Sunday, August 28, 2016

वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक क्यों होता है?

ऐसा ब्रिटिश परम्परा के कारण है। ईस्ट इंडिया कम्पनी से ब्रिटिश सरकार को भारत की सत्ता हस्तांतरण होने के बाद 1860 में पहली बार बजट प्रणाली प्रारम्भ की गई। 1867 में 1 अप्रैल से 31 मार्च तक की अवधि का पहला बजट प्रस्तुत किया गया। इंग्लैंड में इसे 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक इसलिए नहीं रखा जाता क्योंकि साल के अंत में क्रिसमस के त्योहार की वजह से लोग व्यस्त रहते हैं। उस वक्त आर्थिक हिसाब-किताब के लिए समय नहीं होता, क्योंकि सर्दी की छुट्टियाँ होती हैं। पर दुनिया के सभी देशों में वित्तीय वर्ष1 अप्रैल से शुरू नहीं होता। अमेरिका का वित्तीय वर्ष पहली अक्तूबर से 30 सितंबर तक होता है, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मिस्र, पाकिस्तान में यह पहली जुलाई को शुरू होकर 30 जून तक रहता है। चीन, ब्राजील, जर्मनी, नीदरलैंड, दक्षिण कोरिया, पुर्तगाल, रूस, स्पेन, स्वीडन, स्विट्ज़रलैंड, ताइवान एवं अन्य 60 देशों में 1 जनवरी  से 31 दिसम्बर तक अर्थात् कैलेंडर वर्ष को वित्त वर्ष भी माना जाता है।
संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, आईएमएफ एवं विश्व के बड़े वित्तीय संस्थान कैलेंडर वर्ष को अपने वित्त वर्ष के रूप में अपनाते हैं। भारत में भी 1 जनवरी से 31 दिसम्बर तक के कैलेंडर वर्ष को वित्त वर्ष में अपनाने के लिए समय-समय पर सुझाव दिए जाते रहे हैं किन्तु अभी तक वित्त वर्ष की तारीखों में बदलाव नहीं आ पाया। हाल में भारत में नए वित्त वर्ष की जरूरत और बदलाव की संभावनाओं पर विचार के लिए भारत सरकार ने पूर्व आर्थिक सलाहकार डॉ. शंकर आचार्य की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति 31 दिसम्बर 2016 तक अपनी रिपोर्ट देगी। भारत सरकार इस साल से बजट की तारीख भी 28 फरवरी से बदल कर जनवरी में रखने पर विचार कर रही है। भारत की अर्थ-व्यवस्था खेती से भी प्रभावित होती है। मॉनसून की अनियमितता का असर अर्थ-व्यवस्था पर पड़ता है। कई बार अर्थशास्त्रियों ने जुलाई से जून के वित्त वर्ष की सलाह भी दी। भारत सरकार ने 1984 में डॉ. एलके झा की अध्यक्षता में वित्त वर्ष में बदलाव के लिए समिति का गठन किया था। इस समिति ने जनवरी से दिसम्बर को वित्त वर्ष अपनाने का सुझाव दिया था। पर सरकार ने बदलाव करना ठीक नहीं समझा।  

2020 के ओलिम्पिक तोक्यो में होंगे। 2024 के कहाँ होंगे?
सन 2024 के खेलों के आयोजन स्थल को तय करने की प्रक्रिया अभी चल रही है। सबसे पहले उन देशों को आमंत्रित किया गया, जो आयोजन में दिलचस्पी रखते हैं। यह काम 15 सितम्बर 2015 में पूरा हो गया। इसके बाद पाँच शहरों के नाम सामने आए। ये थे बुडापेस्ट (हंगरी), हैम्बर्ग (जर्मनी), लॉस एंजेलस (अमेरिका), पेरिस (फ्रांस) और रोम (इटली)। 29 नवम्बर 2015 को हैम्बर्ग ने अपना नाम वापस ले लिया। अब चार शहरों के नाम सूची में हैं। अंतिम रूप से नाम 13 सितम्बर 2017 को अंतरराष्ट्रीय ओलिम्पिक कमेटी की लीमा, पेरू में होने वाली बैठक में होगा।  

रेड सी (लाल सागर) का रंग क्या लाल है?
लाल सागर का यूनानी नाम एरिथ्रा थलासा, लैटिन नाम मेयर रुब्रुम, और अरबी नाम टिग्रीन्या है। इस इलाके में पानी की सतह पर पैदा होने वाली वनस्पति के कारण हो सकता है इसे लाल नाम दिया गया हो। इस इलाके के पहाड़ों का नाम हरेई ईडाम है। हिब्रू भाषा में ईडाम लाल चेहरे वाले एक व्यक्ति का नाम है। इस इलाके में दिशाओं को रंग के नाम दिए गए हैं। लाल शब्द दक्षिण को और काला उत्तर को दर्शाता है। पुराने ज़माने में इसके पास के रेत को मिस्री लोग दशरेत कहते थे, जिसका अर्थ होता है लाल ज़मीन।

ट्रैक्टर के अगले दो पहिए पिछले पहिए के मुकाबले छोटे क्यों होते हैं?

