Monday, August 31, 2015

सावन के महीने को सावन क्यों कहते हैं?


इस मास की पूर्णमासी श्रवण नक्षत्र से युक्त होती, इसीलिए इसे श्रावण कहते हैं। श्रावण का तद्भव रूप सावन है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर ने समुद्र मंथन से निकले विष का पान श्रावण मास में ही किया था।

पाउडर मिल्क कैसे बनता है?
पाउडर मिल्क सामान्य दूध में से पानी को सोख कर तैयार किया जाता है। यह पूरी तरह दूध है, केवल इसका पानी सुखा दिया गया है। दूध को ज्यादा लम्बे समय तक नहीं रखा जा सकता है। इसकी वजह पानी है। सूखा दूध जल्द खराब नहीं होता। दूध को सुखाने के लिए जो तरीका अपनाया जाता है प्रायः उसके लिए कोडैक्स एलिमेंटेरियस के तहत मानकों का पालन किया जाता है। यह काम भी इंसान ने काफी पहले कर लिया था। तेरहवीं सदी के इटली के व्यापारी मार्को पोलो ने अपने संस्मरणों में लिखा है कि मंगोलिया के तातार लोग धूप में दूध को सुखाकर उसका पेस्ट बना लेते थे। आधुनिक युग में सबसे पहले रूसी विज्ञानी ओसिप क्रिचेवस्की ने सन 1802 में सूखे दूध को पेटेंट कराया था।

अशोक स्तम्भ को राष्ट्रीय चिह्न बनाने का कारण क्या है?
सारनाथ में अशोक ने जो स्तम्भ बनवाया था उसके शीर्ष भाग को सिंह चतुर्मुख कहते हैं। इस मूर्ति में चार शेर पीठ-से-पीठ सटाए खड़े हैं। इसके आधार के मध्य भाग में बने चार सिंह शक्ति, साहस, शौर्य और विश्वास के प्रतीक हैं। आधार पर बने सिंह, हाथी, घोड़ा और वृषभ चार दिशाओं के रक्षक हैं। आधार के बीचों-बीच बना धर्मचक्र गतिशीलता का प्रतीक है। उसे भारत के राष्ट्रीय ध्वज में बीच की सफेद पट्टी में रखा गया है। इन प्रतीकों के कारण उसे राष्ट्रीय चिह्न बनाने के लिए उपयुक्त पाया गया।

ऑपरेशन रूम को ऑपरेशन थिएटर क्यों कहते हैं?
ऑपरेशन रूम अमेरिकी इस्तेमाल है और ऑपरेशन थिएटर ब्रिटिश। इन्हें ऑपरेशन रूम या कक्ष कहना ही बेहतर है, पर इन्हें थिएटर कहने के पीछे बाकायदा प्रदर्शन की व्यवस्था है जो थिएटर का महत्वपूर्ण पक्ष है। मेडिकल कॉलेजों में छात्रों के सर्जरी से परिचित कराने के लिए ऐसी व्यवस्थाएं की गईं थीं, जिनमें एक गोल थिएटर जैसे मंच के चारों ओर गोल घेरे में बैठने के स्थान बनाए गए। पर मूलतः सन 1884 में जर्मन सर्जन गुस्ताब न्यूबर ने ऑपरेशन के लिए साफ-सुथरी कीटाणु मुक्त व्यवस्था की कल्पना की थी, जिसमें गाउन, कैप, शू कवर तक ऐसे पहनने होते थे, जो डिसइनफैक्टेड होते थे।

किशोर कुमार खुद अच्छे गायक थे और अभिनेता भी। क्या कभी ऐसा हुआ कि उनके लिए किसी दूसरे गायक ने गीत गाया?
मोहम्मद रफी ने पहली बार किशोर कुमार को अपनी आवाज फिल्म 'रागिनी' में उधार दी। गीत था-'मन मोरा बावरा।' दूसरी बार शंकर-जय किशन की फिल्म 'शरारत' में रफी ने किशोर के लिए गाया-'अजब है दास्ताँ तेरी ये जिंदगी।'

दुनिया की सबसे बड़ी जेल कौन सी है? और भारत की सबसे पुरानी जेल कौन सी है?
अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर की जेल रिकर्स आयलैंड दुनिया की सबसे बड़ी जेल है। वस्तुतः यह एक अलग द्वीप ही है।  इसमें 14,000 कैदियों के रहने की व्यवस्था है, जिनकी देख-रेख के लिए 9000 अधिकारी और 1500 सिविलियन कर्मचारी काम करते हैं। इसकी तुलना आप दिल्ली की तिहाड़ जेल से कर सकते हैं, जहाँ 6000 कैदियों के रहने की व्यवस्था है, पर मजबूरी में 12000 के आसपास रहते हैं। जहाँ तक भारत की जेलों का सवाल है, सबसे पुरानी जेल प्राचीन राजाओं के काल में रहीं होंगी। अलबत्ता आज मौजूदा जेलों में सबसे पुरानी चेन्नई की केन्द्रीय जेल है जो सन 1837 में शुरू हुई थी।


राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Thursday, August 27, 2015

रेड कॉर्नर नोटिस का क्या मतलब है? क्या दूसरे रंगों के नोटिस भी होते हैं?

