Thursday, July 14, 2011

दुनिया में सबसे ज्यादा शादियाँ करने वाला कौन है?



दुनिया का वह कौन व्यक्ति है, जिसने सबसे ज्यादा शादियाँ की हैं?

जियोना चाना की पत्नियाँ

जियोना चाना का परिवार
इसका श्रेय भारत के ज़ियोना चाना को जाता है। मिजोरम के निवासी 64 वर्षीय जियोना चाना का परिवार 180 सदस्यों का है। उन्होंने 39 शादियाँ की हैं। इनके 94 बच्चे हैं, 14 पुत्रवधुएं और 33 नाती हैं। जियोना के पिता ने 50 शादियाँ की थीं। उसके घर में 100 से ज्यादा कमरे है और हर रोज भोजन में 30 मुर्गियाँ खर्च होती हैं। 
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ना नौ मन तेल होगा और ना राधा नाचेगी। ऐसा क्यों कहा जाता है?                                                                                                                                                                                                                                      

यह कहावत कब से चली आ रही है, बताना मुश्किल है। क्यों कहा जाता है इसे बताने वाले भी मुझे नहीं मिले। बस कहते हैं, कहा जाता है। बहरहाल एक-दो जगह मुझे कुछ कहानियाँ मिली हैं जो राधा के नाच से जुड़ती हैं। बताते हैं कि किसी गांव में राधा नाम की नाचने वाली रहती थी। एक दिन किसी बात पर नाराज होकर उसने कह दिया अब नाचना बंद। बहरहाल लोग उसे मनाने गए तो उसने एक शर्त रखी जब नौ मन तेल के दियों की रोशनी की जाएगी तभी वह नाचेगी। बताते हैं कि उस साल गाँव में सूखा पड़ा था सो नौ मन तेल होना नामुमकिन था . 

काले धन को काला धन क्यों कहा जाता है?
  
काला धन माने जो पैसा साफ-सुथरे सफेद ढंग से कमाया नहीं गया है। और जिसका हिसाब नहीं दिया गया है। काली कमाई का पैसा। सफेद पैसा वह है जिसपर टैक्स वगैरह चुकाया गया हो। It is like black hole we cant see through it.                                                                                                                                                                                                                                

शादी के बाद लड़की लड़के के घर क्यों जाती है? क्या कहीं ऐसी परम्परा है जहाँ लड़का विदा होकर लड़की के घर जाता है?         

विवाह नाम की संस्था का जन्म सभ्यता के काफी पहले हो गया लगता है। और तब से ही मनुष्य समाज पुरुष केन्द्रित है। लड़की शादी के बाद पति के घर में जाती रही है। यों मातृ प्रधान समाज का भी ज़िक्र मिलता है। कुछ जनजातीय समूहों में मातृ प्रधान व्यवस्था भी मिलती है, पर यह न तो व्यापक है और न इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं।

टाटा शब्द किस भाषा का है? बाई के साथ टाटा क्यों कहते हैं?

अंग्रेजी में विदाई के वक्त टाटा कहने का चलन है। यह शब्द बोली का है। इसका प्रचलन उन्नीसवीं सदी से हुआ है। 

दर्द तो तकलीफदेह होता है, फिर लोग दर्द को मीठा क्यों कहते हैं?

दर्द या तकलीफ आनन्द का विलोम है। दोनों का अतिरेक हृदय विदारक होता है। पर दोनों की क्षणिक या आंशिक अनुभूति मनुष्य को स्वीकार्य है। दर्द या तकलीफ एक जीवन अनुभव है। हम तकलीफ उठाकर ही कुछ हासिल करते हैं। उसमें जो आनन्द है वह सारे दर्द दूर कर देता है। दुख और दर्द भी हमारे साथी हैं। दर्द के साथ हमारे संघर्ष की स्मृतियाँ भी होती हैं, इसलिए उसे भी हम सँजोकर रखते हैं। बच्चन जी की कविता है
साथी, साथ न देगा दुख भी!