ऐसा आमतौर पर उन ट्रैक्टरों के साथ होता है जिनके पिछले पहिए इंजन से जुड़े होते हैं। अगले पहिए सिर्फ दिशा देने (स्टीयरिंग) का काम करते हैं। भारी पहियों को मोड़ने के लिए ज्यादा ताकत की जरूरत होगी। टू ह्वील ड्राइव में पिछले पहिए चलायमान होते हैं। चूंकि ट्रैक्टर को ऊबड़-खाबड़ जमीन पर चलना होता है इसलिए उसके चलायमान पहिए बड़े टायरों वाले होते हैं। फोर ह्वील ड्राइव ट्रैक्टर भी होते हैं, जिनके चारों पहिए बराबर साइज के होते हैं। इस स्थिति में स्टीयरिंग फ्रंट ह्वील से नहीं होती बल्कि आगे और पीछे के पहियों के बीच में एक जोड़ इस तरह का लगाया जाता है जिससे ट्रैक्टर को दिशा दी जा सके यानी स्टीयर किया जा सके।

दिल्ली में सबसे ज्यादा गहराई वाला मेट्रो स्टेशन कौन सा है?

दिल्ली में सबसे ज्यादा गहराई वाला मेट्रो स्टेशन चावड़ी बाज़ार है, जो 30 मीटर यानी तकरीबन 98 फुट की गहराई पर है। इसके आसपास जामा मस्जिद और लाल किला जैसी ऐतिहासिक इमारतें हैं, उन्हें मेट्रो चलने से किसी प्रकार का नुकसान न हो इसलिए इतनी गहराई रखी गई है। 

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Thursday, August 25, 2016

आजादी का दिन 15 अगस्त कैसे तय हुआ?

ब्रिटिश संसद ने भारत को स्वतंत्र करने का फैसला करने के बाद गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन को अधिकृत किया कि वे 30 जून, 1948 तक इस फैसले को कार्यान्वित करें. पर ब्रिटिश राज की शक्ति क्रमशः क्षीण होती जा रही थी. 30 जून तक इंतजार करने के बजाय माउंटबेटन ने तय किया कि यह काम अगस्त 1947 तक पूरा कर लेना चाहिए. उन्हें यह भी लगता था कि देर करने पर खून-खराबा होने का डर है. बहरहाल माउंटबेटन की सिफारिशों के बाद ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमंस ने 4 जुलाई 1947 को भारतीय स्वतंत्रता विधेयक पेश किया, जो एक पखवाड़े के भीतर पास हो गया. इसमें ही स्वतंत्रता की तिथि 15 अगस्त, 1947 तय की गई. फ्रीडम एट मिडनाइट नामक पुस्तक में माउंटबेटन को यह कहते हुए उधृत किया गया है कि यह तारीख मेरे मन में अचानक आई. जब मुझसे कहा गया कि कोई तारीख तय करो, तो मुझे लगा कि अगस्त-सितम्बर तक सारा इंतजाम हो जाएगा. फिर मैंने कहा, 15 अगस्त. वह जापान के समर्पण की दूसरी वर्षगाँठ भी है. 15 अगस्त 1945 को जापान के सम्राट का रिकॉर्डेड संदेश रेडियो पर प्रसारित हुआ था.   
दिसम्बर 1929 में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन जवाहर लाल नेहरू की अध्यक्षता में हुआ, जिसमें प्रस्ताव पास करके घोषणा की गई कि यदि अंग्रेज सरकार 26 जनवरी 1930 तक भारत को उपनिवेश का दर्जा (डोमीनियन स्टेटस) नहीं देगी तो भारत अपने को पूर्ण स्वतंत्र घोषित कर देगा. उस तारीख तक जब अंग्रेज सरकार ने कुछ नहीं किया तब कांग्रेस ने उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की और अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ किया. तब से 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता रहा. 15 अगस्त को आजादी मिलने के बाद 26 जनवरी का महत्व बनाए रखने के लिए उसे गणतंत्र दिवस मनाने का फैसला किया गया.
बैकलॉग शब्द कैसे बना?
यह शब्द बैक और लॉग से मिलकर बना है. बैक का मतलब है पीछे और लॉग कहते हैं लकड़ियों के टुकड़ों को. पुराने जमाने में यूरोप के घरों में कमरों को गर्म करने के लिए बने आतिशदान के पीछे लकड़ियों का ढेर रखा जाता था. उसे बैकलॉग कहते थे. धीरे-धीरे यह शब्द लकड़ियों के ढेर की जगह काम के ढेर के रूप में बदल गया. ढेर सा जमा काम यानी बैकलॉग.
विजिलांट क्या होता है?
‘विजिलांट’ शब्द के माने हैं निगरानी, सजगता और सतर्कता. ऐसी मान्यता है कि सजग नागरिकों और सजग राजनेताओं के रहते लोकतंत्र में कोई ताकत जन-हित की उपेक्षा नहीं कर सकती. सजग नागरिक फिर किसी भी हद तक जाकर हस्तक्षेप कर सकते हैं.
कोरियर की रसीदों में लिखे CIN का मतलब क्या होता है?
चालान आइडैंटिफ़िकेशन नम्बर या कार्ड आइडैंटिफ़िकेशन नम्बर से इसका आशय है. किसी पत्र या फॉर्म को एक निश्चित नम्बर देने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है, ताकि पत्र को पहचाना जा सके. इस शब्द का इस्तेमाल कोरियर के अलावा और जगह भी होता है.
पुराने पेड़ों की उम्र का पता कैसे लगता है?
पेड़ों की आयु का निर्धारण उनके तने या सबसे पुरानी शाखाओं के क्रॉस सेक्शन के अध्ययन से किया जाता है. वृक्षों के तनों में वार्षिक रूप से मोटाई में वृद्धि होती है. ये अलग-अलग रंग की परतों में होती हैं. इन चक्रीय परतों की गणना करके उनकी आयु ज्ञात की जाती है.
तुलसी रामायण और वाल्मीकि रामायण क्या अलग-अलग हैं?

