलावा 100, 140, 150 या दूसरे मानक भी हो सकते हैं। मोटी बात यह है कि जितने हाई वोल्ट पर बिजली सप्लाई होगी उतना लाइन लॉस कम होगा। चूंकि हाई वोल्टेज में दुर्घटना की वोल्टेज में समानता नहीं है। इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, भारत, पाकिस्तान, नेपाल जैसे देशों में 230 वोल्ट में सप्लाई होती है। जापान में 100 और कनाडा में 120 में।

साउंडप्रूफ प्रणाली क्या है?

साउंडप्रूफिंग से तात्पर्य है आवाज़ के दबाव को संतुलित करना। इसके कई अर्थ हो सकते हैं। एक अर्थ है कमरे से आवाज़ बाहर न जाने देना। दूसरा अर्थ है बाहर की आवाज़ अन्दर न आने देना। तीसरा अर्थ है कमरे में अनुगूँज या ईको को रोकना। चौथा अर्थ है कि आवाज़ की सभी आवृत्तियों की अनुमति देना और निरर्थक आवाज़ों को रद्द करना। आमतौर पर दीवारों पर एकाउस्टिक बोर्ड और फोम लगाकर ध्वनि को बेहतर बनाया जाता है। ज़रूरत के अनुसार एकाउस्टिक ट्रांसमिशन, रिसेप्शन, माइक्रोफोन, स्पीकर आदि का इस्तेमाल होता है। अब ऐसे कम्प्यूटर बेस सिस्टम आते हैं, जो ध्वनि का तत्काल विश्लेषण करके निरर्थक ध्वनियों को रद्द कर देते हैं।

एटीएम की मशीन सबसे पहले कहाँ बनी?
   
एटीएम का अर्थ होता है ऑटोमेटेड टैलर मशीन। इसका जन्म सेल्फ सर्विस की धारणा के साथ हुआ है, जिससे काम आसान हो और अनावश्यक कर्मचारियों को लगाना न पड़े। इस मशीन के आविष्कार का श्रेय आर्मेनियाई मूल के अमेरिकन लूथर जॉर्ज सिमियन को मिलना चाहिए। यों इसके विकास में कुछ और लोगों का भी हाथ है। एटीएम की परिकल्पना उसने 1939 में ही कर ली थी और बैंकमैटिक नाम से एक मशीन बनाई। जिसे पेटेंट मिला फरवरी 1963 में। इस बीच उसने सिटी बैंक ऑफ न्यूयॉर्क(आज का सिटी बैंक) के अधिकारियों को इस बात के लिए राजी किया कि वे इस मशीन को परीक्षण के तौर पर लगाकर देखें। सिटी बैंक ने छह महीने के ट्रायल पर मशीन लगाई, पर उसे लोकप्रियता नहीं मिली। इसकी लोकप्रियता जापान से बढ़ी वह भी क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल के कारण। एटीएम के साथ-साथ चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक और अन्य कई वस्तुओं के डिस्पेंसर भी उसी दौरान बने हैं।   

परमाणु विस्फोट कितने देश कर चुके हैं?

सबसे पहला परमाणु परीक्षण अमेरिका ने 16 जुलाई 1945 को किया था। तब से 1992 तक अमेरिका 1032 परमाणु परीक्षण कर चुका है। सोवियत संघ में 727 परीक्षण हुए, लेकिन 1992 में उसके विघटन के बाद से कोई परीक्षण नहीं हुआ। ब्रिटेन ने 88 परीक्षण किए और अंतिम परीक्षण 1991 में किया गया। फ़्रांस 217 परीक्षण कर चुका है, चीन 47, भारत छह, पाकिस्तान छह और उत्तर कोरिया ने चार परीक्षण किए हैं। इसके अलावा यह माना जाता है कि जापान, इसराइल, दक्षिण अफ़्रीका और जर्मनी ने भी परमाणु परीक्षण किए हैं।

एलसीडी एवं एलईडी के पूर्ण शब्द क्या हैं?

एलसीडी है लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले। और एलईडी है लाइट एमिटिंग डायोड्स। दोनों का इस्तेमाल आजकल डिस्प्ले या इलेक्ट्रॉनिक दृश्य प्रदर्शन में होता है। इनके साथ कैथोड रे ट्यूब और प्लाज्मा डिस्प्ले पैनल के बारे में भी जानना चाहिए। हमने जब टीवी देखना शुरू किया तब कैथोड रे ट्यूब वाले मॉनिटर होते थे। कम्प्यूटर पर भी वही मॉनिटर लगते थे। ये मॉनिटर आकार में बड़े होते थे। इसके बाद आए एलसीडी मॉनिटर। एलसीडी में प्रकाश की किरणों में चमकने वाले लिक्विड क्रिस्टल होते हैं। इनके मुकाबले प्लाज्मा सेल फ्लुओरोसेंट लैम्प्स की पद्धति पर काम करते हैं। इसमें लाखों पिक्सेल सेल होते हैं। एलईडी जब शुरू में आए थे तब वे सिर्फ लाल रंग के होते थे। अब तमाम रंगों के एलईडी बनने लगे हैं। अब एलईडी और एलसीडी तकनीक के समन्वय से नए ढंग के डिस्प्ले पैनल भी सामने आ रहे हैं।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

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