काल छीनने दु:ख आता है,
जब दु:ख भी प्रिय हो जाता है,
नहीं चाहते जब हम दु:ख के बदले चिर सुख भी!
साथी साथ ना देगा दु:ख भी!
महाभारत के पात्र कौन सी भाषा में बोलते थे?
आर्यों की पुरानी भाषा ऋग्वेद की वैदिक संस्कृत ही थी। ऋग्वेद की भी एक काल अथवा एक स्थान पर रचना नहीं हुई। कुछ मन्त्रों की रचना कन्धार में, कुछ की सिन्धु तट पर, कुछ की यमुना गंगा के तट पर हुई। ऋग्वेद के बाद ब्राह्मण ग्रन्थों और सूत्र ग्रन्थों का सृजन हुआ। शास्त्रीय संस्कृत और लो-भाषा (लौकिक) में पर्याप्त अंतर था। विद्वान् ही केवल शुद्ध संस्कृत बोल पाते होंगे, साधारण लोग जो बोली बोलते थे, शायद वही कालान्तर में प्राकृत कहलाई। भाषा के इन दोनों रूपों का उदाहरण वाल्मीकि रामायण में मिलता है, जबकि अशोक वाटिका में पवन पुत्र ने सीता से द्विजी’ (संस्कृत) भाषा में बात करके मानुषी’ (प्राकृत) भाषा में बातचीत की। महावीर स्वामी ने जैन मत के तथा महात्मा बुद्ध ने बौद्ध मत के प्रसार के लिए लोकभाषा को ही अपनी वाणी का माध्यम बनाया। भास, कालिदास आदि के नाटकों में सुशिक्षित व्यक्ति तो संस्कृत बोलते हैं, परन्तु अशिक्षित पात्र -विट-चेट विदूषक तथा दास-दासियाँ आदि प्राकृत में बात करते हैं। 
भारत में कुल कितने पोस्ट ऑफिस हैं?                                                                                                                                                                                                    
फरवरी 2010 में इनकी संख्या 1,55,333 थी। 


सलीम अनारकली की कहानी सच है या झूठी?
लाहौर में अनारकली का मकबरा

सलीम-अनारकली की कहानी इतिहास सम्मत नहीं है, पर वह इतनी लोकप्रिय है कि लोग उसे ऐतिहासिक मानते हैं। यों मान्यता है कि अनारकली पंजाब में लाहौर के आसपास की रहने वाली थी। लाहौर में अनारकली की एक मज़ार भी है। लाहौर का अनारकली बाजार शहर का सबसे पुराना बाजार है।  

Saturday, July 9, 2011

वाशिंगटन डी.सी. में डी.सी. माने क्या है?


अमरीका की राजधानी वाशिंगटन डी.सी. में डी.सी. का क्या अर्थ है?
देवराज शर्माशाहपुरा



वॉशिंगटन डीसी का अर्थ है वॉशिंगटन डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलम्बिया। अमेरिकी संविधान के अनुसार संघीय राजधानी एक अलग डिस्ट्रिक्ट के रूप में बनाई जा सकती है, जो किसी राज्य का हिस्सा न हो। यह शहर जॉर्ज वॉशिंगटन की स्मृति में बसाया गया है। अमेरिका में एक राज्य भी वॉशिंगटन है। उसका वॉशिंगटन डीसी से कोई सम्बन्ध नहीं है।



सुपरकंप्यूटर का आविष्कार कब व कहां हुआ? भारत में इसका प्रयोग कब शुरू हुआ?
राहुल पारीक, गुढ़ागौरजी, जिला झुंझुनूं


