Tuesday, January 3, 2017

क्या कुत्ते और बिल्ली भी कभी घास खाते हैं?

क्या कुत्ते और बिल्ली भी कभी घास खाते हैं? अगर खाते हैं, तो क्या भोजन के रूप में खाते हैं?

तेजस्विनी गोयल पुत्री: सुनील गोयल, मालाखेड़ा बाजार (हरि किशन न्यूज पेपर एजेंसी), राजगढ़ (अलवर)-301408 


आपने कुत्ते और बिल्ली को कई बार घास खाते देखा होगा। खासतौर से कुत्ते घास खाकर उलटी करते हैं। दरअसल प्रकृति ने उन्हें अपना इलाज करने का यह तरीका सिखाया है। बीमार होने पर वे ऐसा करते हैं। वे प्राकृतिक रूप से घास नहीं खाते, लेकिन बीमार पड़ने पर दोनों खास किस्म की घास खाते हैं। घास खाने के उनका पेट में अफारा होता और बीमारी पैदा कर रही चीज उल्टी या दस्त के साथ बाहर आ जाती है। पालतू कुत्ते ही नहीं जंगली कुत्ते भी इसी तरह अपना इलाज करते हैं। ऐसे अध्ययन सामने आए हैं, जिनसे पता लगता है कि कुत्ते अपनी पाचन शक्ति को बेहतर बनाने के लिए भी ऐसा करते हैं। कुत्ते-बिल्ली ही नहीं और भी कई जीव ऐसे ही अपना प्राकृतिक इलाज करते हैं। उनका यह सहज ज्ञान ध्यान खींचता है।

चिंपाजी जब विषाणुओं के संक्रमण से बीमार होते हैं या फिर उन्हें डायरिया या मलेरिया होता है तो वे एक खास पौधे तक जाते हैं। चिंपाजियों का पीछा कर वैज्ञानिक आसपिलिया नाम के पौधे तक पहुंचे। इसकी खुरदुरी पत्तियां चिंपाजियों का पेट साफ करती हैं। आसपिलिया की मदद से परजीवी जल्द शरीर से बाहर निकल जाते हैं। संक्रमण भी कम होने लगता है। तंजानिया के लोग भी इस पौधे का दवा के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। काला प्लम विटेक्स डोनियाना, बंदर बड़े चाव से खाते हैं। यह सांप के जहर से लड़ता है। यलो फीवर और मासिक धर्म की दवाएं बनाने के लिए भी इनका इस्तेमाल होता है। बीमार होने पर भेड़ ऐसे पौधे चरती है जिनमें टैननिन की मात्रा बहुत ज्यादा हो। ठीक होने के बाद वह फिर से सामान्य घास चरने लगती है। 

जीरो (शून्य) एफआईआर क्या होती है? इसमें और सामान्य एफआईआर में क्या अंतर है?

सत्य स्वरूप दत्त, 21, विजया हैरिटेज, कदमा, जमशेदपुर-831005


प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) पुलिस द्वारा तैयार किया गया एक लिखित अभिलेख है, जिसमें संज्ञेय अपराध की जानकारी होती है। मूलतः यह पीड़ित व्यक्ति की शिकायत है। यह एक महत्वपूर्ण दस्तावेज इसलिए है, क्योंकि इसके आधार पर ही भविष्य की न्यायिक प्रक्रिया चलती है। दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा- 154 के अनुसार संज्ञेय अपराध के किए जाने से संबंधित प्रत्येक इत्तला, यदि पुलिस थाने के भार-साधक अधिकारी को मौखिक दी गई हैं तो उसके द्वारा या उसके निदेशाधीन लेखबद्ध कर ली जाएगी और इत्तला देने वाले को पढ़कर सुनाई जाएगी और प्रत्येक ऐसी इत्तला पर, चाहे वह लिखित रूप में दी गई हो या पूर्वोक्त रूप में लेखबद्ध की गई हो, उस व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे, जो उसे दे और उसका सार ऐसी पुस्तक में, जो उस अधिकारी द्वारा ऐसे रूप में रखी जाएगी जिसे राज्य सरकार इस निमित्त विहित करें, प्रविष्ट किया जाएगा ।

