Thursday, April 4, 2019

लोकपाल की भूमिका?


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देश में लम्बे समय से एक ऐसे प्राधिकार की माँग की जा रही थी, जो भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जाँच करे. गत 17 मार्च को राष्ट्रपति ने देश के पहले लोकपाल के रूप में पिनाकी चन्द्र घोष की नियुक्ति की है. सन 2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में चले आंदोलन के बाद संसद ने सन 2013 में लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम पास किया था. लोकपाल राष्ट्रीय स्तर के और लोकायुक्त की नियुक्ति राज्य स्तर के मामलों के लिए की जानी है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पीसी घोष की नियुक्ति का निर्णय एक समिति ने किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन सदस्य थे. लोकपाल अधिनियम के अनुसार लोकपाल के अंतर्गत एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्यों की एक व्यवस्था होगी. इनमें आधे यानी चार न्यायिक सदस्य होंगे. इनके अलावा एक सचिव, एक जाँच निदेशक और एक अभियोजन निदेशक होंगे.

अब इसके बाद क्या होगा?

अब सबसे पहले लोकपाल संगठन की स्थापना होगी. इसकी दो मुख्य शाखाएं हैं. एक, जाँच शाखा और दूसरी अभियोजन शाखा. इनका कार्यक्षेत्र भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत लोक-सेवकों पर लगे आरोपों की जाँच करना और उनपर मुकदमा चलाना है. इन लोक-सेवकों में प्रधानमंत्री, मंत्री, सांसद तथा केन्द्र सरकार के ए, बी, सी और डी वर्ग के कर्मचारी आते हैं. लोकपाल अधिनियम ने कुछ मामलों में सीमाएं भी तय की हैं. मसलन प्रधानमंत्री के खिलाफ उन मामलों की जाँच नहीं की जा सकेगी, जो अंतरराष्ट्रीय सम्बन्धों, आंतरिक और बाहरी सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, नाभिकीय ऊर्जा और अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़े हैं. प्रधानमंत्री के खिलाफ जाँच तबतक नहीं हो सकेगी, जबतक लोकपाल की पूरी बेंच उसकी सुनवाई न करे और उसके कम से कम दो तिहाई सदस्यों की स्वीकृति न हो. प्रधानमंत्री के खिलाफ जाँच (यदि हो तो) बंद कमरे में होगी और यदि लोकपाल शिकायत को खारिज करें, तो जाँच से जुड़े रिकॉर्डों का न तो प्रकाशन होगा और न वे किसी को उपलब्ध होंगे. अधिनियम के अनुसार लोकपाल के अपने सदस्य भी लोक-सेवक की परिभाषा में आएंगे.

राज्यों की व्यवस्था?

भारत में संघीय व्यवस्था है. लोकायुक्तों की नियुक्ति राज्यों के अधीन होगी. अधिनियम के अनुसार राज्य विधानसभाएं इसके लिए कानून बनाएंगी. कई राज्यों में लोकायुक्तों की नियुक्तियाँ हुईं हैं, पर बड़ी संख्या में राज्यों ने अपने अधिनियम नहीं बनाए हैं. पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, पुदुच्चेरी, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और अरुणाचल प्रदेश ने लोकायुक्तों की नियुक्ति नहीं की है. अदालत ने इन राज्यों के मुख्य सचिवों से कहा था कि वे अदालत के सामने स्थिति की जानकारी रखें. अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम विधानसभाओं ने 2014 में लोकायुक्त विधेयक पास कर दिए थे. पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुदुच्चेरी विधानसभाओं ने भी अपने अधिनियम पास कर दिए. धीरे-धीरे नियुक्तियाँ की जा रहीं हैं.



Monday, April 1, 2019

संसद के कितने सत्र होते हैं?