हाँ अलग हैं. रामकथा से जुड़ी सैकड़ों प्राचीन पुस्तकें हैं. सोलहवीं शताब्दी के अंत में गोस्वामी तुलसी दास ने अवधी में रामचरित मानस लिखी की, जिसे तुलसी रामायण कहते हैं. वाल्मीकि रामायण कोई तीन हज़ार साल पहले संस्कृत में लिखी गई थी. इसके रचनाकार वाल्मीकि को आदि कवि भी कहा जाता है. उसके बाद अलग-अलग काल में और विभिन्न भाषाओं में रामायण की रचना हुई. ज्यादातर का स्रोत वाल्मीकि रामायण है. बारहवीं सदी में तमिल में लिखी गई कम्बन की रामावतारम्, तेरहवीं सदी में थाई रामकीयन और कम्बोडियाई रामायण, पंद्रहवीं-सोलहवीं सदी में उड़िया रामायण और कृतिबास की बांग्ला रामायण प्रसिद्ध हैं.
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

Wednesday, August 24, 2016

भारत में घरेलू बिजली 230 वोल्ट और अमेरिका में 110, ऐसा क्यों?

जिस तरह किसी पाइप के मार्फत पानी एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाया जाता है उसी तरह बिजली के सर्किट में इलेक्ट्रॉन और दूसरे चार्ज कैरियर्स को आगे बढ़ाने का काम किया जाता है। पानी पर जितना ज्यादा प्रेशर होगा उतनी ज्यादा मात्रा में पानी दूसरे बिन्दु पर पहुँचेगा। आसानी से समझने के लिए वोल्टेज को प्रेशर मानें। ज्यादा वोल्टेज से ज्यादा बिजली का प्रवाह होगा। यह सामान्य सी बात है। इसी वजह से एक शहर से दूसरे शहर तक बिजली भेजने के लिए हाई वोल्टेज का इस्तेमाल होता है। हाई वोल्टेज को सम्हालने के लिए केबल की क्षमता भी उसी के अनुरूप होती है।

अमेरिका में घरों में सप्लाई 120 वोल्ट में होती है और यूरोप तथा भारत सहित अनेक देशों में 230 वोल्ट में। इसके अलावा 100, 140, 150 या दूसरे मानक भी हो सकते हैं। मोटी बात यह है कि जितने हाई वोल्ट पर बिजली सप्लाई होगी उतना लाइन लॉस कम होगा। चूंकि हाई वोल्टेज में दुर्घटना की वोल्टेज में समानता नहीं है। इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, भारत, पाकिस्तान, नेपाल जैसे देशों में 230 वोल्ट में सप्लाई होती है। जापान में 100 और कनाडा में 120 में।

साउंडप्रूफ प्रणाली क्या है?

