Sunday, July 31, 2016

नीदरलैंड को द नीदरलैंड क्यों लिखा जाता है?

अंग्रेजी में कुछ संज्ञाओं के पहले आर्टिकल '' 'ए' या '' लगाया जाता है ताकि उस वस्तु या स्थान को निश्चित या अनिश्चित रूप में पहचाना जा सके। 'ए बॉय' कोई एक लड़का। 'द बॉय' कोई खास लड़का। आपने अखबारों के नाम देखे होंगे-द टाइम्स, द पायनियर। यह विशिष्ट पहचान वाले नाम हैं। ऐसे ही कुछ देशों के नाम हैं। द नीदरलैंड नहीं इसे द नीदरलैंड्स यानी बहुवचन में लिखा जाता है। इसे लोग हॉलैंड के नाम से भी जानते हैं। पर देश का नाम द नीदरलैंड्स ही है। नीदरलैंड्स का अर्थ है निचला इलाका। इस देश में लगभग 21 प्रतिशत ज़मीन समुद्र तल से नीची है। वह ज़मीन जो समुद्र तल से नीची है। इसमें देश के नाम का विवरण है। इसे नीदरलैंड्स भी लिखते हैं, पर औपचारिक रूप से द नीदरलैंड्स। इसमें ज़मीन का बहुवचन रूप भी व्यक्त होता है। वह जिसमें अनेक समाहित हैं। बहुलता भी एक कारण है। पर यह अकेला ऐसा नाम नहीं है। यूएसए भी द यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका है। ऐसा ही नाम था द सोवियत यूनियन। द चेक रिपब्लिक, द फिलिपीन्स (अनेक द्वीप), द रिपब्लिक ऑफ लेबनॉन(पहाड़ियाँ), द रिपब्लिक ऑफ सूडान (रेगिस्तान) द मिडिल ईस्ट, द हेगद बहामास। अब हम अर्जेंटीना लिखते हैं। वर्ना वह भी द अर्जेंटाइन रिपब्लिक है। 
  
सौर परिवार में कौन सा ग्रह सबसे तेज परिक्रमा करता है?

अंतरराष्ट्रीय खगोल शास्त्री संघ यानी आईएयू के अगस्त 2006 में पारित प्रस्ताव के मुताबिक सौरमंडल में अब सिर्फ़ आठ ग्रह हैं बुध, शुक्र, पृथ्वी, वृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेप्च्यून। बुध सौर मंडल का सबसे छोटा ग्रह है। बुध ग्रह सबसे तेज़ गति से घूमता है। इसे सूर्य का चक्कर लगाने में 88 दिन लगते हैं। इसकी औसत गति 4736 किलोमीटर प्रति सेकंड है।

और सबसे गर्म ग्रह कौन सा है?

सबसे गर्म ग्रह है शुक्र। हालांकि बुध ग्रह सूरज के सबसे क़रीब है इसलिए उसे सबसे गर्म होना चाहिए, लेकिन सूरज के इतने क़रीब होने की वजह से उसका वायुमंडल नष्ट हो चुका है। इसलिए वह गर्मी को रोक नहीं पाता। शुक्र का वायुमंडल मुख्यतः कार्बन डाईऑक्साइड से भरा हुआ है। सूरज की गर्मी इसमें प्रवेश तो करती है लेकिन निकल नहीं सकती। इस तरह से यह एक भट्टी का रूप ले लेती है। शुक्र की सतह का तापमान लगभग 462 डिग्री सेल्सियस रहता है। सुबह के समय पूर्व दिशा में जो सबसे चमकदार तारा दिखाई देता है वह शुक्र ही है। सूर्यास्त के समय यह पश्चिम में नज़र आता है।

इंजेक्शन या सूई लगाने से पहले स्पिरिट क्यों लगाया जाता है?

इंजेक्शन लगाने के पहले सर्जिकल स्पिरिट का इस्तेमाल किया जाता है। यह आमतौर मिथाइल और इथाइल अल्कोहल का मिश्रण होता है। मिथाइल सैलिसाइलेट और आइडोफॉर्म का इस्तेमाल भी इस काम के लिए किया जाता है। मूलत: यह डिसइंफैक्टेंट है। यानी विषाणुओं के संक्रमण की संभावना को खत्म करने के लिए इसे लगाया जाता है।

मछलियां और पानी में रहने वाले दूसरे जीव-जन्तु कब एवं कैसे सोते हैं।

मछलियाँ भी सोती हैं, पर उस तरह नहीं जैसा हम समझते हैं। उसकी आँख की पुतलियाँ बंद नहीं होतीं तो हमें लगता है कि वे जागती रहती हैं। अपने एक्वेरियम में आप ध्यान से देखें तो पाएंगे कि कई बार मछली अपेक्षाकृत शांत या गतिविधि-हीन अवस्था में होती है। वही उसकी नींद है।

होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के आविष्कारक कौन थे?