जापानी के सुपरकम्प्यूटर

सुपरकंप्यूटर उन कंप्यूटरों को कहते है जो गणना-शक्ति तथा कुछ अन्य मामलों में सबसे आगे होते हैं। अत्याधुनिक तकनीकों से लैस सुपरकंप्यूटर बहुत बड़ी और अति सूक्ष्म गणनाएं तेजी से कर सकता है। इसमें कई माइक्रोप्रोसेसर एक साथ काम करते हुए किसी भी जटिलतम समस्या का तुरंत हल निकाल लेते हैं। आधुनिक परिभाषा के अनुसार, वे कंप्यूटर, जो 500 मेगाफ्लॉप की क्षमता से कार्य कर सकते हैं, सुपर कंप्यूटर कहलाते है। सुपर कंप्यूटर एक सेकंड में एक अरब गणनाएं कर सकता है। इसकी गति को मेगा फ्लॉप से नापते है। इनका इस्तेमाल खासकर ऐसे क्षेत्रों में किया जाता है, जिनमें कुछ ही क्षणों में बड़े पैमाने पर गणनाएं करने की जरूरत पड़ती है। मसलन, मौसम संबधी अनुसंधान, नाभिकीय हथियारों, क्वांटम फिजिक्स और रासायनिक यौगिकों के अध्ययन में सुपर कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाता है।
सुपरकंप्यूटरों की शुरूआत साठ के दशक से मानी जा सकती है। अमेरिका के कंट्रोल डेटा कॉरपोरेशन के इंजीनियर सेमूर क्रे ने सबसे पहले सुपर कंप्यूटर बनाया। बाद में क्रे ने अपनी कम्पनी क्रे रिसर्च बना ली। यह कम्पनी सुपर कंप्यूटर बनाने के क्षेत्र मेंएक दौर तक सबसे आगे थी। आज भी क्रे के अलावा आईबीएम और ह्यूलेट एंड पैकर्ड इस क्षेत्र में शीर्ष कम्पनियाँ हैं। पर हाल में जापान और चीन इस मामले में काफी तेजी से आगे बढ़े हैं। पिछले साल जून में  जारी दुनिया के 500 सुपर कम्प्यूटरों की सूची में चीन का कम्प्यूटर दूसरे नम्बर पर था। पहले दस में दो चीनी कम्प्यूटर थे। जापान का एक भी कंप्यूटर इस सूची में नहीं था। जून 2011 की सूची में जापान का के कंप्यूटर सूची में सबसे ऊपर है। जापान के इस कंप्यूटर की गति 8.2 पेटाफ्लॉप है। यह एक सेकंड में आठ क्वाड्रीबिलियन गणनाएं कर सकता है। एक क्वाड्रीबिलियन का अर्थ है 1 के आगे पन्द्रह शून्य। इसे और आसानी से समझना है तो समझें कि हम जो सामान्य पीसी देखते हैं वैसे दस लाख पीसी एक साथ काम पर लगा दिए जाएं तो इस कंप्यूटर के बराबर होंगे।

1980 के अंतिम दशक में भारत को अमेरिका ने क्रे सुपर कंप्यूटर देने से इनकार कर दिया था। वह एक ऐसा दौर था, जब भारत और चीन में तकनीकी क्रांति की शुरुआत हो चुकी थी। सुपर कंप्यूटर के उपयोग से रॉकेट प्रक्षेपण, परमाणु विस्फोट के समय गणनाओं में आसानी हो जाती है, इसलिए भी अमेरिका के मन में भय था कि कहीं इसके द्वारा भारत अपने नाभिकीय ऊर्जा प्रसार कार्यक्रम को एक नया रूप न दे दे। भारतीय वैज्ञानिकों ने सी-डेक परम-8000 कंप्यूटर बनाकर अपनी क्षमताओं का एहसास करा दिया। 1988 में रूस ने भारत को सुपर कंप्यूटर देने की बात कही थी। लेकिन हार्डवेयर सही न होने के कारण रूस के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। भारत ने सुपर कंप्यूटर बनाने के बाद परम 8000 जर्मनी, यूके और रूस को दिया। दुनिया के 500 सुपरकंप्यूटरों की नवीनतम सूची में चार भारत में हैं। भारत ने टेराफ्लॉप क्षमता के सुपर कंप्यूटर बनाए हैं। अब भारत पेटा फ्लॉप क्षमता का सुपर कंप्यूटर भी बना रहा है।

तीसरी दुनिया के देश कौन-कौनसे हैं? यह नाम किस तरह पड़ा
योगेश कुमार शर्मा, लक्ष्मणगढ़


तीसरी दुनिया शीतयुद्ध के समय का शब्द है। शीतयुद्ध यानी मुख्यतः अमेरिका और रूस का 
प्रतियोगिता काल। फ्रांसीसी डेमोग्राफर, मानवविज्ञानी और इतिहासकार अल्फ्रेड सॉवी ने 14 अगस्त 1952 को पत्रिका ल ऑब्जर्वेतो में प्रकाशित एक लेख में पहली बार इस शब्द का इस्तेमाल किया था। इसका आशय उन देशों से था जो न तो कम्युनिस्ट रूस के साथ थे और न पश्चिमी पूँजीवादी खेमे के नाटो देशों के साथ थे। इस अर्थ में गुट निरपेक्ष देश तीसरी दुनिया के देश भी थे। इनमें भारत, मिस्र, युगोस्लाविया, इंडोनेशिया, मलेशिया, अफगानिस्तान समेत एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के तमाम विकासशील देश थे। यों माओत्से तुंग का भी तीसरी दुनिया का एक विचार था। पर आज तीसरी दुनिया शब्द का इस्तेमाल कम होता जा रहा है।  