साउंडप्रूफिंग से तात्पर्य है आवाज़ के दबाव को संतुलित करना। इसके कई अर्थ हो सकते हैं। एक अर्थ है कमरे से आवाज़ बाहर न जाने देना। दूसरा अर्थ है बाहर की आवाज़ अन्दर न आने देना। तीसरा अर्थ है कमरे में अनुगूँज या ईको को रोकना। चौथा अर्थ है कि आवाज़ की सभी आवृत्तियों की अनुमति देना और निरर्थक आवाज़ों को रद्द करना। आमतौर पर दीवारों पर एकाउस्टिक बोर्ड और फोम लगाकर ध्वनि को बेहतर बनाया जाता है। ज़रूरत के अनुसार एकाउस्टिक ट्रांसमिशन, रिसेप्शन, माइक्रोफोन, स्पीकर आदि का इस्तेमाल होता है। अब ऐसे कम्प्यूटर बेस सिस्टम आते हैं, जो ध्वनि का तत्काल विश्लेषण करके निरर्थक ध्वनियों को रद्द कर देते हैं।

एटीएम की मशीन सबसे पहले कहाँ बनी?
   
एटीएम का अर्थ होता है ऑटोमेटेड टैलर मशीन। इसका जन्म सेल्फ सर्विस की धारणा के साथ हुआ है, जिससे काम आसान हो और अनावश्यक कर्मचारियों को लगाना न पड़े। इस मशीन के आविष्कार का श्रेय आर्मेनियाई मूल के अमेरिकन लूथर जॉर्ज सिमियन को मिलना चाहिए। यों इसके विकास में कुछ और लोगों का भी हाथ है। एटीएम की परिकल्पना उसने 1939 में ही कर ली थी और बैंकमैटिक नाम से एक मशीन बनाई। जिसे पेटेंट मिला फरवरी 1963 में। इस बीच उसने सिटी बैंक ऑफ न्यूयॉर्क(आज का सिटी बैंक) के अधिकारियों को इस बात के लिए राजी किया कि वे इस मशीन को परीक्षण के तौर पर लगाकर देखें। सिटी बैंक ने छह महीने के ट्रायल पर मशीन लगाई, पर उसे लोकप्रियता नहीं मिली। इसकी लोकप्रियता जापान से बढ़ी वह भी क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल के कारण। एटीएम के साथ-साथ चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक और अन्य कई वस्तुओं के डिस्पेंसर भी उसी दौरान बने हैं।   

परमाणु विस्फोट कितने देश कर चुके हैं?

सबसे पहला परमाणु परीक्षण अमेरिका ने 16 जुलाई 1945 को किया था। तब से 1992 तक अमेरिका 1032 परमाणु परीक्षण कर चुका है। सोवियत संघ में 727 परीक्षण हुए, लेकिन 1992 में उसके विघटन के बाद से कोई परीक्षण नहीं हुआ। ब्रिटेन ने 88 परीक्षण किए और अंतिम परीक्षण 1991 में किया गया। फ़्रांस 217 परीक्षण कर चुका है, चीन 47, भारत छह, पाकिस्तान छह और उत्तर कोरिया ने चार परीक्षण किए हैं। इसके अलावा यह माना जाता है कि जापान, इसराइल, दक्षिण अफ़्रीका और जर्मनी ने भी परमाणु परीक्षण किए हैं।

एलसीडी एवं एलईडी के पूर्ण शब्द क्या हैं?

एलसीडी है लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले। और एलईडी है लाइट एमिटिंग डायोड्स। दोनों का इस्तेमाल आजकल डिस्प्ले या इलेक्ट्रॉनिक दृश्य प्रदर्शन में होता है। इनके साथ कैथोड रे ट्यूब और प्लाज्मा डिस्प्ले पैनल के बारे में भी जानना चाहिए। हमने जब टीवी देखना शुरू किया तब कैथोड रे ट्यूब वाले मॉनिटर होते थे। कम्प्यूटर पर भी वही मॉनिटर लगते थे। ये मॉनिटर आकार में बड़े होते थे। इसके बाद आए एलसीडी मॉनिटर। एलसीडी में प्रकाश की किरणों में चमकने वाले लिक्विड क्रिस्टल होते हैं। इनके मुकाबले प्लाज्मा सेल फ्लुओरोसेंट लैम्प्स की पद्धति पर काम करते हैं। इसमें लाखों पिक्सेल सेल होते हैं। एलईडी जब शुरू में आए थे तब वे सिर्फ लाल रंग के होते थे। अब तमाम रंगों के एलईडी बनने लगे हैं। अब एलईडी और एलसीडी तकनीक के समन्वय से नए ढंग के डिस्प्ले पैनल भी सामने आ रहे हैं।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Thursday, August 18, 2016

ह्विसिल ब्लोवर माने क्या?