जर्मन चिकित्सक सैमुअल हैनीमैन (1755-1843) ने होम्योपैथी चिकित्सा प्रणाली की शुरूआत की।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Friday, July 29, 2016

अमेरिका में क्या केवल दो पार्टियाँ ही हैं?

अमेरिका में 50 से ज्यादा राजनीतिक दल हैं. पर व्यावहारिक रूप से दो दलों की प्रणाली है. ये दो हैं रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी. पर ये पार्टियाँ शुरू से नहीं हैं. अमेरिकी संविधान में पार्टियों के बारे में कोई व्यवस्था नहीं है. समय के साथ उनका विकास हुआ है. संविधान 1787 में लिखा गया और विभिन्न राज्यों ने 1788 में इसकी पुष्टि की और 1789 में इसे लागू किया गया. देश के पहले राष्ट्रपति थे जॉर्ज वॉशिंगटन, जिन्होंने संविधान सभा की अध्यक्षता की थी. उनकी कोई पार्टी नहीं थी.

जब संविधान को स्वीकार किया जा रहा था तब उसकी पुष्टि के पक्षधर फेडरलिस्ट और उसके विरोध एंटी-फेडरलिस्ट कहलाने लगे. देश के दूसरे राष्ट्रपति जॉन एडम्स फेडरलिस्ट पार्टी से ताल्लुक रखते थे. उसी दौरान डेमोक्रेटिक रिपब्लिकन सोसाइटीज नाम से एक और समूह उभरने लगा. देश के तीसरे राष्ट्रपति टॉमस जैफ़रसन इसी से ताल्लुक रखते थे. उनके बाद के तीन राष्ट्रपति इसी पार्टी से थे. सन 1820 के दशक में डेमोक्रेटिक पार्टी बनी और देश के सातवें राष्ट्रपति एंड्रयू जैक्सन डेमोक्रेटिक पार्टी की और से पहली बार राष्ट्रपति बने. सन 1854 में रिपब्लिकन पार्टी की स्थापना के पहले ह्विग पार्टी के भी चार राष्ट्रपति बने. गुलामी की प्रथा के विरोध में खड़ी हुई रिपब्लिकन पार्टी के पहले राष्ट्रपति थे अब्राहम लिंकन, जो 1861 में राष्ट्रपति बने. उसके बाद से देश में या तो रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी को जीत मिली है या डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रत्याशी को.
  
भारत के सेंसर बोर्ड की स्थापना कब हुई?

केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड भारत सरकार की एक नियामक संस्था है. इसका कार्य फिल्मों, टीवी कार्यक्रमों तथा उनकी प्रचार सामग्री की समीक्षा करना है. देश के सिनेमाटोग्राफिक एक्ट 1952 के तहत यह संस्था काम करती है और फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए प्रमाण पत्र देती है. बोर्ड का मुख्यालय मुम्बई में है, पर इसके नौ क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं. सेंसर बोर्ड के पहले अध्यक्ष सीएस अग्रवाल थे, जो इस पद पर 15 जनवरी 1951 से 14 जून 1954 तक रहे. इन दिनों इसके अध्यक्ष पहलाज निहलानी हैं.

लैपटॉप शब्द कहां से आया?

लैपटॉप भी आम भाषा में कम्प्यूटर है. शुरू में जो रोजमर्रा इस्तेमाल के कम्प्यूटर आए उन्हें पीसी यानी पर्सनल कम्प्यूटर कहा गया. बाद में कुछ कम्पनियों ने पोर्टेबल कम्प्यूटर की बात सोची. जैरॉक्स ने ऐसा एक कम्प्यूटर बनाया भी, पर व्यावसायिक रूप से पहला पोर्टेबल कम्प्यूटर ओसवर्न 1 था, जो 1981 में पेश किया गया. यह भी काफी भारी-भरकम था. इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान था, पर यह बैटरी से नहीं चलता था. इसके बाद एप्सन और कॉम्पैक जैसी कम्पनियों ने पोर्टेबल कम्प्यूटर बनाने की कोशिश की. एप्सन एचएक्स-20 में रिचार्जेबल बैटरी भी लग गई. पर तब तक किसी ने इन्हें लैपटॉप नहीं कहा था. लैपटॉप नाम सबसे पहले गैवीलियन एससी को दिया गया, जो पहली बार बाजार में 1984 में आया.
  
मैग्नेटिक फील्ड क्या है और इसकी उपादेयता क्या है?

चुम्बक (मैग्नेट्) वह पदार्थ या वस्तु है जो चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है. चुम्बकीय क्षेत्र अदृश्य होता है और चुम्बक का प्रमुख गुण आस-पास के पदार्थों को अपनी ओर खींचना और दूसरे चुम्बकों को या तो अपनी ओर खींचना या धक्का देना है. अलग-अलग पदार्थों के चुम्बकीय क्षेत्र अलग-अलग होते हैं. इनमें लोह चुम्बकत्व सबसे महत्वपूर्ण है. कुछ पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैं और कुछ उससे दूर भागते हैं. कुछ पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र से बहुत कम प्रभावित होते हैं जैसे ताँबा, सोना, अल्युमिनियम, सोना, गैसें और प्लास्टिक. जैसे ही लोहा चुम्बक के प्रभाव क्षेत्र में आता है उसके इलेक्ट्रॉन चुम्बकीय क्षेत्र के अनुसार बहने लगते हैं. लोहा खुद चुम्बक बन जाता है.