क्या सांप दूध पीता है?
शिवरतन, अहमदाबाद

दूध स्तनपायी प्राणियों का भोजन है। साँप दूध पीने वाला प्राणी नहीं है। हो सकता है कभी वह दूध पर मुँह लगाता या चाटता दीख जाए, पर यह दूध पीना नहीं है। प्यास बुझाने के लिए भी वह पानी पीना पसन्द करेगा। 

राजस्थान पत्रिका में मेरे कॉलम नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Thursday, July 7, 2011

क्या आपने पुदुच्चेरी का नक्शा देखा है?

केन्द्र शासित क्षेत्र पुदुच्चेरी के यनम, काराकेल और माहे एक-दूसरे से जुड़े क्यों नहीं हैं?
अजय


पुदुच्चेरी, जिसे पहले पॉन्डिचेरी कहते थे, अपने किस्म का निराला क्षेत्र है जिसके चारों जिले एक-दूसरे से जुड़े नहीं हैं। ये जिले है:पुदुच्चेरी और कराइकल जो तमिलनाडु से घिरे हैं, यनम आन्ध्र प्रदेश में और माहे केरल मे है। पुदुच्चेरी और कराइकल इनमे से सबसे बड़े जिले हैं। पुदुच्चेरी फ्रांसीसी उपनिवेश था जिसमे चार जिले होते थे। सबसे बड़े जिले के नाम पर इसका नाम पुदुच्चेरी पड़ा। यह क्षेत्र लगभग 300 साल तक फ्रांसीसी अधिकार में रहा। आज भी यहाँ के कुछ निवासियों को फ्रांस की नागरिकता प्राप्त है। तमिल, तेलुगु, मलयालम, और फ्रांसीसी यहाँ की आधिकारिक भाषाएँ है। प्रत्येक जिले के साथ-साथ हर भाषा की स्थिति भिन्न है। विभिन्न जिलों के बीच संवाद स्थापित करने के लिए आमतौर पर अंग्रेज़ी का उपयोग किया जाता है। चूंकि इनकी सांस्कृतिक स्थिति एक सी है इसलिए इनका एक केन्द्र शासित क्षेत्र बनाया गया। देखें साथ का नक्शा


दुनिया के सबसे बड़े राष्ट्र के बारे में बताएं।
महेन्द्र जैन, बेलूर, कर्नाटक
mahenderjain5@gmail.com

सबसे बड़े राष्ट्र से आपका आशय सबसे बड़े देश से है तो इस श्रेणी में रूस सबसे बड़ा है। रूस का कुल क्षेत्र 1 करोड़ 70 लाख 98 हजार 242 वर्ग किलोमीटर है। दूसरे स्थान पर कनाडा है जिसका क्षेत्रफल 99 लाख, 46 हजार 670 वर्ग किलोमीटर है। पहले सात देशों की सूची इस प्रकार हैः-
1.रूस  1,70,98,242
2.कनाडा 99,84,670
3.संरा अमेरिका 96, 29, 091
4.चीन 95,96,961
5.ब्राजील 85,14,877
6.ऑस्ट्रेलिया 76,92,024
7.भारत 32,87,263


कैरीबियन देश कौन से हैं? ये किस महाद्वीप में हैं?
एनएम सिंगारिया, बोरवार, नागौर, 
singaria32@gmail.com


कैरीबियन सागर अटलांटिक महासागर से जुड़ा सागर है, जो उत्तरी अमरीका एवं दक्षिणी अमरीका के बीच में पूर्वी तट पर स्थित है। यह इलाका मैक्सिको की खाड़ी और उत्तरी अमेरिका के दक्षिण पूर्व में है। यहाँ करीब 7000 छोटे-छोटे द्वीप और टापू हैं। इन्हें वेस्टइंडीज़ भी कहा जाता है। यह उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में पश्चिमी गोलार्ध में आता है। इससे लगे देश कैरीबियन देश कहलाते हैं। इन देशों में से कुछ के नाम हैः- बहामास, क्यूबा, हेती, जमैका, प्यूर्तो रिको, एंटीग्वा, बरबूडा, डोमिनिका, ग्रेनाडा, ट्रिनिडाड और टुबैगो, बारबेडस, सेंट मार्टिन, वर्जिन आयलैंड्स वगैरह। 3 जनवरी 1958 से 31 मई 1962 तक यहां के दस देशों का वेस्टइंडीज़ संघ नाम से एक देश भी बना था। आज भी वेस्टइंडीज़ नाम से जो क्रिकेट टीम खेलती है वह इस इलाके के कई देशों के खिलाड़ियों को जोड़कर बनाई जाती है।

राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित मेरे कॉलम नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

जब हम डरावनी चीज़ को देखते हैं तो दिल की धड़कन क्यों बढ़ जाती है?

