Sunday, August 18, 2024

स्पेस से वापस कैसे आएंगी सुनीता विलियम्स?

अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर अंतरिक्ष में फँसे गए हैं। उनकी वापसी शायद फरवरी 2025 में हो पाएगी। बोइंग के स्टारलाइनर यान को नासा का सर्टिफिकेट हासिल करने के इरादे से 5 जून को इसे रवाना किया गया था। 13 जून को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) से इसकी डॉकिंग हो गई, पर कुछ खराबियों के कारण इसकी सुरक्षित वापसी लेकर संदेह पैदा होने लगे। इन्हें वापस लाने के लिए बोइंग के प्रतिस्पर्धी स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्स्यूल का इस्तेमाल करने का विचार नासा कर रहा है। हालांकि बोइंग का कहना है कि उनके यान के दोष ठीक हो गए हैं, पर नासा का संशय बाकी है। आप सोचेंगे कि वे कहाँ रहेंगे? जवाब है स्पेस स्टेशन में। दुनिया में अबतक 11 स्पेस स्टेशनों का निर्माण हुआ है, पर इस वक्त केवल दो स्टेशन कार्यरत हैं। एक आईएसएस और दूसरा चीन का तियोंगयांग-2। आईएसएस का परिचालन नासा की अगुवाई में 16 देशों का ग्रुप करता है। इसमें सात यात्री रह सकते हैं। भारत ने भी 2035 तक एक स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई है। उसमें तीन से छह तक यात्री रह सकेंगे।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 17 अगस्त, 2024 को प्रकाशित

 

Saturday, August 10, 2024

वीडियो रेफरल यानी थर्ड अंपायर

खेलों में पहले रेफरी या अंपायर नहीं होते थे। सबसे पहले फुटबॉल में रेफरी बने। पहले टीमों के कप्तान मिलकर तय कर लेते थे कि गोल हुआ या नहीं। अब सभी खेलों में वीडियो रेफरल का चलन बढ़ रहा है और अंपायर के फैसलों को चुनौती देने की व्यवस्था भी है। फुटबॉल में इसे 2018 में मान्यता मिली, पर क्रिकेट और हॉकी में इसने पहले जगह बना ली थी। साठ के दशक में टीवी प्रसारण में ‘इंस्टेंट रिप्ले’ होते थे। इसी रिप्ले के सहारे क्रिकेट में थर्ड अंपायर की शुरुआत नवंबर 1992 में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच डरबन टेस्ट मैच में हुई। मैच के दूसरे दिन थर्ड अंपायर के फैसले से सचिन तेंदुलकर रन आउट हुए थे। फिर डीआरएस (डिसीज़न रिव्यू सिस्टम) की ईज़ाद हुई और 2008 में भारत-श्रीलंका टेस्ट मैच में इसका परीक्षण हुआ। 23-26 जुलाई के बीच खेले गए टेस्ट मैच में वीरेंद्र सहवाग इस सिस्टम के तहत आउट पहले खिलाड़ी थे। नवंबर 2009 में ड्यूनेडिन में न्यूज़ीलैंड-पाकिस्तान टेस्ट में आधिकारिक रूप से इसे लागू किया गया। जनवरी 2011 में इंग्लैंड की टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर गई, तब पहली बार एकदिनी मैचों में और 2017 में टी-20 में इसकी अनुमति मिली। इसमें तकनीकी सुधार होते गए और हो रहे हैं।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 10 अगस्त, 2024 को प्रकाशित

 

