Friday, January 13, 2017

संसद के कितने सत्र होते हैं?

सामान्यतः हर साल संसद के तीन सत्र होते हैं. बजट (फरवरी-मई), मॉनसून (जुलाई-अगस्त) और शीतकालीन (नवंबर-दिसंबर).  बजट अधिवेशन को दो हिस्सों में विभाजित कर दिया जाता है. इन दोनों के बीच तीन से चार सप्ताह का अवकाश होता है. इस दौरान स्थायी समितियाँ विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान माँगों पर विचार करती हैं. इस साल से बजट सत्र जनवरी के अंतिम सप्ताह से शुरू करने का फैसला किया गया है.
राष्ट्रपति दोनों सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करते हैं. हरेक अधिवेशन की अंतिम तिथि के बाद छह मास के भीतर आगामी अधिवेशन के लिए सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करना होता है. सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करने की शक्ति राष्ट्रपति में निहित है, पर व्यवहार में इस आशय के प्रस्‍ताव की पहल सरकार द्वारा की जाती है. इन तीन के अलावा संसद के विशेष सत्र भी बुलाए जा सकते हैं.
राष्ट्रपति का अभिभाषण
बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से होती है जो संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में दोनों सदनों के समक्ष होता है. अभिभाषण में ऐसी नीतियों एवं कार्यक्रमों का विवरण होता है जिन्हें आगामी वर्ष में कार्य रूप देने का विचार हो. साथ ही, पहले वर्ष की उसकी गतिविधियों और सफलताओं की समीक्षा भी की जाती है. अभिभाषण चूंकि सरकार की नीति का विवरण होता है अंत: सरकार द्वारा तैयार किया जाता है. अभिभाषण पर चर्चा होती है और सदन राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पास करता है.
श्वेत-पत्र किसे कहते हैं?
श्वेत-पत्र का मतलब होता है ऐसा दस्तावेज जिसमें सम्बदध विषय से जुड़ी व्यापक जानकारी दी जाती है. इस शब्द की शुरुआत ब्रिटेन से हुई है. सन 1922 में ‘चर्चिल ह्वाइट पेपर’ सम्भवतः पहला श्वेत पत्र था. यह दस्तावेज इस बात की सफाई देने के लिए था कि ब्रिटिश सरकार यहूदियों के लिए फलस्तीन में एक नया देश इसरायल बनाने के लिए 1917 की बालफोर घोषणा को किस तरह अमली जामा पहनाने जा रही है. कनाडा तथा दूसरे अन्य देशों में भी ऐसी परम्परा है. सन 1947 में जब कश्मीर पर पाकिस्तानी हमला हुआ था उसके बाद 1948 में भारत सरकार ने श्वेत-पत्र जारी करके अपनी तरफ से पूरी स्थिति को स्पष्ट किया था. मई 2012 में भारत सरकार ने काले धन पर और सन 2015 में रेलवे को लेकर श्वेत पत्र जारी किया. दूसरे विषयों पर भी श्वेत पत्र जारी हुए हैं.
सिल्क रोड क्या है?
सिल्क रोड या रेशम मार्ग प्राचीन और मध्यकाल में ऐतिहासिक व्यापारिक-सांस्कृतिक मार्गों का एक समूह था जिसके माध्यम से एशिया, यूरोप और अफ्रीका जुड़े हुए थे. इन मार्गों में सबसे ज्यादा प्रचलित हिस्सा उत्तरी रेशम मार्ग था जो चीन से होकर पश्चिम की ओर पहले मध्य एशिया में और फिर यूरोप तक जाता था. इसकी एक शाखा भारत की ओर आती थी. तकरीबन साढ़े छह हजार किलोमीटर लंबे इस रास्ते का नाम चीन के रेशम के नाम पर पड़ा जिसका व्यापार इस मार्ग की मुख्य विशेषता थी. इसके मार्फत मध्य एशिया, यूरोप, भारत और ईरान में चीन के हान राजवंश काल में पहुँचना शुरू हुआ.
सिल्क रोड के माध्यम से व्यापार के अलावा, ज्ञान, धर्म, संस्कृति, भाषाओं, विचारधाराओं, भिक्षुओं, तीर्थयात्रियों, सैनिकों, यायावरों और बीमारियों का प्रसार भी हुआ. एक तरह से यह वैश्वीकरण का रास्ता भी था.  हाल में चीन ने सिल्क रोड की तर्ज पर एक नई परियोजना शुरू की है. इसका नाम  है ‘वन बेल्ट वन रोड’ (ओबीओआर). यह प्राचीन सिल्क रोड का 21वीं सदी का संस्करण है. ओबीओआर का मक़सद है व्यापार के लिए समुद्री और ज़मीनी, दोनों तरह के रास्तों का विकास करना ताकि चीन को बाहरी दुनिया से जोड़ा जा सके.
क्या मुम्बई शहर दहेज में मिला था?
मुम्बई या बॉम्बे का माहिम वाला इलाका तकरीबन एक हजार साल पहले बस गया था. 1348 में मुस्लिम सेनाओं ने इस द्वीप को जीत लिया और यह गुजरात राज्य का हिस्सा बन गया. इसके बाद पुर्तगालियों ने सन 1507 में इस इलाके को जीतने की कोशिश की, पर वह सफल नहीं हुई. लेकिन 1534 में गुजरात के शासक सुल्तान बहादुरशाह ने यह द्वीप पुर्तग़ालियों को एक समझौते के तहत सौंप दिया. 1661 में इंग्लैंड के किंग चार्ल्स द्वितीय व पुर्तग़ाल के राजा की बहन कैथरीन आफ़ ब्रैगेंज़ा के विवाह के बाद पुर्तगालियों ने यह तोहफे के तौर पर 1668 में ईस्ट इंडिया कम्पनी को सौंप दिया.
वे दो दिन जब दिन-रात बराबर होते हैं
हिंदी में इसे विषुव और अंग्रेज़ी में इक्विनॉक्स कहते हैं. यानी ऐसा समय-बिंदु, जिसमें दिन और रात बराबर हों. किसी इलाके में दिन और रात की लंबाई पर असर डालने वाली कई बातें होतीं हैं. धरती अपनी धुरी पर 23½° झुककर सूर्य के चक्कर लगाती है, इस प्रकार वर्ष में एक बार पृथ्वी इस स्थिति में होती है, जब वह सूर्य की ओर झुकी रहती है, व एक बार सूर्य से दूसरी ओर झुकी रहती है. इसी प्रकार वर्ष में दो बार ऐसी स्थिति भी आती है, जब पृथ्वी का झुकाव न सूर्य की ओर ही होता है, और न ही सूर्य से दूसरी ओर, बल्कि बीच में होता है. इसे इक्विनॉक्स कहा जाता है. इन दोनों तिथियों पर दिन और रात की बराबर लंबाई लगभग बराबर होती है. ऐसा भूमध्य रेखा पर होगा. सन 2017 में यह 20 मार्च और 22 सितम्बर को होगा। यह भी अलग-अलग अक्षांश यानी लैटीट्यूड पर अलग-अलग दिन होता है.
रेनबो डाइट
रेनबो डाइट का शाब्दिक अर्थ है इन्द्रधनुषी डाइट. यानी इन्द्रधनुष को रंगों का भोजन. व्यावहारिक मतलब है तरह-तरह के रंगों के फलों और सब्जियों का भोजन जो स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन होता है. फलों और सब्जियों के तमाम रंग होते हैं और हर रंग का अपना गुण होता है.
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

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