वैज्ञानिकों ने मैग्नेटिक फील्ड के अनेक पहलुओं पर शोध किया है. समुद्र में जहाज पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड की मदद से रास्ता खोजते हैं. भूगर्भ-विज्ञानी मैग्नेटोमीटर्स की मदद से धरती के नीचे दबे पठार या खनिज का पता लगाते हैं. चिकित्सा में इसका इस्तेमाल मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) मशीन के रूप में होता है.
  
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

Tuesday, July 26, 2016

मेट्रो ट्रेन क्या बिना चालक एवं गार्ड के चलती हैं?

दुनिया में कम से कम 32 मेट्रो अपने यहाँ ड्राइवर-रहित ट्रेनें संचालित करते हैं। इससे ज्यादा ट्रेनों पर काम चल रहा है। दिल्ली मेट्रो भी जल्द बिना चालक की गाड़ियाँ चलाने वाली है। सन 1967 में लंदन की अंडरग्राउंड विक्टोरिया लाइन की शुरूआत ऑटोमेटेड ट्रेन से हुई। इसी तरह की मेट्रो गाड़ियाँ कोपेनहेगन, बार्सिलोना और पेरिस में चलती हैं। जापान, हांगकांग, ताइपेह, सिंगापुर और दुबई समेत अनेक स्थानों पर गाड़ियाँ बगैर ड्राइवर के चलतीं है। दर असल इस तरह के रेलवे में सिग्नल से लेकर संचार तक तमाम चीजें कम्प्यूटर नियंत्रित और स्वचालित हो चुकीं हैं। कई जगह एक-दो व्यक्तियों का स्टाफ दरवाजे खोलने या आपातकालीन परिस्थितियों में काम करने के लिए भी रखा जाता हैं। मोटे तौर पर देखें तो ड्राइवर को ट्रेन चलाने के लिए एक या दो बटन दबाने होते हैं। उसे अपने कंट्रोलर के निर्देशों पर यह काम करना होता है। ट्रेन कंट्रोल भी अब ऑटोमेटिक हो गया है। ट्रेन ही नहीं अब हवाई जहाज उड़ाने के अनेक काम ऑटोमेटिक होते हैं। 

एमटीसीआर का मतलब क्या है?
भारत मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजीम (एमटीसीआर) का नवीनतम सदस्य है। हाल में 27 जून 2016 को भारत इस ग्रुप की आधिकारिक रूप से सदस्य बन गया। एमटीसीआर का मकसद बैलिस्टिक मिसाइल तथा हथियार ले जाने वाले दूसरे डिलीवरी सिस्टम की तकनीक के आदान-प्रदान को नियंत्रित करना है, जिनका रासायनिक, जैविक और परमाणु हमलों में उपयोग किया जा सकता है। भारत को मिलाकर इस वक्त इस ग्रुप में 35 देश शामिल हैं। सभी देश प्रमुख मिसाइल निर्माता देश हैं। इसकी स्थापना 1987 में हुई। भारत से पहले आखिरी बार बल्गारिया 2004 में इस समूह का सदस्य बना था। भारत के पड़ोसी चीन और पाकिस्तान इस समूह के सदस्य नहीं है। एमटीसीआर का सदस्य न होने के नाते भारत की मिसाइल तकनीक तक सीमित पहुंच थी। सदस्य बनने के बाद भारत पर लगा अंकुश हट गया है। इससे हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए जरूरी तकनीक मिल सकेगी। साथ ही अमेरिका से ड्रोन तकनीकी पाना आसान हो जाएगा।

विम्बलडन क्या है?

विम्बलडन प्रतियोगिता दुनिया में सबसे पुराना टेनिस टूर्नामेंट है। इसे दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिता माना जाता है। सन 1877 के बाद से यह प्रतियोगिता लन्दन के उपनगर विम्बलडन के ऑल इंग्लैण्ड क्लब में होती है। यह एकमात्र प्रतियोगिता है, जो आज भी खेल की मूल सतह, घास, पर खेली जाती है, जिससे लॉन टेनिस को इसका नाम मिला। यह प्रतियोगिता जून के अंत में और जुलाई के प्रारंभ में दो सप्ताहों से अधिक समय के लिए खेली जाती है। इसमें महिलाओं और पुरुषों के सिंगल्स फाइनल क्रमशः दूसरे शनिवार और रविवार को खेले जाते हैं।

भारत में कुल कितने गाँव हैं?
सन 2011 की जनगणना के अनुसार हमारे देश में गाँवों की संख्या 6,38,000 है।