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सामान्यतः हर साल संसद के तीन सत्र होते हैं। बजट (फरवरी-मई), मॉनसून (जुलाई-अगस्त) और शीतकालीन (नवंबर-दिसंबर)। बजट अधिवेशन को दो हिस्सों में विभाजित कर दिया जाता है। इन दोनों के बीच तीन से चार सप्ताह का अवकाश होता है। इस दौरान स्थायी समितियाँ विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान माँगों पर विचार करती हैं। इस साल से बजट सत्र जनवरी के अंतिम सप्ताह से शुरू करने का फैसला किया गया है।

राष्ट्रपति दोनों सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करते हैं। हरेक अधिवेशन की अंतिम तिथि के बाद छह मास के भीतर आगामी अधिवेशन के लिए सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करना होता है। सदनों को बैठक के लिए आमंत्रित करने की शक्ति राष्ट्रपति में निहित है, पर व्यवहार में इस आशय के प्रस्‍ताव की पहल सरकार द्वारा की जाती है। इन तीन के अलावा संसद के विशेष सत्र भी बुलाए जा सकते हैं।

भारत का पहला बजट कब और किसने पेश किया?

देश का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को आरके शण्मुगम चेट्टी ने पेश किया था। वे देश के पहले वित्तमंत्री थे और इस पद पर सन 1949 तक रहे।

वर्च्युअल करेंसी किसे कहते हैं?

वर्च्युअल करेंसी का मतलब है आभासी। यानी जो वास्तविक होने का आभास दे। कागजी नोट भी आभासी मुद्रा है। चूंकि सरकार ने जिम्मेदारी ली है, इसलिए कागज पर जिस राशि का भुगतान करने का आश्वासन होता है वह वास्तविक धन होता है। क्रेडिट कार्डों, शॉपिग सेंटरों और एयरलाइंस के लॉयल्टी पॉइंट्स का आप इस्तेमाल करते हैं। यह भी एक प्रकार से मुद्रा है। इसमें बिटकॉइंस का नाम और जुड़ गया है। यह भविष्य की आभासी मुद्रा है। बिटकॉइन एक ऑनलाइन करेंसी और भुगतान-प्रणाली है, जो धन का अंतरराष्ट्रीय संचरण संभव बनाती है। दुनिया भर में हजारों व्यापारी इस क्रिप्टो करेंसी को स्वीकार करते हैं। सुरक्षा की गारंटी देने के लिए क्रिप्टोग्राफी या कूटभाषा का प्रयोग करने के कारण ऐसा कहा जाता है। बिटकॉइन को एक नए प्रकार की करेंसी के रूप में देखा जा रहा है।
Rx (आरएक्स) का निशान डॉक्टर क्यों बनाते हैं?

दरअसल यह निशान Rx (आरएक्स) नहीं होता बल्कि R की अंतिम रेखा को आगे बढ़ाते हुए उसपर क्रॉस लगाकर बनता है। माना जाता है कि यह लैटिन शब्द रेसिपी का निशान है। नुस्खा यानी डॉक्टरी हिदायत। इलाज के लिए इस तरह लें। कुछ लोग इसे यूनानी जुपिटर का चिह्न जियस मानते हैं।

दुनिया की सबसे लंबी रेल सुरंग

विश्व की सबसे लंबी रेल सुरंग 1 जून, 2016 को स्विट्ज़रलैंड के ईस्टफील्ड से बोडियो तक शुरू हुई गोटहार्ड रेल सुरंग है। इस लाइन पर पूरी सेवाएं 11 दिसंबर 2016 से शुरू हुईं। स्विट्ज़रलैंड के आल्प्स पहाड़ों के नीचे बनी सुरंग से उत्तरी तथा दक्षिणी यूरोप को रेलवे लाइन से जोड़ा जा सकेगा। इस सुरंग से जर्मनी और इटली के बीच की दूरी कम हो गई है। यह सफर 3.40 घंटे था, जो अब 2.40 घंटे का हो गया है। 
राष्ट्रीय गणित दिवस
भारत में  राष्ट्रीय गणित दिवस महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की याद में मनाया जाता है। तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ। मनमोहन सिंह ने रामानुजन की 125वीं वर्षगांठ के मौके पर 26 दिसंबर 2011 आयोजित एक कार्यक्रम में वर्ष 2012 को राष्ट्रीय गणित वर्ष घोषित किया। साथ ही उनके जन्मदिन 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस भी घोषित किया। उनका जन्म 22 दिसम्बर 1887 को मद्रास से 400 किलोमीटर दूर इरोड नगर में हुआ था।





Sunday, March 31, 2019

सीएजी क्या होता है?


