Thursday, December 5, 2019

बारकोड क्या होता है?



बारकोड मोटे तौर पर किसी वस्तु के बारे में जानकारी देने वाले डेटा का मशीन से पढ़े जाने लायक ऑप्टिकल विवरण होता है। मूलतः शुरूआती बारकोडों में अनेक समांतर रेखाओं की मोटाई और उनके बीच की व्यवस्थित दूरी उस विवरण को व्यक्त होती थी। यह एक आयामी व्यवस्था थी, अब इनमें चतुष्कोण, पंचकोण, डॉट और अन्य ज्यामितीय संरचनाओं यानी दो आयामी व्यवस्था का इस्तेमाल भी होने लगा है। शुरू में बारकोड को पढ़ने के लिए ऑप्टिकल स्कैनरों और बारकोड रीडर आते थे, पर अब डेस्कटॉप प्रिंटरों और स्मार्टफोनों में भी इसकी व्यवस्था होने लगी है।
साठ के दशक में अमेरिकन रेलरोड्स की एसोसिएशन ने बारकोड का चलन शुरू किया था। इसका विकास जनरल टेलीफोन एंड इलेक्ट्रॉनिक्स (जीटीई) ने किया था। इसके तहत इस्पात की पटरियों की पहचान के लिए उनमें रंगीन पट्टियाँ लगाई जाती थीं। ये पट्टियाँ उस सामग्री के स्वामित्व, उस उपकरण के टाइप और पहचान नम्बर की जानकारी देती थीं। गाड़ी के दोनों और ये पट्टियाँ लगी होती थीं। इन प्लेटों को यार्ड के गेट पर लगा स्कैनर पढ़ता था।
जब सुपरमार्केट में सामान के भुगतान की व्यवस्था में इस्तेमाल किया गया तो उसमें काफी सफलता मिली। इसके बाद यह व्यवस्था दुनिया भर में चलने लगी। इसके बाद ऑटोमेटिक आइडैंटिफ़िकेशन एंड डेटा कैप्चर (एआईडीसी) नाम से यह प्रणाली दूसरे कई कामों में भी शुरू की गई। युनीवर्सल प्रोडक्ट कोड (यूपीसी) नाम से एक और सिस्टम भी सामने आया। इक्कीसवीं सदी में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडैंटिफ़िकेशन की शुरूआत भी हुई। अस्पताल में मरीज का पूरा विवरण बारकोड के मार्फत पढ़ा जा सकता है, किताब के बारे में जानकारी बारकोड से मिल जाती है, हर तरह के उत्पाद की कीमत बारकोड बताता है।

ऐसा देश जहाँ रविवार की छुट्टी नहीं होती?

रविवार की छुट्टी मूलतः ईसाई परम्परा है। बाइबिल के अनुसार ईश्वर ने पृथ्वी की रचना छह दिन में की। सातवाँ दिन आराम का और ईश्वर की प्रार्थना का दिन है। हर देश में रविवार को छुट्टी नहीं होती। हमारे पड़ोस में नेपाल है, जहाँ शनिवार को साप्ताहिक छुट्टी होती है। बांग्लादेश है जहाँ शुक्रवार को छुट्टी होती है। बड़ी संख्या में इस्लामिक देशों में शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश होता है। भारत में अंग्रेजी राज के आगमन के बाद रविवार की छुट्टी की परम्परा शुरू हुई।


नक्षत्र क्या होते हैं?

नक्षत्र यानी स्टार या सितारे जो ऊर्जा पैदा करते हैं। जैसे हमारा सूर्य। संपूर्ण सूर्य के गोले में 13 लाख पृथ्वियां समा सकती है। सूर्य के बाहरी वातावरण यानी फोटोस्फीयर का तापमान 6000 डिग्री और उसके केंद्र में तापमान 1.5 करोड़ डिग्री सैल्शियस या उससे भी ज्यादा हो सकता है। इसलिए किसी भी प्राणी या यंत्र का वहाँ तक पहुँचना सम्भव नहीं है। हाँ उसके अध्ययन के लिए अंतरिक्ष यान भेजे जाते हैं। भारत भी अगले कुछ वर्षों में आदित्य नाम से एक यान भेजने की योजना बना रहा है।


आरटीजीएस और आईएफएससी कोड क्या है?
यह बैंकों के धनराशि लेन-देन की व्यवस्था है। भारतीय बैंक रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) और नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) प्रणाली के मार्फत काम करते हैं। आमतौर पर धनराशि का ट्रांसफर इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग सर्विसेज (ईसीएस) के मार्फत होता है। इस व्यवस्था के तहत बैंकों की ब्रांचों को इंडियन फाइनेंशियल सिस्टम कोड (आईएफएससी) प्रदान किए गए हैं। यह कोड चेक पर लिखा रहता है। आम आदमी को जल्द और सही सेवा देने के लिए ही इन्हें बनाया गया है।





Wednesday, December 4, 2019

कोरम क्या होता है?


कोरम शब्द मूलत: लैटिन भाषा का है जो अंग्रेजी में भी चलता है। अब यह भारतीय भाषाओं में भी चलने लगा है। हिंदी में इसका समानार्थी शब्द गणपूर्ति है। किसी सभा, संसद, या संस्था की बैठक के लिए जरूरी न्यूनतम सदस्यों की संख्या को कोरम या गणपूर्ति कहते हैं। माना जाता है कि यदि इस न्यूनतम आवश्यक संख्या में सदस्य उपस्थित नहीं हों तो सभा वैध नहीं होगी। युनाइटेड किंगडम में हाउस ऑफ कॉमंस के लिए 40 सदस्यों की न्यूनतम उपस्थिति को और हाउस ऑफ लॉर्ड्स में किसी विषय पर मतदान होना हो तो 30 सदस्यों की न्यूनतम उपस्थिति होनी चाहिए, पर केवल चर्चा के लिए 3 सदस्य ही काफी हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 100 के अनुसार संसद के दोनों सदनों में गणपूर्ति सदन के कुल सदस्यों की संख्या का कम से कम दसवाँ भाग होगी। संविधान में लिखा गया है कि यदि सदन के अधिवेशन के दौरान गणपूर्ति नहीं है तो सभापति या अध्यक्ष या उस रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति का यह कर्तव्य होगा कि वह सदन को स्थगित कर दे।

तेलंगाना नाम कैसे पड़ा?

भारत के आन्ध्र प्रदेश से अलग करके एक नया राज्य बना है तेलंगाना। इस इलाके में मान्यता है कि इस इलाके में लिंग के रूप में शिव तीन पर्वतों पर प्रकट हुए। ये हैं कालेश्वरम, मल्लिकार्जुन और द्राक्षाराम। ये पर्वत इस इलाके की सीमा बनाते हैं और इसीलिए इसे त्रिलिंग देश कहा जाता है जो तेलंगाना हो गया है। तेलुगु शब्द की उत्पत्ति भी इसी त्रिलिंग से है। यहाँ की भाषा त्रिलिंग (तेलुगु) कहलाई। 'तेलंगाना' शब्द का अर्थ है- 'तेलुगु भाषियों की भूमि'।

टोल फ्री नम्बर क्या होता है?

टोल फ्री नम्बर सेवा आमतौर पर 800, 0800 या 1800 जैसे नम्बरों से शुरू होती है। इसमें फोन करने वाले को पैसा नहीं देना होता है, बल्कि जिसके पास कॉल जा रही है उसे देना होता है। सबसे पहले इंग्लैंड के पोस्ट ऑफिस ने 1960 के दशक में इस तरह की सेवा शुरू की थी। व्यावसायिक तरीके से 2 मई 1967 को अमेरिका की एटीएंडटी टेलीफोन सेवा ने यह सर्विस शुरू की। शुरू में होटल किराए पर कार और टैक्सी सेवाओं ने इसका लाभ उठाया। अब तो ज्यादातर उपभोक्ता सामग्री बेचने वाली कम्पनियाँ आफ्टर सेल्स सर्विस के लिए इसका इस्तेमाल करती हैं।

जेट लैग क्या होता है?

जेट लैग एक मनो-शारीरिक दशा है, जो शरीर के सर्केडियन रिद्म में बदलाव आने के कारण पैदा होती है। इसे सर्केडियन रिद्म स्लीप डिसॉर्डर भी कहते हैं। इसका कारण लम्बी दूरी की हवाई यात्रा खासतौर से पूर्व से पश्चिम या पश्चिम से पूर्व एक टाइम ज़ोन से दूसरे टाइम ज़ोन की यात्रा होती है। अक्सर शुरुआत में नाइट शिफ्ट पर काम करने आए लोगों के साथ भी ऐसा होता है। आपका सामान्य जीवन एक खास समय के साथ जुड़ा होता है। जब उसमें मूलभूत बदलाव होता है तो शरीर कुछ समय के लिए सामंजस्य नहीं बैठा पाता। अक्सर दो-एक दिन में स्थिति सामान्य हो जाती है। इसमें सिर दर्द, चक्कर आना, उनींदा रहना, थकान जैसी स्थितियाँ पैदा हो जाती है।




मंत्रिमंडल को कैबिनेट क्यों कहते हैं?



कैबिनेट एक अनौपचारिक व्यवस्था है, जिसने औपचारिक रूप धारण कर लिया है। संविधान में मंत्रिपरिषद या कौंसिल ऑफ मिनिस्टर्स की व्यवस्था है। कैबिनेट शब्द हमने ब्रिटिश संसदीय प्रणाली से लिया है, जिसमें कुछ वरिष्ठ मंत्री इसके सदस्य होते हैं, जो प्रधानमंत्री के साथ मिलकर नीतिगत निर्णय करते हैं। पुराने जमाने में ये सदस्य जिस कक्ष में बैठकर मंत्रणा करते थे, उसे केबिन कहा जाता था. उससे ही कैबिनेट शब्द बना।

एफएम और एएम रेडियो में क्या अंतर है?

एफएम का अर्थ है फ्रीक्वेंसी मॉड्यूलेशन और एएम का मतलब है एम्प्लीट्यूड मॉड्यूलेशन। एएम तकनीक उन्नीसवीं सदी में तैयार की गई थी, जबकि एफएम तकनीक का विकास 1930 के दशक में हुआ। एएम में बाहरी असर से आवाज में फर्क पड़ सकता है। इसमें बैकग्राउंड का शोर काफी होता है। एफएम में ऐसा नहीं होता। अलबत्ता एफएम सिग्नल को भौतिक रुकावट प्रभावित करती है।

हेलेना द्वीप कहाँ है?
सेंट हेलेना कुंस्तुनतुनिया (या कांस्टेंटिनोपल) के संत हेलेना के नाम पर रखा गया दक्षिण अटलांटिक महासागर में अफ्रीका के तट से करीब 1950 किलोमीटर दूर एक द्वीप है। यह छोटा सा द्वीप करीब 16 किलोमीटर लंबा और 8 किलोमीटर चौड़ा है। यह द्वीप कभी ज्वालामुखी था। इसका इतिहास करीब 515 साल पुराना है। सन 1502 में पुर्तगालियों ने इस निर्जन द्वीप की खोज की थी। उसके पहले यह निर्जन था। अब दुनिया में ब्रिटेन के बचे हुए सिर्फ दो उपनिवेश हैं। एक बरमूडा और दूसरा संत हेलेना द्वीप। इसकी राजधानी जेम्सटाउन है और यहां की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है। सन 2016 की जनगणना में यहाँ की आबादी थी 4534।

समुद्र कितना गहरा होता है?
समुद्रों की गहराई अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग होती है। सारी दुनिया के सागरों की औसत गहराई 12,100 फुट है। इसकी तुलना सबसे ऊँचे पर्वत शिखर से करें जिसकी ऊँचाई 29,029 फुट है। दुनिया में सबसे गहरा सागर पश्चिमी प्रशांत महासागर के मैरियाना ट्रेंच में है, जिसे चैलेंजर डीप कहा जाता है। इसकी गहराई को सबसे पहले 1875 में ब्रिटिश पोत एचएमएस चैलेंजर के नाविकों ने नापा था। यह गहराई 35,755 से लेकर 35,814 फुट (10,898 से लेकर 10,916 मीटर) के बीच है।


आधी रात में सूरज किस देश में उगता है?

उत्तरी ध्रुव के काफी करीब है नॉर्वे। इस इलाके में गर्मियों में रात के बारह बजे के बाद तक सूरज चमकता है। रातें कुछ घंटे की होती हैं, उस दौरान भी सूरज क्षितिज के करीब होता है इसलिए रातें अंधियारी नहीं होतीं। उसे अर्धरात्रि के सूर्य वाला देश कहते हैं। नॉर्वे के अलावा यूरोप से बहुत से देशों में रात देर से होती है।





पेंग्विन पक्षी है या जलचर?


पेंग्विन एक प्रकार का पक्षी है जो उड़ नहीं पाता, पर काफी समय पानी के अंदर  बिता सकता है। इनकी 17 प्रजातियाँ मिलती हैं। पेंग्विन के नाम पर हमें लगता है कि वे सिर्फ अंटार्कटिका के बर्फीले इलाकों में ही मिलते होंगे। ऐसा नहीं है। वे न्यूजीलैंड-ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में भी मिलते हैं।
दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप कौन सा है?
यदि आपका आशय महाद्वीप से नहीं है तब ग्रीनलैंड सबसे बड़ा द्वीप है जिसका क्षेत्रफल 21,30,800 वर्ग किलोमीटर है। इसके बाद न्यूगिनी है जिसका क्षेत्रफल 7,85, 753 वर्ग किलोमीटर है। इसके बाद बोर्नियो और मैडागास्कर द्वीप हैं। सबसे छोटे महाद्वीप ऑस्ट्रेलिया का क्षेत्रफल 76,00,000 वर्ग किलोमीटर है।
नील आर्मस्ट्रांग ने चन्द्रमा पर अपना कौन सा पैर रखा?
नील आर्मस्ट्रांग ने पहले बायां पैर बाहर निकाला और चंद्रमा की सतह पर रखा। उनका दायां पैर लैंडिग पैड पर ही था और कहा, ‘इंसान का यह छोटा सा कदम, मनुष्य-जाति के लिए लम्बी छलांग है।’ यह बात 21 जुलाई 1969 की है।
गुलाब का जीवन कितना होता है?
गुलाब के पेड़ की ठीक से देखभाल की जाए तो वह काफी लम्बे समय तक फूल देता रहता है। पेड़ की शाखाओं को समय पर काटना होता है। गुलाब की सौ से ज्यादा प्रजातियाँ दुनिया में पाई जाती हैं। जंगली गुलाबों से लेकर हाइब्रिड गुलाब तक होते हैं। डाली से तोड़े जाने के बाद पानी भरे गुलदान में पाँच-छह दिन तक वे खिले रह सकते हैं। डाली में रहने पर इससे भी ज्यादा समय तक रह सकते हैं। यों तोड़े जाने के बाद पानी में न रखा जाए तो एक दिन बाद कुम्हलाने लगते हैं.
दुनिया का पहला रेडियो स्टेशन?
24 दिसंबर 1906 की शाम कनाडा के वैज्ञानिक रेगिनाल्ड फेसेंडेन ने जब अपना वॉयलिन बजाया और अटलांटिक महासागर में तैर रहे तमाम जहाजों के रेडियो ऑपरेटरों ने उस संगीत को अपने रेडियो सेट पर सुना, वह दुनिया में रेडियो प्रसारण की शुरुआत थी। पर व्यावसायिक दृष्टि से माना जाता है कि 2 नवम्बर 1920 को पिट्सबर्ग, पेंसिल्वेनिया में दुनिया का पहला कॉमर्शियल लाइसेंस प्राप्त रेडियो स्टेशन स्थापित किया गया। यह आज भी सक्रिय है और सीबीएस रेडियो का हिस्सा है। इसके पहले 1918 में ली द फॉरेस्ट ने न्यूयॉर्क के हाई ब्रिज इलाके में दुनिया का पहला रेडियो स्टेशन शुरु किया। पर कुछ दिनों बाद ही पुलिस को ख़बर लग गई और रेडियो स्टेशन बंद करा दिया गया।

Tuesday, December 3, 2019

विश्व का सबसे ऊँचा पेड़ कौन सा है?


दुनिया का सबसे ऊँचा जीवित पेड़ है रेडवुड नेशनल पार्क, कैलिफोर्निया में खड़ा कोस्ट रेडवुड जिसकी ऊँचाई है 115.66 मीटर यानी 379 फुट। कुतुब मीनार से भी ऊँचे इस पेड़ की तुलना कुछ और चीजों से करें तो पाएंगे कि यह अमेरिकी संसद भवन और स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी से भी ज्यादा ऊँचा है। और सबसे बड़ा यानी सबसे ज्यादा जगह घेरने वाला सिंगल स्टैम पेड़ है जनरल शर्मन। आसानी से समझने के लिए सबसे ज्यादा लकड़ी देने वाला पेड़। जनरल शर्मन पेड़ अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के सेक्योवा नेशनल पार्क में मौजूद है। यह इतिहास में ज्ञात जीवित पेड़ों में सबसे ऊँचा नहीं है। दरअसल यह मनुष्यों को ज्ञात सबसे विशाल वृक्ष भी नहीं है। ट्रिनिडाड, कैलिफोर्निया के पास क्रैनेल क्रीक जाइंट पेड़ जनरल शर्मन के मुकाबले 15 से 25 प्रतिशत ज्यादा बड़ा था। पर उस पेड़ को 1940 के दशक में काट डाला गया।
अहिंसा सिल्क क्या है?
महात्मा गांधी सिल्क पहनने का विरोध करते थे, क्योंकि इसे तैयार करने में रेशम के कीड़े की हत्या की जाती है। पर दुनिया में सिल्क तैयार करने की केवल एक विधि ही नहीं है। अहिंसा सिल्क अलग ढंग के कीड़ों से बनाई जाती है। इसमें जब कीड़ा सिल्क छोड़ देता है तब उसे एकत्र किया जाता है। इसे वाइल्ड सिल्क भी कहा जाता है। दुनिया में वाइल्ड सिल्क के कीड़ों की 500 प्रजातियाँ हैं। इस सिल्क में एक धागा नहीं मिलता, बल्कि कपास की तरह की रुई मिलती है इससे धागा बनाया जाता है।
भारत में प्रशासनिक सेवाएं कब शुरू हुईं?
भारत में सन 1857 की लड़ाई के बाद ईस्ट इंडिया कम्पनी शासन के स्थान पर अंग्रेजी सरकार का शासन स्थापित हो गया था। गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1858 के तहत भारत में नागरिक सेवाओं के लिए अफसरों की नियुक्ति के नियम भी बनाए गए। इस सेवा को पहले इम्पीरियल सिविल सर्विस और बाद में इंडियन सिविल सर्विस का नाम दिया गया। शुरुआत में उनकी भरती की परीक्षाएं केवल लंदन में होती थीं। बाद में इलाहाबाद में भी होने लगीं। नीचे के पदों को भारतीय कर्मचारियों से भरा जाता था। सन 1923 में ब्रिटिश सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा में स्थानीय भागीदारी के लिए एक आयोग बनाया जिसके अध्यक्ष थे लॉर्ड ली ऑफ फेयरहैम। इसके पहले इंस्लिंगटन कमीशन और मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड आयोग ने भी भारतीयों की भागीदारी के लिए सिफारिशें की थीं। बहरहाल ली आयोग ने सिफारिश की कि भारतीय प्रशासनिक सेवा में 40 फीसदी ब्रिटिश, 40 फीसदी भारतीय सीधे और 20 फीसदी स्थान प्रादेशिक सेवाओं से प्रोन्नति देकर लाए गए अफसरों को दिए जाएं। ली आयोग ने भरती के लिए एक लोक सेवा आयोग बनाने की सिफारिश भी की। इसके बाद सन 1926 में संघ लोकसेवा आयोग की स्थापना हुई। स्वतंत्रता के बाद संविधान सभा ने अनुच्छेद 315 के तहत इसे एक स्वायत्त संस्था के रूप में संविधान में स्थान भी दिया।
भारत का पहला विश्वविद्यालय?
प्राचीन भारत के तक्षशिला और नालन्दा विश्वविद्यालय दुनिया के प्राचीनतम विश्वविद्यालय हैं।  पर आधुनिक विश्वविद्यालयों के अर्थ में भारत का पहला विश्वविद्यालय कोलकाता में खुला। इसकी स्थापना 24 जनवरी 1857 को हुई। उसी साल मद्रास और मुम्बई की प्रेसीडेंसियों में भी विश्वविद्यालय खुले थे। कोलकाता विश्वविद्यालय से जुड़े चार विद्वानों को नोबेल पुरस्कार मिल चुके हैं। इनके नाम हैं-रोनाल्ड रॉस, रवीन्द्र नाथ ठाकुर, सीवी रामन और अमर्त्य सेन।


प्याज सबसे पहले कहाँ उगाया गया?


प्याज को 4,000 साल पहले अफगानिस्तान, उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान के इलाके में उगाया गया। भारत में इसका आगमन सम्भवतः मुसलमानों के आगमन के काफी पहले हो चुका था। प्राचीन भारतीय चिकित्सकों चरक, वाग्भट्ट और सुश्रुत ने इसके चिकित्सकीय गुणों का वर्णन किया है, पर इसे सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा गया। इसका कारण शायद इसकी गंध थी। सन 629 से 645 के बीच भारत यात्रा पर आए चीनी यात्री ह्वेनत्सांग ने लिखा है कि भारत में कई जगह उन्होंने देखा कि प्याज खाने वाले को शहर में आने नहीं देते थे। तीखी गंध के कारण लम्बे समय तक अंग्रेजों को भी प्याज पसंद नहीं आया।सन 1350 में फैली प्लेग के दौरान देखा गया कि प्याज के व्यापारी बीमारी से बचे रहे। इसके बाद अंग्रेजों ने प्याज को स्वीकार किया। 
फास्टैग (FASTag) क्या है?
फास्टैग भारत का इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है। इसका संचालन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) करता है। यह प्रणाली रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडैंटिफ़िकेशन (आरएफआईडी) तकनीक पर काम करती है। इसमें प्रीपेड या सेविंग्स एकाउंट से भुगतान स्वतः हो जाता है। इस सिस्टम की शुरुआत 4 नवम्बर 2014 में अहमदाबाद और मुम्बई के बीच स्वर्ण चतुर्भुज राजमार्ग पर हुई थी। जुलाई 2015 में चेन्नई-बेंगलुरु राजमार्ग के टोल प्लाजा इसके सहारे भुगतान को स्वीकार करने लगे। इस वक्त देश के 400 से ऊपर टोल प्लाजा फास्टैग भुगतान को स्वीकार कर रहे हैं। दिसम्बर, 2017 के बाद से देश के सभी नए चारपहिया वाहनों में फास्टैग अनिवार्य है। जनवरी, 2019 में सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन ऑयल कम्पनी, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अपने पेट्रोल पम्पों पर फास्टैग का इस्तेमाल करने के एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।
सिक्योरिटी चेक के एक्स-रे स्कैनर
ये एक्स-रे मशीनें स्वास्थ्य की जाँच करने वाली एक्स-रे मशीनों से फर्क होती हैं। ये मशीनें कई तरह की चीजों की अलग-अलग पहचान के लिए बनाई जाती हैं, केवल हड्डियों की पहचान के लिए नहीं। सिद्धांततः सभी एक्स तरंगें एक तरह की नहीं होतीं। इन मशीनों में कई तरह के एनर्जी लेवल की तरंगे छोड़ी जाती हैं। जैविक वस्तुएं कम ऊर्जा वाली तरंगों को रोकती हैं, प्लास्टिक और धातु की वस्तुएं अलग-अलग तरह की तरंगों को रोकती हैं। सामान जब इस मशीन के भीतर से गुजरता है तो कई तरह के फिल्टरों के मार्फत उसकी एक्स-रे तस्वीर बनती है, जिससे पता लग जाता है कि भीतर क्या है?
क्या शहद को हज़ार साल तक रखा जा सकता है?
मेरी जानकारी में शहद की एक्सपायरी डेट नहीं होती। इसका रूप परिवर्तन हो सकता है। मसलन ठंड पड़ने पर यह जम सकता है, हालांकि यह जल्दी जमता भी नहीं है, बल्कि ठंड पड़ने पर गाढ़ा होता जाता है। एक तापमान के बाद इसमें क्रिस्टल बनने लगते हैं। खाने वाली वस्तुओं में संभवतः यह सबसे दीर्घजीवी है। इसका कारण है इसमें पानी की मात्रा का बेहद कम होना। इसमें अम्लीय पीएच स्तर इतना होता है कि इसमें बैक्टीरिया का विकास नहीं हो पाता। दुनिया में पाँच हजार साल पुराने शहद के अंश भी मिले हैं। संभव है लंबे समय तक रहने के बाद पानी की मात्रा होने के कारण इसमें फर्मेंटेशन शुरू हो जाए।






नागरिकता विधेयक क्या है?


भारतीय नागरिकता संशोधन विधेयक 19 जुलाई 2016 को लोकसभा में पेश किया गया था. इसके माध्यम से देश के नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन का प्रस्ताव है. इसके अंतर्गत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यक शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिल सकेगी. इनमें मुसलमान शामिल नहीं होंगे. इस विधेयक में शरणार्थियों को भारत में निवास की अवधि 11 वर्ष से कम करके 6 वर्ष करने का प्रस्ताव भी है. भारतीय जनता पार्टी ने अपने 2014 के घोषणापत्र में यह वायदा किया था. इस विधेयक का भारत के पूर्वोत्तर में विरोध किया जा रहा है, क्योंकि आने वाले ज्यादातर शरणार्थी इन्हीं इलाकों में हैं, जो बांग्लादेश से आए हैं और जिन्हें नागरिकता मिल जाने के बाद वे इस क्षेत्र के निवासी हो जाएंगे. इसका विरोध इस आधार पर भी किया जा रहा है कि इसमें धर्म के धार पर शरणार्थियों में विभेद किया गया है. जुलाई 2016 में पेश होने के बाद विधेयक को अगस्त में संसद की संयुक्त समिति को सौंप दिया गया. समिति ने 7 जनवरी 2019 को इसपर अपनी रिपोर्ट दी, जिसके बाद 8 जनवरी को विधेयक लोकसभा ने पास कर दिया. गत 3 जून 2019 को सोलहवीं लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह विधेयक लैप्स हो गया. अब गत 20 नवंबर को गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में कहा है कि हम इस विधेयक को फिर से पेश करेंगे और पूरे देश में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) भी लागू करेंगे.
एनआरसी क्या है?
नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) भारतीय नागरिकों की सूची है. भारत में असम अकेला राज्य है, जहाँ सन 1951 में इसे जनगणना के बाद तैयार किया गया था. भारत में नागरिकता संघ सरकार की सूची में है, इसलिए एनआरसी से जुड़े सारे कार्य केंद्र सरकार के अधीन होते हैं. यह कार्य देश के रजिस्ट्रार जनरल के अधीन है. सन 1951 में देश के गृह मंत्रालय के निर्देश पर असम के सभी गाँवों, शहरों के निवासियों के नाम और अन्य विवरण इसमें दर्ज किए गए थे. इस एनआरसी को अपडेट करने की जरूरत सन 1985 में हुए असम समझौते को लागू करने की प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे लागू करने के लिए सन 2005 में एक और समझौता हुआ था.
एनआरसी संवर्धन क्यों?
सन 2009 में एक एनजीओ असम पब्लिक वर्क्स ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली कि अवैध नागरिकों के नाम वोटर सूची से हटाए जाएं. यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन में चली. पहले दो ड्राफ्ट जारी होने के बाद इस साल 31 अगस्त को अंतिम रूप से जारी की गई असम की एनआरसी से करीब 19 लाख लोग बाहर रह गए हैं. इसमें उन व्यक्तियों के नाम हैं जो या तो 1951 की सूची में थे, या 24 मार्च 1971 की मध्य रात्रि के पहले असम के निवासी रहे हों. इसके बाहर जो लोग रह गए हैं, उनके पास अभी विकल्प हैं. विदेशी न्यायाधिकरण इसका फैसला करेगा. उसके फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है. अभी यह तय नहीं है कि जिनके नाम इसमें नहीं हैं उनका क्या होगा.

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