‘ह्विसिल ब्लोवर’ माने सीटी बजाने वाला. इसका सामान्य अर्थ एक ऐसे व्यक्ति से है जो सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार या गैर-कानूनी काम का भंडाफोड़ करता है. जैसे खेल में रेफरी किसी ‘फाउल’ पर ह्विसिल बजाता है. उपभोक्ता अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अमेरिकी एक्टिविस्ट रैल्फ नैडर ने ऐसे व्यक्ति को ‘सूचनादाता’(Informer) या ‘स्निचर्स’(Snitchers) का नाम दिया, किंतु व्यापक स्तर पर यह ‘ह्विसिल ब्लोवर्स’ के नाम से ही चर्चा में है. हाल के वर्षों में विकीलीक्स और एडवर्ड स्नोडेन ने इसे और बेहतर रूप दिया है. दुनिया के कई देशों ने व्हिसिल ब्लोवरों के संरक्षण के लिए कानून बनाए हैं.

भारत के विधि आयोग की 2001 की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश (2004) पर केंद्रित ‘ह्विसिल ब्लोवर्स संरक्षण अधिनियम- 2014’ संसद से पास हुआ. इसमें संशोधन के लिए ‘ह्विसिल ब्लोवर्स संरक्षण (संशोधन) विधेयक- 2015’  पेश किया गया है, जो लोकसभा से पास हो चुका है. राज्यसभा के सामने विचारार्थ लम्बित है.

राष्ट्रपति भवन पर पहली बार तिरंगा कब फहराया गया?

भारतीय संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज को स्वीकार किया. 14 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि के आसपास यह ध्वज संसद भवन के सेंट्रल हॉल में फहराया गया. इसी कार्यक्रम में श्रीमती हंसा मेहता ने राष्ट्रध्वज डॉ राजेन्द्र प्रसाद को भेंट किया. 15 अगस्त 1947 की भोर तब के वायसरीगल हाउस और वर्तमान राष्ट्रपति भवन पर तिरंगा फहराया गया. संसद भवन के शिखर पर भी उसी सुबह तिरंगा फहराया गया. 

बायोपिक क्या होता है?
बायोपिक शब्द बायो ग्रैफिकल यानी किसी व्यक्ति के जीवनी से बना है. यह फिल्म मेकिंग से आया शब्द है इसलिए बायोपिक कहते हैं यानी किसी की जीवनी पर बनी फिल्म. पिछले दिनों हमने दशरथ माँझी के जीवन पर बनी फिल्म माउंटेन मैन देखी. मंगल पांडे, मिल्खा सिंह और पान सिंह तोमर से लेकर महात्मा गांधी के जीवन पर तमाम फिल्में बन चुकी हैं.

गीक’ किसे कहते हैं?
गीक शब्द स्लैंग है यानी अव्याकरणीय, अमानक या बोल-चाल का शब्द. यह अंग्रेजी और जर्मन समाज के बीच प्रचलित शब्द है, जिसका आशय सत्रहवीं-अठारहवीं शताब्दी में बेवकूफ, सनकी या पागल होता था. पर इन दिनों यह शब्द धुन के धनी, विशेषज्ञ या अपनी अलग दुनिया में रहने वालों के लिए किया जाने लगा है. ऐसे व्यक्ति जो साइंस, तकनीक या संगीत के किसी उपकरण के साथ इतनी गहराई से जुड़ जाते हैं कि उनका अलग संसार बस जाता है. अनफैशनेबल या लीक से अलग चलने वाले. ‘गिज्मो गीक’ यानी किसी उपकरण से लिपटा रहने वाला. उपकरण गिटार हो या लैपटॉप. इन दिनों नए शब्दों की भरमार है, खासतौर से तकनीक के विस्तार ने इन्हें लोकप्रिय बनाने में काफी मदद की है. ऐसे नए शब्दों को जानने के लिए अर्बन डिक्शनरी जैसी वैबसाइट तैयार हो गई हैं. आप इसमें जाकर अपना नया शब्द भी दर्ज करा सकते हैं. इस डिक्शनरी का लिंक है