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भारत का नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक जिसे अंग्रेजी में कम्प्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल कहते हैं, जिसका संक्षिप्त रूप है सीएजी। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 द्वारा स्थापित एक प्राधिकारी है जो भारत सरकार, सभी प्रादेशिक सरकारों तथा सरकारी पूँजी से बने सभी सार्वजनिक उपक्रमों और संस्थाओं के सभी तरह के हिसाब-किताब की परीक्षा करता है। उसकी रिपोर्ट पर संसद की लोकलेखा समिति (पीएसी) तथा सार्वजनिक उपक्रमों की समिति विचार करती है। यह एक स्वतंत्र संस्था है, जिसपर सरकार का नियंत्रण नहीं होता। सीएजी की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। सीएजी ही भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा का भी मुखिया होता है। सीएजी से सम्बद्ध व्यवस्थाएं हमारे संविधान के अनुच्छेद 148 से 151 तक की गईं हैं। देश के वरीयता अनुक्रम में सीएजी का स्थान नौवाँ होता है, जो सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश के बराबर है। देश के वर्तमान सीएजी हैं राजीव महर्षि, जिन्होंने 25 सितम्बर 2017 को पदभार संभाला था। वे देश के 13वें सीएजी हैं। इसका कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की उम्र, जो भी पहले होगा, की अवधि के लिए होता है। उसे उसके पद से केवल उसी रीति से और उन्ही आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है। अपने पद पर न रह जाने के पश्चात या तो सरकार के या किसी राज्य की सरकार के अधीन वह किसी और पद का पात्र नहीं होगा।

सीएजी का काम क्या है?

संघ और राज्यों और किसी अन्य प्राधिकरण या निकाय के खातों के संबंध में संविधान का अनुच्छेद 149 कैग को शक्तियां अथवा अधिकार प्रदान करता है। इस संस्था के कर्तव्यों और शक्तियों को निर्दिष्ट करने के लिए संसद ने सीएजी (कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें) अधिनियम 1971 पास किया था। इस अधिनियम में 1976 में संशोधन भी किया गया था। सीएजी वस्तुतः सार्वजनिक धन का प्रहरी है। वह उस खर्च की गई धनराशि की जांच करता है, जिसे कार्यपालिका एक समान रूप से कानून द्वारा स्थापित और संसद के दिशा-निर्देशों के अनुसार उपलब्ध कराती है। वह केवल संसद के प्रति जवाबदेह है जो कार्यपालिका के प्रभाव से उसको स्वंतत्र बनाती है। वह निम्नलिखित रिपोर्टें राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है: 1।विनियोग खातों पर ऑडिट रिपोर्ट, 2।वित्तीय खातों का ऑडिट रिपोर्ट, 3।सार्वजनिक उपक्रमों पर लेखा-परीक्षा रिपोर्ट।

रिपोर्ट देने के बाद?

संघ के खातों से सम्बद्ध रिपोर्ट राष्ट्रपति को और राज्यों के खातों से सम्बद्ध रिपोर्ट सीएजी सम्बद्ध राज्यपालों को देते हैं। इसके बाद ये रिपोर्टें संसद या सम्बद्ध राज्य विधानसभाओं के पास भेजी जाती हैं। संसद और विधानसभाओं की समितियाँ जैसे लोकलेखा समिति, और कमेटी ऑन पब्लिक अंडरटेकिंग्स रिपोर्ट पर विचार करती हैं और यह देखती हैं कि क्या सरकारी व्यय में नीतियों का पालन किया गया है। वहाँ यह भी देखा जाता है कि किसी सरकारी निकाय की तरफ से कोई गड़गड़ी तो नहीं की गई है। फिर मामले को चर्चा के लिए संसद में पेश किया जाता है और उस पर कार्रवाई की जाती है।


एशेज ट्रॉफी का सम्बन्ध किस खेल से है?

