Sunday, July 3, 2011

पृथ्वी की तरह क्या कहीं और भी जीवन सम्भव है?




पृथ्वी की तरह क्या कहीं और भी जीवन सम्भव है? क्या वहाँ प्राणी रहते हैं?
दीपक जैन, बनी पार्क, जयपुर

वैज्ञानिकों को अभी तक कोई ऐसा प्रमाण नहीं मिला जिसके आधार पर दावे के साथ कहा जा सके कि पृथ्वी के बाहर अंतरिक्ष में कहीं जीवन है। यहाँ जीवन का अर्थ किसी भी प्रकार के जीवन से है। यानी पूर्ण विकसित प्राणी ही नहीं किसी भी प्रकार की वनस्पति, काई, कीड़े, बैक्टीरिया या कुछ भी। इसके बावजूद दावे के साथ नहीं कहा जा सकता कि जीवन नहीं है। सच यह है कि अंतरिक्ष में बुद्धिमान प्राणी की तलाश वैज्ञानिकों की दिलचस्पी का सबसे बड़ा विषय है।

सन 1959 में दो अमेरिकी वैज्ञानिकों जी कोकनी और पी मॉरीसन ने अपने पेपर में इस बात को रेखांकित किया कि अंतरिक्ष में हमें सभ्यता की तलाश में माइक्रोवेव स्पेक्ट्रम का सहारा लेना चाहिए। अंतरिक्ष में कोई बुद्धिमान प्राणी हुआ तो रेडियो संकेत भी भेजता होगा। सन 1961 में फ्रैंक ड्रेक नाम के वैज्ञानिक ने प्राप्त तथ्यों के आधार पर अनुमान लगाया कि हमारी आकाशगंगा में ही करीब 10,000 ग्रहों में जीवन सम्भव है। इसे ड्रेक समीकरण कहते हैं। उस समीकरण के 40 साल बाद सन 2001 में ड्रेक की पद्धति में और सुधार करके फिर समीकरण बनाया तो कहा कि हजारों नहीं लाखों ग्रहों में जीवन सम्भव है।

दुनिया के वैज्ञानिकों ने इस मामले में मिलकर काम करने का निश्चय किया है। 1961 में एक सम्मेलन हुआ जिसमें सेटी(सर्च फॉर एक्स्ट्रा टेरेस्टीरियल इंटेलिजेंस) नाम से काम शुरू करने का निश्चय हुआ। फ्रैंक ड्रेक इसके प्रमुख सूत्रधार थे। इस काम में रूस और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने मिलकर काम शुरू किया। अमेरिकी वैज्ञानिक कार्ल सागां और रूसी वैज्ञानिक आयसिफ श्क्लोवस्की ने मिलकर एक किताब भी लिखी। सेटी के बारे में और जानना चाहते हैं तो उसकी वैबसाइट
http://www.seti.org पर जाकर देखें।

अमेरिका की मशहूर विज्ञान पत्रिका न्यू साइंटिस्ट ने सितम्बर 2006 के अंक में दस ऐसी बातें गिनाई जो इशारा करती हैं कि खोज जारी रखें तो अंतरिक्ष में जीवन होने के पक्के सबूत भी मिल जाएंगे।



सूर्य की परिक्रमा करते समय पृथ्वी का परिक्रमा पथ पूरी तरह गोल न होकर अंडाकार क्यों है?
सपना पालीवाल, बेदला, उदयपुर


अंतरिक्ष में पूरी तरह वृत्ताकार कक्षा कहीं नहीं मिलती। पूरी तरह वृत्ताकार न तो ग्रह होते हैं और न नक्षत्र। साथ ही तमाम अंतिरिक्षीय पिंड एक-दूसरे की गुरुत्व शक्ति से प्रभावित होते हैं। पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी पूरी परिक्रमा के दौरान घटती-बढ़ती रहती है। दोनों के बीच न्यूनतम दूरी 14 करोड़ 71 लाख66 हजार462 किमी जिसे रविनीच या पेरिहेलियोन कहते हैं। अधिकतम दूरी 15,21,71,522 किमी होती है, जिसे अफेलियोन या सूर्योच्च कहते हैं।

पृथ्वी गोल क्यो होती है?

गोल नहीं होती तो ऐसा होता

और यह पूरी तरह गोल भी नहीं है
इसकी वजह गुरुत्व शक्ति है। धरती की संहिता इतनी ज्यादा है कि वह वह अपने आसपास की सारी चीजों को अपने केन्द्र की ओर खींचती है। यह केन्द्र चौकोर नहीं गोलाकार ही हो सकता है। इसलिए उसकी बाहरी सतह से जुड़ी चीजें गोलाकार हैं। इतना होने के बावजूद पृथ्वी पूरी तरह गोलाकार नहीं है। उसमें पहाड़ ऊँचे हैं और सागर गहरे। दोनों ध्रुवों पर पृथ्वी कुछ दबी हुई और भूमध्य रेखा के आसपास कुछ उभरी हुई है। 


बीज क्योँ अकुंरित होता है?
सिल्की बजाज,

अंकुरण वह प्रक्रिया है जिसमें कोई पौधा अपने बीज या बीजाणु से विकसित होता है। इसके बाद वह आगे बढ़ता है। वस्तुतः जिस तरह अन्य जीव भ्रूण से अपने पूर्ण रूप में विकसित होते हैं उसी तरह वनस्पतियों का विकास भी होता है। सभी बीजों में एक कवर के भीतर भ्रूण और कुछ भोजन सामग्री होती है। कुछ वनस्पतियाँ ऐसे बीज भी तैयार करतीं हैं, जिनमें भ्रूण नहीं होते। उनमें अंकुरण भी नहीं होता। बीजों का अंकुरण कई बार आंतरिक और बाहरी परिस्थतियों पर निर्भर करता है। बाहरी कारणों में तापमान, नमी, ऑक्सीजन और अंधेरा भी हो सकता है। इससे इनकी कोशिकीय रचना चलने लगती है।

स्टेपल वीजा  क्या होता है ?
आशुतोष चतुर्वेदी , शास्त्री नगर  जयपुर
वीज़ा किसी देश द्वारा दूसरे देश के नागरिकों को अपने देश में प्रवेश की अनुमति देने का पत्र है। आमतौर पर वीज़ा व्यक्ति के पासपोर्ट पर लगाया जाता है। पर पिछले दिनों चीन ने भारतीय कश्मीर के कुछ निवासियों को उनका वीज़ा बजाय पासपोर्ट पर दर्ज करने के एक अन्य कागज पर जारी किया। इसे स्टैपल या नत्थी वीज़ा कहा गया।


अमेरिका और युनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका में क्या फर्क है?
रमज़ान सुलेमानी, सूरतगढ़

अमेरिका एक महाद्वीप का नाम है जो दो बड़े उप महाद्वीपों में बँटा है। एक है उत्तरी अमेरिका और दूसरा दक्षिणी अमेरिका। अमेरिकी महाद्वीप में अनेक देश हैं। उनमें एक है युनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका। यह उत्तरी अमेरिका में है। अक्सर हम यूएसए और अमेरिका को एक मान लेते हैं।

 राजस्थान पत्रिका में मेरे पाक्षिक कॉलम नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

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