आलू की खेती कहां शुरू हुई?
वैज्ञानिक अनुसंधानों से पता लगा है कि सबसे पहले लैटिन अमेरिकी देश पेरू के दक्षिणी हिस्से में सबसे पहले आलू पैदा हुआ। यह बात करीब दस-ग्यारह हजार साल पहले की है। यूरोप से स्पेन के लोगों ने जब इस इलाके पर विजय हासिल की तो वे अपने साथ यूरोप इसे लाए। भारत में भी आलू यूरोप से आया है।

एक क्यूसेक में कितने लीटर होते हैं?
क्यूसेक बहते पानी या तरल का पैमाना है और लिटर स्थिर तरल का। क्यूसेक माने होता है क्यूबिक फीट पर सेकंड। यानी एक फुट चौड़े, एक फुट लम्बे और एक फुट गहरे स्थान से क सेकंड में जितना पानी निकल सके। सामान्यतः एक क्यूसेक में 28.317 लिटर पानी होता है।
  
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Thursday, July 21, 2016

रेपो रेट क्या होता है?


 रेपो रेट रिजर्व बैंक और अन्य बैंकों के बीच धनराशि के आदान-प्रदान पर दिए जाने वाले ब्याज की दर है. रिजर्व बैंक जब धनराशि देता है, वह दर रेपो और जब वह दूसरे बैंकों से लेता है तब रिवर्स रेपो दर कहलाती है. बाजार में मुद्रा की स्थिति को संतुलित बनाए रखने के लिए अक्सर रिजर्व बैंक और अन्य बैंकों के बीच यह आदान-प्रदान होता है.

लड़कियों को माता या पिता की सम्पति में कितना हक है?

देश में हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 लागू होने के पहले हिन्दू स्त्रियों के उत्तराधिकार के मसले विभिन्न शास्त्रीय परम्पराओं के आधार पर तय होते थे. यह शास्त्रीय व्यवस्था भी देश के अलग-अलग हिस्सों और जातियों-सम्प्रदायों में अलग-अलग थी. इस नियम के बनने के बाद से स्त्रियों को भी पिता की सम्पत्ति में बराबर का हक मिल गया. उस नियम में भी पैतृक सम्पत्ति में स्त्रियों को बराबरी का हक नहीं था. सन 2005 में नया कानून बनने के बाद से अब बराबरी की स्थिति है.

ढीबरी, लालटेन और दिए का विकास कैसे हुआ?

दीपक और लालटेन वगैरह के जन्म के पहले मनुष्य ने आग जलाना सीख लिया था. आग के रूप में अंधेरे में रोशनी का सहारा मिल गया था. यह रोशनी शुरू में लकड़ी और पत्तों को जलाकर और बाद में वानस्पतिक तेलों को जलाकर प्राप्त की जाती थी. इस रोशनी की प्राप्ति के बाद ही दीपक और दीवट का विकास हुआ. शुरू के दीपक पत्थर के रहे होंगे. पहिए का विकास होने के बाद कुम्हार का चाक बना. उसके बाद मिट्टी के दीपक बने.

दिया बत्ती या मोमबत्ती का आविष्कार कम से कम पाँच हजार साल पहले हो गया था. वानस्पतिक तेल या जानवरों की चर्बी को जलाकर रोशनी का काम प्राय: अधिकतर सभ्यताओं में हो चुका था. उसी दौरान लालटेन और सड़कों के किनारे लगने वाले लैम्पों का आविष्कार हुआ. राज दरबारों में सजावटी रोशनी के सुन्दर लैम्प बनने लगे. भारत, मिस्र और चीन की प्राचीन सभ्यताओं में सुन्दर लैम्प और दीपाधार मिलते हैं. उन्नीसवीं सदी में रेलवे के विस्तार के साथ सचल लालटेन की डिजाइन में काफी सुधार हुआ. उधर पैराफिन वैक्स और पेट्रोलियम के रूप में ईंधन मिलने पर मोल्डेड मोमबत्तियों और हरीकेन लालटेन का चलन भी बढ़ा. हाथ का टॉर्च भी इसी आविष्कार की एक कड़ी है.
  
स्विस बैंकों की क्या खास बात है?

मध्य युग से ही स्विस बैंक सूचनाओं को गोपनीय रखने के लिए प्रसिद्ध हैं. सन 1934 में इसके लिए यहाँ की संसद ने विशेष कानून भी बनाया. स्विट्ज़रलैंड पूरी तरह तटस्थ देश है. उसकी साख के कारण बैंकिंग कारोबार यहाँ अच्छा है. शुरुआत में बैंकिंग के बाबत स्विस कानून बनाते वक्त गोपनीयता पर जोर नहीं था, पर उस दिनों नाज़ी जर्मनी यहूदियों के बारे में जानकारियाँ लेकर उन्हें प्रताड़ित करते थे. इसी गोपनीयता के कारण दुनियाभर का काला पैसा भी यहाँ के बैंकों में जमा होने लगा है. अब वहाँ भी नियमों में बदलाव हो रहा है और काले धन की जानकारी वहाँ का बैंकिंग उद्योग देने को तैयार है.  