गंजापन क्या केवल पुरुषों में ही होता है?
केवल पुरुषों में ही नहीं होता, पर यह सच है कि स्त्रियों की तुलना में पुरुष ज्यादा गंजे होते हैं. इसका कारण है पुरुष हार्मोन डिहाइड्रोटेस्टोटेरॉन और एंड्रोजीन्स. स्त्रियों में ये नहीं होते हैं या कम होते हैं. स्त्रियाँ भी गंजी हो सकती हैं. वे गंजी कम दिखाई पड़ती हैं, क्योंकि सांस्कृतिक रूप से गंजे पुरुष  सहज स्वीकार्य हैं. स्त्रियों को नकली बालों या विग का सहारा लेना पड़ता है. गंजे होने के अन्य कारण भी हो सकते हैं. मसलन सिर की त्वचा में मौजूद पैरोक्साइड या सोरायसिस जैसी कोई बीमारी. कुपोषण और मानसिक तनाव भी गंजेपन का कारण हो सकता है. कीमोथिरैपी से भी गंजापन आता है.

भारत की पहली महिला विमान चालक कौन थीं?
जेआरडी टाटा पहले भारतीय थे, जिन्हें 1929 में विमान चलाने का लाइसेंस मिला था. पर पहली महिला विमान चालक थीं सरला ठकराल. उन्होंने 1936 में लाहौर हवाई अड्डे से जिप्सी मॉथ नामक दो सीटों वाले विमान को उड़ाया था. उस वक्त उनकी उम्र 21 साल थी. उन्होंने दिल्ली में खोले गए फ़्लाइंग क्लब में विमान चालन की ट्रेनिंग ली थी और एक हज़ार घंटे का अनुभव बटोरा था.






Thursday, August 11, 2016

ओलिम्पिक खेलों में स्त्रियाँ कब शामिल हुईं?



सन 1896 के पहले ओलिम्पिक खेलों में स्त्रियों को भाग लेने की अनुमति नहीं दी गई. फिर भी स्तामाता रेविती (Stamata Revithi) नाम की ग्रीक स्त्री ने 11 अप्रेल को मैराथन दौड़ के उस मार्ग में पूरी दौड़ लगाई जिसपर पहले पुरुष दौड़ चुके थे. 17 महीने के बेटे की माँ रेविती को स्टेडियम में प्रवेश नहीं दिया गया, पर उसने आसपास खड़े लोगों से दस्तखत कराए कि उसने पाँच घंटे और तकरीबन तीस मिनट में वह दौड़ पूरी की. बहरहाल सन 1900 में पेरिस में हुए दूसरे ओलिम्पिक खेलों में महिलाओं को भी भाग लेने की अनुमति दे दी गई. उन खेलों में 20 महिलाओं ने हिस्सा लिया.
क्या ओलिम्पिक गीत भी होता है?
1896 के सबसे पहले आधुनिक ओलिम्पिक खेल शुरू होने पर एक गीत गाया गया था. ग्रीक कवि कोस्टिस पलामास के ग्रीक भाषा में लिखे और संगीतकार स्पाइरिडॉन समारास के संगीतबद्ध इस गीत को उसी वक्त ओलिम्पिक गीत घोषित नहीं किया. इसके 61 साल बाद सन 1958 में आईओसी ने इसे ओलिम्पिक गीत के रूप में स्वीकार किया. सन 60 के ओलिम्पिक खेलों के बाद से हरेक ओलिम्पिक खेल शुरू होते और समापन के समय यह गीत गाया जाता है.
होलोग्राफी क्या है?
फोटोग्राफी की तरह होलोग्राफी भी किसी वस्तु की इमेज दर्ज करने की तकनीक है. इनमें फर्क यह है कि सामान्य फोटोग्राफ किसी वस्तु की चमक और कंट्रास्ट को दो डायमेंशन में रिकॉर्ड करता है, जबकि होलोग्राफ उसके डायमेंशन यानी गहराई को भी दर्ज करता है. लेजर के आविष्कार के बाद से यह लेजर से संचालित होता है. यानी यह थ्री डायमेंशन फोटोग्राफी है. होलोग्राम की अवधारणा 1947 में इंग्लैंड के वैज्ञानिक डॉ डेनिस गैबर ने दी थी और होलोग्राम तैयार करके भी दिखाए थे.
इको टूर क्या है?
इको टूरिज्म शब्द इकोलॉजिकल कंज़र्वेशन या पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में गढ़ा गया है. ऐसा पर्यटन जो पर्यावरण संरक्षण के इरादे से हो. इसके पीछे कारण यह है कि पर्यावरण को पर्यटन के कारण भी नुकसान हो रहा है. इको टूरिस्ट आमतौर पर ऐसे वॉलंटियर्स होते हैं जो एकदम नए इलाकों में जाते हैं और वैकल्पिक पर्यटन क्षेत्र विकसित करने में मदद करते हैं. उनका उद्देश्य पर्यटकों को जागरूक करना होता है कि सिर्फ कुछ जगहों पर केन्द्रित होने के बजाय अनछुए इलाकों में जाना बेहतर है. इससे किसी एक इलाके पर दबाव कम पड़ता है. इसके साथ ही ये वॉलंटियर पर्यटकों को प्रकृति के महत्व को समझाते हैं, पर्यावरण संरक्षण के महत्व को बताते हैं. इस शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल मैक्सिको के नगर और पर्यावरण विकास मंत्रालय से जुड़े अधिकारी हैक्टर सेबेलोस-लैस्क्यरें (Hector Ceballos-Lascurain) ने किया.
नॉटिकल मील क्या होता है?
नॉटिकल मील का इस्तेमाल आमतौर पर समुद्री और हवाई नेवीगेशन में होता है. लम्बाई के हिसाब से यह करीब 1852 मीटर या 6076 फुट होता है. सागर और आकाश के नेवीगेशन में आमतौर पर अक्षांश-देशांतर का इस्तेमाल होता है. भूमध्य रेखा और उससे उत्तर या दक्षिण में इसकी दूरी में मामूली फर्क भी आता रहता है.
फिल्मों में केमियो रोल किसे कहते हैं?
केमियो रोल किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति या कलाकार का एकदम छोटी भूमिका में आना है. कई बार संवाद भी नहीं बोला जाता. जैसे लालू प्रसाद यादव फिल्म पद्मश्री लालू प्रसाद यादव में दिखाई पड़े थे. ऐसी ही एक भूमिका दीपिका पादुकोण ने फिल्म बिल्लू में की थी. किशोर साहू ने फिल्म गाइड में, प्रीटी जिंटा ने फिल्म दिल से में की. शोले में आसरानी और फिल्म आनन्द में जॉनी वॉकर के केमियो रोल हमेशा याद रहेंगे.
हमारी धरती किस चीज़ पर टिकी हुई है?
किसी चीज़ पर टिकी नहीं है. अपनी गुरुत्व शक्ति के सहारे अंतरिक्ष में लगातार घूम रही है और एक यात्रा-पथ पर चल रही है.
  