एशेज ट्रॉफी इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जाने वाली क्रिकेट श्रृंखला का नाम है। दोनों देशो के बीच यह 1882 से खेली जा रही है। इस सीरीज का नामकरण ब्रिटिश मीडिया ने किया था। इसकी शुरुआत 1882 में हुई जब ऑस्ट्रेलिया ने ओवल में पहली बार इंग्लैंड टीम को उसी की धरती पर हराया। ऑस्ट्रेलिया से मिली इस करारी हार को ब्रिटिश मीडिया बर्दाश्त नहीं पाया। एक अखबार The Sports Times ने एक शोक संदेश छापा जिसमें लिखा था- इंग्लिश क्रिकेट का देहान्त हो चुका है। तारीख 29 अगस्त 1882, ओवल और अब इनका अंतिम संस्कार के बाद राख [ashes] ऑस्ट्रेलिया ले जाई जाएगी। जब 1883 में इंग्लिश टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर रवाना हुई तो इसी लाइन को आगे बढ़ाते हुए इंग्लिश मीडिया ने ashes वापस लाने की बात रखी “Quest to regain Ashes” बाद में विकेट की बेल्स को जलाकर जो राख बनी उसको ही एक Urn [राख रखने वाले बर्तन] में डाल कर इंग्लैंड के कप्तान इवो ब्लिग को दिया गया। वहीं से परम्परा चली आई और आज भी Ashes की ट्रॉफी उसी राख वाले बर्तन को ही माना जाता है और उसी की एक बड़ी डुप्लीकेट ट्रॉफी बना कर दी जाती है।12 से 18 माह के अंतराल में होने वाली एशेज सिरीज में पाँच टेस्ट खेले जाते हैं। 
गोलमेज वार्ता क्या होती है?
गोलमेज वार्ता जैसा नाम है वह बताता है काफी लोगों की बातचीत जो एक-दूसरे के आमने सामने हों। अंग्रेजी में इसे राउंड टेबल कहते हैं, जिसमें गोल के अलावा यह ध्वनि भी होती है कि मेज पर बैठकर बात करना। यानी किसी प्रश्न को सड़क पर निपटाने के बजाय बैठकर हल करना । यानी अनेक विचारों के व्यक्तियों का एक जगह आना। माना जाता है कि 12 नवम्बर 1930 को जब ब्रिटिश सरकार ने भारत में राजनीतिक सुधारों पर अनेक पक्षों से बातचीत की तो उसे राउंड टेबल कांफ्रेंस कहा गया। इस बातचीत के कई दौर हुए थे। 

Saturday, March 30, 2019

बॉडी लैंग्वेज क्या होती है?


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आप और अन्य सभी लोग अक्सर दूसरों को अच्छी तरह से समझने की बात करते हैं। ऐसा संभव होता है, बॉडी लैंग्वेज के माध्यम से। दरअसल बॉडी लैंग्वेज अपने आप में एक समूची भाषा है, जो आपके व्यक्तित्व से लेकर आपके मन मे क्या चल रहा है, यह सब बता सकती है। बॉडी लैंग्वेज या कहें आपके हाव-भाव, एक तरह की शारीरिक भाषा है, जिसमें शब्द भले न हों, लेकिन यह बहुत कुछ कहती है। यह आपके व्यक्तित्व को दर्शाती है।

हर हाव-भाव का एक अलग अर्थ होता है। यह आपके दिल-दिमाग में क्या चल रहा है, बता देती है। मसलन, किसी वक्त आपके अंदर गुस्सा, उदासी, मनोरंजन, खुशी जैसे भावों यह बॉडी लैंग्वेज आसानी से बता सकती है। सबसे महत्वपूर्ण है चेहरे का अध्ययन। चेहरे पर आए भाव नाराजगी, खुशी, जलन, चिंता और चंचलता को सामने ला देते हैं। कुछ पसंद नहीं आ रहा हो तो नाक सिकोड़ते हैं, मुंह फुला लेते हैं।

आँखों को बॉडी लैंग्वेज समझने का सबसे अहम हिस्सा कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। अगर आप संतुलित व सीधी अवस्था में हैं, तो यह आपके आत्मविश्वास को दर्शाती है। इसी प्रकार आपके बैठने की अवस्था भी बॉडी लैंग्वेज का अनिवार्य हिस्सा है। बैठने के दौरान अगर आप आगे की ओर झुक कर बैठते हैं, तो इसका मतलब यह है कि आप दोस्ताना हैं। अगर आप सिर उठाते समय मुस्कराते हैं, तो यह आपके चंचल मन होने की निशानी है। या फिर आप मजाकिया स्वभाव के भी हो सकते हैं। एक अनुमान के अनुसार इंसान चेहरे पर 2,50,000 हाव-भाव उत्पन्न कर सकता है। झूठ बोलने वाला इंसान नजरें मिलाकर बात नहीं कर सकता।

ट्रैफिक लाइट्स सबसे पहले कहाँ लगीं?
ट्रैफिक सिग्नल की शुरूआत रेलवे से हुई है। रेलगाड़ियों को एक ही ट्रैक पर चलाने के लिए बहुत ज़रूरी था कि उनके लिए सिग्नलिंग की व्यवस्था की जाए। 10 दिसम्बर 1868 को लंदन में ब्रिटिश संसद भवन के सामने रेलवे इंजीनियर जेपी नाइट ने ट्रैफिक लाइट लगाई। पर यह व्यवस्था चली नहीं। सड़कों पर व्यवस्थित रूप से ट्रैफिक सिग्नल सन 1912 में अमेरिका सॉल्ट लेक सिटी यूटा में शुरू किए गए। सड़कों पर बढ़ते यातायात के साथ यह व्यवस्था दूसरे शहरों में भी शुरू होती गई।

आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति कितनी पुरानी है?

आयुर्वेद विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। यह अथर्ववेद का उपवेद है। यह विज्ञान, कला और दर्शन का मिश्रण है। पुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार संचार की प्राचीनतम् पुस्तक ऋग्वेद है । विभिन्न विद्वानों ने इसका रचना काल ईसा के 3000 से भी ज्यादा साल पहले का माना है। इस संहिता में भी आयुर्वेद के अति महत्त्व के सिद्धान्त यत्र-तत्र विकीर्ण है। चरक, सुश्रुत, काश्यप आदि मान्य ग्रन्थ आयुर्वेद को अथर्ववेद का उपवेद मानते हैं। इससे आयुर्वेद की प्राचीनता सिद्ध होती है।

‘आयुर्वेद’ का अर्थ है, ‘जीवन का ज्ञान’-और यही संक्षेप में आयुर्वेद का सार है। आयु+वेद अर्थात आयुर्वेद। इस शास्त्र के आदि आचार्य अश्विनी कुमार माने जाते हैं जिन्होंने दक्ष प्रजापति के धड़ में बकरे का सिर जोड़ा था। अश्विनी कुमारों से इंद्र ने यह विद्या प्राप्त की। इंद्र ने धन्वंतरि को सिखाया। काशी के राजा दिवोदास धन्वंतरि के अवतार कहे गए हैं। उनसे जाकर सुश्रुत ने आयुर्वेद पढ़ा। अत्रि और भारद्वाज भी इस शास्त्र के प्रवर्तक माने जाते हैं। आय़ुर्वेद के आचार्य ये हैं— अश्विनी कुमार, धन्वंतरि, दिवोदास (काशिराज), नकुल, सहदेव, अर्कि, च्यवन, जनक, बुध, जावाल, जाजलि, पैल, करथ, अगस्त, अत्रि तथा उनके छः शिष्य (अग्निवेश, भेड़, जातूकर्ण, पाराशर, सीरपाणि हारीत), सुश्रुत और चरक।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Friday, March 29, 2019

भारत ने अपना पहला एकदिनी क्रिकेट मैच कब खेला?

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भारत ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय एकदिनी मैच 23 जुलाई 1974 को इंग्लैंड के विरुद्ध हैडिंग्ले में खेला। यह प्रूडेंशियल ट्रॉफी का पहला मैच था। इसमें इंग्लैंड ने भारत को चार विकेट से हराया।

ओलिंपिक में क्रिकेट क्यों नहीं?