आंगनबाड़ी क्या हैं?
आंगनबाड़ी भारत में मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़ा एक सरकारी कार्यक्रम है. इसमें नवजात से लेकर छह साल तक के बच्चों की स्वास्थ्य-रक्षा के कार्य किए जाते हैं. यह कार्यक्रम 1975 में शुरू किया था. यह कार्यक्रम गाँवों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद से चलाया जाता है. कार्यकर्ताओं को चार महीने की ट्रेनिंग दी जाती है. अनुमान है कि देश में इस समय दस लाख से ज्यादा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता काम कर रहीं हैं. 

चवन्नी किसे कहते हैं?

एक गणना पद्धति के अंतर्गत संख्याएं चार-आठ और सोलह में गिनी जाती थीं. हमारे देश में 1957 में दाशमिक पद्धति यानी सौ की पद्धति लागू हुई. तब रुपए में सौ पैसे और किलो में हजार ग्राम का चलन शुरू हुआ. उसके पहले रुपया सोलह आने का होता था. चौथाई रुपया चार आने का था. चार आने को बोलचाल की भाषा में चवन्नी कहते थे. चूंकि रुपए के मुकाबले चवन्नी छोटी होती थी, इसलिए क्षुद्रता के लिए मुहावरा बन गया, चवन्नी छाप।


प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

Thursday, July 14, 2016

डूरंड रेखा कहाँ है?

अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर 2,640 किलोमीटर लम्बी सीमा रेखा को डूरंड रेखा कहते हैं. सन 1893 में ब्रिटिश इंडिया और अफ़ग़ान प्रतिनिधियों के बीच एक सहमति हुई, जिसके अधीन अफ़ग़ानिस्तान को ब्रिटिश भारत से अलग करने के लिए एक रेखा तय की गई. इसका नाम ब्रिटिश इंडिया के तत्कालीन विदेश मंत्री सर मॉर्टिमर डूरंड के नाम पर रखा गया. 

अफगानिस्तान में इसका विरोध हुआ, क्योंकि इससे अफ़ग़ान कबीले बँट गए. अफगानिस्तान ने इस रेखा को कभी स्वीकार नहीं किया. यह इलाका अब पाकिस्तान के उत्तरी इलाक़ों, सरहदी सूबे और बलूचिस्तान में शामिल है. 1949 में अफ़ग़ानिस्तान की लोया जिरगा ने इस रेखा को अवैध घोषित कर दिया था. डूरंड रेखा अब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच अन्तर्राष्ट्रीय सीमारेखा के रूप में नक्शों पर दर्ज है हालांकि अफगानिस्तान का विरोध अब भी है.

प्लास्टिक  की खोज कब और कैसे हुई ?

प्लास्टिक शब्द ग्रीक शब्द प्लास्टिकोज़ और प्लास्टोज़ से बना है. इसका अर्थ है जो लचीला है या जिसे ढाला, मोड़ा या मनमर्जी आकार दिया जा सके. सबसे पहले मनुष्य निर्मित प्लास्टिक पार्केसाइन का पेटेंट सन 1856 में बर्मिंघम इंग्लैंड के अलेक्जेंडर पार्क्स ने कराया था. इसे पहली बार 1862 में लंदन की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में रखा गया. प्लास्टिक के पहले प्राकृतिक रबर, जिलेटीन, कोलेजीन और नाइट्रोसेल्युलोज़ जैसे पदार्थ उपलब्ध थे. 1866 में पार्क्स ने पार्केसाइन कम्पनी बनाकर इसका बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू किया.

सन 1907 में अमेरिका के न्यूयॉर्क स्टेट के लियो हेंड्रिक बेकलैंड ने पहली बाकर सिंथेटिक पद्धति से प्लास्टिक बनाया. उसने फेनॉल और फॉर्मेल्डिहाइड को मिलाकर गर्म किया, जिसे ठंडा करने पर कठोर पदार्थ मिला. बाद में उसने इसमें लकड़ी का बुरादा, एस्बेस्टस और स्लेट पाउडर मिलाकर कई और चीजें बनाईं. इन्हीं प्रयोगों को करते हुए 1912 में उसने अपने पदार्थ को बेकलाइट नाम दिया. पहले और दूसरे विश्व युद्ध के बाद इस तकनीक में जबर्दस्त विकास हुआ है. पॉलेस्टरीन, पॉलीविनायल क्लोराइड(पीवीसी), नायलन और सिंथेटिक रबर वगैरह नए ज़माने की देन हैं.  

मेरी स्टोप्स कौन थीं?

