Thursday, March 16, 2017

आकाशीय बिजली क्या होती है?

बादलों में नमी होती है. यह नमी बादलों में जल के बहुत बारीक कणों के रूप में होती है. हवा और जलकणों के बीच घर्षण होता है. घर्षण से बिजली पैदा होती है और जलकण आवेशित हो जाते हैं यानी चार्ज हो जाते हैं. बादलों के कुछ समूह धनात्मक तो कुछ ऋणात्मक आवेशित होते हैं. धनात्मक और ऋणात्मक आवेशित बादल जब एक-दूसरे के समीप आते हैं तो टकराने से अति उच्च शक्ति की बिजली उत्पन्न होती है. इससे दोनों तरह के बादलों के बीच हवा में विद्युत-प्रवाह गतिमान हो जाता है. विद्युत-धारा के प्रवाहित होने से रोशनी की तेज चमक पैदा होती है. आकाश में यह चमक अक्सर दो-तीन किलोमीटर की ऊँचाई पर ही उत्पन्न होती है.
बिजली चमकने के कुछ देर बाद गरज क्यों सुनाई पड़ती है?
वास्तव में हवा में प्रवाहित विद्युत-धारा से बहुत अधिक गरमी पैदा होती है. हवा में गरमी आने से यह अत्यधिक तेजी से फैलती है और इसके लाखों करोड़ अणु आपस में टकराते हैं. इन अणुओं के आपस में टकराने से ही गरज की आवाज उत्पन्न होती है. प्रकाश की गति अधिक होने से बिजली की चमक हमें पहले दिखाई देती है. ध्वनि की गति प्रकाश की गति से कम होने के कारण बादलों की गरज हम तक देर से पहुँचती है.
बिल्ली की चाल क्यों प्रसिद्ध है?
पंजों पर चलने के कारण बिल्लियों की पदचाप काफी हल्की होती है. बिल्लियाँ ही नहीं कुत्ते भी पंजों पर चलते हैं. रीढ़ की हड्डी वाले प्राणियों में शेर, बिल्लियाँ, लोमड़ी, कुत्ते और ज़मीन पर चलने वाले ज्यादातर पक्षी अंगुलचारी होते हैं. इन्हें अंग्रेजी में डिजिटिग्रेड्स कहा जाता है यानी डिजिट या पंजों पर चलने वाले. मनुष्य और भालू प्लैंटीग्रेड यानी पादतलचारी होते हैं. इसी तरह खुरों पर चलने वाले अनगुलेट्स होते हैं. बिल्लियों की बात चली है तो उनके बारे में यह बताना उपयोगी होगा कि उनकी चाल में बला की सफाई होती है. उनमें सिफत होती है कि जिस जगह उसके अगले पैर का पंजा पड़े ठीक उसी जगह उसके पिछले पैर का पंजा गिरता है. उसकी दूसरी खासियत है कि वह अपनी चाल बदल सकती है. वह पेसिंग गेट यानी पदनियमन चाल से भी चल सकती है, जिसमें शरीर के एक तरफ के दोनों पैर एक दिशा में और दूसरे हिस्से के दोनों पैर दूसरी दिशा में चलते हैं. इससे उसकी गति असाधारण रूप से बढ़ जाती है.
गाड़ी या कार में चलते समय हमें चक्कर क्यों आता है?
इसे मोशन सिकनेस या काइनेटोसिस कहते हैं. हमारे दिमाग का जो हिस्सा हमारे चलने-फिरने की व्यवस्था संचालित करता है, उसे वेस्टिब्यूलर सिस्टम कहते हैं. हमारा शरीर जिस गति और तरीके से रोज़ चलता है उसमें बदलाव आने पर मस्तिष्क के वेस्टिब्यूलर सिस्टम के साथ उसका सामंजस्य नहीं बैठ पाता. ऐसा कार में बैठने पर ही नहीं होता. समुद्री जहाज, हवाई जहाज, जाइंट ह्वील में बैठने या किसी बहुत ऊँची जगह से नीचे देखने पर भी होता है. इसके लक्षण हैं चक्कर आना, घबराना, थकान और उल्टी होना. मोशन या यह गति रुकती नहीं तो उल्टी होती है. आमतौर पर उल्टी शरीर की रक्षा व्यवस्था है. जब मतली आती है तो उल्टी होने से मतली रुक जाती है. पर मोशन सिकनेस में उल्टी होने से मतली बंद नहीं होती. वह तभी बंद होती है, जब मोशन रुक जाय. 
भारत में हॉकी की सर्वोच्च संस्था
भारत में लम्बे समय तक हॉकी के खेल के संचालन हेतु अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ नाम की संस्था मान्यता प्राप्त थी. उसका गठन सन 1928 में ग्वालियर में हुआ था. अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ से सम्बद्ध वह दुनिया की पहली गैर-यूरोपीय संस्था थी. इस संस्था को लेकर कई तरह के विवाद खड़े होने के बाद अप्रैल 2008 में इसे भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण भंग कर दिया गया. इसके बाद 20 मई 2009 को हॉकी इंडिया की स्थापना हुई. तबसे देश में हॉकी के संचालन का काम हॉकी इंडिया कर रही है.
भारतीय हॉकी महासंघ के भंग होने के बाद यह मामला अदालतों में गया और करीब ढाई साल तक देश में हॉकी की दो राष्ट्रीय संस्थाएं चलती रहीं. अंततः 25 जुलाई 2011 को भारतीय हॉकी महासंघ और हॉकी इंडिया के बीच एक समझौता हुआ, जिसके अंतर्गत दोनों की एक संयुक्त कार्यकारिणी की स्थापना हुई.
हाल तक नरेंद्र बत्रा इसके अध्यक्ष थे, पर वे अब अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ के अध्यक्ष बन गए हैं. इसके कारण नवम्बर 2016 में मरियम्मा कोशी को हॉकी इंडिया ने अपने नए अध्यक्ष के रूप में चुन लिया. कार्यकारी बोर्ड की 41वीं बैठक में हॉकी इंडिया ने कोशी को नए अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करने की घोषणा की. साथ ही हॉकी इंडिया के महासचिव मोहम्मद मुश्ताक अहमद हॉकी इंडिया लीग यानी एचआईएल के संचालन बोर्ड के अध्यक्ष बनाए गए.
दुनिया के पहले कार्टूनिस्ट कौन थे?
सन 1841 में लंदन से प्रकाशित पत्रिका पंच में सबसे पहले कार्टून छपने शुरू हुए थे. इनमें जॉन लीच के बनाए स्केच प्रमुख थे. पत्रिका के पहले अंक का मुखपृष्ठ आर्किबाल्ड हैनिंग ने डिजाइन किया थ.। जॉन लीच के अलावा रिचर्ड डॉयल, जॉन टेनियल और चार्ल्स कीन के कार्टून भी पत्रिका में छपते थे. उन्हें भी पहले कार्टूनिस्ट मान सकते हैं.
प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

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