Thursday, September 22, 2011

जेट लैग क्या है?

जेट लैग क्या है? 
प्रेम जी 
premdhamu.bkn@gmail.com>





जेट लैग एक मनो-शारीरिक दशा है, जो शरीर के सर्केडियन रिद्म में बदलाव आने के कारण पैदा होती है। इसे सर्केडियन रिद्म स्लीप डिसॉर्डर भी कहते हैं। इसका कारण लम्बी दूरी की हवाई यात्रा खासतौर से पूर्व से पश्चिम या पश्चिम से पूर्व एक टाइम ज़ोन से दूसरे टाइम ज़ोन की यात्रा होती है। अक्सर शुरुआत में नाइट शिफ्ट पर काम करने आए लोगों के साथ भी ऐसा होता है। आपका सामान्य जीवन एक खास समय के साथ जुड़ा होता है। जब उसमें मूलभूत बदलाव होता है तो शरीर कुछ समय के लिए सामंजस्य नहीं बैठा पाता। अक्सर दो-एक दिन में स्थिति सामान्य हो जाती है। इसमें सिर दर्द, चक्कर आना, उनींदा रहना, थकान जैसी स्थितियाँ पैदा हो जाती है।

प्याज़ काटते वक्त आँखों में आँसू क्यों आते हैं?


जब हम प्याज़ काटते हैं तो आँखों में जलन क्यों होती है?
MAHJABI from BIJNOR


जब आप प्याज़ को काटते हैं तो उसके अंदर के कई सैल कटते हैं, जिनमें मिला अमीनो एसिड सल्फॉक्साइड और सल्फेनिक एसिड मिलकर प्रोपैनथियॉल एस-ऑक्साइड बनाते हैं। सल्फर के इस कम्पाउंड की तीखी भाप हमारी आँखों में जलन पैदा करती है। आँख की प्रकृति है कि उसमें कोई बाहरी तत्व आता है तो वह आँसू निकाल कर उसे धोने की कोशिश करती है।

Friday, September 16, 2011

च्यूइंग गम खाने पर पाबंदी किस देश में है?


च्यूइंग गम खाना किस देश में मना है?
विजय




सिंगापुर में 1992 से चयूइंग गम खाने और बेचने पर पाबंदी है। । इस कानून में 2004 और 2010 में कुछ मामूली बदलाव हुए हैं। सिडनी के हवाई अड्डे में च्यूइंग गम की बिक्री पर रोक है। अमेरिका के फ्लोरिडा हवाई अड्डे में भी इस तरह की रोक थी, जो बाद में हटा ली गई। इस रोक के पीछे वजह है सफाई। च्यूइंग गम का सेवन करने वाले इसका बचा हुआ पदार्थ कु4सियों और मेजों के नीचे चिपका जाते हैं, जिससे गंदगी फैलती है।

Thursday, September 1, 2011

इंसान के नाम रखने का चलन कब से शुरू हुआ?





यह बताना मुश्किल है कि नाम रखने का चलन कब और कहाँ से शुरू हुआ। इतना समझ में आता है कि नाम का रिश्ता पहचान से है। नाम व्यक्ति का ही नहीं वस्तु, वर्ग, समूह, समुदाय, स्थान, जाति, विषय वगैरह-वगैरह के होते हैं। यानी पहली बात पहचान की है। इस पहचान को कोई ध्वनि दी गई। वही नाम है। शुरू में नाम किसी जानवर को दिया गया होगा या किसी फल को या किसी तालाब, नदी या पेड़ को। पेड़ और फल को अलग-अलग पहचानने के लिए ऐसा करना पड़ा होगा। जबतक थोड़े से लोग होंगे नाम की जरूरत नहीं रही होगी, पर जब लोगों की संख्या बढ़ी होगी तब नाम भी बने होंगे। भाषा और लेखन का विकास होने पर इसमें सुधार हुए होंगे। बहरहाल दुनिया की सभी सभ्यताओं में व्यक्तियों के नाम मिलते हैं। यानी मनुष्य का नामकरण प्रागैतिहासिक काल में हो गया था।

Monday, August 29, 2011

स्वीकृत होने के दो महीने बाद लागू क्यों हुआ हमारा संविधान?


यदि भारतीय संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हो गया, तो इसे दो महीने बाद 26 जनवरी 1950 को ही लागू क्यों किया गया?
सतीश राठौर, कोटा



हालांकि संविधान सभा ने 26 नवम्बर 1949 को संविधान के प्रारूप को अंतिम रूप से स्वीकार कर लिया था, पर यह तय किया गया कि इसे 26 जनवरी से लागू किया जाए क्योंकि 26 जनवरी 1930 के लाहौर कांग्रेस-अधिवेशन में पार्टी ने पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पास किया था और अध्यक्ष पं जवाहर लाल नेहरू ने अपने भाषण में इसकी माँग की थी। संविधान के नागरिकता, चुनाव और संसद जैसी व्यवस्थाएं तत्काल लागू हो गईं थीं। राष्ट्रीय संविधान सभा ने ध्वज 22 जुलाई 1947 को ही स्वीकार कर लिया था। और वह 15 अगस्त 1947 से औपचारिक रूप से राष्ट्रीय ध्वज बन चुका था। 

पिनकोड क्या है और इसे क्यों बनाया गया है?



पिनकोड क्या है और इसे क्यों बनाया गया है?



पिनकोड यानी पोस्टल इंडेक्स नम्बर भारतीय डाकव्यवस्था के वितरण के लिए बनाया गया नम्बर है। छह संख्याओं के इस कोड में सबसे पहला नम्बर क्षेत्रीय नम्बर है। पूरे देश को आठ क्षेत्रीय और नवें फंक्शनल जोन में बाँटा गया है। इसमे दूसरा नम्बर उप क्षेत्र का नम्बर है। तीसरा नम्बर सॉर्टिंग डिस्ट्रिक्ट का नम्बर है। अंतिम तीन संख्याएं सम्बद्ध डाकघरों से जुड़ी हैं।

देश के नौ ज़ोन इस प्रकार हैः-

1.दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़

2.उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड

3.राजस्थान, गुजरात, दमण और दीव, दादरा और नगर हवेली

4.गोवा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़

5.आंध्र प्रदेश, कर्नाटक
6.तमिलनाडु, केरल, पुदुच्चेरी, लक्षद्वीप
7.उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, अंडमान और निकोबार
8.बिहार और झारखंड
9.आर्मी पोस्ट ऑफिस (एपीओ) और फील्ड पोस्ट ऑफिस (एफपीओ)

Thursday, August 11, 2011

साँप-सीढ़ी का खेल भारतीय है


साँप-सीढ़ी के खेल की शुरुआत कहाँ हुई?

साँप-सीढ़ी का खेल भारत की ही देन है। पुराने ज़माने में इसे मोक्ष-पातम कहते थे। इसका रिश्ता सद्कर्म और पाप से था। इस खेल को अंग्रेज अपने देश में ले गए और उसे स्नेक एंड लैडर्स नाम दिया। वहाँ से यह अमेरिका गया जहाँ इसे शूट्स एंड लैडर्स नाम दिया गया।


क्या ब्रेन और माइंड अलग-अलग होते हैं?

मस्तिष्क शरीर का एक अंग है और मन एक अवधारणा। दिमाग और हृदय दिल शरीर के दो महत्वपूर्ण अंग हैं। कई बार हम इन्हें मन के केन्द्र मान लेते हैं। मन हमारी मनोदशा है, जो पूरे शरीर में है, किसी एक अंग में नहीं। हाँ विचार, तर्क, स्मृतियाँ, उल्लास, अवसाद आदि का असर मस्तिष्क पर भी होता है और मस्तिष्क इन्हें प्रभावित भी करता है।

स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में कितना हीमोग्लोबीन होना चाहिए?

पुरुष 13.8 to 18.0 g/dL, स्त्री  12.1 to 15.1 g/dl, बच्चे 11 to 16 g/dL, गर्भवती स्त्री 11 to 12 g/dL । ये स्वस्थ व्यक्ति के मानक हैं। इनमें देश-काल और उम्र के आधार पर कमी-बेशी हो सकती है। 

पॉलीथीन की शुरुआत कब और कैसे हुई?

पॉलीथायलीन या पॉलीथीन दुनिया का सबसे लोकप्रिय प्लास्टिक है। पॉलीथीन सबसे पहले जर्मन केमिस्ट हैंस वॉन पैचमान ने सन 1898 में अचानक खोज लिया था। उन्होंने प्र.ग करते वक्त सफेद रंग के मोम जैसे पदार्थ को बनते देखा और उसका नाम पॉलीथीन रखा। औद्योगिक रूप पॉलीथीन का आविष्कार 1933 में नॉर्थविच इंग्लैंड एरिक फॉसेट और रेगिनाल्ड गिबसन से एक एक्सीडेंट में हो गया। इस एक्सीडेंट रूपी प्रयोग को दुबारा करना मुश्किल था, पर 1935 में इसे भलीभांति कर लिया गया। दरअसल एथिलीन और बेंजलडिहाइड के मिश्रण पर बहुत भारी प्रेशर डालना था, जिससे यह पदार्थ बनता था। बहरहाल आज यह तकनीक सामान्य हो गई है।

हमारे कद के पीछे भी कोई जीन काम करती है क्या?

हमारी आँखों का रंग, बालों और शरीर का रंग, और तमाम बातें जीन के कारण हैं तो हाइट भी उसके कारण होगी, पर आज निश्चयपूर्वक नहीं कहा जा सकता कि कौन सा जीन इसके पीछे है। अलबत्ता सन 2007 में यूरोपीय वैज्ञानिकों ने 5000 लोगों के डीएनए का अध्ययन करने के बाद पाया कि HMGA2 नाम के जीन से हाइट का रिश्ता है। बहरहाल आज भी वैज्ञानिक मानते हैं कि हाइट के लिए करीब बीसेक जीन्स जिम्मेदार हैं।

सायलेंट वैली कहाँ है? इसका नाम सायलेंट वैली क्यों है?

सायलेंट वैली केरल की नीलगिरि पहाड़ियों में पलक्कड़ जिले का एक सुरक्षित वन क्षेत्र है। इस जंगल की विशेषता है कि यहाँ प्रकृति के साथ लगभग न के बराबर छेड़छाड़ की गई है। सन 70 के दशक में यहाँ एक पनबिजली योजना लाने की कोशिस की गई, पर जनता के विरोध के कारण उसे अनुमति नहीं मिली। इस जंगल को सन 1847 में एक ब्रिटिश वनस्पतिशास्त्री रॉबर्ट वाइट ने खोजा था। स्थानीय लोग इसे सैरन्ध्रीवनम कहते हैं। सैरन्ध्री द्रोपदी का नाम है। कहते हैं कि अज्ञातवास के दौरान पांडव यहाँ आकर भी रहे। इसे साइलेंट वैली कहने के पीछे सबसे बड़ी वजह यहाँ की अजब प्राकृतिक शांति है। शायद सैरन्ध्री शब्द को बोलने में अंग्रेजों को दिक्कत थी इसलिए उससे मिलता-जुलता नाम उन्हें यह मिला। 

स्वतंत्र भारत की पहली महिला मंत्री कौन थीं?

राजकुमारी अमृत कौर

किस राजा ने सबसे पहले लड़ाई में रॉकेटों का इस्तेमाल किया?

मैसूर के राजा टीपू सुल्तान ने पहली बार लड़ाई में रॉकेटों का इस्तेमाल किया। सन 1780 में अंग्रेजों और मैसूर के बीच दूसरे युद्ध में। इसे पोल्लिलूर का युद्ध कहते हैं।


मुहम्मद रफी और लता मंगेशकर की अनबन का कारण क्या था? अनबन दूर होने के फौरन बाद दोनों ने कौनसा गीत गाया?

साठ के दशक में दोनों के बीच अनबन मुख्यतः ईगो के कारण थी। बताते हैं कि संगीत की रॉयल्टी या फीस का विवाद भी था। बहरहाल लम्बे अर्से तक दोनों ने साथ-साथ नहीं गाया। 1967 में फिल्म ज्वैल थीम में दिल पुकारे आ रे आ रे के साथ दोनों ने फिर से युगल गीत गाने शुरू कर दिए।

फिल्म अभिनेता ओम प्रकाश ने क्या फिल्मों का निर्माण और निर्देशन भी किया?

ओम प्रकाश अपने किस्म के शानदार अभिनेता थे। उन्होंने कुछ फिल्में भी बनाईं जो चली नहीं। उनकी फिल्मों के नाम हैं, भैयाजी, गेटवे ऑफ इंडिया, कन्हैया, चाचा जिन्दाबाद, संजोग और जहांआरा।

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