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

Thursday, August 4, 2016

डोपिंग क्या है?

डोपिंग माने खेल के मैदान में बाजी मारने के लिए नशीली दवाओं का इस्तेमाल. शारीरिक खेलकूद और मनोरंजन के क्षेत्र में शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए दवाओं का सेवन सैकड़ों साल से चल रहा है. सन 1904 के ओलिम्पिक खेलों के मैराथन चैम्पियन टॉमस हिक्स के कोच ने रास्ते में उसे सल्फेट ऑफ स्ट्रिकनाइन के इंजेक्शन लगाए और ब्रांडी पिलाई. ऐसे तमाम प्रसंग हैं. खेल प्रतियोगिताओं में दवाओं के बढ़ते चलन को देखते हुए ही दुनिया में सबसे पहले 1928 में इंटरनेशनल अमेच्योर एथलेटिक फेडरेशन ने (जिसका नाम अब है इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ एथलेटिक्स फेडरेशंस-आईएएएफ) ने डोपिंग पर रोक लगाई.

उस वक्त यह रोक मौखिक थी, क्योंकि टेस्टिंग प्रणाली का तब तक विकास नहीं हुआ था. केवल खिलाड़ियों के मौखिक आश्वासन से काम चल जाता था. सन 1966 में अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल फेडरेशन (फीफा) और यूनियन साइकलिस्ट इंटरनेशनल ने आईएएएफ के साथ मिलकर इस दिशा में काम करने का फैसला किया. सबसे पहले 1966 की यूरोपीय चैम्पियनशिप में टेस्ट हुए और उसके दो साल बाद अंतरराष्ट्रीय ओलिम्पिक काउंसिल (आईओसी) ने 1968 को ओलिम्पिक खेलों में ड्रग टेस्ट शुरू किए। उस समय तक भी वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) नहीं बनी थी। उसकी स्थापना 10 नवंबर 1999 में हुई और तबसे इस दिशा में कड़ाई से काम हो रहा है. अलग-अलग देशों में नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) भी बनाई गई हैं. भारत में नाडा की प्रयोगशाला दिल्ली में है.