1896 में एथेंस में हुए पहले ओलिम्पिक खेलों में क्रिकेट को भी शामिल किया गया था, पर पर्याप्त संख्या में टीमें न आ पाने के कारण, क्रिकेट प्रतियोगिता रद्द हो गई। सन 1900 में पेरिस में हुए दूसरे ओलिम्पिक में चार टीमें उतरीं, पर बेल्जियम और नीदरलैंड्स ने अपना नाम वापस ले लिया, जिसके बाद सिर्फ फ्रांस और इंग्लैंड की टीमें बचीं। उनके बीच मुकाबला हुआ, जिसमें इंग्लैंड की टीम चैम्पियन हुई। अब उम्मीद की जा रही है कि 2024 के ओलिम्पिक खेलों में टी-20 क्रिकेट को शामिल किया जाए।

फैट जीन क्या है?

ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने ‘एफटीओ’ नामक विशेष कोशिका खोज निकाली, जिसकी वजह से मोटापा, हृदयघात और मधुमेह जैसी बीमारियां देखने को मिलती हैं। जिनके शरीर में यह खास किस्म का जीन पाया जाता है, उन्हें अगर एक प्रकार का आहार दिया जाए, तो वह उन लोगों के मुकाबले अपना वजन बढ़ा हुआ महसूस करते है, जिनके शरीर में यह जीन नहीं होता है। वैज्ञानिकों का यह भी दावा है कि इस जीन को खोज लिया गया है, जो कोशिकाओं में चर्बी जमा होने के लिए जिम्मेदार हैं। इन्हें फिट-1 व फिट-2 (फैट इंड्यूसिंग ट्रांसक्रिप्ट 1-2) जीन कहा जाता है।

प्रशंसक के अर्थ में ‘फैन’ शब्द कैसे बना?

दो साल पहले फिल्म 'फैन' के नायक थे शाहरुख खान। व्यक्तिगत बातचीत में कहीं शाहरुख ने कहा, फैन शब्द मुझे पसंद नहीं। उनका कहना था, फैन शब्द फैनेटिक (उन्मादी) से निकला है। यह कई बार नकारात्मक भी होता है। आप ने अक्सर लोगों को यह कहते सुना होगा कि मैं अमिताभ का फैन हूँ या सचिन तेंदुलकर, रेखा या विराट कोहली का फैन हूँ। कुछ लोग मज़ाक में कहते हैं कि मैं आपका पंखा हूँ, क्योंकि फैन का सर्वाधिक प्रचलित अर्थ पंखा ही है।

‘फैन’ का अर्थ उत्साही समर्थक या बहुत बड़ा प्रशंसक भी होता है, पर इसका यह अर्थ हमेशा से नहीं था। इसका जन्म अमेरिका में बेसबॉल के मैदान में हुआ। इसका पहली बार इस्तेमाल किया टेड सुलीवॉन ने, जो सेंट लुईस ब्राउन्ज़ बेसबॉल टीम के मैनेजर थे। सन 1887 में फिलाडेल्फ़िया की एक खेल पत्रिका ‘स्पोर्टिंग लाइफ़’ में इस शब्द के बारे में जानकारी दी गई। इसमें बताया गया कि फैन शब्द ‘फैनेटिक’ का संक्षिप्त रूप है।

टेड सुलीवॉन ने बताया, ‘मैं टीम के मालिक क्रिस से बात कर रहा था। क्रिस के निदेशक मंडल में बेसबॉल के दीवाने भी थे जो मेरे कामों में हमेशा दखल देते रहते और क्रिस को यह बताते रहते कि टीम को कैसे चलना चाहिए। मैंने क्रिस से कहा कि मुझे इतने सारे फैनेटिक्स की सलाह की ज़रूरत नहीं है। इसी बातचीत में संक्षेप में फैन्ज़ शब्द बन गया। मैंने कहा कि क्रिस यहां बहुत सारे फैन्ज़ हैं। बाद में अखबारों में यह शब्द चल निकला।’
पहले यह शब्द अमेरिकी खेल प्रेमियों के लिए ही प्रयोग होता रहा, लेकिन बाद में यह दूसरे खेलों और फिर जीवन के सभी क्षेत्रों में छा गया। इस शब्द से फैनडम शब्द बना। फिर फैन मेल, फैन लेटर और फैन क्लब तक बन गए।



















Thursday, March 28, 2019

प्रस्ताव 1267 क्या है?


https://epaper.prabhatkhabar.com/2087512/Awsar/Awsar#page/6/1
अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को काबू करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के इस प्रस्ताव का जिक्र हाल में जैशे-मोहम्मद के सरगना मसूद अज़हर को आतंकवादी घोषित करने के संदर्भ में हुआ था. यह प्रस्ताव 15 अक्तूबर, 1999 को पास हुआ था. अफ़ग़ानिस्तान में बिगड़ते हालात के मद्देनज़र सुरक्षा परिषद ने ओसामा बिन लादेन को आतंकवादी घोषित करने के लिए इस प्रस्ताव को पास किया था. इसके पहले सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव संख्या 1189 (1998), 1193 (1998) और 1214 (1998) पास किए थे. इन तीनों प्रस्तावों को वापस लेकर यह प्रस्ताव 1267 पास किया गया. इसका उद्देश्य ओसामा बिन लादेन और अल कायदा से जुड़े अन्य संगठनों को आतंकवादी घोषित करने के अलावा ऐसे संगठनों पर लागू होने वाले प्रतिबंधों की एक वैश्विक-व्यवस्था की स्थापना करना भी था. इसके तहत अफ़ग़ानिस्तान की तत्कालीन तालिबान सरकार पर भी प्रतिबंध लगाए गए थे. इस व्यवस्था के तहत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक समिति बनी है। इसके अलावा ऐसे व्यक्तियों और संस्थाओं की सूची है, जो अल कायदा और अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े हैं. साथ ही ऐसे कानूनों की रूपरेखा है, जो प्रतिबंध लगाए जाने के बाद सम्बद्ध देशों को लागू करने होते हैं. यह समिति सभी देशों से रिपोर्ट प्राप्त करती है, जिसमें इस बात का विवरण होता है कि प्रतिबंध किस प्रकार से लागू हो रहे हैं.

क्या जैश पर प्रतिबंध है?

जैशे-मोहम्मद की स्थापना सन 2000 में पाकिस्तान में आईएसआई की मदद से हुई थी. सन 2001 में ही प्रस्ताव 1267 के तहत उसे आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया गया था. यह संगठन कश्मीर को भारत से अलग करने के लिए बनाया गया था. उसे आतंकवादी साबित करने की घोषणा उसके अल कायदा के साथ रिश्तों के आधार पर थी. इसी संगठन ने सन 2001 में जम्मू कश्मीर विधान सभा और भारतीय संसद पर हमले किए. जनवरी 2016 में पठानकोट हवाई अड्डे पर हमले, उसी साल अफ़ग़ानिस्तान के मजारें शरीफ स्थित भारतीय मिशन और फिर उड़ी के हमलों में उसका हाथ था. अब पुलवामा में उसका हाथ है, जिसकी जिम्मेदारी उसने ली है. इसके अलावा अनेक छोटी-मोटी गतिविधियों में इसका हाथ रहा है. इसका मुखिया मसूद अज़हर है, जो भारतीय जेल में कैद था और उसे सन 1999 में इंडियन एयरलाइंस की उड़ान संख्या 814 के अपहरण के बाद छुड़ाया गया था.

प्रतिबंध में होता क्या है?

यह प्रतिबंध लगने के बाद संगठनों के सभी साधनों यानी बैंक खाते वगैरह को सरकारें अपने कब्जे में ले लेतीं हैं. सम्बद्ध सरकारों को यह भी सुनिश्चित करना होता है कि इन संगठनों को किसी प्रकार की मदद न मिलने पाए. इस प्रस्ताव के बाद 19 दिसम्बर, 2000 को सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव 1333 भी पास किया था, जिसका उद्देश्य था तालिबान को किसी प्रकार की फौजी मदद रोकना तथा उसके कैम्पों को बन्द कराना. इस सूची में दर्ज व्यक्तियों पर यात्रा सम्बद्ध प्रतिबंध भी होते हैं. हालांकि जैश पर प्रतिबंध के बावजूद पिछले 18-19 साल में जैश का विस्तार ही हुआ है.



Friday, March 15, 2019

युद्धबंदी क्या होते हैं?


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नाम से स्पष्ट है कि युद्ध के दौरान दूसरे देश में पकड़े गए सैनिक को युद्धबंदी कहते हैं. इनमें सेना से सम्बद्ध असैनिक कर्मी भी हो सकते हैं. प्राचीन काल में इन बंदियों के जीवन और रिहाई की सम्भावनाएं बहुत कम होती थीं, उन्हें या तो मार दिया जाता था या गुलाम बनाकर रखा जाता था. पर बीसवीं सदी आते-आते इस सिलसिले में काफी बदलाव आए हैं. खासतौर से दूसरे विश्व युद्ध के बाद. अलबत्ता उन्नीसवीं सदी में इस विषय पर वैश्विक सहमति बनाने के प्रयास शुरू हो गए थे. सन 1874 में रूस के ज़ार अलेक्जेंडर द्वितीय की पहल पर यूरोप के 15 देशों के प्रतिनिधि ब्रसेल्स में एकत्र हुए और उन्होंने युद्धों से जुड़े नियमों पर एक अंतरराष्ट्रीय संधि का प्रारूप तैयार किया. अंतरराष्ट्रीय कानूनों का एक संस्थान बना, जिसके तहत 1880 में ऑक्सफोर्ड में इस सिलसिले में एक मैनुअल तैयार किया गया. इसके बाद 1899 और 1907 में हेग में हुए दो सम्मेलनों में नियमों को स्पष्ट किया गया.

जिनीवा संधि क्या है?

इन व्यवस्थाओं को और दुरुस्त किया गया सन 1929 के जिनीवा सम्मेलन में. वस्तुतः चार महत्वपूर्ण जिनीवा संधियों में युद्ध के ज्यादातर नियमों को स्वीकार किया गया था, इनमें भी 1949 की तीसरी संधि सबसे महत्वपूर्ण है. तीसरी संधि के अनुच्छेद 4 में व्यवस्था है कि गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को टॉर्चर नहीं किया जा सकता. साथ ही उस व्यक्ति को अपना नाम, जन्मतिथि, रैंक और सर्विस नम्बर (यदि हो तो) से ज्यादा जानकारी देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता. ऐसे मौकों पर इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेडक्रॉस मानवीय प्रश्नों को देखती है और सहायता पहुँचाती है. पहले विश्वयुद्ध की समाप्ति होने तक करीब 80 लाख सैनिकों ने समर्पण किया था. उस समय हेग सम्मेलनों के नियम ही लागू होते थे. इनमें बड़ी संख्या में सैनिक मर गए. दूसरे विश्वयुद्ध में इससे भी बड़ी संख्या में सैनिक युद्धबंदी बनाए गए. सन 1971 के युद्ध के बाद भारत ने पाकिस्तान के 90,368 सैनिकों को युद्धबंदी बनाया था.   

भारत-पाक संधि?

चूंकि भारत और पाकिस्तान के बीच इस वक्त कोई घोषित युद्ध नहीं था, इसलिए उन्हें युद्धबंदी कहना भी ठीक नहीं होगा. भारत और पाकिस्तान की सीमा पर अक्सर इधर या उधर के लोग भटक कर आ जाते हैं. इनमें औसतन तीन-चार सैनिक होते हैं. दोनों देशों में जिनीवा संधि के अलावा अनौपचारिक सहमति है और ऐसे व्यक्ति ज्यादा से ज्यादा एक हफ्ते में वापस अपने देश में भेज दिए जाते हैं. यों जिनीवा संधि के तहत इसकी कोई समय सीमा तय नहीं है. सन 1999 में हुए करगिल कांड के समय भारतीय वायुसेना के पायलट के नचिकेता इसी तरह पाकिस्तानी क्षेत्र में पकड़े गए थे. उनकी वापसी आठ दिन में हो गई थी.

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