मेरी स्टोप्स अंग्रेज लेखिका, पुरा वनस्पति विज्ञानी और परिवार नियोजन के सिलसिले में स्त्रियों के अधिकारों के लिए लड़ने वाली महिला थीं. उनका जन्म 15 अक्तूबर 1880 को और निधन 2 अक्तूबर 1958 को हुआ था.  उन्होंने बर्थ कंट्रोल न्यूज़ नाम से न्यूज़ लेटर निकाला था, जिसके मार्फत उन्होंने स्त्रियों को जो सलाह दी उसे लेकर चर्च से उनकी ठन गई. उनके नाम से चलने वाली संस्था मेरी स्टोप्स इंटरनेशनल आज चालीस से ज्यादा देशों में काम कर रही है और इसकी 560 से ज्यादा शाखाएं हैं. 

पहिया सबसे पहले कब और कहां बना ?

पहिए का विवरण मेसोपोटामिया, उत्तरी कॉकेशस, मध्य यूरोप, मिस्र से लेकर सिंध घाटी तक हर जगह मिलता है. इसलिए यह कहना मुश्किल है कि सबसे पहले यह कहाँ बना. ऐसा लगता है कि मनुष्य ने सबसे पहले लकड़ी के लट्ठों को लुढ़का कर उनके सहारे भारी चीजें खिसकाना सीखा. बाद में यही लट्ठा छोटा होकर पहिया बना.

जीडीपी क्या है?

जीडीपी है ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट अर्थात सकल घरेलू उत्पाद. पूरे देश की आर्थिक गतिविधियों को एक साथ जोड़कर एक जगह रखें तो जो हिसाब बनेगा वह है जीडीपी. आर्थिक गतिविधियों में उत्पादन और सेवाएं दोनों शामिल हैं. उत्पादन में उद्योगों, खेती और तमाम छोटे धंधों का काम शामिल है. सेवाएं मुख्यत: चिकित्सा, शिक्षा, हॉस्पिटैलिटी यानी होटल और टेलीफोन आदि की हैं. देश के निजी और सरकारी उपभोग, पूँजी निवेश और सभी गतिविधियों का वास्तविक मूल्य जोड़कर प्राप्त राशि को देश की जनसंख्या से भाग देने पर जो राशि प्राप्त होती है वह औसत प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद है. इसमें होने वाली वृद्धि के प्रतिशत के आधार पर हम अपनी प्रगति को आँकते हैं. 

मोबाइल पोर्टेबिलिटी क्या है?

मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी उस सुविधा का नाम है, जिसके तहत आप अपने मोबाइल टेलीफोन सेवा प्रदाता को बदलने के बावजूद पुराने टेलीफोन नम्बर को अपने पास रख सकते हैं. यह सुविधा अब दुनिया भर में दी जा रही है. भारत में यह सुविधा जनवरी 2011 से दी जा रही है. उसके पहले यह अमेरिका, कनाडा, यूरोप के देशों, ऑस्ट्रेलिया, जापान, पाकिस्तान, ताइवान, थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर जैसे तमाम देशों में मिल रही थी.

प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

Thursday, July 7, 2016

परमाणु विस्फोट कितने देश कर चुके हैं?

सबसे पहला परमाणु परीक्षण अमेरिका ने 16 जुलाई 1945 को किया था. तब से 1992 तक अमेरिका 1032 परमाणु परीक्षण कर चुका है. सोवियत संघ में 727 परीक्षण हुए, लेकिन 1992 में उसके विघटन के बाद से कोई परीक्षण नहीं हुआ. ब्रिटेन ने 88 परीक्षण किए और अंतिम परीक्षण 1991 में किया गया. फ़्रांस 217 परीक्षण कर चुका है, चीन 47, भारत छह, पाकिस्तान छह और उत्तर कोरिया ने चार परीक्षण किए हैं. इसके अलावा यह माना जाता है कि जापान, इसराइल, दक्षिण अफ़्रीका और जर्मनी ने भी परमाणु परीक्षण किए हैं.

अमेरिका का नाम कैसे पड़ा?

अमेरिकी महाद्वीप की खोज क्रिस्टोफर कोलम्बस ने 1492 में की थी, पर इसका नाम रखने में उनकी कोई भूमिका नहीं है. कोलम्बस तो समझते थे कि उन्होंने जिस जमीन को खोजा है, वह भारत है. अमेरिका का नाम इतालवी यात्री अमेरिगो वेसपुच्ची के नाम पर पड़ा है. अमेरिगो वेसपुच्ची भी कोलम्बस का दोस्त था. वह व्यापारी था और कोलम्बस की यात्रा के सात साल बाद 1499 में वह चार पोतों के एक यात्री दल के साथ अटलांटिक पार करके दक्षिणी अमेरिका के पूर्वी तट पर पहुँचा. कुछ साल बाद जब वह वापस आया तो उसने अपनी यात्रा के बारे में लिखा. इन नई जगह को उसने नाम दिया ‘नोवस मुंडस’ यानी नई दुनिया. उसने यह साबित किया कि जिस इलाके की यात्रा करके वह आया है, वह भारत नहीं है. उसकी यात्रा का वृत्तांत 1502 में प्रकाशित हुआ.

सन 1507 में जर्मन कार्टोग्राफर (नक्शानबीस) मार्टिन वॉल्डसीम्यूलर और उनके सहयोगी मठायस रिंगमान भूगोल पर टोलमी के ग्रंथ का पुनर्प्रकाशन कर रहे थे. इसमें उन्होंने दुनिया का नया नक्शा पेश किया, जिसमें इस नई दुनिया को दिखाया, जिसका नाम उन्होंने लिखा अमेरिका. यह नाम अमेरिगो के नाम से प्रेरित था. शुरू में उनके नक्शे में दक्षिण अमेरिका ही था. बाद में उत्तरी अमेरिका भी इसमें शामिल किया गया. प्रसिद्ध भूगोलवेत्ता जेराल्ड मर्केटर ने 1958 में दोनों भूखंडों को एक नाम अमेरिका कहा.

यह भी कहा जाता है कि यह नाम ब्रिस्टल के व्यापारी रिचर्ड अमेरिके के नाम पर है. कहा जाता है कि ब्रिस्टल के व्यापारियों ने इस महाद्वीप की खोज कोलम्बस को पहले कर ली थी और उन्होंने अपने प्रायोजक के नाम पर इसका नाम रखा. पर आमतौर पर अमेरिगो वेसपुच्ची वाली बात पर ही भरोसा किया जाता है. 

ई-बुक्स क्या हैं?

ई-बुक्स (इलेक्ट्रॉनिक पुस्तक) का अर्थ है डिजिटल रुप में पुस्तक. ई-पुस्तकें और पत्रिकाएं कागज पर छपी होने के बजाय डिजिटल फाइल के रुप में होती हैं. इन्हें पढ़ने के लिए ई-बुक रीडर्स या ई-बुक डिवाइसेज़ भी उपलब्ध हैं. इन्हें कम्प्यूटर, मोबाइल एवं अन्य डिजिटल यंत्रों पर भी पढ़ा जा सकता है. इन्हें इन्टरनेट पर भी छापा, बांटा या पढ़ा जा सकता है. इंटरनेट के मार्फत ई-बुक्स पढ़ने की सुविधा देने वाली व्यवस्थाओं में 1971 से चल रहा प्रोजेक्ट गुटेनबर्ग सबसे अग्रणी है. ये पुस्तकें कई फाइल फॉर्मेट में होती हैं जिनमें पीडीऍफ (पोर्टेबल डॉक्यूमेण्ट फॉर्मेट), ऍक्सपीऍस आदि शामिल हैं, इनमें पीडीऍफ सर्वाधिक प्रचलित फॉर्मेट है. धीरे-धीरे पारंपरिक किताबों और पुस्तकालयों के स्थान पर पुस्तकों के नए रूप जैसे ऑडियो पुस्तकें, मोबाइल टेलीफोन पुस्तकें, ई-पुस्तकें आदि उपलब्ध हों रही हैं.

ई-पुस्तकों को पढ़ने के लिए उपकरण अलग से भी उपलब्ध हैं. इनमें अमेजन.कॉम का किण्डल तथा ऐपल का आईपैड शामिल है. पाइ एक अन्य उपकरण है. नई-पुरानी किताबों सहित कई तरह की सामग्री इसमें ऑनलाइन स्टोर कर सकते हैं. मोबाइल के लिए एडोबी रीडर लाइट उपलब्ध है.
  
मीडियम वेव और शॉर्ट वेव रेडियो तरंगे क्या होती हैं?

रेडियो तरंगें एक प्रकार का इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक रेडिएशन है. ये तरंगें पूरे ब्रह्मांड की यात्रा करती हैं. आप जिन रेडियो तरंगों की बात कर रहे हैं वे कृत्रिम रूप से तैयार की गई तरंगें हैं. इनका इस्तेमाल रेडियो-टीवी प्रसारण, मोबाइल फोन, नेवीगेशन, उपग्रह संचार, कम्प्यूटर नेटवर्क, सर्जरी और अन्य चिकित्सा से लेकर माइक्रोवेव अवन तक में होता है. इन तरंगों को कई तरह की फ्रीक्वेंसी में इस्तेमाल किया जाता है. मीडियम वेव आमतौर पर 526.5 से 1606.5 किलोहर्ट्ज़ की फ्रीक्वेंसी में होती हैं. ये तरंगें धरती की गोलाई के साथ घूम जाती हैं और अयन मंडल से गुज़र सकती हैं. इस लिहाज़ से ये स्थानीय से लेकर एक महाद्वीपीय प्रसारण तक के लिए उपयोगी हैं. शॉर्ट वेव इनसे काफी ऊँची फ्रीक्वेंसी पर काम करती हैं. 3000 से 30000 किलोहर्ट्ज़ तक. मीडियम वेव के मुकाबले ये काफी लम्बी दूरी तक प्रसारण में उपयोगी हैं. लांग वेव प्रसारण भी सम्भव है. अमेरिका और यूरोप में होता भी है. मोटे तौर पर 535 किलोहर्ट्ज़ से नीची फ्रीक्वेंसी प्रसारण को लांग वेव प्रसारण कहते हैं. कई देशों की नौसेनाएं पनडुब्बियों से सम्पर्क के लिए 50 किलोहर्ट्ज़ से नीचे की फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करती हैं.