शून्य एफआईआर एक नई अवधारणा है, जो दिसम्बर 2012 में दिल्ली में हुए गैंगरेप के बाद सामने आई है। इसकी सलाह जस्टिस जेएस वर्मा की अध्यक्षता में बनाई गई समिति ने की थी। सामान्यतः एफआईआर उस थाने में दर्ज होती है जिसके क्षेत्राधिकार में अपराध हुआ हो। ज़ीरो एफआईआर किसी भी थाने में दर्ज कराई जा सकती है। इसके बाद पुलिस और न्याय प्रक्रिया से जुड़े विभागों को जिम्मेदारी बनती है कि एफआईआर का सम्बद्ध थाने में स्थानांतरण कराएं। मूलतः यह महिलाओं को सुविधा प्रदान कराने की व्यवस्था है। और इसका उद्देश्य यह भी है कि पुलिस फौरन कार्रवाई करे। अभी देश के तमाम पुलिस अधिकारी भी इस व्यवस्था से खुद को अनभिज्ञ बताते हैं।

रॉकेट वगैरह छोड़ते समय उल्टी गिनती गिनी जाती है, ऐसा क्यों? 

खुशी शर्मा, 2, नाथानी कांप्लेक्स, न्यू शांति नगर, रायपुर (छ.ग.)


आपने मुहावरा सुना होगा कि फलां की उलटी गिनती शुरू हो गई. यानी कि अंत करीब है। इस मुहावरे को बने अभी सौ साल भी नहीं हुए हैं, क्योंकि उलटी गिनती की अवधारणा बहुत पुरानी नहीं है। काउंटडाउन सिर्फ रॉकेट छोड़ने के लिए ही इस्तेमाल नहीं होता। फिल्में शुरू होने के पहले शुरुआती फुटेज पर उल्टी गिनतियाँ होती हैं। नया साल आने पर पुराने साल के आखिरी सप्ताह काउंटडाउन शुरू हो जाता है।

काउंटडाउन सिर्फ रॉकेट छोड़ने के लिए ही इस्तेमाल नहीं होता। बल्कि इसकी शुरुआत कैम्ब्रिज युनिवर्सिटी में नौका प्रतियोगिता में हुई थी। सन 1929 में फ्रिट्ज लैंग की एक जर्मन साइंस फिक्शन मूवी डाई फ्रॉ इम मोंड में चंद्रमा के लिए रॉकेट भेजने के पहले नाटकीयता पैदा करने के लिए काउंटडाउन दिखाया गया। पर अब इस काउंटडाउन का व्यावहारिक इस्तेमाल भी होता है। आमतौर पर एक सेकंड की एक संख्या होती है। उल्टी संख्या बोलने से बाकी बचे सेकंडों का पता लगता है। विमान के कॉकपिट में भी होता है।

उपग्रह प्रक्षेपण के लिए 72 से 96 घंटे पहले उलटी गिनती शुरू की जाती है. इस दौरान उड़ान से पहले की कुछ प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं. रॉकेट के साथ उपग्रह को जोड़ना, ईंधन भरना और सहायक उपकरणों का परीक्षण करना इसका हिस्सा है। इस चेकलिस्ट की मदद से उड़ान कार्यक्रम सुचारु चलता है। अगस्त 2013 में भारत के जीएसएलवी रॉकेट पर लगे क्रायोजेनिक इंजन के परीक्षण के लिए चल रहे काउंटडाउन के दौरान प्रक्षेपण से एक घंटे 14 मिनट पहले एक लीक का पता लगा और काउंटडाउन रोक दिया गया और उड़ान स्थगित कर दी गई। आपने देखा होगा कि एक दिनी और टी-20 क्रिकेट मैच शुरू करने के पहले काउंट डाउन होता है. यह सिर्फ नाटकीयता पैदा करने के लिए है.

कादम्बिनी के अगस्त 2016 के अंक में प्रकाशित

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