जब हम किसी डरावनी चीज़ को देखते हैं तो दिल की धड़कन क्यों बढ़  जाती है और रोंगटे खड़े क्यों हो जाते हैं?

हमारा मस्तिष्क एक केन्द्रीय कम्प्यूटर की तरह शरीर के सारे कार्यों को संचालित करता है। यह काम नर्वस सिस्टम के मार्फत होता है। पूरे शरीर में नाड़ियों यानी नर्व्स का का एक जाल है। मस्तिष्क से हमारी रीढ़ की हड्डी जुड़ी है, जिससे होकर धागे जैसी नाड़ियाँ शरीर के एक-एक हिस्से तक जाती हैं। मस्तिष्क से निकलने वाला संदेश शरीर के हर अंग तक जाता है। मसलन कभी आपका हाथ दुर्घटनावश जल जाय तो हाथ की त्वचा से जुड़ी नर्व्स दर्द का संदेश मस्तिष्क तक भेजती है। जवाब में मस्तिष्क मसल्स को संदेश देता है कि हाथ को खींचो। यह सब बेहद तेजी से होता है। नर्वस सिस्टम का एक हिस्सा शरीर की साँस लेने, भोजन को पचाने, पसीना निकालने, काँपने जैसी तमाम क्रियाओं का संचालन करता रहता है। आपको उसमें कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं होती है। इसे ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम कहते हैं। इस सिस्टम के दो हिस्से होते हैं। सिम्पैथेटिक और पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम। जब आप कोई डरावनी चीज़ देखते हैं तब सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम हृदट की गति को बढ़ा देता है। उसका उद्देश्य शरीर के सभी अंगों तक ज्यादा रक्त पहुँचाना होता है। साथ ही यह किडनी के ऊपर एड्रेनल ग्लैंड्स से एड्रेनालाइन हार्मोन को रिलीज़ करता है, जिससे मसल्स को अतिरिक्त शक्ति मिलती है। यह इसलिए कि या तो आपको लड़ना है या भागना है। दोनों काम के लिए फौरी ऊर्जा मिल सके। इसके अलावा शरीर की मसल्स शरीर के रोयों को उत्तेजित करती है ताकि शरीर में गर्मी आए। यह काम सर्दी लगने पर भी होता है।

भानगढ़ को देश की सबसे डरावनी जगह क्यों कहते हैं?



भानगढ़ राजस्थान के अलवर जिले का एक शहर है जहाँ अब सिर्फ ऐतिहासिक खंडहर हैं। यहाँ कोई नहीं रहता। इसके मुख्य द्वार पर भारत के पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से एक बोर्ड लगा है कि इस जगह पर सूर्योदय के पहले और सूर्यास्त के बाद रुकना प्रतिबंधित है। इसका कारण यह है कि आबादी न होने के कारण यहाँ जंगली जानवरों का खतरा है। किंवदंतियाँ इसे भुतहा शहर बताती हैं। भानगढ़ का किला आमेर के राजा भगवंत दास ने 1573 में बनवाया था। भगवंत दास के छोटे बेटे और  मुगल  शहंशाह  अकबर  के नवरत्नों में शामिल मानसिंह के भाई माधो सिंह ने बाद में इसे अपनी रिहाइश बना लिया। मुगलों के कमज़ोर पड़ने पर 1720 में आमेर के राजा सवाई जयसिंह  ने भानगढ़ पर कब्जा कर लिया। इस समूचे इलाके में पानी की कमी तो थी ही 1783 के अकाल में यह किला पूरी तरह उजड़ गया। किले के अंदर की इमारतों में से किसी की भी छत नहीं बची है। लेकिन इसके मंदिर लगभग पूरी तरह सलामत हैं। इन मंदिरों की दीवारों और खंभों पर की गई नफीस नक्काशी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह समूचा किला कितना खूबसूरत और भव्य रहा होगा।
भानगढ़ के बारे में जो किस्से सुने जाते हैं उनके मुताबिक इस इलाके में सिंघिया नाम का एक तांत्रिक रहता था। उसका दिल भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती पर आ गया। एक दिन तांत्रिक ने राजकुमारी की एक दासी को बाजार में इत्र खरीदते देखा। सिंघिया ने इत्र पर टोटका कर दिया ताकि राजकुमारी उसे लगाते ही तांत्रिक की ओर खिंची चली आए। लेकिन रत्नावली को इसका पता लग गया। उसने शीशी एक  चट्टान पर दे मारी। चट्टान को ही तांत्रिक से प्रेम हो गया और वह सिंघिया की ओर लुढकने लगी। चट्टान के नीचे कुचल कर मरने से पहले तांत्रिक ने शाप दिया कि मंदिरों को छोड़ कर समूचा किला जमींदोज हो जाएगा और राजकुमारी समेत भानगढ़ के सभी बाशिंदे मारे जाएंगे। आसपास के गांवों के लोग मानते हैं कि सिंघिया के शाप की वजह से ही किले के अंदर की सभी इमारतें रातोंरात ध्वस्त हो गईं। उनका विश्वास है कि रत्नावती और भानगढ़ के बाकी निवासियों की रूहें अब भी किले में भटकती हैं और रात के वक्त इन खंडहरों में जाने की जुर्रत करने वाला कभी वापस नहीं आता।
CUT 2...

दुनिया में सबसे पहले कपड़े किसने पहने?

पुरातत्ववेत्ताओं और मानवविज्ञानियों के अनुसार सबसे पहले परिधान के रूप में पत्तियों, घास-फूस, जानवरों की खाल और चमड़े का इस्तेमाल हुआ था। दिक्कत यह है कि इस प्रकार की पुरातत्व सामग्री मिलती नहीं है। पत्थर, हड्डियाँ और धातुओं के अवशेष मिल जाते हैं, जिनसे निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं, पर परिधान बचे नहीं हैं। पुरातत्ववेत्ताओं को रूस की गुफाओं में हड्डियों और हाथी दांत से बनी सिलाई करने वाली सूइयाँ मिली हैं, जो तकरीबन 30,000 साल ईपू की हैं। मानव विज्ञानियों ने कपड़ों में मिलने वाली जुओं का जेनेटिक विश्लेषण भी किया है, जिसके अनुसार इंसान ने करीब एक लाख सात हजार साल पहले परिधान पहनना शुरू किया होगा। इसकी ज़रूरत इसलिए हुई होगी क्योंकि अफ्रीका के गर्म इलाकों से उत्तर की ओर गए इंसान को सर्द इलाकों में बदन ढकने की ज़रूरत हुई होगी। कुछ वैज्ञानिक परिधानों का इतिहास पाँच लाख साल पीछे तक ले जाते हैं। बहरहाल अभी स विषय पर अनुसंधान चल ही रहा है।

.ओके माने क्या?

ओके बोलचाल की अंग्रेजी का शब्द है। इसका मतलब है स्वीकृति, पर्याप्त, ठीक-ठाक वगैरह। यह संज्ञा और क्रिया दोनों रूपों में इस्तेमाल होता है। क्या यह ओके है? गाड़ी ओके है? बॉस ने ओके कर दिया वगैरह। मोटे तौर पर ऑल करेक्ट माने ओके।

पिंक सिटी कहाँ है और क्यों है?

जयपुर को पिंक सिटी यानी गुलाबी शहर कहते हैं। जयपुर की स्थापना 1727 में महाराज सवाई जयसिंह द्वितीय ने की थी। उनकी राजधानी पहले आमेर में थी, जहाँ पानी की किल्लत थी और जनसंख्या बढ़ रही थी। इस शहर की स्थापना ऐसे दौर में हुई जब भारत में नगर नियोजन एक नया विषय रहा होगा। इसकी स्थापना में ज्यामित्य सूत्र और गणित की कसौटी का ध्यान रखा गया था। लेकिन शुरू में यह शहर गुलाबी नहीं था। इसे गुलाबी रंग मिला सवाई रामसिंह द्वितीय के शासन काल में। इंग्लैंड के प्रिंस ऑफ वेल्स के स्वागत में 1853 में शहर को गुलाबी रंग से रंगा गया।

राष्ट्रपति भवन और संसद भवन कब बनाए गए?

सन 1911 में घोषणा की गई कि भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली ले जाई जाएगी। मशहूर ब्रिटिश आर्किटेक्ट सर एडविन लैंडसीयर लुट्यन्स ने दिल्ली की ज्यादातर नई इमारतों की रूपरेखा तैयार की। इसके लिए उन्होंने सर हरबर्ट बेकर की मदद ली। जिसे आज हम राष्ट्रपति भवन कहते हैं उसे तब वाइसरॉयस हाउस कहा जाता था। इसके नक्शे 1912 में बन गए थे, पर यह बिल्डिंग 1931 में पूरी हो पाई। संसद भवन की इमारत 1927 में तैयार हुई।

अरबी भाषा में नमस्कार के लिए क्या बोला जाता है?

सबसे ज्यादा प्रचलित शब्द है मरहबा।

उन संगीत निर्देशकों के नाम जिन्होंने जोड़ी में काम किया?

Sहुस्नलाल-भगतराम, शंकर-जयकिशन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, कल्याणजी-आनन्दजी, नदीम-श्रवण, सोनिक-ओमी, शिव-हरि, आनन्द-मिलिन्द, जतिन-ललित, विशाल-शेखर, दिलीप सेन-समीर सेन, सपन-जगमोहन, बसु-मनोहारी, शंकर-एहसान,लॉय (शंकर महादेवन, एहसान नूरानी और लॉय मेंडोंसा) की तिकड़ी। 

एफएम गोल्ड से प्रसारित मेरे कार्यक्रम बारिश सवालों की के अंश 

Sunday, July 3, 2011

पृथ्वी की तरह क्या कहीं और भी जीवन सम्भव है?




पृथ्वी की तरह क्या कहीं और भी जीवन सम्भव है? क्या वहाँ प्राणी रहते हैं?
दीपक जैन, बनी पार्क, जयपुर

वैज्ञानिकों को अभी तक कोई ऐसा प्रमाण नहीं मिला जिसके आधार पर दावे के साथ कहा जा सके कि पृथ्वी के बाहर अंतरिक्ष में कहीं जीवन है। यहाँ जीवन का अर्थ किसी भी प्रकार के जीवन से है। यानी पूर्ण विकसित प्राणी ही नहीं किसी भी प्रकार की वनस्पति, काई, कीड़े, बैक्टीरिया या कुछ भी। इसके बावजूद दावे के साथ नहीं कहा जा सकता कि जीवन नहीं है। सच यह है कि अंतरिक्ष में बुद्धिमान प्राणी की तलाश वैज्ञानिकों की दिलचस्पी का सबसे बड़ा विषय है।

सन 1959 में दो अमेरिकी वैज्ञानिकों जी कोकनी और पी मॉरीसन ने अपने पेपर में इस बात को रेखांकित किया कि अंतरिक्ष में हमें सभ्यता की तलाश में माइक्रोवेव स्पेक्ट्रम का सहारा लेना चाहिए। अंतरिक्ष में कोई बुद्धिमान प्राणी हुआ तो रेडियो संकेत भी भेजता होगा। सन 1961 में फ्रैंक ड्रेक नाम के वैज्ञानिक ने प्राप्त तथ्यों के आधार पर अनुमान लगाया कि हमारी आकाशगंगा में ही करीब 10,000 ग्रहों में जीवन सम्भव है। इसे ड्रेक समीकरण कहते हैं। उस समीकरण के 40 साल बाद सन 2001 में ड्रेक की पद्धति में और सुधार करके फिर समीकरण बनाया तो कहा कि हजारों नहीं लाखों ग्रहों में जीवन सम्भव है।

दुनिया के वैज्ञानिकों ने इस मामले में मिलकर काम करने का निश्चय किया है। 1961 में एक सम्मेलन हुआ जिसमें सेटी(सर्च फॉर एक्स्ट्रा टेरेस्टीरियल इंटेलिजेंस) नाम से काम शुरू करने का निश्चय हुआ। फ्रैंक ड्रेक इसके प्रमुख सूत्रधार थे। इस काम में रूस और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने मिलकर काम शुरू किया। अमेरिकी वैज्ञानिक कार्ल सागां और रूसी वैज्ञानिक आयसिफ श्क्लोवस्की ने मिलकर एक किताब भी लिखी। सेटी के बारे में और जानना चाहते हैं तो उसकी वैबसाइट
http://www.seti.org पर जाकर देखें।

अमेरिका की मशहूर विज्ञान पत्रिका न्यू साइंटिस्ट ने सितम्बर 2006 के अंक में दस ऐसी बातें गिनाई जो इशारा करती हैं कि खोज जारी रखें तो अंतरिक्ष में जीवन होने के पक्के सबूत भी मिल जाएंगे।



सूर्य की परिक्रमा करते समय पृथ्वी का परिक्रमा पथ पूरी तरह गोल न होकर अंडाकार क्यों है?
सपना पालीवाल, बेदला, उदयपुर


अंतरिक्ष में पूरी तरह वृत्ताकार कक्षा कहीं नहीं मिलती। पूरी तरह वृत्ताकार न तो ग्रह होते हैं और न नक्षत्र। साथ ही तमाम अंतिरिक्षीय पिंड एक-दूसरे की गुरुत्व शक्ति से प्रभावित होते हैं। पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी पूरी परिक्रमा के दौरान घटती-बढ़ती रहती है। दोनों के बीच न्यूनतम दूरी 14 करोड़ 71 लाख66 हजार462 किमी जिसे रविनीच या पेरिहेलियोन कहते हैं। अधिकतम दूरी 15,21,71,522 किमी होती है, जिसे अफेलियोन या सूर्योच्च कहते हैं।

पृथ्वी गोल क्यो होती है?

गोल नहीं होती तो ऐसा होता

और यह पूरी तरह गोल भी नहीं है
इसकी वजह गुरुत्व शक्ति है। धरती की संहिता इतनी ज्यादा है कि वह वह अपने आसपास की सारी चीजों को अपने केन्द्र की ओर खींचती है। यह केन्द्र चौकोर नहीं गोलाकार ही हो सकता है। इसलिए उसकी बाहरी सतह से जुड़ी चीजें गोलाकार हैं। इतना होने के बावजूद पृथ्वी पूरी तरह गोलाकार नहीं है। उसमें पहाड़ ऊँचे हैं और सागर गहरे। दोनों ध्रुवों पर पृथ्वी कुछ दबी हुई और भूमध्य रेखा के आसपास कुछ उभरी हुई है। 


बीज क्योँ अकुंरित होता है?
सिल्की बजाज,

अंकुरण वह प्रक्रिया है जिसमें कोई पौधा अपने बीज या बीजाणु से विकसित होता है। इसके बाद वह आगे बढ़ता है। वस्तुतः जिस तरह अन्य जीव भ्रूण से अपने पूर्ण रूप में विकसित होते हैं उसी तरह वनस्पतियों का विकास भी होता है। सभी बीजों में एक कवर के भीतर भ्रूण और कुछ भोजन सामग्री होती है। कुछ वनस्पतियाँ ऐसे बीज भी तैयार करतीं हैं, जिनमें भ्रूण नहीं होते। उनमें अंकुरण भी नहीं होता। बीजों का अंकुरण कई बार आंतरिक और बाहरी परिस्थतियों पर निर्भर करता है। बाहरी कारणों में तापमान, नमी, ऑक्सीजन और अंधेरा भी हो सकता है। इससे इनकी कोशिकीय रचना चलने लगती है।

स्टेपल वीजा  क्या होता है ?
आशुतोष चतुर्वेदी , शास्त्री नगर  जयपुर
वीज़ा किसी देश द्वारा दूसरे देश के नागरिकों को अपने देश में प्रवेश की अनुमति देने का पत्र है। आमतौर पर वीज़ा व्यक्ति के पासपोर्ट पर लगाया जाता है। पर पिछले दिनों चीन ने भारतीय कश्मीर के कुछ निवासियों को उनका वीज़ा बजाय पासपोर्ट पर दर्ज करने के एक अन्य कागज पर जारी किया। इसे स्टैपल या नत्थी वीज़ा कहा गया।


अमेरिका और युनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका में क्या फर्क है?
रमज़ान सुलेमानी, सूरतगढ़

अमेरिका एक महाद्वीप का नाम है जो दो बड़े उप महाद्वीपों में बँटा है। एक है उत्तरी अमेरिका और दूसरा दक्षिणी अमेरिका। अमेरिकी महाद्वीप में अनेक देश हैं। उनमें एक है युनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका। यह उत्तरी अमेरिका में है। अक्सर हम यूएसए और अमेरिका को एक मान लेते हैं।

 राजस्थान पत्रिका में मेरे पाक्षिक कॉलम नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित
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