Thursday, January 7, 2016

क्या यह सच है कि शहद को हज़ार साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है?

शहद की एक्सपायरी डेट नहीं होती. इसका रूप परिवर्तन हो सकता है. मसलन ठंड पड़ने पर यह जम सकता है, हालांकि यह जल्दी जमता भी नहीं है, बल्कि ठंड पड़ने पर गाढ़ा होता जाता है. एक तापमान के बाद इसमें क्रिस्टल बनने लगते हैं. खाने वाले वस्तुओं में संभवतः यह सबसे दीर्घजीवी है. इसका कारण है इसमें पानी की मात्रा का बेहद कम होना. इसमें अम्लीय पीएच स्तर इतना होता है कि इसमें बैक्टीरिया का विकास नहीं हो पाता. दुनिया में पाँच हजार साल पुराने शहद के अंश भी मिले हैं. संभव है लंबे समय तक रहने के बाद पानी की मात्रा होने के कारण इसमें फर्मेंटेशन शुरू हो जाए.

क्रिकेट पिच को बनाने में किन बातों को ध्यान में रखा जाता है?
क्रिकेट का पिच बनाते वक्त बुनियादी तौर पर तो यह देखा जाता है कि वह लगातार खेल के बावज़ूद जल्द टूटे नहीं. पिच में दरार पड़ना या धूल पैदा होना अच्छा नहीं माना जाता. अकसर इस पर घास उगाई जाती है. घास अपने नीचे की ज़मीन को जोड़कर रखती है. पर ज्यादा घास से विकेट तेज़ हो जाता है.

भारत के राष्ट्रीय पक्षी, जल जीव, फूल, पेड़, फल, आदि कब घोषित हुए?

राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय गान, राष्ट्रीय पंचांग और राष्ट्रीय प्रतीक के अलावा तमाम अन्य बातों के बारे में औपचारिक निर्णय नहीं हैं. देश का प्रतीक चिह्न चार शेरों वाली प्रतिमा है जो अशोक स्तम्भ के शिखर पर लगी थी. इसके नीचे लिखा है सत्यमेव जयते, जो मुंडक उपनिषद से लिया गया है. इसे हमारे तमाम शासकीय कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है. उसमें स्थित धर्मचक्र हमारे तिरंगे झंडे के बीच में लगाया गया है. भारत सरकार ने यह चिन्ह 26 जनवरी, 1950 को अपनाया. भारत की संविधान सभा ने राष्ट्रीय ध्वज का प्रारूप 22 जुलाई 1947 को अपनाया. राष्ट्रीय गान को संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को अपनाया उसी दिन राष्ट्र गीत वंदे मातरम को भी स्वीकार किया गया.
राष्ट्रीय पंचांग राष्ट्रीय कैलेंडर शक संवत पर आधारित है, चैत्र इसका माह होता है और ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ-साथ 22 मार्च, 1957 से इसे अपनाया. भारत में बाघों की घटती जनसंख्या की जांच करने के लिए अप्रैल 1973 में प्रोजेक्‍ट टाइगर (बाघ परियोजना) शुरू की गई. अब तक इस परियोजना के अधीन 27 बाघ के आरक्षित क्षेत्रों की स्थापना की गई है जिनमें 37, 761 वर्ग किमी क्षेत्र शामिल है.

भारतीय रुपए का प्रतीक चिह्न अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आदान-प्रदान तथा आर्थिक संबल को परिलक्षित कर रहा है. रुपए का चिह्न भारत के लोकाचार का भी एक रूपक है. रुपए का यह नया प्रतीक देवनागरी लिपि के '' और रोमन लिपि के अक्षर 'आर' को मिला कर बना है, जिसमें एक क्षैतिज रेखा भी बनी हुई है. यह रेखा हमारे राष्ट्रध्वज तथा बराबर के चिन्ह को प्रतिबिंबित करती है. भारत सरकार ने 15 जुलाई 2010 को इस चिन्ह को स्वीकार कर लिया है.

सूक्ष्मदर्शी यंत्र क्या है? इसका आविष्कार कब, कैसे और कहाँ हुआ?

सूक्ष्मदर्शी या माइक्रोस्कोप वह यंत्र है जिसकी सहायता से आँख से न दिखने योग्य सूक्ष्म वस्तुओं को भी देखा जा सकता है. सामान्य सूक्ष्मदर्शी ऑप्टिकल माइक्रोस्कोप होता है, जिसमें रोशनी और लैंस की मदद से किसी चीज़ को बड़ा करके देखा जाता है. ऐसा माना जाता है सबसे पहले सन 1610 में इटली के वैज्ञानिक गैलीलियो ने सरल सूक्ष्मदर्शी बनाया. पर इस बात के प्रमाण हैं कि सन 1620 में नीदरलैंड्स में पढ़ने के लिए आतिशी शीशा बनाने वाले दो व्यक्तियों ने सूक्ष्मदर्शी तैयार किए. इनके नाम हैं हैंस लिपरशे (जिन्होंने पहला टेलिस्कोप भी बनाया) और दूसरे हैं जैकैरियस जैनसन. इन्हें भी टेलिस्कोप का आविष्कारक माना जाता है.

इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में प्रकाश के बदले इलेक्ट्रॉन का इस्तेमाल होता है. इलेक्ट्रॉन द्वारा वस्तुओं को प्रकाशित किया जाता है एवं उनका परिवर्धित चित्र बनता है. कुछ इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी वस्तुओं का 20 लाख गुणा बड़ा चित्र बना सकते है. परमाण्विक बल सूक्ष्मदर्शी यंत्र (atomic force microscope, AFM), जिसे scanning force microscope, SFM भी कहा जाता है, एक बेहद छोटी चीजों को यानी नैनोमीटर के अंशों से भी सूक्ष्म स्तर तक दिखा सकता है. एक नैनोमीटर माने एक मीटर का एक अरबवाँ अंश.
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

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