Saturday, August 3, 2024

ओलिंपिक खेलों में महिलाओं का मुश्किल सफर

ओलिंपिक खेलों में महिलाएं धूम मचा रही हैं, पर यह सफर आसान नहीं रहा है। दुनिया के दूसरे मसलों की तरह खेल-कूद को भी केवल पुरुषों तक ही सीमित रखा गया था। 1996 में आधुनिक ओलिंपिक पुरुषों के उत्सव के रूप में ही शुरू हुए थे। स्त्रियों को नाजुक मानकर शामिल नहीं किया गया। बावजूद इसके यूनान की महिला स्तामाता रेविती ने मैराथन दौड़ में शामिल होने का फैसला किया, पर उसे अनुमति नहीं मिली। शहर के बुजुर्ग धर्मगुरु ने पुरुष खिलाड़ियों को आशीर्वाद दिया, रेविती को नहीं। बावजूद इसके दौड़ के अगले दिन उसने अकेले साढ़े पाँच घंटे में दौड़ पूरी की, पर उसे स्टेडियम के अंदर जाने नहीं दिया गया। बहरहाल 1900 के पेरिस ओलिंपिक में महिलाओं को भी भाग लेने की अनुमति मिली, पर उनके लिए केवल गोल्फ और टेनिस, दो खेल स्पर्धाएं हुईं। 1904 में, तीरंदाजी की अनुमति भी मिली। महिलाओं का समर्थन करने वाला पहला अंतरराष्ट्रीय तैराकी महासंघ था, जिसने 1912 के खेलों में तैराकी में महिलाओं को शामिल करने के लिए मतदान किया। एक बड़ी भूमिका फ्रांसीसी महिला एलिस मिलियात ने अदा की, जिन्होंने 1919 में फ्रांसीसी महिला खेल संघ और 1921 में अंतरराष्ट्रीय महिला खेल महासंघ बनाए और अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति पर दबाव डाला। 1922 से 1934 तक महिला ओलिंपियाड आयोजित किए गए। यह क्रम जारी रहा और 1997 में ओलिंपिक महासंघ के चार्टर में महिलाओं को बढ़ावा देने की बात भी शामिल हो गई।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 3 अगस्त, 2024 को प्रकाशित

Saturday, July 27, 2024

अमेरिकी संसद के चुनाव

 

अमेरिका में इस साल राष्ट्रपति-चुनाव है, साथ ही संसद के चुनाव भी होंगे, जिसके दो सदन हैं-हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट। 50 राज्यों के 435 जिलों से 435 सदस्य चुनकर आएंगे, जिनसे 119वें हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव का गठन होगा। यह सदन 3 जनवरी 2025 से 3 जनवरी 2027 तक काम करेगा। देश का उच्च सदन है सीनेट, जिसमें 50 राज्यों से 100 सदस्य आते हैं। हरेक राज्य को चाहे वह छोटा हो या बड़ा, दो-दो सदस्यों के रूप में बराबर का प्रतिनिधित्व मिलता है। सीनेट के अधिकार भी ज्यादा होते हैं। वर्तमान समय में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में रिपब्लिकन पार्टी का, 213 के मुकाबले 218 का क्षीण बहुमत है। दूसरी तरफ सीनेट में डेमोक्रेट्स का 51-49 से बहुमत है। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव का कार्यकाल दो वर्ष का और सीनेटरों का छह वर्ष का होता है। चक्रीय व्यवस्था के तहत हरेक दो साल में सदन के 100 सदस्यों में से एक तिहाई नए आते हैं। इसबार 33 सदस्यों का चुनाव होगा, जो छह साल के लिए चुने जाएंगे। इनके अलावा 11 राज्यों और दो टेरिटरीज़ के गवर्नरों, शहरों के मेयरों तथा कई राज्यों तथा स्थानीय निकायों के चुनाव होंगे।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Saturday, July 20, 2024

दुनिया में महिला-शासक

भारत के बाद दुनिया के दूसरे सबसे बड़े लोकतंत्र अमेरिका  की स्थापना के 248 साल बाद तक एक भी महिला राष्ट्रपति पद पर आसीन नहीं हो सकी है। युनाइटेड किंगडम में केवल तीन महिलाएं प्रधानमंत्री पद पर रही हैं। बेहतर हैं दक्षिण एशिया के देश जहाँ दुनिया की पहली महिला प्रधानमंत्री सिरिमावो भंडारनायके बनीं। उनके बाद इंदिरा गांधी, बेनज़ीर भुट्टो, शेख हसीना और खालिदा जिया प्रधानमंत्री पद पर रहीं। म्यांमार में ऑन्ग सान सू ची भी अपने देश की प्रधानमंत्री रहीं। भारत में प्रतिभा पाटिल और द्रौपदी मुर्मू के अलावा नेपाल में विद्या देवी भंडारी ने राष्ट्रपति पद को सुशोभित किया। महिला राजनीतिक नेताओं के बारे में 2024 के संयुक्त राष्ट्र डेटा के अनुसार दुनिया के 113 देशों में एकबार भी महिला शासनाध्यक्ष या राष्ट्राध्यक्ष पद पर आसीन नहीं हुई हैं। इस समय केवल 11 देशों का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। केवल 23 प्रतिशत मंत्रिपद स्त्रियों के पास हैं। 1 जनवरी 2024 तक के डेटा के अनुसार 141 देशों में कैबिनेट मंत्रियों के पद पर एक तिहाई से कम स्त्रियाँ हैं और सात देशों की कैबिनेट में एक भी महिला मंत्री नहीं है।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 20 जुलाई, 2024 को प्रकाशित

Saturday, July 13, 2024

जहाँ रविवार को छुट्टी नहीं होती

पिछले दिनों चुनाव-प्रचार के दौरान एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत में रविवार की छुट्टी की जड़ें ब्रिटिश औपनिवेशिक काल से जुड़ी हैं। रविवार की छुट्टी मूलतः ईसाई परंपरा है। माना जाता है कि ईसाई धर्म को स्वीकार करने वाले रोम के पहले राजा कान्स्टेंटाइन ने 7 मार्च, 321 को आदेश दिया था कि रविवार को सार्वजनिक अवकाश रहेगा, ताकि लोग चर्च जाएं। दुनिया के काफी देशों में रविवार को छुट्टी होती है, पर सभी में नहीं होती। हमारे पड़ोस में नेपाल है, जहाँ शनिवार को साप्ताहिक छुट्टी होती है। बड़ी संख्या में इस्लामिक देशों में शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश होता है, जिनमें- बांग्लादेश, यमन, सीरिया, सऊदी अरब, कुवैत, ईरान, अफगानिस्तान, इराक, मालदीव, कतर, अल्जीरिया, सूडान, लीबिया, मिस्र, ओमान, बहरीन शामिल हैं। यहूदियों के देश इसराइल में शुक्र-शनि को साप्ताहिक अवकाश होता है। पाकिस्तान, मोरक्को, ट्यूनीशिया, लेबनॉन और सेनेगल जैसे इस्लामिक देशों में रविवार को ही अवकाश होता है। संयुक्त अरब अमीरात में, पहले शुक्रवार को होता था, पर 2022 के बाद से शनिवार और रविवार को होने लगा है, ताकि शेष विश्व के साथ उसके बाजारों का संपर्क बना रहे।  

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 13 जुलाई, 2024 को प्रकाशित

Saturday, July 6, 2024

भारत में ईवीएम

चुनाव आयोग ने पहली बार 1977 में इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया से ईवीएम का प्रोटोटाइप बनाने के लिए कहा। 1980 में राजनीतिक दलों को प्रोटोटाइप दिखाया गया और लगभग सभी ने उसे पसंद किया। बीईएल को ईवीएम बनाने का जिम्मा दिया गया और इसका पहला प्रयोगात्मक इस्तेमाल 1982 में केरल के पारावुर विधानसभा चुनाव में हुआ। जन प्रतिनिधित्व कानून-1951 के तहत चुनाव में केवल बैलट पेपर का इस्तेमाल हो सकता था। पारावुर के कुल 84 पोलिंग स्टेशनों में से 50 पर ईवीएम का इस्तेमाल हुआ, पर परिणाम को लेकर विवाद हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने बैलट पेपर से चुनाव कराने का आदेश दिया। फैसले के बाद आयोग ने ईवीएम का इस्तेमाल बंद कर दिया। 1988 में कानून में संशोधन करके ईवीएम को कानूनी बनाया गया। मशीनों का पहला प्रयोगात्मक इस्तेमाल नवंबर 1998 में 16 विधान सभा क्षेत्रों में हुआ। 2004 के लोकसभा चुनाव में पूरी तरह से ईवीएम का इस्तेमाल हुआ। उस चुनाव के बाद यूपीए सरकार बनी। 2009 में भी यूपीए की जीत के बाद भाजपा के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने ईवीएम का विरोध किया था। अब दूसरे दल कर रहे हैं।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 6 जुलाई, 2024 को प्रकाशित

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