ओलिम्पिक गोल्ड मेडल क्या शुद्ध सोने का होता है?

पहले दो ओलिम्पिक खेलों में यानी कि 1896 और 1900  में गोल्ड मेडल नहीं दिए गए. तब चाँदी और ताँबे के मेडल क्रमशः विजेता और उप विजेता को दिए गए. 1904 में अमेरिका के मिज़ूरी में तीन मेडल का चलन शुरू हुआ. ओलिम्पिक के गोल्ड मेडल का आकार, डिजाइन और वज़न बदलता रहता है. सन 2012 के लंदन ओलिम्पिक में काफी बड़े आकार के मेडल दिए गए जो 85 मिमी व्यास के थे इनकी मोटाई 7 मिमी थी. सोने का मेडल भी चाँदी में ढाला जाता है और उसके ऊपर लगभग 6 ग्राम सोने की प्लेटिंग होती है. चाँदी का मेडल .925 शुद्धता की चाँदी को होता है और कांस्य पदक में ताँबे, टिन और ज़स्ते की मिलावट होती है. रियो ओलिम्पिक खेलों में कुल 5,130 मेडल दिए जाएंगे, जिन्हें ब्राजील की टकसाल में ढाला गया है. इस बार के गोल्ड मेडल में मर्करी बिलकुल नहीं होगा.

रियो ओलिम्पिक खेलों का शुभंकर क्या है?

रियो ओलिंपिक खेलों का शुभंकर पीले रंग का प्राणी (बिल्ली जैसा जानवर) है, जिसका नाम है विनीसियस. यह काल्पनिक जीव ब्राजील के वन्य-जीवों का मिश्रण है. इसमें बिल्ली जैसी तेजी, बंदर जैसी छलांग लगाने की क्षमता और पक्षियों जैसी भव्यता है. इसके हाथ और पैर असीमित दूरी तक लम्बे हो सकते हैं. ब्राजील के राष्ट्रीय ध्वज के रंगों को इसमें शामिल किया गया है.

पैन कार्ड में क्या कोड छिपा होता है?

कोई गुप्त संदेश नहीं होता. दस अंको-अक्षरों वाले इस नम्बर से व्यक्ति की पहचान होती है. यह नम्बर आयकर विभाग द्वारा जारी किया जाता है. सन 2005 के बाद से आयकर विभाग ने आय का विवरण दाखिल करने और वित्तीय लेन-देन के सभी दस्तावेजों में इस नम्बर को लिखना अनिवार्य कर दिया है.

बारह राशियां क्या होती हैं?

यह एक काल्पनिक व्यवस्था है और इसका सम्बन्ध फलित ज्योतिष से है, खगोल विज्ञान से नहीं. अलबत्ता अंतरिक्ष का नक्शा बनाने में इससे आसानी होती है. अंतरिक्ष का अध्ययन करने के लिए प्रायः हम एक काल्पनिक गोला मानकर चलते हैं, जो पृथ्वी केंद्रित है. इसे खगोल कहते हैं. पृथ्वी की भूमध्य रेखा और दोनों ध्रुवों के समांतर इस खगोल की भी मध्य रेखा और ध्रुव मान लेते हैं. इस खगोल में सूर्य का एक विचरण पथ है, जिसे सूरज का क्रांतिवृत्त या एक्लिप्टिक कहते हैं. पूरे साल में सूर्य इससे होकर गुजरता है. अंतरिक्ष में हर वस्तु गतिमान है, पर यह गति इस प्रकार है कि हमें तमाम नक्षत्र स्थिर लगते हैं. इन्हें अलग-अलग तारा-मंडलों के नाम दिए गए हैं.

सूर्य के यात्रा-पथ को एक काल्पनिक लकीर बनाकर देखें तो पृथ्वी और सभी ग्रहों के चारों ओर नक्षत्रों की एक बेल्ट जैसी बन जाती है. इस बेल्ट को बारह बराबर भागों में बाँटने पर बारह राशियाँ बनतीं हैं, जो बारह तारा समूहों को भी व्यक्त करतीं हैं. इनके नाम हैं मेष, बृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ और मीन. सूर्य की परिक्रमा करते हुए धरती और सारे ग्रह इन तारा समूहों से गुजरते हैं. साल भर में सूर्य इन बारह राशियों का दौरा करके फिर अपनी यात्रा शुरू करता है. अंतरिक्ष विज्ञानी इसके आधार पर निष्कर्ष नहीं निकालते. फलित ज्योतिषी निकालते हैं.
  
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित