Thursday, March 1, 2018

श्वेत-पत्र क्या होता है?

श्वेत पत्र का मतलब होता है ऐसा दस्तावेज जिसमें सम्बद्ध विषय से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी जाती है। इस शब्द की शुरुआत ब्रिटेन से हुई है। सन 1922 में ‘चर्चिल ह्वाइट पेपर’ सम्भवतः पहला श्वेत पत्र था। यह दस्तावेज इस बात की सफाई देने के लिए था कि ब्रिटिश सरकार यहूदियों के लिए फलस्तीन में एक नया देश इसरायल बनाने के लिए 1917 की बालफोर घोषणा को किस तरह अमली जामा पहनाने जा रही है। कनाडा तथा दूसरे अन्य देशों में भी ऐसी परम्परा है। यह जारी करना परिस्थितियों पर निर्भर करता है। सन 1947 में जब कश्मीर पर पाकिस्तानी हमला हुआ था उसके बाद 1948 में भारत सरकार ने एक दस्तावेज जारी करके अपनी तरफ से पूरी स्थिति को स्पष्ट किया था। मई 2012 में भारत सरकार ने काले धन पर और हाल के वर्षों में रेलवे को लेकर श्वेत पत्र जारी किया है। इनके अलावा भी अनेक विषयों पर श्वेत पत्र जारी हुए हैं।

भारतीय विज्ञान कांग्रेस

भारतीय विज्ञान कांग्रेस या ‘भारतीय विज्ञान कांग्रेस संघ’ (Indian Science Congress Association ) भारतीय वैज्ञानिकों की शिखर शीर्ष संस्था है। इसकी स्थापना सन 1914 में कोलकाता में हुई थी। इसका मुख्यालय भी कोलकाता में है। हर साल जनवरी के पहले हफ्ते में इसका सम्मेलन होता है और प्रधानमंत्री इसका उद्घाटन करते हैं। अममून इसके आयोजन का समय और स्थान एक साल पहले तय कर लिया जाता है। एक माने में देश में नए साल का यह पहला महत्वपूर्ण आयोजन होता है। इस साल इसका 105 वाँ सम्मेलन 3 से 7 जनवरी तक उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद में होना था, जिसे स्थगित कर दिया गया। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने कैंपस में सुरक्षा कारणों से इसकी मेज़बानी करने में असमर्थता जाहिर की थी। अब यह सम्मेलन 16-21 मार्च, 2018 को मणिपुर केन्द्रीय विश्वविद्यालय, इम्फाल में होगा।

पिछले साल तिरुपति में 104वीं भारतीय साइंस कांग्रेस हुई थी। सन 2014 इसका शताब्दी-सम्मेलन कोलकाता में हुआ था। उस सम्मेलन में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रीय विज्ञान, तकनीक और नवोन्मेष की नई नीति की घोषणा भी की थी। भारत ने सन 2010 से 2020 के दशक को ‘नवोन्मेष दशक’ (Decade of Innovations) घोषित किया है।

वायु-प्रदूषण का मानक क्या है?

इसे एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) हैं। यह हवा में मौजूद प्रदूषणकारी तत्वों की मात्रा को बताता है। इसे कुछ देशों में एयर पॉल्यूशन इंडेक्स (API) और सिंगापुर में पॉल्यूटेंट स्टैंडर्ड इंडेक्स (PSI)। अलग-अलग देश अपने यहाँ वायु की शुद्धता के अलग-अलग मानक और अलग-अलग नाम रखते हैं। भारत में केंद्रीय पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड और राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों ने मिलकर देश के 240 शहरों के आँकड़ों के आधार पर ‘नेशनल एयर मॉनिटरिंग प्रोग्राम(NAMP)’ बनाया है। देशभर में इस काम के लिए 342 से ज्यादा मॉनिटरिंग स्टेशन हैं। चिकित्सकों, एयर क्वालिटी विशेषज्ञों, एडवोकेसी समूहों के प्रतिनिधियों तथा प्रदूषण बोर्डों के प्रतिनिधियों के एक विशेषज्ञ समूह ने आईआईटी कानपुर को अध्ययन का काम सौंपा। आईआईटी और विशेषज्ञ समूह ने 2014 में AQI कार्यक्रम बनाया।

पुराने मानकों में तीन पैरामीटर थे, जबकि नई अनुश्रवण प्रणाली में आठ पैरामीटर हैं। दिल्ली, मुम्बई, पुणे और अहमदाबाद में निरंतर तत्काल डेटा प्रदान करने वाली प्रणालियाँ लगाई गई हैं। वायु प्रदूषण से जुड़ी छह श्रेणियाँ बनाई गई हैं। ये हैं अच्छा (0-50), संतोषजनक (51-100), हल्का प्रदूषण (101-200), खराब (201-300), बहुत खराब (301-400) और बेहद खराब Severe (401 से 500)। AQI में आठ प्रदूषक तत्वों को शामिल किया गया है। ये हैं पीएम10, पीएम2।5, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, कार्बन डाई मोनोक्साइड, ओज़ोन, अमोनिया और लैड।


राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

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