प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

Sunday, July 3, 2016

संसार का पहला चिड़ियाघर किसने और कहां बनवाया था?

चिड़ियाघर से आपका आशय जीव-जन्तुओं के संग्रह से है तो कहानी ईसा पूर्व काल तक जाएगी। पुराने ज़माने में राजाओं-बादशाहों को जानवर पालने का शौक होता था। वे उनका शिकार भी करते थे और कौतुक के लिए अपने यहाँ तरह-तरह के जीव-जन्तु जमा करके भी रखते थे। खासतौर से घोड़े, हाथी, ऊँट और शेर पालना बादशाहों का शौक होता था और रुतबा बढ़ाने का ज़रिया भी। पर इसके पीछे शौक ही था, अध्ययन की कामना नहीं। आधुनिक चिड़ियाघर केवल कौतुक के लिए न होकर अध्ययन करने और उसके बारे में आम लोगों को बताने के लिए बनाए जाते हैं।

चिड़ियाघर माने प्राणि-उद्यान। यह अंग्रेजी के ज़ूओलॉजिकल गार्डन का अनुवाद है। इसी से संक्षेप में ज़ू शब्द बना जो आज सारे संसार में प्रचलित है। जीवित पशुओं को एकत्र करके रखने का उल्लेख प्राचीन सभ्यताओं में मिलता है। ईसा के 2000 साल पुरानी पहले मिस्री कब्रों के आस-पास जानवरों की हड्डियाँ मिलीं हैं। लगता है कि वे लोग अपने आस-पास पशुओं को रखते थे। प्राचीन यूनान और रोम में भी शेर, बाघ, चीतों, तेंदुओं आदि को पालने के विवरण मिलते हैं। ऑगस्टस ऑक्टेवियस के पास 410 बाघ, 260 चीते और 600 अन्य जन्तु थे। करीब 1200 साल पहले चीन के चाऊ वंश के पहले शासक ने प्राणि-उद्यान बनवाया था। ये प्राणि-उद्यान आधुनिक सन्दर्भों में प्राणि उद्यान नहीं माने जा सकते, क्योंकि उनका उद्देश्य मनोरंजन या बादशाही रसूख को कायम रखना था। ज़ूओलॉजिकल गार्डन का आधुनिक उद्देश्य पशु-पक्षियों का वैज्ञानिक अध्ययन करना है। पुराने प्राणि-उद्यानों को प्राणि-संग्रह कह सकते हैं। इसे अंग्रेजी में मैनेजेइरी कहते हैं। फ्रांस में वर्साई का प्रसिद्ध प्राणि-संग्रह इसी श्रेणी में आता है। एक ज़माना था जब पश्चिमी देशों में मनुष्यों के संग्रहालय भी बनाए गए थे। इनमें खासतौर से अफ्रीका के जंगलों में और प्रागैतिहासिक परिस्थितियों में रहने वाले इंसानों को रखा जाता था। इनके अलावा असामान्य मनुष्यों को भी इनमें रखते थे। इनमें बौने, आपस में जुड़े या अजब से लगने वाले मनुष्य होते थे। यह सब कौतुक के लिए था और अमानवीय भी। समय के साथ यह खत्म हो गया।

ऑस्ट्रिया के प्रसिद्ध शानबू्रन प्राणि-उद्यान को संसार का पहला आधुनिक ज़ू माना जाता है, पर उसे भी शुद्ध वैज्ञानिक अर्थ में ज़ू कहना उचित नहीं है। 1752 में बना यह उद्यान आज भी कायम है। वैज्ञानिक अर्थ में 1828 में स्थापित लंदन ज़ूओलॉजिकल गार्डन्स को पहला ज़ू कहना बेहतर होगा, जिसे शुद्ध वैज्ञानिक अध्ययन के लिए बनाया गया था। आम जनता के लिए यह उद्यान 1847 में खोला गया। दुनिया में आज हजार से ज्यादा प्राणि-उद्यान हैं।

अष्ट धातु क्या है?
अष्टधातु नाम से ही स्पष्ट है कि यह आठ धातुओं की बात है. इसमें आठ धातु हैं सोना, चांदी, तांबा, रांगा, जस्ता, सीसा, लोहा और पारा। सुश्रुत संहिता में केवल सात धातुओं का उल्लेख है। शायद सुश्रुत पारे को धातु नहीं मानते होंगे। बहरहाल अष्टधातु परम्परा से भारतीय संस्कृति में पवित्र माने जाते रहे हैं। हमारे यहाँ प्रतिमाओं का निर्माण अष्टधातु से किया जाता था। भारतीय फलित ज्योतिष में नवग्रहों के प्रभाव घटाने या बढ़ाने के लिए अष्टधातु की अंगूठी, कड़े आदि पहनने का विधान है।
   
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित