Thursday, December 10, 2015

गिरगिट रंग कैसे बदलता है?

केवल गिरगिट की बात ही नहीं है, तमाम तरह के प्राणियों को प्रकृति ने आत्मरक्षा में अपने रंग-रूप को बदलने की सामर्थ्य दी है. गिरगिट जिस परिवेश में रहते हैं उनका रंग उसी से मिलता जुलता होता है ताकि वे दूर से नज़र न आएं. यह उनकी प्रणय शैली भी है, अपने साथी को आकर्षित करने के लिए वे रंग बदलते हैं. उनकी ऊपरी त्वचा पारदर्शी होती है जिसके नीचे विशेष कोशिकाओं की परतें होती है जिन्हें क्रोमैटोफोर कहा जाता है. इनकी बाहरी परत में पीले और लाल सेलों की होती है. निचली छेद होते हैं, जिनसे गुज़रने वाली रोशनी नीले रंग की रचना करती है. ऊपरी रंगत पीली हो दोनों रंग मिलकर हरे हो जाते हैं. सबसे आखिरी परत मेलनोफोर से बनी होती है. इसमें मेलनिन नामक तत्व होता है. जब मेलनोफोर सेल सक्रिय होते हैं, तब गिरगिट नीले और पीले रंग के मिश्रण से हरा दिखाई देता है या नीले और लाल रंग का मिश्रण दिखाई देता है. जब गिरगिट गुस्से में होता है तो काले कण उभर आते हैं और गिरगिट गहरा भूरा  दिखाई देता है. तितलियों का भी रंग बदलता है, लेकिन वह हल्के से गहरे या फिर गहरे से हल्के रंगों में ही परिवर्तित होता है, जबकि गिरगिट के कई रंग होते हैं. इनके मस्तिष्क को जैसे ही खतरे का संदेश जाता है, इनका दिमाग उन कोशिकाओं को संकेत भेजता है और यह कोशिकाएं इसी के अनुरूप फैलने व सिकुड़ने लगती हैं और गिरगिट का रंग बदल जाता है.

ऑप्टिकल फाइबर क्या है? सूचना प्रौद्योगिकी में इसकी क्या भूमिका है?

ऑप्टिकल फाइबर इंसान के बाल जैसा महीन एक पारदर्शी फाइबर या धागा है, जो ग्लास(सिलिका) या प्लास्टिक से बनता है. इसका इस्तेमाल प्रकाश को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना होता है. इसे वैवगाइड या लाइट पाइप कह सकते हैं. फाइबर-ऑप्टिक संचारण एक प्रणाली है जिसमें सूचनाओं की जानकारी एक स्थान से दूसरे स्थान तक ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से प्रकाश बिन्दुओं के रूप में भेजी जाती हैं. यानी ताँबे या किसी सुचालक धातु के मार्फत सूचना भेजने के बजाय प्रकाश के माध्यम से सूचना भेजना. इन दिनों यह तकनीक फाइबर ऑप्टिक संचार में काम आ रही है. इसके माध्यम से काफी दूरी तक काफी हाई बैंडविड्थ में जानकारी भेजी जा सकती है. इसमें एक तो छीजन या लॉसेज़ कम हैं दूसरे इलेक्ट्रॉमैग्नेटिक व्यवधान नहीं होते. सिद्धांततः यह तकनीक उन्नीसवीं सदी से प्रचलन में है, पर 1970 के दशक में इसे व्यावसायिक रूप से विकसित किया गया. इसके लाभ को देखते हुए विकसित दुनिया में कोर नेटवर्क में ताँबे या अन्य धातुओं के तारों की जगह काफी हद तक ऑप्टिकल फाइबर ने ले ली है. सन 2000 के बाद से फाइबर ऑप्टिक-संचार की कीमतों में काफी गिरावट आई है. इस वक्त इस तकनीक की पाँचवीं पीढ़ी का विकास हो रहा है. आधुनिक फाइबर ऑप्टिक संचार प्रणालियों में आमतौर फाइबर शामिल एक ऑप्टिकल ट्रांसमिटर होता है जो ऑप्टिकल सिगनल को कन्वर्ट कर ऑप्टिकल फाइबर को भेजता है.

जहाज कैसे तैरते हैं? 

पहले तैरने या उतराने का सिद्धांत समझ लें. आर्किमीडीज़ का सिद्धांत है कि कोई वस्तु जब पानी में डाली जाती है तब उसके द्वारा हटाए गए जल का भार उस वस्तु के भार के बराबर होता है. और हटाए गए पानी की ताकत उसे वापस ऊपर की ओर उछालती है. इसलिए लोहे का एक टुकड़ा जब पानी में डाला जाता है तब उसके द्वारा हटाए गए पानी की ऊपर को लगने वाली शक्ति को छोटा आकार मिलता है. यदि इसी लोहे के टुकड़े की प्लेट बना दी जाती तो उसका आकार बड़ा हो जाता और वह पानी के नीचे से आनी वाली ताकत का फायदा उठा सकती थी. यही नाव या जहाज के पानी पर उतराने का सिद्धांत है. पानी के ऊपर चलने के लिए या तो पतवार की ज़रूरत होती है अन्यथा किसी घूमने वाली चरखी की. जहाज के इंजन यह काम करते हैं.

होटलों की स्टार रेटिंग कैसे तय होती है?

दुनिया में होटलों की रेटिंग तय करने की कोई आधिकारिक व्यवस्था नहीं है. अलबत्ता सन 1958 में मोबिल ट्रैवल गाइड ने अपने ढंग से होटलों की रेटिंग शुरू की. इस गाइड को अब फोर्ब्स ट्रैवल गाइड कहते हैं. यात्रियों को होटल में प्राप्त सुविधाओं को बताने के लिए स्टार रेटिंग की व्यवस्था शुरू की गई थी. धीरे-धीरे दुनिया में होटल स्टार्स यूनियन बन गईं. जैसे यूरोपियन होटलस्टार्स यूनियन यूरोपियन यूनियन के 24 देशों की 39 यूनियनों की संस्था है. बहरहाल इन संगठनों ने पाँच स्टार तक होटलों की व्यवस्थाओं को परिभाषित किया है. कुछ होटल पाँच के बाद सुपर लक्ज़री जैसे विशेषण जोड़ लेते हैं. दुबई के होटल अल बुर्ज को दुनिया का पहला सेवन स्टार होटल कहने लगे हैं. इसके पहले मिलान, इटली में सेवन स्टार्स गैलेरिया ने खुद को दुनिया का पहला सेवन स्टार होटल घोषित कर दिया था. यह विवाद का विषय है.

हनीमून पर जाने की शुरूआत कैसे हुई? 

अंग्रेजी शब्दों की वैबसाइट वर्ल्डवाइड वर्ड्स (http://www.worldwidewords.org) के अनुसार हनीमून शब्द का पहली बार इस्तेमाल 16वीं सदी में रिचर्ड ह्यूलोट ने किया था. जैसा कि इसका आधुनिक अर्थ है विवाह के बाद कुछ समय का अवकाश जो नव दम्पति बिताते हैं. इसमें हनी का अर्थ मधुरता से और मून का बदलते समय, एक पखवाड़े और प्रेम के प्रतीक से भी है. कुछ लोगों का कहना है कि इसका मूल 4000 साल पुराने बेबीलोन में है, जहाँ विवाहित जोड़ा विवाह के बाद एक खास तरह का शर्बत पीता था, जिसमें शहद होता था. बहरहाल ऐसा लगता है कि 18 वीं सदी तक यह शब्द बहुत ज्यादा प्रचलन में नहीं था. अलबत्ता एक रोचक बात यह है कि यूरोपीय समाज ने इसे भारत से सीखा. अठारहवीं-उन्नीसवीं सदी में अंग्रेजों ने भारत में देखा कि विवाह के बाद लड़का और लड़की अपने सम्बन्धियों के घर जाकर मिलते हैं. इससे दोनों का परिचय अपने नए सम्बन्धियों से होता है. उस परम्परा में पर्यटन का भाव नहीं था. यूरोप में उसे पर्यटन का रूप मिला.
प्रभात खबर में प्रकाशित



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