इंटरपोल नोटिस या इंटरनेशनल नोटिस इंटरपोल द्वारा सूचना के आदान-प्रदान की पद्धति है. इंटरपोल आठ प्रकार के नोटिस जारी करता है इनमें सात अपने रंगों से पहचाने जाते हैं. ये रंग हैं लाल, नीला, हरा, पीला, काला, नारंगी और बैंगनी. लाल नोटिस आमतौर पर अपराधी की गिरफ्तारी के लिए होता है. नीला नोटिस किसी व्यक्ति के बारे में अतिरिक्त सूचना देने या पाने के वास्ते. हरा ऐसे व्यक्तियों के बारे में चेतावनी देने के लिए जो अपराध कर चुके हैं. पीला गुमशुदा(आमतौर पर नाबालिगों) के बारे में सूचनाएं देने के लिए. काला किसी लाश की शिनाख्त न होने पर जारी होता है. नारंगी बमों, पार्सल बमों वगैरह की सूचनाएं देने के लिए. बैंगनी नोटिस अपराध के तरीकों, वस्तुओं और तौर-तरीकों की जानकारी देने के लिए जारी होता है. इनके अलावा इंटरपोल-संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद नोटिस उन व्यक्तियों और संस्थाओं को लेकर जारी होता है जिनपर सुरक्षा परिषद पाबंदियाँ लगाती है.

घड़ी का इस्तेमाल कब शुरू हुआ? जब घड़ी नहीं थी तब लोग समय कैसे पता करते थे..?
समय को नापने की ज़रूरत इंसान को हजारों साल पहले समझ में आ गई थी. पहले इंसान ने धूप की मदद से घड़ी बनाई, एक पात्र में रेत भरकर उसकी मदद से समय को दर्ज किया. पर कल पुर्जों के साथ घड़ियाँ सत्रहवीं-अठारहवीं सदी में ही बनीं. 20वीं सदी में घड़ियों का निर्माण पूर्णतया यांत्रिक विधियों से व्यापारिक पैमाने पर होने लगा और यूरोप तथा अमरीका में घड़ी निर्माण उद्योग की गणना प्रमुख उद्योगों में होने लगी. इस अवधि में विद्युत‌ घड़ियाँ, दाब-विद्युत‌ घड़ियाँ (piezzo-electric clocks) इत्यादि अनेक नए प्रकार की घड़ियों का आविष्कार हुआ और अब घड़ी का सर्वाधिक उन्नत रूप, परमाण्वीय घड़ी, भी बनाई जा चुकी है. घड़ी के पुर्जों के निर्माण में स्विट्ज़रलैंड का स्थान विश्व में सर्वप्रथम है और यहाँ की बनी घड़ियाँ सर्वश्रेष्ठ मानी जाती हैं. यहाँ से संसार के प्राय: सभी घड़ी उद्योग केंद्रों में पुर्जों का निर्यात होता है.
घड़ी उद्योग का तीसरा महत्वपूर्ण युग इंगरसोल की क्रांति (सन्‌1892) से प्रारंभ हुआ अब सर्वसाधारण के उपयोग के लिए तथा उसकी क्रय शक्ति के अनुकूल घड़ियों का बहुत बड़े पैमाने पर निर्माण होने लगा. उसके बाद तो विद्युत‌ एवं दाब विद्युत्‌घड़ियों का आविष्कार हो जाने से घड़ी उद्योग में क्रांति का आविर्भाव हुआ. इधर संयुक्त राज्य, अमरीका, के नेशनल ब्यूरो ऑव स्टैंडर्ड्स ने परमाण्वीय घड़ियों के निर्माण की भी सूचना दी है, जिसके शीघ्र ही प्रारंभ होने की आशा है.

दुनिया में सबसे ज्यादा नदियां किस देश में है?
जल सम्पदा के लिहाज से दुनिया में कनाडा सबसे धनी देश है. यहाँ झीलों और नदियों की इतनी बड़ी संख्या है कि किसी और देश में नहीं है. बताते हैं कि देश में छोटी-बड़ी नदियों की संख्या 20 लाख से ज्यादा है. अभी तमाम नदियाँ गुमनाम हैं.

दुनिया की सबसे पुरानी भाषा कौन सी है? पूरी दुनिया में कुल कितनी भाषाएं बोली जाती हैं..?
पुरानी भाषा से दो आशय होते हैं. एक ऐसी भाषा जो थी, पर आज नहीं है और एक आज की जीवित भाषाओं में सबसे पुरानी. पुरानी भाषाओं में सुमेरियन, मिस्री, सिंधु घाटी की भाषा, अक्कादी और तमाम प्राचीन सभ्यताओं से जुड़ी भाषाएं. संस्कृत और तमिल सम्भवतः दुनिया की प्राचीनतम जीवित भाषाएं हैं. इसमें चीनी को भी शामिल कर सकते हैं. इनमें ज्यादा पुरानी भाषा कौन सी है इस पर मतभेद हैं. अमेरिकी संस्था समर इंस्टीट्यूट ऑफ लिंग्विस्टिक्स के अनुसार दुनिया में तकरीबन 7106 भाषाएं बोली जाती हैं.


 ज्यादातर फल गर्मियों में ही आते हैं. ऐसा क्यों?
गर्मी में आने वाले लगभग सभी फल रसीले होते हैं जैसे तरबूज लीची, लुकाट, आड़ू, आलूबुखारा, शहतूत, संतरा, खरबूजा, सेब, खुबानी, आड़ू आदि.  इनके मीठे रस में शरीर को लू से बचाने की अद्भुत क्षमता के कारण ही शायद प्रकृति ने गर्मी में पैदा किया. इसका सबसे बड़ा कारण है सूर्य की रोशनी और गरमाहट. वनस्पति का मूलाधार गर्मी है. आपने देखा होगा सर्दियों में पौधों का बाहरी विकास रुक जाता है. उन दिनों पौधों की जड़ें बढ़ती हैं. 
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

Thursday, August 20, 2015

धन विधेयक और वित्त विधेयक में क्या अंतर होता है?

संविधान के अनुच्छेद 110 मे वर्णित एक या अधिक मामलों से जुड़ा धन विधेयक कहलाता है. ये मामले हैं -किसी कर को लगाना,हटाना, नियमन, धन उधार लेना या कोई वित्तीय जिम्मेदारी जो भारत की संचित निधि से धन की निकासी/जमा करना, संचित निधि से धन का विनियोग, ऐसे व्यय जिन्हें भारत की संचित निधि पर भारित घोषित करना हो, संचित निधि से धन निकालने की स्वीकृति लेना वगैरह. वित्त विधेयक (फाइनेंशियल बिल) वह विधेयक जो एक या अधिक धन विधेयक (मनी बिल) प्रावधानों से पृथक हो तथा गैर मनी मामलों से भी संबंधित हो. जो राजस्व और व्यय से जुड़ा हो सकता है. वित्त विधेयक मे धन प्रावधानों के साथ सामान्य विधायन से जुड़े मामले भी होते है. इस प्रकार के विधेयक को पारित करने की शक्ति दोनों सदनों मे समान होती है.

यदि यह प्रश्न उठता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं तो उस पर लोक सभा अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होगा. धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तावित किए जा सकते हैं. इन्हें पास करने के लिए सदन का सामान्य बहुमत आवश्यक होता है. जब कोई धन बिल लोकसभा पारित करती है तो स्पीकर के प्रमाणन के साथ यह बिल राज्यसभा मे ले जाया जाता है राज्यसभा इस बिल को पारित कर सकती है या 14 दिन के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ लोक सभा को लौटा देगी. उस के बाद लोकसभा इन सिफारिशों को मान भी सकती है और अस्वीकार भी कर सकती है. जिन वित्त विधेयकों को स्पीकर का धन विधेयक का प्रमाणन नहीं मिला होता उनके बारे में अनुच्छेद 117 में व्यवस्थाएं की गईं हैं.

गोलमेज वार्ता क्या होती है?

गोलमेज वार्ता माने जैसा नाम है काफी लोगों की बातचीत, जो एक-दूसरे के आमने-सामने हों. यहाँ पर गोलमेज प्रतीकात्मक है. गोलमेज में ही सब आमने-सामने होते हैं. अंग्रेजी में इसे राउंड टेबल कहते हैं, जिसमें गोल के अलावा यह ध्वनि भी होती है कि मेज पर बैठकर बात करना. यानी किसी प्रश्न को सड़क पर निपटाने के बजाय बैठकर हल करना . अनेक विचारों के व्यक्तियों का एक जगह आना. माना जाता है कि 12 नवम्बर 1930 को जब ब्रिटिश सरकार ने भारत में राजनीतिक सुधारों पर अनेक पक्षों से बातचीत की तो उसे राउंड टेबल कांफ्रेस कहा गया. इस बातचीत के कई दौर हुए थे.

महिला क्रिकेट की शुरूआत कैसे हुई?

हालांकि क्रिकेट के खेल की शुरूआत पुरुषों के खेल के रूप में हुई थी, पर महिलाओं का क्रिकेट भी काफी पुराना है. इतिहास में दर्ज महिलाओं का पहला क्रिकेट मैच 26 जुलाई 1745 को इंग्लैंड के दो गाँवनुमा कस्बों ब्रैम्ले एकादश और हैम्बलडन एकादश के बीच हुआ. महिलाओं का पहला ज्ञात क्लब ह्वाइट हैदर क्लब, यॉर्कशर में बना 1887 में। ऑस्ट्रेलिया में महिला क्रिकेट की लीग प्रतियोगिता 1894 में शुरू हो गई थी. बहरहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिला क्रिकेट बीसवीं सदी में ही लोकप्रिय हो पाया. 1958 में इंटरनेशनल वीमैंस क्रिकेट काउंसिल की स्थापना हुई. पर इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की महिला क्रिकेट टीमों के बीच टेस्ट मैच 1934 में शुरू हो गए थे. उस समय क्रिकेट के नियमन का काम इंग्लैंड की वीमैंस क्रिकेट एसोसिएशन करती थी.

भारत में महिलाओं का क्रिकेट 1848 में पारसी समुदाय के क्रिकेट क्लब की स्थापना के साथ हो गया था. शुरू में उनके मैच यूरोपियन टीमों के साथ होते थे. पहली आधिकारिक क्रिकेट टीम का गठन 1911 में हुआ, जिसने इंग्लैंड का दौरा किया. 1932 में पुरुषों की भारतीय क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ पहला टेस्ट मैच खेला। पर महिलाओं का क्रिकेट आज़ादी के बाद शुरू हुआ है. भारत की वीमैंस क्रिकेट एसोसिएशन 1973 में गठित हुई. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हमारा प्रवेश 1976-77 में हुआ, जब हमारी टीम ने पहली बार वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज़ खेली.

भारत के पहले चुनाव आयुक्त कौन थे?

भारत के पहले चुनाव आयुक्त थे सुकुमार सेन जो 21 मार्च 1950 से लेकर 19 दिसंबर 1958 तक इस पद पर रहे. चुनाव आयोग का काम होता है देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना.

प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

Thursday, August 13, 2015

की-बोर्ड पर अक्षर क्रम से क्यों नहीं होते?

यानी ए के बाद बी फिर सी और फिर डी क्यों नहीं?

की-बोर्ड में अक्षरों को बेतरतीब लगाने का सबसे बड़ा कारण यह है कि वर्णमाला के सारे अक्षरों का समान इस्तेमाल नहीं होता। चूंकि टाइप करने के लिए दोनों हाथों की उंगलियों का इस्तेमाल होता है, इसलिए ऐसी कोशिश की जाती है कि उंगलियों को कम मेहनत करनी पड़े। अंग्रेजी में सबसे ज्यादा क्वर्टी (QWERTY) की-बोर्ड चलता है। यह क्वर्टी की-बोर्ड में अंकों की पंक्ति के नीचे बनी अक्षरों की पहली पंक्ति के पहली छह की हैं। इस की-बोर्ड को सबसे पहले 1874 में अमेरिकी सम्पादक क्रिस्टोफर शोल्स ने पेटेंट कराया जो टाइपराइटर के विकास के काम से भी जुड़े थे। टाइपराइटर कम्पनी रेमिंग्टन ने इस पेटेंट को उसी साल खरीद लिया। तब से अब तक इसमें एकाध बदलाव हुए हैं। यह की-बोर्ड अब दुनिया भर का मानक बन गया है। इसके अलावा भी की-बोर्ड हैं, पर वे विशेष काम के लिए ही इस्तेमाल में आते हैं। कम्प्यूटर के 101/102 की वाले बोर्ड को सन 1982 में मार्क टिडेंस ने तैयार किया। इसमें भी बदलाव हो रहे हैं क्योंकि कम्प्यूटर का इस्तेमाल बदलता जा रहा है। हिन्दी में रेमिंग्टन, फोनेटिक, लिंग्विस्ट, लाइनोटाइप, देवनागरी, इनस्क्रिप्ट नाम से कई की-बोर्ड प्रचलित हैं। इनमें किसी एक के मानक न होने से हिन्दी टाइप करने वालों के सामने दिक्कतें आती हैं।

जेट लैग क्या है?

जेट लैग एक मनो-शारीरिक दशा है, जो शरीर के सर्केडियन रिद्म में बदलाव आने के कारण पैदा होती है। इसे सर्केडियन रिद्म स्लीप डिसॉर्डर भी कहते हैं। इसका कारण लम्बी दूरी की हवाई यात्रा खासतौर से पूर्व से पश्चिम या पश्चिम से पूर्व एक टाइम ज़ोन से दूसरे टाइम ज़ोन की यात्रा होती है। अक्सर शुरुआत में नाइट शिफ्ट पर काम करने आए लोगों के साथ भी ऐसा होता है। आपका सामान्य जीवन एक खास समय के साथ जुड़ा होता है। जब उसमें मूलभूत बदलाव होता है तो शरीर कुछ समय के लिए सामंजस्य नहीं बैठा पाता। अक्सर दो-एक दिन में स्थिति सामान्य हो जाती है। इसमें सिर दर्द, चक्कर आना, उनींदा रहना, थकान जैसी स्थितियाँ पैदा हो जाती है।


आँसू गैस क्या है?

टियर गैस या आँसू गैस ऐसे रसायनों से बनती है जो आँखों की कॉर्नियल नर्व को उत्तेजित करते हैं जिससे आँखों में तेजी से पानी बहने लगे। इन तत्वों को ओसी, सीएस, सीआर, और सीएन यानी फिनेसाइल क्लोराइट कहते हैं। यह आँखों की म्यूकस मैम्ब्रेन को उत्तेजित करने के अलावा, नाक, मुँह और फेफड़ों पर भी असर करती है। इसका उद्देश्य होता है थोड़ी देर के लिए व्यक्ति को परेशान कर देना। आप जानते ही हैं कि इसका इस्तेमाल दंगे-फसाद को नियंत्रण में लाने के लिए होता है। ये तत्व हमारी आंखों, नाक, मुँह और फेफड़ों की झिल्लियों को उत्तेजित करती हैं जिसकी वजह से आंसू निकलने लगते हैं और हम छींकने और खांसने पर मजबूर कर देते हैं।

दुनिया का सबसे छोटा हवाई अड्डा कहाँ है?

कैरीबियन सागर के द्वीप सबा का हवाई अड्डा दुनिया का सबसे छोटा हवाई अड्डा माना जाता है। इसका रनवे 400 मीटर लम्बा है। इस हवाई अड्डे पर जेट विमान नहीं उतरते क्योंकि उनके लिए कुछ लम्बा रनवे चाहिए।

भारत की जनसंख्या क्या है?

इस समय हमारी जनसंख्या एक अरब 25 करोड़ से ऊपर है। सन 2011 की जनगणना में हमारी जनसंख्या 1,21,01,93,422 थी।

जंगल, पहाड़ और समंदर की अहमियत तो समझ में आती है। क्या रेगिस्तानों की भी कोई उपयोगिता है? 

रेगिस्तान धरती के ऐसे इलाके हैं, जहाँ नमी नहीं होती, जिसके कारण वनस्पति विकसित नहीं हो पाती। चूंकि नमी कम होती है, इस कारण वहाँ पानी बरसता भी है तो फौरन भाप बनकर उड़ जाता है, इसलिए ज़मीन के नीचे भी पानी नहीं होता। रेगिस्तान ठंडे भी हो सकते हैं और गरम भी। लद्दाख और तिब्बत में ठंडे रेगिस्तान भी हैं। इनका महत्व जलवायु का संतुलन बनाए रखने में है। हमारे देश में उत्तर भारत में होने वाली बारिश के पीछे रेगिस्तानी इलाकों से उठने वाली गर्म हवाएं हैं, जिनकी जगह लेने के लिए पानी से भरी हवाएं दक्षिण पूर्व से आती हैं। 
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

Thursday, August 6, 2015

घड़ी में 12 तक ही क्यों बजते हैं?

हम जानते हैं कि धरती अपनी धुरी पर 24 घंटे में पूरी तरह घूमती है। इस 24 घंटे को हम एक दिन कहते हैं। दिन को हमने 24 घंटों में बाँटा। इन 24 में से आधे में दिन और आधे में रात होती है। इसलिए 12 घंटे की घड़ी होती है। दिन और रात को अंग्रेजी में एएम और पीएम लिखकर हम पहचानते हैं। यों 24 घंटे वाली घड़ियां भी होती हैं। रेलवे की घड़ी में तो 23 और 24 भी बजते हैं।

प्रतिदिन कितने सोडियम की मात्रा खाने में शामिल करनी चाहिए?

सामान्य नमक का रासायनिक नाम सोडियम क्लोराइड होता है. ढाई ग्राम नमक में तकरीबन एक ग्राम सोडियम होता है. नमक स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी भी है, पर उसकी अधिकता नुकसानदेह होती है. सोडियम शरीर में विभिन्न तरल पदार्थों के स्तर को नियंत्रित करता है जो हमारे शरीर में रक्त का निर्माण करते हैं, लेकिन हमारे भोजन में प्राकृतिक रूप से भी नमक काफी पाया जाता है. खाद्य पदार्थ बनाने वाली कम्पनियां आजकल 75 प्रतिशत नमक युक्त खाद्य पदार्थ बनाती हैं. फूड को जितना प्रोसेस्ड किया जाता है, उसमें उतनी ही नमक की मात्रा बढ़ती जाती है. भले ही प्रोसेस्ड फूड खाने में नमकीन न लगें, लेकिन उनमें सोडियम काफी मात्रा में होता है. नमक शरीर के नर्वस सिस्टम और मांसपेशियों में विद्युतीय आवेगों पर नियंत्रण रखता है व शरीर को छोटी आंत से जो पोषक तत्व मिलते हैं, उन्हें सोखने में मदद करता है. कोशिकाओं के बाहर जो द्रव होता है, उसकी मात्रा को बनाए रखता है. इस वजह से ब्लड प्रेशर ठीक रहता है. अत्यधिक नमक के सेवन से ऑस्टियोपोरिसस हो सकता है. हाई ब्लड प्रेशर भी हो सकता है. हमें दिनभर में केवल लगभग 5या 6 ग्राम नमक की जरूरत होती है, यानी तकरीबन दो ग्राम सोडियम की. लेकिन हम इससे कहीं ज्यादा नमक खाते हैं. गरमियों और बरसात के उमस भरे मौसम में पसीना बहुत आता है, इसलिए इसकी मात्रा बढ़ा कर 5-8 ग्राम कर देनी चाहिए.

दुनिया में ऐसे कितने देश हैं जहां डेमोक्रेसी नहीं है ?
घना, म्यांमार और वैटिकन सिटी किसी न किसी रूप में लोकतंत्र की परिधि से बाहर के देश हैं। इसके अलावा सउदी अरब, जॉर्डन मोरक्को, भूटान, ब्रूनेई, कुवैत, यूएई, मोरक्को, बहरीन, ओमान, कतर,स्वाज़ीलैंड में राजतंत्र है। इन देशों में लोकतांत्रिक संस्थाएं भी काम करती हैं। नेपाल में कुछ साल पहले तक राजतंत्र था, पर अब वहाँ लोकतंत्र है। दुनिया के 200 के आसपास देश हैं, जिनमें से तीस से चालीस के बीच ऐसे देश हैं, जो लोकतंत्र के दायरे से बाहर हैं या उनमें आंशिक लोकतंत्र है। जिन देशों में लोकतंत्र है भी उनमें भी पूरी तरह लोकतंत्र है या नहीं यह बहस का विषय है।

हिम मानव किसे कहते हैं, क्या ये वाकई में होते हैं?
भारत, नेपाल और तिब्बत के दुर्गम तथा निर्जन हिमालयी क्षेत्रों में सैकड़ों वर्षों से रहस्यमय हिम मानव के अस्तित्व को लेकर अनेक किस्से-कहानियां प्रचलित हैं। ‘यति’ नाम से प्रसिद्ध इस कथित हिम मानव को अब तक सैकड़ों लोगों द्वारा देखने का दावा किया जाता रहा है। यति को देखने का दावा करने वालों का कहना है कि शरीर पर काले भूरे घने बालों वाला ये रहस्यमय प्राणी सात से नौ फुट लंबा होता है जो किसी दानव की तरह दिखता है। इसका वजन तक़रीबन दो सौ किलो हो सकता है। इसकी ख़ासियत है कि यह इंसान की तरह दो पैरों पर चलता है। हिम मानव होते हैं या नहीं, हम नहीं कह सकते। ऐसा प्राणी कभी मिला नहीं।

फरवरी में ही सबसे कम दिन क्यों होते हैं? लीप वर्ष न हो तो क्या होगा?
लीप वर्ष का अतिरिक्त दिन 29 फ़रवरी महत्त्वपूर्ण है। इस महीने के लिए ऐसी व्यवस्था करने के पीछे का कारण धरती के सूर्य की परिक्रमा करने से जुड़ा हुआ है। पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर लगाने में 365.242 दिन लगते हैं अर्थात एक कैलेंडर वर्ष से चौथाई दिन अधिक। अतः प्रत्येक चौथे वर्ष कैलेंडर में एक दिन अतिरिक्त जोड़ना पड़ता है। इस बढ़े दिन वाले साल को लीप वर्ष या अधिवर्ष कहते हैं। यह अतिरिक्त दिन ग्रेगोरियन कैलेंडर में लीप वर्ष का 60वाँ दिन बनता है अर्थात 29 फ़रवरी।

यदि 29 फ़रवरी की व्यवस्था न हो तो हम प्रत्येक वर्ष प्रकृति के कैलेंडर से लगभग छह घंटे आगे निकल जाएँगे, यानी एक सदी में 24 दिन आगे। यदि ऐसा हुआ तो मौसम को महीने से जोड़ कर रखना मुश्किल हो जाएगा। यदि लीप वर्ष की व्यवस्था ख़त्म कर दें तो आजकल जिसे मई-जून की सड़ी हुई गर्मी कहते हैं वैसी स्थिति 500 साल बाद दिसंबर में आ जाएगी।

Monday, August 3, 2015

किस देश के लोग सबसे ज्यादा काम करते हैं?

किस देश के लोग सबसे ज्यादा काम करते हैं? और इंडिया में किस शहर के?

इसका हिसाब लगाना काफी मुश्किल है कि किस देश के लोग सबसे ज्यादा मेहनत करते हैं। ऑर्गेनिजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट ने एक सर्वे में काम के औसत घंटों के आधार पर निष्कर्ष निकाला था कि मैक्सिको के लोग सबसे ज्यादा समय काम को देते हैं। स्लोवेनिया (8.15), अमेरिका (8.16), न्यूजीलैंड (8.18), चीन (8.24), ऑस्ट्रिया (8.23), कनाडा (8.37), पुर्तगाल (8.48), जापान (9.00), मैक्सिको (9.54) भारत में एक व्यक्ति का यह औसत 8.1 घंटे का है। भारत के शहरों का डेटा नहीं है, पर दिल्ली, कोलकाता, मुम्बई, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहर इसमें आगे होंगे।

माइक्रोफोन का आविष्कार किसने किया? और माइक्रोवेव का भी?
माइक्रोफोन का आविष्कार पहले टेलीफोन वॉइस ट्रांसमिटर के रूप में हुआ था। इसका श्रेय एमाइल बर्लाइनर को जाता है, जिन्होंने 1876 में इसका आविष्कार किया। माइक्रोफोन का इस्तेमाल टेलीफोन, टेपरिकॉर्डर, कराओके, हियरिंग एड्स, रेडियो, टेलीविज़न, कम्प्यूटर वगैरह-वगैरह में होता है।

माइक्रोवेव से आपका आशय शायद माइक्रोवेव अवन से है। दोनों का कोई रिश्ता नहीं है। बहरहाल सन 1946 में पर्सी स्पेंसर नाम के एक इंजीनियर कोई शोधकार्य कर रहे थे। वे मैग्नेट्रोन पर काम कर रहे थे कि अचानक उनकी जेब में रखी कैंडी पिघल गई। वे उसका कारण समझ नहीं पाए। बाद में उन्होंने पॉपकॉर्न के दाने रखकर देखें वे फूल गए। इसके बाद उन्होंने मैग्नेट्रॉन ट्यूब के पास एक अंडा ले जाकर देखा। थोड़ी देर बाद अंडे के भीतर हलचल होने लगी। और कुछ देर बाद वह पककर फट गया। इसके बाद पर्सी स्पेंसर और उनके साथियों ने निष्कर्ष निकाला कि अंडे के भीतर लो डेंसिटी की माइक्रोवेव इनर्जी बन रही है। सिद्धांत यह बना कि अंडा पक सकता है तो खाना भी पक सकता है। पहला माइक्रोवेव अवन टप्पन नाम की कम्पनी ने 1955 में बाजार में उतारा।

जेनेटिकली मोडिफाइड फूड्स क्या हैं?
जेनेटिकली मोडिफाइड या बायोटेक फूड्स से आशय उस खाद्य सामग्री से है, जिसे उगाने के लिए प्रयुक्त बीजों के डीएनए में बदलाव किया जाता है। यह बदलाव उपज बढ़ाने के अलावा रोगों से लड़ने, खास परिस्थितियों जैसे की ज्यादा पानी या कम पानी में फसल उगाने आदि के काम आता है। हमारे देश में अभी तक इस प्रकार की खाद्य सामग्री की अनुमति नहीं है।

रंगास्वामी नाम किस खेल से जुड़ा है?
भारत में पुरुषों की राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता का नाम है रंगास्वामी कप। पचास के दशक में जब यह प्रतियोगिता मद्रास में शुरू हुई तो यह कप एक समाचार पत्र की ओर से अपने सम्पादक रंगास्वामी की स्मृति में दिया गया।

पत्रकार दिवस क्या होता है?
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 मई को प्रेस की स्वतंत्रता का दिवस घोषित किया है। इसे हम विश्व पत्रकारिता दिवस कहते हैं। इसी तरह 30 मई को हम हिन्दी पत्रकारिता दिवस मनाते हैं क्योंकि 30 मई 1826 को कोलकाता से उदंत मार्तंड का प्रकाशन शुरू हुआ था।

विश्व की सबसे पुरानी मैगज़ीन कौन सी है?
जनवरी सन 1731 में लंदन से प्रकाशित जेंटलमैंस मैगज़ीन को दुनिया की सबसे पुरानी मैगजीन मान सकते हैं। मैगज़ीन शब्द की शुरूआत ही इसने की। यह पत्रिका सन 1922 तक चली। अलबत्ता सन 1939 में प्रकाशित स्कॉट्स मैगज़ीन को दुनिया की ऐसी सबसे पुरानी मैगजीन कह सकते हैं जो आज भी प्रकाशित हो रही है। यह ग्लासगो से प्रकाशित होती है।

Saturday, August 1, 2015

अगस्त क्रांति कब और क्यों हुई थी?

अगस्त क्रांति कब और क्यों हुई थी?
दिव्या कौशिक, द्वारा: आई.जे. कौशिक, चंदन सागर वैल, के.ई.एम. रोड, बीकानेर-334001 (राज.)
महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का एक निर्णायक दौर सन 1942 के अगस्त महीने में शुरू हुआ। इसे ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन’ भी कहते हैं। भारत छोड़ो आन्दोलन 9 अगस्त, 1942 को पूरे देश में शुरू हुआ। भारत को फौरन आज़ादी दिलाने के लिए अंग्रेज़ शासन के विरुद्ध यह बड़ा 'नागरिक अवज्ञा आन्दोलन' था। द्वितीय महायुद्ध के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने भारत के राजनीतिक नेताओं के साथ परामर्श करने और उनका समर्थन प्राप्त करने के उद्देश्य से इंग्लैंड के प्रसिद्ध समाजवादी नेता सर स्टिफ़र्ड क्रिप्स को भारत भेजा। 23 मार्च 1942 को सर स्टिफ़र्ड क्रिप्स दिल्ली आए। उन्होंने कांग्रेस की ओर से मौलाना आजाद और जवाहर लाल नेहरू, मुस्लिम लीग की ओर से मुहम्मद अली जिन्ना और हिंदू महासभा की ओर से विनायक दामोदर सावरकर ने बात की। क्रिप्स ने भारतीय स्वतंत्रता को लेकर कुछ सुझाव भी दिए, किन्तु अंत में उनके सुझाव को सभी भारतीय नेताओं ने नामंजूर कर दिया। कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की मांग की थी परंतु ब्रिटिश सरकार भारत को औपनिवेशिक व्यवस्था के तहत सीमित स्वायत्तता देने पर सहमत थी, उसके लिए भी कोई समय सीमा नहीं थी। इस सुझाव के संदर्भ में महात्मा गांधी ने कहा कि एक ऐसा चेक है जिस  पर आगे की तारीख पड़ी हुई है और वह भी ऐसे बैंक के नाम जिसके दिवालिया होने मे कोई संदेह नहीं।

क्रिप्स मिशन की विफलता के बाद गाँधी जी ने और बड़ा आन्दोलन प्रारम्भ करने का निश्चय ले लिया। इस आन्दोलन को 'भारत छोड़ो आन्दोलन' का नाम दिया गया। 8 अगस्त 1942 को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के मुम्बई सत्र में भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पारित किया गया। आंदोलन की शुरूआत 9 अगस्त को हुई, इसलिए 9 अगस्त के दिन को अगस्त क्रांति दिवस के रूप में जाना जाता है। मुम्बई के जिस पार्क से इस आंदोलन की घोषणा हुई, उसे अगस्त क्रांति मैदान नाम दिया गया है।

संयोग से इस आंदोलन के 17 साल पहले 9 अगस्त को ही भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास की एक और घटना लखनऊ के पास काकोरी रेलवे स्टेशन पर हुई थी। उसे हम काकोरी कांड के नाम से जानते हैं। 9 अगस्त 1925 को क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में क्रांतिकारियों के एक दल ने रेलगाड़ी से सरकारी खजाना लूटा था।

‘हाइवे’ पर टोल-टैक्स देने की शुरुआत कब और क्यों हुई? क्या यह विदेशों में भी प्रचलित है?
मुकेश जैन ‘पारस’  19, प्रथम मंजिल, अबुल फजल रोड, बंगाली मार्केट, नई दिल्ली-110001
दुनिया भर में राज-व्यवस्था सार्वजनिक सेवा के काम करती रहीं हैं। सड़कें बनवाना, परिवहन की व्यवस्था करना, चिकित्सालय और विद्यालय बनवाना रात-कार्य हैं। इन कार्यों के लिए धन की व्यवस्था टैक्स से होती है। सामान्यतः टोल-टैक्स राजमार्गों, पुलों, टनल या नगर सीमा में प्रवेश करने पर लिए जाते हैं। नगरपालिकाएं और स्थानीय निकाय बाहर से आने वाले लोगों से टोल वसूलते हैं। प्रायः पर्यटन स्थलों में टोल वसूला जाता है। कम से कम तीन हजार साल से यह व्यवस्था चल रही है। चाणक्य के अर्थशास्त्र के भाग-2 के अध्याय 21 में नगर के मुख्य द्वार पर बाहर से आने वाले व्यापारियों से शुल्क वसूलने की व्यवस्था का जिक्र है। इसके लिए बाकायदा कर्मचारी नियुक्त किए जाते थे। पर अब हाइवे पर जो टोल वसूला जाता है उसका उद्देश्य सड़क बनाने पर हुए खर्च की भरपाई करना है। अकसर इसकी समय सीमा होती है। 

ज्यादातर प्राचीन सभ्यताओं में इस किस्म के टैक्स का जिक्र मिलता है। यूनानी विचारक अरिस्तू और रोमन लेखक प्लिनी ने पथकर का विवरण दिया है। अलबत्ता आधुनिक यूरोप में औद्योगीकरण के साथ टोलरोड का बिजनेस मॉडल बना। इसमें सड़क बनाने के पहले अनुमान लगा लिया जाता है कि इसकी कीमत किस प्रकार निकल पाएगी। सड़क के व्यावसायिक इस्तेमाल से उसके एक कारोबारी मॉडल बन जाता है। ब्रिटेन में सत्रहवीं सदी के बाद तकरीबन टर्नपाइक ट्रस्ट बनाए गए जो करीब 30,000 मील लम्बी सड़कों का संचालन करते थे। इसका नियमन संसद से बनाए गए कानूनों के तहत होता था। बीसवीं सदी में जाकर इस अवधारणा ने ज़ोर पकड़ा कि इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास आर्थिक विकास के लिए जरूरी है। यह बात हाल के वर्षों में चीन में देखी गई। इंफ्रास्ट्रक्चर में हालांकि रेलवे, बिजली वगैरह की भूमिका है, पर सड़कों का विकास प्राथमिक है। 

श्वेत-पत्र क्या होता है तथा यह कब जारी किया जाता है?
प्रेमलता कुंभार, पत्नी: मंजुल मुकुल वर्मा, पुलिस थाने के पीछे, पुरानी लाइन, पो. ऑ.: गंगाशहर-334401 जिला: बीकानेर (राजस्थान)
श्वेत पत्र का मतलब होता है ऐसा दस्तावेज जिसमें सम्बद्ध विषय से जुड़ी व्यापक जानकारी दी जाती है। इस शब्द की शुरुआत ब्रिटेन से हुई है। सन 1922 में ‘चर्चिल ह्वाइट पेपर’ सम्भवतः पहला श्वेत पत्र था। यह दस्तावेज इस बात की सफाई देने के लिए था कि ब्रिटिश सरकार यहूदियों के लिए फलस्तीन में एक नया देश इसरायल बनाने के लिए 1917 की बालफोर घोषणा को किस तरह अमली जामा पहनाने जा रही है। कनाडा तथा दूसरे अन्य देशों में भी ऐसी परम्परा है। यह जारी करना परिस्थितियों पर निर्भर करता है। सन 1947 में जब कश्मीर पर पाकिस्तानी हमला हुआ था उसके बाद 1948 में भारत सरकार ने एक दस्तावेज जारी करके अपनी तरफ से पूरी स्थिति को स्पष्ट किया था। मई 2012 में भारत सरकार ने काले धन पर और हाल में रेलवे को लेकर श्वेत पत्र जारी किया है। इस बीच अनेक विषयों पर श्वेत पत्र जारी हुए हैं। 

‘डिज़ाइनर बेबी’ क्या है? आईवीएफ तकनीक से यह किस प्रकार भिन्न है?
कुनिका शर्मा, द्वारा: सुरेश कुमार, सी-201, मुरलीधर व्यास कॉलोनी, बीकानेर-334003 (राज.)
डिज़ाइनर बेबी शब्द इन दिनों प्रजनन तकनीक के इस्तेमाल से जन्म लेने वाले शिशु के रंग-रूप, गुण तथा स्वास्थ्य आदि में बदलाव या सुधार के संदर्भ में किया जाता है। चिकित्सा विज्ञान अब इतना विकसित हो रहा है कि चिकित्सक भ्रूण की स्थिति का न केवल अध्ययन कर सकते हैं बल्कि जेनेटिक डिसॉर्डर  को रोक पाने में भी समर्थ हो रहे हैं। यह शब्द मीडिया का दिया हुआ है, इसमें कई प्रकार के नकारात्मक भाव भी छिपे हैं। प्रकारांतर से यह आईवीएफ तकनीक ही है। 
कादम्बिनी के अगस्त 2015 अंक में प्रकाशित